UPSC Prelims 2020 Question Paper
Explore the complete solved question paper for UPSC Prelims 2020 featuring 100 solved questions with bilingual (English & Hindi) explanations, official answer key, and subject weightage breakdown.
भारत में, विधिक सेवा प्राधिकरण निम्नलिखित में से किस प्रकार के नागरिकों को निःशुल्क विधिक सेवाएं प्रदान करते हैं?
- 1,00,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाला व्यक्ति
- 2,00,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाला ट्रांसजेंडर
- 3,00,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाला अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का सदस्य
- सभी वरिष्ठ नागरिक
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और हाशिए के समूहों को निःशुल्क विधिक सेवाएं प्रदान करता है। 1,00,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाले व्यक्ति और 2,00,000 रुपये से कम आय वाले ट्रांसजेंडर (दिल्ली जैसे कुछ राज्यों में) पात्र हैं, जबकि OBC के लिए कोई विशिष्ट आय-आधारित प्रावधान नहीं है और वरिष्ठ नागरिकों की पात्रता राज्य-विशिष्ट नियमों पर निर्भर करती है।
✅ कथन 1 – सही: 1,00,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाले व्यक्ति विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत निःशुल्क विधिक सेवाओं के पात्र हैं।
✅ कथन 2 – सही: 2,00,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाले ट्रांसजेंडर को दिल्ली जैसे राज्यों में निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है, हालांकि पूरे भारत में समान रूप से लागू नहीं है।
❌ कथन 3 – गलत: OBC को आय मानदंड के आधार पर निःशुल्क विधिक सेवाएं प्रदान नहीं की जाती हैं; केवल SC/ST सदस्यों के लिए विशिष्ट प्रावधान हैं।
❌ कथन 4 – गलत: सभी वरिष्ठ नागरिक पात्र नहीं हैं; पात्रता राज्य-विशिष्ट नियमों और आय सीमा पर निर्भर करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विधिक सेवा प्राधिकरण और निःशुल्क विधिक सहायता
- कानूनी ढांचा: विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 पात्र नागरिकों को निःशुल्क विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए ढांचा स्थापित करता है।
- पात्र श्रेणियां: महिलाएं और बच्चे, SC/ST सदस्य, औद्योगिक श्रमिक, विकलांग व्यक्ति, सामूहिक आपदाओं के पीड़ित, हिरासत में व्यक्ति, मानव तस्करी के पीड़ित।
- आय मानदंड: सामान्य श्रेणी के 1,00,000 रुपये से कम वार्षिक आय वाले व्यक्ति पात्र हैं।
- ट्रांसजेंडर प्रावधान: दिल्ली जैसे राज्य 2,00,000 रुपये तक की वार्षिक आय वाले ट्रांसजेंडर को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करते हैं।
- वरिष्ठ नागरिक: पात्रता राज्य के अनुसार भिन्न होती है; राज्य द्वारा निर्धारित आय सीमा को पूरा करने तक स्वचालित रूप से पात्र नहीं।
- राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण: प्रत्येक राज्य में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के तहत इन प्रावधानों को लागू करने के लिए अपना प्राधिकरण है।
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत निधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
- MPLADS निधियों का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा आदि के लिए भौतिक अवसंरचना जैसी टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए किया जाना चाहिए।
- प्रत्येक सांसद की निधि का एक निर्दिष्ट हिस्सा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आबादी को लाभान्वित करना चाहिए।
- MPLADS निधियां वार्षिक आधार पर स्वीकृत की जाती हैं और अप्रयुक्त निधियों को अगले वर्षों में आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।
- जिला प्राधिकरण को हर साल कार्यान्वयन के तहत सभी कार्यों में से कम से कम 10% का निरीक्षण करना चाहिए।
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — केवल 1, 2 और 4
MPLADS योजना टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर केंद्रित है, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों के लिए निधियों के आरक्षण को अनिवार्य बनाती है, और कार्यों के जिला-स्तरीय निरीक्षण की आवश्यकता होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि MPLADS निधियां गैर-व्यपगत हैं और उन्हें बाद के वर्षों में आगे बढ़ाया जा सकता है।
✅ कथन 1 – सही: MPLADS निधियों का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामुदायिक सुविधाओं के लिए भौतिक अवसंरचना जैसी टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए किया जाना चाहिए।
✅ कथन 2 – सही: MPLADS आवंटन का कम से कम 15% अनुसूचित जाति आबादी क्षेत्रों के लिए और 7.5% अनुसूचित जनजाति आबादी क्षेत्रों के लिए आवंटित किया जाना चाहिए।
❌ कथन 3 – गलत: MPLADS निधियां गैर-व्यपगत हैं; अप्रयुक्त निधियों को बाद के वर्षों में आगे बढ़ाया जा सकता है।
✅ कथन 4 – सही: जिला प्राधिकरण को हर साल कार्यान्वयन के तहत सभी कार्यों में से कम से कम 10% का निरीक्षण करना चाहिए।
इस्पात स्लैग (Steel slag) निम्नलिखित में से किसके लिए सामग्री हो सकता है?
- सड़क के आधार का निर्माण
- कृषि मिट्टी में सुधार
- सीमेंट का उत्पादन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
इस्पात स्लैग, इस्पात निर्माण का एक उप-उत्पाद है, जिसके निर्माण, कृषि और सीमेंट उत्पादन में अनेक अनुप्रयोग हैं। तीनों कथन इस्पात स्लैग के वैध उपयोगों की सही पहचान करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: इस्पात स्लैग का सड़क आधार निर्माण में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है क्योंकि यह उच्च शक्ति, स्थायित्व, उत्कृष्ट जल निकासी गुणों और लागत-प्रभावशीलता प्रदान करता है।
✅ कथन 2 – सही: इस्पात स्लैग का उपयोग कृषि में मिट्टी संशोधक के रूप में किया जा सकता है जो जल निकासी में सुधार, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान, मिट्टी के pH को ठीक करने और मिट्टी की संरचना को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
✅ कथन 3 – सही: इस्पात स्लैग का उपयोग सीमेंट उत्पादन में चूना पत्थर और अन्य कच्चे माल के आंशिक विकल्प के रूप में किया जा सकता है, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: इस्पात स्लैग का उपयोग
- परिभाषा: इस्पात स्लैग भट्टियों में इस्पात निर्माण के दौरान उत्पन्न एक उप-उत्पाद है, जो मुख्य रूप से कैल्शियम, आयरन, सिलिकॉन और मैग्नीशियम ऑक्साइड से बना होता है।
- सड़क निर्माण: उच्च घर्षण प्रतिरोध और भार वहन क्षमता के कारण डामर कंक्रीट, सड़क आधार सामग्री और रेलवे गिट्टी में समुच्चय के रूप में उपयोग किया जाता है।
- कृषि उपयोग: मिट्टी कंडीशनर के रूप में कार्य करता है, अम्लीय मिट्टी को उदासीन करता है, सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करता है और मिट्टी की पारगम्यता में सुधार करता है।
- सीमेंट उद्योग: सीमेंट उत्पादन में क्लिंकर के 10-15% को प्रतिस्थापित कर सकता है, CO₂ उत्सर्जन और ऊर्जा खपत को कम करता है।
- अन्य अनुप्रयोग: अपशिष्ट जल उपचार, तटीय सुरक्षा संरचनाओं और खनिज ऊन उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है।
- पर्यावरणीय लाभ: लैंडफिल अपशिष्ट को कम करता है, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करता है और इस्पात उद्योग में चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों का समर्थन करता है।
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भारत में न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन के उपयोग का क्या महत्व है?
- ये टीके निमोनिया के साथ-साथ मेनिनजाइटिस और सेप्सिस के विरुद्ध भी प्रभावी हैं।
- ड्रग-प्रतिरोधी जीवाणुओं के विरुद्ध प्रभावी न होने वाले प्रतिजैविकों पर निर्भरता को कम किया जा सकता है।
- इन टीकों का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और ये कोई एलर्जी प्रतिक्रिया उत्पन्न नहीं करते।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1 और 2
न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCVs) भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए द्वारा उत्पन्न कई गंभीर रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं और प्रतिजैविक प्रतिरोध से निपटने में सहायता करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि कोई भी टीका पूर्णतः दुष्प्रभावों या एलर्जी प्रतिक्रियाओं से मुक्त नहीं होता।
✅ कथन 1 – सही: PCVs स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न निमोनिया, मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की झिल्लियों की सूजन), और सेप्सिस (रक्त संक्रमण) के विरुद्ध अत्यधिक प्रभावी हैं।
✅ कथन 2 – सही: PCVs न्यूमोकोकल संक्रमणों को रोककर प्रतिजैविकों पर निर्भरता कम करते हैं, जिससे प्रतिजैविक-प्रतिरोधी जीवाणु उपभेदों की बढ़ती समस्या का समाधान होता है।
❌ कथन 3 – गलत: सभी टीकों की तरह, PCVs हल्के दुष्प्रभाव (इंजेक्शन स्थल पर लालिमा, सूजन, दर्द) और दुर्लभ एलर्जी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकते हैं; कोई भी टीका पूर्णतः दुष्प्रभाव-मुक्त नहीं होता।
📝 संक्षिप्त नोट्स: न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCVs)
- कारक जीव: स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए (न्यूमोकोकस) — 90 से अधिक सीरोटाइप्स वाला एक जीवाणु।
- रोकी जाने वाली बीमारियाँ: निमोनिया, मेनिनजाइटिस, सेप्सिस, ओटाइटिस मीडिया (कान का संक्रमण), और बैक्टेरीमिया।
- टीकों के प्रकार: PCV10 (10 सीरोटाइप्स से सुरक्षा) और PCV13 (13 सीरोटाइप्स से सुरक्षा)।
- भारत का टीकाकरण कार्यक्रम: PCV को 2017 में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में शामिल किया गया; 6, 10, और 14 सप्ताह की आयु में दिया जाता है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव: बाल मृत्यु दर में कमी, न्यूमोकोकल रोगों (5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण) की रोकथाम, और प्रतिजैविक उपयोग में कमी।
- प्रतिजैविक प्रतिरोध: PCVs संक्रमणों को रोककर और प्रतिजैविकों की आवश्यकता घटाकर ड्रग-प्रतिरोधी न्यूमोकोकल उपभेदों से निपटने में सहायता करते हैं।
- सामान्य दुष्प्रभाव: हल्की प्रतिक्रियाएं जैसे बुखार, चिड़चिड़ापन, इंजेक्शन स्थल पर प्रतिक्रियाएं; गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं दुर्लभ हैं लेकिन संभव हैं।
"यह प्रयोग एक समबाहु त्रिभुज की आकृति में संरचना में उड़ान भरने वाले तीन अंतरिक्ष यानों का उपयोग करेगा, जिसकी भुजाएं दस लाख किलोमीटर लंबी हैं, जिसमें अंतरिक्ष यानों के बीच लेजर चमक रहे हैं"। प्रश्न में यह प्रयोग किसको संदर्भित करता है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — इवॉल्व्ड LISA
तीन अंतरिक्ष यानों के समबाहु त्रिभुज संरचना में उड़ान भरने का विवरण, जिसकी भुजाएं दस लाख किलोमीटर लंबी हैं और माप के लिए लेजर का उपयोग करते हैं, विशिष्ट रूप से इवॉल्व्ड लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना (eLISA) मिशन की पहचान करता है। यह एक प्रस्तावित अंतरिक्ष-आधारित गुरुत्वीय तरंग वेधशाला है जो लेजर इंटरफेरोमेट्री का उपयोग करके अंतरिक्ष यानों के बीच की दूरी में सूक्ष्म परिवर्तनों को मापकर निम्न-आवृत्ति गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन की गई है। वॉयजर और न्यू होराइजन्स एकल-अंतरिक्ष यान अन्वेषण मिशन हैं, जबकि LISA पाथफाइंडर केवल eLISA घटकों के परीक्षण के लिए एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक था, पूर्ण मिशन नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: गुरुत्वीय तरंग पहचान मिशन
- LISA (लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना): ESA और NASA द्वारा प्रस्तावित अंतरिक्ष-आधारित गुरुत्वीय तरंग पहचान की मूल अवधारणा।
- इवॉल्व्ड LISA (eLISA): समबाहु त्रिभुज संरचना में तीन अंतरिक्ष यानों के साथ पुनः डिज़ाइन किया गया संस्करण, प्रत्येक ~1 मिलियन किमी द्वारा अलग, गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने के लिए लेजर इंटरफेरोमेट्री का उपयोग करता है।
- LISA पाथफाइंडर (2015-2017): प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन जिसने eLISA के लिए आवश्यक ड्रैग-मुक्त उड़ान और सटीक माप तकनीकों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
- विन्यास: तीन समान अंतरिक्ष यान सटीक संरचना बनाए रखते हैं जबकि गुजरने वाली गुरुत्वीय तरंगों के कारण होने वाले पिकोमीटर (10⁻¹² मीटर) की दूरी परिवर्तनों को मापते हैं।
- लक्ष्य: अति विशाल ब्लैक होल के विलय, द्विआधारी तारा प्रणालियों और प्रारंभिक ब्रह्मांड घटनाओं जैसे स्रोतों से निम्न-आवृत्ति गुरुत्वीय तरंगों (0.1 mHz से 1 Hz) का पता लगाना।
- भू-आधारित समकक्ष: LIGO (लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी) पृथ्वी पर उच्च-आवृत्ति गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाता है।
भारत में, "पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर" (Public Key Infrastructure) शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — डिजिटल सुरक्षा अवसंरचना
पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर (PKI) भारत में विशेष रूप से डिजिटल सुरक्षा अवसंरचना के लिए उपयोग किया जाने वाला एक व्यापक ढांचा है। यह डिजिटल प्रमाणपत्रों, प्रमाणपत्र प्राधिकरणों और क्रिप्टोग्राफिक कुंजी जोड़ों (सार्वजनिक और निजी कुंजी) के माध्यम से सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक संचार और लेनदेन को सक्षम बनाता है, जो डिजिटल डेटा के प्रमाणीकरण, गोपनीयता, अखंडता और अस्वीकरण-रोधी सुनिश्चित करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर (PKI)
- परिभाषा: PKI भूमिकाओं, नीतियों, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और प्रक्रियाओं का एक समूह है जो डिजिटल प्रमाणपत्रों को बनाने, प्रबंधित करने, वितरित करने, उपयोग करने, संग्रहीत करने और रद्द करने तथा सार्वजनिक-कुंजी एन्क्रिप्शन को प्रबंधित करने के लिए आवश्यक है।
- घटक: इसमें प्रमाणपत्र प्राधिकरण (CA), पंजीकरण प्राधिकरण (RA), डिजिटल प्रमाणपत्र, प्रमाणपत्र भंडार और प्रमाणपत्र निरसन सूची (CRL) शामिल हैं।
- कार्य: यह कुंजियों की एक जोड़ी के साथ असममित क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करता है - सार्वजनिक कुंजी (खुले तौर पर साझा) और निजी कुंजी (गुप्त रखी गई) एन्क्रिप्शन और डिजिटल हस्ताक्षर के लिए।
- भारत में अनुप्रयोग: ई-गवर्नेंस पहलों, डिजिटल हस्ताक्षर, सुरक्षित ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग, ई-कॉमर्स और आधार-आधारित प्रमाणीकरण में उपयोग किया जाता है।
- प्रमाणन प्राधिकरणों का नियंत्रक (CCA): IT अधिनियम 2000 के तहत, CCA भारत में प्रमाणन प्राधिकरणों को लाइसेंस देने और विनियमित करने वाला प्राधिकरण है।
- लाभ: डिजिटल संचार और लेनदेन में डेटा गोपनीयता, अखंडता, प्रमाणीकरण और अस्वीकरण-रोधी सुनिश्चित करता है।
कार्बन नैनोट्यूब के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इनका उपयोग मानव शरीर में दवाओं और प्रतिजनों के वाहक के रूप में किया जा सकता है।
- इन्हें मानव शरीर के घायल भाग के लिए कृत्रिम रक्त केशिकाओं में बनाया जा सकता है।
- इनका उपयोग जैव रासायनिक संवेदकों में किया जा सकता है।
- कार्बन नैनोट्यूब जैव निम्नीकरणीय होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1, 3 और 4
कार्बन नैनोट्यूब (CNTs) अद्वितीय गुणों वाली बेलनाकार नैनोसंरचनाएं हैं जो उन्हें दवा वितरण, जैवसंवेदन और कुछ परिस्थितियों में जैव निम्नीकरण सहित जैव चिकित्सा अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनाती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि CNTs को विश्वसनीय रूप से कार्यात्मक कृत्रिम रक्त केशिकाओं में नहीं बनाया जा सकता है—यह अनुप्रयोग प्रयोगात्मक बना हुआ है और इसमें मान्य नैदानिक उपयोग का अभाव है।
✅ कथन 1 – सही: CNTs को दवाओं और प्रतिजनों के साथ कार्यात्मक बनाया जा सकता है, जिससे वे जैविक झिल्लियों को पार करने की क्षमता के कारण मानव शरीर में लक्षित वितरण के लिए प्रभावी वाहक बन जाते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: हालांकि CNTs को ऊतक इंजीनियरिंग स्कैफोल्ड्स में खोजा गया है, इन्हें कार्यात्मक कृत्रिम रक्त केशिकाओं में नहीं बनाया जा सकता क्योंकि इनके लिए सटीक जैविक अनुकूलता, लचीलापन और पारगम्यता की आवश्यकता होती है जो अकेले CNTs दोहरा नहीं सकते।
✅ कथन 3 – सही: CNTs में उच्च सतह-से-आयतन अनुपात और अद्वितीय विद्युत गुण होते हैं, जो उन्हें जैव रासायनिक संवेदकों के लिए आदर्श बनाते हैं जो ग्लूकोज, प्रोटीन और DNA जैसे जैव अणुओं का उच्च संवेदनशीलता के साथ पता लगाते हैं।
✅ कथन 4 – सही: शोध से पता चला है कि CNTs को मानव न्यूट्रोफिल में पाए जाने वाले माइलोपेरोक्सिडेज (MPO) जैसे ऑक्सीडेटिव एंजाइमों द्वारा जैव निम्नीकृत किया जा सकता है, हालांकि जैव निम्नीकरणीयता CNT प्रकार, संरचना और सतह कार्यात्मकीकरण पर निर्भर करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: कार्बन नैनोट्यूब
- संरचना: ग्राफीन की लुढ़की हुई शीटों से बनी बेलनाकार नैनोसंरचनाएं, जिनका व्यास नैनोमीटर में और लंबाई माइक्रोमीटर तक होती है।
- प्रकार: एकल-भित्ति कार्बन नैनोट्यूब (SWCNTs) और बहु-भित्ति कार्बन नैनोट्यूब (MWCNTs)।
- गुण: असाधारण यांत्रिक शक्ति, उच्च विद्युत और तापीय चालकता, उच्च सतह क्षेत्र, और कार्यात्मक बनाए जाने की क्षमता।
- जैव चिकित्सा अनुप्रयोग: दवा वितरण प्रणाली, जीन थेरेपी वाहक, जैवसंवेदक, ऊतक इंजीनियरिंग स्कैफोल्ड्स, और इमेजिंग कंट्रास्ट एजेंट।
- दवा वितरण: चिकित्सीय एजेंटों को ले जाने और विशिष्ट कोशिकाओं को लक्षित करने के लिए कार्यात्मक बनाया जा सकता है, जिससे दवा की प्रभावकारिता में सुधार होता है और दुष्प्रभाव कम होते हैं।
- जैवसंवेदक: उच्च संवेदनशीलता के साथ ग्लूकोज, कोलेस्ट्रॉल, DNA, प्रोटीन और रोगजनकों का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रोकेमिकल और ऑप्टिकल सेंसर में उपयोग किया जाता है।
- जैव निम्नीकरणीयता बहस: कुछ अध्ययन पेरोक्सिडेज द्वारा एंजाइमेटिक निम्नीकरण दिखाते हैं, लेकिन जैव निम्नीकरणीयता CNT संरचना, कार्यात्मकीकरण और पर्यावरणीय परिस्थितियों के साथ भिन्न होती है; जैविक प्रणालियों में स्थिरता एक चिंता का विषय बनी हुई है।
- चुनौतियां: संभावित विषाक्तता, जैव अनुकूलता के मुद्दे, जैविक तरल पदार्थों में एकत्रीकरण, और बड़े पैमाने पर उत्पादन और कार्यात्मकीकरण के लिए मानकीकृत विधियों की कमी।
दृश्य प्रकाश संचार (Visible Light Communication - VLC) प्रौद्योगिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
- VLC विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम तरंगदैर्घ्य 375 से 780 nm का उपयोग करता है।
- VLC को लंबी दूरी के ऑप्टिकल वायरलेस संचार के रूप में जाना जाता है।
- VLC ब्लूटूथ की तुलना में अधिक मात्रा में डेटा तेजी से प्रसारित कर सकता है।
- VLC में कोई विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप नहीं होता है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1, 3 और 4
दृश्य प्रकाश संचार (VLC) एक ऑप्टिकल वायरलेस संचार प्रौद्योगिकी है जो डेटा संचरण के लिए दृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम का उपयोग करती है। कथन 1, 3 और 4 VLC की विशेषताओं का सही वर्णन करते हैं, जबकि कथन 2 इसे लंबी दूरी के संचार के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत करता है।
✅ कथन 1 – सही: VLC दृश्य प्रकाش स्पेक्ट्रम की 375 nm (बैंगनी) से 780 nm (लाल) की सीमा में काम करता है, जो विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के अंतर्गत आता है।
❌ कथन 2 – गलत: VLC एक लघु-दूरी की ऑप्टिकल वायरलेस संचार प्रौद्योगिकी है, जो आमतौर पर एक कमरे या दृष्टि-रेखा क्षेत्रों के भीतर की दूरी तक सीमित होती है, लंबी दूरी का संचार नहीं।
✅ कथन 3 – सही: VLC ब्लूटूथ की तुलना में काफी तेज डेटा संचरण गति प्राप्त कर सकता है, जिसमें ब्लूटूथ के अधिकतम लगभग 50 Mbps की तुलना में कई Gbps तक की संभावित गति होती है।
✅ कथन 4 – सही: चूंकि VLC रेडियो आवृत्तियों के बजाय प्रकाश तरंगों का उपयोग करता है, यह विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप (EMI) उत्पन्न नहीं करता है या इससे प्रभावित नहीं होता है, जो इसे अस्पतालों और विमानों जैसे संवेदनशील वातावरण के लिए उपयुक्त बनाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: दृश्य प्रकाश संचार (VLC)
- प्रौद्योगिकी आधार: मानव आंख को अगोचर तीव्र प्रकाश तीव्रता मॉड्यूलेशन के माध्यम से डेटा संचारित करने के लिए LED बल्बों का उपयोग करता है
- स्पेक्ट्रम सीमा: 375-780 nm तरंगदैर्घ्य (दृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम) में संचालित होता है
- गति: 100 Mbps से लेकर कई Gbps तक की डेटा दरें प्राप्त कर सकता है, जो WiFi और ब्लूटूथ से बहुत तेज है
- सीमा: लघु-दूरी की प्रौद्योगिकी, आमतौर पर दृष्टि-रेखा स्थितियों में 10 मीटर के भीतर प्रभावी
- लाभ: कोई विद्युत चुम्बकीय हस्तक्षेप नहीं, उच्च सुरक्षा (प्रकाश दीवारों को भेद नहीं सकता), ऊर्जा कुशल, मौजूदा LED बुनियादी ढांचे का उपयोग करता है
- सीमाएं: दृष्टि-रेखा की आवश्यकता होती है, परिवेशी प्रकाश से प्रभावित होता है, अपारदर्शी वस्तुओं के माध्यम से काम नहीं कर सकता
- अनुप्रयोग: इनडोर नेविगेशन, पानी के नीचे संचार, संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित डेटा स्थानांतरण, वाहन-से-वाहन संचार
- Li-Fi: एक संबंधित प्रौद्योगिकी जो उच्च गति वायरलेस इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए VLC का उपयोग करती है
पादप और जंतु कोशिकाओं के बीच सामान्य अंतर के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
- पादप कोशिकाओं में सेलुलोज कोशिका भित्ति होती है जबकि जंतु कोशिकाओं में नहीं होती।
- पादप कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली नहीं होती है जबकि जंतु कोशिकाओं में होती है।
- परिपक्व पादप कोशिका में एक बड़ी रिक्तिका होती है जबकि जंतु कोशिका में कई छोटी रिक्तिकाएं होती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1 और 3
यह प्रश्न पादप और जंतु कोशिकाओं के बीच मौलिक संरचनात्मक अंतरों का परीक्षण करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि पादप और जंतु दोनों कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली होती है, जो सभी कोशिकाओं की एक सार्वभौमिक विशेषता है।
✅ कथन 1 – सही: पादप कोशिकाओं में संरचनात्मक सहारे और सुरक्षा के लिए कठोर सेलुलोज कोशिका भित्ति होती है, जबकि जंतु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती और केवल लचीली प्लाज्मा झिल्ली होती है।
❌ कथन 2 – गलत: पादप और जंतु दोनों कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली (कोशिका झिल्ली) होती है; यह सभी जीवित कोशिकाओं में मौजूद एक मौलिक विशेषता है, जो कोशिका के अंदर और बाहर पदार्थों की गति को नियंत्रित करती है।
✅ कथन 3 – सही: परिपक्व पादप कोशिकाओं में आमतौर पर जल, पोषक तत्वों और अपशिष्ट के भंडारण के लिए एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका होती है, जबकि जंतु कोशिकाओं में कई छोटी रिक्तिकाएं होती हैं जो कम प्रमुख होती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पादप बनाम जंतु कोशिकाएं
| विशेषता | पादप कोशिका | जंतु कोशिका |
|---|---|---|
| कोशिका भित्ति | उपस्थित (सेलुलोज से बनी) | अनुपस्थित |
| प्लाज्मा झिल्ली | उपस्थित | उपस्थित |
| रिक्तिकाएं | एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका | कई छोटी रिक्तिकाएं |
| हरितलवक | उपस्थित (प्रकाश संश्लेषण के लिए) | अनुपस्थित |
| आकृति | निश्चित, आयताकार/बहुकोणीय | परिवर्तनशील, आमतौर पर गोल/अनियमित |
| तारककाय | अनुपस्थित (निम्न पादपों को छोड़कर) | उपस्थित |
मानव प्रजनन प्रौद्योगिकी में हाल की प्रगति के संदर्भ में, "प्रोन्यूक्लियर ट्रांसफर" का उपयोग किसके लिए किया जाता है:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — संतानों में माइटोकॉन्ड्रियल रोगों की रोकथाम
प्रोन्यूक्लियर ट्रांसफर एक माइटोकॉन्ड्रियल प्रतिस्थापन चिकित्सा तकनीक है जिसका उपयोग माँ से बच्चे में माइटोकॉन्ड्रियल रोगों के संचरण को रोकने के लिए किया जाता है। इस तकनीक में दोषपूर्ण माइटोकॉन्ड्रिया वाले निषेचित अंडे से प्रोन्यूक्लियाई (संलयन से पहले अंडे और शुक्राणु दोनों के नाभिक) को स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रिया वाले दाता अंडे में स्थानांतरित किया जाता है, जिसके अपने प्रोन्यूक्लियाई हटा दिए गए होते हैं। यह बच्चे को जैविक माता-पिता से परमाणु DNA विरासत में लेने की अनुमति देता है जबकि दाता से स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रियल DNA प्राप्त करता है, जिससे माइटोकॉन्ड्रियल रोगों की रोकथाम होती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: माइटोकॉन्ड्रियल प्रतिस्थापन चिकित्सा
- माइटोकॉन्ड्रिया: परमाणु DNA से अलग अपने स्वयं के DNA (mtDNA) वाले कोशिकीय अंगक; mtDNA में उत्परिवर्तन मांसपेशियों, तंत्रिकाओं, मस्तिष्क और अन्य अंगों को प्रभावित करने वाले वंशानुगत माइटोकॉन्ड्रियल रोग उत्पन्न करते हैं।
- प्रोन्यूक्लियर ट्रांसफर (PNT): दो मुख्य माइटोकॉन्ड्रियल प्रतिस्थापन तकनीकों में से एक; निषेचित अंडे से प्रोन्यूक्लियाई को स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रिया वाले दाता अंडे में स्थानांतरित करना शामिल है।
- मैटरनल स्पिंडल ट्रांसफर (MST): निषेचन से पहले की जाने वाली वैकल्पिक तकनीक; माँ के अंडे से परमाणु DNA को स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रिया वाले दाता अंडे में स्थानांतरित किया जाता है।
- तीन-माता-पिता का बच्चा: परिणामी बच्चे में जैविक माता-पिता से परमाणु DNA और दाता से माइटोकॉन्ड्रियल DNA होता है (कुल DNA का <0.1% योगदान)।
- नैतिक और कानूनी स्थिति: पहली बार यूके में स्वीकृत (2015); सीमित देशों में किया गया; आनुवंशिक संशोधन और जर्मलाइन संपादन के बारे में नैतिक बहस उठाता है।
- अनुप्रयोग: ली सिंड्रोम, MELAS और केर्न्स-सायरे सिंड्रोम जैसे गंभीर माइटोकॉन्ड्रियल रोगों को संतानों में जाने से रोकता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- संभावित माता-पिता के अंडाणु या शुक्राणु उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं में आनुवंशिक परिवर्तन किए जा सकते हैं।
- प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था में जन्म से पूर्व किसी व्यक्ति के जीनोम को संपादित किया जा सकता है।
- मानव प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं को सूअर के भ्रूण में इंजेक्ट किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
जीनोम संपादन और स्टेम सेल प्रौद्योगिकियों से संबंधित तीनों कथन वैज्ञानिक रूप से सही हैं और जैव प्रौद्योगिकी में वर्तमान क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: CRISPR-Cas9 जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके जर्मलाइन जीन संपादन द्वारा जनन कोशिकाओं (अंडाणु या शुक्राणु) में आनुवंशिक परिवर्तन किए जा सकते हैं, जिससे ये संशोधन वंशानुगत बन जाते हैं और भावी पीढ़ियों में संचारित होते हैं।
✅ कथन 2 – सही: जन्म से पूर्व प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था (युग्मनज या ब्लास्टोसिस्ट अवस्था) में जीनोम संपादन किया जा सकता है, जो वंशानुगत रोगों का कारण बनने वाले आनुवंशिक उत्परिवर्तनों को सुधारने की अनुमति देता है।
✅ कथन 3 – सही: मानव प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं (hiPSCs) को सूअर के भ्रूण में इंजेक्ट करके मानव-पशु काइमेरा बनाए जा सकते हैं, यह तकनीक अंग विकास का अध्ययन करने और मानव अंग प्रत्यारोपण की संभावनाओं का पता लगाने के लिए अनुसंधान में उपयोग की जाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जीनोम संपादन और स्टेम सेल प्रौद्योगिकियाँ
- CRISPR-Cas9: एक क्रांतिकारी जीन-संपादन उपकरण जो जीवित जीवों में DNA अनुक्रमों में सटीक संशोधन की अनुमति देता है, जिससे आनुवंशिक दोषों का लक्षित सुधार संभव होता है।
- जर्मलाइन संपादन: जनन कोशिकाओं (अंडाणु, शुक्राणु) या प्रारंभिक भ्रूणों में किए गए संशोधन जो वंशानुगत होते हैं और भावी पीढ़ियों में संचारित होते हैं, जो महत्वपूर्ण नैतिक चिंताएं उठाते हैं।
- सोमैटिक जीन संपादन: गैर-प्रजनन कोशिकाओं में किए गए परिवर्तन जो केवल व्यक्ति को प्रभावित करते हैं और संतानों में संचारित नहीं होते।
- प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाएँ (iPSCs): वयस्क कोशिकाएँ जिन्हें भ्रूणीय जैसी प्लुरिपोटेंट अवस्था में पुनःप्रोग्राम किया जाता है, जो शरीर में किसी भी कोशिका प्रकार में विभेदित होने में सक्षम होती हैं।
- काइमेरा: दो विभिन्न प्रजातियों की कोशिकाओं वाले जीव; मानव-पशु काइमेरा का उपयोग रोग तंत्र और अंग विकास का अध्ययन करने के लिए अनुसंधान में किया जाता है।
- नैतिक चिंताएँ: जर्मलाइन संपादन और काइमेरा अनुसंधान मानव गरिमा, अनपेक्षित परिणामों, पहुँच में समानता और डिजाइनर शिशुओं के निर्माण के बारे में प्रश्न उठाते हैं।
- विनियामक स्थिति: कई देशों ने मनुष्यों में जर्मलाइन संपादन पर प्रतिबंध लगाया है या सख्त नियंत्रण किया है, हालांकि चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए नियंत्रित सेटिंग्स में अनुसंधान जारी है।
"ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह एक सार्वजनिक बहीखाता है जिसका निरीक्षण कोई भी कर सकता है, लेकिन जिसे कोई एकल उपयोगकर्ता नियंत्रित नहीं करता है।
- ब्लॉकचेन की संरचना और डिजाइन ऐसा है कि इसमें सभी डेटा केवल क्रिप्टोकरेंसी के बारे में ही होता है।
- ब्लॉकचेन की बुनियादी विशेषताओं पर निर्भर अनुप्रयोगों को किसी की भी अनुमति के बिना विकसित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — केवल 1 और 3
ब्लॉकचेन एक विकेंद्रीकृत, वितरित बहीखाता प्रौद्योगिकी है जहां डेटा पारदर्शी और सार्वजनिक रूप से निरीक्षण योग्य होता है, फिर भी कोई एकल इकाई नेटवर्क को नियंत्रित नहीं करती है। जबकि ब्लॉकचेन ने क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से प्रसिद्धि प्राप्त की, इसके अनुप्रयोग डिजिटल मुद्राओं से कहीं आगे आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, स्मार्ट अनुबंध, स्वास्थ्य रिकॉर्ड और अन्य क्षेत्रों तक विस्तृत हैं।
✅ कथन 1 – सही: ब्लॉकचेन एक सार्वजनिक, वितरित बहीखाते के रूप में कार्य करता है जिसका कोई भी निरीक्षण कर सकता है, लेकिन यह केंद्रीकृत नियंत्रण के बिना संचालित होता है और नोड्स के नेटवर्क द्वारा बनाए रखा जाता है।
❌ कथन 2 – गलत: ब्लॉकचेन की संरचना केवल क्रिप्टोकरेंसी डेटा तक सीमित नहीं है; यह अनुबंध, पहचान रिकॉर्ड, आपूर्ति श्रृंखला डेटा और मतदान रिकॉर्ड सहित किसी भी प्रकार की डिजिटल जानकारी को रिकॉर्ड और सत्यापित कर सकता है।
✅ कथन 3 – सही: ब्लॉकचेन की ओपन-सोर्स और विकेंद्रीकृत प्रकृति डेवलपर्स को इसकी मुख्य विशेषताओं—पारदर्शिता, अपरिवर्तनीयता और विकेंद्रीकरण—का लाभ उठाते हुए अनुप्रयोग (DApps) बनाने की अनुमति देती है, बिना किसी केंद्रीय प्राधिकरण से अनुमति की आवश्यकता के।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी
- परिभाषा: एक वितरित, विकेंद्रीकृत बहीखाता जो कई कंप्यूटरों पर लेनदेन को इस तरह रिकॉर्ड करता है कि रिकॉर्ड अपरिवर्तनीय और पारदर्शी बन जाते हैं।
- मुख्य विशेषताएं: विकेंद्रीकरण (नियंत्रण का कोई एकल बिंदु नहीं), पारदर्शिता (सार्वजनिक निरीक्षण), अपरिवर्तनीयता (रिकॉर्ड को पूर्वव्यापी रूप से बदला नहीं जा सकता), सुरक्षा (क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग)।
- संरचना: डेटा ब्लॉक में संग्रहीत होता है, प्रत्येक में लेनदेन डेटा, टाइमस्टैम्प और पिछले ब्लॉक का क्रिप्टोग्राफिक हैश होता है, जो एक श्रृंखला बनाता है।
- क्रिप्टोकरेंसी से परे अनुप्रयोग: आपूर्ति श्रृंखला ट्रैकिंग, स्मार्ट अनुबंध, डिजिटल पहचान सत्यापन, स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रबंधन, मतदान प्रणाली, भूमि रजिस्ट्री और बौद्धिक संपदा संरक्षण।
- प्रकार: सार्वजनिक ब्लॉकचेन (अनुमति रहित, जैसे बिटकॉइन), निजी ब्लॉकचेन (अनुमति प्राप्त, प्रतिबंधित पहुंच), और हाइब्रिड ब्लॉकचेन (दोनों का संयोजन)।
- सहमति तंत्र: प्रूफ ऑफ वर्क (PoW), प्रूफ ऑफ स्टेक (PoS), प्रैक्टिकल बीजान्टिन फॉल्ट टॉलरेंस (PBFT), और अन्य लेनदेन वैधता पर नेटवर्क सहमति सुनिश्चित करते हैं।
भारत में, कुछ परमाणु रिएक्टरों को "IAEA सुरक्षा उपायों" के अंतर्गत क्यों रखा जाता है जबकि अन्य को नहीं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — कुछ आयातित यूरेनियम का उपयोग करते हैं और अन्य घरेलू आपूर्ति का
2005 के भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते के तहत भारत के परमाणु रिएक्टरों को नागरिक और रणनीतिक सुविधाओं में विभाजित किया गया है। आयातित यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टरों को IAEA सुरक्षा उपायों के अंतर्गत रखा जाता है ताकि शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जा सके, जैसा कि परमाणु ईंधन आपूर्ति के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौतों द्वारा अनिवार्य है। घरेलू यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टर IAEA सुरक्षा उपायों से बाहर रहते हैं, जिससे भारत को अपने रणनीतिक परमाणु हथियार कार्यक्रम को स्वतंत्र रूप से बनाए रखने की सुविधा मिलती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत का परमाणु कार्यक्रम और IAEA सुरक्षा उपाय
- भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौता (2008): भारत की परमाणु सुविधाओं को नागरिक (IAEA सुरक्षा उपायों के तहत) और सैन्य (सुरक्षा उपायों से बाहर) श्रेणियों में विभाजित किया, NPT पर हस्ताक्षर न करने के बावजूद भारत के परमाणु अलगाव को समाप्त किया।
- IAEA सुरक्षा उपाय: अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था जो यह सत्यापित करती है कि परमाणु सामग्री का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाता है, न कि हथियार कार्यक्रमों में।
- पृथक्करण योजना: भारत ने स्वेच्छा से अपने 22 ऊर्जा रिएक्टरों में से 14 को IAEA सुरक्षा उपायों के तहत रखा, जबकि 8 रिएक्टर और अन्य सुविधाओं को रणनीतिक उद्देश्यों के लिए बाहर रखा।
- आयातित यूरेनियम शर्त: आपूर्तिकर्ता देशों (अमेरिका, रूस, फ्रांस, आदि) के साथ द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार आयातित यूरेनियम या ईंधन का उपयोग करने वाले किसी भी रिएक्टर को IAEA सुरक्षा उपायों के तहत होना चाहिए।
- घरेलू यूरेनियम: भारतीय खानों (झारखंड, आंध्र प्रदेश) से स्वदेशी यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टर सुरक्षा उपायों से बाहर रहते हैं, जो भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम और हथियार क्षमता को संरक्षित करते हैं।
- तीन-चरणीय कार्यक्रम: ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक यूरेनियम (चरण I), प्लूटोनियम ब्रीडर रिएक्टर (चरण II), और थोरियम-U233 चक्र (चरण III) का उपयोग करने वाली भारत की अनूठी परमाणु रणनीति।
- रणनीतिक स्वायत्तता: यह पृथक्करण भारत को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु वाणिज्य और प्रौद्योगिकी तक पहुंच प्राप्त करते हुए अपनी न्यूनतम विश्वसनीय परमाणु निवारक क्षमता बनाए रखने की अनुमति देता है।
विकास की वर्तमान स्थिति के साथ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निम्नलिखित में से किसे प्रभावी रूप से कर सकती है?
- औद्योगिक इकाइयों में बिजली की खपत को कम करना।
- सार्थक लघु कहानियाँ और गीत बनाना।
- रोग निदान।
- टेक्स्ट-टू-स्पीच रूपांतरण।
- विद्युत ऊर्जा का वायरलेस ट्रांसमिशन।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1, 3 और 4
यह प्रश्न आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक अनुप्रयोगों की समझ का परीक्षण करता है। AI स्मार्ट ऑप्टिमाइजेशन के माध्यम से औद्योगिक इकाइयों में बिजली की खपत को प्रभावी रूप से कम कर सकती है, चिकित्सा छवि विश्लेषण के माध्यम से रोगों का निदान कर सकती है, और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण का उपयोग करके टेक्स्ट को स्पीच में बदल सकती है। हालाँकि, वास्तव में सार्थक रचनात्मक सामग्री बनाना और वायरलेस विद्युत ट्रांसमिशन प्रभावी AI क्षमताएँ नहीं हैं।
✅ कथन 1 – सही: AI-संचालित स्वचालन और स्मार्ट सेंसर मांग की भविष्यवाणी करके, उपकरणों के स्वास्थ्य की निगरानी करके, और बिजली की खपत को कम करने के लिए संचालन को वास्तविक समय में समायोजित करके औद्योगिक इकाइयों में ऊर्जा उपयोग को अनुकूलित करते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: इस परीक्षा के समय, AI प्रभावी रूप से सुसंगत कथा संरचना, वास्तविक भावनात्मक गहराई और पैटर्न पुनर्संयोजन से परे रचनात्मक इरादे के साथ वास्तव में सार्थक लघु कहानियाँ और गीत नहीं बना सकती थी।
✅ कथन 3 – सही: AI रोग निदान में अत्यधिक प्रभावी है, विशेष रूप से एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी चिकित्सा इमेजरी का विश्लेषण करके कैंसर, निमोनिया और मधुमेह रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों का उच्च सटीकता के साथ पता लगाने में।
✅ कथन 4 – सही: टेक्स्ट-टू-स्पीच (TTS) रूपांतरण AI का एक परिपक्व और अच्छी तरह से स्थापित अनुप्रयोग है जो लिखित पाठ से मानव-जैसे भाषण को संश्लेषित करने के लिए प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण और न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करता है।
❌ कथन 5 – गलत: विद्युत ऊर्जा का वायरलेस ट्रांसमिशन विद्युत चुम्बकीय प्रेरण या माइक्रोवेव पर आधारित एक भौतिक इंजीनियरिंग प्रक्रिया है, न कि AI अनुप्रयोग। यह भौतिकी और हार्डवेयर डिजाइन का कार्य है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग
- औद्योगिक अनुकूलन: AI मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करके सेंसर से वास्तविक समय के डेटा का विश्लेषण करती है, रखरखाव की आवश्यकताओं की भविष्यवाणी करती है, उत्पादन कार्यक्रम को अनुकूलित करती है, और विनिर्माण और औद्योगिक प्रक्रियाओं में ऊर्जा अपव्यय को कम करती है।
- चिकित्सा निदान: AI-संचालित प्रणालियाँ, विशेष रूप से डीप लर्निंग और कंप्यूटर विजन का उपयोग करते हुए, चिकित्सा छवि विश्लेषण, रोगी डेटा में पैटर्न पहचान, और कैंसर, हृदय रोगों और नेत्र विकारों जैसी स्थितियों के शीघ्र निदान में सहायता करती हैं।
- प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP): टेक्स्ट-टू-स्पीच सिस्टम लिखित पाठ को प्राकृतिक-ध्वनि वाले भाषण में बदलने के लिए न्यूरल नेटवर्क और डीप लर्निंग का उपयोग करते हैं, जो आभासी सहायकों, पहुँच उपकरणों और स्वचालित ग्राहक सेवा में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
- रचनात्मक सामग्री निर्माण: जबकि AI प्रशिक्षण डेटा से सीखे गए पैटर्न के आधार पर पाठ और संगीत उत्पन्न कर सकती है, वास्तविक भावनात्मक गहराई और कथा सुसंगतता के साथ वास्तव में सार्थक रचनात्मक सामग्री बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है और इस परीक्षा के समय इसे प्रभावी AI क्षमता नहीं माना गया था।
- AI की सीमाएँ: वायरलेस पावर ट्रांसमिशन जैसी भौतिक प्रक्रियाएँ विद्युत चुम्बकीय सिद्धांतों और हार्डवेयर इंजीनियरिंग पर निर्भर करती हैं, न कि सॉफ़्टवेयर-आधारित AI एल्गोरिदम पर। AI ऐसी प्रणालियों को अनुकूलित कर सकती है लेकिन स्वयं ट्रांसमिशन नहीं कर सकती।
निम्नलिखित गतिविधियों पर विचार कीजिए:
- फसल के खेत पर कीटनाशकों का छिड़काव करना
- सक्रिय ज्वालामुखियों के क्रेटरों का निरीक्षण करना
- DNA विश्लेषण के लिए व्हेल के फुहारे से सांस के नमूने एकत्र करना
प्रौद्योगिकी के वर्तमान स्तर पर, उपर्युक्त में से कौन-सी गतिविधियाँ ड्रोन का उपयोग करके सफलतापूर्वक की जा सकती हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
उल्लिखित तीनों गतिविधियाँ प्रौद्योगिकी के वर्तमान स्तर पर ड्रोन का उपयोग करके सफलतापूर्वक की जा सकती हैं। ड्रोन ने विभिन्न क्षेत्रों में क्रांति ला दी है, जो खतरनाक, दूरस्थ या मनुष्यों के लिए पहुंचना कठिन वातावरण में सुरक्षित, कुशल और लागत प्रभावी संचालन को सक्षम बनाते हैं।
✅ कथन 1 – सही: कृषि ड्रोन का व्यापक रूप से फसल के खेतों में कीटनाशकों और उर्वरकों के सटीक छिड़काव के लिए उपयोग किया जाता है, जो रासायनिक अपशिष्ट और विषाक्त पदार्थों के मानव संपर्क को कम करता है।
✅ कथन 2 – सही: थर्मल कैमरे और गैस सेंसर से लैस ड्रोन सक्रिय ज्वालामुखी क्रेटरों का निरीक्षण करने के लिए तैनात किए जाते हैं, जो वैज्ञानिकों को मानव जीवन को जोखिम में डाले बिना खतरनाक वातावरण से महत्वपूर्ण डेटा एकत्र करने की अनुमति देते हैं।
✅ कथन 3 – सही: 'स्नॉटबॉट' जैसे विशेष ड्रोन का उपयोग व्हेल के फुहारे (सांस) से उड़ान भरकर DNA, हार्मोन और माइक्रोबायोम सहित जैविक नमूने एकत्र करने के लिए किया जाता है, जो गैर-आक्रामक स्वास्थ्य निगरानी और अनुसंधान के लिए है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ड्रोन (UAV) के अनुप्रयोग
- कृषि: कीटनाशकों/उर्वरकों का सटीक छिड़काव, फसल निगरानी, मिट्टी विश्लेषण और सिंचाई प्रबंधन
- पर्यावरण अनुसंधान: ज्वालामुखी निगरानी, वन्यजीव ट्रैकिंग, वन की आग का पता लगाना और वायु गुणवत्ता मूल्यांकन
- समुद्री जीव विज्ञान: सांस के नमूने संग्रह के माध्यम से व्हेल स्वास्थ्य निगरानी, समुद्री स्तनधारी सर्वेक्षण और कोरल रीफ मैपिंग
- आपदा प्रबंधन: खोज और बचाव अभियान, क्षति मूल्यांकन और आपातकालीन आपूर्ति वितरण
- बुनियादी ढांचा: पुलों, बिजली लाइनों, पाइपलाइनों और ऊंची संरचनाओं का निरीक्षण
- डिलीवरी सेवाएं: चिकित्सा आपूर्ति, ई-कॉमर्स पार्सल और दूरस्थ क्षेत्रों में भोजन वितरण
- रक्षा और सुरक्षा: निगरानी, टोही, सीमा गश्त और सामरिक अभियान
गांधी-इरविन समझौते में निम्नलिखित में से क्या शामिल था?
- गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए कांग्रेस को आमंत्रण
- सविनय अवज्ञा आंदोलन के संबंध में जारी अध्यादेशों की वापसी
- पुलिस ज्यादतियों की जांच के लिए गांधीजी के सुझाव की स्वीकृति
- केवल उन कैदियों की रिहाई जिन पर हिंसा का आरोप नहीं था
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1, 2 और 4
गांधी-इरविन समझौता (मार्च 1931) महात्मा गांधी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच एक ऐतिहासिक समझौता था जिसके कारण सविनय अवज्ञा आंदोलन को निलंबित कर दिया गया। इस समझौते में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस की भागीदारी, अध्यादेशों की वापसी और अहिंसक राजनीतिक कैदियों की रिहाई शामिल थी, लेकिन पुलिस ज्यादतियों की जांच के लिए गांधी की मांग को स्वीकार नहीं किया गया।
✅ कथन 1 – सही: समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को लंदन में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित करने पर सहमति जताई।
✅ कथन 2 – सही: समझौते में सविनय अवज्ञा आंदोलन के संबंध में जारी दमनकारी अध्यादेशों की वापसी का प्रावधान किया गया।
❌ कथन 3 – गलत: यद्यपि गांधी ने बातचीत के दौरान पुलिस ज्यादतियों का मुद्दा उठाया, ब्रिटिश सरकार ने पुलिस क्रूरता की जांच के लिए उनके सुझाव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिससे यह विवाद का विषय बन गया।
✅ कथन 4 – सही: समझौते में सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार राजनीतिक कैदियों की रिहाई का प्रावधान था, सिवाय उनके जिन्हें हिंसा के लिए दोषी ठहराया गया था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च, 1931)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| अन्य नाम | दिल्ली समझौता |
| पक्षकार | महात्मा गांधी और वायसराय लॉर्ड इरविन |
| मुख्य प्रावधान |
|
| ब्रिटिश इनकार |
|
| महत्व | कांग्रेस और ब्रिटिश सरकार के बीच समान स्तर पर पहला द्विपक्षीय समझौता; हालांकि, सीमित लाभों के लिए आलोचना की गई |
| परिणाम | गांधी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लिया लेकिन यह विफल रहा; सविनय अवज्ञा आंदोलन 1932 में फिर से शुरू हुआ |
भारत के इतिहास के संदर्भ में, उलगुलान या महान उथल-पुथल निम्नलिखित में से किस घटना का विवरण है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — बिरसा मुंडा का 1899-1900 का विद्रोह
"उलगुलान" शब्द जिसका अर्थ है "महान उथल-पुथल", विशेष रूप से छोटानागपुर क्षेत्र की मुंडा जनजातियों के बीच 1899-1900 के दौरान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में हुए विद्रोह को संदर्भित करता है। यह विद्रोह ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन और शोषणकारी जागीरदारी प्रणाली के खिलाफ था, जिसने मुंडाओं की पारंपरिक सामूहिक भूमि स्वामित्व प्रणाली को नष्ट कर दिया था। बिरसा मुंडा ने "अबुआ राज सेतेर जाना, महारानी राज टुंडु जाना" (रानी का राज समाप्त हो और हमारा राज स्थापित हो) की घोषणा की, जिससे यह स्वशासन और आदिवासी अधिकारों की बहाली का आंदोलन बन गया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में प्रमुख आदिवासी विद्रोह
| विद्रोह | वर्ष | नेता | क्षेत्र | प्रमुख विशेषताएं |
|---|---|---|---|---|
| उलगुलान (महान उथल-पुथल) | 1899-1900 | बिरसा मुंडा | छोटानागपुर (झारखंड) | ब्रिटिश और जागीरदारी प्रणाली के विरुद्ध; मुंडा राज की घोषणा |
| संथाल विद्रोह | 1855-56 | सिद्धू-कान्हू | राजमहल पहाड़ियां (बिहार-बंगाल) | जमींदारों और साहूकारों के विरुद्ध |
| कोल विद्रोह | 1831-32 | बुद्धो भगत | छोटानागपुर | बाहरी लोगों को भूमि हस्तांतरण के विरुद्ध |
| खोंड विद्रोह | 1846-55 | चक्र बिसोई | ओडिशा पहाड़ियां | नरबलि दमन और भूमि अलगाव के विरुद्ध |
| रम्पा विद्रोह | 1922-24 | अल्लूरी सीताराम राजू | आंध्र प्रदेश | वन कानूनों और बेगार के विरुद्ध |
वेलेजली ने कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की क्योंकि
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — वह भारत में प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए ब्रिटिश नागरिकों को प्रशिक्षित करना चाहते थे
लॉर्ड वेलेजली ने 1800 में कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना मुख्य रूप से युवा ब्रिटिश सिविल सेवकों को भारतीय भाषाओं, रीति-रिवाजों और प्रशासनिक प्रथाओं में प्रशिक्षित करने के लिए की थी। कॉलेज का उद्देश्य अच्छी तरह से प्रशिक्षित प्रशासकों का एक संवर्ग तैयार करना था जो भारत में ब्रिटिश क्षेत्रों को प्रभावी ढंग से शासित कर सकें, क्योंकि वेलेजली लंदन में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा प्रदान किए जा रहे प्रशिक्षण से असंतुष्ट थे।
📝 संक्षिप्त नोट्स: फोर्ट विलियम कॉलेज
- स्थापना: 1800 में लॉर्ड वेलेजली (गवर्नर-जनरल, 1798-1805) द्वारा कलकत्ता में
- प्राथमिक उद्देश्य: भारतीय भाषाओं (फारसी, अरबी, संस्कृत, बंगाली, हिंदी), रीति-रिवाजों, कानूनों और प्रशासनिक प्रथाओं में ब्रिटिश सिविल सेवकों को प्रशिक्षण देना
- पृष्ठभूमि: वेलेजली का मानना था कि लंदन में कंपनी का हेलीबरी कॉलेज भारतीय प्रशासन के लिए अपर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान करता था
- पाठ्यक्रम: प्राच्य भाषाएँ, भारतीय इतिहास, संस्कृति, कानूनी प्रणालियाँ और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ
- विरोध: लंदन में निदेशक मंडल ने उच्च खर्चों के कारण इसका विरोध किया और विकल्प के रूप में हेलीबरी कॉलेज (1806) की स्थापना की
- बाद की स्थिति: फोर्ट विलियम कॉलेज जारी रहा लेकिन 1854 के बाद मुख्य रूप से एक भाषा स्कूल तक सीमित हो गया
- महत्व: प्राच्य अध्ययन को बढ़ावा दिया और एक पेशेवर सिविल सेवा बनाने में मदद की, हालांकि इसने औपनिवेशिक प्रशासनिक हितों की भी सेवा की
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान साखाराम गणेश देउस्कर द्वारा लिखित पुस्तक "देशेर कथा" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
- इसने औपनिवेशिक राज्य की मन की सम्मोहक विजय के विरुद्ध चेतावनी दी।
- इसने स्वदेशी नुक्कड़ नाटकों और लोक गीतों के प्रदर्शन को प्रेरित किया।
- देउस्कर द्वारा 'देश' का प्रयोग बंगाल क्षेत्र के विशिष्ट संदर्भ में था।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
साखाराम गणेश देउस्कर की "देशेर कथा" (1904) स्वदेशी आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण रचना थी जिसने ब्रिटिश औपनिवेशिक शोषण की आलोचना की और राष्ट्रवादी चेतना को प्रेरित किया। कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 'देश' के दायरे के संबंध में गलत है।
✅ कथन 1 – सही: पुस्तक ने औपनिवेशिक राज्य की मनोवैज्ञानिक विजय और मानसिक अधीनता के विरुद्ध चेतावनी दी, आर्थिक शोषण को उजागर किया और भारतीयों से ब्रिटिश साम्राज्यवादी मंसूबों को पहचानने का आग्रह किया।
✅ कथन 2 – सही: देउस्कर के भावुक राष्ट्रवादी लेखन ने नुक्कड़ नाटकों, लोक गीतों और लोकप्रिय रंगमंच सहित स्वदेशी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रेरित किया जिन्होंने जनता के बीच राष्ट्रवादी विचारों को फैलाया।
❌ कथन 3 – गलत: देउस्कर ने 'देश' का प्रयोग भारत के व्यापक संदर्भ में राष्ट्र के रूप में किया, न कि विशेष रूप से बंगाल के लिए; हालांकि बांग्ला में लिखी गई थी, पुस्तक ने अखिल भारतीय चिंताओं और राष्ट्रीय चेतना को संबोधित किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: देशेर कथा और प्रारंभिक राष्ट्रवादी साहित्य
- लेखक: साखाराम गणेश देउस्कर (1869-1912), एक महाराष्ट्रीयन जो बंगाल में बड़े हुए और दोनों क्षेत्रों के पुनर्जागरण आंदोलनों को जोड़ा।
- प्रकाशन: 1904 में बांग्ला में लिखित, स्वदेशी आंदोलन की ऊंचाई के दौरान और बंगाल विभाजन से पहले।
- विषयवस्तु: ब्रिटिश आर्थिक निष्कासन का भंडाफोड़, औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली की आलोचना, और मानसिक उपनिवेशीकरण के विरुद्ध चेतावनी; ब्रिटिश शासन के तहत भारत की दरिद्रता के सांख्यिकीय साक्ष्य प्रस्तुत किए।
- प्रभाव: प्रारंभिक राष्ट्रवाद के सबसे प्रभावशाली ग्रंथों में से एक बन गया; स्वदेशी सक्रियता, सांस्कृतिक प्रदर्शन और जनता के बीच राष्ट्रवादी चेतना को प्रेरित किया।
- सांस्कृतिक महत्व: पुस्तक ने क्षेत्रीय भाषाओं में राष्ट्रवादी साहित्य के विकास में योगदान दिया और क्षेत्रीय पहचान से परे एकीकृत अवधारणा के रूप में 'देश' (राष्ट्र) के उपयोग को बढ़ावा दिया।
विटल-विध्वंसक, पहली मासिक पत्रिका जिसका लक्षित दर्शक अस्पृश्य लोग थे, किसके द्वारा प्रकाशित की गई थी?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — गोपाल बाबा वलंगकर
गोपाल बाबा वलंगकर ने 1888 में मासिक पत्रिका विटल-विध्वंसक (ब्राह्मणवादी या कर्मकांडीय प्रदूषण का विनाशक) प्रकाशित की, जो विशेष रूप से अस्पृश्य समुदायों को लक्षित करने वाली पहली पत्रिका थी। वह एक अग्रणी समाज सुधारक थे जिन्होंने इस पत्रिका और अन्य प्रकाशनों के माध्यम से अपने लेखन द्वारा जाति भेदभाव को संबोधित किया और दलितों के अधिकारों और गरिमा के बारे में चेतना जागृत की।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रारंभिक दलित सामाजिक सुधार आंदोलन
- गोपाल बाबा वलंगकर (1840-1900): दलित समुदाय से पहले बौद्धिक विद्रोही जिन्होंने जाति व्यवस्था की व्यवस्थित आलोचना शुरू की; महाराष्ट्र में दलित सक्रियता के अग्रदूत माने जाते हैं।
- विटल-विध्वंसक (1888): मासिक पत्रिका जिसका अर्थ है 'कर्मकांडीय प्रदूषण का विनाशक'; अस्पृश्य दर्शकों को लक्षित करने वाला पहला प्रकाशन; सामाजिक चेतना जागृत करने का उद्देश्य।
- विटल विदुवनसन (1889): 26 प्रश्नों वाली पुस्तिका जो महाराष्ट्रीयन अभिजात वर्ग को संबोधित थी, समाज में अस्पृश्यों की स्थिति के विरुद्ध विरोध।
- वलंगकर की विचारधारा: हिंदू ग्रंथों को पढ़कर निष्कर्ष निकाला कि जाति की रचना आर्य आक्रमणकारियों द्वारा स्वदेशी अनार्य लोगों को नियंत्रित करने के लिए की गई थी।
- अन्य योगदान: सुधारक और दीनबंधु जैसे मराठी समाचार पत्रों के लिए लेख लिखे; जनता के लिए प्रेरणादायक मराठी दोहे रचे।
- ऐतिहासिक महत्व: ज्योतिबा फुले और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर जैसे नेताओं द्वारा बाद के दलित आंदोलनों की नींव रखी।
UPSC Prelims 2020 Questions Paper - Subject-wise Question Distribution
UPSC Prelims 2020 Question Paper - FAQs & Analysis
Q1 How many total questions were asked in UPSC Prelims 2020?
Q2 What is the subject-wise question breakdown for UPSC Prelims 2020?
- भारतीय अर्थव्यवस्था: 23 questions (23%)
- पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी: 19 questions (19%)
- भारतीय राजव्यवस्था: 17 questions (17%)
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: 13 questions (13%)
- आधुनिक इतिहास: 9 questions (9%)
- प्राचीन इतिहास: 8 questions (8%)
- विश्व भूगोल: 4 questions (4%)
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: 3 questions (3%)
- मध्यकालीन इतिहास: 2 questions (2%)
- भारत का भूगोल: 2 questions (2%)