UPSC Prelims 2020
भारत का भूगोल Previous Year Questions (PYQs)
Explore 2 solved UPSC Prelims 2020 भारत का भूगोल questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
सियाचिन ग्लेशियर कहाँ स्थित है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — नुब्रा घाटी के उत्तर में
सियाचिन ग्लेशियर हिमालय की पूर्वी काराकोरम श्रृंखला में स्थित है, जो लद्दाख में नुब्रा घाटी के उत्तर में स्थित है। यह विश्व का सबसे ऊँचा युद्धक्षेत्र है, जहाँ भारत 5,400 मीटर से अधिक की ऊँचाई पर सैन्य उपस्थिति बनाए रखता है।
✅ विकल्प 4 – सही: सियाचिन ग्लेशियर पूर्वी काराकोरम श्रृंखला में नुब्रा घाटी के सीधे उत्तर में स्थित है।
❌ विकल्प 1 – गलत: अक्साई चिन लद्दाख के पूर्व में स्थित है, जबकि सियाचिन इसके उत्तर-पश्चिम में है।
❌ विकल्प 2 – गलत: लेह सियाचिन ग्लेशियर के दक्षिण में स्थित है, न कि इसके पश्चिम में।
❌ विकल्प 3 – गलत: गिलगित, गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में है, सियाचिन ग्लेशियर के पश्चिम में, न कि इसके दक्षिण में।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सियाचिन ग्लेशियर और आसपास का भूगोल
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | पूर्वी काराकोरम श्रृंखला, उत्तरी लद्दाख |
| लंबाई | लगभग 76 किमी (गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर) |
| ऊँचाई | 5,400 मीटर से 7,000 मीटर से अधिक तक |
| रणनीतिक महत्व | विश्व का सबसे ऊँचा युद्धक्षेत्र; ऑपरेशन मेघदूत (1984) के बाद से भारत द्वारा नियंत्रित |
| आसपास के क्षेत्र | नुब्रा घाटी के उत्तर में, गिलगित-बाल्टिस्तान के पूर्व में, अक्साई चिन के उत्तर-पश्चिम में, लेह के उत्तर में |
| नदी स्रोत | नुब्रा नदी का उद्गम सियाचिन ग्लेशियर से होता है |
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत के 36% जिलों को केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) द्वारा "अति-दोहित" या "क्रांतिक" के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- CGWA का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत किया गया था।
- भारत में विश्व में भूजल सिंचाई के अंतर्गत सबसे बड़ा क्षेत्र है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
यह प्रश्न भारत में भूजल प्रबंधन और केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) की भूमिका के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन 1 अति-दोहित/क्रांतिक जिलों के बारे में गलत आंकड़े प्रदान करता है, जबकि कथन 2 और 3 CGWA के गठन और भारत की भूजल सिंचाई स्थिति के संबंध में तथ्यात्मक रूप से सही हैं।
❌ कथन 1 – गलत: भारत के गतिशील भूजल संसाधनों पर राष्ट्रीय संकलन, 2017 के अनुसार, केवल 17% मूल्यांकन इकाइयाँ अति-दोहित और 5% क्रांतिक हैं, कुल मिलाकर 22% (जिलों का 36% नहीं)।
✅ कथन 2 – सही: केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) का गठन वास्तव में 1997 में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(3) के तहत भूजल विकास और प्रबंधन को विनियमित और नियंत्रित करने के लिए किया गया था।
✅ कथन 3 – सही: भारत में भूजल सिंचाई के अंतर्गत विश्व का सबसे बड़ा क्षेत्र है, जो इसकी सिंचित कृषि का लगभग 60% है, क्योंकि यहाँ बोरवेल और ट्यूबवेल का व्यापक उपयोग होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA)
- स्थापना: 1997 में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(3) के तहत गठित
- मूल मंत्रालय: जल शक्ति मंत्रालय (जल संसाधन विभाग)
- प्राथमिक कार्य: भारत भर में भूजल विकास और प्रबंधन का विनियमन और नियंत्रण
- वर्गीकरण श्रेणियाँ: मूल्यांकन इकाइयों को सुरक्षित, अर्ध-क्रांतिक (70-90% निष्कर्षण), क्रांतिक (90-100% निष्कर्षण), और अति-दोहित (>100% निष्कर्षण) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है
- भूजल स्थिति (2017 रिपोर्ट): 6,881 मूल्यांकन इकाइयों में से - 17% अति-दोहित, 5% क्रांतिक, 14% अर्ध-क्रांतिक, और 64% सुरक्षित
- भारत की सिंचाई: भारत में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा भूजल सिंचाई क्षेत्र है, जिसमें भूजल सिंचित कृषि का लगभग 60% योगदान देता है
- शक्तियाँ: CGWA अधिसूचित क्षेत्रों में भूजल निष्कर्षण के विनियमन के लिए निर्देश जारी कर सकता है और भूजल विकास पर प्रतिबंध लगा सकता है
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