UPSC CSE Prelims
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी संस्थाओं की भागीदारी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) निजी संस्थाओं की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए बनाई गई एक स्वायत्त एजेंसी है।
- अग्निकुल कॉसमॉस ने 3डी-प्रिंटेड रॉकेट इंजन का उपयोग करके दुनिया की पहली उड़ान लॉन्च की।
- स्काईरूट एयरोस्पेस ने जीएसएलवी के लिए तरल ईंधन विकसित किया है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही।IN-SPACe को 2020 में अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अंतर्गत एक स्वायत्त, एकल-खिड़की नोडल एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था। यह ISRO और निजी क्षेत्र के बीच सेतु का कार्य करती है।
कथन 2 — सही। मई 2024 में चेन्नई स्थित स्टार्टअप Agnikul Cosmos ने श्रीहरिकोटा में अपने निजी लॉन्चपैड से Agnibaan SOrTeD सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया — यह विश्व की पहली उड़ान थी जो एकल-टुकड़े, पूर्णतः 3D-मुद्रित रॉकेट इंजन (Agnilet — अर्ध-क्रायोजेनिक) द्वारा संचालित थी।
कथन 3 — गलत। Skyroot Aerospace अपने स्वतंत्र प्रक्षेपण यान (Vikram श्रृंखला) विकसित करती है। यह GSLV के लिए ईंधन या इंजन नहीं बनाती। GSLV के तरल और क्रायोजेनिक चरण पूरी तरह ISRO के Liquid Propulsion Systems Centre (LPSC) द्वारा विकसित किए जाते हैं।
मुख्य ट्रिक: कथन 3 दो अलग निजी कंपनियों को मिलाता है — Agnikul (3D इंजन) और Skyroot (Vikram रॉकेट) — और गलत तरीके से Skyroot को GSLV से जोड़ता है।
निम्नलिखित अंतरिक्ष अभियानों पर विचार करें:
I. Axiom-4
II. SpaDeX
III. Gaganyaan
ऊपर दिए गए कितने अंतरिक्ष मिशन सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान को प्रोत्साहित और समर्थन करते हैं?
Detailed Explanation:
दिए गए मिशनों में Axiom-4 और Gaganyaan सीधे तौर पर माइक्रोग्रैविटी (सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण) अनुसंधान को बढ़ावा देते हैं, जबकि SpaDeX मुख्य रूप से एक तकनीकी प्रदर्शन मिशन है।
-
कथन I सही है: Axiom-4 मिशन ISS पर वैज्ञानिक और माइक्रोग्रैविटी प्रयोग करता है।
-
कथन II गलत है: SpaDeX का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक का परीक्षण करना है।
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कथन III सही है: Gaganyaan मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा किए जाने वाले कई माइक्रोग्रैविटी प्रयोग शामिल हैं।
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अतः केवल दो मिशन माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान को समर्थन देते हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
मिशन-वार विश्लेषण
| मिशन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. Axiom-4 | ✅ सही | ISS पर वैज्ञानिक एवं माइक्रोग्रैविटी प्रयोग करता है। |
| II. SpaDeX | ❌ गलत | मुख्य रूप से स्पेस डॉकिंग तकनीक का प्रदर्शन मिशन है। |
| III. Gaganyaan | ✅ सही | माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान के लिए कई प्रयोग शामिल हैं। |
Micro-gravity Research
माइक्रोग्रैविटी क्या है?
अंतरिक्ष में ऐसी स्थिति जहाँ गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव बहुत कम महसूस होता है और वस्तुएँ भारहीन दिखाई देती हैं।
महत्व
इससे वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं:
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मानव स्वास्थ्य
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पदार्थ विज्ञान (Material Science)
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जैव प्रौद्योगिकी
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द्रव गतिकी (Fluid Dynamics)
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पौधों की वृद्धि
GPS-एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन (GAGAN) आवश्यक संवर्द्धन प्रदान करने के लिए ग्राउंड स्टेशनों की एक प्रणाली का उपयोग करता है।
GAGAN के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
I. इसे अतिरिक्त सटीकता और अखंडता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
II. यह अधिक समान और उच्च गुणवत्ता वाले हवाई यातायात प्रबंधन की अनुमति देगा।
III. यह केवल विमानन में लाभ प्रदान करेगा, परिवहन के अन्य साधनों में नहीं।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
GAGAN (GPS-Aided Geo Augmented Navigation) भारत की Satellite-Based Augmentation System (SBAS) है, जिसे ISRO और AAI ने मिलकर विकसित किया है।
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कथन I सही है: GAGAN GPS की सटीकता (Accuracy) और विश्वसनीयता (Integrity) बढ़ाता है।
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कथन II सही है: यह अधिक सुरक्षित और बेहतर हवाई यातायात प्रबंधन (Air Traffic Management) में मदद करता है।
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कथन III गलत है: GAGAN का उपयोग केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं है; इसका उपयोग रेल, सड़क, समुद्री परिवहन, कृषि और आपदा प्रबंधन में भी होता है।
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अतः सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. अतिरिक्त सटीकता और विश्वसनीयता प्रदान करता है | ✅ सही | GPS संकेतों की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है। |
| II. बेहतर एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट संभव बनाता है | ✅ सही | सुरक्षित और कुशल हवाई संचालन में सहायता करता है। |
| III. केवल विमानन क्षेत्र को लाभ देता है | ❌ गलत | इसके उपयोग कई अन्य क्षेत्रों में भी हैं। |
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रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (RTGs) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- आरटीजी लघु विखंडन रिएक्टर हैं।
- आरटीजी का उपयोग अंतरिक्ष यान के ऑनबोर्ड सिस्टम को शक्ति देने के लिए किया जाता है।
- आरटीजी प्लूटोनियम-238 का उपयोग कर सकते हैं, जो हथियारों के विकास का एक उप-उत्पाद है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2 (केवल कथन 2 और 3)
Radioisotope Thermoelectric Generator (RTG) रेडियोधर्मी पदार्थों के प्राकृतिक क्षय (decay) से उत्पन्न ऊष्मा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। इसका उपयोग मुख्यतः अंतरिक्ष अभियानों में किया जाता है।
❌ कथन I गलत है: RTG छोटे फिशन रिएक्टर नहीं होते। इनमें नाभिकीय विखंडन (fission) नहीं होता, बल्कि रेडियोधर्मी क्षय से ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
✅ कथन II सही है: RTG का उपयोग अंतरिक्ष यानों, उपग्रहों और रोवरों के ऑनबोर्ड सिस्टम को ऊर्जा देने के लिए किया जाता है।
✅ कथन III सही है: RTG में सामान्यतः Plutonium-238 का उपयोग होता है, जिसे विशेष रूप से अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भी बनाया जाता है।
संक्षिप्त नोट्स: Radioisotope Thermoelectric Generator (RTG)
-
रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न ऊष्मा को सीधे विद्युत में बदलता है।
-
इसमें नाभिकीय विखंडन (Fission) नहीं होता।
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प्रमुख ईंधन: Plutonium-238।
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Pu-238 का अर्ध-आयु काल लगभग 87.7 वर्ष है।
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सूर्य से दूर अंतरिक्ष अभियानों के लिए अत्यंत उपयोगी।
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Voyager 1, Voyager 2 और Curiosity Rover में इसका उपयोग हुआ है।
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कई दशकों तक विश्वसनीय ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
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गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है।
निम्नलिखित में से किस देश की अपनी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — जापान
जापान QZSS (क्वासी-ज़ेनिथ सैटेलाइट सिस्टम) संचालित करता है, जो एक क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है जिसे एशिया-ओशिनिया क्षेत्र, विशेष रूप से जापान में GPS कवरेज और सटीकता को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। दिए गए विकल्पों में से केवल जापान की अपनी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विश्वव्यापी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणालियाँ
- वैश्विक नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS): चार परिचालन प्रणालियाँ - GPS (अमेरिका), GLONASS (रूस), Galileo (यूरोपीय संघ), और BeiDou (चीन) - विश्वव्यापी कवरेज प्रदान करती हैं।
- क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम: NavIC/IRNSS (भारत) भारतीय उपमहाद्वीप और आसपास के 1,500 किमी तक के क्षेत्र को कवर करता है; QZSS (जापान) एशिया-ओशिनिया क्षेत्र में GPS संकेतों को बढ़ाता है।
- GPS (अमेरिका): 24+ उपग्रहों के साथ पहला परिचालन GNSS, 1978 में लॉन्च किया गया, 1995 से पूर्ण रूप से परिचालन।
- GLONASS (रूस): सोवियत युग के दौरान विकसित, 24+ उपग्रहों के साथ 2011 से पूर्ण रूप से परिचालन।
- Galileo (EU): उच्च-सटीक स्थिति निर्धारण प्रदान करने वाली यूरोपीय प्रणाली, 2016 में परिचालन हुई।
- BeiDou (चीन): 35 उपग्रहों के साथ 2020 में वैश्विक कवरेज पूर्ण किया, क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करता है।
- NavIC (भारत): 7 उपग्रहों के साथ भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली, 2018 से परिचालन, 20 मीटर से बेहतर स्थिति सटीकता प्रदान करती है।
- QZSS (जापान): क्वासी-ज़ेनिथ कक्षाओं में उपग्रहों के साथ क्वासी-ज़ेनिथ सैटेलाइट सिस्टम, जापान और पड़ोसी क्षेत्रों में उन्नत स्थिति निर्धारण प्रदान करता है।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
अंतरिक्ष में वस्तुएँ: विवरण
- सेफीड्स: अंतरिक्ष में धूल और गैस के विशाल बादल
- नीहारिकाएँ: तारे जो आवधिक रूप से चमकते और मंद होते हैं
- पल्सर: न्यूट्रॉन तारे जो तब बनते हैं जब विशाल तारों का ईंधन समाप्त हो जाता है और वे संकुचित हो जाते हैं
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल एक
यह प्रश्न खगोलीय पिंडों और उनकी सही परिभाषाओं के ज्ञान की परीक्षा करता है। दिए गए तीन युग्मों में से केवल तीसरा युग्म (पल्सर) सही सुमेलित है, जबकि पहले दो युग्मों के विवरण उलट दिए गए हैं।
❌ युग्म 1 – गलत: सेफीड्स धूल और गैस के विशाल बादल नहीं हैं; वे वास्तव में स्पंदनशील तारे हैं जो आवधिक रूप से चमकते और मंद होते हैं, जो उन्हें खगोल विज्ञान में महत्वपूर्ण दूरी मापक बनाता है।
❌ युग्म 2 – गलत: नीहारिकाएँ वे तारे नहीं हैं जो आवधिक रूप से चमकते और मंद होते हैं; वे अंतरिक्ष में धूल और गैस के विशाल बादल हैं जहाँ तारे जन्म लेते हैं या मृत तारों के अवशेष होते हैं।
✅ युग्म 3 – सही: पल्सर वास्तव में तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन तारे हैं जो तब बनते हैं जब विशाल तारों का परमाणु ईंधन समाप्त हो जाता है और वे सुपरनोवा विस्फोटों में संकुचित हो जाते हैं, नियमित विकिरण स्पंद उत्सर्जित करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: खगोलीय पिंड
| खगोलीय पिंड | सही विवरण | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|
| सेफीड्स | स्पंदनशील परिवर्ती तारे जो आवधिक रूप से चमकते और मंद होते हैं | आवर्त-चमक संबंध उन्हें ब्रह्मांडीय दूरी मापने के लिए 'मानक मोमबत्तियाँ' बनाता है; डेल्टा सेफी के नाम पर |
| नीहारिकाएँ | अंतरिक्ष में धूल और गैस के विशाल बादल | उत्सर्जन, परावर्तन, या अंधकार नीहारिकाएँ हो सकती हैं; तारा निर्माण स्थल (तारकीय नर्सरी) या मरते तारों के अवशेष |
| पल्सर | तेजी से घूमने वाले न्यूट्रॉन तारे | विद्युत चुम्बकीय विकिरण के नियमित स्पंद उत्सर्जित करते हैं; सुपरनोवा विस्फोटों से बनते हैं; अत्यधिक घने (एक चम्मच का वजन अरबों टन) |
| क्वासर | अत्यंत चमकीले सक्रिय गैलेक्टिक नाभिक | अति विशाल ब्लैक होल द्वारा संचालित; ब्रह्मांड में सबसे दूर और चमकीली वस्तुओं में से |
| सुपरनोवा | विशाल तारों की विस्फोटक मृत्यु | संक्षिप्त रूप से पूरी आकाशगंगाओं को पार कर सकते हैं; भारी तत्व बनाते और फैलाते हैं; न्यूट्रॉन तारे या ब्लैक होल छोड़ते हैं |
यदि एक बड़ा सौर तूफान (सौर-ज्वाला) पृथ्वी तक पहुँचता है, तो पृथ्वी पर निम्नलिखित में से कौन से संभावित प्रभाव हो सकते हैं?
- GPS और नेविगेशन सिस्टम विफल हो सकते हैं।
- भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में सुनामी आ सकती है।
- पावर ग्रिड क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
- पृथ्वी के अधिकांश भाग में तीव्र ध्रुवीय ज्योति (औरोरा) हो सकती है।
- ग्रह के अधिकांश भाग में वन अग्नि हो सकती है।
- उपग्रहों की कक्षाएँ विक्षुब्ध हो सकती हैं।
- ध्रुवीय क्षेत्रों के ऊपर उड़ने वाले विमानों का शॉर्टवेव रेडियो संचार बाधित हो सकता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1, 3, 4, 6 और 7
सौर तूफान (सौर ज्वालाएँ और कोरोनल मास इजेक्शन) आवेशित कण और विद्युत चुम्बकीय विकिरण छोड़ते हैं जो पृथ्वी के चुंबकमंडल और आयनमंडल के साथ अंतःक्रिया करते हैं, जिससे विभिन्न तकनीकी और वायुमंडलीय व्यवधान उत्पन्न होते हैं। सही प्रभावों में उपग्रह-आधारित नेविगेशन में व्यवधान, पावर ग्रिड क्षति, बढ़े हुए ध्रुवीय ज्योति प्रदर्शन, उपग्रह कक्षा परिवर्तन और रेडियो संचार में हस्तक्षेप शामिल हैं।
✅ कथन 1 – सही: सौर तूफान आयनमंडल को विक्षुब्ध करते हैं, जिससे GPS सिग्नल में देरी और नेविगेशन सिस्टम की विफलता होती है।
❌ कथन 2 – गलत: सुनामी पानी के नीचे भूकंपीय या ज्वालामुखीय गतिविधि से उत्पन्न होती है, न कि सौर तूफानों से जो विद्युत चुम्बकीय और कण वातावरण को प्रभावित करते हैं।
✅ कथन 3 – सही: सौर तूफानों से भू-चुंबकीय प्रेरित धाराएँ (GICs) ट्रांसफार्मरों को ओवरलोड कर सकती हैं और पावर ग्रिड को क्षतिग्रस्त कर सकती हैं, जिससे ब्लैकआउट होता है।
✅ कथन 4 – सही: बढ़ी हुई सौर पवन चुंबकमंडल में कणों को ऊर्जावान बनाती है, जिससे सामान्य से कम अक्षांशों पर दृश्यमान तीव्र ध्रुवीय ज्योति उत्पन्न होती है।
❌ कथन 5 – गलत: सौर तूफान सीधे व्यापक वन अग्नि का कारण नहीं बनते; वे विद्युत चुम्बकीय प्रणालियों को प्रभावित करते हैं, न कि इतने बड़े पैमाने पर प्रज्वलन स्रोतों को।
✅ कथन 6 – सही: सौर तूफानों के दौरान तापन से बढ़ी हुई वायुमंडलीय घर्षण उपग्रह कक्षाओं को बदल सकती है, विशेष रूप से निम्न पृथ्वी कक्षा में।
✅ कथन 7 – सही: आयनमंडलीय व्यवधान शॉर्टवेव (HF) रेडियो संचार को बाधित करते हैं, विशेष रूप से ध्रुवीय मार्गों को प्रभावित करते हैं जहाँ आयनमंडलीय प्रभाव सबसे मजबूत होते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सौर तूफान और पृथ्वी पर प्रभाव
- सौर तूफान के घटक: सौर ज्वालाएँ (विद्युत चुम्बकीय विकिरण) और कोरोनल मास इजेक्शन (CME - आवेशित कण) जो 1-3 दिनों में पृथ्वी तक पहुँचते हैं।
- चुंबकमंडल अंतःक्रिया: आवेशित कण पृथ्वी के चुंबकमंडल को संकुचित करते हैं, भू-चुंबकीय तूफान उत्पन्न करते हैं।
- आयनमंडलीय व्यवधान: सौर विकिरण आयनमंडल घनत्व को बदलता है, जो रेडियो तरंग संचरण और उपग्रह संचार को प्रभावित करता है।
- भू-चुंबकीय प्रेरित धाराएँ (GICs): चुंबकीय क्षेत्र के उतार-चढ़ाव से विद्युत लाइनों और पाइपलाइनों जैसे लंबे चालकों में धाराएँ उत्पन्न होती हैं।
- ध्रुवीय ज्योति निर्माण: आवेशित कण वायुमंडलीय गैसों (ऑक्सीजन, नाइट्रोजन) से टकराते हैं, जो आमतौर पर 60-70° अक्षांश पर प्रकाश प्रदर्शन उत्पन्न करते हैं, लेकिन बड़े तूफानों के दौरान कम अक्षांशों तक विस्तारित होते हैं।
- अंतरिक्ष मौसम निगरानी: NOAA के स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर जैसे संगठन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए चेतावनी जारी करने हेतु सौर गतिविधि की निगरानी करते हैं।
- ऐतिहासिक घटनाएँ: कैरिंगटन घटना (1859) ने व्यापक टेलीग्राफ विफलताएँ उत्पन्न कीं; क्यूबेक ब्लैकआउट (1989) ने 60 लाख लोगों को 9 घंटे के लिए प्रभावित किया।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन मीडिया में अक्सर चर्चित "फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम" के पीछे के विचार को सर्वोत्तम रूप से प्रतिबिंबित करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — एक मिसाइल को पृथ्वी के चारों ओर एक स्थिर कक्षा में रखा जाता है और पृथ्वी पर एक लक्ष्य के ऊपर कक्षा से बाहर आती है।
फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम (FOBS) एक परमाणु हथियार वितरण प्रणाली है जो पारंपरिक उच्च-चाप बैलिस्टिक पथ के बजाय एक निम्न पृथ्वी कक्षा प्रक्षेपवक्र में एक वारहेड लॉन्च करती है। मुख्य विशेषता यह है कि मिसाइल अपने लक्ष्य पर प्रहार करने के लिए कक्षा से बाहर आने से पहले केवल एक कक्षा का अंश पूरा करती है, जिससे पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए डिज़ाइन की गई पूर्व चेतावनी प्रणालियों द्वारा इसका पता लगाना कठिन हो जाता है। यह कक्षीय दृष्टिकोण हथियार को अप्रत्याशित दिशाओं से आने की अनुमति देता है और चेतावनी समय को महत्वपूर्ण रूप से कम करता है।
❌ विकल्प 1 – गलत: FOBS क्षुद्रग्रह रक्षा के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है बल्कि कक्षीय प्रक्षेपवक्र के माध्यम से पृथ्वी-आधारित लक्ष्यों तक हथियार पहुंचाने के लिए है।
❌ विकल्प 2 – गलत: यह ग्रहीय अवतरण युद्धाभ्यासों का वर्णन करता है, FOBS का नहीं जो विशेष रूप से पृथ्वी की परिक्रमा करने वाली हथियार वितरण प्रणालियों के बारे में है।
✅ विकल्प 3 – सही: FOBS को एक मिसाइल के रूप में सटीक रूप से वर्णित करता है जो कक्षा में रखी जाती है और एक स्थलीय लक्ष्य के ऊपर कक्षा से बाहर आती है।
❌ विकल्प 4 – गलत: यह एक धूमकेतु मिलन मिशन का वर्णन करता है, FOBS हथियार प्रणालियों से असंबंधित है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बार्डमेंट सिस्टम (FOBS)
- अवधारणा: शीत युद्ध युग के दौरान विकसित एक हथियार वितरण प्रणाली, मुख्य रूप से 1960 के दशक में सोवियत संघ द्वारा
- प्रक्षेपवक्र: उच्च बैलिस्टिक चाप के बजाय एक निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) पथ का उपयोग करता है, कक्षा से बाहर आने से पहले केवल एक कक्षा का अंश पूरा करता है
- रणनीतिक लाभ: अप्रत्याशित दिशाओं (दक्षिणी ध्रुव के ऊपर सहित) से लक्ष्यों तक पहुंच सकता है, पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपवक्रों की ओर उन्मुख रडार प्रणालियों को बायपास करता है
- पता लगाने की चुनौती: उच्च-चाप बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन की गई पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ हमले के अनुक्रम में देर तक निम्न-कक्षा FOBS की पहचान करने में विफल हो सकती हैं
- कम चेतावनी समय: कक्षीय पथ और कम ऊंचाई का अर्थ है अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) की तुलना में पता लगाने और प्रभाव के बीच कम समय
- आधुनिक संदर्भ: हाल की रिपोर्टों से पता चलता है कि कुछ राष्ट्रों द्वारा FOBS प्रौद्योगिकी में नए सिरे से रुचि है, जो इसे समकालीन रणनीतिक चर्चाओं के लिए प्रासंगिक बनाता है
- संधि स्थिति: बाह्य अंतरिक्ष संधि (1967) कक्षा में सामूहिक विनाश के हथियार रखने पर प्रतिबंध लगाती है, हालांकि FOBS एक धूसर क्षेत्र में है क्योंकि यह पूर्ण कक्षा पूरी नहीं करता है
"यह प्रयोग एक समबाहु त्रिभुज की आकृति में संरचना में उड़ान भरने वाले तीन अंतरिक्ष यानों का उपयोग करेगा, जिसकी भुजाएं दस लाख किलोमीटर लंबी हैं, जिसमें अंतरिक्ष यानों के बीच लेजर चमक रहे हैं"। प्रश्न में यह प्रयोग किसको संदर्भित करता है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — इवॉल्व्ड LISA
तीन अंतरिक्ष यानों के समबाहु त्रिभुज संरचना में उड़ान भरने का विवरण, जिसकी भुजाएं दस लाख किलोमीटर लंबी हैं और माप के लिए लेजर का उपयोग करते हैं, विशिष्ट रूप से इवॉल्व्ड लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना (eLISA) मिशन की पहचान करता है। यह एक प्रस्तावित अंतरिक्ष-आधारित गुरुत्वीय तरंग वेधशाला है जो लेजर इंटरफेरोमेट्री का उपयोग करके अंतरिक्ष यानों के बीच की दूरी में सूक्ष्म परिवर्तनों को मापकर निम्न-आवृत्ति गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन की गई है। वॉयजर और न्यू होराइजन्स एकल-अंतरिक्ष यान अन्वेषण मिशन हैं, जबकि LISA पाथफाइंडर केवल eLISA घटकों के परीक्षण के लिए एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक था, पूर्ण मिशन नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: गुरुत्वीय तरंग पहचान मिशन
- LISA (लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना): ESA और NASA द्वारा प्रस्तावित अंतरिक्ष-आधारित गुरुत्वीय तरंग पहचान की मूल अवधारणा।
- इवॉल्व्ड LISA (eLISA): समबाहु त्रिभुज संरचना में तीन अंतरिक्ष यानों के साथ पुनः डिज़ाइन किया गया संस्करण, प्रत्येक ~1 मिलियन किमी द्वारा अलग, गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाने के लिए लेजर इंटरफेरोमेट्री का उपयोग करता है।
- LISA पाथफाइंडर (2015-2017): प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन जिसने eLISA के लिए आवश्यक ड्रैग-मुक्त उड़ान और सटीक माप तकनीकों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
- विन्यास: तीन समान अंतरिक्ष यान सटीक संरचना बनाए रखते हैं जबकि गुजरने वाली गुरुत्वीय तरंगों के कारण होने वाले पिकोमीटर (10⁻¹² मीटर) की दूरी परिवर्तनों को मापते हैं।
- लक्ष्य: अति विशाल ब्लैक होल के विलय, द्विआधारी तारा प्रणालियों और प्रारंभिक ब्रह्मांड घटनाओं जैसे स्रोतों से निम्न-आवृत्ति गुरुत्वीय तरंगों (0.1 mHz से 1 Hz) का पता लगाना।
- भू-आधारित समकक्ष: LIGO (लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी) पृथ्वी पर उच्च-आवृत्ति गुरुत्वीय तरंगों का पता लगाता है।
निम्नलिखित में से किसके मापन/अनुमान के लिए उपग्रह चित्रों/सुदूर संवेदन डेटा का उपयोग किया जाता है?
- किसी विशिष्ट स्थान की वनस्पति में क्लोरोफिल की मात्रा
- किसी विशिष्ट स्थान के धान के खेतों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन
- किसी विशिष्ट स्थान के भू-पृष्ठीय तापमान
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी उपग्रह चित्रों का उपयोग करके परावर्तित और उत्सर्जित विकिरण को मापकर क्षेत्रों की भौतिक विशेषताओं का पता लगाने और निगरानी करने के लिए करती है। उल्लिखित सभी तीन मापदंडों को उपग्रह-आधारित सुदूर संवेदन डेटा का उपयोग करके प्रभावी रूप से मापा या अनुमानित किया जा सकता है।
✅ कथन 1 – सही: वनस्पति में क्लोरोफिल की मात्रा का अनुमान प्रकाश परावर्तन को मापकर लगाया जाता है, क्योंकि क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण के लिए विशिष्ट तरंगदैर्ध्य को अवशोषित करता है और परावर्तित प्रकाश क्लोरोफिल सांद्रता को इंगित करता है।
✅ कथन 2 – सही: धान के खेतों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का अनुमान मीथेन और अन्य गैसों द्वारा उत्सर्जित विकिरण का पता लगाकर, जलभराव की स्थितियों के तापीय और वर्णक्रमीय संकेतों के साथ संयुक्त रूप से लगाया जा सकता है।
✅ कथन 3 – सही: भू-पृष्ठीय तापमान को उपग्रह सेंसर द्वारा सीधे मापा जाता है जो पृथ्वी की सतह द्वारा उत्सर्जित अवरक्त विकिरण का पता लगाते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सुदूर संवेदन के अनुप्रयोग
- सुदूर संवेदन: दूरी से वस्तुओं या क्षेत्रों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का विज्ञान, आमतौर पर उपग्रहों या विमान-आरोहित सेंसर का उपयोग करके।
- वर्णक्रमीय परावर्तन: विभिन्न सतहें और पदार्थ विद्युत चुम्बकीय विकिरण को अलग-अलग तरीके से परावर्तित करते हैं; वनस्पति निकट-अवरक्त में दृढ़ता से परावर्तित होती है जबकि प्रकाश संश्लेषण के लिए दृश्य प्रकाश को अवशोषित करती है।
- तापीय अवरक्त संवेदन: पृथ्वी की सतह से उत्सर्जित ऊष्मा विकिरण का पता लगाकर भू-पृष्ठीय तापमान मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
- कृषि निगरानी: सुदूर संवेदन फसल स्वास्थ्य, मृदा नमी, सिंचाई आवश्यकताओं और कृषि गतिविधियों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की निगरानी में मदद करता है।
- वनस्पति सूचकांक: उपग्रह डेटा से प्राप्त NDVI (सामान्यीकृत अंतर वनस्पति सूचकांक) और अन्य सूचकांक वनस्पति जोश और क्लोरोफिल सामग्री का आकलन करने में मदद करते हैं।
- मीथेन का पता लगाना: उन्नत उपग्रह सेंसर अवरक्त स्पेक्ट्रम में विशिष्ट अवशोषण बैंड को मापकर धान के खेतों, आर्द्रभूमि और अन्य स्रोतों से मीथेन उत्सर्जन का पता लगा सकते हैं।
हाल ही में, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से अरबों प्रकाश-वर्ष दूर विशाल 'ब्लैकहोल' के विलय का अवलोकन किया। इस अवलोकन का क्या महत्व है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — 'गुरुत्वाकर्षण तरंगों' का पता लगाया गया।
ब्लैकहोल के विलय से शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण तरंगें उत्पन्न होने की उम्मीद है, जो त्वरित होते विशाल पिंडों के कारण स्पेसटाइम में उत्पन्न तरंगें हैं। LIGO (लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी) जैसे उपकरणों से इन तरंगों का पता लगाने से वैज्ञानिक इन ब्रह्मांडीय घटनाओं का अध्ययन कर सकते हैं, भले ही वे बहुत दूर हों या पारंपरिक दूरबीनों से सीधे देखने में बाधा हो। इस अवलोकन ने खगोलीय अवलोकनों के लिए एक क्रांतिकारी नई खिड़की खोली और आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत की एक प्रमुख भविष्यवाणी की पुष्टि की।
❌ विकल्प 1 – गलत: हिग्स बोसॉन कणों का पता लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) जैसे कण त्वरक में लगाया जाता है, न कि ब्लैकहोल विलय के खगोलीय अवलोकन से।
❌ विकल्प 3 – गलत: हालांकि वर्महोल भौतिकी में सैद्धांतिक अवधारणाएं हैं, ब्लैकहोल विलय के किसी भी अवलोकन ने वर्महोल के माध्यम से अंतरगैलेक्टिक अंतरिक्ष यात्रा की संभावना की पुष्टि नहीं की है।
❌ विकल्प 4 – गलत: हालांकि ब्लैकहोल विलय चरम गुरुत्वाकर्षण में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं, एकलता (ब्लैकहोल के केंद्र में अनंत घनत्व का बिंदु) को समझना वर्तमान अवलोकन क्षमताओं से परे है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: गुरुत्वाकर्षण तरंगें
- परिभाषा: गुरुत्वाकर्षण तरंगें स्पेसटाइम के ताने-बाने में तरंगें हैं जो विशाल त्वरित पिंडों से जुड़ी हिंसक ब्रह्मांडीय घटनाओं के कारण उत्पन्न होती हैं।
- भविष्यवाणी: अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा 1916 में उनके सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के भाग के रूप में पहली बार भविष्यवाणी की गई।
- पहली खोज: 2015 में LIGO (लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी) द्वारा पहली बार सीधे खोजी गई।
- स्रोत: विलय होते ब्लैकहोल, टकराते न्यूट्रॉन तारे, सुपरनोवा, और असममिति वाले घूर्णन करते न्यूट्रॉन तारे।
- गति: स्पेसटाइम के माध्यम से प्रकाश की गति से यात्रा करती हैं।
- महत्व: गुरुत्वाकर्षण तरंग खगोल विज्ञान का एक नया क्षेत्र खोलता है, जो विद्युत चुंबकीय दूरबीनों के लिए अदृश्य घटनाओं के अवलोकन की अनुमति देता है।
- नोबेल पुरस्कार: LIGO डिटेक्टर और गुरुत्वाकर्षण तरंगों के अवलोकन के लिए 2017 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार रेनर वाइस, बैरी बारिश और किप थॉर्न को दिया गया।
भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- IRNSS के तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षा में और चार उपग्रह भूतुल्यकाली कक्षा में हैं।
- IRNSS संपूर्ण भारत और इसकी सीमाओं से लगभग 5500 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र को कवर करता है।
- भारत की 2019 के मध्य तक पूर्ण वैश्विक कवरेज के साथ अपनी स्वयं की उपग्रह नौवहन प्रणाली होगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
IRNSS (भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली), जिसे NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) के नाम से भी जाना जाता है, भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है। तीन कथनों में से केवल पहला कथन IRNSS के उपग्रह विन्यास का सही वर्णन करता है।
✅ कथन 1 – सही: IRNSS के तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षाओं में (भूमध्य रेखा के ऊपर निश्चित बिंदुओं पर स्थित) और चार उपग्रह भूतुल्यकाली कक्षाओं में (लगभग 29° झुकाव पर आनत भूतुल्यकाली कक्षाएँ) हैं।
❌ कथन 2 – गलत: IRNSS संपूर्ण भारत को कवर करता है और इसकी सीमाओं से लगभग 1500 किमी तक विस्तृत है (प्राथमिक सेवा क्षेत्र), न कि 5500 वर्ग किमी। विस्तारित सेवा क्षेत्र 30°दक्षिण से 50°उत्तर अक्षांश और 30°पूर्व से 130°पूर्व देशांतर तक एक बहुत बड़े क्षेत्र को कवर करता है।
❌ कथन 3 – गलत: IRNSS/NavIC एक क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली है, वैश्विक नौवहन प्रणाली नहीं। यह केवल भारत और आसपास के क्षेत्रों पर कवरेज प्रदान करता है। भारत के पास 2019 तक या वर्तमान में पूर्ण वैश्विक कवरेज के साथ कोई उपग्रह नौवहन प्रणाली नहीं है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: IRNSS/NavIC
- पूर्ण नाम: भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS), परिचालन नाम NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन)
- नक्षत्रमंडल: कुल 7 उपग्रह - 3 भूस्थिर कक्षा (GEO) में और 4 भूतुल्यकाली कक्षा (GSO) में
- प्राथमिक सेवा क्षेत्र: भारत और इसकी सीमा से 1500 किमी तक विस्तृत क्षेत्र
- विस्तारित सेवा क्षेत्र: 30°दक्षिण से 50°उत्तर अक्षांश और 30°पूर्व से 130°पूर्व देशांतर के बीच का क्षेत्र
- परिचालन शुरू: 2018 (सभी 7 उपग्रह परिचालनात्मक हो गए)
- अनुप्रयोग: स्थलीय, हवाई और समुद्री नौवहन, आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग, बेड़ा प्रबंधन, मोबाइल फोन के साथ एकीकरण, सटीक समय, मानचित्रण और भूगणितीय डेटा संग्रहण
- प्रशासित द्वारा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- भूमि खंड: हासन और भोपाल में IRNSS अंतरिक्ष यान नियंत्रण सुविधा (IRSCF), कई स्थानों पर IRNSS रेंज और अखंडता निगरानी स्टेशन (IRIMS), और नौवहन नियंत्रण केंद्र
निम्नलिखित में से किन क्षेत्रों में GPS तकनीक का उपयोग किया जा सकता है?
- मोबाइल फोन संचालन
- बैंकिंग संचालन
- पावर ग्रिड को नियंत्रित करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणाली है जो सटीक भू-स्थान और समय की जानकारी प्रदान करती है, जो इसे केवल नेविगेशन से परे विविध अनुप्रयोगों में उपयोगी बनाती है।
✅ कथन 1 – सही: GPS मोबाइल फोन संचालन के लिए स्थान ट्रैकिंग, नेविगेशन ऐप्स और राइड-हेलिंग और फूड डिलीवरी जैसी स्थान-आधारित सेवाओं के लिए अभिन्न है।
✅ कथन 2 – सही: GPS बैंकिंग लेनदेन के लिए सटीक समय-मुद्रांकन प्रदान करता है, जो बैंकिंग नेटवर्क में सटीक रिकॉर्ड-कीपिंग और समन्वयन सुनिश्चित करता है, और ATM स्थान सेवाओं को सक्षम बनाता है।
✅ कथन 3 – सही: GPS माप के लिए सटीक समय मुद्रांक प्रदान करके पावर ग्रिड संचालन को समन्वयित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो ग्रिड स्थिरता और ब्लैकआउट को रोकने के लिए आवश्यक है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: GPS तकनीक के अनुप्रयोग
- GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम): अमेरिकी सरकार के स्वामित्व वाली एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणाली, जिसमें पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले 24+ उपग्रह शामिल हैं।
- प्राथमिक कार्य: पृथ्वी पर कहीं भी GPS रिसीवर को भू-स्थान (अक्षांश, देशांतर, ऊंचाई) और सटीक समय की जानकारी प्रदान करता है।
- समय अनुप्रयोग: GPS उपग्रह परमाणु घड़ियां ले जाते हैं जो नैनोसेकंड-स्तर की समय सटीकता प्रदान करती हैं, जो दूरसंचार, बैंकिंग, पावर ग्रिड और स्टॉक मार्केट के लिए महत्वपूर्ण है।
- नेविगेशन उपयोग: विमानन, समुद्री, वाहन नेविगेशन, सर्वेक्षण, मानचित्रण और सैन्य अभियान।
- स्थान-आधारित सेवाएं: मोबाइल ऐप, आपातकालीन सेवाएं (911/112), संपत्ति ट्रैकिंग, कृषि (सटीक खेती), और मौसम पूर्वानुमान।
- अन्य वैश्विक प्रणालियां: GLONASS (रूस), Galileo (यूरोपीय संघ), BeiDou (चीन), और NavIC/IRNSS (भारत की क्षेत्रीय प्रणाली)।
भारत के उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- पीएसएलवी पृथ्वी संसाधनों की निगरानी के लिए उपयोगी उपग्रहों को लॉन्च करते हैं जबकि जीएसएलवी को मुख्य रूप से संचार उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- पीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित उपग्रह पृथ्वी पर किसी विशेष स्थान से देखने पर आकाश में उसी स्थिति में स्थायी रूप से स्थिर दिखाई देते हैं।
- जीएसएलवी एमके III एक चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान है जिसमें पहले और तीसरे चरण में ठोस रॉकेट मोटर्स का उपयोग किया जाता है, और दूसरे और चौथे चरण में तरल रॉकेट इंजन का उपयोग किया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
यह प्रश्न PSLV और GSLV लॉन्च व्हीकल के उपयोग और उनकी विशेषताओं पर आधारित है।
✅ कथन 1 – सही: PSLV का उपयोग मुख्यतः पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) उपग्रहों को Polar/Sun-Synchronous Orbit में भेजने के लिए किया जाता है, जबकि GSLV का उपयोग संचार उपग्रहों को Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में स्थापित करने के लिए किया जाता है।
❌ कथन 2 – गलत: PSLV द्वारा छोड़े गए उपग्रह आकाश में एक ही स्थान पर स्थिर नहीं दिखाई देते। वे Polar/Sun-Synchronous Orbit में पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। केवल Geostationary उपग्रह ही एक स्थान पर स्थिर दिखाई देते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: GSLV Mk III (LVM3) चार-चरणीय नहीं, बल्कि तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान है। इसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन, एक लिक्विड स्टेज और एक क्रायोजेनिक अपर स्टेज होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: PSLV एवं GSLV
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PSLV का उपयोग मुख्यतः Earth Observation और Sun-Synchronous Orbit (SSO) मिशनों के लिए किया जाता है।
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GSLV का उपयोग संचार उपग्रहों को Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में भेजने के लिए किया जाता है।
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LVM3 (पूर्व नाम GSLV Mk III) एक तीन-चरणीय भारी प्रक्षेपण यान है जिसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा होता है।
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क्रायोजेनिक इंजन में Liquid Hydrogen (LH₂) और Liquid Oxygen (LOX) का उपयोग होता है।
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PSLV को ISRO का "वर्कहॉर्स लॉन्च व्हीकल" कहा जाता है क्योंकि इसकी सफलता दर बहुत अधिक है।
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LVM3 ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और OneWeb मिशनों का सफल प्रक्षेपण किया है।
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Geostationary उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर दिखाई देते हैं, जबकि Polar उपग्रह लगातार पृथ्वी के ऊपर घूमते रहते हैं।
विकसित लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना (eLISA)' परियोजना का उद्देश्य क्या है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना
विकसित लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना (eLISA), जिसे अब LISA (लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना) के नाम से जाना जाता है, एक अंतरिक्ष-आधारित गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशाला है जो ब्रह्मांडीय स्रोतों से कम-आवृत्ति वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन की गई है। यह लेजर इंटरफेरोमेट्री का उपयोग करके गुरुत्वाकर्षण तरंगों द्वारा उत्पन्न अंतरिक्ष-काल में सूक्ष्म विकृतियों को मापती है, जो विशाल ब्लैक होल के विलय, चरम द्रव्यमान अनुपात प्रेरणाओं और गैलेक्टिक द्विआधारी प्रणालियों जैसी घटनाओं से आती हैं। यह ESA के नेतृत्व वाला मिशन (NASA के योगदान के साथ) मिलीहर्ट्ज़ आवृत्ति रेंज में काम करता है, जो LIGO जैसे भूमि-आधारित डिटेक्टरों का पूरक है। गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना ब्रह्मांड का अवलोकन करने और चरम परिस्थितियों में आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत का परीक्षण करने के लिए एक नई खिड़की खोलता है।
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