रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (RTGs) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- आरटीजी लघु विखंडन रिएक्टर हैं।
- आरटीजी का उपयोग अंतरिक्ष यान के ऑनबोर्ड सिस्टम को शक्ति देने के लिए किया जाता है।
- आरटीजी प्लूटोनियम-238 का उपयोग कर सकते हैं, जो हथियारों के विकास का एक उप-उत्पाद है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2 (केवल कथन 2 और 3)
Radioisotope Thermoelectric Generator (RTG) रेडियोधर्मी पदार्थों के प्राकृतिक क्षय (decay) से उत्पन्न ऊष्मा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। इसका उपयोग मुख्यतः अंतरिक्ष अभियानों में किया जाता है।
❌ कथन I गलत है: RTG छोटे फिशन रिएक्टर नहीं होते। इनमें नाभिकीय विखंडन (fission) नहीं होता, बल्कि रेडियोधर्मी क्षय से ऊर्जा प्राप्त की जाती है।
✅ कथन II सही है: RTG का उपयोग अंतरिक्ष यानों, उपग्रहों और रोवरों के ऑनबोर्ड सिस्टम को ऊर्जा देने के लिए किया जाता है।
✅ कथन III सही है: RTG में सामान्यतः Plutonium-238 का उपयोग होता है, जिसे विशेष रूप से अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भी बनाया जाता है।
संक्षिप्त नोट्स: Radioisotope Thermoelectric Generator (RTG)
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रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न ऊष्मा को सीधे विद्युत में बदलता है।
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इसमें नाभिकीय विखंडन (Fission) नहीं होता।
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प्रमुख ईंधन: Plutonium-238।
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Pu-238 का अर्ध-आयु काल लगभग 87.7 वर्ष है।
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सूर्य से दूर अंतरिक्ष अभियानों के लिए अत्यंत उपयोगी।
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Voyager 1, Voyager 2 और Curiosity Rover में इसका उपयोग हुआ है।
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कई दशकों तक विश्वसनीय ऊर्जा प्रदान कर सकता है।
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गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है।
Question 1 of 8 अंतरिक्ष विज्ञान की मूल बातें
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