भारत में, कुछ परमाणु रिएक्टरों को "IAEA सुरक्षा उपायों" के अंतर्गत क्यों रखा जाता है जबकि अन्य को नहीं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — कुछ आयातित यूरेनियम का उपयोग करते हैं और अन्य घरेलू आपूर्ति का
2005 के भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते के तहत भारत के परमाणु रिएक्टरों को नागरिक और रणनीतिक सुविधाओं में विभाजित किया गया है। आयातित यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टरों को IAEA सुरक्षा उपायों के अंतर्गत रखा जाता है ताकि शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जा सके, जैसा कि परमाणु ईंधन आपूर्ति के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौतों द्वारा अनिवार्य है। घरेलू यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टर IAEA सुरक्षा उपायों से बाहर रहते हैं, जिससे भारत को अपने रणनीतिक परमाणु हथियार कार्यक्रम को स्वतंत्र रूप से बनाए रखने की सुविधा मिलती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत का परमाणु कार्यक्रम और IAEA सुरक्षा उपाय
- भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौता (2008): भारत की परमाणु सुविधाओं को नागरिक (IAEA सुरक्षा उपायों के तहत) और सैन्य (सुरक्षा उपायों से बाहर) श्रेणियों में विभाजित किया, NPT पर हस्ताक्षर न करने के बावजूद भारत के परमाणु अलगाव को समाप्त किया।
- IAEA सुरक्षा उपाय: अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था जो यह सत्यापित करती है कि परमाणु सामग्री का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाता है, न कि हथियार कार्यक्रमों में।
- पृथक्करण योजना: भारत ने स्वेच्छा से अपने 22 ऊर्जा रिएक्टरों में से 14 को IAEA सुरक्षा उपायों के तहत रखा, जबकि 8 रिएक्टर और अन्य सुविधाओं को रणनीतिक उद्देश्यों के लिए बाहर रखा।
- आयातित यूरेनियम शर्त: आपूर्तिकर्ता देशों (अमेरिका, रूस, फ्रांस, आदि) के साथ द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार आयातित यूरेनियम या ईंधन का उपयोग करने वाले किसी भी रिएक्टर को IAEA सुरक्षा उपायों के तहत होना चाहिए।
- घरेलू यूरेनियम: भारतीय खानों (झारखंड, आंध्र प्रदेश) से स्वदेशी यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टर सुरक्षा उपायों से बाहर रहते हैं, जो भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम और हथियार क्षमता को संरक्षित करते हैं।
- तीन-चरणीय कार्यक्रम: ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक यूरेनियम (चरण I), प्लूटोनियम ब्रीडर रिएक्टर (चरण II), और थोरियम-U233 चक्र (चरण III) का उपयोग करने वाली भारत की अनूठी परमाणु रणनीति।
- रणनीतिक स्वायत्तता: यह पृथक्करण भारत को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु वाणिज्य और प्रौद्योगिकी तक पहुंच प्राप्त करते हुए अपनी न्यूनतम विश्वसनीय परमाणु निवारक क्षमता बनाए रखने की अनुमति देता है।
Question 2 of 2 परमाणु ऊर्जा
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