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ऊर्जा प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
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हरित हाइड्रोजन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (सीसीएस) के साथ संयुक्त प्राकृतिक गैस सुधार से प्राप्त डीकार्बोनाइज्ड हाइड्रोजन है।
- यह नवीकरणीय ऊर्जा द्वारा उत्पन्न बिजली के साथ पानी के इलेक्ट्रोलिसिस का उपयोग करके उत्पादित किया जाता है।
- भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक लगभग 50 एमएमटी वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाना है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत। यह ब्लू हाइड्रोजन का वर्णन है, ग्रीन हाइड्रोजन का नहीं। ब्लू हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस + कार्बन कैप्चर (CCS) से बनती है।
कथन 2 — सही। ग्रीन हाइड्रोजन = नवीकरणीय बिजली (सौर/पवन) से पानी का इलेक्ट्रोलिसिस। यह शून्य-उत्सर्जन प्रक्रिया है।
कथन 3 — सही। भारत के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य:
- 2030 तक 5 MMT/वर्ष उत्पादन क्षमता
- इससे वार्षिक ~50 MMT ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी
- साथ ही 6 लाख+ रोजगार सृजन
याद रखने की तरकीब:
- हरा (Green) = नवीकरणीय बिजली + पानी (स्वच्छ)
- नीला (Blue) = प्राकृतिक गैस + कार्बन कैप्चर
- ग्रे (Grey) = प्राकृतिक गैस, कोई कार्बन कैप्चर नहीं (गंदा)
निम्न प्रकार के वाहनों पर विचार करें:
I. पूर्ण बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन
II. हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन
III. ईंधन सेल इलेक्ट्रिक हाइब्रिड वाहन
उपरोक्त में से कितने को वैकल्पिक (पावरट्रेन) वाहन माना जाता है?
Detailed Explanation:
Alternative Powertrain Vehicles वे वाहन हैं जो पारंपरिक पेट्रोल या डीज़ल इंजन पर निर्भर नहीं होते।
-
कथन I सही है: Battery Electric Vehicles (BEVs) पूरी तरह बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से चलते हैं।
-
कथन II सही है: Hydrogen Fuel Cell Vehicles (FCEVs) हाइड्रोजन से बिजली बनाकर चलते हैं।
-
कथन III सही है: Fuel Cell Electric Hybrid Vehicles (FCEHVs) में फ्यूल सेल, बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर का संयोजन होता है।
-
अतः तीनों वाहन Alternative Powertrain Vehicles माने जाते हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
वाहन-वार विश्लेषण
| वाहन | Alternative Powertrain? | कारण |
|---|---|---|
| BEV | ✅ हाँ | केवल बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से संचालित। |
| FCEV | ✅ हाँ | हाइड्रोजन फ्यूल सेल से बिजली बनाता है। |
| FCEHV | ✅ हाँ | फ्यूल सेल और बैटरी दोनों का उपयोग करता है। |
Alternative Powertrain Vehicles
क्या हैं Alternative Powertrains?
ये ऐसे वाहन प्रणोदन तंत्र हैं जो पेट्रोल-डीज़ल इंजन के विकल्प के रूप में काम करते हैं।
मुख्य प्रकार
| प्रकार | ऊर्जा स्रोत |
|---|---|
| BEV | बैटरी बिजली |
| FCEV | हाइड्रोजन फ्यूल सेल |
| FCEHV | हाइड्रोजन फ्यूल सेल + बैटरी |
| HEV | ईंधन + इलेक्ट्रिक मोटर |
| PHEV | प्लग-इन बैटरी + इंजन |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
BEVs से कोई टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होता।
-
FCEVs का मुख्य उत्सर्जन जलवाष्प (Water Vapour) होता है।
-
हाइड्रोजन वाहन लंबी दूरी और भारी परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
-
ये वाहन जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं।
निम्नलिखित पदार्थों पर विचार करें:
I. इथेनॉल
II. नाइट्रोग्लिसरीन
III. यूरिया
कोयला गैसीकरण तकनीक का उपयोग उनमें से कितने के उत्पादन में किया जा सकता है?
Detailed Explanation:
कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) में कोयले को
-
I. एथेनॉल ✅ सही – सिंगैस से एथेनॉल बनाया जा सकता है।
-
II. नाइट्रोग्लिसरीन ❌ गलत – यह ग्लिसरॉल के नाइट्रेशन से बनता है, कोयला गैसीकरण से नहीं।
-
III. यूरिया ✅ सही – सिंगैस से प्राप्त हाइड्रोजन से अमोनिया बनता है, जिससे आगे यूरिया तैयार किया जाता है।
-
अतः केवल एथेनॉल और यूरिया का उत्पादन कोयला गैसीकरण तकनीक से किया जा सकता है। इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
पदार्थ-वार विश्लेषण
| पदार्थ | कोयला गैसीकरण से उत्पादन? | कारण |
|---|---|---|
| एथेनॉल | ✅ हाँ | सिंगैस से बनाया जा सकता है। |
| नाइट्रोग्लिसरीन | ❌ नहीं | ग्लिसरॉल के नाइट्रेशन से बनता है। |
| यूरिया | ✅ हाँ | अमोनिया और CO₂ से बनता है। |
कोयला गैसीकरण
क्या है Coal Gasification?
यह प्रक्रिया कोयले को सिंगैस में बदलती है, जिसमें मुख्यतः होते हैं:
-
कार्बन मोनोऑक्साइड (CO)
-
हाइड्रोजन (H₂)
-
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂)
सिंगैस से बनने वाले प्रमुख उत्पाद
-
अमोनिया
-
यूरिया
-
मेथेनॉल
-
एथेनॉल
-
सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG)
-
हाइड्रोजन
महत्वपूर्ण तथ्य
-
यह तकनीक आयातित तेल और गैस पर निर्भरता कम करने में मदद करती है।
-
उर्वरक और रासायनिक उद्योग में इसका व्यापक उपयोग है।
-
भारत घरेलू कोयले के बेहतर उपयोग के लिए कोयला गैसीकरण को बढ़ावा दे रहा है।
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इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के संदर्भ में, निम्नलिखित तत्वों पर विचार करें:
I. कोबाल्ट
II. ग्रेफाइट
III. लिथियम
IV. निकेल
उपरोक्त में से कितने आमतौर पर बैटरी कैथोड बनाते हैं?
Detailed Explanation:
अधिकांश लिथियम-आयन EV बैटरियों में कैथोड मुख्य रूप से लिथियम, कोबाल्ट और निकेल से बना होता है।
-
I. कोबाल्ट ✅ सही – NMC और LCO बैटरियों में उपयोग होता है।
-
II. ग्रेफाइट ❌ गलत – ग्रेफाइट सामान्यतः एनोड में उपयोग होता है।
-
III. लिथियम ✅ सही – सभी लिथियम-आयन बैटरियों के कैथोड का प्रमुख घटक।
-
IV. निकेल ✅ सही – NMC और NCA बैटरियों में उपयोग होता है।
-
अतः केवल तीन तत्व (कोबाल्ट, लिथियम और निकेल) कैथोड का हिस्सा होते हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
तत्व-वार विश्लेषण
| तत्व | कैथोड में उपयोग? | कारण |
|---|---|---|
| कोबाल्ट | ✅ हाँ | LCO और NMC बैटरियों में उपयोग। |
| ग्रेफाइट | ❌ नहीं | मुख्यतः एनोड में उपयोग। |
| लिथियम | ✅ हाँ | कैथोड का मूल घटक। |
| निकेल | ✅ हाँ | ऊर्जा घनत्व बढ़ाने में मदद करता है। |
EV बैटरी के भाग
| भाग | सामान्य सामग्री |
|---|---|
| कैथोड | लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, मैंगनीज़, आयरन फॉस्फेट |
| एनोड | ग्रेफाइट |
| इलेक्ट्रोलाइट | लिथियम लवण घोल |
| सेपरेटर | पॉलिमर झिल्ली |
सामान्य कैथोड रसायन
-
LCO – Lithium Cobalt Oxide
-
NMC – Nickel Manganese Cobalt
-
NCA – Nickel Cobalt Aluminum
-
LFP – Lithium Iron Phosphate
महत्वपूर्ण तथ्य
-
कैथोड बैटरी की क्षमता और लागत को काफी हद तक निर्धारित करता है।
-
ग्रेफाइट आज भी सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला एनोड पदार्थ है।
-
EV उद्योग के कारण लिथियम, निकेल और कोबाल्ट की मांग तेजी से बढ़ रही है।
निम्नलिखित में से कौन सा हाइड्रोजन द्वारा संचालित ईंधन सेल इलेक्ट्रिक वाहनों से निकास पाइप उत्सर्जन है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ जलवाष्प (Water Vapour) – Option D
हाइड्रोजन से चलने वाले Fuel Cell Electric Vehicles (FCEVs) में फ्यूल सेल के अंदर हाइड्रोजन और वायु की ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से बिजली बनती है।
इस प्रक्रिया में पानी (H₂O) और ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसलिए वाहन के एग्जॉस्ट पाइप से केवल जलवाष्प निकलती है, जिससे यह एक स्वच्छ ऊर्जा तकनीक मानी जाती है।
❌ Hydrogen Peroxide: फ्यूल सेल की सामान्य प्रक्रिया में नहीं बनता।
❌ Hydronium (H₃O⁺): यह जलीय घोल में पाया जाता है, वाहन से उत्सर्जित नहीं होता।
❌ Oxygen: ऑक्सीजन प्रतिक्रिया में उपयोग होती है, बाहर नहीं निकलती।
✅ Water Vapour: हाइड्रोजन फ्यूल सेल वाहन का मुख्य और एकमात्र एग्जॉस्ट उत्सर्जन।
संक्षिप्त नोट्स: फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEV)
-
FCEV में हाइड्रोजन (H₂) ईंधन के रूप में उपयोग होती है।
-
बिजली विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया से बनती है, दहन से नहीं।
-
मुख्य अभिक्रिया: हाइड्रोजन + ऑक्सीजन → बिजली + पानी + ऊष्मा।
-
एग्जॉस्ट से केवल जलवाष्प (H₂O) निकलती है।
-
इसे Zero Tailpipe Emission Technology माना जाता है।
-
हाइड्रोजन को उच्च-दाब टैंकों में संग्रहित किया जाता है।
-
Toyota Mirai और Hyundai Nexo इसके प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
-
इनमें तेज़ रिफ्यूलिंग और लंबी ड्राइविंग रेंज का लाभ मिलता है।
निम्नलिखित पर विचार करें:
- बैटरी भंडारण
- बायोमास जनरेटर
- ईंधन सेल
- छत पर सौर फोटोवोल्टिक इकाइयाँ
उपरोक्त में से कितने को "वितरित ऊर्जा संसाधन" माना जाता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4 (सभी चार)
Distributed Energy Resources (DERs) ऐसे छोटे ऊर्जा उत्पादन या भंडारण स्रोत होते हैं जो उपभोक्ताओं के निकट स्थित होते हैं, न कि बड़े केंद्रीकृत बिजलीघरों में। ये ऊर्जा प्रणाली को अधिक लचीला और कुशल बनाते हैं।
✅ बैटरी स्टोरेज – सही: यह ऊर्जा को संग्रहित करता है और आवश्यकता पड़ने पर बिजली उपलब्ध कराता है, इसलिए DER माना जाता है।
✅ बायोमास जनरेटर – सही: छोटे स्तर पर बायोमास से बिजली उत्पादन उपभोक्ताओं के निकट किया जा सकता है।
✅ फ्यूल सेल – सही: फ्यूल सेल विकेन्द्रीकृत तरीके से बिजली उत्पन्न करते हैं और DER की श्रेणी में आते हैं।
✅ रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टिक यूनिट – सही: घरों, कार्यालयों और उद्योगों में सीधे बिजली उत्पादन करने वाला सबसे सामान्य DER है।
संक्षिप्त नोट्स: Distributed Energy Resources (DERs)
-
DERs छोटे पैमाने के ऊर्जा संसाधन होते हैं।
-
इनमें ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा भंडारण दोनों शामिल हैं।
-
प्रमुख उदाहरण: रूफटॉप सोलर, बैटरी स्टोरेज, फ्यूल सेल, बायोमास प्लांट।
-
ट्रांसमिशन और वितरण हानियों को कम करते हैं।
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बिजली ग्रिड की विश्वसनीयता और लचीलापन बढ़ाते हैं।
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नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में मदद करते हैं।
-
मुख्य ग्रिड के साथ या स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं।
-
स्मार्ट ग्रिड और विकेन्द्रीकृत ऊर्जा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: भारत में यूरेनियम के भंडार होने के बावजूद, वह अपनी अधिकांश बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भर है।
कथन-II: बिजली उत्पादन के लिए कम से कम 60% तक संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कथन-I सही है लेकिन कथन-II गलत है
भारत में वास्तव में घरेलू यूरेनियम भंडार हैं लेकिन बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर भारी निर्भरता है (कुल क्षमता का लगभग 70%)। हालांकि, कथन-II तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को 60% तक संवर्धित यूरेनियम की आवश्यकता नहीं होती है।
✅ कथन-I – सही: भारत में झारखंड (सिंहभूम), आंध्र प्रदेश (तुम्मलापल्ले) और अन्य क्षेत्रों में यूरेनियम भंडार हैं, फिर भी कोयला इसकी प्रचुरता, कम लागत और स्थापित बुनियादी ढांचे के कारण बिजली उत्पादन का प्रमुख स्रोत बना हुआ है।
❌ कथन-II – गलत: 60% या अधिक तक संवर्धित यूरेनियम को अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और इसका उपयोग अनुसंधान रिएक्टरों या परमाणु हथियारों के लिए किया जाता है, वाणिज्यिक बिजली उत्पादन के लिए नहीं। भारत के PHWRs प्राकृतिक यूरेनियम (0.7% U-235) का उपयोग करते हैं, जबकि विश्व स्तर पर अधिकांश वाणिज्यिक लाइट वाटर रिएक्टर केवल 3-5% U-235 तक संवर्धित निम्न संवर्धित यूरेनियम (LEU) का उपयोग करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: परमाणु ईंधन संवर्धन स्तर
| संवर्धन स्तर | U-235 प्रतिशत | प्राथमिक उपयोग |
|---|---|---|
| प्राकृतिक यूरेनियम | 0.7% | भारत के PHWRs (दाबित भारी जल रिएक्टर) |
| निम्न संवर्धित यूरेनियम (LEU) | 3-5% | विश्व स्तर पर वाणिज्यिक लाइट वाटर रिएक्टर (LWRs) |
| अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (HEU) | 20-90% | अनुसंधान रिएक्टर, नौसैनिक प्रणोदन |
| हथियार-ग्रेड यूरेनियम | ≥90% | परमाणु हथियार |
- भारत का परमाणु कार्यक्रम: PHWRs में प्राकृतिक यूरेनियम से शुरू होने वाले स्वदेशी तीन-चरणीय कार्यक्रम का उपयोग करता है
- कोयले का प्रभुत्व: भारत के कोयला भंडार (विश्व में 4वें सबसे बड़े) और कम पूंजी लागत इसे पर्यावरणीय चिंताओं के बावजूद पसंदीदा बनाती है
- यूरेनियम स्रोत: झारखंड (जादूगोड़ा), आंध्र प्रदेश (तुम्मलापल्ले - विश्व के सबसे बड़े में से एक), मेघालय, राजस्थान
- परमाणु क्षमता: भारत की कुल बिजली का केवल ~3% परमाणु ऊर्जा से आता है (2023 तक)
भारत में कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- इनमें से कोई भी समुद्री जल का उपयोग नहीं करता है।
- इनमें से कोई भी जल-तनाव वाले जिले में स्थापित नहीं है।
- इनमें से कोई भी निजी स्वामित्व वाला नहीं है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कोई नहीं
भारत में कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्रों के संबंध में तीनों कथन गलत हैं। कुछ संयंत्र शीतलन के लिए समुद्री जल का उपयोग करते हैं (जैसे मुंद्रा), कई जल-तनाव वाले जिलों में स्थित हैं, और बड़ी संख्या में निजी स्वामित्व वाले हैं।
❌ कथन 1 – गलत: मुंद्रा तापीय विद्युत संयंत्र कच्छ की खाड़ी से समुद्री जल का उपयोग बंद-चक्र शीतलन प्रणाली में करता है, और सहायक प्रणालियों के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस संयंत्रों से शुद्ध समुद्री जल का भी उपयोग करता है।
❌ कथन 2 – गलत: WRI के शोध के अनुसार, भारत के 40% तापीय विद्युत संयंत्र जल-तनाव वाले क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनमें से 20 सबसे बड़ी तापीय उपयोगिताओं में से 14 ने 2013-2016 के बीच जल की कमी के कारण बंद का अनुभव किया।
❌ कथन 3 – गलत: भारत के 269 तापीय विद्युत संयंत्रों में से 138 सार्वजनिक स्वामित्व वाले हैं जबकि 131 निजी स्वामित्व वाले हैं, जो महत्वपूर्ण निजी क्षेत्र की भागीदारी को दर्शाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्र
- शीतलन जल स्रोत: जबकि अधिकांश संयंत्र नदियों या जलाशयों से मीठे पानी का उपयोग करते हैं, तटीय संयंत्र जैसे मुंद्रा (गुजरात) मीठे पानी के संसाधनों के संरक्षण के लिए समुद्री जल शीतलन प्रणालियों का उपयोग करते हैं।
- जल तनाव की चुनौती: 40% तापीय संयंत्र जल-तनाव वाले क्षेत्रों में हैं, जो जल की कमी की अवधि के दौरान परिचालन व्यवधान और मजबूर बंद का कारण बनते हैं।
- स्वामित्व संरचना: कुल 269 संयंत्र - 138 सार्वजनिक क्षेत्र (केंद्रीय/राज्य उपयोगिताएँ जैसे NTPC, राज्य Gencos) और 131 निजी क्षेत्र (अडानी पावर, टाटा पावर, रिलायंस पावर, आदि)।
- क्षमता वितरण: तापीय ऊर्जा भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता का लगभग 50-55% योगदान करती है।
- पर्यावरणीय चिंताएँ: उच्च जल खपत (3-5 लीटर प्रति kWh), तापीय प्रदूषण, और उत्सर्जन स्थिरता के लिए जल प्रबंधन को महत्वपूर्ण बनाते हैं।
सड़क प्रकाश व्यवस्था के संदर्भ में, सोडियम लैंप LED लैंप से किस प्रकार भिन्न हैं?
- सोडियम लैंप 360 डिग्री में प्रकाश उत्पन्न करते हैं लेकिन LED लैंप के मामले में ऐसा नहीं है।
- सड़क-रोशनी के रूप में, सोडियम लैंप की आयु LED लैंप की तुलना में अधिक होती है।
- सोडियम लैंप से दृश्य प्रकाश का स्पेक्ट्रम लगभग एकवर्णी होता है जबकि LED लैंप सड़क प्रकाश व्यवस्था में महत्वपूर्ण रंग लाभ प्रदान करते हैं।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 3
यह प्रश्न सड़क प्रकाश व्यवस्था में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक सोडियम लैंप और आधुनिक LED लैंप की तुलना करता है। कथन 1 सही रूप से पहचानता है कि सोडियम लैंप सर्वदिशात्मक रूप से (360 डिग्री) प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, जबकि LED दिशात्मक होते हैं, जिससे प्रकाश की बर्बादी कम होती है। कथन 3 सही रूप से नोट करता है कि सोडियम लैंप लगभग एकवर्णी पीला प्रकाश उत्पन्न करते हैं, जबकि LED बेहतर रंग प्रतिपादन और स्पेक्ट्रम विविधता प्रदान करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: सोडियम लैंप सभी दिशाओं में प्रकाश उत्सर्जित करते हैं (360 डिग्री), जबकि LED लैंप दिशात्मक होते हैं और आवश्यक स्थान पर प्रकाश केंद्रित करते हैं, जिससे दक्षता में सुधार होता है।
❌ कथन 2 – गलत: LED लैंप की आयु (50,000-100,000 घंटे) सोडियम लैंप (15,000-24,000 घंटे) की तुलना में काफी अधिक होती है।
✅ कथन 3 – सही: सोडियम लैंप एकवर्णी पीला-नारंगी प्रकाश (संकीर्ण स्पेक्ट्रम) उत्पन्न करते हैं, जबकि LED लैंप सड़क प्रकाश व्यवस्था के लिए बेहतर रंग प्रतिपादन सूचकांक (CRI) के साथ व्यापक स्पेक्ट्रम प्रदान करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सड़क प्रकाश प्रौद्योगिकियाँ
| पैरामीटर | सोडियम लैंप (HPS/LPS) | LED लैंप |
|---|---|---|
| प्रकाश वितरण | सर्वदिशात्मक (360°) - परावर्तक की आवश्यकता | दिशात्मक - केंद्रित किरण |
| आयु | 15,000-24,000 घंटे | 50,000-100,000 घंटे |
| प्रकाश स्पेक्ट्रम | एकवर्णी (पीला-नारंगी) | पूर्ण स्पेक्ट्रम, समायोज्य |
| रंग प्रतिपादन सूचकांक (CRI) | निम्न (20-25) | उच्च (70-90+) |
| ऊर्जा दक्षता | मध्यम (80-140 lm/W) | उच्च (100-200 lm/W) |
| वार्म-अप समय | कई मिनट | तत्काल चालू/बंद |
| पर्यावरणीय प्रभाव | पारा/सोडियम युक्त | कोई हानिकारक पदार्थ नहीं |
भारत में, कुछ परमाणु रिएक्टरों को "IAEA सुरक्षा उपायों" के अंतर्गत क्यों रखा जाता है जबकि अन्य को नहीं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — कुछ आयातित यूरेनियम का उपयोग करते हैं और अन्य घरेलू आपूर्ति का
2005 के भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते के तहत भारत के परमाणु रिएक्टरों को नागरिक और रणनीतिक सुविधाओं में विभाजित किया गया है। आयातित यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टरों को IAEA सुरक्षा उपायों के अंतर्गत रखा जाता है ताकि शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जा सके, जैसा कि परमाणु ईंधन आपूर्ति के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौतों द्वारा अनिवार्य है। घरेलू यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टर IAEA सुरक्षा उपायों से बाहर रहते हैं, जिससे भारत को अपने रणनीतिक परमाणु हथियार कार्यक्रम को स्वतंत्र रूप से बनाए रखने की सुविधा मिलती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत का परमाणु कार्यक्रम और IAEA सुरक्षा उपाय
- भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौता (2008): भारत की परमाणु सुविधाओं को नागरिक (IAEA सुरक्षा उपायों के तहत) और सैन्य (सुरक्षा उपायों से बाहर) श्रेणियों में विभाजित किया, NPT पर हस्ताक्षर न करने के बावजूद भारत के परमाणु अलगाव को समाप्त किया।
- IAEA सुरक्षा उपाय: अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था जो यह सत्यापित करती है कि परमाणु सामग्री का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए किया जाता है, न कि हथियार कार्यक्रमों में।
- पृथक्करण योजना: भारत ने स्वेच्छा से अपने 22 ऊर्जा रिएक्टरों में से 14 को IAEA सुरक्षा उपायों के तहत रखा, जबकि 8 रिएक्टर और अन्य सुविधाओं को रणनीतिक उद्देश्यों के लिए बाहर रखा।
- आयातित यूरेनियम शर्त: आपूर्तिकर्ता देशों (अमेरिका, रूस, फ्रांस, आदि) के साथ द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार आयातित यूरेनियम या ईंधन का उपयोग करने वाले किसी भी रिएक्टर को IAEA सुरक्षा उपायों के तहत होना चाहिए।
- घरेलू यूरेनियम: भारतीय खानों (झारखंड, आंध्र प्रदेश) से स्वदेशी यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टर सुरक्षा उपायों से बाहर रहते हैं, जो भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम और हथियार क्षमता को संरक्षित करते हैं।
- तीन-चरणीय कार्यक्रम: ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक यूरेनियम (चरण I), प्लूटोनियम ब्रीडर रिएक्टर (चरण II), और थोरियम-U233 चक्र (चरण III) का उपयोग करने वाली भारत की अनूठी परमाणु रणनीति।
- रणनीतिक स्वायत्तता: यह पृथक्करण भारत को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु वाणिज्य और प्रौद्योगिकी तक पहुंच प्राप्त करते हुए अपनी न्यूनतम विश्वसनीय परमाणु निवारक क्षमता बनाए रखने की अनुमति देता है।
शैवाल-आधारित जैव ईंधन का उत्पादन संभव है, लेकिन विकासशील देशों में इस उद्योग को बढ़ावा देने की संभावित सीमा/सीमाएँ क्या है/हैं?
- शैवाल-आधारित जैव ईंधन का उत्पादन केवल समुद्रों में ही संभव है, महाद्वीपों पर नहीं।
- शैवाल-आधारित जैव ईंधन उत्पादन की स्थापना और इंजीनियरिंग के लिए निर्माण पूर्ण होने तक उच्च स्तर की विशेषज्ञता/प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है।
- आर्थिक रूप से व्यवहार्य उत्पादन के लिए बड़े पैमाने की सुविधाओं की स्थापना आवश्यक है जो पारिस्थितिक और सामाजिक चिंताएँ उत्पन्न कर सकती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
❌ कथन 1 – गलत: शैवाल-आधारित जैव ईंधन उत्पादन केवल समुद्रों तक सीमित नहीं है। शैवाल को खुले तालाबों, बंद फोटोबायोरिएक्टरों या अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों का उपयोग करके भूमि पर उगाया जा सकता है। महाद्वीपीय उत्पादन तकनीकी रूप से संभव है और व्यापक रूप से प्रचलित है।
✅ कथन 2 – सही: शैवाल जैव ईंधन सुविधाओं की स्थापना के लिए उन्नत जैव प्रौद्योगिकी, फोटोबायोरिएक्टरों के लिए परिष्कृत इंजीनियरिंग, सटीक खेती नियंत्रण प्रणालियों और निष्कर्षण प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है। यह उच्च तकनीकी बुनियादी ढांचा सीमित तकनीकी विशेषज्ञता और पूंजी वाले विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है।
✅ कथन 3 – सही: बड़े पैमाने पर शैवाल खेती सुविधाओं के लिए व्यापक भूमि/जल संसाधनों, महत्वपूर्ण ऊर्जा इनपुट और जल उपयोग की आवश्यकता होती है। ये आवश्यकताएँ पारिस्थितिक चिंताओं (जैव विविधता प्रभाव, जल की कमी) और सामाजिक मुद्दों (भूमि अधिग्रहण, समुदायों का विस्थापन, खाद्य उत्पादन के साथ प्रतिस्पर्धा) को जन्म दे सकती हैं।