शैवाल-आधारित जैव ईंधन का उत्पादन संभव है, लेकिन विकासशील देशों में इस उद्योग को बढ़ावा देने की संभावित सीमा/सीमाएँ क्या है/हैं?
- शैवाल-आधारित जैव ईंधन का उत्पादन केवल समुद्रों में ही संभव है, महाद्वीपों पर नहीं।
- शैवाल-आधारित जैव ईंधन उत्पादन की स्थापना और इंजीनियरिंग के लिए निर्माण पूर्ण होने तक उच्च स्तर की विशेषज्ञता/प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है।
- आर्थिक रूप से व्यवहार्य उत्पादन के लिए बड़े पैमाने की सुविधाओं की स्थापना आवश्यक है जो पारिस्थितिक और सामाजिक चिंताएँ उत्पन्न कर सकती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
❌ कथन 1 – गलत: शैवाल-आधारित जैव ईंधन उत्पादन केवल समुद्रों तक सीमित नहीं है। शैवाल को खुले तालाबों, बंद फोटोबायोरिएक्टरों या अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों का उपयोग करके भूमि पर उगाया जा सकता है। महाद्वीपीय उत्पादन तकनीकी रूप से संभव है और व्यापक रूप से प्रचलित है।
✅ कथन 2 – सही: शैवाल जैव ईंधन सुविधाओं की स्थापना के लिए उन्नत जैव प्रौद्योगिकी, फोटोबायोरिएक्टरों के लिए परिष्कृत इंजीनियरिंग, सटीक खेती नियंत्रण प्रणालियों और निष्कर्षण प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है। यह उच्च तकनीकी बुनियादी ढांचा सीमित तकनीकी विशेषज्ञता और पूंजी वाले विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है।
✅ कथन 3 – सही: बड़े पैमाने पर शैवाल खेती सुविधाओं के लिए व्यापक भूमि/जल संसाधनों, महत्वपूर्ण ऊर्जा इनपुट और जल उपयोग की आवश्यकता होती है। ये आवश्यकताएँ पारिस्थितिक चिंताओं (जैव विविधता प्रभाव, जल की कमी) और सामाजिक मुद्दों (भूमि अधिग्रहण, समुदायों का विस्थापन, खाद्य उत्पादन के साथ प्रतिस्पर्धा) को जन्म दे सकती हैं।
Question 5 of 5 नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत
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