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नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्न प्रकार के वाहनों पर विचार करें:
I. पूर्ण बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन
II. हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहन
III. ईंधन सेल इलेक्ट्रिक हाइब्रिड वाहन
उपरोक्त में से कितने को वैकल्पिक (पावरट्रेन) वाहन माना जाता है?
Detailed Explanation:
Alternative Powertrain Vehicles वे वाहन हैं जो पारंपरिक पेट्रोल या डीज़ल इंजन पर निर्भर नहीं होते।
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कथन I सही है: Battery Electric Vehicles (BEVs) पूरी तरह बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से चलते हैं।
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कथन II सही है: Hydrogen Fuel Cell Vehicles (FCEVs) हाइड्रोजन से बिजली बनाकर चलते हैं।
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कथन III सही है: Fuel Cell Electric Hybrid Vehicles (FCEHVs) में फ्यूल सेल, बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर का संयोजन होता है।
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अतः तीनों वाहन Alternative Powertrain Vehicles माने जाते हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
वाहन-वार विश्लेषण
| वाहन | Alternative Powertrain? | कारण |
|---|---|---|
| BEV | ✅ हाँ | केवल बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से संचालित। |
| FCEV | ✅ हाँ | हाइड्रोजन फ्यूल सेल से बिजली बनाता है। |
| FCEHV | ✅ हाँ | फ्यूल सेल और बैटरी दोनों का उपयोग करता है। |
Alternative Powertrain Vehicles
क्या हैं Alternative Powertrains?
ये ऐसे वाहन प्रणोदन तंत्र हैं जो पेट्रोल-डीज़ल इंजन के विकल्प के रूप में काम करते हैं।
मुख्य प्रकार
| प्रकार | ऊर्जा स्रोत |
|---|---|
| BEV | बैटरी बिजली |
| FCEV | हाइड्रोजन फ्यूल सेल |
| FCEHV | हाइड्रोजन फ्यूल सेल + बैटरी |
| HEV | ईंधन + इलेक्ट्रिक मोटर |
| PHEV | प्लग-इन बैटरी + इंजन |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
BEVs से कोई टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होता।
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FCEVs का मुख्य उत्सर्जन जलवाष्प (Water Vapour) होता है।
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हाइड्रोजन वाहन लंबी दूरी और भारी परिवहन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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ये वाहन जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद करते हैं।
इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों के संदर्भ में, निम्नलिखित तत्वों पर विचार करें:
I. कोबाल्ट
II. ग्रेफाइट
III. लिथियम
IV. निकेल
उपरोक्त में से कितने आमतौर पर बैटरी कैथोड बनाते हैं?
Detailed Explanation:
अधिकांश लिथियम-आयन EV बैटरियों में कैथोड मुख्य रूप से लिथियम, कोबाल्ट और निकेल से बना होता है।
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I. कोबाल्ट ✅ सही – NMC और LCO बैटरियों में उपयोग होता है।
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II. ग्रेफाइट ❌ गलत – ग्रेफाइट सामान्यतः एनोड में उपयोग होता है।
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III. लिथियम ✅ सही – सभी लिथियम-आयन बैटरियों के कैथोड का प्रमुख घटक।
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IV. निकेल ✅ सही – NMC और NCA बैटरियों में उपयोग होता है।
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अतः केवल तीन तत्व (कोबाल्ट, लिथियम और निकेल) कैथोड का हिस्सा होते हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
तत्व-वार विश्लेषण
| तत्व | कैथोड में उपयोग? | कारण |
|---|---|---|
| कोबाल्ट | ✅ हाँ | LCO और NMC बैटरियों में उपयोग। |
| ग्रेफाइट | ❌ नहीं | मुख्यतः एनोड में उपयोग। |
| लिथियम | ✅ हाँ | कैथोड का मूल घटक। |
| निकेल | ✅ हाँ | ऊर्जा घनत्व बढ़ाने में मदद करता है। |
EV बैटरी के भाग
| भाग | सामान्य सामग्री |
|---|---|
| कैथोड | लिथियम, निकेल, कोबाल्ट, मैंगनीज़, आयरन फॉस्फेट |
| एनोड | ग्रेफाइट |
| इलेक्ट्रोलाइट | लिथियम लवण घोल |
| सेपरेटर | पॉलिमर झिल्ली |
सामान्य कैथोड रसायन
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LCO – Lithium Cobalt Oxide
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NMC – Nickel Manganese Cobalt
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NCA – Nickel Cobalt Aluminum
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LFP – Lithium Iron Phosphate
महत्वपूर्ण तथ्य
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कैथोड बैटरी की क्षमता और लागत को काफी हद तक निर्धारित करता है।
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ग्रेफाइट आज भी सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला एनोड पदार्थ है।
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EV उद्योग के कारण लिथियम, निकेल और कोबाल्ट की मांग तेजी से बढ़ रही है।
निम्नलिखित पर विचार करें:
- बैटरी भंडारण
- बायोमास जनरेटर
- ईंधन सेल
- छत पर सौर फोटोवोल्टिक इकाइयाँ
उपरोक्त में से कितने को "वितरित ऊर्जा संसाधन" माना जाता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4 (सभी चार)
Distributed Energy Resources (DERs) ऐसे छोटे ऊर्जा उत्पादन या भंडारण स्रोत होते हैं जो उपभोक्ताओं के निकट स्थित होते हैं, न कि बड़े केंद्रीकृत बिजलीघरों में। ये ऊर्जा प्रणाली को अधिक लचीला और कुशल बनाते हैं।
✅ बैटरी स्टोरेज – सही: यह ऊर्जा को संग्रहित करता है और आवश्यकता पड़ने पर बिजली उपलब्ध कराता है, इसलिए DER माना जाता है।
✅ बायोमास जनरेटर – सही: छोटे स्तर पर बायोमास से बिजली उत्पादन उपभोक्ताओं के निकट किया जा सकता है।
✅ फ्यूल सेल – सही: फ्यूल सेल विकेन्द्रीकृत तरीके से बिजली उत्पन्न करते हैं और DER की श्रेणी में आते हैं।
✅ रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टिक यूनिट – सही: घरों, कार्यालयों और उद्योगों में सीधे बिजली उत्पादन करने वाला सबसे सामान्य DER है।
संक्षिप्त नोट्स: Distributed Energy Resources (DERs)
-
DERs छोटे पैमाने के ऊर्जा संसाधन होते हैं।
-
इनमें ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा भंडारण दोनों शामिल हैं।
-
प्रमुख उदाहरण: रूफटॉप सोलर, बैटरी स्टोरेज, फ्यूल सेल, बायोमास प्लांट।
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ट्रांसमिशन और वितरण हानियों को कम करते हैं।
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बिजली ग्रिड की विश्वसनीयता और लचीलापन बढ़ाते हैं।
-
नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में मदद करते हैं।
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मुख्य ग्रिड के साथ या स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकते हैं।
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स्मार्ट ग्रिड और विकेन्द्रीकृत ऊर्जा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण हैं।
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सड़क प्रकाश व्यवस्था के संदर्भ में, सोडियम लैंप LED लैंप से किस प्रकार भिन्न हैं?
- सोडियम लैंप 360 डिग्री में प्रकाश उत्पन्न करते हैं लेकिन LED लैंप के मामले में ऐसा नहीं है।
- सड़क-रोशनी के रूप में, सोडियम लैंप की आयु LED लैंप की तुलना में अधिक होती है।
- सोडियम लैंप से दृश्य प्रकाश का स्पेक्ट्रम लगभग एकवर्णी होता है जबकि LED लैंप सड़क प्रकाश व्यवस्था में महत्वपूर्ण रंग लाभ प्रदान करते हैं।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 3
यह प्रश्न सड़क प्रकाश व्यवस्था में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक सोडियम लैंप और आधुनिक LED लैंप की तुलना करता है। कथन 1 सही रूप से पहचानता है कि सोडियम लैंप सर्वदिशात्मक रूप से (360 डिग्री) प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, जबकि LED दिशात्मक होते हैं, जिससे प्रकाश की बर्बादी कम होती है। कथन 3 सही रूप से नोट करता है कि सोडियम लैंप लगभग एकवर्णी पीला प्रकाश उत्पन्न करते हैं, जबकि LED बेहतर रंग प्रतिपादन और स्पेक्ट्रम विविधता प्रदान करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: सोडियम लैंप सभी दिशाओं में प्रकाश उत्सर्जित करते हैं (360 डिग्री), जबकि LED लैंप दिशात्मक होते हैं और आवश्यक स्थान पर प्रकाश केंद्रित करते हैं, जिससे दक्षता में सुधार होता है।
❌ कथन 2 – गलत: LED लैंप की आयु (50,000-100,000 घंटे) सोडियम लैंप (15,000-24,000 घंटे) की तुलना में काफी अधिक होती है।
✅ कथन 3 – सही: सोडियम लैंप एकवर्णी पीला-नारंगी प्रकाश (संकीर्ण स्पेक्ट्रम) उत्पन्न करते हैं, जबकि LED लैंप सड़क प्रकाश व्यवस्था के लिए बेहतर रंग प्रतिपादन सूचकांक (CRI) के साथ व्यापक स्पेक्ट्रम प्रदान करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सड़क प्रकाश प्रौद्योगिकियाँ
| पैरामीटर | सोडियम लैंप (HPS/LPS) | LED लैंप |
|---|---|---|
| प्रकाश वितरण | सर्वदिशात्मक (360°) - परावर्तक की आवश्यकता | दिशात्मक - केंद्रित किरण |
| आयु | 15,000-24,000 घंटे | 50,000-100,000 घंटे |
| प्रकाश स्पेक्ट्रम | एकवर्णी (पीला-नारंगी) | पूर्ण स्पेक्ट्रम, समायोज्य |
| रंग प्रतिपादन सूचकांक (CRI) | निम्न (20-25) | उच्च (70-90+) |
| ऊर्जा दक्षता | मध्यम (80-140 lm/W) | उच्च (100-200 lm/W) |
| वार्म-अप समय | कई मिनट | तत्काल चालू/बंद |
| पर्यावरणीय प्रभाव | पारा/सोडियम युक्त | कोई हानिकारक पदार्थ नहीं |
शैवाल-आधारित जैव ईंधन का उत्पादन संभव है, लेकिन विकासशील देशों में इस उद्योग को बढ़ावा देने की संभावित सीमा/सीमाएँ क्या है/हैं?
- शैवाल-आधारित जैव ईंधन का उत्पादन केवल समुद्रों में ही संभव है, महाद्वीपों पर नहीं।
- शैवाल-आधारित जैव ईंधन उत्पादन की स्थापना और इंजीनियरिंग के लिए निर्माण पूर्ण होने तक उच्च स्तर की विशेषज्ञता/प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है।
- आर्थिक रूप से व्यवहार्य उत्पादन के लिए बड़े पैमाने की सुविधाओं की स्थापना आवश्यक है जो पारिस्थितिक और सामाजिक चिंताएँ उत्पन्न कर सकती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
❌ कथन 1 – गलत: शैवाल-आधारित जैव ईंधन उत्पादन केवल समुद्रों तक सीमित नहीं है। शैवाल को खुले तालाबों, बंद फोटोबायोरिएक्टरों या अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों का उपयोग करके भूमि पर उगाया जा सकता है। महाद्वीपीय उत्पादन तकनीकी रूप से संभव है और व्यापक रूप से प्रचलित है।
✅ कथन 2 – सही: शैवाल जैव ईंधन सुविधाओं की स्थापना के लिए उन्नत जैव प्रौद्योगिकी, फोटोबायोरिएक्टरों के लिए परिष्कृत इंजीनियरिंग, सटीक खेती नियंत्रण प्रणालियों और निष्कर्षण प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है। यह उच्च तकनीकी बुनियादी ढांचा सीमित तकनीकी विशेषज्ञता और पूंजी वाले विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है।
✅ कथन 3 – सही: बड़े पैमाने पर शैवाल खेती सुविधाओं के लिए व्यापक भूमि/जल संसाधनों, महत्वपूर्ण ऊर्जा इनपुट और जल उपयोग की आवश्यकता होती है। ये आवश्यकताएँ पारिस्थितिक चिंताओं (जैव विविधता प्रभाव, जल की कमी) और सामाजिक मुद्दों (भूमि अधिग्रहण, समुदायों का विस्थापन, खाद्य उत्पादन के साथ प्रतिस्पर्धा) को जन्म दे सकती हैं।
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