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पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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जलवायु परिवर्तन पर भारत की प्रतिक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारत की दीर्घकालिक निम्न उत्सर्जन विकास रणनीति (एलटी-एलईडीएस) 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
II. दिसंबर, 2024 में प्रस्तुत भारत की चौथी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट (बीयूआर-4) में 2019 की तुलना में 2020 में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 8% की कमी दर्ज की गई।
III. जलवायु-लचीला विकास आवश्यक रूप से उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों की त्वरित और अल्पकालिक उपलब्धि पर निर्भर करता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से संबंध सही है/हैं?
- कथन I अनुभवजन्य रूप से कथन II द्वारा समर्थित है।
- कथन III कथन I में निहित दृष्टिकोण का खंडन करता है।
- विवरण I और कथन III मिलकर दीर्घकालिक स्थिरता का आधार स्थापित करते हैं।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन I — सही। LT-LEDS भारत की 2070 तक नेट-ज़ीरो की रणनीति है।
कथन II — भ्रामक। 2020 में उत्सर्जन में 8% की कमी हुई, लेकिन यह कोविड लॉकडाउन के कारण था, असली नीतिगत सफलता नहीं।
कथन III — सही। वास्तविक जलवायु लचीलापन के लिए अभी तत्काल कार्रवाई आवश्यक है, सिर्फ लंबी अवधि की योजना नहीं।
संबंध 2 — सही: कथन III (तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता) कथन I (2070 का लंबी अवधि लक्ष्य) के दृष्टिकोण से विरोधाभासी है।
याद रखने योग्य बात: लंबी अवधि की योजना और तत्काल कार्रवाई की मांग में तनाव है। कोविड से जुड़ी उत्सर्जन कमी असली नीतिगत सफलता नहीं है।
पश्चिमी हूलॉक गिबन्स के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- उत्तर-पूर्व भारत में एक अभयारण्य इस वानर प्रजाति का घर है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची में लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
- उनके पास विशेष ब्रैचिएशन है और वे पेड़ों के बीच आसानी से झूल सकते हैं।
- उनके पास गोरिल्ला की तरह मजबूत और भारी निर्माण है, फिर भी वे उल्लेखनीय रूप से फुर्तीले पेड़ पर चढ़ने वाले हैं।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। असम में होलोंगापार गिब्बन अभयारण्य इस प्रजाति के लिए समर्पित है। पश्चिमी हूलॉक गिब्बन को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
कथन 2 — सही। ये ब्रैकिएशन के माध्यम से चलते हैं — अपनी लंबी बाहों का उपयोग करके एक शाखा से दूसरी शाखा पर तेज़ी से झूलते हैं।
कथन 3 — गलत। गिब्बन "छोटे वनमानुष" (Lesser Apes) हैं, गोरिल्ला जैसे नहीं। ये छोटे, पतले और हल्के होते हैं — केवल 6 से 9 किलोग्राम। उनका हल्का शरीर ही उन्हें इतनी फुर्ती से झूलने में मदद करता है।
जलवायु लचीलेपन के संदर्भ में मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए निम्नलिखित में से कौन सा तर्क सबसे अच्छा है?
- मैंग्रोव ज्वारीय ऊर्जा को कम करते हैं और मीठे पानी का भंडारण करते हैं, जिससे वे खारे मुहाने वाले क्षेत्रों में धान की खेती के लिए आदर्श स्थान बन जाते हैं।
- उनकी नमक-संवेदनशील जड़ें समुद्री जल को फ़िल्टर करती हैं, जिससे मैंग्रोव तटीय भूमि को मीठे पानी के जलीय कृषि क्षेत्रों में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- ज्वारीय लहरों को झेलने और बायोमास संसाधनों की पेशकश करके, मैंग्रोव ग्रामीण समुदायों के लिए प्राकृतिक जैव-ढाल और आजीविका आधार दोनों के रूप में कार्य करते हैं।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत। मैंग्रोव मीठा पानी जमा नहीं करते और धान की खेती के लिए उपयुक्त नहीं हैं। वास्तव में, धान के खेत बनाने के लिए मैंग्रोव को साफ करना ही उनके विनाश का एक मुख्य कारण है।
कथन 2 — गलत। मैंग्रोव हैलोफाइट हैं — यानी उनकी जड़ें नमक-सहनशील हैं, नमक-संवेदनशील नहीं। झींगा पालन के लिए मैंग्रोव साफ करना उनके लिए एक बड़ा खतरा है।
कथन 3 — सही। मैंग्रोव प्राकृतिक जैव-कवच के रूप में कार्य करते हैं:
- उनकी जड़ें ज्वारीय ऊर्जा कम करती हैं और तूफानों से तटों की रक्षा करती हैं
- वे तटीय समुदायों को जीवन-यापन के संसाधन देते हैं — लकड़ी, शहद, मछली प्रजनन
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत संस्थानों का एक मंच, NIRANTAR (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज टू ट्रांसफॉर्म, एडाप्ट एंड बिल्ड रेजिलिएंस) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
- पारिस्थितिकी तंत्र सर्वेक्षण और विश्लेषण इस मंच के अंतर्गत एक कार्यक्षेत्र है, जिसका प्रमुख संस्थान भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, कोलकाता है।
- पारिस्थितिकी तंत्र सेवा का अनुसंधान और प्रबंधन इस मंच के अंतर्गत एक कार्यक्षेत्र है, जिसका प्रमुख संस्थान केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली है।
- क्षमता विकास सहायता इस मंच के अंतर्गत एक कार्यक्षेत्र है, जिसका प्रमुख संस्थान भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल है।
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Detailed Explanation:
NIRANTAR पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक मंच है, जिसमें 4 विषयगत खंड हैं।
कथन 1 — सही। Ecosystem Survey & Analysis खंड → BSI, कोलकाता द्वारा नेतृत्व।
कथन 2 — गलत। Research and Management of Ecosystem Service खंड → ICFRE, देहरादून द्वारा नेतृत्व — Central Zoo Authority नहीं। CZA केवल भागीदार संस्थान है।
कथन 3 — सही। Capacity Development Support खंड → IIFM, भोपाल द्वारा नेतृत्व।
मंगोलिया से प्रत्येक वर्ष नागालैंड की दोयांग झील में अमूर फाल्कन्स के आगमन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह दर्शाता है कि निरंतर स्थानीय संरक्षण प्रयास अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षियों के आगमन और सुरक्षा में कैसे योगदान दे सकते हैं।
- यह उन्नत ट्रैकिंग तकनीकों की वैश्विक सफलता को दर्शाता है जो प्रवासी पक्षियों को उनके पड़ाव स्थलों पर वापस ले जाती है।
- यह पुष्टि करता है कि अमूर फाल्कन्स ने अनुकूल आवास परिवर्तनों के कारण भारत में स्थायी निवास के लिए अनुकूलित किया है।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। डोयांग झील एक संरक्षण की सफलता की कहानी है। पहले बड़ी संख्या में बाज़ों का शिकार होता था। NGO, वन विभाग और स्थानीय समुदायों के प्रयासों से शिकार पूरी तरह बंद हो गया। नागालैंड को अब "फाल्कन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड" कहा जाता है।
कथन 2 — गलत। ट्रैकिंग डिवाइस (सोलर ट्रांसमीटर) केवल वैज्ञानिकों के लिए डेटा एकत्र करते हैं — वे पक्षियों को मार्गदर्शन नहीं देते। बाज़ अपने प्राकृतिक तरीकों से रास्ता खोजते हैं, तकनीक से नहीं।
कथन 3 — गलत। बाज़ भारत के स्थायी निवासी नहीं हैं — वे लंबी दूरी के प्रवासी पक्षी हैं। वे साइबेरिया/उत्तरी चीन में प्रजनन करते हैं, फिर सर्दियों में दक्षिणी अफ्रीका उड़ान भरते हैं — लगभग 22,000 किमी की यात्रा। डोयांग झील केवल एक अस्थायी विश्राम स्थल है।
राइन्कोस्टाइलिस रेटुसा (फॉक्सटेल ऑर्किड) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह एक एपिफाइटिक ऑर्किड है।
- यह प्रजाति उत्तर-पूर्व भारत के लिए स्थानिक है।
- यह अरुणाचल प्रदेश और असम का राज्य फूल है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। यह एक एपिफाइटिक ऑर्किड है — पेड़ के तने/शाखाओं पर उगता है, सहारे के लिए पेड़ का उपयोग करता है और हवा से नमी लेता है। यह परजीवी नहीं है, पेड़ को नुकसान नहीं पहुँचाता।
कथन 2 — गलत। यह केवल पूर्वोत्तर भारत में ही नहीं पाया जाता। यह पूरे उष्णकटिबंधीय एशिया में मिलता है — चीन, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड आदि। भारत में भी यह ओडिशा, आंध्र प्रदेश, अंडमान-निकोबार में भी पाया जाता है।
कथन 3 — सही। यह असम और अरुणाचल प्रदेश दोनों का राज्य फूल है। असम में इसे कोपौ फूल कहा जाता है — बिहू नृत्य और शादियों में महत्वपूर्ण।
निम्नलिखित में से कौन सा भारत में विवो द्वारा प्रमाणित वनों की कटाई और वन क्षरण से उत्सर्जन को कम करने (आरईडीडी+) परियोजना की पहली योजना है?
Detailed Explanation:
मेघालय की यह परियोजना भारत की पहली REDD+ परियोजना है, जो Plan Vivo मानक के अंतर्गत प्रमाणित है।
मुख्य तथ्य:
- स्थान: पूर्वी खासी हिल्स, मेघालय
- प्रबंधन: 10 खासी जनजातीय राज्यों का संघ ("Synjuk")
- कार्य: पवित्र वनों की रक्षा और क्षरित वनों की बहाली
अन्य विकल्प गलत क्यों:
- उत्तराखंड — केवल तैयारी कार्य किया, पहला प्रमाणित नहीं
- ICFRE-ICIMOD — एक बड़ा क्षेत्रीय कार्यक्रम, एक प्रमाणित परियोजना नहीं
- सिक्किम — अच्छा कार्य, पर पहला नहीं
माधव राष्ट्रीय उद्यान के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- इसे 2025 में भारत में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।
- साख्य सागर, जिसे रामसर साइट के रूप में नामित किया गया है, इस राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है।
- इसका क्षेत्रफल मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच साझा होता है.
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 सही है: माधव राष्ट्रीय उद्यान को मार्च 2025 में भारत का 58वाँ टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया। यह मध्य प्रदेश का 9वाँ टाइगर रिज़र्व है।
कथन 2 सही है: सख्या सागर इस राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित है और इसे 2022 में रामसर साइट का दर्जा दिया गया था।
कथन 3 गलत है: माधव राष्ट्रीय उद्यान पूरी तरह मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित है। इसका कोई भाग राजस्थान में नहीं है।
अतः कथन 1 और 2 सही हैं, इसलिए सही उत्तर (B) 1 and 2 है।
माधव राष्ट्रीय उद्यान
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यह मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है।
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2025 में इसे भारत का 58वाँ टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया तथा इसके भीतर स्थित सख्या सागर एक रामसर आर्द्रभूमि है।
जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता हानि से निपटने के लिए किस संगठन ने प्रकृति बहाली कानून (एनआरएल) लागू किया है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 — यूरोपीय संघ (European Union)
European Union ने Nature Restoration Law (NRL) लागू किया है। इसका उद्देश्य क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों का पुनर्स्थापन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता बढ़ाना है।
✅ विकल्प A सही है: यूरोपीय संघ ने 2024 में Nature Restoration Law अपनाया, जिसमें पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
❌ विकल्प B गलत है: World Bank एक वित्तीय संस्था है, यह ऐसे कानून नहीं बनाती।
❌ विकल्प C गलत है: Organisation for Economic Co-operation and Development नीतिगत सुझाव देता है, लेकिन बाध्यकारी पर्यावरणीय कानून नहीं बनाता।
❌ विकल्प D गलत है: Food and Agriculture Organization खाद्य एवं कृषि क्षेत्र में कार्य करता है, लेकिन इस प्रकार के क्षेत्रीय कानून लागू नहीं करता।
संक्षिप्त नोट्स: Nature Restoration Law (NRL)
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Nature Restoration Law को यूरोपीय संघ ने 2024 में अपनाया।
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इसका उद्देश्य क्षतिग्रस्त स्थलीय, मीठे जल, तटीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली है।
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यह EU की Biodiversity Strategy 2030 का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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इसमें सदस्य देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित हैं।
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आर्द्रभूमि, वन, घासभूमि, नदियाँ और परागणकर्ता आवास इसके प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं।
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स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र कार्बन अवशोषण और जलवायु अनुकूलन में मदद करते हैं।
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यह कानून जैव विविधता ह्रास और जलवायु परिवर्तन दोनों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
विश्व बैंक ने चेतावनी दी कि भारत उन पहले स्थानों में से एक बन सकता है जहां वेट-बल्ब तापमान नियमित रूप से 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन उपर्युक्त रिपोर्ट के निहितार्थ को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?
I. प्रायद्वीपीय भारत सबसे अधिक बाढ़, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों और सूखे से पीड़ित होगा।
II. मनुष्यों सहित जानवरों का अस्तित्व प्रभावित होगा क्योंकि पसीने के माध्यम से उनके शरीर की गर्मी को बाहर निकालना मुश्किल हो जाएगा।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (I और II दोनों)
Wet-bulb temperature तापमान और आर्द्रता (Humidity) दोनों को मिलाकर मापा जाता है। 35°C Wet-Bulb Temperature को अत्यंत खतरनाक माना जाता है क्योंकि इस स्तर पर मानव शरीर पसीने के माध्यम से स्वयं को ठंडा नहीं रख पाता। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि भारत के कुछ क्षेत्रों में ऐसी स्थितियाँ अधिक सामान्य हो सकती हैं।
✅ कथन I सही है: बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, उष्णकटिबंधीय चक्रवात और सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ सकती है, विशेषकर प्रायद्वीपीय भारत में।
✅ कथन II सही है: 35°C Wet-Bulb Temperature पर पसीना प्रभावी रूप से वाष्पित नहीं हो पाता, जिससे मनुष्य और पशु अपने शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकाल पाते और जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है।
संक्षिप्त नोट्स: Wet-Bulb Temperature
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Wet-Bulb Temperature में तापमान और आर्द्रता दोनों शामिल होते हैं।
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35°C Wet-Bulb Temperature को मानव सहनशीलता की ऊपरी सीमा माना जाता है।
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अधिक आर्द्रता होने पर पसीने का वाष्पीकरण कम हो जाता है।
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जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
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भारत हीट स्ट्रेस (Heat Stress) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील देशों में से एक है।
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हीटवेव के दौरान स्वास्थ्य जोखिम मापने में Wet-Bulb Temperature का उपयोग किया जाता है।
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इसका प्रभाव मानव स्वास्थ्य, कृषि, पशुधन और श्रम उत्पादकता पर पड़ता है।
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए वर्षा कराने का कृत्रिम तरीका उपयोग में लाया जाता है
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (Silver iodide और Potassium iodide)
कृत्रिम वर्षा (Artificial Rainfall) या Cloud Seeding एक तकनीक है जिसके माध्यम से बादलों में विशेष रसायन डालकर वर्षा को बढ़ावा दिया जाता है। वायु प्रदूषण कम करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है क्योंकि वर्षा प्रदूषकों को वातावरण से नीचे ले आती है।
✅ विकल्प A सही है: Silver iodide (AgI) और Potassium iodide (KI) क्लाउड सीडिंग में उपयोग किए जाते हैं। इनकी क्रिस्टलीय संरचना बर्फ जैसी होती है, जिससे वर्षा बनने में मदद मिलती है।
❌ विकल्प B गलत है: Silver nitrate का उपयोग सामान्यतः क्लाउड सीडिंग में नहीं किया जाता।
❌ विकल्प C गलत है: Potassium nitrate वर्षा कराने के लिए प्रयुक्त नहीं होता।
❌ विकल्प D गलत है: Silver nitrate और Potassium chloride क्लाउड सीडिंग के मानक रसायन नहीं हैं।
संक्षिप्त नोट्स: Cloud Seeding
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क्लाउड सीडिंग वर्षा बढ़ाने की कृत्रिम तकनीक है।
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प्रमुख रसायन: Silver Iodide (AgI), Potassium Iodide (KI) और Dry Ice (CO₂)।
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ये पदार्थ संघनन या बर्फ नाभिक (Ice Nuclei) का कार्य करते हैं।
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इसका उपयोग वायु प्रदूषण कम करने, जल उपलब्धता बढ़ाने और सूखे से निपटने के लिए किया जाता है।
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यह तभी काम करता है जब उपयुक्त बादल पहले से मौजूद हों।
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यह साफ आकाश में नए बादल नहीं बना सकता।
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भारत, चीन, UAE और अमेरिका सहित कई देशों ने इसका प्रयोग किया है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: चक्रीय अर्थव्यवस्था ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करती है।
कथन II: चक्रीय अर्थव्यवस्था इनपुट के रूप में कच्चे माल के उपयोग को कम करती है।
कथन III: चक्रीय अर्थव्यवस्था उत्पादन प्रक्रिया में बर्बादी को कम करती है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1
सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) का उद्देश्य उत्पादों, संसाधनों और सामग्रियों का अधिकतम समय तक उपयोग करना है। इसमें पुनः उपयोग, मरम्मत, पुनर्निर्माण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जाता है। इससे कच्चे संसाधनों की मांग, अपशिष्ट और ऊर्जा खपत कम होती है, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी घटता है।
✅ कथन I सही है: सर्कुलर इकोनॉमी अपशिष्ट और संसाधन दोहन को कम करके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाती है।
✅ कथन II सही है: यह पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण के माध्यम से कच्चे माल की आवश्यकता को कम करती है।
✅ कथन III सही है: यह बेहतर डिज़ाइन और संसाधन दक्षता के माध्यम से उत्पादन प्रक्रिया में अपशिष्ट को कम करती है।
✅ कथन II, कथन I की व्याख्या करता है: कच्चे माल के कम उपयोग से ऊर्जा खपत और उससे होने वाला उत्सर्जन घटता है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: कम अपशिष्ट का अर्थ है कम उत्पादन एवं निपटान संबंधी उत्सर्जन।
संक्षिप्त नोट्स: Circular Economy
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यह Reduce, Reuse, Repair, Refurbish और Recycle के सिद्धांतों पर आधारित है।
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संसाधनों का उपयोग अधिकतम अवधि तक करने का प्रयास करती है।
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नए (Virgin) कच्चे माल पर निर्भरता कम करती है।
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ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और पर्यावरणीय क्षति को घटाती है।
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लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम करती है।
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संसाधन दक्षता (Resource Efficiency) को बढ़ावा देती है।
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यह पारंपरिक Linear Economy (Take–Make–Dispose) का विकल्प है।
पृथ्वी ग्रह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. वर्षा वन महासागरों द्वारा उत्पादित ऑक्सीजन की तुलना में अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।
II. समुद्री फाइटोप्लांकटन और प्रकाश संश्लेषक बैक्टीरिया दुनिया की लगभग 50% ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
III. अच्छी तरह से ऑक्सीजन युक्त सतही पानी में वायुमंडलीय हवा की तुलना में कई गुना अधिक ऑक्सीजन होती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2 (केवल II)
अक्सर लोग मानते हैं कि ऑक्सीजन का मुख्य स्रोत वर्षावन हैं, लेकिन वास्तव में महासागर पृथ्वी के सबसे बड़े ऑक्सीजन उत्पादक हैं। समुद्री फाइटोप्लैंकटन, शैवाल और प्रकाश-संश्लेषी बैक्टीरिया मिलकर वैश्विक ऑक्सीजन का लगभग आधा उत्पादन करते हैं। साथ ही, वायुमंडलीय वायु में जल की तुलना में कहीं अधिक ऑक्सीजन होती है।
❌ कथन I गलत है: वर्षावनों की तुलना में महासागर अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं। समुद्री फाइटोप्लैंकटन इसका प्रमुख स्रोत हैं।
✅ कथन II सही है: समुद्री फाइटोप्लैंकटन और प्रकाश-संश्लेषी बैक्टीरिया विश्व की लगभग 50% ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
❌ कथन III गलत है: वायुमंडलीय वायु में लगभग 21% ऑक्सीजन होती है, जबकि जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है। जल में वायु से कई गुना अधिक ऑक्सीजन नहीं होती।
संक्षिप्त नोट्स: ऑक्सीजन चक्र और समुद्री फाइटोप्लैंकटन
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समुद्री फाइटोप्लैंकटन पृथ्वी की लगभग 50% ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।
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फाइटोप्लैंकटन महासागरों में पाए जाने वाले सूक्ष्म प्रकाश-संश्लेषी जीव हैं।
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महासागर वैश्विक ऑक्सीजन उत्पादन का सबसे बड़ा स्रोत हैं।
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वायुमंडलीय वायु में लगभग 21% ऑक्सीजन होती है।
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जल में घुलित ऑक्सीजन सामान्यतः mg/L में मापी जाती है और इसकी मात्रा बहुत कम होती है।
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प्रकाश संश्लेषण में CO₂ + जल → ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन बनती है।
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पृथ्वी के ऑक्सीजन संतुलन और जलवायु के लिए स्वस्थ महासागर अत्यंत आवश्यक हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारत में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन 0.5 टन CO₂/व्यक्ति से कम है।
II. ईंधन दहन से CO₂ उत्सर्जन के मामले में, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।
III. बिजली और ताप उत्पादक भारत में CO₂ उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोत हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन I — गलत। भारत का प्रति व्यक्ति CO₂ उत्सर्जन लगभग 1.9-2.0 टन है, 0.5 टन से कम नहीं। दिया गया आंकड़ा बहुत कम और गलत है।
कथन II — सही। भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ईंधन दहन से CO₂ उत्सर्जन में दूसरे स्थान पर है — चीन के बाद (जो पहले स्थान पर है)।
कथन III — सही। बिजली और ऊष्मा उत्पादन (मुख्यतः कोयला-आधारित) भारत में CO₂ उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत है।
पीकॉक टारेंटयुला (गूटी टारेंटयुला) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. यह एक सर्वाहारी क्रस्टेशियन है।
II. भारत में इसका प्राकृतिक आवास केवल कुछ वन क्षेत्रों तक ही सीमित है।
III. अपने प्राकृतिक आवास में, यह एक वृक्षीय प्रजाति है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 4 — II और III
सरल व्याख्या:
कथन I — गलत। यह क्रस्टेशियन नहीं है — यह एक मकड़ी (Arachnid) है, विशेष रूप से एक टारेंटुला। क्रस्टेशियन (केकड़े/झींगा) पूरी तरह अलग समूह हैं।
कथन II — सही। इसका आवास भारत में पूर्वी घाट के कुछ सीमित वन क्षेत्रों तक सीमित है।
कथन III — सही। यह वृक्षवासी (Arboreal) है — यानी यह पेड़ों और उनकी दरारों में रहती है, ज़मीन पर नहीं।
याद रखने की तरकीब: "पीकॉक टारेंटुला = मकड़ी, वृक्षवासी, सीमित आवास" — क्रस्टेशियन नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पीकॉक टारेंटुला / गूटी टारेंटुला
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| वैज्ञानिक नाम | Poecilotheria metallica |
| प्रकार | मकड़ी (Arachnid) — क्रस्टेशियन नहीं |
| आवास | पूर्वी घाट, सीमित वन क्षेत्र (आंध्र प्रदेश क्षेत्र) |
| जीवनशैली | वृक्षवासी — पेड़ों/पेड़ की दरारों में रहती है |
| रंग | मेटैलिक नीला, मोर जैसे पैटर्न |
| संरक्षण स्थिति | गंभीर रूप से संकटग्रस्त (IUCN) |
| महत्व | विदेशी पालतू व्यापार में सबसे दुर्लभ टारेंटुला में से एक — अवैध शिकार का खतरा |