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स्थानिक एवं संकटग्रस्त प्रजातियाँ Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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पीकॉक टारेंटयुला (गूटी टारेंटयुला) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. यह एक सर्वाहारी क्रस्टेशियन है।
II. भारत में इसका प्राकृतिक आवास केवल कुछ वन क्षेत्रों तक ही सीमित है।
III. अपने प्राकृतिक आवास में, यह एक वृक्षीय प्रजाति है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 4 — II और III
सरल व्याख्या:
कथन I — गलत। यह क्रस्टेशियन नहीं है — यह एक मकड़ी (Arachnid) है, विशेष रूप से एक टारेंटुला। क्रस्टेशियन (केकड़े/झींगा) पूरी तरह अलग समूह हैं।
कथन II — सही। इसका आवास भारत में पूर्वी घाट के कुछ सीमित वन क्षेत्रों तक सीमित है।
कथन III — सही। यह वृक्षवासी (Arboreal) है — यानी यह पेड़ों और उनकी दरारों में रहती है, ज़मीन पर नहीं।
याद रखने की तरकीब: "पीकॉक टारेंटुला = मकड़ी, वृक्षवासी, सीमित आवास" — क्रस्टेशियन नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पीकॉक टारेंटुला / गूटी टारेंटुला
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| वैज्ञानिक नाम | Poecilotheria metallica |
| प्रकार | मकड़ी (Arachnid) — क्रस्टेशियन नहीं |
| आवास | पूर्वी घाट, सीमित वन क्षेत्र (आंध्र प्रदेश क्षेत्र) |
| जीवनशैली | वृक्षवासी — पेड़ों/पेड़ की दरारों में रहती है |
| रंग | मेटैलिक नीला, मोर जैसे पैटर्न |
| संरक्षण स्थिति | गंभीर रूप से संकटग्रस्त (IUCN) |
| महत्व | विदेशी पालतू व्यापार में सबसे दुर्लभ टारेंटुला में से एक — अवैध शिकार का खतरा |
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
देश - अपने प्राकृतिक आवास में पाया जाने वाला पशु
1. ब्राज़ील - इंद्री
2. इंडोनेशिया - एल्क
3. मेडागास्कर - बोनोबो
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कोई नहीं
दिए गए देश-पशु युग्मों में से कोई भी सही सुमेलित नहीं है। उल्लिखित प्रत्येक पशु उस देश से पूरी तरह से भिन्न भौगोलिक क्षेत्र का मूल निवासी है जिसके साथ इसका युग्म बनाया गया है।
❌ युग्म 1 – गलत: इंद्री एक लीमर प्रजाति है जो केवल मेडागास्कर में स्थानिक है, ब्राज़ील में नहीं।
❌ युग्म 2 – गलत: एल्क (Cervus canadensis) उत्तरी अमेरिका और एशिया के कुछ भागों में पाए जाते हैं, इंडोनेशिया में नहीं।
❌ युग्म 3 – गलत: बोनोबो (Pan paniscus) एक महान वानर है जो विशेष रूप से कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में पाया जाता है, मेडागास्कर में नहीं।
📝 संक्षिप्त टिप्पणियाँ: स्थानिक प्रजातियाँ और उनके प्राकृतिक आवास
| पशु | वास्तविक प्राकृतिक आवास | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| इंद्री | मेडागास्कर (स्थानिक) | सबसे बड़ी जीवित लीमर प्रजाति; वृक्षवासी; गंभीर रूप से लुप्तप्राय; विशिष्ट ध्वनियों के लिए जानी जाती है |
| एल्क (वापिटी) | उत्तरी अमेरिका, मध्य/पूर्वी एशिया | बड़ी हिरण प्रजाति; वनों और वन किनारों में पाई जाती है; Cervus canadensis के नाम से भी जानी जाती है |
| बोनोबो | कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (स्थानिक) | महान वानर; चिंपैंजी से निकटता से संबंधित; लुप्तप्राय; निचले वर्षावनों में पाया जाता है |
| लीमर (सामान्य) | केवल मेडागास्कर | 100 से अधिक प्रजातियाँ; सभी मेडागास्कर में स्थानिक; अधिकतर वृक्षवासी प्राइमेट |
| अन्य मेडागास्कर स्थानिक | मेडागास्कर | फोसा (मांसाहारी), गिरगिट, बाओबाब वृक्ष - 90% से अधिक वन्यजीव स्थानिक हैं |
- स्थानिक प्रजातियाँ: विशेष रूप से एक भौगोलिक स्थान पर पाई जाने वाली प्रजातियाँ जो प्राकृतिक रूप से दुनिया में कहीं और नहीं पाई जातीं
- मेडागास्कर जैवविविधता: लगभग 88 मिलियन वर्षों से द्वीपीय अलगाव के कारण असाधारण स्थानिक जैवविविधता विकसित हुई है, विशेष रूप से लीमर, गिरगिट और अद्वितीय वनस्पति
- संरक्षण महत्व: वन्यजीव संरक्षण और स्थानिक प्रजातियों के विलुप्त होने से बचाने के लिए प्राकृतिक आवासों को समझना महत्वपूर्ण है
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- काजू
- पपीता
- रक्त चंदन
उपर्युक्त में से कितने वृक्ष वास्तव में भारत के मूल निवासी हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल एक
उल्लिखित तीन वृक्षों में से केवल रक्त चंदन भारत का मूल निवासी है, जो विशेष रूप से आंध्र प्रदेश की पूर्वी घाट में स्थानिक है। काजू और पपीता दोनों विदेशी प्रजातियाँ हैं जो औपनिवेशिक काल के दौरान यूरोपीय व्यापारियों द्वारा अमेरिका से भारत में लाई गई थीं।
✅ रक्त चंदन – भारत का मूल निवासी: पूर्वी घाट में स्थानिक, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश में, अपनी मूल्यवान लाल लकड़ी के लिए जाना जाता है।
❌ काजू – मूल निवासी नहीं: मूल रूप से ब्राज़ील से, 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा भारत में लाया गया।
❌ पपीता – मूल निवासी नहीं: दक्षिणी मेक्सिको और मध्य अमेरिका में उत्पन्न, औपनिवेशिक काल में भारत लाया गया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत के मूल निवासी बनाम विदेशी वृक्ष
- रक्त चंदन (Pterocarpus santalinus): भारत में स्थानिक, केवल आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों की पूर्वी घाट में पाया जाता है। अवैध कटाई और व्यापार के कारण यह CITES परिशिष्ट II में सूचीबद्ध है। यह वृक्ष मूल्यवान लाल अंतःकाष्ठ उत्पन्न करता है जिसका उपयोग फर्नीचर, संगीत वाद्ययंत्र और पारंपरिक चिकित्सा में होता है।
- काजू (Anacardium occidentale): ब्राज़ील का मूल निवासी, 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली उपनिवेशवादियों द्वारा गोवा में लाया गया। भारत अब काजू के उत्पादन और निर्यात में विश्व में सबसे बड़ा देश है, जिसकी प्रमुख खेती केरल, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र में होती है।
- पपीता (Carica papaya): उष्णकटिबंधीय अमेरिका (दक्षिणी मेक्सिको और मध्य अमेरिका) में उत्पन्न। पुर्तगाली और स्पेनिश व्यापारियों द्वारा भारत लाया गया। भारत अब विश्व स्तर पर पपीते के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है, जिसकी खेती उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होती है।
- अन्य मूल भारतीय वृक्ष: नीम (Azadirachta indica), बरगद (Ficus benghalensis), पीपल (Ficus religiosa), साल (Shorea robusta), सागौन (Tectona grandis), और चंदन (Santalum album)।
- भारत में अन्य विदेशी वृक्ष: यूकेलिप्टस (ऑस्ट्रेलिया), पाइन (शीतोष्ण क्षेत्र), रबड़ (ब्राज़ील), कॉफी (इथियोपिया), और चाय (चीन)।
- संरक्षण चिंता: रक्त चंदन को IUCN रेड लिस्ट में 'संकटग्रस्त' के रूप में वर्गीकृत किया गया है क्योंकि इसकी मूल्यवान लकड़ी के लिए अत्यधिक दोहन किया जाता है, जिसके कारण सख्त संरक्षण उपाय और तस्करी विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं।
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निम्नलिखित में से कौन पक्षी नहीं है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — गोल्डन महसीर
गोल्डन महसीर (Tor putitora) बड़ी मीठे पानी की मछली की एक प्रजाति है, पक्षी नहीं। इसे 'जल का बाघ' के रूप में जाना जाता है, यह हिमालयी क्षेत्र की मूल निवासी है और सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिन की तेज धाराओं और नदियों में निवास करती है। यह अपने बड़े सुनहरे शल्कों से पहचानी जाती है और वर्तमान में IUCN रेड लिस्ट में लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध है।
✅ विकल्प 2 – इंडियन नाइटजार: भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली एक निशाचर पक्षी प्रजाति, जो Caprimulgidae परिवार से संबंधित है।
✅ विकल्प 3 – स्पूनबिल: एक वेडिंग पक्षी जो अपनी विशिष्ट चम्मच के आकार की चोंच के लिए जाना जाता है, जो आर्द्रभूमि और दलदलों में पाया जाता है।
✅ विकल्प 4 – व्हाइट आइबिस: सफेद पंखों वाला एक वेडिंग पक्षी, जो आमतौर पर आर्द्रभूमि और तटीय क्षेत्रों में पाया जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय वन्यजीव प्रजातियाँ
- गोल्डन महसीर (Tor putitora): हिमालयी नदियों में पाई जाने वाली बड़ी मीठे पानी की मछली; 'जल का बाघ' के रूप में जानी जाती है; IUCN स्थिति: लुप्तप्राय; अत्यधिक मछली पकड़ने, आवास क्षरण और बांध निर्माण से खतरा।
- इंडियन नाइटजार: निशाचर कीटभक्षी पक्षी; गुप्त पंख उत्कृष्ट छलावरण प्रदान करते हैं; शुष्क झाड़ियों और खुले जंगलों में पाया जाता है।
- स्पूनबिल: यूरेशियन स्पूनबिल जैसी प्रजातियाँ शामिल हैं; अपनी चपटी चोंच को पानी में घुमाकर भोजन करता है; आर्द्रभूमि और उथले जल निकायों में निवास करता है।
- व्हाइट आइबिस: ब्लैक-हेडेड आइबिस (Threskiornis melanocephalus) शामिल है; आर्द्रभूमि में पाया जाने वाला वेडिंग पक्षी; जलीय अकशेरुकी और छोटी मछलियों पर भोजन करता है।
- संरक्षण महत्व: ये सभी प्रजातियाँ पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य के संकेतक हैं; आर्द्रभूमि पक्षी जल गुणवत्ता का संकेत देते हैं जबकि महसीर नदी स्वास्थ्य का संकेत देती है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
- एशियाई शेर प्राकृतिक रूप से केवल भारत में पाया जाता है।
- दो-कूबड़ वाला ऊंट प्राकृतिक रूप से केवल भारत में पाया जाता है।
- एक-सींग वाला गैंडा प्राकृतिक रूप से केवल भारत में पाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
तीन कथनों में से, केवल एशियाई शेर के बारे में कथन सही है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से केवल भारत में पाया जाता है। दो-कूबड़ वाले ऊंट और एक-सींग वाले गैंडे का प्राकृतिक विस्तार भारत की सीमाओं से परे है।
✅ कथन 1 – सही: एशियाई शेर (Panthera leo persica) प्राकृतिक रूप से केवल भारत में पाया जाता है, जिसकी संपूर्ण जंगली आबादी गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित है, IUCN रेड लिस्ट में लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध है।
❌ कथन 2 – गलत: दो-कूबड़ वाला ऊंट (बैक्ट्रियन ऊंट) प्राकृतिक रूप से मध्य एशिया, विशेष रूप से मंगोलिया और चीन में पाया जाता है; जबकि लद्दाख की नुब्रा घाटी में एक आबादी मौजूद है, लेकिन इसका प्राकृतिक विस्तार केवल भारत तक सीमित नहीं है।
❌ कथन 3 – गलत: एक-सींग वाला गैंडा (भारतीय गैंडा) प्राकृतिक रूप से भारत (असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश) और नेपाल दोनों में पाया जाता है, जो इसे दोनों देशों की साझा प्राकृतिक धरोहर बनाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत की स्थानिक और देशी प्रजातियाँ
| प्रजाति | प्राकृतिक विस्तार | संरक्षण स्थिति (IUCN) | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|---|
| एशियाई शेर | केवल भारत (गिर, गुजरात) | लुप्तप्राय | विश्व स्तर पर अंतिम जंगली आबादी; सफल संरक्षण से संख्या ~20 (1913) से बढ़कर 600 से अधिक (2020) हो गई है |
| एक-सींग वाला गैंडा | भारत और नेपाल | संवेदनशील | काजीरंगा, मानस, पोबितोरा (असम), जलदापाड़ा (पश्चिम बंगाल), दुधवा (उत्तर प्रदेश), और चितवन (नेपाल) में पाया जाता है |
| दो-कूबड़ वाला ऊंट (बैक्ट्रियन) | मध्य एशिया (मंगोलिया, चीन) | गंभीर रूप से लुप्तप्राय (जंगली), पालतू (भारत) | लद्दाख में नुब्रा घाटी की आबादी पालतू है; जंगली आबादी केवल मंगोलिया और चीन में मौजूद है |
| हंगुल (कश्मीर हिरण) | केवल भारत (कश्मीर) | गंभीर रूप से लुप्तप्राय | केवल दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान में पाया जाता है; आबादी गंभीर रूप से कम (~200) |
| नीलगिरि तहर | केवल भारत (पश्चिमी घाट) | लुप्तप्राय | पश्चिमी घाट का स्थानिक, तमिलनाडु का राज्य पशु |
| शेर-पूंछ मकाक | केवल भारत (पश्चिमी घाट) | लुप्तप्राय | कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु में पश्चिमी घाट के वर्षावनों का स्थानिक |
भारत में, यदि कछुए की किसी प्रजाति को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित घोषित किया जाता है, तो इसका क्या अर्थ है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — यह बाघ के समान स्तर का संरक्षण प्राप्त करता है।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I भारत में लुप्तप्राय प्रजातियों को उच्चतम स्तर की कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है। अनुसूची I के तहत सूचीबद्ध कोई भी प्रजाति, चाहे वह बाघ, हाथी या कछुआ हो, को शिकार, व्यापार और आवास विनाश से पूर्ण संरक्षण सहित समान कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है, और उल्लंघन के लिए सबसे कड़े दंड का प्रावधान है।
❌ विकल्प 2 – गलत: यह IUCN रेड लिस्ट की श्रेणी 'जंगल में विलुप्त' का वर्णन करता है, जो एक जैविक संरक्षण स्थिति है, न कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत कानूनी पदनाम।
❌ विकल्प 3 – गलत: स्थानिकता (किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित होना) अनुसूची I में सूचीबद्ध करने का मानदंड नहीं है; प्रजातियों को खतरे की डिग्री और संरक्षण की आवश्यकता के आधार पर सूचीबद्ध किया जाता है, उनकी भौगोलिक सीमा की परवाह किए बिना।
❌ विकल्प 4 – गलत: चूंकि कथन B और C दोनों गलत हैं, इसलिए यह विकल्प भी गलत है।
नोट: वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 ने मूल छह अनुसूचियों को चार अनुसूचियों में युक्तिसंगत बनाया है, लेकिन अनुसूची I उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करना जारी रखती है।
यदि आप घड़ियालों को उनके प्राकृतिक आवास में देखना चाहते हैं, तो निम्नलिखित में से कौन सा स्थान घूमने के लिए सबसे अच्छा है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — चम्बल नदी
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य, जो मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में फैली चम्बल नदी के किनारे स्थित है, घड़ियालों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए सबसे अच्छा स्थान है। यह त्रि-राज्यीय संरक्षित क्षेत्र गंभीर रूप से लुप्तप्राय घड़ियाल, जो एक मछली खाने वाली मगरमच्छ प्रजाति है, के संरक्षण के लिए समर्पित सबसे महत्वपूर्ण अभयारण्यों में से एक है। यह अभयारण्य घड़ियालों के प्रजनन और जीवित रहने के लिए आदर्श नदी की स्थितियाँ प्रदान करता है, जिससे यह इन अद्वितीय सरीसृपों को जंगली में देखने के लिए प्रमुख गंतव्य बन जाता है।
'खारई ऊँट' जो भारत में पाई जाने वाली एक नस्ल है, के बारे में क्या अनूठा है?
- यह समुद्री जल में तीन किलोमीटर तक तैरने में सक्षम है।
- यह मैंग्रोव पर चरकर जीवित रहता है।
- यह जंगली रूप में रहता है और इसे पालतू नहीं बनाया जा सकता।
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
✅ कथन 1 – सही: खारई ऊँटों में समुद्री जल में तीन किलोमीटर तक तैरने की अनूठी क्षमता होती है, जो उन्हें चराई के लिए कच्छ की खाड़ी में तटीय मैंग्रोव द्वीपों तक पहुँचने में सक्षम बनाती है।
✅ कथन 2 – सही: 'खारई' नाम गुजराती शब्द 'खारा' से लिया गया है, जो उनके मुख्य आहार नमक-सहिष्णु पौधों और मैंग्रोव को दर्शाता है। यह अनुकूलन उन्हें गुजरात के कठोर तटीय पारिस्थितिकी तंत्र में जीवित रहने में मदद करता है।
❌ कथन 3 – गलत: खारई ऊँट अर्ध-पालतू पशु हैं जिन्हें कच्छ क्षेत्र में मालधारी पशुपालक समुदायों द्वारा पाला जाता है। इनका उपयोग दूध उत्पादन के लिए किया जाता है, और इनके नर बछड़ों को अक्सर व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए बेचा जाता है।
भारत के निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में आप अपने प्राकृतिक आवास में 'ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल' को देखने की सबसे अधिक संभावना रखते हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — पश्चिमी घाट
ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल (Buceros bicornis) एक बड़ा फलाहारी पक्षी है जो भारत के घने सदाबहार और नम पर्णपाती वनों का मूल निवासी है। भारत में इसका प्राकृतिक आवास मुख्य रूप से पश्चिमी घाट में केंद्रित है, जहां यह प्रचुर फल देने वाले पेड़ों के साथ उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पनपता है। यह पक्षी पूर्वोत्तर राज्यों में हिमालय की तलहटी में भी पाया जाता है, लेकिन दिए गए विकल्पों में पश्चिमी घाट सही उत्तर है। इस प्रजाति को घोंसले बनाने और बसेरा करने के लिए ऊंचे पेड़ों की आवश्यकता होती है, जिससे उत्तर पश्चिम भारत के रेतीले मरुस्थल, जम्मू और कश्मीर के उच्च ठंडे हिमालय और गुजरात के नमक दलदल अनुपयुक्त आवास बन जाते हैं। आवास की हानि और शिकार के दबाव के कारण इसे संवेदनशील के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
'रेड सैंडर्स' के संदर्भ में, जो कभी-कभी समाचारों में देखा जाता है, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह दक्षिण भारत के एक भाग में पाई जाने वाली वृक्ष प्रजाति है।
- यह दक्षिण भारत के उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में सबसे महत्वपूर्ण वृक्षों में से एक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
✅ कथन 1 – सही: रेड सैंडर्स (टेरोकार्पस सैंटालिनस), जिसे लाल चंदन के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण भारत की पूर्वी घाट पर्वत श्रृंखला में पाई जाने वाली एक स्थानिक वृक्ष प्रजाति है, जो मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों में पाई जाती है।
❌ कथन 2 – गलत: रेड सैंडर्स उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में नहीं पाया जाता है। यह पूर्वी घाट के शुष्क पर्णपाती वनों और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगता है, जहाँ चट्टानी इलाके और कम वर्षा वाले झाड़ीदार वन होते हैं, जो उष्णकटिबंधीय वर्षावन पारिस्थितिकी तंत्र से बिल्कुल अलग हैं।
हाल ही में, हमारे वैज्ञानिकों ने केले के पौधे की एक नई और विशिष्ट प्रजाति खोजी है जो लगभग 11 मीटर की ऊंचाई प्राप्त करती है और इसके फल का गूदा नारंगी रंग का है। भारत के किस भाग में इसकी खोज की गई है?
Detailed Explanation:
मूसा इंडअंडमानेंसिस, केले की एक नई प्रजाति जो 11 मीटर ऊंचाई तक पहुंचती है और जिसका फल का गूदा नारंगी रंग का है, की खोज भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) द्वारा लिटिल अंडमान द्वीप के उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों में की गई थी।
यह प्रजाति अपने हरे फूलों, बड़े फलों के गुच्छे की धुरी (सामान्य आकार से तीन गुना), बेलनाकार फूलों (शंक्वाकार के बजाय), और नारंगी गूदे के लिए अद्वितीय है—जो अंडमान द्वीप समूह को सही उत्तर बनाता है।
'डुगोंग' के संदर्भ में, जो भारत में पाया जाने वाला एक स्तनपायी है, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह एक शाकाहारी समुद्री जीव है।
- यह भारत के संपूर्ण तट के साथ पाया जाता है।
- इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची 1 के तहत कानूनी संरक्षण दिया गया है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: डुगोंग एक शाकाहारी समुद्री स्तनपायी है जो उथले तटीय जल में समुद्री घास के मैदानों पर ही भोजन करता है।
❌ कथन 2 – गलत: डुगोंग भारत के संपूर्ण तट पर नहीं पाए जाते; ये केवल मन्नार की खाड़ी, पाक खाड़ी, कच्छ की खाड़ी, और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह तक सीमित हैं।
✅ कथन 3 – सही: डुगोंग को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I के तहत सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है, जिससे इनका शिकार या हानि गंभीर अपराध है।
निम्नलिखित में से कौन सा भारत का राष्ट्रीय जलीय पशु है?
Detailed Explanation:
गंगा डॉल्फिन (Platanista gangetica) को 18 मई 2010 को पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा भारत का राष्ट्रीय जलीय पशु घोषित किया गया था।
यह अंधी डॉल्फिन, जिसे सुसु भी कहा जाता है, IUCN Red List में लुप्तप्राय (Endangered) सूचीबद्ध है और 2000 से कम व्यक्ति शेष हैं, जो गंगा नदी तंत्र में प्रदूषण और आवास विनाश से खतरे में हैं।
अवैध शिकार के अलावा, गंगा नदी डॉल्फिन की आबादी में गिरावट के संभावित कारण क्या हैं?
- नदियों पर बांधों और बराजों का निर्माण
- नदियों में मगरमच्छों की आबादी में वृद्धि
- मछली पकड़ने के जाल में आकस्मिक रूप से फंसना
- नदियों के आसपास फसल के खेतों में सिंथेटिक उर्वरकों और अन्य कृषि रसायनों का उपयोग
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: बांध और बराज नदी आवासों को खंडित करते हैं, प्रवास को प्रतिबंधित करते हैं, डॉल्फिन आबादी को अलग-थलग करते हैं, और शिकार की उपलब्धता कम करते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: मगरमच्छ आबादी में वृद्धि डॉल्फिन गिरावट का प्रलेखित कारण नहीं है; दोनों प्रजातियां स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र में सह-अस्तित्व में रहती हैं।
✅ कथन 3 – सही: मछली पकड़ने के जाल में आकस्मिक उलझाव (गिलनेट) मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है, जिससे डॉल्फिन डूब जाती हैं।
✅ कथन 4 – सही: कृषि रसायन अपवाह नदियों को प्रदूषित करता है, शिकार प्रजातियों को दूषित करता है और डॉल्फिन में विषाक्त पदार्थों का जैव-संचय करता है।
भारत के निम्नलिखित जीवों पर विचार कीजिये:
- घड़ियाल
- लेदरबैक कछुआ
- दलदली हिरण
उपर्युक्त में से कौन सा/से संकटग्रस्त (endangered) है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ घड़ियाल (Gavialis gangeticus) – IUCN रेड लिस्ट पर गंभीर रूप से संकटग्रस्त (CR) सूचीबद्ध; निवास स्थान की हानि, शिकार की कमी और मछली पकड़ने के जाल के कारण जनसंख्या में भारी गिरावट।
✅ लेदरबैक कछुआ (Dermochelys coriacea) – वैश्विक स्तर पर सुभेद्य (VU) श्रेणी में; अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में पाया जाता है; अनुसूची I, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित।
✅ दलदली हिरण/बारहसिंगा (Rucervus duvaucelii) – IUCN रेड लिस्ट पर सुभेद्य (VU) सूचीबद्ध; निवास विखंडन और घास के मैदानों के रूपांतरण से खतरा।
तीनों प्रजातियाँ IUCN 'संकटग्रस्त' श्रेणियों (CR/EN/VU) में आती हैं और व्यापक संरक्षण संदर्भ में संकटग्रस्त मानी जाती हैं।
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