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जैव विविधता संरक्षण Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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हाल ही में, हमारे देश में हिमालयी बिच्छू बूटी (Girardinia diversifolia) के महत्व के बारे में बढ़ती जागरूकता रही है क्योंकि यह निम्नलिखित का एक सतत स्रोत पाया गया है:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — वस्त्र रेशा
हिमालयी बिच्छू बूटी (Girardinia diversifolia) हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली एक जंगली पौधा है जो पादप जगत में सबसे लंबे प्राकृतिक रेशों का उत्पादन करती है, जो इसके तने से निकाले जाते हैं। ये रेशे मजबूत, टिकाऊ और जैव-अपघटनीय होते हैं, जो इन्हें सिंथेटिक वस्त्रों का एक उत्कृष्ट सतत विकल्प बनाते हैं और यहां तक कि सन या भांग के रेशों के बराबर होते हैं। हाल के वर्षों में यह पौधा फैशन और कपड़ा उद्योग के लिए पर्यावरण-अनुकूल वस्त्र सामग्री के स्रोत के रूप में ध्यान आकर्षित कर रहा है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: हिमालयी बिच्छू बूटी (Girardinia diversifolia)
- आवास: भारत, नेपाल, भूटान और चीन के कुछ हिस्सों में हिमालयी क्षेत्रों में 1200-3000 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाती है।
- रेशे की विशेषताएं: 2.5 मीटर तक लंबे रेशे उत्पन्न करती है, जो सबसे लंबे प्राकृतिक पादप रेशों में से हैं; ये मजबूत, चमकदार और अच्छी नमी अवशोषण क्षमता वाले होते हैं।
- वस्त्र अनुप्रयोग: पर्यावरण-अनुकूल कपड़े, रस्सियां और पारंपरिक परिधान बनाने के लिए उपयोग किया जाता है; कपास या ऊन जैसे अन्य प्राकृतिक रेशों के साथ मिश्रित किया जा सकता है।
- सततता: न्यूनतम पानी की आवश्यकता होती है, कोई कीटनाशक की आवश्यकता नहीं, और जंगली रूप से उगता है; कटाई मैनुअल रूप से की जाती है बिना पौधे की जड़ प्रणाली को नुकसान पहुंचाए, जिससे पुनः वृद्धि संभव होती है।
- आर्थिक क्षमता: हिमालयी समुदायों के लिए आजीविका के अवसर प्रदान करती है; सिंथेटिक रेशों और कपास के सतत विकल्प के रूप में प्रचारित की जा रही है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कानून के अनुसार, प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर विद्यमान है।
- प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 के तहत किए जाने वाले प्रतिपूरक वनीकरण कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) की स्थापना प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 के तहत प्रतिपूरक वनीकरण गतिविधियों के लिए एकत्रित धन के प्रबंधन हेतु की गई थी। यह अधिनियम संबंधित स्तरों पर इन निधियों के उचित प्रशासन और उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय CAMPA और राज्य CAMPA दोनों के निर्माण को अनिवार्य बनाता है। हालांकि, यह अधिनियम प्रतिपूरक वनीकरण कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी को स्पष्ट रूप से अनिवार्य नहीं बनाता है।
✅ कथन 1 – सही: प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016, राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर CAMPA की स्थापना करता है। राष्ट्रीय CAMPA राष्ट्रीय स्तर पर निधि प्रबंधन की देखरेख करता है, जबकि राज्य CAMPA प्रतिपूरक वनीकरण गतिविधियों के लिए अपने संबंधित क्षेत्राधिकार के भीतर धन का प्रबंधन करते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 में प्रतिपूरक वनीकरण कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी को अनिवार्य बनाने वाला कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। यह अधिनियम मुख्य रूप से सार्वजनिक भागीदारी की आवश्यकताओं के बजाय निधि प्रबंधन, उपयोग तंत्र और संस्थागत संरचनाओं पर केंद्रित है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA)
- कानूनी ढांचा: गैर-वन उद्देश्यों के लिए परिवर्तित वन भूमि से एकत्रित धन के प्रबंधन के लिए प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम, 2016 के तहत स्थापित।
- दो-स्तरीय संरचना: विकेंद्रीकृत निधि प्रबंधन के लिए केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय CAMPA और प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में राज्य CAMPA।
- निधि स्रोत: जब वन भूमि को परिवर्तित किया जाता है तो उपयोगकर्ता एजेंसियों से नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) और प्रतिपूरक वनीकरण शुल्क के रूप में एकत्रित धन।
- निधि उपयोग: प्रतिपूरक वनीकरण, सहायता प्राप्त प्राकृतिक पुनर्जनन, वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और वनों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उपयोग किया जाता है।
- राष्ट्रीय CAMPA संरचना: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में विभिन्न मंत्रालयों और विशेषज्ञों के सदस्यों के साथ।
- राज्य CAMPA संरचना: राज्य के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य वन अधिकारियों और अन्य प्रासंगिक हितधारकों के साथ।
- मुख्य उद्देश्य: वन संसाधनों के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन और संरक्षण के लिए धन के पारदर्शी और कुशल उपयोग को सुनिश्चित करना।
हाल ही में गुजरात में शेरों को उनके प्राकृतिक आवास से निम्नलिखित में से किस एक स्थल पर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव था?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कूनो पालपुर वन्यजीव अभयारण्य
पर्यावरण मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के कूनो पालपुर वन्यजीव अभयारण्य (अब कूनो राष्ट्रीय उद्यान) को गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान से एशियाई शेरों के स्थानांतरण के लिए दूसरे आवास के रूप में अनुमोदित किया। यह स्थानांतरण एशियाई शेरों की दूसरी व्यवहार्य आबादी बनाने के लिए प्रस्तावित किया गया था ताकि उनके दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित किया जा सके और एकल स्थान पर बीमारी के प्रकोप या प्राकृतिक आपदाओं से विलुप्ति के जोखिम को कम किया जा सके। हालांकि, विभिन्न प्रशासनिक और संरक्षण चिंताओं के कारण स्थानांतरण में देरी हुई है।
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शब्द 'M-STRIPES' कभी-कभी समाचारों में किस संदर्भ में देखा जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — बाघ अभयारण्यों का रखरखाव
M-STRIPES का पूर्ण रूप Monitoring System for Tigers - Intensive Protection and Ecological Status (बाघों के लिए निगरानी प्रणाली - गहन संरक्षण और पारिस्थितिक स्थिति) है। यह राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा शुरू की गई एक सॉफ्टवेयर-आधारित निगरानी प्रणाली है जो भारत भर के बाघ अभयारण्यों में बाघ संरक्षण को मजबूत करने और गश्ती गतिविधियों को बढ़ाने के लिए है। यह प्रणाली बाघ अभयारण्यों में वन रक्षकों और कर्मचारियों द्वारा गश्ती प्रयासों, वन्यजीव दृश्यों और पारिस्थितिक मापदंडों की वास्तविक समय निगरानी को सक्षम बनाती है।
'द इकोनॉमिक्स ऑफ इकोसिस्टम्स एंड बायोडायवर्सिटी (TEEB)' नामक पहल के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह UNEP, IMF और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा आयोजित एक पहल है।
- यह एक वैश्विक पहल है जो जैव विविधता के आर्थिक लाभों की ओर ध्यान आकर्षित करने पर केंद्रित है।
- यह एक ऐसा दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है जो निर्णयकर्ताओं को पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के मूल्य को पहचानने, प्रदर्शित करने और संग्रहित करने में मदद कर सकती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 2 और 3
❌ कथन 1 – गलत: TEEB को 2007 में जर्मनी और यूरोपीय आयोग द्वारा G8+5 पर्यावरण मंत्रियों के प्रस्ताव के बाद शुरू किया गया था। TEEB कार्यालय केवल संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा आयोजित है, IMF या वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा नहीं।
✅ कथन 2 – सही: TEEB एक वैश्विक पहल है जो जैव विविधता के आर्थिक लाभों की ओर ध्यान आकर्षित करने पर केंद्रित है। यह विज्ञान, अर्थशास्त्र और नीति से विशेषज्ञता को एक साथ लाकर जैव विविधता हानि और पारिस्थितिकी तंत्र क्षरण की बढ़ती लागत को उजागर करती है।
✅ कथन 3 – सही: TEEB एक स्तरीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है जो निर्णयकर्ताओं को पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के मूल्य को पहचानने, प्रदर्शित करने और संग्रहित करने में मदद करती है। यह दृष्टिकोण नीति-निर्माण और आर्थिक लेखांकन में पारिस्थितिकी तंत्र मूल्यों के एकीकरण को सुविधाजनक बनाता है।
हाल ही में, हमारे देश में पहली बार किस राज्य ने एक विशेष तितली को 'राज्य तितली' घोषित किया है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — महाराष्ट्र
महाराष्ट्र 2015 में राज्य तितली घोषित करने वाला भारत का पहला राज्य बना। राज्य ने ब्लू मॉर्मन (Papilio polymnestor) को अपनी आधिकारिक तितली के रूप में घोषित किया। ब्लू मॉर्मन एक बड़ी, आकर्षक तितली है जिसके काले मखमली पंखों पर चमकीले नीले धब्बे होते हैं, जो पश्चिमी घाट और राज्य के अन्य वन क्षेत्रों में पाई जाती है। यह घोषणा महाराष्ट्र के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों का हिस्सा थी ताकि देशी प्रजातियों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।
UN-REDD+ कार्यक्रम का उचित डिजाइन और प्रभावी कार्यान्वयन महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है -
- जैव विविधता की सुरक्षा
- वन पारिस्थितिकी तंत्र की लचीलापन
- गरीबी में कमी
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
UN-REDD+ (वनों की कटाई और वन क्षरण से उत्सर्जन में कमी) कार्यक्रम विकासशील देशों को वन-आधारित उत्सर्जन कम करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन देता है और साथ ही टिकाऊ वन प्रबंधन को बढ़ावा देता है। तीनों कथन सही हैं:
✅ कथन 1 – सही: REDD+ वनों की कटाई और वन क्षरण को रोककर जैव विविधता की रक्षा करता है, जिससे वन पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर वनस्पतियों और जीवों की विविध प्रजातियों का संरक्षण होता है।
✅ कथन 2 – सही: यह कार्यक्रम टिकाऊ वन प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देकर वन पारिस्थितिकी तंत्र की लचीलापन बढ़ाता है, जो वनों को जलवायु परिवर्तन प्रभावों, प्राकृतिक गड़बड़ी और पर्यावरणीय दबावों का बेहतर सामना करने में मदद करता है।
✅ कथन 3 – सही: REDD+ वन-आश्रित समुदायों को वित्तीय प्रोत्साहन और वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करके गरीबी में कमी लाता है, उन्हें शोषणकारी प्रथाओं के बजाय टिकाऊ वन संरक्षण में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।
भारत के एक विशेष क्षेत्र में, स्थानीय लोग जीवित पेड़ों की जड़ों को धाराओं के पार मजबूत पुलों में प्रशिक्षित करते हैं। समय बीतने के साथ ये पुल मजबूत होते जाते हैं। ये अनूठे 'लिविंग रूट ब्रिज' कहाँ पाए जाते हैं -
Detailed Explanation:
लिविंग रूट ब्रिज (जीवित जड़ पुल) मेघालय में पाए जाते हैं, जिन्हें खासी और जयंतिया जनजातियों द्वारा फाइकस इलास्टिका (भारतीय रबर के पेड़) की हवाई जड़ों को प्रशिक्षित कर धाराओं के पार पुल बनाने के लिए तैयार किया जाता है।
ये पुल समय के साथ मजबूत होते जाते हैं, पूरी तरह कार्यात्मक होने में 10-15 वर्ष लगते हैं, और मुख्य रूप से मेघालय के चेरापूंजी और मॉसिनराम क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
प्रत्येक वर्ष, एक महीने तक चलने वाला पारिस्थितिकीय रूप से महत्वपूर्ण अभियान/त्योहार आयोजित किया जाता है जिसके दौरान कुछ समुदाय/जनजातियाँ फलदार पेड़ों के पौधे रोपते हैं। निम्नलिखित में से कौन से ऐसे समुदाय/जनजातियाँ हैं?
Detailed Explanation:
मध्य प्रदेश की गोंड और कोरकू जनजातियाँ (विशेषकर बैतूल और हरदा जिलों में) मानसून के मौसम में हरि जिरोटी त्योहार मनाती हैं।
यह एक महीने का पारिस्थितिकीय अभियान फलदार पेड़ों के पौधे रोपने का कार्य करता है, जो इन आदिवासी समुदायों द्वारा जैव विविधता संरक्षण और सतत संसाधन प्रबंधन की पारंपरिक प्रथाओं को दर्शाता है।
कंटूर बंडिंग मृदा संरक्षण की एक विधि है जिसका उपयोग किया जाता है
Detailed Explanation:
कंटूर बंडिंग एक मृदा और जल संरक्षण तकनीक है जिसका उपयोग ढलान वाली भूमि (आमतौर पर 2-10% ढाल) पर किया जाता है जहां समोच्च रेखाओं के साथ मिट्टी के तटबंध बनाए जाते हैं ताकि जल बहाव की गति को कम किया जा सके और मृदा अपरदन को रोका जा सके।
यह मुख्य रूप से वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में हल्की से मध्यम ढलानों पर उपयोग की जाती है, न कि मरुस्थल के किनारों में (जहां पवन अवरोधक प्रयोग होते हैं), समतल मैदानों में (जहां समतलीकरण/जल निकासी की आवश्यकता होती है), या झाड़ीदार भूमि में (जहां खरपतवार नियंत्रण समोच्च संरचनाओं से असंबंधित है)।
निम्नलिखित जीवों पर विचार कीजिए:
- Agaricus
- Nostoc
- Spirogyra
उपर्युक्त में से कौन जैव उर्वरक/जैव उर्वरकों के रूप में प्रयोग किया जाता है/किये जाते हैं?
Detailed Explanation:
नोस्टॉक एक नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाला सायनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल) है जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करने और मिट्टी को समृद्ध बनाने की क्षमता के कारण जैव उर्वरक के रूप में उपयोग किया जाता है।
एगेरिकस एक मशरूम (कवक) है जिसका उपयोग भोजन के लिए किया जाता है, जैव उर्वरक के रूप में नहीं।
स्पाइरोगाइरा एक हरा शैवाल (तंतुमय) है जिसका उपयोग अनुसंधान और शिक्षा के लिए किया जाता है, जैव उर्वरक के रूप में नहीं।
भारत सरकार 'सी बकथॉर्न' (sea buckthorn) की खेती को प्रोत्साहित करती है। इस पौधे का क्या महत्व है?
- यह मृदा अपरदन को नियंत्रित करने और मरुस्थलीकरण को रोकने में सहायता करता है।
- यह जैव-डीजल का एक समृद्ध स्रोत है।
- इसमें पोषण मूल्य है और यह उच्च ऊंचाई के ठंडे क्षेत्रों में रहने के लिए अच्छी तरह से अनुकूलित है।
- इसकी लकड़ी बहुत अधिक वाणिज्यिक मूल्य की है।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सी बकथॉर्न एक मृदा-बंधक पौधा है जिसकी व्यापक जड़ प्रणाली है जो प्रभावी रूप से मृदा अपरदन को नियंत्रित करती है और मरुस्थलीकरण को रोकती है, विशेषकर नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्रों में।
❌ कथन 2 – गलत: सी बकथॉर्न जैव-डीजल का स्रोत नहीं है; इसकी खेती इसके जामुन, पत्तियों और औषधीय/पोषण उत्पादों के लिए की जाती है, जैव ईंधन उत्पादन के लिए नहीं।
✅ कथन 3 – सही: इस पौधे में उच्च पोषण मूल्य है और इसके जामुन विटामिन C, E, कैरोटीनॉयड और ओमेगा फैटी एसिड से भरपूर हैं, और यह ठंडे, उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे लद्दाख और स्पीति में पनपता है (-40°C से +40°C सहनशीलता)।
❌ कथन 4 – गलत: सी बकथॉर्न एक झाड़ी है, लकड़ी का पेड़ नहीं; इसका वाणिज्यिक मूल्य फलों, सौंदर्य प्रसाधनों, फार्मास्यूटिकल्स में है, लकड़ी में नहीं।
गिद्ध जो कुछ वर्ष पहले भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत आम थे, आजकल शायद ही कभी दिखाई देते हैं। यह किस कारण से है
Detailed Explanation:
डाइक्लोफेनाक, एक गैर-स्टेरॉयडल सूजनरोधी दवा (NSAID) जिसका उपयोग पशुपालक पशुधन के उपचार के लिए करते थे, ने भारत में गिद्धों की आबादी में विनाशकारी गिरावट का कारण बना।
डाइक्लोफेनाक-उपचारित पशुओं की लाशों को खाने वाले गिद्धों को तीव्र गुर्दे की विफलता हुई, जिससे 1990 के दशक और 2000 के दशक की शुरुआत के बीच तीन प्रजातियों (सफेद पीठ वाले, भारतीय, और पतली चोंच वाले गिद्ध) की आबादी में 99% की गिरावट आई। भारत ने 2006 में पशु चिकित्सा डाइक्लोफेनाक पर प्रतिबंध लगाया।
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