निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- काजू
- पपीता
- रक्त चंदन
उपर्युक्त में से कितने वृक्ष वास्तव में भारत के मूल निवासी हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल एक
उल्लिखित तीन वृक्षों में से केवल रक्त चंदन भारत का मूल निवासी है, जो विशेष रूप से आंध्र प्रदेश की पूर्वी घाट में स्थानिक है। काजू और पपीता दोनों विदेशी प्रजातियाँ हैं जो औपनिवेशिक काल के दौरान यूरोपीय व्यापारियों द्वारा अमेरिका से भारत में लाई गई थीं।
✅ रक्त चंदन – भारत का मूल निवासी: पूर्वी घाट में स्थानिक, विशेष रूप से आंध्र प्रदेश में, अपनी मूल्यवान लाल लकड़ी के लिए जाना जाता है।
❌ काजू – मूल निवासी नहीं: मूल रूप से ब्राज़ील से, 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा भारत में लाया गया।
❌ पपीता – मूल निवासी नहीं: दक्षिणी मेक्सिको और मध्य अमेरिका में उत्पन्न, औपनिवेशिक काल में भारत लाया गया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत के मूल निवासी बनाम विदेशी वृक्ष
- रक्त चंदन (Pterocarpus santalinus): भारत में स्थानिक, केवल आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों की पूर्वी घाट में पाया जाता है। अवैध कटाई और व्यापार के कारण यह CITES परिशिष्ट II में सूचीबद्ध है। यह वृक्ष मूल्यवान लाल अंतःकाष्ठ उत्पन्न करता है जिसका उपयोग फर्नीचर, संगीत वाद्ययंत्र और पारंपरिक चिकित्सा में होता है।
- काजू (Anacardium occidentale): ब्राज़ील का मूल निवासी, 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली उपनिवेशवादियों द्वारा गोवा में लाया गया। भारत अब काजू के उत्पादन और निर्यात में विश्व में सबसे बड़ा देश है, जिसकी प्रमुख खेती केरल, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र में होती है।
- पपीता (Carica papaya): उष्णकटिबंधीय अमेरिका (दक्षिणी मेक्सिको और मध्य अमेरिका) में उत्पन्न। पुर्तगाली और स्पेनिश व्यापारियों द्वारा भारत लाया गया। भारत अब विश्व स्तर पर पपीते के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है, जिसकी खेती उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होती है।
- अन्य मूल भारतीय वृक्ष: नीम (Azadirachta indica), बरगद (Ficus benghalensis), पीपल (Ficus religiosa), साल (Shorea robusta), सागौन (Tectona grandis), और चंदन (Santalum album)।
- भारत में अन्य विदेशी वृक्ष: यूकेलिप्टस (ऑस्ट्रेलिया), पाइन (शीतोष्ण क्षेत्र), रबड़ (ब्राज़ील), कॉफी (इथियोपिया), और चाय (चीन)।
- संरक्षण चिंता: रक्त चंदन को IUCN रेड लिस्ट में 'संकटग्रस्त' के रूप में वर्गीकृत किया गया है क्योंकि इसकी मूल्यवान लकड़ी के लिए अत्यधिक दोहन किया जाता है, जिसके कारण सख्त संरक्षण उपाय और तस्करी विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं।
Question 3 of 19 स्थानिक एवं संकटग्रस्त प्रजातियाँ
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