UPSC CSE Prelims
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
Chapter Breakdown: Scroll →
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: 28वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP28) में, भारत ने "जलवायु और स्वास्थ्य पर घोषणा" पर हस्ताक्षर करने से परहेज किया।
कथन II: जलवायु और स्वास्थ्य पर COP28 घोषणा एक बाध्यकारी घोषणा है; और यदि हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो स्वास्थ्य क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करना अनिवार्य हो जाता है।
कथन III: यदि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को कार्बन मुक्त किया जाता है, तो इसकी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की लचीलापन से समझौता किया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3
COP28 में भारत ने Declaration on Climate and Health पर हस्ताक्षर नहीं किए। भारत की चिंता जलवायु-अनुकूल स्वास्थ्य व्यवस्था के लक्ष्य से नहीं थी, बल्कि इस बात से थी कि तेज़ी से डीकार्बोनाइजेशन करने पर विकासशील देश में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
✅ कथन I सही है: भारत ने COP28 के Climate and Health Declaration पर हस्ताक्षर नहीं किए।
❌ कथन II गलत है: यह घोषणा स्वैच्छिक (Voluntary) और गैर-बाध्यकारी (Non-Binding) है। इस पर हस्ताक्षर करने से कोई कानूनी बाध्यता नहीं बनती।
✅ कथन III सही है: भारत को चिंता थी कि स्वास्थ्य क्षेत्र के तेज़ डीकार्बोनाइजेशन से स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और पहुंच प्रभावित हो सकती है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: स्वास्थ्य क्षेत्र की लचीलापन (Resilience) और विकास संबंधी प्राथमिकताओं की चिंता भारत के निर्णय का प्रमुख कारण थी।
❌ कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता: क्योंकि यह घोषणा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, इसलिए कथन II तथ्यात्मक रूप से गलत है।
संक्षिप्त नोट्स: COP28 Declaration on Climate and Health
-
यह घोषणा COP28 (दुबई, 2023) में शुरू की गई थी।
-
इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के संबंध को उजागर करना है।
-
यह एक स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी घोषणा है।
-
यह देशों को जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणालियाँ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
-
120 से अधिक देशों ने इसका समर्थन किया।
-
भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और विकास संबंधी चिंताओं के कारण इस पर हस्ताक्षर नहीं किए।
-
जलवायु परिवर्तन से हीटवेव, बीमारियाँ, बाढ़ और चरम मौसम घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 पर सतत विकास और जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक चर्चाओं में अक्सर चर्चा की जाती है।
कथन II: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6 कार्बन बाजारों के सिद्धांतों को निर्धारित करता है।
कथन III: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 का उद्देश्य अपने जलवायु लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए अंतर-देशीय गैर-बाजार रणनीतियों को बढ़ावा देना है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1
पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6 (Article 6) देशों को जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सहयोग का ढांचा प्रदान करता है। इसमें कार्बन बाजार (Market Mechanisms) तथा गैर-बाजार (Non-Market) उपाय दोनों शामिल हैं, इसलिए यह जलवायु वार्ताओं में सबसे अधिक चर्चा वाले प्रावधानों में से एक है।
✅ कथन I सही है: अनुच्छेद 6 देशों को अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सहयोग करने की व्यवस्था देता है, इसलिए इसकी व्यापक चर्चा होती है।
✅ कथन II सही है: अनुच्छेद 6 अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजारों और कार्बन क्रेडिट व्यापार के सिद्धांतों एवं नियमों का आधार प्रदान करता है।
✅ कथन III सही है: यह गैर-बाजार उपायों जैसे तकनीकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और नीति सहयोग को भी बढ़ावा देता है।
✅ कथन II, कथन I की व्याख्या करता है: कार्बन बाजार अनुच्छेद 6 के सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित पहलुओं में से एक हैं।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: गैर-बाजार सहयोग तंत्र भी वैश्विक जलवायु और सतत विकास चर्चाओं का प्रमुख विषय हैं।
संक्षिप्त नोट्स: पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6
-
अनुच्छेद 6 अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित है।
-
यह देशों को कार्बन क्रेडिट व्यापार की अनुमति देता है।
-
Article 6.2 द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कार्बन व्यापार से संबंधित है।
-
Article 6.4 संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षित वैश्विक कार्बन बाजार तंत्र स्थापित करता है।
-
Article 6.8 गैर-बाजार उपायों को बढ़ावा देता है।
-
इसका उद्देश्य NDCs (Nationally Determined Contributions) को कम लागत पर प्राप्त करना है।
-
यह उत्सर्जन कटौती की Double Counting समस्या को रोकने में मदद करता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: अध्ययनों से संकेत मिलता है कि सीमेंट उद्योग से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का 5% से अधिक है।
कथन II: सीमेंट बनाते समय सिलिका युक्त मिट्टी को चूना पत्थर के साथ मिलाया जाता है।
कथन III: सीमेंट निर्माण के लिए क्लिंकर उत्पादन के दौरान चूना पत्थर को चूने में परिवर्तित किया जाता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2
सीमेंट उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और कुल उत्सर्जन का लगभग 5–8% योगदान देता है। सीमेंट निर्माण में चूना पत्थर (Limestone) और मिट्टी (Clay) दोनों का उपयोग होता है, लेकिन सबसे अधिक CO₂ चूना पत्थर के कैल्सिनेशन (Calcination) से निकलती है।
✅ कथन I सही है: सीमेंट उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का 5% से अधिक योगदान देता है।
✅ कथन II सही है: सीमेंट निर्माण में चूना पत्थर के साथ सिलिका युक्त मिट्टी मिलाई जाती है, जो आवश्यक खनिज प्रदान करती है।
✅ कथन III सही है: क्लिंकर निर्माण के दौरान चूना पत्थर (CaCO₃) को गर्म करके चूना (CaO) में बदला जाता है, जिससे CO₂ निकलती है।
❌ कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता: मिट्टी को मिलाना केवल कच्चे माल की आवश्यकता है, यह सीधे CO₂ उत्सर्जन का कारण नहीं है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: चूना पत्थर के कैल्सिनेशन से बड़ी मात्रा में CO₂ निकलती है, जो सीमेंट उद्योग के उच्च उत्सर्जन का मुख्य कारण है।
संक्षिप्त नोट्स: सीमेंट उद्योग और कार्बन उत्सर्जन
-
सीमेंट उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का लगभग 5–8% योगदान देता है।
-
मुख्य कच्चे पदार्थ चूना पत्थर और मिट्टी हैं।
-
क्लिंकर सीमेंट निर्माण का मध्यवर्ती उत्पाद है।
-
कैल्सिनेशन अभिक्रिया: CaCO₃ → CaO + CO₂।
-
लगभग 60% उत्सर्जन कैल्सिनेशन प्रक्रिया से आता है।
-
शेष उत्सर्जन मुख्यतः भट्टियों (Kilns) में ईंधन जलाने से होता है।
-
उत्सर्जन कम करने के लिए लो-कार्बन सीमेंट और कार्बन कैप्चर तकनीकों पर कार्य हो रहा है।
🧐 Not Sure What to Study Next?
Get a personalised study plan based on your goals, time and revision needs.
निम्नलिखित पर विचार करें:
I. सिगरेट के टुकड़े
II. चश्मे के लेंस
III. कार के टायर
उनमें से कितने में प्लास्टिक है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (तीनों)
हमारे दैनिक जीवन की कई वस्तुओं में प्लास्टिक होता है, भले ही वे देखने में प्लास्टिक जैसी न लगें। सिगरेट के फिल्टर, आधुनिक चश्मे के लेंस और कार के टायर सभी में प्लास्टिक या प्लास्टिक-आधारित पॉलिमर सामग्री होती है।
✅ I. सिगरेट बट्स – सही: सिगरेट के फिल्टर मुख्य रूप से सेल्यूलोज एसीटेट नामक प्लास्टिक पॉलिमर से बने होते हैं।
✅ II. चश्मे के लेंस – सही: अधिकांश आधुनिक लेंस पॉलीकार्बोनेट या CR-39 प्लास्टिक से बनाए जाते हैं।
✅ III. कार टायर – सही: टायरों में सिंथेटिक रबर और अन्य पॉलिमर आधारित पदार्थ होते हैं, जो पेट्रोकेमिकल स्रोतों से प्राप्त होते हैं।
संक्षिप्त नोट्स: दैनिक जीवन में प्लास्टिक
-
सिगरेट फिल्टर में प्रयुक्त सेल्यूलोज एसीटेट एक प्रकार का प्लास्टिक है।
-
आधुनिक चश्मे के अधिकांश लेंस पॉलीकार्बोनेट से बनाए जाते हैं।
-
कार टायर प्राकृतिक रबर और सिंथेटिक पॉलिमर दोनों से बने होते हैं।
-
सिंथेटिक रबर का निर्माण पेट्रोलियम-आधारित रसायनों से होता है।
-
प्लास्टिक अपशिष्ट पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक बना रह सकता है।
-
सिगरेट बट्स विश्व में सबसे सामान्य प्लास्टिक कचरे में से एक हैं।
-
वाहन टायरों के घिसने से माइक्रोप्लास्टिक्स उत्पन्न होते हैं।
निम्नलिखित में से किसने 'एशिया और प्रशांत के लिए नेचर सॉल्यूशंस फाइनेंस हब' लॉन्च किया?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 — एशियाई विकास बैंक (ADB)
Asian Development Bank ने Nature Solutions Finance Hub for Asia and the Pacific की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य प्रकृति-आधारित समाधानों (Nature-based Solutions) के लिए वित्त उपलब्ध कराना है ताकि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और पर्यावरणीय क्षरण जैसी चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
✅ विकल्प 1 सही है: ADB ने Nature Solutions Finance Hub for Asia and the Pacific लॉन्च किया।
❌ विकल्प 2 गलत है: Asian Infrastructure Investment Bank ने यह पहल शुरू नहीं की।
❌ विकल्प 3 गलत है: New Development Bank इस हब से संबंधित नहीं है।
❌ विकल्प 4 गलत है: International Bank for Reconstruction and Development ने इस हब की शुरुआत नहीं की।
संक्षिप्त नोट्स: Nature-Based Solutions (NbS)
-
Nature-Based Solutions में प्राकृतिक तंत्रों का उपयोग पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु किया जाता है।
-
उदाहरण: मैंग्रोव पुनर्स्थापन, वनीकरण, आर्द्रभूमि संरक्षण और जलग्रहण प्रबंधन।
-
यह जलवायु शमन, जलवायु अनुकूलन और जैव विविधता संरक्षण में सहायक है।
-
ADB Nature Solutions Finance Hub एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित है।
-
इसका उद्देश्य पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक एवं निजी निवेश जुटाना है।
-
स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र कार्बन अवशोषण, बाढ़ नियंत्रण और जल शुद्धिकरण जैसी सेवाएँ प्रदान करते हैं।
-
NbS को कम लागत वाले और टिकाऊ जलवायु समाधान के रूप में माना जा रहा है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: सक्रिय कार्बन अपशिष्ट जल धाराओं से प्रदूषकों को हटाने और विभिन्न उद्योगों से दूषित पदार्थों को दूर करने के लिए एक अच्छा और आकर्षक उपकरण है।
कथन II: सक्रिय कार्बन एक बड़े सतह क्षेत्र और भारी धातुओं को सोखने की एक मजबूत क्षमता प्रदर्शित करता है।
कथन III: सक्रिय कार्बन को उच्च कार्बन सामग्री वाले पर्यावरणीय कचरे से आसानी से संश्लेषित किया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1
सक्रिय कार्बन (Activated Carbon) जल और अपशिष्ट जल शोधन में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले अधिशोषकों (Adsorbents) में से एक है। इसकी अत्यधिक छिद्रयुक्त संरचना और विशाल सतह क्षेत्र इसे प्रदूषकों को हटाने में प्रभावी बनाते हैं। साथ ही इसे कार्बन-समृद्ध अपशिष्ट पदार्थों से कम लागत पर बनाया जा सकता है।
✅ कथन I सही है: सक्रिय कार्बन का उपयोग औद्योगिक अपशिष्ट जल और प्रदूषित जल से प्रदूषकों को हटाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
✅ कथन II सही है: इसकी सतह क्षेत्र बहुत बड़ा होता है और इसमें भारी धातुओं तथा अन्य प्रदूषकों को अधिशोषित करने की उच्च क्षमता होती है।
✅ कथन III सही है: सक्रिय कार्बन को नारियल के छिलके, धान की भूसी, बुरादा और अन्य कार्बन-समृद्ध अपशिष्टों से आसानी से बनाया जा सकता है।
✅ कथन II, कथन I की व्याख्या करता है: इसकी विशाल सतह और उच्च अधिशोषण क्षमता इसे प्रदूषक हटाने में प्रभावी बनाती है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: कम लागत और अपशिष्ट से निर्माण की सुविधा इसे एक आकर्षक तथा टिकाऊ विकल्प बनाती है।
संक्षिप्त नोट्स: Activated Carbon
-
सक्रिय कार्बन एक अत्यधिक छिद्रयुक्त कार्बन पदार्थ है।
-
इसका सतह क्षेत्र 1,000 m²/g से भी अधिक हो सकता है।
-
इसका उपयोग जल शोधन, वायु शोधन और अपशिष्ट जल उपचार में किया जाता है।
-
यह भारी धातुओं, रंगों, कीटनाशकों और कार्बनिक प्रदूषकों को हटाने में प्रभावी है।
-
इसे नारियल के छिलके, लकड़ी, कोयला और कृषि अपशिष्टों से बनाया जा सकता है।
-
यह मुख्यतः Adsorption (अधिशोषण) की प्रक्रिया से कार्य करता है।
-
पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में इसका व्यापक उपयोग होता है।
"मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर" अक्सर किस संदर्भ में चर्चा में रहते हैं:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — अपशिष्ट जल उपचार प्रौद्योगिकियाँ
मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर (MBRs) उन्नत अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियाँ हैं जो पारंपरिक जैविक उपचार प्रक्रियाओं को मेम्ब्रेन निस्पंदन (माइक्रोफिल्ट्रेशन या अल्ट्राफिल्ट्रेशन) के साथ संयोजित करती हैं। ये प्रदूषकों को हटाने, उच्च गुणवत्ता वाला अपशिष्ट जल उत्पन्न करने और पारंपरिक उपचार विधियों की तुलना में कम स्थान की आवश्यकता में अत्यधिक कुशल हैं। MBRs का व्यापक रूप से नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है क्योंकि वे निलंबित ठोस, रोगजनकों और कार्बनिक प्रदूषकों को हटाने में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर (MBRs)
- प्रौद्योगिकी: एक इकाई में जैविक निम्नीकरण और मेम्ब्रेन निस्पंदन को संयोजित करती है
- मेम्ब्रेन प्रकार: 0.1-0.4 माइक्रोन के छिद्र आकार वाले माइक्रोफिल्ट्रेशन (MF) या अल्ट्राफिल्ट्रेशन (UF) मेम्ब्रेन का उपयोग करती है
- लाभ: उच्च अपशिष्ट जल गुणवत्ता, छोटा क्षेत्रफल, बायोमास का पूर्ण प्रतिधारण, और बेहतर रोगजनक हटाना
- अनुप्रयोग: नगरपालिका अपशिष्ट जल उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट उपचार, जल पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण
- सीमाएँ: उच्च पूंजी और परिचालन लागत, मेम्ब्रेन फाउलिंग समस्याएँ, ऊर्जा-गहन संचालन
- पर्यावरणीय महत्व: जल पुनः उपयोग को सक्षम बनाता है, प्रदूषण भार को कम करता है, और जल प्रबंधन में चक्रीय अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- शेरों का कोई विशेष प्रजनन मौसम नहीं होता है।
- अधिकांश अन्य बड़ी बिल्लियों के विपरीत, चीता दहाड़ता नहीं है।
- नर शेरों के विपरीत, नर तेंदुए गंध अंकन द्वारा अपने क्षेत्र की घोषणा नहीं करते हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
यह प्रश्न बड़ी बिल्लियों, विशेष रूप से शेरों, चीतों और तेंदुओं की व्यवहारिक विशेषताओं के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। इन प्रजातियों के क्षेत्रीय अंकन, प्रजनन पैटर्न और मुखर क्षमताओं को समझना वन्यजीव पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है।
✅ कथन 1 – सही: शेरों का कोई सख्ती से परिभाषित प्रजनन मौसम नहीं होता है और वे वर्ष भर प्रजनन कर सकते हैं, हालांकि शिकार की उपलब्धता और वर्षा जैसी पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर कुछ मौसमी चरम हो सकते हैं।
✅ कथन 2 – सही: चीतों में विशेष स्वरयंत्र संरचना (हाइड अस्थि तंत्र) का अभाव होता है जो अन्य बड़ी बिल्लियों को दहाड़ने की अनुमति देता है; इसके बजाय, वे चहचहाहट, गड़गड़ाहट और पक्षियों के समान उच्च-स्वर वाली आवाज़ें निकालते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: नर तेंदुए, नर शेरों की तरह, सक्रिय रूप से गंध अंकन (मूत्र का छिड़काव, खुरचना और मल निक्षेप) का उपयोग अपने क्षेत्रों की घोषणा और रक्षा के लिए करते हैं; यह कथन गलत रूप से सुझाव देता है कि तेंदुए क्षेत्रीय गंध अंकन में संलग्न नहीं होते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बड़ी बिल्लियाँ - व्यवहारिक विशेषताएँ
| बड़ी बिल्ली प्रजाति | प्रजनन मौसम | दहाड़ने की क्षमता | क्षेत्रीय अंकन |
|---|---|---|---|
| शेर | वर्ष भर (कोई निश्चित मौसम नहीं) | हाँ (दहाड़ सकते हैं) | हाँ (गंध अंकन, दहाड़ना) |
| तेंदुआ | वर्ष भर (क्षेत्रीय चरम के साथ) | हाँ (दहाड़ सकते हैं) | हाँ (व्यापक गंध अंकन) |
| बाघ | सर्दियों में चरम (भारत में नवं-अप्रैल) | हाँ (दहाड़ सकते हैं) | हाँ (गंध अंकन, खरोंचना) |
| चीता | वर्ष भर (मामूली मौसमी भिन्नता) | नहीं (गड़गड़ाहट, चहचहाहट) | हाँ (लेकिन कम आक्रामक) |
| जगुआर | वर्ष भर | हाँ (दहाड़ सकते हैं) | हाँ (गंध अंकन) |
- दहाड़ने की प्रणाली: शेर, बाघ, तेंदुए और जगुआर पैंथेरा वंश से संबंधित हैं जिनमें लचीली हाइड अस्थि होती है जो दहाड़ने में सक्षम बनाती है।
- चीता विशिष्टता: एसिनोनिक्स वंश से संबंधित; निश्चित हाइड अस्थि होती है, दहाड़ने से रोकती है लेकिन निरंतर गड़गड़ाहट की अनुमति देती है।
- क्षेत्रीय व्यवहार: सभी बड़ी बिल्लियाँ क्षेत्रों को स्थापित करने के लिए गंध अंकन (मूत्र, मल, ग्रंथि स्राव) और दृश्य संकेतों (खरोंच के निशान) का उपयोग करती हैं।
- प्रजनन पैटर्न: अधिकांश बड़ी बिल्लियाँ वर्ष भर प्रजनन कर सकती हैं, लेकिन पर्यावरणीय कारक (शिकार घनत्व, जलवायु) चरम प्रजनन समय को प्रभावित करते हैं।
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- कैराबिड बीटल
- सेंटीपीड
- मक्खियाँ
- दीमक
- ततैया
उपर्युक्त में से कितने प्रकार के जीवों में परजीवाभ (Parasitoid) प्रजातियाँ पाई जाती हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल तीन
परजीवाभ प्रजातियाँ वे जीव हैं जो किसी पोषक जीव पर या उसके भीतर रहते हैं और अंततः उसे मार देते हैं। सूचीबद्ध जीवों में से, परजीवाभ प्रजातियाँ कैराबिड बीटल (कुछ प्रजातियाँ अन्य कीटों की परजीवाभ होती हैं), मक्खियाँ (टैकिनिड मक्खियाँ और अन्य डिप्टेरा परिवारों में कई परजीवाभ शामिल हैं), और ततैया (हाइमेनोप्टेरा में व्यापक परजीवाभ परिवार हैं) में पाई जाती हैं। सेंटीपीड शिकारी होते हैं जो सीधे शिकार करते हैं और मार देते हैं, जबकि दीमक शाकाहारी सामाजिक कीट हैं जो पादप पदार्थ पर भोजन करते हैं, दोनों ही परजीवाभ नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: परजीवाभ
- परिभाषा: परजीवाभ वे जीव हैं जो अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग एकल पोषक जीव से जुड़े या उसके भीतर व्यतीत करते हैं, जिसे वे अंततः मार देते हैं। ये सच्चे परजीवियों (जो आमतौर पर पोषक को नहीं मारते) और शिकारियों (जो कई शिकार मारते हैं) से भिन्न होते हैं।
- कैराबिड बीटल: जबकि अधिकांश शिकारी होते हैं, कुछ प्रजातियाँ (विशेष रूप से Brachinus और Lebia जैसे वंशों में) परजीवाभ व्यवहार प्रदर्शित करती हैं, विशेष रूप से अन्य कीटों के प्यूपा को लक्षित करती हैं।
- मक्खियाँ (डिप्टेरा): Tachinidae परिवार परजीवाभ मक्खियों का सबसे बड़ा समूह है, जिसमें 10,000 से अधिक प्रजातियाँ हैं। Bombyliidae और Sarcophagidae जैसे अन्य परिवारों में भी परजीवाभ प्रजातियाँ शामिल हैं।
- ततैया (हाइमेनोप्टेरा): सबसे विविध परजीवाभ समूह, जिसमें Ichneumonidae, Braconidae, Chalcidoidea और कई अन्य परिवार शामिल हैं। ये कीटों और अन्य आर्थ्रोपोड्स के विभिन्न जीवन चरणों को परजीवी बनाते हैं।
- सेंटीपीड: Chilopoda विषैले शिकारी हैं जो सक्रिय रूप से आर्थ्रोपोड्स और छोटे अकशेरुकियों का शिकार करते हैं; वे परजीवाभ व्यवहार प्रदर्शित नहीं करते हैं।
- दीमक: Isoptera सामाजिक कीट हैं जो मुख्य रूप से लकड़ी और पादप सामग्री से सेलूलोज़ पर भोजन करते हैं; ये अपघटक हैं, परजीवाभ नहीं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: भारतीय फ्लाइंग फॉक्स को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में "कीट" श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है।
कथन-II: भारतीय फ्लाइंग फॉक्स अन्य जानवरों के रक्त पर भोजन करता है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कथन-I सही है, कथन-II गलत है
यह प्रश्न भारतीय फ्लाइंग फॉक्स और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। जबकि वर्तमान मॉडल उत्तर में कहा गया है कि दोनों कथन गलत हैं, परीक्षा के समय मूल अंकन के अनुसार सही उत्तर विकल्प 3 था, जो दर्शाता है कि कथन-I को सही माना गया था।
✅ कथन-I – सही (मूल संदर्भ के अनुसार): ऐतिहासिक रूप से, भारतीय फ्लाइंग फॉक्स को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में अनुसूची V (कीट श्रेणी) के अंतर्गत रखा गया था, इससे पहले कि 2022 के संशोधनों ने इस अनुसूची को समाप्त कर दिया।
❌ कथन-II – गलत: भारतीय फ्लाइंग फॉक्स (Pteropus medius) एक बड़ा फलभक्षी चमगादड़ है जो फल, अमृत और फूलों पर भोजन करता है, रक्त पर नहीं। रक्त पर भोजन करने का व्यवहार लैटिन अमेरिका में पाए जाने वाले वैम्पायर चमगादड़ों की विशेषता है, फल चमगादड़ों की नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय फ्लाइंग फॉक्स और वन्यजीव संरक्षण
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| वैज्ञानिक नाम | Pteropus medius (पहले P. giganteus) |
| वितरण | भारतीय उपमहाद्वीप - भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव, म्यांमार |
| आहार | फलभक्षी - फल (आम, अमरूद, अंजीर), अमृत और फूलों पर भोजन करता है |
| पारिस्थितिक भूमिका | कई पादप प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण परागणक और बीज प्रसारक |
| ऐतिहासिक स्थिति | अनुसूची V (कीट) के अंतर्गत रखा गया था जो नियमित कुलिंग की अनुमति देता था |
| वर्तमान स्थिति (2022 के बाद) | वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची II; 2022 संशोधन में अनुसूची V समाप्त कर दी गई |
| संरक्षण मुद्दा | फसल क्षति की चिंताओं के कारण उत्पीड़न का सामना करना पड़ा; पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण |
निम्नलिखित सामग्रियों पर विचार कीजिए:
कृषि अवशेष
मकका अनाज
अपशिष्ट जल उपचार स्लज
लकड़ी मिल अपशिष्ट
उपर्युक्त में से कौन-सी सतत विमानन ईंधन के उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के रूप में उपयोग की जा सकती हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1, 2, 3 और 4
सूचीबद्ध सभी चार सामग्रियाँ सतत विमानन ईंधन (SAF) के उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के रूप में काम कर सकती हैं। कृषि अवशेष और लकड़ी मिल अपशिष्ट लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास स्रोत हैं जिन्हें थर्मोकेमिकल या जैव रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से परिवर्तित किया जा सकता है। मकका अनाज इथेनॉल उत्पादन के लिए किण्वनीय शर्करा प्रदान करता है, जिसे SAF में अपग्रेड किया जा सकता है। अपशिष्ट जल उपचार स्लज, जो कार्बनिक पदार्थों से समृद्ध है, बायोगैस उत्पन्न करने के लिए अवायवीय पाचन से गुजर सकता है, जो बाद में SAF में परिवर्तनीय है।
✅ कथन 1 – सही: कृषि अवशेष (फसल के डंठल, भूसी, पत्तियाँ) विभिन्न रूपांतरण मार्गों के माध्यम से SAF उत्पादन के लिए व्यवहार्य लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास स्रोत हैं।
✅ कथन 2 – सही: मकका अनाज में किण्वनीय शर्करा होती है जिसे इथेनॉल में परिवर्तित किया जा सकता है और अल्कोहल-टू-जेट ईंधन मार्गों के माध्यम से SAF में संसाधित किया जा सकता है।
✅ कथन 3 – सही: अपशिष्ट जल उपचार स्लज कार्बनिक पदार्थों से समृद्ध है और अवायवीय पाचन के माध्यम से बायोगैस में परिवर्तित किया जा सकता है, जिसे फिर SAF में अपग्रेड किया जा सकता है।
✅ कथन 4 – सही: लकड़ी मिल अपशिष्ट (चूरा, लकड़ी के चिप्स, छाल) एक लिग्नोसेलुलोसिक सामग्री है जो गैसीकरण, पायरोलिसिस या अन्य थर्मोकेमिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से SAF में परिवर्तनीय है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सतत विमानन ईंधन (SAF)
- परिभाषा: SAF पारंपरिक जेट ईंधन का एक ड्रॉप-इन प्रतिस्थापन है, जो सतत फीडस्टॉक से उत्पादित होता है और जीवनचक्र कार्बन उत्सर्जन को 80% तक कम करता है।
- फीडस्टॉक श्रेणियाँ: इसमें कृषि अवशेष, वानिकी अपशिष्ट, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, औद्योगिक अपशिष्ट, शैवाल और समर्पित ऊर्जा फसलें शामिल हैं।
- उत्पादन मार्ग: प्रमुख प्रौद्योगिकियों में फिशर-ट्रॉप्श संश्लेषण, हाइड्रोप्रोसेस्ड एस्टर और फैटी एसिड (HEFA), अल्कोहल-टू-जेट (ATJ), और गैसीकरण शामिल हैं।
- प्रमाणन: SAF को ASTM D7566 मानकों को पूरा करना होगा और इसे पारंपरिक जेट ईंधन के साथ 50% तक मिश्रित किया जा सकता है (कुछ मार्ग 100% की अनुमति देते हैं)।
- वैश्विक पहल: ICAO की CORSIA योजना, EU का ReFuelEU Aviation, और US SAF Grand Challenge का उद्देश्य SAF उत्पादन और अपनाने को बढ़ाना है।
- भारतीय संदर्भ: भारत विमानन क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करने के लिए कृषि अपशिष्ट, उपयोग किए गए खाना पकाने के तेल और अन्य बायोमास स्रोतों से SAF उत्पादन की खोज कर रहा है।
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
तितलियाँ
मछलियाँ
मेंढक
उपर्युक्त में से कितनों में विषैली प्रजातियाँ पायी जाती हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सभी तीन
प्रश्न में उल्लिखित सभी तीन समूहों—तितलियाँ, मछलियाँ और मेंढक—में विषैली प्रजातियाँ पायी जाती हैं। मोनार्क जैसी तितलियाँ अपने लार्वा अवस्था में मिल्कवीड के आहार से विषाक्त पदार्थ संचित करती हैं, जो उन्हें शिकारियों के लिए विषैला बनाता है। कई मछली प्रजातियाँ जैसे कि पफरफिश, लायनफिश और स्टोनफिश घातक विष या टॉक्सिन रखती हैं। पॉइजन डार्ट फ्रॉग उभयचरों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं जो रक्षा तंत्र के रूप में अपनी त्वचा के माध्यम से शक्तिशाली विषाक्त पदार्थ स्रावित करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विभिन्न पशु समूहों में विषैली प्रजातियाँ
- विषैली तितलियाँ: मोनार्क तितलियाँ अपनी कैटरपिलर अवस्था के दौरान मिल्कवीड पौधों से कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स संचित करती हैं, जो उन्हें पक्षियों और अन्य शिकारियों के लिए विषाक्त बनाता है। अन्य उदाहरणों में पाइपवाइन स्वैलोटेल शामिल है।
- विषैली मछलियाँ: पफरफिश में टेट्रोडोटॉक्सिन होता है, जो मनुष्यों के लिए घातक न्यूरोटॉक्सिन है। लायनफिश और स्टोनफिश में विषैले कांटे होते हैं। स्टिंगरे की पूंछ पर विषैले कांटे होते हैं।
- विषैले मेंढक: मध्य और दक्षिण अमेरिका के पॉइजन डार्ट फ्रॉग (परिवार डेंड्रोबैटिडे) अपनी त्वचा के माध्यम से एल्कलॉइड विष स्रावित करते हैं। गोल्डन पॉइजन फ्रॉग पृथ्वी पर सबसे विषैले कशेरुकियों में से एक है।
- विषाक्तता का तंत्र: कुछ प्रजातियाँ अंतर्जात रूप से (अपने शरीर के भीतर) विष उत्पन्न करती हैं, जबकि अन्य इन्हें अपने आहार से संचित करती हैं (जैसे मोनार्क तितलियाँ और पॉइजन डार्ट फ्रॉग)।
- विष का उद्देश्य: ये विषाक्त पदार्थ मुख्य रूप से शिकारियों के खिलाफ रक्षा तंत्र के रूप में कार्य करते हैं, जिनका कई मामलों में चेतावनी रंग (एपोसेमेटिज्म) के माध्यम से प्रचार किया जाता है।
निम्नलिखित में से कौन सा एक कीट के साथ अद्वितीय संबंध दर्शाता है जो इसके साथ सह-विकसित हुआ है और जो इस वृक्ष को परागित कर सकने वाला एकमात्र कीट है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — अंजीर
अंजीर के वृक्ष अंजीर बर्र (fig wasp) के साथ एक अद्वितीय अनिवार्य सहजीवी संबंध साझा करते हैं, जो अंजीर के फूलों को परागित करने में सक्षम एकमात्र कीट हैं। अंजीर बर्र ओस्टिओल नामक एक छोटे से छिद्र के माध्यम से बंद सायकोनियम (अंजीर की फल संरचना) में प्रवेश करती है और अंडे देती है, साथ ही आंतरिक फूलों का परागण करती है। यह अत्यधिक विशिष्ट संबंध सह-विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां दोनों प्रजातियां लाखों वर्षों में एक साथ विकसित हुई हैं, जिससे वे जीवित रहने और प्रजनन के लिए एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर हो गई हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
❌ विकल्प 2 – महुआ: महुआ (Madhuca indica) विभिन्न कीटों जैसे मधुमक्खियों, पतंगों और यहां तक कि चमगादड़ों द्वारा परागित होता है, न कि किसी एकल विशेष परागणकर्ता द्वारा।
❌ विकल्प 3 – चंदन: चंदन मुख्य रूप से मधुमक्खियों और मक्खियों द्वारा परागित होता है; यह एक अर्ध-परजीवी पौधा है जो पोषक तत्वों के लिए मेजबान वृक्षों पर निर्भर करता है लेकिन इसका कोई अद्वितीय कीट परागणकर्ता नहीं है।
❌ विकल्प 4 – सेमल: सेमल के वृक्ष चमगादड़ों और पक्षियों द्वारा परागित होते हैं, न कि किसी विशेष कीट प्रजाति द्वारा।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अंजीर-बर्र सहजीविता
- अनिवार्य सहजीविता: अंजीर और अंजीर बर्र दोनों पूरी तरह से एक-दूसरे पर निर्भर हैं—अंजीर बर्र के बिना प्रजनन नहीं कर सकता और अंजीर बर्र अंजीर के बिना प्रजनन नहीं कर सकती।
- सायकोनियम संरचना: अंजीर एक वास्तविक फल नहीं बल्कि एक सायकोनियम है—एक खोखली, मांसल संरचना जिसमें फूल अंदर बंद होते हैं।
- परागण प्रक्रिया: मादा अंजीर बर्र ओस्टिओल (छोटे छिद्र) के माध्यम से प्रवेश करती है, अंडाशय के अंदर अंडे देती है, और इस प्रक्रिया में फूलों का परागण करती है। नर बर्र पंखहीन होते हैं और अंजीर के अंदर संभोग करते हैं।
- सह-विकास: यह संबंध लगभग 80 मिलियन वर्षों में विकसित हुआ है, अंजीर की 750 से अधिक प्रजातियों के साथ, जिनमें से प्रत्येक की आमतौर पर अपनी विशेष बर्र प्रजाति होती है।
- पारिस्थितिक महत्व: अंजीर उष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी तंत्र में मुख्य प्रजातियां हैं, जो कई जानवरों के लिए कम फल वाले समय में भोजन प्रदान करती हैं।
उपभोक्ता उत्पाद बनाने में उपयोग किए जाने वाले परफ्लुओरोएल्काइल और पॉलीफ्लुओरोएल्काइल पदार्थों (PFAS) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- PFAS पेयजल, खाद्य पदार्थों और खाद्य पैकेजिंग सामग्री में व्यापक रूप से पाए जाते हैं।
- PFAS पर्यावरण में आसानी से अपघटित नहीं होते हैं।
- PFAS के निरंतर संपर्क से जानवरों के शरीर में जैवसंचयन हो सकता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
PFAS (परफ्लुओरोएल्काइल और पॉलीफ्लुओरोएल्काइल पदार्थ) के बारे में तीनों कथन सही हैं। इन सिंथेटिक रसायनों को अक्सर 'फॉरएवर केमिकल्स' कहा जाता है, जो उपभोक्ता उत्पादों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं और पर्यावरणीय स्थिरता और जैवसंचयन क्षमता द्वारा विशेषता रखते हैं।
✅ कथन 1 – सही: PFAS व्यापक रूप से पेयजल, खाद्य पदार्थों और खाद्य पैकेजिंग सामग्री में पाए जाते हैं क्योंकि उपभोक्ता उत्पादों में इनका व्यापक उपयोग होता है और ये पर्यावरण में रिसने की क्षमता रखते हैं।
✅ कथन 2 – सही: PFAS को 'फॉरएवर केमिकल्स' कहा जाता है क्योंकि मजबूत कार्बन-फ्लोरीन बंधन इन्हें पर्यावरणीय अपघटन प्रक्रियाओं के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी बनाता है।
✅ कथन 3 – सही: अपनी स्थिरता के कारण, PFAS समय के साथ जानवरों और मनुष्यों के ऊतकों में जमा होते हैं, जिससे जैवसंचयन और संभावित स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न होते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: PFAS (फॉरएवर केमिकल्स)
- पूर्ण रूप: परफ्लुओरोएल्काइल और पॉलीफ्लुओरोएल्काइल पदार्थ
- उपनाम: 'फॉरएवर केमिकल्स' अत्यधिक स्थायी प्रकृति के कारण
- रासायनिक संरचना: मजबूत कार्बन-फ्लोरीन बंधन होते हैं जो टूटने का प्रतिरोध करते हैं
- सामान्य उपयोग: नॉन-स्टिक कुकवेयर, जल-प्रतिरोधी कपड़े, अग्निशमन फोम, खाद्य पैकेजिंग, सौंदर्य प्रसाधन
- पर्यावरणीय स्थिरता: प्राकृतिक रूप से अपघटित नहीं होते; मिट्टी, पानी और हवा में जमा होते हैं
- स्वास्थ्य चिंताएं: जैवसंचयन से संभावित कैंसर जोखिम, यकृत क्षति, प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभाव और विकासात्मक समस्याएं होती हैं
- वैश्विक चिंता: दुनिया भर में मनुष्यों और वन्यजीवों के रक्त नमूनों में पाए जाते हैं; बढ़ती नियामक जांच के अधीन
निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय पीटलैंड है, जो जीवाश्म ईंधन से होने वाले लगभग तीन वर्षों के वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को धारण करता है; और जिसके संभावित विनाश का वैश्विक जलवायु पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। निम्नलिखित में से कौन सा उस क्षेत्र को दर्शाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — कांगो बेसिन
कांगो बेसिन में विश्व का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय पीटलैंड परिसर है, जिसे क्युवेट सेंट्राले के नाम से जाना जाता है, जो कांगो गणराज्य और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में लगभग 145,000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह पीटलैंड लगभग 30 बिलियन टन कार्बन संग्रहीत करता है—जो वैश्विक जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन के लगभग तीन वर्षों के बराबर है—जिससे जलवायु स्थिरता के लिए इसका संरक्षण महत्वपूर्ण हो जाता है। जल निकासी या भूमि-उपयोग परिवर्तन के माध्यम से इस पीटलैंड के विनाश से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड निकलेगी, जो वैश्विक जलवायु परिवर्तन को महत्वपूर्ण रूप से तेज करेगी।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रमुख उष्णकटिबंधीय पीटलैंड्स
| पीटलैंड क्षेत्र | स्थान | महत्व |
|---|---|---|
| क्युवेट सेंट्राले (कांगो बेसिन) | कांगो गणराज्य और DRC | विश्व का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय पीटलैंड; ~30 बिलियन टन कार्बन संग्रहीत करता है (वैश्विक जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन के 3 वर्ष) |
| अमेज़न बेसिन पीटलैंड्स | पेरू, ब्राज़ील | महत्वपूर्ण कार्बन भंडारण, लेकिन कांगो बेसिन पीटलैंड्स से छोटा |
| दक्षिण पूर्व एशियाई पीटलैंड्स | इंडोनेशिया, मलेशिया | प्रमुख कार्बन भंडार; पाम तेल वृक्षारोपण और आग के कारण भारी रूप से क्षतिग्रस्त |
| ब्राजाविले घोषणा (2018) | कांगो, DRC, इंडोनेशिया | उष्णकटिबंधीय पीटलैंड्स की रक्षा और कार्बन रिलीज को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौता |
- पीटलैंड्स आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र हैं जहां जलभराव की स्थिति कार्बनिक पदार्थ को पूरी तरह से विघटित होने से रोकती है, जिससे हजारों वर्षों में कार्बन संचय होता है
- उष्णकटिबंधीय पीटलैंड्स वनस्पति और गहरी पीट मिट्टी दोनों में कार्बन संग्रहीत करते हैं (कई मीटर गहरे हो सकते हैं)
- कृषि के लिए पीटलैंड्स की जल निकासी और रूपांतरण से संग्रहीत कार्बन CO₂ और N₂O के रूप में निकलता है
- जलवायु परिवर्तन शमन रणनीतियों के लिए पीटलैंड्स का संरक्षण महत्वपूर्ण है