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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: भारतीय फ्लाइंग फॉक्स को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में "कीट" श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है।
कथन-II: भारतीय फ्लाइंग फॉक्स अन्य जानवरों के रक्त पर भोजन करता है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कथन-I सही है, कथन-II गलत है
यह प्रश्न भारतीय फ्लाइंग फॉक्स और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। जबकि वर्तमान मॉडल उत्तर में कहा गया है कि दोनों कथन गलत हैं, परीक्षा के समय मूल अंकन के अनुसार सही उत्तर विकल्प 3 था, जो दर्शाता है कि कथन-I को सही माना गया था।
✅ कथन-I – सही (मूल संदर्भ के अनुसार): ऐतिहासिक रूप से, भारतीय फ्लाइंग फॉक्स को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में अनुसूची V (कीट श्रेणी) के अंतर्गत रखा गया था, इससे पहले कि 2022 के संशोधनों ने इस अनुसूची को समाप्त कर दिया।
❌ कथन-II – गलत: भारतीय फ्लाइंग फॉक्स (Pteropus medius) एक बड़ा फलभक्षी चमगादड़ है जो फल, अमृत और फूलों पर भोजन करता है, रक्त पर नहीं। रक्त पर भोजन करने का व्यवहार लैटिन अमेरिका में पाए जाने वाले वैम्पायर चमगादड़ों की विशेषता है, फल चमगादड़ों की नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय फ्लाइंग फॉक्स और वन्यजीव संरक्षण
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| वैज्ञानिक नाम | Pteropus medius (पहले P. giganteus) |
| वितरण | भारतीय उपमहाद्वीप - भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव, म्यांमार |
| आहार | फलभक्षी - फल (आम, अमरूद, अंजीर), अमृत और फूलों पर भोजन करता है |
| पारिस्थितिक भूमिका | कई पादप प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण परागणक और बीज प्रसारक |
| ऐतिहासिक स्थिति | अनुसूची V (कीट) के अंतर्गत रखा गया था जो नियमित कुलिंग की अनुमति देता था |
| वर्तमान स्थिति (2022 के बाद) | वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची II; 2022 संशोधन में अनुसूची V समाप्त कर दी गई |
| संरक्षण मुद्दा | फसल क्षति की चिंताओं के कारण उत्पीड़न का सामना करना पड़ा; पारिस्थितिकी तंत्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण |
भारतीय वन्यजीव संरक्षण कानूनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
जंगली जानवर सरकार की एकमात्र संपत्ति हैं।
जब किसी जंगली जानवर को संरक्षित घोषित किया जाता है, तो ऐसे जानवर को समान संरक्षण का अधिकार है चाहे वह संरक्षित क्षेत्रों में पाया जाए या बाहर।
किसी संरक्षित जंगली जानवर के मानव जीवन के लिए खतरा बनने की आशंका उसे पकड़ने या मारने के लिए पर्याप्त आधार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 अनुसूचियों के आधार पर प्रजाति-विशिष्ट संरक्षण प्रदान करता है, जो स्थान की परवाह किए बिना समान रूप से लागू होता है। केवल कथन 2 कानूनी रूप से सटीक है, जबकि कथन 1 और 3 में स्वामित्व और पकड़ने/मारने की शर्तों के संबंध में महत्वपूर्ण अशुद्धियाँ हैं।
❌ कथन 1 – गलत: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 39 निर्दिष्ट करती है कि केवल अनुसूची I से IV में सूचीबद्ध जानवर सरकारी संपत्ति हैं; हानिकारक प्रजातियाँ (अनुसूची V) इससे बाहर हैं, जिससे 'एकमात्र संपत्ति' का दावा कानूनी रूप से गलत है।
✅ कथन 2 – सही: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत संरक्षित स्थिति जानवर की अनुसूचियों में सूचीबद्धता द्वारा निर्धारित होती है और यह समान रूप से लागू होती है चाहे जानवर संरक्षित क्षेत्रों के अंदर हो या मानव-प्रधान परिदृश्यों में बाहर।
❌ कथन 3 – गलत: धारा 11 के तहत मुख्य वन्यजीव वार्डन को संतुष्ट होना चाहिए कि जानवर मानव जीवन के लिए 'खतरनाक हो गया है' (वास्तविक खतरा), न कि केवल आशंकित खतरा; केवल भय या प्रत्याशा पकड़ने या मारने के लिए अपर्याप्त कानूनी आधार है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 - मुख्य प्रावधान
| अनुसूची | संरक्षण स्तर | उदाहरण | स्वामित्व (धारा 39) |
|---|---|---|---|
| अनुसूची I | पूर्ण संरक्षण; सर्वोच्च दंड | बाघ, शेर, हाथी, काला हिरण | सरकारी संपत्ति |
| अनुसूची II | उच्च संरक्षण | असमिया मकाक, सुअर-पूंछ मकाक | सरकारी संपत्ति |
| अनुसूची III | संरक्षित प्रजातियाँ | लकड़बग्घा, नीलगाय, सांभर | सरकारी संपत्ति |
| अनुसूची IV | संरक्षित प्रजातियाँ | खरगोश, बाज, नीलकंठ | सरकारी संपत्ति |
| अनुसूची V | हानिकारक (शिकार किया जा सकता है) | सामान्य कौआ, फल चमगादड़, चूहे | सरकारी संपत्ति नहीं |
| अनुसूची VI | खेती निषेध | निर्दिष्ट पौधे | लागू नहीं |
- धारा 11: मुख्य वन्यजीव वार्डन केवल तभी पकड़ने/मारने की अनुमति दे सकते हैं जब जानवर मानव जीवन के लिए खतरनाक हो गया हो या वसूली से परे विकलांग/रोगग्रस्त हो
- धारा 39: अनुसूची I-IV में सूचीबद्ध वन्य जानवर राज्य/केंद्र सरकार की संपत्ति हैं
- संरक्षण समान रूप से लागू होता है: सभी अनुसूचित प्रजातियों के लिए संरक्षित क्षेत्रों के अंदर और बाहर
- संरक्षित क्षेत्र: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षण आरक्षित क्षेत्र और सामुदायिक आरक्षित क्षेत्र शामिल हैं
- हालिया संशोधन (2022): निषिद्ध पौधों के लिए अनुसूची VI शुरू की गई और दंड बढ़ाए गए
यदि किसी विशेष पादप प्रजाति को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची VI के अंतर्गत रखा जाता है, तो इसका क्या निहितार्थ है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — उस पादप की खेती के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची VI में विशेष रूप से उन पादप प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया है जिनकी खेती और रोपण प्राधिकारियों से उचित लाइसेंस प्राप्त किए बिना प्रतिबंधित है। यह प्रावधान कुछ संवेदनशील पादप प्रजातियों की विनियमित खेती सुनिश्चित करता है ताकि उनके शोषण को रोका जा सके और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखा जा सके। अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि अनुसूची VI खेती को पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं करती है, न ही यह GMO या आक्रामक प्रजातियों के वर्गीकरण से संबंधित है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 - अनुसूचियाँ
| अनुसूची | कवरेज (मूल अधिनियम) | संरक्षण का स्तर |
|---|---|---|
| अनुसूची I | लुप्तप्राय प्रजातियाँ (जैसे बाघ, हाथी, काला हिरण) | उच्चतम संरक्षण; शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध |
| अनुसूची II | उच्च संरक्षण की आवश्यकता वाले जानवर (जैसे असमिया मकाक, सुअर-पूंछ मकाक) | उच्च संरक्षण; विशेष परिस्थितियों को छोड़कर शिकार प्रतिबंधित |
| अनुसूची III और IV | विभिन्न खतरे के स्तरों वाली संरक्षित प्रजातियाँ | मध्यम संरक्षण; विनियमित शिकार संभव |
| अनुसूची V | कीट प्रजातियाँ (जैसे सामान्य कौआ, फलों के चमगादड़, चूहे) | स्वतंत्र रूप से शिकार किया जा सकता है |
| अनुसूची VI | निर्दिष्ट पादप (जैसे बेडोम्स साइकड, नीला वांडा, लाल वांडा) | बिना लाइसेंस के खेती प्रतिबंधित |
- 2022 संशोधन: अनुसूचियों को छह से घटाकर चार कर दिया गया, CITES आवश्यकताओं के साथ बेहतर संरेखण के लिए प्रजातियों को विलय और पुनर्वर्गीकृत किया गया।
- CITES एकीकरण: अनुसूची IV में अब विशेष रूप से CITES के तहत सूचीबद्ध प्रजातियाँ शामिल हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विनियमन और संरक्षण प्रतिबद्धताओं को सुविधाजनक बनाती हैं।
- अनुसूची VI का उद्देश्य: दुर्लभ और संकटग्रस्त पादप प्रजातियों की खेती को नियंत्रित करना, व्यावसायिक शोषण को रोकना, और लाइसेंसिंग तंत्र के माध्यम से सतत उपयोग सुनिश्चित करना।
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वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अनुसार, निम्नलिखित में से किस जानवर का कानून द्वारा प्रदत्त कुछ प्रावधानों को छोड़कर किसी भी व्यक्ति द्वारा शिकार नहीं किया जा सकता है?
- घड़ियाल
- भारतीय जंगली गधा
- जंगली भैंस
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
तीनों जानवर—घड़ियाल, भारतीय जंगली गधा और जंगली भैंस—वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध हैं, जो उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करती है। अनुसूची I की प्रजातियों का किसी भी व्यक्ति द्वारा शिकार नहीं किया जा सकता है, सिवाय असाधारण प्रावधानों जैसे रोग नियंत्रण या मानव हमलों को रोकने के लिए, जिससे सामान्य परिस्थितियों में इन तीनों जानवरों का शिकार अवैध हो जाता है।
✅ कथन 1 – सही: घड़ियाल अनुसूची I में सूचीबद्ध है और शिकार से पूर्ण सुरक्षा प्राप्त है।
✅ कथन 2 – सही: भारतीय जंगली गधा अनुसूची I में सूचीबद्ध है और शिकार से संरक्षित है।
✅ कथन 3 – सही: जंगली भैंस अनुसूची I में सूचीबद्ध है और विशिष्ट कानूनी प्रावधानों को छोड़कर इसका शिकार नहीं किया जा सकता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारतीय पशु कल्याण बोर्ड की स्थापना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत की गई है।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एक सांविधिक निकाय है।
- राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: भारतीय पशु कल्याण बोर्ड की स्थापना पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत की गई है, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत नहीं।
✅ कथन 2 – सही: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) एक सांविधिक निकाय है जो वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2006 के तहत प्रोजेक्ट टाइगर के कार्यान्वयन के लिए गठित है।
✅ कथन 3 – सही: राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत किया गया था और इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते थे (2016 में राष्ट्रीय गंगा परिषद द्वारा प्रतिस्थापित)।
भारत में संरक्षित क्षेत्रों की निम्नलिखित श्रेणियों में से किसमें स्थानीय लोगों को जैव भार (biomass) एकत्र करने और उपयोग करने की अनुमति नहीं है?
Detailed Explanation:
भारत में राष्ट्रीय उद्यानों में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अनुसार स्थानीय लोगों को जैव भार एकत्र करने या उपयोग करने की अनुमति नहीं है।
जीवमंडल आरक्षित क्षेत्रों (बफर और संक्रमण क्षेत्रों में), वन्यजीव अभयारण्यों (मुख्य वन्यजीव संरक्षक की अनुमति से), और रामसर आर्द्रभूमि (स्थल-विशिष्ट नियमों के अनुसार) में स्थानीय समुदायों द्वारा नियंत्रित जैव भार संग्रहण की अनुमति है।
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