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नवीकरणीय ऊर्जा एवं हरित प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: नवीकरणीय ऊर्जा एवं हरित प्रौद्योगिकी
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निम्नलिखित सामग्रियों पर विचार कीजिए:
कृषि अवशेष
मकका अनाज
अपशिष्ट जल उपचार स्लज
लकड़ी मिल अपशिष्ट
उपर्युक्त में से कौन-सी सतत विमानन ईंधन के उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के रूप में उपयोग की जा सकती हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1, 2, 3 और 4
सूचीबद्ध सभी चार सामग्रियाँ सतत विमानन ईंधन (SAF) के उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के रूप में काम कर सकती हैं। कृषि अवशेष और लकड़ी मिल अपशिष्ट लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास स्रोत हैं जिन्हें थर्मोकेमिकल या जैव रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से परिवर्तित किया जा सकता है। मकका अनाज इथेनॉल उत्पादन के लिए किण्वनीय शर्करा प्रदान करता है, जिसे SAF में अपग्रेड किया जा सकता है। अपशिष्ट जल उपचार स्लज, जो कार्बनिक पदार्थों से समृद्ध है, बायोगैस उत्पन्न करने के लिए अवायवीय पाचन से गुजर सकता है, जो बाद में SAF में परिवर्तनीय है।
✅ कथन 1 – सही: कृषि अवशेष (फसल के डंठल, भूसी, पत्तियाँ) विभिन्न रूपांतरण मार्गों के माध्यम से SAF उत्पादन के लिए व्यवहार्य लिग्नोसेलुलोसिक बायोमास स्रोत हैं।
✅ कथन 2 – सही: मकका अनाज में किण्वनीय शर्करा होती है जिसे इथेनॉल में परिवर्तित किया जा सकता है और अल्कोहल-टू-जेट ईंधन मार्गों के माध्यम से SAF में संसाधित किया जा सकता है।
✅ कथन 3 – सही: अपशिष्ट जल उपचार स्लज कार्बनिक पदार्थों से समृद्ध है और अवायवीय पाचन के माध्यम से बायोगैस में परिवर्तित किया जा सकता है, जिसे फिर SAF में अपग्रेड किया जा सकता है।
✅ कथन 4 – सही: लकड़ी मिल अपशिष्ट (चूरा, लकड़ी के चिप्स, छाल) एक लिग्नोसेलुलोसिक सामग्री है जो गैसीकरण, पायरोलिसिस या अन्य थर्मोकेमिकल प्रक्रियाओं के माध्यम से SAF में परिवर्तनीय है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सतत विमानन ईंधन (SAF)
- परिभाषा: SAF पारंपरिक जेट ईंधन का एक ड्रॉप-इन प्रतिस्थापन है, जो सतत फीडस्टॉक से उत्पादित होता है और जीवनचक्र कार्बन उत्सर्जन को 80% तक कम करता है।
- फीडस्टॉक श्रेणियाँ: इसमें कृषि अवशेष, वानिकी अपशिष्ट, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, औद्योगिक अपशिष्ट, शैवाल और समर्पित ऊर्जा फसलें शामिल हैं।
- उत्पादन मार्ग: प्रमुख प्रौद्योगिकियों में फिशर-ट्रॉप्श संश्लेषण, हाइड्रोप्रोसेस्ड एस्टर और फैटी एसिड (HEFA), अल्कोहल-टू-जेट (ATJ), और गैसीकरण शामिल हैं।
- प्रमाणन: SAF को ASTM D7566 मानकों को पूरा करना होगा और इसे पारंपरिक जेट ईंधन के साथ 50% तक मिश्रित किया जा सकता है (कुछ मार्ग 100% की अनुमति देते हैं)।
- वैश्विक पहल: ICAO की CORSIA योजना, EU का ReFuelEU Aviation, और US SAF Grand Challenge का उद्देश्य SAF उत्पादन और अपनाने को बढ़ाना है।
- भारतीय संदर्भ: भारत विमानन क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करने के लिए कृषि अपशिष्ट, उपयोग किए गए खाना पकाने के तेल और अन्य बायोमास स्रोतों से SAF उत्पादन की खोज कर रहा है।
निम्नलिखित भारी उद्योगों पर विचार कीजिए:
- उर्वरक संयंत्र
- तेल शोधनशालाएँ
- इस्पात संयंत्र
हरित हाइड्रोजन से उपर्युक्त में से कितने उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सभी तीन
हरित हाइड्रोजन, जो नवीकरणीय विद्युत का उपयोग करके जल के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पादित किया जाता है, उल्लिखित सभी तीन भारी उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। यह ऊर्जा-गहन औद्योगिक प्रक्रियाओं में जीवाश्म ईंधन का स्वच्छ विकल्प प्रदान करता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में काफी कमी आती है।
1. उर्वरक संयंत्र: हरित हाइड्रोजन अमोनिया संश्लेषण में प्राकृतिक गैस का स्थान ले सकता है, जो उर्वरक उत्पादन के लिए प्राथमिक फीडस्टॉक है। यह वर्तमान में उपयोग की जाने वाली कार्बन-गहन स्टीम मीथेन रिफॉर्मिंग प्रक्रिया को समाप्त करता है।
2. तेल शोधनशालाएँ: शोधनशालाएँ हाइड्रोक्रैकिंग और डीसल्फराइजेशन प्रक्रियाओं के लिए हाइड्रोजन का उपयोग करती हैं। हरित हाइड्रोजन वर्तमान में जीवाश्म ईंधन से उत्पादित हाइड्रोजन का स्थान ले सकता है, जिससे शोधनशाला का कार्बन फुटप्रिंट कम होता है।
3. इस्पात संयंत्र: हरित हाइड्रोजन लौह अयस्क के प्रत्यक्ष न्यूनीकरण (DRI प्रक्रिया) में कोयले और कोक का स्थान ले सकता है, जो औद्योगिक CO₂ उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक को समाप्त करता है। विश्व स्तर पर कई पायलट परियोजनाएँ पहले से ही हाइड्रोजन-आधारित इस्पात निर्माण का परीक्षण कर रही हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: हरित हाइड्रोजन और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन
- हरित हाइड्रोजन: नवीकरणीय स्रोतों (सौर, पवन, जल) से विद्युत का उपयोग करके जल के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पादित हाइड्रोजन। यदि विद्युत 100% नवीकरणीय है तो यह कार्बन-मुक्त है।
- उर्वरक उद्योग: हैबर-बॉश प्रक्रिया के माध्यम से अमोनिया (NH₃) उत्पादन के लिए हाइड्रोजन का उपयोग करता है। वर्तमान में, जीवाश्म ईंधन-व्युत्पन्न हाइड्रोजन का उपयोग करके अमोनिया उत्पादन से वैश्विक ऊर्जा और CO₂ उत्सर्जन का ~1-2% आता है।
- तेल शोधन: शोधनशालाएँ भारी कच्चे तेल के उन्नयन, हाइड्रोक्रैकिंग और सल्फर हटाने के लिए महत्वपूर्ण हाइड्रोजन की खपत करती हैं। हरित हाइड्रोजन जीवाश्म-ईंधन-व्युत्पन्न हाइड्रोजन का सीधे स्थान ले सकता है।
- इस्पात उद्योग: पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस विधि में अपचायक एजेंट के रूप में कोक (कोयले से) का उपयोग होता है। हरित हाइड्रोजन-आधारित प्रत्यक्ष रिड्यूस्ड आयरन (DRI) प्रौद्योगिकी इसे प्रतिस्थापित कर सकती है, जिससे CO₂ के बजाय जल उत्पन्न होता है।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (भारत): 2030 तक भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए ₹19,744 करोड़ के परिव्यय के साथ 2023 में शुरू किया गया।
- चुनौतियाँ: उच्च उत्पादन लागत, बुनियादी ढांचे का विकास, भंडारण और परिवहन के मुद्दे, और इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण क्षमता का विस्तार।
हरित हाइड्रोजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसका उपयोग आंतरिक दहन के लिए सीधे ईंधन के रूप में किया जा सकता है।
- इसे प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर ऊष्मा या विद्युत उत्पादन के लिए ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- इसका उपयोग वाहनों को चलाने के लिए हाइड्रोजन ईंधन सेल में किया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सभी तीन
हरित हाइड्रोजन, जो इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादित होता है, एक बहुमुखी स्वच्छ ईंधन है जिसका उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। इसके अनुप्रयोगों से संबंधित सभी तीन कथन सही हैं।
✅ कथन 1 – सही: हरित हाइड्रोजन का उपयोग संशोधित आंतरिक दहन इंजनों में सीधे ईंधन के रूप में किया जा सकता है, जो पारंपरिक जीवाश्म ईंधन का स्थान ले सकता है।
✅ कथन 2 – सही: हरित हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस (मौजूदा पाइपलाइनों में 20% तक) के साथ मिलाया जा सकता है और ऊष्मा, विद्युत उत्पादन और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए उपयोग किया जा सकता है।
✅ कथन 3 – सही: हरित हाइड्रोजन का उपयोग हाइड्रोजन ईंधन सेल में विद्युत वाहनों को चलाने के लिए बिजली उत्पन्न करने में किया जाता है, जो शून्य-उत्सर्जन परिवहन प्रदान करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: हरित हाइड्रोजन
- परिभाषा: नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (सौर, पवन, जल) का उपयोग करके जल के इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से उत्पादित हाइड्रोजन, जिसके परिणामस्वरूप शून्य कार्बन उत्सर्जन होता है।
- उत्पादन विधि: इलेक्ट्रोलाइज़र में नवीकरणीय स्रोतों से विद्युत का उपयोग करके जल (H₂O) को हाइड्रोजन (H₂) और ऑक्सीजन (O₂) में विभाजित किया जाता है।
- रंग कोडिंग: हरित (नवीकरणीय ऊर्जा), ग्रे (कार्बन कैप्चर के बिना जीवाश्म ईंधन), नीला (कार्बन कैप्चर के साथ जीवाश्म ईंधन), भूरा/काला (कोयला)।
- अनुप्रयोग: परिवहन (ईंधन सेल वाहन), औद्योगिक प्रक्रियाएं (इस्पात, अमोनिया उत्पादन), ऊर्जा भंडारण, विद्युत उत्पादन और ऊष्मा।
- भारत की पहल: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (2023) जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 MMT वार्षिक उत्पादन है; भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए वैश्विक केंद्र बनाने पर ध्यान।
- लाभ: उपयोग के स्थान पर शून्य उत्सर्जन, उच्च ऊर्जा घनत्व, दीर्घकालिक भंडारण क्षमता, और विभिन्न क्षेत्रों में बहुमुखी अनुप्रयोग।
- चुनौतियां: उच्च उत्पादन लागत, ऊर्जा-गहन इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया, भंडारण और परिवहन बुनियादी ढांचे की आवश्यकताएं, और नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार की आवश्यकता।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- गुजरात में भारत का सबसे बड़ा सौर पार्क है।
- केरल में एक पूर्णतः सौर ऊर्जा संचालित अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।
- गोवा में भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक प्रोजेक्ट है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
यह प्रश्न भारत में सौर ऊर्जा प्रतिष्ठानों के बारे में तथ्यात्मक ज्ञान की परीक्षा करता है। केरल के हवाई अड्डे के बारे में केवल कथन 2 सही है, जबकि गुजरात और गोवा के बारे में दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
❌ कथन 1 – गलत: राजस्थान (गुजरात नहीं) में भड़ला सौर पार्क 2,245 मेगावाट क्षमता के साथ भारत का सबसे बड़ा सौर पार्क है, जो इसे विश्व के सबसे बड़े सौर पार्कों में से एक बनाता है।
✅ कथन 2 – सही: केरल में कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा 2015 में 45 एकड़ में फैले 46 मेगावाट सौर संयंत्र के माध्यम से बिजली उत्पादन करते हुए विश्व का पहला पूर्णतः सौर ऊर्जा संचालित हवाई अड्डा बन गया।
❌ कथन 3 – गलत: मध्य प्रदेश (गोवा नहीं) में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना 600 मेगावाट की क्षमता के साथ भारत की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजना है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में प्रमुख सौर ऊर्जा प्रतिष्ठान
| परियोजना/प्रतिष्ठान | स्थान | क्षमता/विवरण | महत्व |
|---|---|---|---|
| भड़ला सौर पार्क | राजस्थान | 2,245 मेगावाट | भारत का सबसे बड़ा सौर पार्क; विश्व के सबसे बड़े में से एक |
| कोचीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा | केरल | 46 मेगावाट सौर संयंत्र | विश्व का पहला पूर्णतः सौर ऊर्जा संचालित हवाई अड्डा (2015) |
| ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना | मध्य प्रदेश | 600 मेगावाट | भारत की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना |
| पावागड़ा सौर पार्क | कर्नाटक | 2,050 मेगावाट | भारत का दूसरा सबसे बड़ा सौर पार्क |
| रीवा अल्ट्रा मेगा सौर पार्क | मध्य प्रदेश | 750 मेगावाट | सबसे बड़े एकल-स्थल सौर संयंत्रों में से एक |
सौर जल पंपों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सौर ऊर्जा का उपयोग सतही पंपों को चलाने के लिए किया जा सकता है, न कि पनडुब्बी (सबमर्सिबल) पंपों के लिए।
- सौर ऊर्जा का उपयोग केन्द्रापसारी पंपों को चलाने के लिए किया जा सकता है, न कि पिस्टन वाले पंपों के लिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — न तो 1 और न ही 2
सौर जल पंप बहुमुखी होते हैं और ये सतही तथा पनडुब्बी दोनों प्रकार के पंपों के साथ-साथ केन्द्रापसारी और पिस्टन दोनों प्रकार के पंपों को शक्ति प्रदान कर सकते हैं। पंप का प्रकार (सतही/पनडुब्बी या केन्द्रापसारी/पिस्टन) सौर ऊर्जा के अनुप्रयोग को सीमित नहीं करता है, जिससे दोनों कथन गलत हो जाते हैं।
❌ कथन 1 – गलत: सौर ऊर्जा का उपयोग सतही पंपों और पनडुब्बी पंपों दोनों को चलाने के लिए किया जा सकता है, न कि केवल सतही पंपों के लिए।
❌ कथन 2 – गलत: सौर ऊर्जा का उपयोग केन्द्रापसारी पंपों और पिस्टन पंपों दोनों को चलाने के लिए किया जा सकता है, न कि केवल केन्द्रापसारी पंपों के लिए।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सौर जल पम्पन प्रणाली
- घटक: सौर जल पम्पन प्रणाली में तीन मुख्य घटक होते हैं: प्रकाशवोल्टीय (PV) सरणी/सौर पैनल, एक विद्युत मोटर (DC/AC/BLDC), और एक पंप।
- मोटर के आधार पर प्रकार: प्रणालियों को मोटर प्रकार के आधार पर प्रत्यक्ष धारा (DC), प्रत्यावर्ती धारा (AC), या ब्रशलेस DC (BLDC) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
- पंप स्थापना के आधार पर प्रकार: सतही पंप (जमीन के ऊपर स्थापित) या पनडुब्बी पंप (कुओं/बोरवेल में पानी के नीचे स्थापित) का उपयोग कर सकते हैं।
- पंप तंत्र के आधार पर प्रकार: केन्द्रापसारी पंप (घूर्णन ऊर्जा का उपयोग करते हुए) और पिस्टन पंप जैसे सकारात्मक विस्थापन पंप दोनों सौर-संचालित हो सकते हैं।
- अनुप्रयोग: सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, पशुधन के लिए पानी, और ग्रिड बिजली के बिना दूरदराज के क्षेत्रों के लिए आदर्श।
- लाभ: स्वच्छ, ऊर्जा-कुशल, टिकाऊ, कम परिचालन लागत, न्यूनतम रखरखाव, और डीजल/विद्युत पंपों का पर्यावरण के अनुकूल विकल्प।
ग्रामीण सड़क निर्माण में, पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने या कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए निम्नलिखित में से किसका उपयोग पसंद किया जाता है?
- कॉपर स्लैग
- कोल्ड मिक्स डामर प्रौद्योगिकी
- जियोटेक्सटाइल
- हॉट मिक्स डामर प्रौद्योगिकी
- पोर्टलैंड सीमेंट
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1, 2 और 3
ग्रामीण सड़क निर्माण में पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए, कॉपर स्लैग (एक उप-उत्पाद जो प्राकृतिक संसाधन मांग को कम करता है), कोल्ड मिक्स डामर (कम तापमान प्रसंस्करण के साथ कम उत्सर्जन), और जियोटेक्सटाइल (खुदाई और संसाधन उपयोग को कम करने वाली सिंथेटिक सामग्री) को प्राथमिकता दी जाती है। हॉट मिक्स डामर को उच्च ऊर्जा खपत की आवश्यकता होती है, और पोर्टलैंड सीमेंट उत्पादन कार्बन-गहन है, जिससे ये कम पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ विकल्प बन जाते हैं।
✅ कथन 1 – सही: कॉपर स्लैग, तांबा शोधन का उप-उत्पाद, कंक्रीट में रेत को प्रतिस्थापित कर सकता है, रेत खनन और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है।
✅ कथन 2 – सही: कोल्ड मिक्स डामर प्रौद्योगिकी कम तापमान पर संचालित होती है, हॉट मिक्स की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करती है और कम ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करती है।
✅ कथन 3 – सही: जियोटेक्सटाइल मिट्टी का स्थिरीकरण और जल निकासी प्रदान करते हैं जबकि अत्यधिक खुदाई और प्राकृतिक संसाधन खपत की आवश्यकता को कम करते हैं।
❌ कथन 4 – गलत: हॉट मिक्स डामर प्रौद्योगिकी को उच्च तापमान की आवश्यकता होती है और इस प्रकार उच्च ऊर्जा खपत होती है, जिससे यह कम पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ है।
❌ कथन 5 – गलत: पोर्टलैंड सीमेंट उत्पादन अत्यधिक ऊर्जा-गहन है और महत्वपूर्ण CO₂ उत्सर्जित करता है, जो कार्बन फुटप्रिंट में काफी योगदान देता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सतत सड़क निर्माण सामग्री
| सामग्री/प्रौद्योगिकी | पर्यावरणीय लाभ | कार्बन फुटप्रिंट प्रभाव |
|---|---|---|
| कॉपर स्लैग | उप-उत्पाद उपयोग; रेत खनन कम करता है; अपशिष्ट पुनर्चक्रण | कम - औद्योगिक अपशिष्ट को मोड़ता है |
| कोल्ड मिक्स डामर | कम उत्पादन तापमान (60-100°C बनाम 150-180°C); पुनर्नवीनीकृत सामग्री की अनुमति देता है; साइट पर उत्पादित किया जा सकता है | हॉट मिक्स की तुलना में 30-50% कम |
| जियोटेक्सटाइल | खुदाई की गहराई कम करता है; मिट्टी की स्थिरता में सुधार करता है; सड़क जीवन बढ़ाता है; बजरी/पत्थर की आवश्यकता कम करता है | कम - सामग्री परिवहन और निष्कर्षण को कम करता है |
| हॉट मिक्स डामर | अच्छा प्रदर्शन लेकिन उच्च ऊर्जा मांग | उच्च - 150-180°C प्रसंस्करण की आवश्यकता |
| पोर्टलैंड सीमेंट | सीमित - ऊर्जा-गहन उत्पादन | बहुत उच्च - 0.8-0.9 किग्रा CO₂ प्रति किग्रा सीमेंट |
- हरित सड़क निर्माण: औद्योगिक उप-उत्पादों, पुनर्नवीनीकृत सामग्रियों और कम-ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर ध्यान
- ग्रामीण सड़क संदर्भ: PMGSY (प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) टिकाऊ सामग्री और स्थानीय संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करती है
- जियोटेक्सटाइल अनुप्रयोग: सड़क निर्माण में पृथक्करण, निस्पंदन, जल निकासी, सुदृढीकरण और कटाव नियंत्रण
- फ्लाई ऐश और स्लैग: अन्य औद्योगिक उप-उत्पाद जो सड़क निर्माण में टिकाऊ विकल्पों के रूप में तेजी से उपयोग किए जा रहे हैं
भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- फोटोवोल्टिक इकाइयों में उपयोग किए जाने वाले सिलिकॉन वेफर्स के निर्माण में भारत विश्व में तीसरा सबसे बड़ा देश है।
- सौर ऊर्जा टैरिफ भारतीय सौर ऊर्जा निगम द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — न तो 1 और न ही 2
भारत में सौर ऊर्जा उत्पादन के बारे में दोनों कथन गलत हैं। भारत फोटोवोल्टिक इकाइयों के लिए सिलिकॉन वेफर्स के शीर्ष तीन वैश्विक निर्माताओं में नहीं है, और SECI सौर ऊर्जा टैरिफ निर्धारित नहीं करता बल्कि परियोजना कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाता है।
❌ कथन 1 – गलत: भारत फोटोवोल्टिक इकाइयों के लिए सिलिकॉन वेफर्स के शीर्ष तीन निर्माताओं में शामिल नहीं है; चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया इस क्षेत्र में प्रभुत्व रखते हैं, जिसमें अकेले चीन वैश्विक उत्पादन का 90% से अधिक हिस्सा रखता है।
❌ कथन 2 – गलत: भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) सौर ऊर्जा टैरिफ निर्धारित नहीं करता; टैरिफ विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों द्वारा आयोजित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित किए जाते हैं, जिसमें SECI एक सुविधाकर्ता और मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में सौर ऊर्जा
- भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI): नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अधीन एक सरकारी स्वामित्व वाला उद्यम, जिसकी स्थापना 2011 में प्रतिस्पर्धी बोली, निविदा और परियोजना कार्यान्वयन के माध्यम से सौर ऊर्जा तैनाती को सुविधाजनक बनाने के लिए की गई थी।
- टैरिफ निर्धारण: भारत में सौर ऊर्जा टैरिफ बाजार-संचालित हैं और रिवर्स नीलामी तंत्र के माध्यम से निर्धारित किए जाते हैं जहां डेवलपर्स प्रतिस्पर्धात्मक रूप से बोली लगाते हैं; सबसे कम बोली लगाने वाला अनुबंध जीतता है, जिससे लागत-प्रभावी बिजली खरीद सुनिश्चित होती है।
- सिलिकॉन वेफर निर्माण: भारत की घरेलू सौर विनिर्माण क्षमता सीमित है, सौर सेल, मॉड्यूल और सिलिकॉन वेफर्स के लिए आयात (विशेष रूप से चीन से) पर भारी निर्भरता है; सरकार उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है।
- वैश्विक नेता: चीन सिलिकॉन वेफर्स में 90% से अधिक बाजार हिस्सेदारी के साथ वैश्विक सौर विनिर्माण में प्रभुत्व रखता है, इसके बाद ताइवान और दक्षिण कोरिया हैं; भारत आत्मनिर्भर भारत जैसी नीतियों के माध्यम से विनिर्माण क्षमता बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- भारत की सौर क्षमता: भारत स्थापित सौर क्षमता में वैश्विक स्तर पर शीर्ष 5 देशों में शामिल है और अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं के हिस्से के रूप में 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखता है।
'नेट मीटरिंग' कभी-कभी समाचारों में किसके संवर्धन के संदर्भ में देखी जाती है -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — घरों/उपभोक्ताओं द्वारा सौर ऊर्जा के उत्पादन और उपयोग
नेट मीटरिंग एक बिलिंग व्यवस्था है जो सौर पैनल स्थापित करने वाले घरों और व्यवसायों को दिन के दौरान उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को वापस पावर ग्रिड में भेजने की अनुमति देती है। बदले में, उन्हें अपने बिजली बिलों पर क्रेडिट मिलता है जिसका उपयोग वे रात के समय या बादल वाली अवधि में ग्रिड से बिजली लेते समय कर सकते हैं जब सौर उत्पादन कम होता है। यह प्रणाली व्यक्तिगत उपभोक्ताओं के लिए छत पर सौर स्थापना को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाकर विकेन्द्रीकृत सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देती है, क्योंकि वे महंगे भौतिक भंडारण प्रणालियों की आवश्यकता के बिना ग्रिड को वर्चुअल बैटरी के रूप में उपयोग करते हैं।
'ईंधन सेल' के संदर्भ में जिसमें हाइड्रोजन-समृद्ध ईंधन और ऑक्सीजन का उपयोग बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यदि शुद्ध हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है, तो ईंधन सेल उप-उत्पाद के रूप में गर्मी और पानी का उत्सर्जन करता है।
- ईंधन सेल का उपयोग भवनों को बिजली देने के लिए किया जा सकता है और लैपटॉप कंप्यूटर जैसे छोटे उपकरणों के लिए नहीं।
- ईंधन सेल प्रत्यावर्ती धारा (AC) के रूप में बिजली का उत्पादन करते हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: शुद्ध हाइड्रोजन ईंधन सेल केवल पानी (H₂O) और ऊष्मा को उप-उत्पाद के रूप में उत्सर्जित करते हैं जब हाइड्रोजन ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करती है, जो इन्हें शून्य-उत्सर्जन ऊर्जा स्रोत बनाता है।
❌ कथन 2 – गलत: ईंधन सेल दोनों बड़े पैमाने के अनुप्रयोगों (भवन, वाहन) और छोटे पोर्टेबल उपकरणों (लैपटॉप, मोबाइल फोन) को बिजली दे सकते हैं। माइक्रो ईंधन सेल और पोर्टेबल ईंधन सेल उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए पहले से विकसित हैं।
❌ कथन 3 – गलत: ईंधन सेल दिष्ट धारा (DC) के रूप में बिजली उत्पन्न करते हैं, प्रत्यावर्ती धारा (AC) के रूप में नहीं। ग्रिड संगतता के लिए DC को AC में बदलने के लिए एक इन्वर्टर की आवश्यकता होती है।
भारतीय रेलवे द्वारा उपयोग किए जाने वाले बायो-टॉयलेट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बायो-टॉयलेट में मानव अपशिष्ट का अपघटन एक कवक टीका द्वारा शुरू किया जाता है।
- अमोनिया और जल वाष्प इस अपघटन में केवल अंतिम उत्पाद हैं जो वायुमंडल में छोड़े जाते हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: भारतीय रेलवे द्वारा उपयोग किए जाने वाले बायो-टॉयलेट में मानव अपशिष्ट के अपघटन के लिए अवायवीय बैक्टीरिया (कवक नहीं) का टीका प्रयोग किया जाता है जो ऑक्सीजन-रहित वातावरण में कार्य करते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: अपघटन प्रक्रिया से मीथेन गैस, कार्बन डाइऑक्साइड, उपचारित जल (क्लोरीनीकरण के बाद), और न्यूनतम स्लज उत्पन्न होते हैं – केवल अमोनिया और जल वाष्प नहीं।
सौर ऊर्जा उत्पादन की प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 'फोटोवोल्टिक्स' एक ऐसी तकनीक है जो प्रकाश को सीधे विद्युत में परिवर्तित करके बिजली उत्पन्न करती है, जबकि 'सोलर थर्मल' एक ऐसी तकनीक है जो सूर्य की किरणों का उपयोग ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए करती है जिसका उपयोग आगे विद्युत उत्पादन प्रक्रिया में किया जाता है।
- फोटोवोल्टिक्स प्रत्यावर्ती धारा (AC) उत्पन्न करता है, जबकि सोलर थर्मल दिष्ट धारा (DC) उत्पन्न करता है।
- भारत में सोलर थर्मल प्रौद्योगिकी के लिए विनिर्माण आधार है, लेकिन फोटोवोल्टिक्स के लिए नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: फोटोवोल्टिक्स (PV) अर्धचालक पदार्थों का उपयोग करके प्रकाश को सीधे विद्युत में परिवर्तित करता है, जबकि सोलर थर्मल केंद्रित सूर्य प्रकाश से ऊष्मा उत्पन्न करता है, जो विद्युत उत्पादन के लिए टर्बाइन चलाती है।
❌ कथन 2 – गलत: फोटोवोल्टिक सिस्टम दिष्ट धारा (DC) उत्पन्न करते हैं, जिसे इन्वर्टर के माध्यम से AC में परिवर्तित किया जाता है। सोलर थर्मल सिस्टम पारंपरिक टर्बाइन-जनरेटर प्रणाली के माध्यम से सीधे AC विद्युत उत्पन्न करते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: भारत में फोटोवोल्टिक्स के लिए मजबूत विनिर्माण आधार है (जैसे अडानी सोलर, विक्रम सोलर, टाटा पावर सोलर), जबकि सोलर थर्मल विनिर्माण छोटे पैमाने के अनुप्रयोगों जैसे वॉटर हीटर तक सीमित है।
बायोमास गैसीकरण को भारत में बिजली संकट के सतत समाधानों में से एक माना जाता है। इस संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- नारियल के छिलके, मूंगफली के छिलके और चावल की भूसी का उपयोग बायोमास गैसीकरण में किया जा सकता है।
- बायोमास गैसीकरण से उत्पन्न दहनशील गैसों में केवल हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड होते हैं।
- बायोमास गैसीकरण से उत्पन्न दहनशील गैसों का उपयोग प्रत्यक्ष ताप उत्पादन के लिए किया जा सकता है लेकिन आंतरिक दहन इंजनों में नहीं।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: नारियल के छिलके, मूंगफली के छिलके और चावल की भूसी उच्च कार्बन सामग्री और कम नमी के कारण गैसीकरण के लिए उत्कृष्ट कृषि अवशेष और बायोमास फीडस्टॉक हैं।
❌ कथन 2 – गलत: बायोमास गैसीकरण से सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), हाइड्रोजन (H₂), मीथेन (CH₄), और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) होते हैं, न कि केवल हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड।
❌ कथन 3 – गलत: बायोमास गैसीकरण से सिनगैस का उपयोग प्रत्यक्ष ताप उत्पादन और टार तथा कणों को हटाने के लिए उचित सफाई और शीतलन के बाद आंतरिक दहन इंजनों दोनों में किया जा सकता है।