निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
तितलियाँ
मछलियाँ
मेंढक
उपर्युक्त में से कितनों में विषैली प्रजातियाँ पायी जाती हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सभी तीन
प्रश्न में उल्लिखित सभी तीन समूहों—तितलियाँ, मछलियाँ और मेंढक—में विषैली प्रजातियाँ पायी जाती हैं। मोनार्क जैसी तितलियाँ अपने लार्वा अवस्था में मिल्कवीड के आहार से विषाक्त पदार्थ संचित करती हैं, जो उन्हें शिकारियों के लिए विषैला बनाता है। कई मछली प्रजातियाँ जैसे कि पफरफिश, लायनफिश और स्टोनफिश घातक विष या टॉक्सिन रखती हैं। पॉइजन डार्ट फ्रॉग उभयचरों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं जो रक्षा तंत्र के रूप में अपनी त्वचा के माध्यम से शक्तिशाली विषाक्त पदार्थ स्रावित करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विभिन्न पशु समूहों में विषैली प्रजातियाँ
- विषैली तितलियाँ: मोनार्क तितलियाँ अपनी कैटरपिलर अवस्था के दौरान मिल्कवीड पौधों से कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स संचित करती हैं, जो उन्हें पक्षियों और अन्य शिकारियों के लिए विषाक्त बनाता है। अन्य उदाहरणों में पाइपवाइन स्वैलोटेल शामिल है।
- विषैली मछलियाँ: पफरफिश में टेट्रोडोटॉक्सिन होता है, जो मनुष्यों के लिए घातक न्यूरोटॉक्सिन है। लायनफिश और स्टोनफिश में विषैले कांटे होते हैं। स्टिंगरे की पूंछ पर विषैले कांटे होते हैं।
- विषैले मेंढक: मध्य और दक्षिण अमेरिका के पॉइजन डार्ट फ्रॉग (परिवार डेंड्रोबैटिडे) अपनी त्वचा के माध्यम से एल्कलॉइड विष स्रावित करते हैं। गोल्डन पॉइजन फ्रॉग पृथ्वी पर सबसे विषैले कशेरुकियों में से एक है।
- विषाक्तता का तंत्र: कुछ प्रजातियाँ अंतर्जात रूप से (अपने शरीर के भीतर) विष उत्पन्न करती हैं, जबकि अन्य इन्हें अपने आहार से संचित करती हैं (जैसे मोनार्क तितलियाँ और पॉइजन डार्ट फ्रॉग)।
- विष का उद्देश्य: ये विषाक्त पदार्थ मुख्य रूप से शिकारियों के खिलाफ रक्षा तंत्र के रूप में कार्य करते हैं, जिनका कई मामलों में चेतावनी रंग (एपोसेमेटिज्म) के माध्यम से प्रचार किया जाता है।
Question 2 of 22 कीस्टोन एवं फ्लैगशिप प्रजातियाँ
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