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पर्यावरण प्रदूषण Previous Year Questions (PYQs)
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वायु प्रदूषण को कम करने के लिए वर्षा कराने का कृत्रिम तरीका उपयोग में लाया जाता है
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (Silver iodide और Potassium iodide)
कृत्रिम वर्षा (Artificial Rainfall) या Cloud Seeding एक तकनीक है जिसके माध्यम से बादलों में विशेष रसायन डालकर वर्षा को बढ़ावा दिया जाता है। वायु प्रदूषण कम करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है क्योंकि वर्षा प्रदूषकों को वातावरण से नीचे ले आती है।
✅ विकल्प A सही है: Silver iodide (AgI) और Potassium iodide (KI) क्लाउड सीडिंग में उपयोग किए जाते हैं। इनकी क्रिस्टलीय संरचना बर्फ जैसी होती है, जिससे वर्षा बनने में मदद मिलती है।
❌ विकल्प B गलत है: Silver nitrate का उपयोग सामान्यतः क्लाउड सीडिंग में नहीं किया जाता।
❌ विकल्प C गलत है: Potassium nitrate वर्षा कराने के लिए प्रयुक्त नहीं होता।
❌ विकल्प D गलत है: Silver nitrate और Potassium chloride क्लाउड सीडिंग के मानक रसायन नहीं हैं।
संक्षिप्त नोट्स: Cloud Seeding
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क्लाउड सीडिंग वर्षा बढ़ाने की कृत्रिम तकनीक है।
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प्रमुख रसायन: Silver Iodide (AgI), Potassium Iodide (KI) और Dry Ice (CO₂)।
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ये पदार्थ संघनन या बर्फ नाभिक (Ice Nuclei) का कार्य करते हैं।
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इसका उपयोग वायु प्रदूषण कम करने, जल उपलब्धता बढ़ाने और सूखे से निपटने के लिए किया जाता है।
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यह तभी काम करता है जब उपयुक्त बादल पहले से मौजूद हों।
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यह साफ आकाश में नए बादल नहीं बना सकता।
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भारत, चीन, UAE और अमेरिका सहित कई देशों ने इसका प्रयोग किया है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: अध्ययनों से संकेत मिलता है कि सीमेंट उद्योग से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का 5% से अधिक है।
कथन II: सीमेंट बनाते समय सिलिका युक्त मिट्टी को चूना पत्थर के साथ मिलाया जाता है।
कथन III: सीमेंट निर्माण के लिए क्लिंकर उत्पादन के दौरान चूना पत्थर को चूने में परिवर्तित किया जाता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2
सीमेंट उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और कुल उत्सर्जन का लगभग 5–8% योगदान देता है। सीमेंट निर्माण में चूना पत्थर (Limestone) और मिट्टी (Clay) दोनों का उपयोग होता है, लेकिन सबसे अधिक CO₂ चूना पत्थर के कैल्सिनेशन (Calcination) से निकलती है।
✅ कथन I सही है: सीमेंट उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का 5% से अधिक योगदान देता है।
✅ कथन II सही है: सीमेंट निर्माण में चूना पत्थर के साथ सिलिका युक्त मिट्टी मिलाई जाती है, जो आवश्यक खनिज प्रदान करती है।
✅ कथन III सही है: क्लिंकर निर्माण के दौरान चूना पत्थर (CaCO₃) को गर्म करके चूना (CaO) में बदला जाता है, जिससे CO₂ निकलती है।
❌ कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता: मिट्टी को मिलाना केवल कच्चे माल की आवश्यकता है, यह सीधे CO₂ उत्सर्जन का कारण नहीं है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: चूना पत्थर के कैल्सिनेशन से बड़ी मात्रा में CO₂ निकलती है, जो सीमेंट उद्योग के उच्च उत्सर्जन का मुख्य कारण है।
संक्षिप्त नोट्स: सीमेंट उद्योग और कार्बन उत्सर्जन
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सीमेंट उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का लगभग 5–8% योगदान देता है।
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मुख्य कच्चे पदार्थ चूना पत्थर और मिट्टी हैं।
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क्लिंकर सीमेंट निर्माण का मध्यवर्ती उत्पाद है।
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कैल्सिनेशन अभिक्रिया: CaCO₃ → CaO + CO₂।
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लगभग 60% उत्सर्जन कैल्सिनेशन प्रक्रिया से आता है।
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शेष उत्सर्जन मुख्यतः भट्टियों (Kilns) में ईंधन जलाने से होता है।
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उत्सर्जन कम करने के लिए लो-कार्बन सीमेंट और कार्बन कैप्चर तकनीकों पर कार्य हो रहा है।
निम्नलिखित पर विचार करें:
I. सिगरेट के टुकड़े
II. चश्मे के लेंस
III. कार के टायर
उनमें से कितने में प्लास्टिक है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (तीनों)
हमारे दैनिक जीवन की कई वस्तुओं में प्लास्टिक होता है, भले ही वे देखने में प्लास्टिक जैसी न लगें। सिगरेट के फिल्टर, आधुनिक चश्मे के लेंस और कार के टायर सभी में प्लास्टिक या प्लास्टिक-आधारित पॉलिमर सामग्री होती है।
✅ I. सिगरेट बट्स – सही: सिगरेट के फिल्टर मुख्य रूप से सेल्यूलोज एसीटेट नामक प्लास्टिक पॉलिमर से बने होते हैं।
✅ II. चश्मे के लेंस – सही: अधिकांश आधुनिक लेंस पॉलीकार्बोनेट या CR-39 प्लास्टिक से बनाए जाते हैं।
✅ III. कार टायर – सही: टायरों में सिंथेटिक रबर और अन्य पॉलिमर आधारित पदार्थ होते हैं, जो पेट्रोकेमिकल स्रोतों से प्राप्त होते हैं।
संक्षिप्त नोट्स: दैनिक जीवन में प्लास्टिक
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सिगरेट फिल्टर में प्रयुक्त सेल्यूलोज एसीटेट एक प्रकार का प्लास्टिक है।
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आधुनिक चश्मे के अधिकांश लेंस पॉलीकार्बोनेट से बनाए जाते हैं।
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कार टायर प्राकृतिक रबर और सिंथेटिक पॉलिमर दोनों से बने होते हैं।
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सिंथेटिक रबर का निर्माण पेट्रोलियम-आधारित रसायनों से होता है।
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प्लास्टिक अपशिष्ट पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक बना रह सकता है।
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सिगरेट बट्स विश्व में सबसे सामान्य प्लास्टिक कचरे में से एक हैं।
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वाहन टायरों के घिसने से माइक्रोप्लास्टिक्स उत्पन्न होते हैं।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: सक्रिय कार्बन अपशिष्ट जल धाराओं से प्रदूषकों को हटाने और विभिन्न उद्योगों से दूषित पदार्थों को दूर करने के लिए एक अच्छा और आकर्षक उपकरण है।
कथन II: सक्रिय कार्बन एक बड़े सतह क्षेत्र और भारी धातुओं को सोखने की एक मजबूत क्षमता प्रदर्शित करता है।
कथन III: सक्रिय कार्बन को उच्च कार्बन सामग्री वाले पर्यावरणीय कचरे से आसानी से संश्लेषित किया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1
सक्रिय कार्बन (Activated Carbon) जल और अपशिष्ट जल शोधन में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले अधिशोषकों (Adsorbents) में से एक है। इसकी अत्यधिक छिद्रयुक्त संरचना और विशाल सतह क्षेत्र इसे प्रदूषकों को हटाने में प्रभावी बनाते हैं। साथ ही इसे कार्बन-समृद्ध अपशिष्ट पदार्थों से कम लागत पर बनाया जा सकता है।
✅ कथन I सही है: सक्रिय कार्बन का उपयोग औद्योगिक अपशिष्ट जल और प्रदूषित जल से प्रदूषकों को हटाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
✅ कथन II सही है: इसकी सतह क्षेत्र बहुत बड़ा होता है और इसमें भारी धातुओं तथा अन्य प्रदूषकों को अधिशोषित करने की उच्च क्षमता होती है।
✅ कथन III सही है: सक्रिय कार्बन को नारियल के छिलके, धान की भूसी, बुरादा और अन्य कार्बन-समृद्ध अपशिष्टों से आसानी से बनाया जा सकता है।
✅ कथन II, कथन I की व्याख्या करता है: इसकी विशाल सतह और उच्च अधिशोषण क्षमता इसे प्रदूषक हटाने में प्रभावी बनाती है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: कम लागत और अपशिष्ट से निर्माण की सुविधा इसे एक आकर्षक तथा टिकाऊ विकल्प बनाती है।
संक्षिप्त नोट्स: Activated Carbon
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सक्रिय कार्बन एक अत्यधिक छिद्रयुक्त कार्बन पदार्थ है।
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इसका सतह क्षेत्र 1,000 m²/g से भी अधिक हो सकता है।
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इसका उपयोग जल शोधन, वायु शोधन और अपशिष्ट जल उपचार में किया जाता है।
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यह भारी धातुओं, रंगों, कीटनाशकों और कार्बनिक प्रदूषकों को हटाने में प्रभावी है।
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इसे नारियल के छिलके, लकड़ी, कोयला और कृषि अपशिष्टों से बनाया जा सकता है।
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यह मुख्यतः Adsorption (अधिशोषण) की प्रक्रिया से कार्य करता है।
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पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में इसका व्यापक उपयोग होता है।
"मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर" अक्सर किस संदर्भ में चर्चा में रहते हैं:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — अपशिष्ट जल उपचार प्रौद्योगिकियाँ
मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर (MBRs) उन्नत अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियाँ हैं जो पारंपरिक जैविक उपचार प्रक्रियाओं को मेम्ब्रेन निस्पंदन (माइक्रोफिल्ट्रेशन या अल्ट्राफिल्ट्रेशन) के साथ संयोजित करती हैं। ये प्रदूषकों को हटाने, उच्च गुणवत्ता वाला अपशिष्ट जल उत्पन्न करने और पारंपरिक उपचार विधियों की तुलना में कम स्थान की आवश्यकता में अत्यधिक कुशल हैं। MBRs का व्यापक रूप से नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है क्योंकि वे निलंबित ठोस, रोगजनकों और कार्बनिक प्रदूषकों को हटाने में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर (MBRs)
- प्रौद्योगिकी: एक इकाई में जैविक निम्नीकरण और मेम्ब्रेन निस्पंदन को संयोजित करती है
- मेम्ब्रेन प्रकार: 0.1-0.4 माइक्रोन के छिद्र आकार वाले माइक्रोफिल्ट्रेशन (MF) या अल्ट्राफिल्ट्रेशन (UF) मेम्ब्रेन का उपयोग करती है
- लाभ: उच्च अपशिष्ट जल गुणवत्ता, छोटा क्षेत्रफल, बायोमास का पूर्ण प्रतिधारण, और बेहतर रोगजनक हटाना
- अनुप्रयोग: नगरपालिका अपशिष्ट जल उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट उपचार, जल पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण
- सीमाएँ: उच्च पूंजी और परिचालन लागत, मेम्ब्रेन फाउलिंग समस्याएँ, ऊर्जा-गहन संचालन
- पर्यावरणीय महत्व: जल पुनः उपयोग को सक्षम बनाता है, प्रदूषण भार को कम करता है, और जल प्रबंधन में चक्रीय अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है
उपभोक्ता उत्पाद बनाने में उपयोग किए जाने वाले परफ्लुओरोएल्काइल और पॉलीफ्लुओरोएल्काइल पदार्थों (PFAS) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- PFAS पेयजल, खाद्य पदार्थों और खाद्य पैकेजिंग सामग्री में व्यापक रूप से पाए जाते हैं।
- PFAS पर्यावरण में आसानी से अपघटित नहीं होते हैं।
- PFAS के निरंतर संपर्क से जानवरों के शरीर में जैवसंचयन हो सकता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
PFAS (परफ्लुओरोएल्काइल और पॉलीफ्लुओरोएल्काइल पदार्थ) के बारे में तीनों कथन सही हैं। इन सिंथेटिक रसायनों को अक्सर 'फॉरएवर केमिकल्स' कहा जाता है, जो उपभोक्ता उत्पादों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं और पर्यावरणीय स्थिरता और जैवसंचयन क्षमता द्वारा विशेषता रखते हैं।
✅ कथन 1 – सही: PFAS व्यापक रूप से पेयजल, खाद्य पदार्थों और खाद्य पैकेजिंग सामग्री में पाए जाते हैं क्योंकि उपभोक्ता उत्पादों में इनका व्यापक उपयोग होता है और ये पर्यावरण में रिसने की क्षमता रखते हैं।
✅ कथन 2 – सही: PFAS को 'फॉरएवर केमिकल्स' कहा जाता है क्योंकि मजबूत कार्बन-फ्लोरीन बंधन इन्हें पर्यावरणीय अपघटन प्रक्रियाओं के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी बनाता है।
✅ कथन 3 – सही: अपनी स्थिरता के कारण, PFAS समय के साथ जानवरों और मनुष्यों के ऊतकों में जमा होते हैं, जिससे जैवसंचयन और संभावित स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न होते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: PFAS (फॉरएवर केमिकल्स)
- पूर्ण रूप: परफ्लुओरोएल्काइल और पॉलीफ्लुओरोएल्काइल पदार्थ
- उपनाम: 'फॉरएवर केमिकल्स' अत्यधिक स्थायी प्रकृति के कारण
- रासायनिक संरचना: मजबूत कार्बन-फ्लोरीन बंधन होते हैं जो टूटने का प्रतिरोध करते हैं
- सामान्य उपयोग: नॉन-स्टिक कुकवेयर, जल-प्रतिरोधी कपड़े, अग्निशमन फोम, खाद्य पैकेजिंग, सौंदर्य प्रसाधन
- पर्यावरणीय स्थिरता: प्राकृतिक रूप से अपघटित नहीं होते; मिट्टी, पानी और हवा में जमा होते हैं
- स्वास्थ्य चिंताएं: जैवसंचयन से संभावित कैंसर जोखिम, यकृत क्षति, प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभाव और विकासात्मक समस्याएं होती हैं
- वैश्विक चिंता: दुनिया भर में मनुष्यों और वन्यजीवों के रक्त नमूनों में पाए जाते हैं; बढ़ती नियामक जांच के अधीन
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: बाजार में मिलने वाली कई च्युइंग गम्स को पर्यावरण प्रदूषण का स्रोत माना जाता है। कथन-II: कई च्युइंग गम्स में गम बेस के रूप में प्लास्टिक होता है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है
च्युइंग गम्स पर्यावरण प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं, और कथन-II सीधे तौर पर यह स्पष्ट करता है कि ऐसा क्यों है।
✅ कथन-I – सही: बाजार में मिलने वाली कई च्युइंग गम्स को पर्यावरण प्रदूषण का स्रोत माना जाता है क्योंकि ये जैव-अपघटनीय नहीं होती हैं और अनुचित निपटान के कारण सार्वजनिक स्थानों पर स्थायी कचरे का रूप ले लेती हैं।
✅ कथन-II – सही: कई च्युइंग गम्स में गम बेस के रूप में प्लास्टिक पॉलिमर (जैसे पॉलीआइसोब्यूटिलीन, पॉलीविनाइल एसीटेट, या पॉलीएथिलीन) होते हैं, जो उन्हें जैव-अपघटनीय नहीं बनाते और पर्यावरण में स्थायी रूप से बने रहते हैं।
व्याख्या: कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है क्योंकि प्लास्टिक-आधारित गम बेस की उपस्थिति ही मुख्य कारण है कि च्युइंग गम्स पर्यावरणीय प्रदूषक बन जाती हैं। ये सिंथेटिक पॉलिमर प्राकृतिक रूप से विघटित नहीं होते और वर्षों तक पर्यावरण में बने रहते हैं, जिससे सफाई की चुनौतियां पैदा होती हैं और प्लास्टिक प्रदूषण में योगदान होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: च्युइंग गम और पर्यावरण प्रदूषण
- गम बेस संरचना: आधुनिक च्युइंग गम्स प्राकृतिक चिकल लेटेक्स के बजाय सिंथेटिक पॉलिमर (प्लास्टिक) जैसे पॉलीआइसोब्यूटिलीन और पॉलीविनाइल एसीटेट का उपयोग करती हैं।
- जैव-अपघटनीय नहीं: ये प्लास्टिक-आधारित गम बेस पर्यावरण में टूटने में वर्षों से दशकों तक का समय लेते हैं और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के रूप में बने रहते हैं।
- शहरी प्रदूषण: फेंकी गई च्युइंग गम सड़क कचरे के सबसे सामान्य रूपों में से एक है, जिसे हटाने के लिए महंगी प्रक्रियाओं (अक्सर रासायनिक विलायक या फ्रीजिंग तकनीकों) की आवश्यकता होती है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: अनुचित तरीके से फेंकी गई गम प्लास्टिक प्रदूषण में योगदान करती है, निगलने पर वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा सकती है, और फुटपाथ तथा सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर भद्दे दाग बनाती है।
- जैव-अपघटनीय विकल्प: कुछ कंपनियां अब पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करने के लिए पौधे-आधारित, जैव-अपघटनीय गम विकल्प विकसित कर रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — जीवाश्म ईंधन का उपयोग करने वाले विद्युत संयंत्र
EPA के अनुसार, जीवाश्म ईंधन, विशेष रूप से कोयला जलाने वाले विद्युत संयंत्र विश्व स्तर पर सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोत हैं। कोयले में उच्च स्तर का सल्फर होता है, और जब विद्युत उत्पादन के लिए इसे जलाया जाता है, तो यह वायुमंडल में बड़ी मात्रा में SO₂ छोड़ता है। हालांकि बंकर ईंधन का उपयोग करने वाले जहाज, धातु निष्कर्षण प्रक्रियाएं और लोकोमोटिव भी SO₂ उत्सर्जन में योगदान करते हैं, लेकिन उनका संयुक्त योगदान जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत उत्पादन से होने वाले उत्सर्जन की तुलना में काफी कम है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) उत्सर्जन
- प्राथमिक स्रोत: कोयला आधारित विद्युत संयंत्र वैश्विक SO₂ उत्सर्जन के लगभग 65-70% के लिए जिम्मेदार हैं, क्योंकि कोयले में भार के अनुसार 0.5-3% सल्फर होता है।
- जहाज: भारी बंकर ईंधन (उच्च सल्फर सामग्री) का उपयोग करने वाले समुद्री जहाज दूसरा प्रमुख स्रोत हैं, विशेष रूप से तटीय और बंदरगाह क्षेत्रों में; MARPOL Annex VI जैसे नियम अब समुद्री ईंधन में सल्फर सामग्री को सीमित करते हैं।
- धातु प्रगलन: सल्फाइड अयस्कों से तांबा, जस्ता और सीसा जैसी धातुओं का निष्कर्षण भूनने और प्रगलन प्रक्रियाओं के दौरान SO₂ छोड़ता है, जो कुल उत्सर्जन का 5-10% योगदान करता है।
- लोकोमोटिव: डीजल से चलने वाली ट्रेनें डीजल ईंधन में कम सल्फर सामग्री और विद्युत संयंत्रों की तुलना में अपेक्षाकृत कम ईंधन खपत के कारण SO₂ उत्सर्जन में न्यूनतम योगदान करती हैं।
- पर्यावरणीय प्रभाव: SO₂ अम्लीय वर्षा, श्वसन समस्याओं का कारण बनता है, और कणिका पदार्थ (PM2.5) निर्माण में योगदान करता है; यह वनस्पति को भी नुकसान पहुंचाता है और इमारतों को क्षरित करता है।
- नियंत्रण उपाय: फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन (FGD/स्क्रबर्स), कम-सल्फर ईंधन में परिवर्तन, और नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण प्रमुख शमन रणनीतियां हैं।
पारे के प्रदूषण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सोने की खनन गतिविधि विश्व में पारे के प्रदूषण का एक स्रोत है।
- कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्र पारे के प्रदूषण का कारण बनते हैं।
- पारे के संपर्क का कोई ज्ञात सुरक्षित स्तर नहीं है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
पारे के प्रदूषण के संदर्भ में तीन में से दो कथन सही हैं। सोने की खनन गतिविधियाँ और कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्र दोनों विश्व स्तर पर पारे के प्रदूषण के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। हालांकि, यह दावा कि "कोई ज्ञात सुरक्षित स्तर नहीं है" वैज्ञानिक रूप से गलत है, क्योंकि WHO जैसी नियामक संस्थाओं ने पारे के संपर्क के लिए संदर्भ मात्रा और सहनीय सेवन स्तर स्थापित किए हैं।
✅ कथन 1 – सही: सोने की खनन, विशेष रूप से कारीगरी और छोटे पैमाने की खनन, सोने के कणों के साथ मिश्रण बनाने के लिए तरल पारे का उपयोग करती है, जो जल निकायों और वनों में, विशेष रूप से अमेज़न जैसे क्षेत्रों में, महत्वपूर्ण मात्रा में पारा छोड़ती है।
✅ कथन 2 – सही: कोयला आधारित तापीय विद्युत संयंत्र (TPPs) पारे के उत्सर्जन का सबसे बड़ा मानवजनित स्रोत हैं, जो फ्लाई ऐश और फ्ल्यू गैसों के माध्यम से पारा छोड़ते हैं; अध्ययन दर्शाते हैं कि भारत जैसे देशों में TPPs पारे के उत्सर्जन का 80% से अधिक योगदान करते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: जबकि पारा अत्यधिक विषैला है, नियामक और वैज्ञानिक संस्थाएँ सुरक्षित संपर्क सीमाएँ स्थापित करती हैं; WHO का मिथाइलमरकरी के लिए अनंतिम सहनीय साप्ताहिक सेवन 1.6 µg/kg शरीर भार/सप्ताह है, और पेयजल सीमा 1 µg/लीटर है, जो प्रदर्शित करता है कि सुरक्षित स्तर मौजूद हैं जिनके नीचे स्वास्थ्य जोखिम न्यूनतम हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पारा प्रदूषण
- पारा प्रदूषण के स्रोत: कोयला आधारित विद्युत संयंत्र (सबसे बड़ा स्रोत), कारीगरी सोने की खनन, क्लोर-क्षार उद्योग, अपशिष्ट भस्मक, सीमेंट उत्पादन, और ज्वालामुखी विस्फोट।
- पर्यावरण में पारा: जलीय प्रणालियों में बैक्टीरियल क्रिया के माध्यम से विषैले मिथाइलमरकरी में परिवर्तित होता है; मछलियों में जैव-संचयन और खाद्य श्रृंखला में जैव-आवर्धन होता है।
- स्वास्थ्य प्रभाव: तंत्रिका तंत्र, गुर्दे और विकासशील भ्रूण को क्षति पहुँचाता है; मिनामाता रोग (गंभीर तंत्रिका संबंधी सिंड्रोम) का कारण बनता है; बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से हानिकारक।
- मिनामाता कन्वेंशन: मानवजनित पारे के उत्सर्जन और विमोचन से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए वैश्विक संधि (2013); भारत ने 2018 में अनुसमर्थन किया।
- सुरक्षित संपर्क स्तर: WHO दिशानिर्देश: मिथाइलमरकरी के लिए 1.6 µg/kg शरीर भार/सप्ताह; पेयजल के लिए 1 µg/लीटर; "मात्रा जहर बनाती है" की अवधारणा लागू होती है।
- कोयला संयंत्रों से पारा: भारतीय कोयले में 0.05-0.5 ppm पारा होता है; दहन के दौरान निकलता है; तालाबों में फ्लाई ऐश का निपटान पारे से दूषित जलीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाता है।
WHO वायु गुणवत्ता दिशानिर्देशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- PM2.5 का 24 घंटे का माध्य 15 ug/m³ से अधिक नहीं होना चाहिए और PM2.5 का वार्षिक माध्य 5 ug/m³ से अधिक नहीं होना चाहिए।
- एक वर्ष में, ओजोन प्रदूषण का उच्चतम स्तर प्रतिकूल मौसम की अवधि के दौरान होता है।
- PM10 फेफड़ों की बाधा को भेद सकता है और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकता है।
- वायु में अत्यधिक ओजोन अस्थमा को ट्रिगर कर सकती है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1 और 4
WHO वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश (2021) जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पार्टिकुलेट मैटर और अन्य प्रदूषकों के लिए कड़े मानदंड निर्धारित करते हैं। कथन 1 PM2.5 के लिए WHO की अनुशंसित सीमाओं को सही बताता है, और कथन 4 अस्थमा को ट्रिगर करने में ओजोन की भूमिका को सही पहचानता है। हालांकि, कथन 2 और 3 में ओजोन निर्माण की स्थितियों और विभिन्न पार्टिकुलेट मैटर आकारों की प्रवेश क्षमताओं के संबंध में तथ्यात्मक त्रुटियां हैं।
✅ कथन 1 – सही: WHO दिशानिर्देश (2021) अनुशंसा करते हैं कि PM2.5 का 24 घंटे का माध्य 15 µg/m³ से अधिक नहीं होना चाहिए और वार्षिक माध्य 5 µg/m³ से अधिक नहीं होना चाहिए।
❌ कथन 2 – गलत: ओजोन प्रदूषण धूप, गर्म और स्थिर मौसम की स्थिति के दौरान चरम पर होता है, प्रतिकूल मौसम के दौरान नहीं; सूर्य का प्रकाश उन फोटोकेमिकल प्रतिक्रियाओं को प्रेरित करता है जो भू-स्तरीय ओजोन उत्पन्न करती हैं।
❌ कथन 3 – गलत: PM2.5 (PM10 नहीं) फेफड़ों की बाधा को भेद सकता है और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकता है; PM10 कण बहुत बड़े होते हैं और आमतौर पर ऊपरी वायुमार्ग और श्वसनी में जमा होते हैं।
✅ कथन 4 – सही: वायु में अत्यधिक ओजोन श्वसन तंत्र को परेशान करती है, अस्थमा के दौरे को ट्रिगर करती है, और अन्य श्वसन स्थितियों को बढ़ाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वायु प्रदूषक और स्वास्थ्य प्रभाव
| प्रदूषक | आकार/विशेषताएं | स्वास्थ्य प्रभाव | निर्माण की स्थितियां |
|---|---|---|---|
| PM10 | कण ≤10 µm | ऊपरी वायुमार्ग में जमा होता है; श्वसन जलन, ब्रोंकाइटिस का कारण बनता है | धूल, निर्माण, दहन |
| PM2.5 | कण ≤2.5 µm (सूक्ष्म) | फेफड़ों में गहराई से प्रवेश करता है और रक्तप्रवाह में प्रवेश करता है; हृदय, मस्तिष्क, अंगों को प्रभावित करता है | दहन, वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रक्रियाएं |
| भू-स्तरीय ओजोन (O₃) | द्वितीयक प्रदूषक | अस्थमा को ट्रिगर करता है, फेफड़ों की कार्यक्षमता कम करता है, श्वसन सूजन | सूर्य के प्रकाश में फोटोकेमिकल प्रतिक्रियाओं से बनता है (NOx + VOCs) |
- WHO वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश (2021): PM2.5 वार्षिक माध्य: 5 µg/m³; 24 घंटे का माध्य: 15 µg/m³
- WHO वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश (2021): PM10 वार्षिक माध्य: 15 µg/m³; 24 घंटे का माध्य: 45 µg/m³
- ओजोन चरम: गर्मी के महीनों में उच्च तापमान, तेज धूप और स्थिर वायु द्रव्यमान के साथ
- अल्ट्राफाइन कण (PM0.1): PM2.5 से भी छोटे, सीधे रक्त और अंगों में प्रवेश कर सकते हैं
- भारत के राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS): WHO दिशानिर्देशों की तुलना में कम कड़े; PM2.5 वार्षिक: 40 µg/m³, 24 घंटे: 60 µg/m³
निम्नलिखित पर विचार कीजिए;
- कार्बन मोनोऑक्साइड
- नाइट्रोजन ऑक्साइड
- ओजोन
- सल्फर डाइऑक्साइड
पर्यावरण में उपर्युक्त में से किसकी अधिकता अम्ल वर्षा का/के कारण है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 4
अम्ल वर्षा वायुमंडल में नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) और सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) की उपस्थिति के कारण होती है, जो जल वाष्प के साथ क्रिया करके क्रमशः नाइट्रिक अम्ल और सल्फ्यूरिक अम्ल बनाते हैं। कार्बन मोनोऑक्साइड और ओजोन प्रदूषक हैं लेकिन अम्ल वर्षा के निर्माण में सीधे योगदान नहीं करते हैं।
✅ कथन 2 – सही: नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) वायुमंडल में जल और ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) बनाते हैं, जो अम्ल वर्षा का एक प्रमुख घटक है।
❌ कथन 1 – गलत: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) एक प्रदूषक है जो भू-स्तरीय ओजोन निर्माण में योगदान करता है लेकिन अम्ल वर्षा का कारण नहीं बनता है।
❌ कथन 3 – गलत: ओजोन (O₃) एक द्वितीयक प्रदूषक है और अम्ल वर्षा निर्माण के लिए पूर्ववर्ती के रूप में कार्य नहीं करता है।
✅ कथन 4 – सही: सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) वायुमंडलीय नमी के साथ क्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) बनाता है, जो अम्ल वर्षा का दूसरा प्रमुख घटक है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अम्ल वर्षा
- परिभाषा: अम्ल वर्षा का तात्पर्य 5.6 से कम pH वाली वर्षा (बारिश, बर्फ, कोहरा) से है, जो वायुमंडलीय प्रदूषण के कारण होती है।
- प्रमुख कारण: कोयला दहन से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) का उत्सर्जन और वाहन निकास तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं से नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) का उत्सर्जन।
- रासायनिक अभिक्रियाएँ: SO₂ + H₂O → H₂SO₃ (सल्फ्यूरस अम्ल) → H₂SO₄ (सल्फ्यूरिक अम्ल); NOₓ + H₂O → HNO₃ (नाइट्रिक अम्ल)।
- पर्यावरणीय प्रभाव: झीलों और नदियों का अम्लीकरण, वनों को क्षति, भवनों और स्मारकों का क्षरण (विशेषकर संगमरमर और चूना पत्थर), मृदा अवक्रमण।
- मानव स्वास्थ्य प्रभाव: SO₂ और NOₓ से निर्मित सूक्ष्म कण पदार्थ के कारण श्वसन समस्याएं।
- नियंत्रण उपाय: कम सल्फर वाले ईंधन का उपयोग, उद्योगों में स्क्रबर की स्थापना, वाहनों में उत्प्रेरक परिवर्तक, और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना।
पॉलीइथीलीन टेरेफ्थैलेट के संदर्भ में, जिसका उपयोग हमारे दैनिक जीवन में व्यापक है, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसके रेशों को ऊन और सूती रेशों के साथ मिश्रित करके उनके गुणों को सुदृढ़ किया जा सकता है।
- इससे बने कंटेनरों का उपयोग किसी भी मादक पेय को संग्रहीत करने के लिए किया जा सकता है।
- इससे बनी बोतलों को अन्य उत्पादों में पुनर्चक्रित किया जा सकता है।
- इससे बनी वस्तुओं को बिना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के भस्मीकरण द्वारा आसानी से निपटाया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — 1 और 3
पॉलीइथीलीन टेरेफ्थैलेट (PET) एक बहुमुखी बहुलक है जिसका व्यापक रूप से वस्त्रों और पैकेजिंग में उपयोग होता है। कथन 1 और 3 सही हैं क्योंकि PET रेशों को प्राकृतिक रेशों के साथ मिश्रित करके गुणों को बढ़ाया जा सकता है, और PET बोतलें अत्यधिक पुनर्चक्रण योग्य हैं। कथन 2 और 4 गलत हैं क्योंकि सभी PET कंटेनर सभी प्रकार के मादक पेयों को संग्रहीत करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं (विशेष रूप से उच्च-प्रूफ स्पिरिट या उच्च तापमान पर संभावित रासायनिक निक्षालन के कारण), और PET का भस्मीकरण अनिवार्य रूप से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, मुख्य रूप से CO₂, उत्पन्न करता है।
✅ कथन 1 – सही: PET रेशे (पॉलिएस्टर) को आमतौर पर ऊन और सूती के साथ मिश्रित किया जाता है ताकि वस्त्र अनुप्रयोगों में झुर्रियों के प्रतिरोध, शक्ति और स्थायित्व में सुधार हो।
❌ कथन 2 – गलत: हालांकि PET कंटेनर कुछ मादक पेयों को संग्रहीत कर सकते हैं, वे सभी प्रकारों के लिए उपयुक्त नहीं हैं, विशेष रूप से उच्च-अल्कोहल सामग्री वाले स्पिरिट या उच्च तापमान पर संग्रहीत पेय के लिए, क्योंकि प्लास्टिक से रसायन निक्षालित हो सकते हैं।
✅ कथन 3 – सही: PET बोतलें विश्व स्तर पर सबसे अधिक पुनर्चक्रित प्लास्टिक में से हैं और इन्हें नई बोतलों, पॉलिएस्टर कपड़ों, कालीनों, ऑटोमोटिव पुर्जों और निर्माण सामग्री में पुनः संसाधित किया जा सकता है।
❌ कथन 4 – गलत: PET का भस्मीकरण कार्बन डाइऑक्साइड और संभावित रूप से विषाक्त यौगिकों सहित ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करता है; यह उत्सर्जन के बिना पर्यावरण के अनुकूल निपटान विधि नहीं है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पॉलीइथीलीन टेरेफ्थैलेट (PET)
- रासायनिक सूत्र: (C₁₀H₈O₄)ₙ – पॉलिएस्टर परिवार का एक थर्मोप्लास्टिक बहुलक राल
- सामान्य उपयोग: पेय पदार्थों की बोतलें, खाद्य कंटेनर, सिंथेटिक रेशे (पॉलिएस्टर), पैकेजिंग फिल्में, और इंजीनियरिंग रेजिन
- पुनर्चक्रण कोड: #1 (PETE या PET) – विश्व स्तर पर सबसे व्यापक रूप से पुनर्चक्रित प्लास्टिक में से एक
- वस्त्र अनुप्रयोग: PET रेशों (पॉलिएस्टर) को सूती और ऊन जैसे प्राकृतिक रेशों के साथ मिश्रित किया जाता है ताकि स्थायित्व, झुर्रियों के प्रतिरोध और नमी-विक्किंग गुणों को बढ़ाया जा सके
- पुनर्चक्रण योग्यता: यांत्रिक या रासायनिक रूप से rPET (पुनर्चक्रित PET) में पुनर्चक्रित किया जा सकता है नई बोतलों, कपड़ों, कालीनों और औद्योगिक सामग्रियों के लिए
- पर्यावरणीय चिंताएं: जैव-निम्नीकरणीय नहीं; भस्मीकरण CO₂ और अन्य प्रदूषक छोड़ता है; सूक्ष्म प्लास्टिक उत्पादन; उचित अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता
- भंडारण सीमाएं: उच्च-तापमान भंडारण या उच्च-प्रूफ मादक पेयों के लिए उपयुक्त नहीं संभावित रासायनिक निक्षालन (एसिटैल्डिहाइड, एंटीमनी) के कारण
- लाभ: हल्का, टूट-फूट प्रतिरोधी, गैसों और नमी के लिए उत्कृष्ट अवरोध गुण, लागत-प्रभावी, और उत्पादन के लिए ऊर्जा-कुशल
तांबा गलाने (कॉपर स्मेल्टिंग) के संयंत्रों के बारे में चिंता क्यों है?
1. ये पर्यावरण में कार्बन मोनोऑक्साइड की घातक मात्रा छोड़ सकते हैं।
2. कॉपर स्लैग कुछ भारी धातुओं के पर्यावरण में निक्षालन (लीचिंग) का कारण बन सकता है।
3. ये प्रदूषक के रूप में सल्फर डाइऑक्साइड छोड़ सकते हैं।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
तांबा गलाने के संयंत्र सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन और कॉपर स्लैग से भारी धातुओं के निक्षालन की संभावना के कारण एक प्रमुख पर्यावरणीय चिंता हैं। प्राथमिक गैसीय प्रदूषक SO₂ है, कार्बन मोनोऑक्साइड नहीं।
❌ कथन 1 – गलत: तांबा गलाने के संयंत्र आमतौर पर कार्बन मोनोऑक्साइड की घातक मात्रा नहीं छोड़ते हैं; चिंता का प्राथमिक गैसीय प्रदूषक सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) है।
✅ कथन 2 – सही: कॉपर स्लैग, गलाने का उपोत्पाद, भारी धातुएं जैसे आर्सेनिक, सीसा और कैडमियम युक्त होता है, जो मिट्टी और भूजल में रिसकर पर्यावरणीय संदूषण का कारण बन सकता है।
✅ कथन 3 – सही: तांबा गलाना बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड छोड़ता है क्योंकि अधिकांश तांबा अयस्क सल्फाइड खनिज (जैसे चैलकोपाइराइट) होते हैं, और भर्जन और गलाने की प्रक्रियाओं के दौरान सल्फर SO₂ में ऑक्सीकृत हो जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: तांबा गलाने की पर्यावरणीय चिंताएं
- प्राथमिक प्रदूषक: सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) तांबा गलाने से मुख्य गैसीय उत्सर्जन है, क्योंकि तांबा अयस्क मुख्यतः सल्फाइड खनिज होते हैं।
- कॉपर स्लैग: भारी धातुएं (आर्सेनिक, सीसा, कैडमियम, पारा) युक्त होता है जो पर्यावरण में रिसकर मिट्टी और जल संसाधनों को दूषित कर सकता है।
- अम्ल वर्षा: SO₂ उत्सर्जन अम्ल वर्षा के निर्माण में योगदान देता है, जो पारिस्थितिकी तंत्र, फसलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाता है।
- स्वास्थ्य प्रभाव: SO₂ श्वसन समस्याओं का कारण बनता है; स्लैग से भारी धातुएं जैव-संचय कर सकती हैं और तंत्रिका संबंधी तथा विकासात्मक समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं।
- शमन उपाय: SO₂ को पकड़ने के लिए स्क्रबर्स का उपयोग, उचित स्लैग प्रबंधन, स्वच्छ गलाने की तकनीकों को अपनाना, और सल्फ्यूरिक एसिड उत्पादन के लिए सल्फर की पुनर्प्राप्ति।
'R2 कोड ऑफ प्रैक्टिसेज़' किसके लिए उपलब्ध एक साधन है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए।
R2 (रिस्पॉन्सिबल रीसाइक्लिंग) कोड ऑफ प्रैक्टिसेज़ मानकों का एक व्यापक समूह है जो विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग के लिए डिज़ाइन किया गया है ताकि इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट के पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित और सामाजिक रूप से जिम्मेदार प्रबंधन को सुनिश्चित किया जा सके। यह ई-कचरा पुनर्चक्रण संचालन में डेटा सुरक्षा, सामग्री प्रबंधन, डाउनस्ट्रीम विक्रेता प्रबंधन और कार्यकर्ता स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: R2 कोड ऑफ प्रैक्टिसेज़
- पूर्ण रूप: R2 का अर्थ रिस्पॉन्सिबल रीसाइक्लिंग है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग के लिए विकसित किया गया है।
- उद्देश्य: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ई-कचरे के सुरक्षित, नैतिक और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार पुनर्चक्रण के लिए मानक स्थापित करना।
- मुख्य कवर क्षेत्र: डेटा सुरक्षा और विनाश, सामग्री प्रबंधन, डाउनस्ट्रीम विक्रेता जवाबदेही, पर्यावरणीय स्वास्थ्य और सुरक्षा, कार्यकर्ता संरक्षण।
- प्रमाणन: R2 प्रमाणन को विश्व स्तर पर जिम्मेदार ई-कचरा पुनर्चक्रण प्रथाओं के चिह्न के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- ई-कचरे पर फोकस: इलेक्ट्रॉनिक्स में विषाक्त सामग्री (लेड, पारा, कैडमियम) के बारे में बढ़ती चिंताओं को संबोधित करता है और उचित निपटान और पुनर्चक्रण विधियों को बढ़ावा देता है।
ट्राइक्लोसन, जो लंबे समय तक उच्च स्तर के संपर्क में आने पर हानिकारक माना जाता है, सबसे अधिक संभावना निम्नलिखित में से किसमें मौजूद है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — प्रसाधन सामग्री
ट्राइक्लोसन (TCS) एक जीवाणुरोधी और कवकरोधी एजेंट है जो आमतौर पर विभिन्न व्यक्तिगत देखभाल और उपभोक्ता उत्पादों में पाया जाता है। यह सबसे अधिक प्रचलित रूप से प्रसाधन सामग्री जैसे टूथपेस्ट, साबुन, हैंड सैनिटाइज़र, बॉडी वॉश और डिओडोरेंट में मौजूद होता है। ट्राइक्लोसन के उच्च स्तर के लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चिंताएं उत्पन्न हुई हैं, जिसके कारण कई देशों में प्रतिबंध और प्रतिबंध लगाए गए हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ट्राइक्लोसन
- रासायनिक प्रकृति: ट्राइक्लोसन एक सिंथेटिक रोगाणुरोधी यौगिक है जिसका उपयोग जीवाणु संदूषण को कम करने या रोकने के लिए किया जाता है।
- सामान्य उत्पाद: जीवाणुरोधी साबुन, टूथपेस्ट, हैंड सैनिटाइज़र, बॉडी वॉश, डिटर्जेंट, सौंदर्य प्रसाधन और कुछ चिकित्सा उपकरणों में पाया जाता है।
- स्वास्थ्य चिंताएं: लंबे समय तक संपर्क हार्मोन नियमन को बाधित कर सकता है (अंतःस्रावी व्यवधान), एंटीबायोटिक प्रतिरोध में योगदान कर सकता है, और त्वचा में जलन पैदा कर सकता है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: ट्राइक्लोसन पर्यावरण में बना रह सकता है, जल निकायों को दूषित कर सकता है, और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
- नियामक कार्रवाई: अमेरिकी FDA ने 2016 में ओवर-द-काउंटर एंटीसेप्टिक वॉश उत्पादों से ट्राइक्लोसन पर प्रतिबंध लगा दिया; EU ने 2014 में सौंदर्य प्रसाधनों में इसके उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया।
- विकल्प: निर्माता तेजी से सुरक्षित विकल्पों जैसे अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र और प्राकृतिक रोगाणुरोधी एजेंटों का उपयोग कर रहे हैं।