UPSC CSE Prelims
ोस एवं ई-कचरा प्रबंधन Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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पॉलीइथीलीन टेरेफ्थैलेट के संदर्भ में, जिसका उपयोग हमारे दैनिक जीवन में व्यापक है, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसके रेशों को ऊन और सूती रेशों के साथ मिश्रित करके उनके गुणों को सुदृढ़ किया जा सकता है।
- इससे बने कंटेनरों का उपयोग किसी भी मादक पेय को संग्रहीत करने के लिए किया जा सकता है।
- इससे बनी बोतलों को अन्य उत्पादों में पुनर्चक्रित किया जा सकता है।
- इससे बनी वस्तुओं को बिना ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के भस्मीकरण द्वारा आसानी से निपटाया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — 1 और 3
पॉलीइथीलीन टेरेफ्थैलेट (PET) एक बहुमुखी बहुलक है जिसका व्यापक रूप से वस्त्रों और पैकेजिंग में उपयोग होता है। कथन 1 और 3 सही हैं क्योंकि PET रेशों को प्राकृतिक रेशों के साथ मिश्रित करके गुणों को बढ़ाया जा सकता है, और PET बोतलें अत्यधिक पुनर्चक्रण योग्य हैं। कथन 2 और 4 गलत हैं क्योंकि सभी PET कंटेनर सभी प्रकार के मादक पेयों को संग्रहीत करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं (विशेष रूप से उच्च-प्रूफ स्पिरिट या उच्च तापमान पर संभावित रासायनिक निक्षालन के कारण), और PET का भस्मीकरण अनिवार्य रूप से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, मुख्य रूप से CO₂, उत्पन्न करता है।
✅ कथन 1 – सही: PET रेशे (पॉलिएस्टर) को आमतौर पर ऊन और सूती के साथ मिश्रित किया जाता है ताकि वस्त्र अनुप्रयोगों में झुर्रियों के प्रतिरोध, शक्ति और स्थायित्व में सुधार हो।
❌ कथन 2 – गलत: हालांकि PET कंटेनर कुछ मादक पेयों को संग्रहीत कर सकते हैं, वे सभी प्रकारों के लिए उपयुक्त नहीं हैं, विशेष रूप से उच्च-अल्कोहल सामग्री वाले स्पिरिट या उच्च तापमान पर संग्रहीत पेय के लिए, क्योंकि प्लास्टिक से रसायन निक्षालित हो सकते हैं।
✅ कथन 3 – सही: PET बोतलें विश्व स्तर पर सबसे अधिक पुनर्चक्रित प्लास्टिक में से हैं और इन्हें नई बोतलों, पॉलिएस्टर कपड़ों, कालीनों, ऑटोमोटिव पुर्जों और निर्माण सामग्री में पुनः संसाधित किया जा सकता है।
❌ कथन 4 – गलत: PET का भस्मीकरण कार्बन डाइऑक्साइड और संभावित रूप से विषाक्त यौगिकों सहित ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करता है; यह उत्सर्जन के बिना पर्यावरण के अनुकूल निपटान विधि नहीं है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पॉलीइथीलीन टेरेफ्थैलेट (PET)
- रासायनिक सूत्र: (C₁₀H₈O₄)ₙ – पॉलिएस्टर परिवार का एक थर्मोप्लास्टिक बहुलक राल
- सामान्य उपयोग: पेय पदार्थों की बोतलें, खाद्य कंटेनर, सिंथेटिक रेशे (पॉलिएस्टर), पैकेजिंग फिल्में, और इंजीनियरिंग रेजिन
- पुनर्चक्रण कोड: #1 (PETE या PET) – विश्व स्तर पर सबसे व्यापक रूप से पुनर्चक्रित प्लास्टिक में से एक
- वस्त्र अनुप्रयोग: PET रेशों (पॉलिएस्टर) को सूती और ऊन जैसे प्राकृतिक रेशों के साथ मिश्रित किया जाता है ताकि स्थायित्व, झुर्रियों के प्रतिरोध और नमी-विक्किंग गुणों को बढ़ाया जा सके
- पुनर्चक्रण योग्यता: यांत्रिक या रासायनिक रूप से rPET (पुनर्चक्रित PET) में पुनर्चक्रित किया जा सकता है नई बोतलों, कपड़ों, कालीनों और औद्योगिक सामग्रियों के लिए
- पर्यावरणीय चिंताएं: जैव-निम्नीकरणीय नहीं; भस्मीकरण CO₂ और अन्य प्रदूषक छोड़ता है; सूक्ष्म प्लास्टिक उत्पादन; उचित अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता
- भंडारण सीमाएं: उच्च-तापमान भंडारण या उच्च-प्रूफ मादक पेयों के लिए उपयुक्त नहीं संभावित रासायनिक निक्षालन (एसिटैल्डिहाइड, एंटीमनी) के कारण
- लाभ: हल्का, टूट-फूट प्रतिरोधी, गैसों और नमी के लिए उत्कृष्ट अवरोध गुण, लागत-प्रभावी, और उत्पादन के लिए ऊर्जा-कुशल
'R2 कोड ऑफ प्रैक्टिसेज़' किसके लिए उपलब्ध एक साधन है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग में पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए।
R2 (रिस्पॉन्सिबल रीसाइक्लिंग) कोड ऑफ प्रैक्टिसेज़ मानकों का एक व्यापक समूह है जो विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग के लिए डिज़ाइन किया गया है ताकि इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट के पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित और सामाजिक रूप से जिम्मेदार प्रबंधन को सुनिश्चित किया जा सके। यह ई-कचरा पुनर्चक्रण संचालन में डेटा सुरक्षा, सामग्री प्रबंधन, डाउनस्ट्रीम विक्रेता प्रबंधन और कार्यकर्ता स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: R2 कोड ऑफ प्रैक्टिसेज़
- पूर्ण रूप: R2 का अर्थ रिस्पॉन्सिबल रीसाइक्लिंग है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स पुनर्चक्रण उद्योग के लिए विकसित किया गया है।
- उद्देश्य: इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ई-कचरे के सुरक्षित, नैतिक और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार पुनर्चक्रण के लिए मानक स्थापित करना।
- मुख्य कवर क्षेत्र: डेटा सुरक्षा और विनाश, सामग्री प्रबंधन, डाउनस्ट्रीम विक्रेता जवाबदेही, पर्यावरणीय स्वास्थ्य और सुरक्षा, कार्यकर्ता संरक्षण।
- प्रमाणन: R2 प्रमाणन को विश्व स्तर पर जिम्मेदार ई-कचरा पुनर्चक्रण प्रथाओं के चिह्न के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- ई-कचरे पर फोकस: इलेक्ट्रॉनिक्स में विषाक्त सामग्री (लेड, पारा, कैडमियम) के बारे में बढ़ती चिंताओं को संबोधित करता है और उचित निपटान और पुनर्चक्रण विधियों को बढ़ावा देता है।
बिस्फेनॉल A (BPA), जो चिंता का विषय है, निम्नलिखित में से किस प्रकार के प्लास्टिक के निर्माण में एक संरचनात्मक/प्रमुख घटक है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — पॉलीकार्बोनेट
बिस्फेनॉल A (BPA) पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक के निर्माण में एक प्रमुख संरचनात्मक घटक है। पॉलीकार्बोनेट का व्यापक रूप से उपभोक्ता उत्पादों जैसे पानी की बोतलें, खाद्य भंडारण कंटेनर, चश्मे के लेंस और CDs/DVDs में उपयोग किया जाता है। BPA ने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चिंताएं उत्पन्न की हैं क्योंकि यह एक अंतःस्रावी व्यवधानकर्ता के रूप में कार्य कर सकता है, जो शरीर की हार्मोनल प्रणाली में हस्तक्षेप करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्लास्टिक के प्रकार और BPA
| प्लास्टिक का प्रकार | सामान्य उपयोग | BPA युक्त? |
|---|---|---|
| पॉलीकार्बोनेट (PC) | पानी की बोतलें, खाद्य कंटेनर, चश्मे के लेंस, CDs/DVDs, शिशु की बोतलें | हाँ – BPA एक प्रमुख घटक है |
| पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (PET) | पेय पदार्थ की बोतलें, खाद्य पैकेजिंग, सिंथेटिक फाइबर | नहीं |
| कम घनत्व पॉलीइथाइलीन (LDPE) | प्लास्टिक बैग, निचोड़ने वाली बोतलें, कंटेनर ढक्कन | नहीं |
| पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) | पाइप, फर्श, तार इन्सुलेशन, चिकित्सा नलिका | नहीं |
| उच्च घनत्व पॉलीइथाइलीन (HDPE) | दूध के जग, डिटर्जेंट की बोतलें, खिलौने | नहीं |
- BPA स्वास्थ्य चिंताएं: अंतःस्रावी व्यवधानकर्ता के रूप में कार्य करता है, एस्ट्रोजन की नकल करता है, प्रजनन संबंधी समस्याओं, विकासात्मक समस्याओं और चयापचय संबंधी विकारों से जुड़ा है
- BPA-मुक्त विकल्प: कई निर्माता अब BPA-मुक्त पॉलीकार्बोनेट का उत्पादन करते हैं या वैकल्पिक प्लास्टिक का उपयोग करते हैं
- विनियमन: कई देशों ने शिशु की बोतलों और खाद्य संपर्क सामग्रियों में BPA पर प्रतिबंध लगा दिया है
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इस्पात स्लैग (Steel slag) निम्नलिखित में से किसके लिए सामग्री हो सकता है?
- सड़क के आधार का निर्माण
- कृषि मिट्टी में सुधार
- सीमेंट का उत्पादन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
इस्पात स्लैग, इस्पात निर्माण का एक उप-उत्पाद है, जिसके निर्माण, कृषि और सीमेंट उत्पादन में अनेक अनुप्रयोग हैं। तीनों कथन इस्पात स्लैग के वैध उपयोगों की सही पहचान करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: इस्पात स्लैग का सड़क आधार निर्माण में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है क्योंकि यह उच्च शक्ति, स्थायित्व, उत्कृष्ट जल निकासी गुणों और लागत-प्रभावशीलता प्रदान करता है।
✅ कथन 2 – सही: इस्पात स्लैग का उपयोग कृषि में मिट्टी संशोधक के रूप में किया जा सकता है जो जल निकासी में सुधार, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान, मिट्टी के pH को ठीक करने और मिट्टी की संरचना को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
✅ कथन 3 – सही: इस्पात स्लैग का उपयोग सीमेंट उत्पादन में चूना पत्थर और अन्य कच्चे माल के आंशिक विकल्प के रूप में किया जा सकता है, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: इस्पात स्लैग का उपयोग
- परिभाषा: इस्पात स्लैग भट्टियों में इस्पात निर्माण के दौरान उत्पन्न एक उप-उत्पाद है, जो मुख्य रूप से कैल्शियम, आयरन, सिलिकॉन और मैग्नीशियम ऑक्साइड से बना होता है।
- सड़क निर्माण: उच्च घर्षण प्रतिरोध और भार वहन क्षमता के कारण डामर कंक्रीट, सड़क आधार सामग्री और रेलवे गिट्टी में समुच्चय के रूप में उपयोग किया जाता है।
- कृषि उपयोग: मिट्टी कंडीशनर के रूप में कार्य करता है, अम्लीय मिट्टी को उदासीन करता है, सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करता है और मिट्टी की पारगम्यता में सुधार करता है।
- सीमेंट उद्योग: सीमेंट उत्पादन में क्लिंकर के 10-15% को प्रतिस्थापित कर सकता है, CO₂ उत्सर्जन और ऊर्जा खपत को कम करता है।
- अन्य अनुप्रयोग: अपशिष्ट जल उपचार, तटीय सुरक्षा संरचनाओं और खनिज ऊन उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है।
- पर्यावरणीय लाभ: लैंडफिल अपशिष्ट को कम करता है, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करता है और इस्पात उद्योग में चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों का समर्थन करता है।
निम्नलिखित में से किस एक के संदर्भ में 'पायरोलिसिस और प्लाज्मा गैसीकरण' शब्दों का उल्लेख किया गया है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — अपशिष्ट-से-ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ
पायरोलिसिस और प्लाज्मा गैसीकरण उन्नत थर्मोकेमिकल अपशिष्ट-से-ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ हैं जो अपशिष्ट सामग्री को उपयोगी ऊर्जा उत्पादों में परिवर्तित करती हैं। पायरोलिसिस में सिनगैस, बायो-ऑयल और चार का उत्पादन करने के लिए ऑक्सीजन-रहित वातावरण में कार्बनिक अपशिष्ट को गर्म किया जाता है, जबकि प्लाज्मा गैसीकरण अपशिष्ट को हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड से समृद्ध सिनगैस में विघटित करने के लिए अत्यधिक उच्च तापमान (प्लाज्मा टॉर्च द्वारा निर्मित) का उपयोग करता है। दोनों प्रक्रियाएँ ऊर्जा उत्पन्न करते हुए अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सतत समाधान प्रदान करती हैं, जिससे ये चक्रीय अर्थव्यवस्था ढांचे में प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ बन जाती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अपशिष्ट-से-ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ
- पायरोलिसिस: ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में 300-900°C पर कार्बनिक सामग्री का थर्मल अपघटन, जो सिनगैस, बायो-ऑयल और बायोचार का उत्पादन करता है। प्लास्टिक अपशिष्ट, बायोमास और नगरपालिका ठोस अपशिष्ट उपचार के लिए उपयोग किया जाता है।
- प्लाज्मा गैसीकरण: अपशिष्ट को सिनगैस और निष्क्रिय स्लैग में परिवर्तित करने के लिए 3000°C से अधिक तापमान उत्पन्न करने वाले प्लाज्मा टॉर्च का उपयोग करता है। खतरनाक और मिश्रित अपशिष्ट धाराओं को प्रभावी ढंग से संसाधित कर सकता है।
- उत्पाद: सिनगैस (H₂, CO, CH₄ का मिश्रण) का उपयोग बिजली उत्पादन, रासायनिक फीडस्टॉक के रूप में, या तरल ईंधन में परिवर्तित करने के लिए किया जा सकता है।
- लाभ: अपशिष्ट की मात्रा में उल्लेखनीय कमी (90% तक), न्यूनतम लैंडफिल आवश्यकता, ऊर्जा पुनर्प्राप्ति, और पारंपरिक दहन की तुलना में कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन।
- भारत में अनुप्रयोग: स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटीज पहल के तहत सतत अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कई पायलट परियोजनाएँ और वाणिज्यिक संयंत्रों की खोज की जा रही है।
भारत में, 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व' को निम्नलिखित में से किसमें एक महत्वपूर्ण विशेषता के रूप में पेश किया गया था?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — ई-अपशिष्ट प्रबंधन और हैंडलिंग नियम, 2011
विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) को भारत में पहली बार ई-अपशिष्ट प्रबंधन और हैंडलिंग नियम, 2011 के माध्यम से एक प्रमुख विशेषता के रूप में पेश किया गया था। EPR के तहत, विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के उत्पादकों को उनके उत्पादों से उत्पन्न ई-अपशिष्ट के संग्रह, चैनलाइजेशन और उचित निपटान के लिए उपयोग-अवधि समाप्ति के बाद जिम्मेदार बनाया गया है। इस सिद्धांत को बाद में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 सहित अन्य अपशिष्ट प्रबंधन नियमों तक विस्तारित किया गया, लेकिन 2011 के ई-अपशिष्ट नियमों ने भारतीय पर्यावरण कानून में इसकी पहली महत्वपूर्ण शुरुआत की।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)
| नियम/विनियम | वर्ष | EPR प्रावधान |
|---|---|---|
| जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन और हैंडलिंग नियम | 1998 | कोई EPR प्रावधान नहीं; स्वास्थ्य सुविधा जिम्मेदारियों पर केंद्रित |
| ई-अपशिष्ट प्रबंधन और हैंडलिंग नियम | 2011 | EPR की पहली शुरुआत - उत्पादक ई-अपशिष्ट के संग्रह और चैनलाइजेशन के लिए जिम्मेदार |
| प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम | 2016 | EPR को प्लास्टिक अपशिष्ट तक विस्तारित - उत्पादक, आयातक, ब्रांड मालिक जवाबदेह |
| ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियम (संशोधित) | 2016 | संग्रह लक्ष्यों और दंड के साथ मजबूत EPR |
| बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम | 2022 | बैटरी उत्पादकों के लिए EPR प्रावधान |
- EPR अवधारणा: उत्पादकों को उनके उत्पादों के संपूर्ण जीवनचक्र, विशेष रूप से उपभोक्ता-पश्चात अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिम्मेदार बनाती है
- उद्देश्य: पर्यावरणीय बोझ को कम करना, चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, उचित अपशिष्ट निपटान और पुनर्चक्रण सुनिश्चित करना
- कार्यान्वयन: उत्पादकों को संग्रह तंत्र स्थापित करना, अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं के साथ सहयोग करना और निर्दिष्ट संग्रह लक्ष्यों को पूरा करना होगा
- हाल के विकास: केंद्रीकृत पोर्टल पर EPR प्रमाणपत्र व्यापार योग्य; अपशिष्ट संग्रह की डिजिटल ट्रैकिंग
भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 3 — नियमों में लैंडफिल और कचरा प्रसंस्करण स्थलों की पहचान के लिए विस्तृत और स्पष्ट मानदंड दिए गए हैं।
सरल व्याख्या:
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016) भारत में वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए थे।
इन नियमों में सैनिटरी लैंडफिल और वेस्ट प्रोसेसिंग सुविधाओं के लिए स्थल चयन संबंधी विस्तृत मानदंड दिए गए हैं, जैसे नदियों, राजमार्गों, आबादी वाले क्षेत्रों और हवाई अड्डों से न्यूनतम दूरी।
❌ कथन A गलत है: कचरे को 5 नहीं बल्कि 3 श्रेणियों—गीला, सूखा और घरेलू खतरनाक कचरा—में अलग करना होता है।
❌ कथन B गलत है: ये नियम केवल शहरी निकायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, औद्योगिक टाउनशिप और अन्य क्षेत्रों पर भी लागू होते हैं।
✅ कथन C सही है: नियमों की अनुसूची-I में लैंडफिल और कचरा प्रसंस्करण स्थलों के चयन हेतु विस्तृत मानदंड दिए गए हैं।
❌ कथन D गलत है: एक जिले का कचरा दूसरे जिले में ले जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। क्षेत्रीय लैंडफिल की व्यवस्था को प्रोत्साहित किया गया है।
प्रदूषण समस्याओं के समाधान के संदर्भ में, जैवउपचार (बायोरेमेडिएशन) तकनीक का/के क्या लाभ है/हैं?
- यह प्रकृति में होने वाली जैव-निम्नीकरण प्रक्रिया को बढ़ाकर प्रदूषण की सफाई के लिए एक तकनीक है।
- कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुओं वाले किसी भी प्रदूषक को सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके जैवउपचार द्वारा आसानी से और पूरी तरह से उपचारित किया जा सकता है।
- आनुवंशिक इंजीनियरिंग का उपयोग विशेष रूप से जैवउपचार के लिए डिज़ाइन किए गए सूक्ष्मजीवों को बनाने के लिए किया जा सकता है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1 और 3
जैवउपचार एक प्रदूषण नियंत्रण तकनीक है जो प्राकृतिक जैव-निम्नीकरण प्रक्रियाओं को बढ़ाकर पर्यावरणीय प्रदूषकों को नष्ट या निष्क्रिय करने के लिए जीवित जीवों, मुख्य रूप से सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है। जबकि आनुवंशिक इंजीनियरिंग लक्षित जैवउपचार के लिए विशेष सूक्ष्मजीव बना सकती है, कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुओं का इस तकनीक के माध्यम से आसानी से या पूरी तरह से उपचार नहीं किया जा सकता क्योंकि वे तत्व हैं जिन्हें जैव-निम्नीकृत नहीं किया जा सकता।
✅ कथन 1 – सही: जैवउपचार प्रकृति में होने वाली प्राकृतिक जैव-निम्नीकरण प्रक्रियाओं को बढ़ाकर काम करता है, मिट्टी, पानी या अन्य वातावरण में प्रदूषकों को तोड़ने के लिए सूक्ष्मजीवों का उपयोग करता है।
❌ कथन 2 – गलत: कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुओं का जैवउपचार द्वारा आसानी से और पूरी तरह से उपचार नहीं किया जा सकता क्योंकि वे तत्वीय प्रदूषक हैं जिन्हें जैव-निम्नीकृत नहीं किया जा सकता, हालांकि उन्हें परिवर्तित या स्थिर किया जा सकता है।
✅ कथन 3 – सही: आनुवंशिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग अधिक प्रभावी जैवउपचार के लिए विशेष प्रदूषकों को लक्षित करने की उन्नत या विशिष्ट क्षमताओं वाले सूक्ष्मजीवों को डिजाइन करने के लिए किया जा सकता है।
'फ्लाई ऐश' के संदर्भ में, जो कोयले को ईंधन के रूप में उपयोग करने वाले बिजली संयंत्रों द्वारा उत्पादित होती है, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- फ्लाई ऐश का उपयोग भवन निर्माण के लिए ईंटों के उत्पादन में किया जा सकता है।
- फ्लाई ऐश का उपयोग कंक्रीट की कुछ पोर्टलैंड सीमेंट सामग्री के प्रतिस्थापन के रूप में किया जा सकता है।
- फ्लाई ऐश केवल सिलिकॉन डाइऑक्साइड और कैल्शियम ऑक्साइड से बनी होती है और इसमें कोई विषैले तत्व नहीं होते हैं।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: फ्लाई ऐश में पॉज़ोलैनिक गुण होते हैं जो निर्माण में उपयोग की जाने वाली ईंटों की मजबूती और टिकाऊपन को बढ़ाते हैं।
✅ कथन 2 – सही: फ्लाई ऐश कंक्रीट में 20-30% पोर्टलैंड सीमेंट को प्रतिस्थापित कर सकती है, जिससे कार्यशीलता में सुधार, हाइड्रेशन की गर्मी कम होती है और दीर्घकालिक मजबूती बढ़ती है।
❌ कथन 3 – गलत: जबकि फ्लाई ऐश में मुख्य रूप से SiO2, Al2O3, और CaO होते हैं, इसमें भारी धातुओं की सूक्ष्म मात्रा जैसे आर्सेनिक, पारा, क्रोमियम और सीसा भी होते हैं।
पुराने और उपयोग किए गए कंप्यूटरों या उनके पुर्जों के अनुचित/अंधाधुंध निपटान के कारण, निम्नलिखित में से कौन से ई-अपशिष्ट के रूप में पर्यावरण में छोड़े जाते हैं?
- बेरिलियम
- कैडमियम
- क्रोमियम
- हेप्टाक्लोर
- पारा
- सीसा
- प्लूटोनियम
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
कंप्यूटरों से ई-अपशिष्ट में इलेक्ट्रॉनिक घटकों में उपयोग की जाने वाली भारी धातुएं होती हैं: बेरिलियम (मदरबोर्ड, कनेक्टर), कैडमियम (रिचार्जेबल बैटरी, सर्किट बोर्ड), क्रोमियम (स्टील प्लेटों में जंग-रोधन), पारा (फ्लोरोसेंट लैंप, स्विच), और सीसा (सोल्डर, CRT मॉनिटर)।
हेप्टाक्लोर एक ऑर्गनोक्लोरीन कीटनाशक है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स में उपयोग नहीं होता, और प्लूटोनियम एक रेडियोधर्मी तत्व है जो केवल परमाणु अनुप्रयोगों में पाया जाता है, कंप्यूटरों में नहीं।
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Frequently Asked Questions
Common questions about ोस एवं ई-कचरा प्रबंधन in UPSC CSE PRELIMS