UPSC CSE Prelims
पर्यावरण प्रदूषण Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: पर्यावरण प्रदूषण
Topic Breakdown: Scroll →
बिस्फेनॉल A (BPA), जो चिंता का विषय है, निम्नलिखित में से किस प्रकार के प्लास्टिक के निर्माण में एक संरचनात्मक/प्रमुख घटक है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — पॉलीकार्बोनेट
बिस्फेनॉल A (BPA) पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक के निर्माण में एक प्रमुख संरचनात्मक घटक है। पॉलीकार्बोनेट का व्यापक रूप से उपभोक्ता उत्पादों जैसे पानी की बोतलें, खाद्य भंडारण कंटेनर, चश्मे के लेंस और CDs/DVDs में उपयोग किया जाता है। BPA ने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चिंताएं उत्पन्न की हैं क्योंकि यह एक अंतःस्रावी व्यवधानकर्ता के रूप में कार्य कर सकता है, जो शरीर की हार्मोनल प्रणाली में हस्तक्षेप करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्लास्टिक के प्रकार और BPA
| प्लास्टिक का प्रकार | सामान्य उपयोग | BPA युक्त? |
|---|---|---|
| पॉलीकार्बोनेट (PC) | पानी की बोतलें, खाद्य कंटेनर, चश्मे के लेंस, CDs/DVDs, शिशु की बोतलें | हाँ – BPA एक प्रमुख घटक है |
| पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (PET) | पेय पदार्थ की बोतलें, खाद्य पैकेजिंग, सिंथेटिक फाइबर | नहीं |
| कम घनत्व पॉलीइथाइलीन (LDPE) | प्लास्टिक बैग, निचोड़ने वाली बोतलें, कंटेनर ढक्कन | नहीं |
| पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) | पाइप, फर्श, तार इन्सुलेशन, चिकित्सा नलिका | नहीं |
| उच्च घनत्व पॉलीइथाइलीन (HDPE) | दूध के जग, डिटर्जेंट की बोतलें, खिलौने | नहीं |
- BPA स्वास्थ्य चिंताएं: अंतःस्रावी व्यवधानकर्ता के रूप में कार्य करता है, एस्ट्रोजन की नकल करता है, प्रजनन संबंधी समस्याओं, विकासात्मक समस्याओं और चयापचय संबंधी विकारों से जुड़ा है
- BPA-मुक्त विकल्प: कई निर्माता अब BPA-मुक्त पॉलीकार्बोनेट का उत्पादन करते हैं या वैकल्पिक प्लास्टिक का उपयोग करते हैं
- विनियमन: कई देशों ने शिशु की बोतलों और खाद्य संपर्क सामग्रियों में BPA पर प्रतिबंध लगा दिया है
मैग्नेटाइट कण, जिन पर न्यूरोडीजेनेरेटिव समस्याओं का कारण बनने का संदेह है, निम्नलिखित में से किनसे पर्यावरणीय प्रदूषकों के रूप में उत्पन्न होते हैं?
मोटर वाहनों के ब्रेक
मोटर वाहनों के इंजन
घरों के भीतर माइक्रोवेव स्टोव
बिजली संयंत्र
टेलीफोन लाइनें
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1, 2 और 4
मैग्नेटाइट नैनोकण लौह ऑक्साइड कण हैं जो उच्च-तापमान दहन और यांत्रिक घर्षण प्रक्रियाओं से निकलते हैं। ये मोटर वाहनों के ब्रेक (घर्षण), इंजन (दहन), और बिजली संयंत्रों (जीवाश्म ईंधन दहन) से उत्पन्न होते हैं, लेकिन माइक्रोवेव स्टोव या टेलीफोन लाइनों से नहीं जो ऐसी प्रक्रियाओं में शामिल नहीं हैं।
✅ कथन 1 – सही: मोटर वाहनों के ब्रेक ब्रेक पैड और डिस्क के बीच घर्षण और यांत्रिक घिसाव के माध्यम से मैग्नेटाइट उत्पन्न करते हैं, जो लौह-समृद्ध कणीय पदार्थ उत्पन्न करते हैं जो मैग्नेटाइट नैनोकणों में ऑक्सीकृत हो जाते हैं।
✅ कथन 2 – सही: मोटर वाहनों के इंजन ईंधन के उच्च-तापमान दहन और इंजन घटकों के घिसाव के उपोत्पाद के रूप में मैग्नेटाइट उत्पन्न करते हैं, इन कणों को पर्यावरणीय प्रदूषकों के रूप में छोड़ते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: माइक्रोवेव स्टोव खाद्य पदार्थों को गर्म करने के लिए विद्युत चुम्बकीय विकिरण का उपयोग करते हैं बिना दहन या यांत्रिक घर्षण के, और इसलिए मैग्नेटाइट कण नहीं छोड़ते हैं।
✅ कथन 4 – सही: बिजली संयंत्र, विशेष रूप से कोयला-आधारित, जीवाश्म ईंधन के उच्च-तापमान दहन के माध्यम से मैग्नेटाइट उत्सर्जित करते हैं, जो चुंबकीय लौह ऑक्साइड युक्त फ्लाई ऐश उत्पन्न करते हैं।
❌ कथन 5 – गलत: टेलीफोन लाइनें विद्युत या प्रकाशीय संकेतों को ले जाती हैं और विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करती हैं लेकिन भौतिक प्रक्रियाओं से नहीं गुजरती हैं जो मैग्नेटाइट कणों का उत्सर्जन करती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मैग्नेटाइट प्रदूषण स्रोत
- मैग्नेटाइट (Fe₃O₄): लौह ऑक्साइड नैनोकण जिन पर अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का कारण बनने का संदेह है जब साँस में लिए जाते हैं, क्योंकि ये रक्त-मस्तिष्क बाधा को पार कर सकते हैं।
- वाहन स्रोत: ब्रेक घिसाव (घर्षण-उत्पन्न कण) और इंजन दहन शहरी वायुजनित मैग्नेटाइट के प्रमुख स्रोत हैं।
- औद्योगिक स्रोत: कोयला-आधारित बिजली संयंत्र और अन्य जीवाश्म ईंधन दहन सुविधाएँ फ्लाई ऐश और निकास गैसों में मैग्नेटाइट छोड़ती हैं।
- स्वास्थ्य चिंता: मानव मस्तिष्क ऊतक नमूनों में मैग्नेटाइट नैनोकण पाए गए हैं, विशेष रूप से यातायात प्रदूषण के संपर्क में आने वाली शहरी आबादी में।
- गैर-स्रोत: माइक्रोवेव जैसे घरेलू उपकरण और टेलीफोन लाइनों जैसी बुनियादी संरचनाएँ मैग्नेटाइट उत्पन्न नहीं करती हैं क्योंकि उनमें दहन या यांत्रिक घर्षण प्रक्रियाओं की कमी होती है।
फर्नेस ऑयल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह तेल रिफाइनरियों का एक उत्पाद है।
- कुछ उद्योग इसका उपयोग बिजली उत्पन्न करने के लिए करते हैं।
- इसके उपयोग से पर्यावरण में सल्फर उत्सर्जन होता है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
फर्नेस ऑयल के बारे में तीनों कथन सही हैं। फर्नेस ऑयल पेट्रोलियम शोधन के दौरान उत्पादित एक भारी अवशिष्ट ईंधन है, जिसका व्यापक रूप से उद्योगों में बिजली उत्पादन और ताप के लिए उपयोग किया जाता है, और इसके दहन से महत्वपूर्ण सल्फर उत्सर्जन होता है जो पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनता है।
✅ कथन 1 – सही: फर्नेस ऑयल तेल रिफाइनरियों से प्राप्त एक गहरा, चिपचिपा अवशिष्ट ईंधन उत्पाद है जो कच्चे तेल के आसवन के भारी अंशों को मिलाकर बनाया जाता है।
✅ कथन 2 – सही: सीमेंट, इस्पात, वस्त्र और बिजली संयंत्र जैसे उद्योग बॉयलरों और भट्टियों में ताप और बिजली उत्पन्न करने के लिए फर्नेस ऑयल का उपयोग करते हैं।
✅ कथन 3 – सही: फर्नेस ऑयल में उच्च सल्फर सामग्री (2-4%) होती है, और इसके दहन से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और अन्य प्रदूषक निकलते हैं, जो वायु प्रदूषण और अम्लीय वर्षा में योगदान करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: फर्नेस ऑयल
- परिभाषा: पेट्रोलियम शोधन से प्राप्त एक गहरा, चिपचिपा अवशिष्ट ईंधन तेल, जिसे भारी ईंधन तेल या अवशिष्ट ईंधन तेल के रूप में भी जाना जाता है।
- उत्पादन: कच्चे तेल के आसवन के बाद बचे भारी घटकों को मिलाकर प्राप्त किया जाता है; इसमें उच्च कार्बन और सल्फर सामग्री होती है।
- औद्योगिक उपयोग: सीमेंट, इस्पात, वस्त्र, रासायनिक और बिजली उत्पादन उद्योगों में बॉयलरों, भट्टियों और भट्ठों में उपयोग किया जाता है।
- सल्फर सामग्री: इसमें 2-4% सल्फर होता है, जो डीजल या पेट्रोल की तुलना में काफी अधिक है; दहन पर SO₂ और कण पदार्थ छोड़ता है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: वायु प्रदूषण, अम्लीय वर्षा और श्वसन स्वास्थ्य समस्याओं में प्रमुख योगदानकर्ता; कई देश स्वच्छ ईंधन के पक्ष में इसे चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर रहे हैं।
- विकल्प: प्राकृतिक गैस, कम-सल्फर भारी तेल, बायोमास और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को उद्योगों में फर्नेस ऑयल के स्थान पर अपनाया जा रहा है।
🧐 Not Sure What to Study Next?
Get a personalised study plan based on your goals, time and revision needs.
इस्पात स्लैग (Steel slag) निम्नलिखित में से किसके लिए सामग्री हो सकता है?
- सड़क के आधार का निर्माण
- कृषि मिट्टी में सुधार
- सीमेंट का उत्पादन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
इस्पात स्लैग, इस्पात निर्माण का एक उप-उत्पाद है, जिसके निर्माण, कृषि और सीमेंट उत्पादन में अनेक अनुप्रयोग हैं। तीनों कथन इस्पात स्लैग के वैध उपयोगों की सही पहचान करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: इस्पात स्लैग का सड़क आधार निर्माण में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है क्योंकि यह उच्च शक्ति, स्थायित्व, उत्कृष्ट जल निकासी गुणों और लागत-प्रभावशीलता प्रदान करता है।
✅ कथन 2 – सही: इस्पात स्लैग का उपयोग कृषि में मिट्टी संशोधक के रूप में किया जा सकता है जो जल निकासी में सुधार, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान, मिट्टी के pH को ठीक करने और मिट्टी की संरचना को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
✅ कथन 3 – सही: इस्पात स्लैग का उपयोग सीमेंट उत्पादन में चूना पत्थर और अन्य कच्चे माल के आंशिक विकल्प के रूप में किया जा सकता है, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: इस्पात स्लैग का उपयोग
- परिभाषा: इस्पात स्लैग भट्टियों में इस्पात निर्माण के दौरान उत्पन्न एक उप-उत्पाद है, जो मुख्य रूप से कैल्शियम, आयरन, सिलिकॉन और मैग्नीशियम ऑक्साइड से बना होता है।
- सड़क निर्माण: उच्च घर्षण प्रतिरोध और भार वहन क्षमता के कारण डामर कंक्रीट, सड़क आधार सामग्री और रेलवे गिट्टी में समुच्चय के रूप में उपयोग किया जाता है।
- कृषि उपयोग: मिट्टी कंडीशनर के रूप में कार्य करता है, अम्लीय मिट्टी को उदासीन करता है, सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करता है और मिट्टी की पारगम्यता में सुधार करता है।
- सीमेंट उद्योग: सीमेंट उत्पादन में क्लिंकर के 10-15% को प्रतिस्थापित कर सकता है, CO₂ उत्सर्जन और ऊर्जा खपत को कम करता है।
- अन्य अनुप्रयोग: अपशिष्ट जल उपचार, तटीय सुरक्षा संरचनाओं और खनिज ऊन उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है।
- पर्यावरणीय लाभ: लैंडफिल अपशिष्ट को कम करता है, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करता है और इस्पात उद्योग में चक्रीय अर्थव्यवस्था सिद्धांतों का समर्थन करता है।
निम्नलिखित में से कौन से बेंजीन प्रदूषण के संपर्क के कारण/कारक हैं?
- ऑटोमोबाइल निष्कासन (एग्जॉस्ट)
- तंबाकू का धुआँ
- लकड़ी जलाना
- वार्निश किए गए लकड़ी के फर्नीचर का उपयोग
- पॉलीयूरेथेन से बने उत्पादों का उपयोग
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1, 2 और 3
बेंजीन एक रंगहीन, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और एक ज्ञात कार्सिनोजेन है जो विभिन्न प्राकृतिक और मानवजनित स्रोतों के माध्यम से पर्यावरण में मौजूद है। बेंजीन संपर्क के मुख्य स्रोतों में ऑटोमोबाइल निष्कासन (क्योंकि बेंजीन पेट्रोल में मौजूद है), तंबाकू का धुआँ (सक्रिय और निष्क्रिय दोनों), और लकड़ी जलाना (अपूर्ण दहन के कारण) शामिल हैं। वार्निश किए गए लकड़ी के फर्नीचर और पॉलीयूरेथेन उत्पाद बेंजीन प्रदूषण के महत्वपूर्ण स्रोत नहीं हैं।
✅ कथन 1 – सही: ऑटोमोबाइल निष्कासन, विशेष रूप से पेट्रोल चालित वाहनों से, बेंजीन का एक प्रमुख स्रोत है क्योंकि यह पेट्रोलियम उत्पादों का एक घटक है।
✅ कथन 2 – सही: तंबाकू के धुएँ में बेंजीन होता है और यह धूम्रपान करने वालों और निष्क्रिय धूम्रपान करने वालों दोनों के लिए संपर्क का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
✅ कथन 3 – सही: लकड़ी जलाने से अपूर्ण दहन के माध्यम से बेंजीन निकलता है, साथ ही पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs) जैसे अन्य प्रदूषक भी निकलते हैं।
❌ कथन 4 – गलत: वार्निश किए गए लकड़ी के फर्नीचर लगाने के दौरान बेंजीन उत्सर्जित कर सकते हैं लेकिन एक बार सूखने के बाद, यह बेंजीन प्रदूषण का महत्वपूर्ण स्रोत नहीं है।
❌ कथन 5 – गलत: पॉलीयूरेथेन उत्पाद मुख्य रूप से अन्य वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) से जुड़े हैं, बेंजीन से नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बेंजीन प्रदूषण
- प्रकृति: बेंजीन (C₆H₆) एक रंगहीन, अत्यधिक ज्वलनशील तरल है जिसमें मीठी गंध होती है, जिसे IARC द्वारा समूह 1 कार्सिनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- प्रमुख स्रोत: ऑटोमोबाइल उत्सर्जन (पेट्रोल दहन), तंबाकू का धुआँ, औद्योगिक प्रक्रियाएँ, पेट्रोलियम रिफाइनरियाँ, और कार्बनिक पदार्थों (लकड़ी, कोयला) का अपूर्ण दहन।
- स्वास्थ्य प्रभाव: लंबे समय तक संपर्क से रक्त विकार, एनीमिया, ल्यूकेमिया, प्रतिरक्षा प्रणाली दमन, और प्रजनन स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।
- घरेलू स्रोत: तंबाकू का धुआँ, संलग्न गैरेज (वाहन उत्सर्जन), और लगाने के दौरान कुछ पेंट/सॉल्वेंट्स।
- व्यावसायिक संपर्क: पेट्रोलियम रिफाइनरियों, रासायनिक संयंत्रों, रबर निर्माण, और मुद्रण उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों को अधिक जोखिम होता है।
- नियामक मानक: बेंजीन के लिए WHO वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश न्यूनतम है (कोई सुरक्षित स्तर नहीं); संपर्क को सीमित करने के लिए परिवेशी वायु मानक देश के अनुसार भिन्न होते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कोयला राख में आर्सेनिक, सीसा और पारा होता है।
- कोयला आधारित विद्युत संयंत्र वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड छोड़ते हैं।
- भारतीय कोयले में उच्च राख सामग्री देखी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
कोयला दहन और भारतीय कोयले की विशेषताओं के बारे में तीनों कथन सही हैं। कोयला राख में भारी धातुएँ होती हैं, कोयला आधारित विद्युत संयंत्र सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड छोड़ते हैं, और भारतीय कोयले की विशेषता उच्च राख सामग्री है।
✅ कथन 1 – सही: कोयला राख, कोयला दहन का एक उप-उत्पाद है, जिसमें आर्सेनिक, सीसा और पारा सहित विषाक्त भारी धातुएँ होती हैं, जो जल निकायों में रिस सकती हैं और मिट्टी को दूषित कर सकती हैं, जिससे पर्यावरणीय और स्वास्थ्य खतरे उत्पन्न होते हैं।
✅ कथन 2 – सही: कोयला आधारित विद्युत संयंत्र दहन के दौरान सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) छोड़ते हैं, जो अम्लीय वर्षा, श्वसन संबंधी समस्याओं, धुंध निर्माण और समग्र वायु प्रदूषण में योगदान करते हैं।
✅ कथन 3 – सही: भारतीय कोयला, विशेष रूप से पूर्वी और मध्य क्षेत्रों से, उच्च राख सामग्री (30-50%) वाला है, जो इसके ऊष्मीय मान को कम करता है, प्रदूषण स्तर बढ़ाता है, और ताप विद्युत संयंत्रों में बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश उत्पन्न करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: कोयला दहन और पर्यावरणीय प्रभाव
- कोयला राख की संरचना: इसमें भारी धातुएँ (आर्सेनिक, सीसा, पारा, क्रोमियम, कैडमियम) होती हैं जो विषाक्त और कार्सिनोजेनिक हैं; अनुचित निपटान से भूजल और मिट्टी दूषित हो सकती है।
- कोयला संयंत्रों से वायु प्रदूषक: SO₂ (अम्लीय वर्षा का कारण), NOₓ (भू-स्तरीय ओजोन और धुंध बनाता है), कणीय पदार्थ (PM2.5, PM10), CO₂ (ग्रीनहाउस गैस), और पारा उत्सर्जन छोड़ते हैं।
- भारतीय कोयले की विशेषताएँ: उच्च राख सामग्री (आयातित कोयले में 10-15% की तुलना में 30-50%), कम ऊष्मीय मान (3000-4000 किलो कैलोरी/किलोग्राम), और उच्च नमी सामग्री।
- फ्लाई ऐश का उपयोग: भारत सालाना 200 मिलियन टन से अधिक फ्लाई ऐश उत्पन्न करता है; सीमेंट निर्माण, ईंट बनाने, सड़क निर्माण और भूमि भराव में उपयोग किया जाता है।
- पर्यावरणीय नियम: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय 100% फ्लाई ऐश उपयोग अनिवार्य करता है; ताप विद्युत संयंत्रों को इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रिसिपिटेटर और FGD (फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन) सिस्टम बनाए रखने चाहिए।
भारत में, कार्बोफ्यूरान, मिथाइल पैराथियोन, फोरेट और ट्राईजोफॉस के उपयोग को आशंका की दृष्टि से देखा जाता है। इन रसायनों का उपयोग किस रूप में किया जाता है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — कृषि में कीटनाशक
कार्बोफ्यूरान, मिथाइल पैराथियोन, फोरेट और ट्राईजोफॉस अत्यधिक विषाक्त ऑर्गनोफॉस्फेट और कार्बामेट कीटनाशक हैं जो कृषि में उपयोग किए जाते हैं। इन रसायनों को मानव स्वास्थ्य, गैर-लक्षित जीवों और पर्यावरण पर उनकी गंभीर विषाक्तता के कारण आशंका की दृष्टि से देखा जाता है, जिसके कारण भारत में अनुपम वर्मा समिति द्वारा इनके प्रतिबंध या चरणबद्ध समाप्ति की सिफारिश की गई थी।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में खतरनाक कीटनाशक
- ऑर्गनोफॉस्फेट और कार्बामेट: ये रासायनिक कीटनाशकों की दो प्रमुख श्रेणियां हैं जो एसिटाइलकोलिनेस्टरेज़ एंजाइम को अवरुद्ध करती हैं, जिससे कीटों और संभावित रूप से मनुष्यों में न्यूरोटॉक्सिक प्रभाव होते हैं।
- कार्बोफ्यूरान: एक कार्बामेट कीटनाशक जो कई देशों में प्रतिबंधित है; पक्षियों, मछलियों और स्तनधारियों के लिए अत्यधिक विषाक्त; मिट्टी और पर्णीय उपचार के लिए उपयोग किया जाता है।
- मिथाइल पैराथियोन: अत्यधिक तीव्र विषाक्तता वाला एक ऑर्गनोफॉस्फेट कीटनाशक; मानव विषाक्तता के मामलों के कारण विश्व स्तर पर प्रतिबंधित या सीमित।
- फोरेट: एक प्रणालीगत ऑर्गनोफॉस्फेट कीटनाशक; उच्च त्वचीय और मौखिक विषाक्तता के साथ अत्यंत खतरनाक।
- ट्राईजोफॉस: एक ऑर्गनोफॉस्फेट कीटनाशक; पर्यावरणीय स्थिरता संबंधी चिंताओं के साथ मध्यम से अत्यधिक विषाक्त।
- अनुपम वर्मा समिति (2013): विदेशों में प्रतिबंधित लेकिन भारत में उपयोग किए जाने वाले 66 कीटनाशकों की समीक्षा की; 13 पर प्रतिबंध और अन्य को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की, जिससे कृषि मंत्रालय द्वारा नियामक कार्रवाई हुई।
- सरकारी कार्रवाई: सुरक्षित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए खतरनाक कीटनाशकों का प्रगतिशील प्रतिबंध और चरणबद्ध समाप्ति।
निम्नलिखित में से किस एक के संदर्भ में 'पायरोलिसिस और प्लाज्मा गैसीकरण' शब्दों का उल्लेख किया गया है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — अपशिष्ट-से-ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ
पायरोलिसिस और प्लाज्मा गैसीकरण उन्नत थर्मोकेमिकल अपशिष्ट-से-ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ हैं जो अपशिष्ट सामग्री को उपयोगी ऊर्जा उत्पादों में परिवर्तित करती हैं। पायरोलिसिस में सिनगैस, बायो-ऑयल और चार का उत्पादन करने के लिए ऑक्सीजन-रहित वातावरण में कार्बनिक अपशिष्ट को गर्म किया जाता है, जबकि प्लाज्मा गैसीकरण अपशिष्ट को हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड से समृद्ध सिनगैस में विघटित करने के लिए अत्यधिक उच्च तापमान (प्लाज्मा टॉर्च द्वारा निर्मित) का उपयोग करता है। दोनों प्रक्रियाएँ ऊर्जा उत्पन्न करते हुए अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सतत समाधान प्रदान करती हैं, जिससे ये चक्रीय अर्थव्यवस्था ढांचे में प्रमुख प्रौद्योगिकियाँ बन जाती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अपशिष्ट-से-ऊर्जा प्रौद्योगिकियाँ
- पायरोलिसिस: ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में 300-900°C पर कार्बनिक सामग्री का थर्मल अपघटन, जो सिनगैस, बायो-ऑयल और बायोचार का उत्पादन करता है। प्लास्टिक अपशिष्ट, बायोमास और नगरपालिका ठोस अपशिष्ट उपचार के लिए उपयोग किया जाता है।
- प्लाज्मा गैसीकरण: अपशिष्ट को सिनगैस और निष्क्रिय स्लैग में परिवर्तित करने के लिए 3000°C से अधिक तापमान उत्पन्न करने वाले प्लाज्मा टॉर्च का उपयोग करता है। खतरनाक और मिश्रित अपशिष्ट धाराओं को प्रभावी ढंग से संसाधित कर सकता है।
- उत्पाद: सिनगैस (H₂, CO, CH₄ का मिश्रण) का उपयोग बिजली उत्पादन, रासायनिक फीडस्टॉक के रूप में, या तरल ईंधन में परिवर्तित करने के लिए किया जा सकता है।
- लाभ: अपशिष्ट की मात्रा में उल्लेखनीय कमी (90% तक), न्यूनतम लैंडफिल आवश्यकता, ऊर्जा पुनर्प्राप्ति, और पारंपरिक दहन की तुलना में कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन।
- भारत में अनुप्रयोग: स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटीज पहल के तहत सतत अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कई पायलट परियोजनाएँ और वाणिज्यिक संयंत्रों की खोज की जा रही है।
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- कार्बन मोनोऑक्साइड
- मीथेन
- ओज़ोन
- सल्फर डाइऑक्साइड
उपर्युक्त में से कौन-से फसल/बायोमास अवशेष जलाने के कारण वायुमंडल में उत्सर्जित होते हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2, 3 और 4
फसल/बायोमास अवशेष जलाने से अपूर्ण दहन और रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से वायुमंडल में अनेक प्रदूषक उत्सर्जित होते हैं। उल्लिखित सभी चार प्रदूषक—कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन, सल्फर डाइऑक्साइड और ओज़ोन—बायोमास जलाने से जुड़े हैं, चाहे प्रत्यक्ष उत्सर्जन के रूप में या द्वितीयक निर्माण के रूप में।
✅ कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) – उत्सर्जित: कार्बनिक पदार्थ के अपूर्ण दहन से प्रत्यक्ष रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड उत्पन्न होती है, एक विषाक्त गैस जो रक्त में ऑक्सीजन वहन क्षमता को कम करती है और वायु प्रदूषण में योगदान देती है।
✅ मीथेन (CH₄) – उत्सर्जित: बायोमास जलाने से मीथेन उत्सर्जित होती है, जो 100 वर्ष की अवधि में CO₂ की तुलना में 25 गुना अधिक ग्लोबल वार्मिंग क्षमता वाली एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है, जो जलवायु परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
✅ ओज़ोन (O₃) – निर्मित: यद्यपि प्रत्यक्ष रूप से उत्सर्जित नहीं होती, ओज़ोन एक द्वितीयक प्रदूषक के रूप में तब बनती है जब बायोमास जलाने से उत्पन्न नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे भू-स्तरीय ओज़ोन का निर्माण होता है।
✅ सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) – उत्सर्जित: जब सल्फर यौगिकों युक्त बायोमास जलता है, तो यह सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जित करता है, जो श्वसन समस्याएं उत्पन्न करता है और अम्लीय वर्षा के निर्माण में योगदान देता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बायोमास जलाने से उत्सर्जन
- प्राथमिक प्रदूषक: प्रत्यक्ष उत्सर्जन में CO, CH₄, SO₂, NOₓ, कणिकीय पदार्थ (PM2.5 और PM10), और काला कार्बन शामिल हैं
- द्वितीयक प्रदूषक: भू-स्तरीय ओज़ोन का निर्माण तब होता है जब NOₓ और VOCs सूर्य के प्रकाश में प्रतिक्रिया करते हैं; अम्लीय वर्षा SO₂ और NOₓ की जल वाष्प के साथ प्रतिक्रिया से बनती है
- ग्रीनहाउस गैसें: बायोमास जलाने से CO₂, CH₄, और N₂O उत्सर्जित होती हैं, जो वैश्विक CO उत्सर्जन का लगभग 40% और क्षोभमंडलीय ओज़ोन पूर्ववर्तियों का 20% योगदान करती हैं
- स्वास्थ्य प्रभाव: कणिकीय पदार्थ और विषाक्त गैसें श्वसन रोग, हृदय संबंधी समस्याएं, और दृश्यता में कमी का कारण बनती हैं; CO रक्त में ऑक्सीजन परिवहन में बाधा डालती है
- पर्यावरणीय प्रभाव: वायु प्रदूषण, धुंध निर्माण, अम्लीय निक्षेपण, मृदा पोषक तत्व हानि, और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के माध्यम से जलवायु परिवर्तन में योगदान देता है
- प्रमुख स्रोत: कृषि अवशेष जलाना (पंजाब/हरियाणा में पराली जलाना), वन अग्नि, और खाना पकाने और तापन के लिए पारंपरिक बायोमास ईंधन का उपयोग
भारत में, 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व' को निम्नलिखित में से किसमें एक महत्वपूर्ण विशेषता के रूप में पेश किया गया था?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — ई-अपशिष्ट प्रबंधन और हैंडलिंग नियम, 2011
विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) को भारत में पहली बार ई-अपशिष्ट प्रबंधन और हैंडलिंग नियम, 2011 के माध्यम से एक प्रमुख विशेषता के रूप में पेश किया गया था। EPR के तहत, विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के उत्पादकों को उनके उत्पादों से उत्पन्न ई-अपशिष्ट के संग्रह, चैनलाइजेशन और उचित निपटान के लिए उपयोग-अवधि समाप्ति के बाद जिम्मेदार बनाया गया है। इस सिद्धांत को बाद में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 सहित अन्य अपशिष्ट प्रबंधन नियमों तक विस्तारित किया गया, लेकिन 2011 के ई-अपशिष्ट नियमों ने भारतीय पर्यावरण कानून में इसकी पहली महत्वपूर्ण शुरुआत की।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)
| नियम/विनियम | वर्ष | EPR प्रावधान |
|---|---|---|
| जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन और हैंडलिंग नियम | 1998 | कोई EPR प्रावधान नहीं; स्वास्थ्य सुविधा जिम्मेदारियों पर केंद्रित |
| ई-अपशिष्ट प्रबंधन और हैंडलिंग नियम | 2011 | EPR की पहली शुरुआत - उत्पादक ई-अपशिष्ट के संग्रह और चैनलाइजेशन के लिए जिम्मेदार |
| प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम | 2016 | EPR को प्लास्टिक अपशिष्ट तक विस्तारित - उत्पादक, आयातक, ब्रांड मालिक जवाबदेह |
| ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियम (संशोधित) | 2016 | संग्रह लक्ष्यों और दंड के साथ मजबूत EPR |
| बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम | 2022 | बैटरी उत्पादकों के लिए EPR प्रावधान |
- EPR अवधारणा: उत्पादकों को उनके उत्पादों के संपूर्ण जीवनचक्र, विशेष रूप से उपभोक्ता-पश्चात अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिम्मेदार बनाती है
- उद्देश्य: पर्यावरणीय बोझ को कम करना, चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, उचित अपशिष्ट निपटान और पुनर्चक्रण सुनिश्चित करना
- कार्यान्वयन: उत्पादकों को संग्रह तंत्र स्थापित करना, अधिकृत पुनर्चक्रणकर्ताओं के साथ सहयोग करना और निर्दिष्ट संग्रह लक्ष्यों को पूरा करना होगा
- हाल के विकास: केंद्रीकृत पोर्टल पर EPR प्रमाणपत्र व्यापार योग्य; अपशिष्ट संग्रह की डिजिटल ट्रैकिंग
पर्यावरण में छोड़े जाने वाले 'माइक्रोबीड्स' के बारे में बड़ी चिंता क्यों है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — इन्हें समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के लिए हानिकारक माना जाता है।
माइक्रोबीड्स छोटे प्लास्टिक कण (आमतौर पर 5mm से कम) हैं जो सौंदर्य प्रसाधनों और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों में उपयोग किए जाते हैं और जल निकासी प्रणालियों के माध्यम से जल निकायों में छोड़े जाते हैं। मछली, शेलफिश और प्लवक जैसे समुद्री जानवर अपने छोटे आकार के कारण इन माइक्रोबीड्स को आसानी से निगल लेते हैं, जो उनके पाचन तंत्र को अवरुद्ध कर सकते हैं जिससे भुखमरी या मृत्यु हो सकती है। इसके अतिरिक्त, माइक्रोबीड्स पानी से प्रदूषकों और विषाक्त पदार्थों को अवशोषित करते हैं, उन्हें खाद्य श्रृंखला में केंद्रित करते हैं और संभावित रूप से मनुष्यों सहित बड़े शिकारियों को नुकसान पहुंचाते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: माइक्रोबीड्स और समुद्री प्रदूषण
- परिभाषा: माइक्रोबीड्स 5mm से कम व्यास वाले ठोस प्लास्टिक कण हैं, जो मुख्य रूप से पॉलीथीन या पॉलीप्रोपाइलीन से बने होते हैं।
- स्रोत: आमतौर पर फेशियल स्क्रब, टूथपेस्ट, बॉडी वॉश और अन्य एक्सफोलिएटिंग व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों में पाए जाते हैं।
- पर्यावरणीय मार्ग: ये अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों से गुजरते हैं (फ़िल्टर करने के लिए बहुत छोटे) और नदियों, झीलों और महासागरों में प्रवेश करते हैं।
- समुद्री प्रभाव: समुद्री जीवों द्वारा भोजन समझकर खाया जाता है, जिससे खाद्य श्रृंखला में जैव-संचय और जलीय जीवन को भौतिक नुकसान होता है।
- विषाक्त अवशोषण: माइक्रोबीड्स पानी में मौजूद स्थायी कार्बनिक प्रदूषकों (POPs) और भारी धातुओं के लिए स्पंज की तरह काम करते हैं।
- वैश्विक कार्रवाई: USA, UK, कनाडा और भारत सहित कई देशों ने सौंदर्य प्रसाधनों में माइक्रोबीड्स के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है या प्रतिबंधित किया है।
- भारत का रुख: भारत ने समुद्री पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए 2020 में माइक्रोबीड्स युक्त सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया।
भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 3 — नियमों में लैंडफिल और कचरा प्रसंस्करण स्थलों की पहचान के लिए विस्तृत और स्पष्ट मानदंड दिए गए हैं।
सरल व्याख्या:
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016) भारत में वैज्ञानिक तरीके से कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए थे।
इन नियमों में सैनिटरी लैंडफिल और वेस्ट प्रोसेसिंग सुविधाओं के लिए स्थल चयन संबंधी विस्तृत मानदंड दिए गए हैं, जैसे नदियों, राजमार्गों, आबादी वाले क्षेत्रों और हवाई अड्डों से न्यूनतम दूरी।
❌ कथन A गलत है: कचरे को 5 नहीं बल्कि 3 श्रेणियों—गीला, सूखा और घरेलू खतरनाक कचरा—में अलग करना होता है।
❌ कथन B गलत है: ये नियम केवल शहरी निकायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, औद्योगिक टाउनशिप और अन्य क्षेत्रों पर भी लागू होते हैं।
✅ कथन C सही है: नियमों की अनुसूची-I में लैंडफिल और कचरा प्रसंस्करण स्थलों के चयन हेतु विस्तृत मानदंड दिए गए हैं।
❌ कथन D गलत है: एक जिले का कचरा दूसरे जिले में ले जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। क्षेत्रीय लैंडफिल की व्यवस्था को प्रोत्साहित किया गया है।
जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD) किसके लिए एक मानक मानदंड है -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में प्रदूषण का आकलन
जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD) जल निकायों में सूक्ष्मजीवों द्वारा कार्बनिक पदार्थों को विघटित करते समय उपभोग की गई घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को मापने के लिए एक मानक मानदंड है। यह जल प्रदूषण का एक प्रमुख संकेतक है—उच्च BOD मान अधिक कार्बनिक प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी के कारण जलीय जीवन को संभावित नुकसान का संकेत देते हैं। BOD परीक्षण का व्यापक रूप से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और गुणवत्ता का आकलन करने के लिए पर्यावरण निगरानी में उपयोग किया जाता है।
प्रदूषण समस्याओं के समाधान के संदर्भ में, जैवउपचार (बायोरेमेडिएशन) तकनीक का/के क्या लाभ है/हैं?
- यह प्रकृति में होने वाली जैव-निम्नीकरण प्रक्रिया को बढ़ाकर प्रदूषण की सफाई के लिए एक तकनीक है।
- कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुओं वाले किसी भी प्रदूषक को सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके जैवउपचार द्वारा आसानी से और पूरी तरह से उपचारित किया जा सकता है।
- आनुवंशिक इंजीनियरिंग का उपयोग विशेष रूप से जैवउपचार के लिए डिज़ाइन किए गए सूक्ष्मजीवों को बनाने के लिए किया जा सकता है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1 और 3
जैवउपचार एक प्रदूषण नियंत्रण तकनीक है जो प्राकृतिक जैव-निम्नीकरण प्रक्रियाओं को बढ़ाकर पर्यावरणीय प्रदूषकों को नष्ट या निष्क्रिय करने के लिए जीवित जीवों, मुख्य रूप से सूक्ष्मजीवों का उपयोग करती है। जबकि आनुवंशिक इंजीनियरिंग लक्षित जैवउपचार के लिए विशेष सूक्ष्मजीव बना सकती है, कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुओं का इस तकनीक के माध्यम से आसानी से या पूरी तरह से उपचार नहीं किया जा सकता क्योंकि वे तत्व हैं जिन्हें जैव-निम्नीकृत नहीं किया जा सकता।
✅ कथन 1 – सही: जैवउपचार प्रकृति में होने वाली प्राकृतिक जैव-निम्नीकरण प्रक्रियाओं को बढ़ाकर काम करता है, मिट्टी, पानी या अन्य वातावरण में प्रदूषकों को तोड़ने के लिए सूक्ष्मजीवों का उपयोग करता है।
❌ कथन 2 – गलत: कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुओं का जैवउपचार द्वारा आसानी से और पूरी तरह से उपचार नहीं किया जा सकता क्योंकि वे तत्वीय प्रदूषक हैं जिन्हें जैव-निम्नीकृत नहीं किया जा सकता, हालांकि उन्हें परिवर्तित या स्थिर किया जा सकता है।
✅ कथन 3 – सही: आनुवंशिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग अधिक प्रभावी जैवउपचार के लिए विशेष प्रदूषकों को लक्षित करने की उन्नत या विशिष्ट क्षमताओं वाले सूक्ष्मजीवों को डिजाइन करने के लिए किया जा सकता है।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: सामान्यतः प्रयोग की जाने वाली/उपभोग की जाने वाली सामग्री और उनमें पाए जाने की संभावना वाले अवांछित या विवादास्पद रसायन
- लिपस्टिक: सीसा
- सॉफ्ट ड्रिंक्स: ब्रोमिनेटेड वनस्पति तेल
- चाइनीज फास्ट फूड: मोनोसोडियम ग्लूटामेट
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
✅ युग्म 1 – सही: लिपस्टिक में सीसा पाया गया है, जो एक भारी धातु है और स्वास्थ्य के लिए संभावित जोखिम पैदा करती है। विभिन्न लिपस्टिक ब्रांडों में सीसे की सूक्ष्म मात्रा का पता चला है, जो इसे एक वैध चिंता बनाता है।
✅ युग्म 2 – सही: ब्रोमिनेटेड वनस्पति तेल (BVO) कुछ सॉफ्ट ड्रिंक्स में इमल्सीफायर के रूप में प्रयोग किया जाता है ताकि नींबू के स्वाद को समान रूप से वितरित किया जा सके। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और संभावित विषाक्तता के कारण कई देशों में BVO पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
✅ युग्म 3 – सही: मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) एक स्वाद बढ़ाने वाला पदार्थ है जो आमतौर पर चाइनीज फास्ट फूड और विभिन्न एशियाई व्यंजनों में उपयोग किया जाता है। यद्यपि विवादास्पद है, MSG का उपयोग नमकीन स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है, हालांकि इसकी सुरक्षा पर बहस जारी है।
सभी तीन युग्म सही सुमेलित हैं।