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पारिस्थितिकी एवं पारिस्थितिकी तंत्र Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for पारिस्थितिकी एवं पारिस्थितिकी तंत्र with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
Filter & practice questions topic-wise
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- कैराबिड बीटल
- सेंटीपीड
- मक्खियाँ
- दीमक
- ततैया
उपर्युक्त में से कितने प्रकार के जीवों में परजीवाभ (Parasitoid) प्रजातियाँ पाई जाती हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल तीन
परजीवाभ प्रजातियाँ वे जीव हैं जो किसी पोषक जीव पर या उसके भीतर रहते हैं और अंततः उसे मार देते हैं। सूचीबद्ध जीवों में से, परजीवाभ प्रजातियाँ कैराबिड बीटल (कुछ प्रजातियाँ अन्य कीटों की परजीवाभ होती हैं), मक्खियाँ (टैकिनिड मक्खियाँ और अन्य डिप्टेरा परिवारों में कई परजीवाभ शामिल हैं), और ततैया (हाइमेनोप्टेरा में व्यापक परजीवाभ परिवार हैं) में पाई जाती हैं। सेंटीपीड शिकारी होते हैं जो सीधे शिकार करते हैं और मार देते हैं, जबकि दीमक शाकाहारी सामाजिक कीट हैं जो पादप पदार्थ पर भोजन करते हैं, दोनों ही परजीवाभ नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: परजीवाभ
- परिभाषा: परजीवाभ वे जीव हैं जो अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग एकल पोषक जीव से जुड़े या उसके भीतर व्यतीत करते हैं, जिसे वे अंततः मार देते हैं। ये सच्चे परजीवियों (जो आमतौर पर पोषक को नहीं मारते) और शिकारियों (जो कई शिकार मारते हैं) से भिन्न होते हैं।
- कैराबिड बीटल: जबकि अधिकांश शिकारी होते हैं, कुछ प्रजातियाँ (विशेष रूप से Brachinus और Lebia जैसे वंशों में) परजीवाभ व्यवहार प्रदर्शित करती हैं, विशेष रूप से अन्य कीटों के प्यूपा को लक्षित करती हैं।
- मक्खियाँ (डिप्टेरा): Tachinidae परिवार परजीवाभ मक्खियों का सबसे बड़ा समूह है, जिसमें 10,000 से अधिक प्रजातियाँ हैं। Bombyliidae और Sarcophagidae जैसे अन्य परिवारों में भी परजीवाभ प्रजातियाँ शामिल हैं।
- ततैया (हाइमेनोप्टेरा): सबसे विविध परजीवाभ समूह, जिसमें Ichneumonidae, Braconidae, Chalcidoidea और कई अन्य परिवार शामिल हैं। ये कीटों और अन्य आर्थ्रोपोड्स के विभिन्न जीवन चरणों को परजीवी बनाते हैं।
- सेंटीपीड: Chilopoda विषैले शिकारी हैं जो सक्रिय रूप से आर्थ्रोपोड्स और छोटे अकशेरुकियों का शिकार करते हैं; वे परजीवाभ व्यवहार प्रदर्शित नहीं करते हैं।
- दीमक: Isoptera सामाजिक कीट हैं जो मुख्य रूप से लकड़ी और पादप सामग्री से सेलूलोज़ पर भोजन करते हैं; ये अपघटक हैं, परजीवाभ नहीं।
निम्नलिखित में से कौन सा एक कीट के साथ अद्वितीय संबंध दर्शाता है जो इसके साथ सह-विकसित हुआ है और जो इस वृक्ष को परागित कर सकने वाला एकमात्र कीट है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — अंजीर
अंजीर के वृक्ष अंजीर बर्र (fig wasp) के साथ एक अद्वितीय अनिवार्य सहजीवी संबंध साझा करते हैं, जो अंजीर के फूलों को परागित करने में सक्षम एकमात्र कीट हैं। अंजीर बर्र ओस्टिओल नामक एक छोटे से छिद्र के माध्यम से बंद सायकोनियम (अंजीर की फल संरचना) में प्रवेश करती है और अंडे देती है, साथ ही आंतरिक फूलों का परागण करती है। यह अत्यधिक विशिष्ट संबंध सह-विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां दोनों प्रजातियां लाखों वर्षों में एक साथ विकसित हुई हैं, जिससे वे जीवित रहने और प्रजनन के लिए एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर हो गई हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
❌ विकल्प 2 – महुआ: महुआ (Madhuca indica) विभिन्न कीटों जैसे मधुमक्खियों, पतंगों और यहां तक कि चमगादड़ों द्वारा परागित होता है, न कि किसी एकल विशेष परागणकर्ता द्वारा।
❌ विकल्प 3 – चंदन: चंदन मुख्य रूप से मधुमक्खियों और मक्खियों द्वारा परागित होता है; यह एक अर्ध-परजीवी पौधा है जो पोषक तत्वों के लिए मेजबान वृक्षों पर निर्भर करता है लेकिन इसका कोई अद्वितीय कीट परागणकर्ता नहीं है।
❌ विकल्प 4 – सेमल: सेमल के वृक्ष चमगादड़ों और पक्षियों द्वारा परागित होते हैं, न कि किसी विशेष कीट प्रजाति द्वारा।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अंजीर-बर्र सहजीविता
- अनिवार्य सहजीविता: अंजीर और अंजीर बर्र दोनों पूरी तरह से एक-दूसरे पर निर्भर हैं—अंजीर बर्र के बिना प्रजनन नहीं कर सकता और अंजीर बर्र अंजीर के बिना प्रजनन नहीं कर सकती।
- सायकोनियम संरचना: अंजीर एक वास्तविक फल नहीं बल्कि एक सायकोनियम है—एक खोखली, मांसल संरचना जिसमें फूल अंदर बंद होते हैं।
- परागण प्रक्रिया: मादा अंजीर बर्र ओस्टिओल (छोटे छिद्र) के माध्यम से प्रवेश करती है, अंडाशय के अंदर अंडे देती है, और इस प्रक्रिया में फूलों का परागण करती है। नर बर्र पंखहीन होते हैं और अंजीर के अंदर संभोग करते हैं।
- सह-विकास: यह संबंध लगभग 80 मिलियन वर्षों में विकसित हुआ है, अंजीर की 750 से अधिक प्रजातियों के साथ, जिनमें से प्रत्येक की आमतौर पर अपनी विशेष बर्र प्रजाति होती है।
- पारिस्थितिक महत्व: अंजीर उष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी तंत्र में मुख्य प्रजातियां हैं, जो कई जानवरों के लिए कम फल वाले समय में भोजन प्रदान करती हैं।
"यदि वर्षावन और उष्णकटिबंधीय वन पृथ्वी के फेफड़े हैं, तो निश्चित रूप से आर्द्रभूमि इसकी किडनी के रूप में कार्य करती है।" आर्द्रभूमि के निम्नलिखित में से कौन सा कार्य उपरोक्त कथन को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — जलीय पौधे भारी धातुओं और अतिरिक्त पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं।
आर्द्रभूमि को "पृथ्वी की किडनी" के रूप में उपमा उनके निस्पंदन कार्य द्वारा सर्वोत्तम रूप से परिलक्षित होती है। जिस प्रकार किडनी रक्त से अपशिष्ट उत्पादों और विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करती है, उसी प्रकार आर्द्रभूमि जलीय पौधों और सूक्ष्मजीवों के माध्यम से जल से प्रदूषक, भारी धातुओं और अतिरिक्त पोषक तत्वों को अवशोषित करके प्राकृतिक फिल्टर के रूप में कार्य करती है। यह पादप उपचार और पोषक नियमन प्रक्रिया जल को शुद्ध करती है और हानिकारक पदार्थों को निचले पारिस्थितिकी तंत्रों को दूषित करने से रोकती है, जो शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने में किडनी की भूमिका के समानांतर है।
अन्य विकल्प कम उपयुक्त क्यों हैं:
विकल्प 1 जल चक्र का वर्णन करता है, जो परिसंचरण से अधिक संबंधित है न कि निस्पंदन से। विकल्प 2 खाद्य जाल की व्याख्या करता है, शुद्धिकरण कार्य की नहीं। विकल्प 3 अवसाद नियंत्रण को संबोधित करता है, जो महत्वपूर्ण है लेकिन किडनी उपमा के केंद्र में निस्पंदन/सफाई पहलू को नहीं पकड़ता।
📝 संक्षिप्त नोट्स: आर्द्रभूमि के कार्य
- निस्पंदन और शुद्धिकरण: आर्द्रभूमि पादप ग्रहण और सूक्ष्मजीवीय क्रिया (पादप उपचार और जैव उपचार) के माध्यम से प्रदूषक, भारी धातुएं, अवसाद और अतिरिक्त पोषक तत्वों को हटाती है।
- पोषक नियमन: अतिरिक्त नाइट्रोजन और फॉस्फोरस को अवशोषित करती है, जो निचले जल निकायों में सुपोषण को रोकता है।
- बाढ़ नियंत्रण: प्राकृतिक स्पंज के रूप में कार्य करती है, अतिरिक्त वर्षा को अवशोषित करती है और बाढ़ की चोटियों को कम करती है।
- भूजल पुनर्भरण: जलभृतों में जल के अंतःस्रवण को सुगम बनाती है, भूजल स्तर को बनाए रखती है।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट: प्रवासी पक्षियों, मछलियों और उभयचरों सहित विविध वनस्पतियों और जीवों का समर्थन करती है।
- कार्बन प्रच्छादन: आर्द्रभूमि वनस्पति और मृदा महत्वपूर्ण मात्रा में कार्बन संग्रहीत करती है, जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करती है।
- तटीय संरक्षण: मैंग्रोव और तटीय आर्द्रभूमि तूफानों, सुनामी और कटाव के खिलाफ बफर के रूप में कार्य करती है।
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निम्नलिखित में से किनकी ऐसी प्रजातियाँ हैं जो अन्य जीवों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित कर सकती हैं?
1. नाइडेरियन (Cnidarians)
2. कवक (Fungi)
3. प्रोटोजोआ (Protozoa)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
तीनों समूह—नाइडेरियन, कवक और प्रोटोजोआ—में ऐसी प्रजातियाँ हैं जो अन्य जीवों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित करने में सक्षम हैं। यह प्रकृति में विभिन्न वर्गीकरण समूहों में सहजीविता की व्यापक उपस्थिति को प्रदर्शित करता है।
✅ कथन 1 – सही: कोरल जैसे नाइडेरियन ज़ूज़ैन्थेली (प्रकाश संश्लेषक शैवाल) के साथ सहजीवी संबंध बनाते हैं, जो प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक है।
✅ कथन 2 – सही: कवक विविध सहजीवी संबंध बनाते हैं जिनमें पादप जड़ों के साथ माइकोराइजा और शैवाल या सायनोबैक्टीरिया के साथ लाइकेन शामिल हैं।
✅ कथन 3 – सही: प्रोटोजोआ सहजीवी संबंध स्थापित करते हैं, जैसे दीमक की आंत में रहने वाले जो सेल्युलोज पचाने में मदद करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विभिन्न जीवों में सहजीवी संबंध
| जीव समूह | सहजीविता का उदाहरण | प्रकार | लाभ |
|---|---|---|---|
| नाइडेरियन | कोरल-ज़ूज़ैन्थेली | सहोपकारिता | शैवाल को आश्रय मिलता है; कोरल को प्रकाश संश्लेषण से पोषक तत्व मिलते हैं |
| कवक | माइकोराइजा (कवक-पादप जड़ें) | सहोपकारिता | कवक को कार्बोहाइड्रेट मिलता है; पादप को बेहतर पोषक अवशोषण मिलता है |
| कवक | लाइकेन (कवक-शैवाल/सायनोबैक्टीरिया) | सहोपकारिता | शैवाल भोजन बनाते हैं; कवक संरचना और सुरक्षा प्रदान करता है |
| प्रोटोजोआ | दीमक की आंत में प्रोटोजोआ | सहोपकारिता | प्रोटोजोआ को आवास मिलता है; दीमक सेल्युलोज पचाते हैं |
| प्रोटोजोआ | जुगाली करने वाले पशुओं की आंत में प्रोटोजोआ | सहोपकारिता | शाकाहारी जीवों में पादप सामग्री को तोड़ने में मदद करते हैं |
- सहोपकारिता: दोनों जीव संबंध से लाभान्वित होते हैं
- सहजीविता: विभिन्न प्रजातियों के बीच निकट और दीर्घकालिक जैविक अंतःक्रिया
- ज़ूज़ैन्थेली: एककोशिकीय डाइनोफ्लैजिलेट जो कोरल विरंजन अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं
- पारिस्थितिक महत्व: सहजीवी संबंध पारिस्थितिकी तंत्र के कार्य और जैव विविधता के लिए मूलभूत हैं
निम्नलिखित में से कौन सा "पारिस्थितिकी तंत्र" शब्द का सर्वोत्तम विवरण है?
Detailed Explanation:
पारिस्थितिकी तंत्र = जैविक समुदाय (जीवित जीव) + अजैविक पर्यावरण (मिट्टी, जल, वायु, सूर्य प्रकाश जैसे निर्जीव कारक) जो एक साथ कार्य करते हैं।
❌ विकल्प 1: केवल जैविक समुदाय का वर्णन (अजैविक कारकों का अभाव)।
❌ विकल्प 2: जीवमंडल को परिभाषित करता है (पृथ्वी पर जीवन का संपूर्ण क्षेत्र)।
✅ विकल्प 3: सही रूप से जीवों और उनके पर्यावरण को एक एकीकृत कार्यात्मक इकाई के रूप में दर्शाता है।
❌ विकल्प 4: किसी क्षेत्र की जैविक विविधता का उल्लेख (केवल जीवित घटक)।
निम्नलिखित में से कौन सा शब्द न केवल किसी जीव द्वारा घेरे गए भौतिक स्थान का वर्णन करता है, बल्कि जीवों के समुदाय में उसकी कार्यात्मक भूमिका का भी वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
पारिस्थितिक निकेत (Ecological niche) किसी जीव द्वारा घेरे गए भौतिक स्थान और समुदाय में उसकी कार्यात्मक भूमिका दोनों का वर्णन करता है, जिसमें जैविक और अजैविक कारकों के साथ इसकी अंतःक्रियाएं शामिल हैं।
आवास (Habitat) केवल उस भौतिक स्थान को संदर्भित करता है जहां कोई जीव रहता है, जबकि इकोटोन दो पारिस्थितिक तंत्रों के बीच का संक्रमण क्षेत्र है, और गृह परिसर (Home range) वह क्षेत्र है जहां कोई जानवर सामान्य गतिविधियों के दौरान घूमता है।
मिलेनियम इकोसिस्टम असेसमेंट पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की निम्नलिखित प्रमुख श्रेणियों का वर्णन करता है: प्रावधानिक, सहायक, नियामक, संरक्षणकारी और सांस्कृतिक। निम्नलिखित में से कौन सी एक सहायक सेवा है?
Detailed Explanation:
मिलेनियम इकोसिस्टम असेसमेंट (2005) पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को चार श्रेणियों में वर्गीकृत करता है: प्रावधानिक, नियामक, सहायक और सांस्कृतिक।
सहायक सेवाएं वे बुनियादी सेवाएं हैं जो अन्य सभी पारिस्थितिकी सेवाओं के उत्पादन के लिए आवश्यक हैं, जिनमें पोषक तत्व चक्रण, मृदा निर्माण, प्राथमिक उत्पादन और प्रकाश संश्लेषण शामिल हैं।
प्रावधानिक सेवाओं में भोजन, जल, लकड़ी और रेशे का उत्पादन शामिल है (विकल्प 1)।
नियामक सेवाओं में जलवायु नियमन, रोग नियंत्रण, जल शोधन और फसल परागण शामिल हैं (विकल्प 2 और विकल्प 3 का एक भाग)।
सांस्कृतिक सेवाओं में आध्यात्मिक, मनोरंजक, सौंदर्यात्मक और शैक्षिक लाभ शामिल हैं (विकल्प 4 की विविधता रखरखाव भी सहायक से जुड़ती है)।
विकल्प 3 सही है क्योंकि पोषक तत्व चक्रण निश्चित रूप से सहायक सेवा है, यद्यपि परागण को मूल MA ढांचे में तकनीकी रूप से नियामक सेवा के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
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