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साहित्यिक एवं सांस्कृतिक नवजागरण Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for साहित्यिक एवं सांस्कृतिक नवजागरण with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित में से कौन 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' से संबंधित है, जो प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों का अंग्रेजी में अनुवाद है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — मोहनदास करमचंद गांधी
मोहनदास करमचंद गांधी ने 1930 में यरवदा जेल में अपने कारावास के दौरान संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं से प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों के संग्रह का अंग्रेजी में अनुवाद किया। यह कार्य 1934 में लंदन में 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' शीर्षक के तहत प्रकाशित हुआ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
बाल गंगाधर तिलक: वे अपनी कृति 'गीता रहस्य' के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसे उन्होंने मांडले में कारावास के दौरान (1908-1914) लिखा था, और 'द आर्कटिक होम इन द वेदास' के लिए भी जाने जाते हैं। वे 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' से संबंधित नहीं हैं।
जवाहरलाल नेहरू: उनके प्रमुख साहित्यिक योगदानों में 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' और 'ग्लिम्प्सेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' शामिल हैं, जो दोनों उनके विभिन्न कारावास के दौरान लिखी गईं, लेकिन 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' नहीं।
सरोजिनी नायडू: 'भारत कोकिला' के रूप में जानी जाने वाली, वे एक विपुल कवयित्री थीं जिनकी कृतियों में 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड', 'द बर्ड ऑफ टाइम', और 'द ब्रोकन विंग' शामिल हैं, लेकिन वे 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' के अनुवाद से संबंधित नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा जेल साहित्य
| नेता | साहित्यिक कृति | जेल/वर्ष | विषय |
|---|---|---|---|
| महात्मा गांधी | सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन | यरवदा जेल, 1930 | प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों का अनुवाद |
| बाल गंगाधर तिलक | गीता रहस्य | मांडले जेल, 1908-1914 | भगवद गीता पर टीका |
| जवाहरलाल नेहरू | डिस्कवरी ऑफ इंडिया | अहमदनगर किला, 1942-1946 | भारतीय इतिहास और संस्कृति |
| जवाहरलाल नेहरू | ग्लिम्प्सेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री | विभिन्न जेलें, 1930-1933 | बेटी को विश्व इतिहास पर पत्र |
| विनायक दामोदर सावरकर | कमला; प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 | सेल्युलर जेल, अंडमान | कविता और इतिहास |
आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — रवींद्रनाथ टैगोर ने यहां राष्ट्रगान का बंगाली से अंग्रेजी में अनुवाद किया।
आंध्र प्रदेश का मदनपल्ले भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि यहां रवींद्रनाथ टैगोर ने 'जन गण मन' का बंगाली से अंग्रेजी में अनुवाद किया था। फरवरी 1919 में मदनपल्ले के बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज में अपने प्रवास के दौरान, टैगोर ने "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" शीर्षक से अनुवाद प्रस्तुत किया।
❌ विकल्प 1 – गलत: पिंगली वेंकय्या ने तिरंगे भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की रूपरेखा तैयार की लेकिन इसे बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में INC सत्र में महात्मा गांधी को प्रस्तुत किया, मदनपल्ले में नहीं।
❌ विकल्प 2 – गलत: पट्टाभि सीतारमैया आंध्र प्रदेश में एक प्रमुख नेता थे और कांग्रेस अध्यक्ष रहे, लेकिन उन्होंने मदनपल्ले से भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व नहीं किया।
✅ विकल्प 3 – सही: रवींद्रनाथ टैगोर ने 1919 में मदनपल्ले में अपने प्रवास के दौरान जन गण मन का बंगाली से अंग्रेजी में "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" के रूप में अनुवाद किया।
❌ विकल्प 4 – गलत: थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना न्यूयॉर्क (1875) में हुई थी और इसका अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय अड्यार, चेन्नई (1882) में स्थानांतरित किया गया, मदनपल्ले में नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जन गण मन और राष्ट्रीय प्रतीक
- रचना: जन गण मन मूल रूप से 1911 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बंगाली में रचित किया गया था।
- पहला प्रदर्शन: इसे पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता सत्र में गाया गया था।
- अंग्रेजी अनुवाद: टैगोर ने फरवरी 1919 में आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में इसका अंग्रेजी में "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" के रूप में अनुवाद किया।
- राष्ट्रगान के रूप में अंगीकरण: संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को जन गण मन को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।
- अवधि: पूर्ण संस्करण में पांच छंद हैं; संक्षिप्त संस्करण का आधिकारिक बजाने का समय लगभग 52 सेकंड है।
- नोबेल पुरस्कार: रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया, वे यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने।
विटल-विध्वंसक, पहली मासिक पत्रिका जिसका लक्षित दर्शक अस्पृश्य लोग थे, किसके द्वारा प्रकाशित की गई थी?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — गोपाल बाबा वलंगकर
गोपाल बाबा वलंगकर ने 1888 में मासिक पत्रिका विटल-विध्वंसक (ब्राह्मणवादी या कर्मकांडीय प्रदूषण का विनाशक) प्रकाशित की, जो विशेष रूप से अस्पृश्य समुदायों को लक्षित करने वाली पहली पत्रिका थी। वह एक अग्रणी समाज सुधारक थे जिन्होंने इस पत्रिका और अन्य प्रकाशनों के माध्यम से अपने लेखन द्वारा जाति भेदभाव को संबोधित किया और दलितों के अधिकारों और गरिमा के बारे में चेतना जागृत की।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रारंभिक दलित सामाजिक सुधार आंदोलन
- गोपाल बाबा वलंगकर (1840-1900): दलित समुदाय से पहले बौद्धिक विद्रोही जिन्होंने जाति व्यवस्था की व्यवस्थित आलोचना शुरू की; महाराष्ट्र में दलित सक्रियता के अग्रदूत माने जाते हैं।
- विटल-विध्वंसक (1888): मासिक पत्रिका जिसका अर्थ है 'कर्मकांडीय प्रदूषण का विनाशक'; अस्पृश्य दर्शकों को लक्षित करने वाला पहला प्रकाशन; सामाजिक चेतना जागृत करने का उद्देश्य।
- विटल विदुवनसन (1889): 26 प्रश्नों वाली पुस्तिका जो महाराष्ट्रीयन अभिजात वर्ग को संबोधित थी, समाज में अस्पृश्यों की स्थिति के विरुद्ध विरोध।
- वलंगकर की विचारधारा: हिंदू ग्रंथों को पढ़कर निष्कर्ष निकाला कि जाति की रचना आर्य आक्रमणकारियों द्वारा स्वदेशी अनार्य लोगों को नियंत्रित करने के लिए की गई थी।
- अन्य योगदान: सुधारक और दीनबंधु जैसे मराठी समाचार पत्रों के लिए लेख लिखे; जनता के लिए प्रेरणादायक मराठी दोहे रचे।
- ऐतिहासिक महत्व: ज्योतिबा फुले और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर जैसे नेताओं द्वारा बाद के दलित आंदोलनों की नींव रखी।
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स्वतंत्रता संग्राम के दौरान साखाराम गणेश देउस्कर द्वारा लिखित पुस्तक "देशेर कथा" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
- इसने औपनिवेशिक राज्य की मन की सम्मोहक विजय के विरुद्ध चेतावनी दी।
- इसने स्वदेशी नुक्कड़ नाटकों और लोक गीतों के प्रदर्शन को प्रेरित किया।
- देउस्कर द्वारा 'देश' का प्रयोग बंगाल क्षेत्र के विशिष्ट संदर्भ में था।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
साखाराम गणेश देउस्कर की "देशेर कथा" (1904) स्वदेशी आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण रचना थी जिसने ब्रिटिश औपनिवेशिक शोषण की आलोचना की और राष्ट्रवादी चेतना को प्रेरित किया। कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 'देश' के दायरे के संबंध में गलत है।
✅ कथन 1 – सही: पुस्तक ने औपनिवेशिक राज्य की मनोवैज्ञानिक विजय और मानसिक अधीनता के विरुद्ध चेतावनी दी, आर्थिक शोषण को उजागर किया और भारतीयों से ब्रिटिश साम्राज्यवादी मंसूबों को पहचानने का आग्रह किया।
✅ कथन 2 – सही: देउस्कर के भावुक राष्ट्रवादी लेखन ने नुक्कड़ नाटकों, लोक गीतों और लोकप्रिय रंगमंच सहित स्वदेशी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रेरित किया जिन्होंने जनता के बीच राष्ट्रवादी विचारों को फैलाया।
❌ कथन 3 – गलत: देउस्कर ने 'देश' का प्रयोग भारत के व्यापक संदर्भ में राष्ट्र के रूप में किया, न कि विशेष रूप से बंगाल के लिए; हालांकि बांग्ला में लिखी गई थी, पुस्तक ने अखिल भारतीय चिंताओं और राष्ट्रीय चेतना को संबोधित किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: देशेर कथा और प्रारंभिक राष्ट्रवादी साहित्य
- लेखक: साखाराम गणेश देउस्कर (1869-1912), एक महाराष्ट्रीयन जो बंगाल में बड़े हुए और दोनों क्षेत्रों के पुनर्जागरण आंदोलनों को जोड़ा।
- प्रकाशन: 1904 में बांग्ला में लिखित, स्वदेशी आंदोलन की ऊंचाई के दौरान और बंगाल विभाजन से पहले।
- विषयवस्तु: ब्रिटिश आर्थिक निष्कासन का भंडाफोड़, औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली की आलोचना, और मानसिक उपनिवेशीकरण के विरुद्ध चेतावनी; ब्रिटिश शासन के तहत भारत की दरिद्रता के सांख्यिकीय साक्ष्य प्रस्तुत किए।
- प्रभाव: प्रारंभिक राष्ट्रवाद के सबसे प्रभावशाली ग्रंथों में से एक बन गया; स्वदेशी सक्रियता, सांस्कृतिक प्रदर्शन और जनता के बीच राष्ट्रवादी चेतना को प्रेरित किया।
- सांस्कृतिक महत्व: पुस्तक ने क्षेत्रीय भाषाओं में राष्ट्रवादी साहित्य के विकास में योगदान दिया और क्षेत्रीय पहचान से परे एकीकृत अवधारणा के रूप में 'देश' (राष्ट्र) के उपयोग को बढ़ावा दिया।
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