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शिक्षा, प्रेस एवं सांस्कृतिक जागरण Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: शिक्षा, प्रेस एवं सांस्कृतिक जागरण
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भारतीय इतिहास के संदर्भ में, अलेक्जेंडर रिया, ए. एच. लॉन्गहर्स्ट, रॉबर्ट सेवेल, जेम्स बर्गेस और वाल्टर इलियट किससे संबद्ध थे?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — पुरातात्विक उत्खनन
उल्लिखित सभी पाँच व्यक्ति—अलेक्जेंडर रिया, ए. एच. लॉन्गहर्स्ट, रॉबर्ट सेवेल, जेम्स बर्गेस और वाल्टर इलियट—प्रमुख पुरातत्वविद् और शोधकर्ता थे जिन्होंने औपनिवेशिक भारत, विशेष रूप से दक्षिण भारत में पुरातात्विक उत्खनन और दस्तावेजीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे अमरावती, नागार्जुनकोंडा और पल्लावरम जैसे बौद्ध और प्राचीन भारतीय धरोहर स्थलों की खोज और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
📝 संक्षिप्त नोट्स: औपनिवेशिक भारत में ब्रिटिश पुरातत्वविद्
| पुरातत्वविद् | काल | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
| अलेक्जेंडर रिया | 1858-1924 | मुख्यतः दक्षिण भारत में कार्य किया; तमिलनाडु में पल्लावरम की पहाड़ियों से एक ताबूत की खोज की |
| ए. एच. लॉन्गहर्स्ट | 1876-1955 | पुरातत्वविद् और कला इतिहासकार; नागार्जुनकोंडा में व्यवस्थित उत्खनन का निर्देशन किया (1927-1931) |
| रॉबर्ट सेवेल | 1845-1925 | मद्रास प्रेसीडेंसी में सिविल सेवक; अमरावती बौद्ध स्तूप पर पुरातात्विक कार्य किया |
| जेम्स बर्गेस | 1832-1916 | इंडियन एंटिक्वेरी की स्थापना (1872); भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक (1886-89) |
| वाल्टर इलियट | 1803-1887 | अमरावती स्थल का दौरा (1854); दक्षिण भारतीय बौद्ध कला को समझने के लिए महत्वपूर्ण मूर्ति पैनल एकत्र किए |
निम्नलिखित में से कौन 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' से संबंधित है, जो प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों का अंग्रेजी में अनुवाद है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — मोहनदास करमचंद गांधी
मोहनदास करमचंद गांधी ने 1930 में यरवदा जेल में अपने कारावास के दौरान संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं से प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों के संग्रह का अंग्रेजी में अनुवाद किया। यह कार्य 1934 में लंदन में 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' शीर्षक के तहत प्रकाशित हुआ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
बाल गंगाधर तिलक: वे अपनी कृति 'गीता रहस्य' के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसे उन्होंने मांडले में कारावास के दौरान (1908-1914) लिखा था, और 'द आर्कटिक होम इन द वेदास' के लिए भी जाने जाते हैं। वे 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' से संबंधित नहीं हैं।
जवाहरलाल नेहरू: उनके प्रमुख साहित्यिक योगदानों में 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' और 'ग्लिम्प्सेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' शामिल हैं, जो दोनों उनके विभिन्न कारावास के दौरान लिखी गईं, लेकिन 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' नहीं।
सरोजिनी नायडू: 'भारत कोकिला' के रूप में जानी जाने वाली, वे एक विपुल कवयित्री थीं जिनकी कृतियों में 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड', 'द बर्ड ऑफ टाइम', और 'द ब्रोकन विंग' शामिल हैं, लेकिन वे 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' के अनुवाद से संबंधित नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा जेल साहित्य
| नेता | साहित्यिक कृति | जेल/वर्ष | विषय |
|---|---|---|---|
| महात्मा गांधी | सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन | यरवदा जेल, 1930 | प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों का अनुवाद |
| बाल गंगाधर तिलक | गीता रहस्य | मांडले जेल, 1908-1914 | भगवद गीता पर टीका |
| जवाहरलाल नेहरू | डिस्कवरी ऑफ इंडिया | अहमदनगर किला, 1942-1946 | भारतीय इतिहास और संस्कृति |
| जवाहरलाल नेहरू | ग्लिम्प्सेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री | विभिन्न जेलें, 1930-1933 | बेटी को विश्व इतिहास पर पत्र |
| विनायक दामोदर सावरकर | कमला; प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 | सेल्युलर जेल, अंडमान | कविता और इतिहास |
आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — रवींद्रनाथ टैगोर ने यहां राष्ट्रगान का बंगाली से अंग्रेजी में अनुवाद किया।
आंध्र प्रदेश का मदनपल्ले भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि यहां रवींद्रनाथ टैगोर ने 'जन गण मन' का बंगाली से अंग्रेजी में अनुवाद किया था। फरवरी 1919 में मदनपल्ले के बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज में अपने प्रवास के दौरान, टैगोर ने "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" शीर्षक से अनुवाद प्रस्तुत किया।
❌ विकल्प 1 – गलत: पिंगली वेंकय्या ने तिरंगे भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की रूपरेखा तैयार की लेकिन इसे बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में INC सत्र में महात्मा गांधी को प्रस्तुत किया, मदनपल्ले में नहीं।
❌ विकल्प 2 – गलत: पट्टाभि सीतारमैया आंध्र प्रदेश में एक प्रमुख नेता थे और कांग्रेस अध्यक्ष रहे, लेकिन उन्होंने मदनपल्ले से भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व नहीं किया।
✅ विकल्प 3 – सही: रवींद्रनाथ टैगोर ने 1919 में मदनपल्ले में अपने प्रवास के दौरान जन गण मन का बंगाली से अंग्रेजी में "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" के रूप में अनुवाद किया।
❌ विकल्प 4 – गलत: थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना न्यूयॉर्क (1875) में हुई थी और इसका अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय अड्यार, चेन्नई (1882) में स्थानांतरित किया गया, मदनपल्ले में नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जन गण मन और राष्ट्रीय प्रतीक
- रचना: जन गण मन मूल रूप से 1911 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बंगाली में रचित किया गया था।
- पहला प्रदर्शन: इसे पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता सत्र में गाया गया था।
- अंग्रेजी अनुवाद: टैगोर ने फरवरी 1919 में आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में इसका अंग्रेजी में "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" के रूप में अनुवाद किया।
- राष्ट्रगान के रूप में अंगीकरण: संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को जन गण मन को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।
- अवधि: पूर्ण संस्करण में पांच छंद हैं; संक्षिप्त संस्करण का आधिकारिक बजाने का समय लगभग 52 सेकंड है।
- नोबेल पुरस्कार: रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया, वे यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने।
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विटल-विध्वंसक, पहली मासिक पत्रिका जिसका लक्षित दर्शक अस्पृश्य लोग थे, किसके द्वारा प्रकाशित की गई थी?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — गोपाल बाबा वलंगकर
गोपाल बाबा वलंगकर ने 1888 में मासिक पत्रिका विटल-विध्वंसक (ब्राह्मणवादी या कर्मकांडीय प्रदूषण का विनाशक) प्रकाशित की, जो विशेष रूप से अस्पृश्य समुदायों को लक्षित करने वाली पहली पत्रिका थी। वह एक अग्रणी समाज सुधारक थे जिन्होंने इस पत्रिका और अन्य प्रकाशनों के माध्यम से अपने लेखन द्वारा जाति भेदभाव को संबोधित किया और दलितों के अधिकारों और गरिमा के बारे में चेतना जागृत की।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रारंभिक दलित सामाजिक सुधार आंदोलन
- गोपाल बाबा वलंगकर (1840-1900): दलित समुदाय से पहले बौद्धिक विद्रोही जिन्होंने जाति व्यवस्था की व्यवस्थित आलोचना शुरू की; महाराष्ट्र में दलित सक्रियता के अग्रदूत माने जाते हैं।
- विटल-विध्वंसक (1888): मासिक पत्रिका जिसका अर्थ है 'कर्मकांडीय प्रदूषण का विनाशक'; अस्पृश्य दर्शकों को लक्षित करने वाला पहला प्रकाशन; सामाजिक चेतना जागृत करने का उद्देश्य।
- विटल विदुवनसन (1889): 26 प्रश्नों वाली पुस्तिका जो महाराष्ट्रीयन अभिजात वर्ग को संबोधित थी, समाज में अस्पृश्यों की स्थिति के विरुद्ध विरोध।
- वलंगकर की विचारधारा: हिंदू ग्रंथों को पढ़कर निष्कर्ष निकाला कि जाति की रचना आर्य आक्रमणकारियों द्वारा स्वदेशी अनार्य लोगों को नियंत्रित करने के लिए की गई थी।
- अन्य योगदान: सुधारक और दीनबंधु जैसे मराठी समाचार पत्रों के लिए लेख लिखे; जनता के लिए प्रेरणादायक मराठी दोहे रचे।
- ऐतिहासिक महत्व: ज्योतिबा फुले और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर जैसे नेताओं द्वारा बाद के दलित आंदोलनों की नींव रखी।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान साखाराम गणेश देउस्कर द्वारा लिखित पुस्तक "देशेर कथा" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
- इसने औपनिवेशिक राज्य की मन की सम्मोहक विजय के विरुद्ध चेतावनी दी।
- इसने स्वदेशी नुक्कड़ नाटकों और लोक गीतों के प्रदर्शन को प्रेरित किया।
- देउस्कर द्वारा 'देश' का प्रयोग बंगाल क्षेत्र के विशिष्ट संदर्भ में था।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
साखाराम गणेश देउस्कर की "देशेर कथा" (1904) स्वदेशी आंदोलन के दौरान एक महत्वपूर्ण रचना थी जिसने ब्रिटिश औपनिवेशिक शोषण की आलोचना की और राष्ट्रवादी चेतना को प्रेरित किया। कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 'देश' के दायरे के संबंध में गलत है।
✅ कथन 1 – सही: पुस्तक ने औपनिवेशिक राज्य की मनोवैज्ञानिक विजय और मानसिक अधीनता के विरुद्ध चेतावनी दी, आर्थिक शोषण को उजागर किया और भारतीयों से ब्रिटिश साम्राज्यवादी मंसूबों को पहचानने का आग्रह किया।
✅ कथन 2 – सही: देउस्कर के भावुक राष्ट्रवादी लेखन ने नुक्कड़ नाटकों, लोक गीतों और लोकप्रिय रंगमंच सहित स्वदेशी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रेरित किया जिन्होंने जनता के बीच राष्ट्रवादी विचारों को फैलाया।
❌ कथन 3 – गलत: देउस्कर ने 'देश' का प्रयोग भारत के व्यापक संदर्भ में राष्ट्र के रूप में किया, न कि विशेष रूप से बंगाल के लिए; हालांकि बांग्ला में लिखी गई थी, पुस्तक ने अखिल भारतीय चिंताओं और राष्ट्रीय चेतना को संबोधित किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: देशेर कथा और प्रारंभिक राष्ट्रवादी साहित्य
- लेखक: साखाराम गणेश देउस्कर (1869-1912), एक महाराष्ट्रीयन जो बंगाल में बड़े हुए और दोनों क्षेत्रों के पुनर्जागरण आंदोलनों को जोड़ा।
- प्रकाशन: 1904 में बांग्ला में लिखित, स्वदेशी आंदोलन की ऊंचाई के दौरान और बंगाल विभाजन से पहले।
- विषयवस्तु: ब्रिटिश आर्थिक निष्कासन का भंडाफोड़, औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली की आलोचना, और मानसिक उपनिवेशीकरण के विरुद्ध चेतावनी; ब्रिटिश शासन के तहत भारत की दरिद्रता के सांख्यिकीय साक्ष्य प्रस्तुत किए।
- प्रभाव: प्रारंभिक राष्ट्रवाद के सबसे प्रभावशाली ग्रंथों में से एक बन गया; स्वदेशी सक्रियता, सांस्कृतिक प्रदर्शन और जनता के बीच राष्ट्रवादी चेतना को प्रेरित किया।
- सांस्कृतिक महत्व: पुस्तक ने क्षेत्रीय भाषाओं में राष्ट्रवादी साहित्य के विकास में योगदान दिया और क्षेत्रीय पहचान से परे एकीकृत अवधारणा के रूप में 'देश' (राष्ट्र) के उपयोग को बढ़ावा दिया।
वेलेजली ने कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की क्योंकि
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — वह भारत में प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए ब्रिटिश नागरिकों को प्रशिक्षित करना चाहते थे
लॉर्ड वेलेजली ने 1800 में कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना मुख्य रूप से युवा ब्रिटिश सिविल सेवकों को भारतीय भाषाओं, रीति-रिवाजों और प्रशासनिक प्रथाओं में प्रशिक्षित करने के लिए की थी। कॉलेज का उद्देश्य अच्छी तरह से प्रशिक्षित प्रशासकों का एक संवर्ग तैयार करना था जो भारत में ब्रिटिश क्षेत्रों को प्रभावी ढंग से शासित कर सकें, क्योंकि वेलेजली लंदन में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा प्रदान किए जा रहे प्रशिक्षण से असंतुष्ट थे।
📝 संक्षिप्त नोट्स: फोर्ट विलियम कॉलेज
- स्थापना: 1800 में लॉर्ड वेलेजली (गवर्नर-जनरल, 1798-1805) द्वारा कलकत्ता में
- प्राथमिक उद्देश्य: भारतीय भाषाओं (फारसी, अरबी, संस्कृत, बंगाली, हिंदी), रीति-रिवाजों, कानूनों और प्रशासनिक प्रथाओं में ब्रिटिश सिविल सेवकों को प्रशिक्षण देना
- पृष्ठभूमि: वेलेजली का मानना था कि लंदन में कंपनी का हेलीबरी कॉलेज भारतीय प्रशासन के लिए अपर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान करता था
- पाठ्यक्रम: प्राच्य भाषाएँ, भारतीय इतिहास, संस्कृति, कानूनी प्रणालियाँ और प्रशासनिक प्रक्रियाएँ
- विरोध: लंदन में निदेशक मंडल ने उच्च खर्चों के कारण इसका विरोध किया और विकल्प के रूप में हेलीबरी कॉलेज (1806) की स्थापना की
- बाद की स्थिति: फोर्ट विलियम कॉलेज जारी रहा लेकिन 1854 के बाद मुख्य रूप से एक भाषा स्कूल तक सीमित हो गया
- महत्व: प्राच्य अध्ययन को बढ़ावा दिया और एक पेशेवर सिविल सेवा बनाने में मदद की, हालांकि इसने औपनिवेशिक प्रशासनिक हितों की भी सेवा की
वुड्स डिस्पैच के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं?
- अनुदान-सहायता प्रणाली की शुरुआत की गई थी।
- विश्वविद्यालयों की स्थापना की सिफारिश की गई थी।
- शिक्षा के सभी स्तरों पर शिक्षा के माध्यम के रूप में अंग्रेजी की सिफारिश की गई थी।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
वुड्स डिस्पैच (1854) को भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्ना कार्टा माना जाता है। इसने निजी शैक्षणिक संस्थानों को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान-सहायता प्रणाली की शुरुआत की और प्रेसीडेंसी नगरों में विश्वविद्यालयों की स्थापना की सिफारिश की, लेकिन शिक्षा के सभी स्तरों पर अंग्रेजी को अनिवार्य नहीं बनाया।
✅ कथन 1 – सही: डिस्पैच ने निजी स्कूलों को समर्थन देने के लिए अनुदान-सहायता प्रणाली की शुरुआत की, जिससे सीमित सरकारी संसाधनों के साथ शैक्षिक अवसरों का विस्तार हुआ।
✅ कथन 2 – सही: इसने बम्बई, कलकत्ता और मद्रास में लंदन विश्वविद्यालय के मॉडल पर विश्वविद्यालयों की स्थापना की सिफारिश की, ताकि उपाधियाँ प्रदान की जा सकें और उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके।
❌ कथन 3 – गलत: डिस्पैच ने एक स्तरीय भाषा नीति की वकालत की—प्राथमिक शिक्षा के लिए स्थानीय भाषाएँ, माध्यमिक शिक्षा के लिए अंग्रेजी और स्थानीय भाषाएँ दोनों, और उच्च शिक्षा के लिए मुख्य रूप से अंग्रेजी, न कि सभी स्तरों पर अंग्रेजी।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वुड्स डिस्पैच (1854)
| पहलू | सिफारिश |
|---|---|
| वैकल्पिक नाम | भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्ना कार्टा |
| अनुदान-सहायता प्रणाली | सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी शैक्षणिक संस्थानों को समर्थन देने के लिए शुरू की गई |
| विश्वविद्यालय | बम्बई, कलकत्ता और मद्रास में स्थापना की सिफारिश (लंदन विश्वविद्यालय के मॉडल पर) |
| भाषा नीति | प्राथमिक: स्थानीय भाषा; माध्यमिक: अंग्रेजी और स्थानीय भाषा; उच्च: मुख्य रूप से अंग्रेजी |
| शिक्षा विभाग | प्रत्येक प्रांत में अलग शिक्षा विभाग के निर्माण की सिफारिश |
| शिक्षक प्रशिक्षण | शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण स्कूलों की स्थापना की वकालत |
| फोकस | जन शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर जोर |
| महिला शिक्षा | महिलाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया |
भारत में औपनिवेशिक शासन के दौरान शैक्षणिक संस्थानों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| संस्थान | संस्थापक |
|---|---|
| 1. बनारस में संस्कृत कॉलेज | विलियम जोन्स |
| 2. कलकत्ता मदरसा | वारेन हेस्टिंग्स |
| 3. फोर्ट विलियम कॉलेज | आर्थर वेलेस्ली |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
यह प्रश्न ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान भारत में स्थापित शैक्षणिक संस्थानों और उनके संबंधित संस्थापकों के ज्ञान का परीक्षण करता है। दिए गए विकल्पों में केवल कलकत्ता मदरसा और वारेन हेस्टिंग्स का युग्म सही है।
❌ युग्म 1 – गलत: बनारस में संस्कृत कॉलेज की स्थापना 1791 में जोनाथन डंकन ने की थी, विलियम जोन्स ने नहीं।
✅ युग्म 2 – सही: कलकत्ता मदरसा की स्थापना 1781 में वारेन हेस्टिंग्स ने अरबी, फारसी और इस्लामी कानून के अध्ययन के लिए की थी।
❌ युग्म 3 – गलत: फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना 1800 में लॉर्ड वेलेस्ली (रिचर्ड वेलेस्ली) ने की थी, आर्थर वेलेस्ली (ड्यूक ऑफ वेलिंगटन) ने नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: औपनिवेशिक शासन के दौरान शैक्षणिक संस्थान
| संस्थान | वर्ष | संस्थापक | उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| कलकत्ता मदरसा | 1781 | वारेन हेस्टिंग्स | अरबी, फारसी और इस्लामी कानून का अध्ययन |
| संस्कृत कॉलेज, बनारस | 1791 | जोनाथन डंकन | हिंदू कानून और संस्कृत साहित्य का अध्ययन |
| फोर्ट विलियम कॉलेज | 1800 | लॉर्ड वेलेस्ली (रिचर्ड) | भारतीय भाषाओं और रीति-रिवाजों में ब्रिटिश सिविल सेवकों का प्रशिक्षण |
| हिंदू कॉलेज, कलकत्ता | 1817 | डेविड हेयर, राजा राम मोहन राय | पश्चिमी शिक्षा और विज्ञान |
| संस्कृत कॉलेज, कलकत्ता | 1824 | ब्रिटिश सरकार | संस्कृत और हिंदू दर्शन का अध्ययन |
निम्नलिखित में से किसने भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत की?
- 1813 का चार्टर अधिनियम
- लोक शिक्षा की सामान्य समिति, 1823
- प्राच्यवादी और आंग्लवादी विवाद
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — 1, 2 और 3
तीनों कारकों ने भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1813 के चार्टर अधिनियम ने वित्तीय आधार प्रदान किया, लोक शिक्षा की सामान्य समिति (1823) शैक्षिक नीति को लागू करने के लिए स्थापित की गई, और प्राच्यवादी-आंग्लवादी विवाद अंततः मैकाले के विवरण (1835) के माध्यम से अंग्रेजी शिक्षा के पक्ष में हल हुआ।
✅ कथन 1 – सही: 1813 का चार्टर अधिनियम भारत में शिक्षा और आधुनिक विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपये स्वीकृत करने वाला पहला आधिकारिक उपाय था, जिसने ब्रिटिश शैक्षिक हस्तक्षेप की वित्तीय नींव रखी।
✅ कथन 2 – सही: लोक शिक्षा की सामान्य समिति 1823 में 1813 के शैक्षिक अनुदान को लागू करने और भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की शैक्षिक नीति का मार्गदर्शन करने के लिए स्थापित की गई थी।
✅ कथन 3 – सही: पारंपरिक भारतीय शिक्षा और पश्चिमी शिक्षा के समर्थकों के बीच प्राच्यवादी-आंग्लवादी विवाद लॉर्ड मैकाले के विवरण (1835) में समाप्त हुआ, जिसने अंग्रेजी को शिक्षा के माध्यम के रूप में स्थापित किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत
| वर्ष/घटना | महत्व |
|---|---|
| 1813 का चार्टर अधिनियम | भारत में शिक्षा और आधुनिक विज्ञान के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये की पहली आधिकारिक स्वीकृति; भारतीय शिक्षा में राज्य की भागीदारी की शुरुआत |
| लोक शिक्षा की सामान्य समिति (1823) | 1813 के अनुदान को लागू करने के लिए स्थापित; शैक्षिक नीति पर प्राच्यवादी-आंग्लवादी बहस का मंच बना |
| प्राच्यवादी-आंग्लवादी विवाद | प्राच्यवादी (एच.एच. विल्सन, एच.टी. प्रिन्सेप) संस्कृत/अरबी शिक्षा के पक्षधर थे; आंग्लवादी (मैकाले, बेंटिक) अंग्रेजी में पश्चिमी शिक्षा के पक्षधर थे |
| मैकाले का विवरण (1835) | अंग्रेजी शिक्षा के पक्ष में विवाद का समाधान; "रक्त और रंग में भारतीय, लेकिन रुचि, विचार और बुद्धि में अंग्रेज" वर्ग बनाने की वकालत की |
| लॉर्ड बेंटिक का संकल्प (1835) | आधिकारिक रूप से अंग्रेजी को शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाया और इसे प्रशासन की भाषा बनाया |