निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- संभावित माता-पिता के अंडाणु या शुक्राणु उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं में आनुवंशिक परिवर्तन किए जा सकते हैं।
- प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था में जन्म से पूर्व किसी व्यक्ति के जीनोम को संपादित किया जा सकता है।
- मानव प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं को सूअर के भ्रूण में इंजेक्ट किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
जीनोम संपादन और स्टेम सेल प्रौद्योगिकियों से संबंधित तीनों कथन वैज्ञानिक रूप से सही हैं और जैव प्रौद्योगिकी में वर्तमान क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: CRISPR-Cas9 जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके जर्मलाइन जीन संपादन द्वारा जनन कोशिकाओं (अंडाणु या शुक्राणु) में आनुवंशिक परिवर्तन किए जा सकते हैं, जिससे ये संशोधन वंशानुगत बन जाते हैं और भावी पीढ़ियों में संचारित होते हैं।
✅ कथन 2 – सही: जन्म से पूर्व प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था (युग्मनज या ब्लास्टोसिस्ट अवस्था) में जीनोम संपादन किया जा सकता है, जो वंशानुगत रोगों का कारण बनने वाले आनुवंशिक उत्परिवर्तनों को सुधारने की अनुमति देता है।
✅ कथन 3 – सही: मानव प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं (hiPSCs) को सूअर के भ्रूण में इंजेक्ट करके मानव-पशु काइमेरा बनाए जा सकते हैं, यह तकनीक अंग विकास का अध्ययन करने और मानव अंग प्रत्यारोपण की संभावनाओं का पता लगाने के लिए अनुसंधान में उपयोग की जाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जीनोम संपादन और स्टेम सेल प्रौद्योगिकियाँ
- CRISPR-Cas9: एक क्रांतिकारी जीन-संपादन उपकरण जो जीवित जीवों में DNA अनुक्रमों में सटीक संशोधन की अनुमति देता है, जिससे आनुवंशिक दोषों का लक्षित सुधार संभव होता है।
- जर्मलाइन संपादन: जनन कोशिकाओं (अंडाणु, शुक्राणु) या प्रारंभिक भ्रूणों में किए गए संशोधन जो वंशानुगत होते हैं और भावी पीढ़ियों में संचारित होते हैं, जो महत्वपूर्ण नैतिक चिंताएं उठाते हैं।
- सोमैटिक जीन संपादन: गैर-प्रजनन कोशिकाओं में किए गए परिवर्तन जो केवल व्यक्ति को प्रभावित करते हैं और संतानों में संचारित नहीं होते।
- प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाएँ (iPSCs): वयस्क कोशिकाएँ जिन्हें भ्रूणीय जैसी प्लुरिपोटेंट अवस्था में पुनःप्रोग्राम किया जाता है, जो शरीर में किसी भी कोशिका प्रकार में विभेदित होने में सक्षम होती हैं।
- काइमेरा: दो विभिन्न प्रजातियों की कोशिकाओं वाले जीव; मानव-पशु काइमेरा का उपयोग रोग तंत्र और अंग विकास का अध्ययन करने के लिए अनुसंधान में किया जाता है।
- नैतिक चिंताएँ: जर्मलाइन संपादन और काइमेरा अनुसंधान मानव गरिमा, अनपेक्षित परिणामों, पहुँच में समानता और डिजाइनर शिशुओं के निर्माण के बारे में प्रश्न उठाते हैं।
- विनियामक स्थिति: कई देशों ने मनुष्यों में जर्मलाइन संपादन पर प्रतिबंध लगाया है या सख्त नियंत्रण किया है, हालांकि चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए नियंत्रित सेटिंग्स में अनुसंधान जारी है।
Question 2 of 5 जीन थेरेपी एवं CRISPR
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