UPSC CSE Prelims
जीन थेरेपी एवं CRISPR Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for जीन थेरेपी एवं CRISPR with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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आनुवांशिक चिकित्सा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- आनुवंशिक दवाएं बीमारी के लिए जिम्मेदार दोषपूर्ण जीन को ठीक करती हैं/क्षतिपूर्ति करती हैं।
- इंजीनियर्ड वायरस और लिपिड नैनोकणों का उपयोग आनुवंशिक चिकित्सा के वाहक के रूप में किया जाता है।
- जेनेटिक दवाएं संपूर्ण डीएनए अनुक्रम को बदल देती हैं।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। आनुवंशिक दवाएं (जीन थेरेपी और जीन एडिटिंग) रोगों का मूल कारण पर उपचार करती हैं — रोग के लिए जिम्मेदार दोषपूर्ण/अनुपस्थित जीन को ठीक करने या उसकी भरपाई के लिए आनुवंशिक सामग्री को बदलकर।
कथन 2 — सही। आनुवंशिक सामग्री को सीधे इंजेक्ट नहीं किया जा सकता — इसके लिए वाहक (Vector) की आवश्यकता होती है:
| वाहक प्रकार | उदाहरण | कार्यविधि |
|---|---|---|
| इंजीनियर्ड वायरस | AAV, लेंटीवायरस | रोग-जनक गुण हटाकर चिकित्सीय जीन पहुँचाते हैं |
| लिपिड नैनोपार्टिकल (LNPs) | mRNA/CRISPR वितरण | सुरक्षात्मक वसा परत में आनुवंशिक पेलोड को समाहित करते हैं |
कथन 3 — गलत। आनुवंशिक दवाएं संपूर्ण DNA अनुक्रम को नहीं बदलतीं। मानव जीनोम में ~3 अरब बेस पेयर और 20,000+ जीन हैं। जीन थेरेपी अत्यंत सटीक होती है — केवल विशिष्ट अनुक्रमों या एकल जीन को लक्षित करती है।
मुख्य ट्रिक: कथन 3 में "संपूर्ण" शब्द का प्रयोग — यह UPSC का क्लासिक अतिशयोक्ति罗 जाल है। आनुवंशिक चिकित्सा की पहचान सटीकता है, न कि संपूर्ण परिवर्तन।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- संभावित माता-पिता के अंडाणु या शुक्राणु उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं में आनुवंशिक परिवर्तन किए जा सकते हैं।
- प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था में जन्म से पूर्व किसी व्यक्ति के जीनोम को संपादित किया जा सकता है।
- मानव प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं को सूअर के भ्रूण में इंजेक्ट किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
जीनोम संपादन और स्टेम सेल प्रौद्योगिकियों से संबंधित तीनों कथन वैज्ञानिक रूप से सही हैं और जैव प्रौद्योगिकी में वर्तमान क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: CRISPR-Cas9 जैसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके जर्मलाइन जीन संपादन द्वारा जनन कोशिकाओं (अंडाणु या शुक्राणु) में आनुवंशिक परिवर्तन किए जा सकते हैं, जिससे ये संशोधन वंशानुगत बन जाते हैं और भावी पीढ़ियों में संचारित होते हैं।
✅ कथन 2 – सही: जन्म से पूर्व प्रारंभिक भ्रूणीय अवस्था (युग्मनज या ब्लास्टोसिस्ट अवस्था) में जीनोम संपादन किया जा सकता है, जो वंशानुगत रोगों का कारण बनने वाले आनुवंशिक उत्परिवर्तनों को सुधारने की अनुमति देता है।
✅ कथन 3 – सही: मानव प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं (hiPSCs) को सूअर के भ्रूण में इंजेक्ट करके मानव-पशु काइमेरा बनाए जा सकते हैं, यह तकनीक अंग विकास का अध्ययन करने और मानव अंग प्रत्यारोपण की संभावनाओं का पता लगाने के लिए अनुसंधान में उपयोग की जाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जीनोम संपादन और स्टेम सेल प्रौद्योगिकियाँ
- CRISPR-Cas9: एक क्रांतिकारी जीन-संपादन उपकरण जो जीवित जीवों में DNA अनुक्रमों में सटीक संशोधन की अनुमति देता है, जिससे आनुवंशिक दोषों का लक्षित सुधार संभव होता है।
- जर्मलाइन संपादन: जनन कोशिकाओं (अंडाणु, शुक्राणु) या प्रारंभिक भ्रूणों में किए गए संशोधन जो वंशानुगत होते हैं और भावी पीढ़ियों में संचारित होते हैं, जो महत्वपूर्ण नैतिक चिंताएं उठाते हैं।
- सोमैटिक जीन संपादन: गैर-प्रजनन कोशिकाओं में किए गए परिवर्तन जो केवल व्यक्ति को प्रभावित करते हैं और संतानों में संचारित नहीं होते।
- प्रेरित प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाएँ (iPSCs): वयस्क कोशिकाएँ जिन्हें भ्रूणीय जैसी प्लुरिपोटेंट अवस्था में पुनःप्रोग्राम किया जाता है, जो शरीर में किसी भी कोशिका प्रकार में विभेदित होने में सक्षम होती हैं।
- काइमेरा: दो विभिन्न प्रजातियों की कोशिकाओं वाले जीव; मानव-पशु काइमेरा का उपयोग रोग तंत्र और अंग विकास का अध्ययन करने के लिए अनुसंधान में किया जाता है।
- नैतिक चिंताएँ: जर्मलाइन संपादन और काइमेरा अनुसंधान मानव गरिमा, अनपेक्षित परिणामों, पहुँच में समानता और डिजाइनर शिशुओं के निर्माण के बारे में प्रश्न उठाते हैं।
- विनियामक स्थिति: कई देशों ने मनुष्यों में जर्मलाइन संपादन पर प्रतिबंध लगाया है या सख्त नियंत्रण किया है, हालांकि चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए नियंत्रित सेटिंग्स में अनुसंधान जारी है।
'RNA इंटरफेरेंस (RNAi)' तकनीक ने पिछले कुछ वर्षों में लोकप्रियता हासिल की है। क्यों?
- इसका उपयोग जीन साइलेंसिंग थेरेपी विकसित करने में किया जाता है।
- इसका उपयोग कैंसर के उपचार के लिए थेरेपी विकसित करने में किया जा सकता है।
- इसका उपयोग हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
- इसका उपयोग ऐसी फसल पौधों का उत्पादन करने के लिए किया जा सकता है जो वायरल रोगजनकों के प्रति प्रतिरोधी हों।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — 1, 2 और 4
RNA इंटरफेरेंस (RNAi) एक जैविक प्रक्रिया है जहां RNA अणु लक्षित mRNA अणुओं को निष्क्रिय करके जीन अभिव्यक्ति को रोकते हैं। यह तकनीक जीन साइलेंसिंग थेरेपी, कैंसर उपचार और रोग-प्रतिरोधी फसलों के विकास में अपने अनुप्रयोगों के लिए लोकप्रियता हासिल कर चुकी है।
✅ कथन 1 – सही: RNAi तकनीक का व्यापक रूप से उपयोग विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए विशिष्ट जीन अभिव्यक्तियों को लक्षित और कम करके जीन साइलेंसिंग थेरेपी विकसित करने में किया जाता है।
✅ कथन 2 – सही: ट्यूमर वृद्धि और प्रसार के लिए जिम्मेदार जीनों को साइलेंस करके कैंसर उपचार के लिए RNAi-आधारित थेरेपी पर सक्रिय रूप से शोध और विकास किया जा रहा है।
❌ कथन 3 – गलत: RNAi का उपयोग हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के लिए नहीं किया जाता है; यह शरीर में हार्मोन का परिचय देने के बजाय जीनों को साइलेंस करके काम करता है।
✅ कथन 4 – सही: RNAi तकनीक को कृषि में वायरल RNA को लक्षित और नष्ट करके वायरल रोगजनकों के प्रति प्रतिरोधी फसल पौधों का उत्पादन करने के लिए सफलतापूर्वक लागू किया जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: RNA इंटरफेरेंस (RNAi) तकनीक
- परिभाषा: RNAi एक प्राकृतिक सेलुलर प्रक्रिया है जहां डबल-स्ट्रैंडेड RNA अणु विशिष्ट mRNA के क्षरण को ट्रिगर करते हैं, जिससे जीन अभिव्यक्ति साइलेंस हो जाती है।
- खोज: पहली बार 1990 के दशक में एंड्रयू फायर और क्रेग मेलो द्वारा खोजा गया, जिन्होंने अपने काम के लिए 2006 में नोबेल पुरस्कार जीता।
- तंत्र: छोटे हस्तक्षेप करने वाले RNAs (siRNAs) या माइक्रो RNAs (miRNAs) पूरक mRNA अनुक्रमों से जुड़ते हैं, जिससे उनका क्षरण या अनुवादात्मक दमन होता है।
- चिकित्सा अनुप्रयोग: रोग-कारक जीनों को साइलेंस करके आनुवंशिक विकारों, वायरल संक्रमणों और कैंसर के इलाज में उपयोग किया जाता है; कई RNAi-आधारित दवाएं नैदानिक परीक्षणों में हैं या अनुमोदित हैं।
- कृषि अनुप्रयोग: वायरस-प्रतिरोधी फसलों का विकास, पोषण सामग्री में वृद्धि, और पौधों में बेहतर तनाव सहनशीलता।
- सीमाएं: ऑफ-टारगेट प्रभाव, विशिष्ट ऊतकों तक वितरण की चुनौतियां, और संभावित प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं चल रहे शोध के क्षेत्र बने हुए हैं।
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Cas9 प्रोटीन क्या है जिसका अक्सर समाचारों में उल्लेख किया जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — लक्षित जीन संपादन में उपयोग की जाने वाली एक आणविक कैंची
Cas9 एक RNA-निर्देशित एंडोन्यूक्लिएज एंजाइम है जो आणविक कैंची के रूप में कार्य करता है, जो जीनोम के भीतर सटीक स्थानों पर DNA को काटने में सक्षम है। यह CRISPR-Cas9 जीन संपादन प्रणाली का प्रमुख घटक है, जिसने जीवित जीवों में DNA अनुक्रमों में लक्षित संशोधन को सक्षम करके आनुवंशिक इंजीनियरिंग में क्रांति ला दी है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: CRISPR-Cas9 जीन संपादन प्रौद्योगिकी
- CRISPR-Cas9 का अर्थ है Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats जो Cas9 प्रोटीन से जुड़े हैं।
- तंत्र: यह प्रणाली एक गाइड RNA (gRNA) का उपयोग करके Cas9 एंजाइम को एक विशिष्ट DNA अनुक्रम की ओर निर्देशित करती है, जहां यह एक सटीक कट बनाती है।
- कार्य: काटने के बाद, कोशिका के प्राकृतिक DNA मरम्मत तंत्र का उपयोग लक्षित स्थान पर आनुवंशिक सामग्री को जोड़ने, हटाने या प्रतिस्थापित करने के लिए किया जा सकता है।
- अनुप्रयोग: आनुवंशिक रोगों का उपचार, रोग-प्रतिरोधी फसलों का विकास, आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों का निर्माण, और जीनोमिक्स में मूलभूत अनुसंधान।
- लाभ: जिंक फिंगर न्यूक्लिएज और TALENs जैसी पहले की जीन संपादन तकनीकों की तुलना में अधिक सटीक, कुशल और लागत प्रभावी।
- नोबेल पुरस्कार 2020: CRISPR-Cas9 जीन संपादन विकसित करने के लिए इमैनुएल शार्पेंटियर और जेनिफर डौडना को रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- नैतिक चिंताएं: मानव जर्मलाइन संपादन में संभावित दुरुपयोग, अनपेक्षित ऑफ-टारगेट प्रभाव, और आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों के पारिस्थितिक प्रभाव।
सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग क्या है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — पशुओं की प्रजनन क्लोनिंग
सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) एक क्लोनिंग तकनीक है जिसमें किसी दाता जीव की दैहिक (शरीर की) कोशिका के केन्द्रक को एक निष्केन्द्रित अंड कोशिका (जिसका केन्द्रक हटा दिया गया हो) में स्थानांतरित किया जाता है। पुनर्निर्मित अंडे को विभाजित और भ्रूण में विकसित होने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिसे एक सरोगेट माँ में प्रत्यारोपित करके दाता जीव का आनुवंशिक रूप से समान क्लोन उत्पन्न किया जाता है। इस प्रक्रिया को प्रजनन क्लोनिंग कहते हैं।
प्रसिद्ध उदाहरण: डॉली भेड़ (1996) SCNT तकनीक का उपयोग करके सफलतापूर्वक क्लोन की गई पहली स्तनपायी थी। इस तकनीक का उपयोग पशुधन प्रजनन, लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और जैवचिकित्सा अनुसंधान में होता है। हालांकि, यह जैवलार्विसाइड, जैवनिम्नीकरणीय प्लास्टिक, या इस विशिष्ट तंत्र के माध्यम से रोगमुक्त जीवों के उत्पादन से संबंधित नहीं है।
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