UPSC CSE Prelims
कीटाणु-विज्ञान Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for कीटाणु-विज्ञान with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
Filter & practice questions topic-wise
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. समुद्र के पानी में कोई भी वायरस जीवित नहीं रह सकता।
II. कोई भी वायरस बैक्टीरिया को संक्रमित नहीं कर सकता।
III. कोई भी वायरस मेजबान कोशिकाओं में सेलुलर ट्रांसक्रिप्शनल गतिविधि को नहीं बदल सकता।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
तीनों कथन गलत हैं क्योंकि वायरस समुद्रों में पाए जाते हैं, बैक्टीरिया को संक्रमित कर सकते हैं और मेज़बान कोशिका की गतिविधियों को भी बदल सकते हैं।
-
कथन I गलत है: समुद्री जल में बड़ी संख्या में वायरस पाए जाते हैं।
-
कथन II गलत है: बैक्टीरियोफेज (Bacteriophages) ऐसे वायरस हैं जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं।
-
कथन III गलत है: वायरस मेज़बान कोशिका की ट्रांसक्रिप्शनल गतिविधि को बदलकर अपनी प्रतिकृति बनाते हैं।
-
अतः कोई भी कथन सही नहीं है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. कोई वायरस समुद्री जल में जीवित नहीं रह सकता | ❌ गलत | समुद्रों में अत्यधिक संख्या में वायरस पाए जाते हैं। |
| II. कोई वायरस बैक्टीरिया को संक्रमित नहीं कर सकता | ❌ गलत | बैक्टीरियोफेज विशेष रूप से बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं। |
| III. कोई वायरस कोशिका की ट्रांसक्रिप्शनल गतिविधि नहीं बदल सकता | ❌ गलत | वायरस अपनी वृद्धि के लिए कोशिका की जीन अभिव्यक्ति को बदलते हैं। |
वायरस
वायरस क्या हैं?
वायरस सूक्ष्म संक्रामक कण हैं जो केवल जीवित कोशिकाओं के भीतर ही अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
मिट्टी, वायु, जल और समुद्रों में पाए जाते हैं।
-
स्वयं प्रजनन नहीं कर सकते।
-
मेज़बान कोशिका की मशीनरी का उपयोग करते हैं।
-
पौधों, जानवरों, कवकों और बैक्टीरिया को संक्रमित कर सकते हैं।
बैक्टीरियोफेज
-
बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस।
-
पृथ्वी पर सबसे अधिक पाए जाने वाले जैविक घटकों में से एक।
-
चिकित्सा और जैव-प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण।
वायरस मेज़बान कोशिका को कैसे प्रभावित करते हैं?
-
जीन अभिव्यक्ति बदलते हैं।
-
कोशिका की मशीनरी को नियंत्रित करते हैं।
-
प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
-
ट्रांसक्रिप्शन और प्रोटीन निर्माण को संशोधित करते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कुछ सूक्ष्मजीव जल के क्वथनांक से अधिक तापमान वाले वातावरण में वृद्धि कर सकते हैं।
- कुछ सूक्ष्मजीव जल के हिमांक से नीचे तापमान वाले वातावरण में वृद्धि कर सकते हैं।
- कुछ सूक्ष्मजीव 3 से कम pH वाले अत्यधिक अम्लीय वातावरण में वृद्धि कर सकते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सभी तीन
तीनों कथन सही हैं क्योंकि एक्सट्रीमोफाइल्स (चरम परिस्थितियों के अनुकूल सूक्ष्मजीव) ऐसे वातावरण में जीवित रह सकते हैं और पनप सकते हैं जो अधिकांश जीवन रूपों के लिए घातक होंगे। इनमें क्वथनांक से ऊपर और हिमांक से नीचे चरम तापमान के साथ-साथ अत्यधिक अम्लीय परिस्थितियाँ शामिल हैं।
✅ कथन 1 – सही: हाइपरथर्मोफाइल्स जैसे Pyrolobus fumarii 100°C (जल का क्वथनांक) से अधिक तापमान में पनप सकते हैं, जो अक्सर हाइड्रोथर्मल वेंट्स में 113°C तक के तापमान में पाए जाते हैं।
✅ कथन 2 – सही: साइक्रोफाइल्स (क्रायोफाइल्स) शीत-प्रेमी सूक्ष्मजीव हैं जो -20°C से +10°C तक के तापमान में वृद्धि करने में सक्षम हैं, जो जल के हिमांक (0°C) से काफी नीचे है।
✅ कथन 3 – सही: एसिडोफाइल्स जैसे Picrophilus oshimae 3 से कम pH वाले अत्यधिक अम्लीय वातावरण में पनपते हैं, कुछ प्रजातियाँ 0 के करीब pH स्तर पर भी जीवित रहती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: एक्सट्रीमोफाइल्स
| एक्सट्रीमोफाइल का प्रकार | चरम स्थिति | उदाहरण | आवास |
|---|---|---|---|
| हाइपरथर्मोफाइल्स | 80-100°C से अधिक तापमान | Pyrolobus fumarii, Thermococcus | हाइड्रोथर्मल वेंट्स, गर्म झरने |
| साइक्रोफाइल्स | 15°C से कम तापमान (अक्सर -20°C से +10°C) | Psychrobacter, Colwellia | आर्कटिक बर्फ, गहरे समुद्री जल |
| एसिडोफाइल्स | 3 से कम pH | Picrophilus oshimae, Acidithiobacillus | अम्ल खदान जल निकासी, ज्वालामुखी क्षेत्र |
| अल्कलीफाइल्स | 9 से अधिक pH | Bacillus alcalophilus | सोडा झीलें, क्षारीय मिट्टी |
| हैलोफाइल्स | उच्च नमक सांद्रता | Halobacterium, Dunaliella | नमक झीलें, नमक दलदल |
| बैरोफाइल्स (पीजोफाइल्स) | उच्च दबाव | Moritella, Shewanella | गहरे समुद्री खाइयाँ |
समाचारों में कभी-कभी उल्लिखित "गुच्छी" के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एक कवक है।
2. यह कुछ हिमालयी वन क्षेत्रों में उगता है।
3. इसकी व्यावसायिक खेती पूर्वोत्तर भारत की हिमालयी तलहटी में की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2
गुच्छी (Morchella esculenta) एक दुर्लभ और महंगी जंगली मशरूम कवक है जो हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती है। यह बर्फ पिघलने के बाद शीतोष्ण वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगती है लेकिन व्यावसायिक रूप से इसकी खेती नहीं की जा सकती, इसलिए कथन 1 और 2 सही हैं जबकि कथन 3 गलत है।
✅ कथन 1 – सही: गुच्छी एक कवक (Morchella esculenta) है जो Morchellaceae परिवार से संबंधित है, जो अपनी विशिष्ट मधुकोश जैसी आकृति और बहुमूल्य पाक मूल्य के लिए जाना जाता है।
✅ कथन 2 – सही: यह हिमालय के शीतोष्ण कोणधारी वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगता है, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फ पिघलने के बाद वसंत ऋतु में।
❌ कथन 3 – गलत: गुच्छी मशरूम को पेड़ों के साथ इसके जटिल माइकोराइजल संबंधों के कारण व्यावसायिक रूप से उगाया नहीं जा सकता; ये जंगली संग्रहित होते हैं, और ये मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालय में उगते हैं, न कि पूर्वोत्तर की तलहटी में।
📝 संक्षिप्त नोट्स: गुच्छी (मोरचेला मशरूम)
- वैज्ञानिक नाम: Morchella esculenta, Morchellaceae परिवार से संबंधित
- रूप-रंग: विशिष्ट मधुकोश या स्पंज जैसी टोपी संरचना, हल्के भूरे से गहरे भूरे रंग की
- आवास: पश्चिमी हिमालय (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) के शीतोष्ण कोणधारी वनों में 2,500-3,500 मीटर की ऊंचाई पर
- मौसम: वसंत ऋतु (मार्च-मई) में बर्फ पिघलने के बाद नम, छायादार वन तल में उगता है
- आर्थिक मूल्य: विश्व स्तर पर सबसे महंगे मशरूमों में से एक, ₹10,000-30,000 प्रति किलो तक मिलता है; प्रमुख निर्यात वस्तु
- खेती की स्थिति: पेड़ों की जड़ों के साथ जटिल सहजीवी संबंध के कारण व्यावसायिक रूप से खेती नहीं की जा सकती; केवल स्थानीय समुदायों द्वारा जंगली संग्रह
- पोषण मूल्य: प्रोटीन, विटामिन (विशेष रूप से विटामिन डी), खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध
- संरक्षण चिंता: अत्यधिक संग्रह से जंगली आबादी को खतरा; सतत संग्रह प्रथाओं की आवश्यकता
🧐 Not Sure What to Study Next?
Get a personalised study plan based on your goals, time and revision needs.
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बायोफिल्म मानव ऊतकों के भीतर चिकित्सा प्रत्यारोपणों पर बन सकती हैं।
- बायोफिल्म खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण सतहों पर बन सकती हैं।
- बायोफिल्म एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित कर सकती हैं।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
बायोफिल्म के बारे में तीनों कथन सही हैं। बायोफिल्म स्व-उत्पादित सुरक्षात्मक मैट्रिक्स में संलग्न जटिल सूक्ष्मजीव समुदाय हैं जो चिकित्सा प्रत्यारोपण, खाद्य प्रसंस्करण उपकरण और जैविक ऊतकों सहित विभिन्न सतहों पर बन सकते हैं, तथा महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: बायोफिल्म आसानी से कैथेटर, हृदय वाल्व और कृत्रिम जोड़ों जैसे चिकित्सा प्रत्यारोपणों पर मानव ऊतकों के भीतर बनती हैं, जिससे दीर्घकालिक संक्रमण होते हैं जिनका उपचार करना कठिन होता है।
✅ कथन 2 – सही: बायोफिल्म सामान्यतः खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण सतहों पर बनती हैं, खाद्य उत्पादों को दूषित करती हैं और खराब होने में योगदान देती हैं, जबकि मानक सफाई विधियों के प्रति प्रतिरोधी होती हैं।
✅ कथन 3 – सही: बायोफिल्म के भीतर जीवाणु प्लैंकटोनिक (मुक्त-तैरते) जीवाणुओं की तुलना में 10-1000 गुना अधिक एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित करते हैं, जो सुरक्षात्मक मैट्रिक्स बाधा, परिवर्तित चयापचय अवस्थाओं और क्षैतिज जीन स्थानांतरण तंत्रों के कारण होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बायोफिल्म
- परिभाषा: बायोफिल्म स्व-उत्पादित बाह्यकोशिकीय बहुलक पदार्थ (EPS) मैट्रिक्स में संलग्न सूक्ष्मजीवों के संरचित समुदाय हैं, जो सतहों का पालन करते हैं।
- चिकित्सीय निहितार्थ: मनुष्यों में सभी सूक्ष्मजीव संक्रमणों के 65-80% के लिए जिम्मेदार; इंड्वेलिंग चिकित्सा उपकरणों, दांतों (डेंटल प्लाक) और दीर्घकालिक घावों पर बनते हैं।
- प्रतिरोध तंत्र: EPS मैट्रिक्स रोगाणुरोधी के लिए एक बाधा के रूप में कार्य करता है; बायोफिल्म में धीमी वृद्धि दर एंटीबायोटिक प्रभावकारिता को कम करती है; पर्सिस्टर कोशिकाएं उपचार से बच जाती हैं; जीन स्थानांतरण प्रतिरोध के प्रसार को बढ़ावा देता है।
- औद्योगिक प्रभाव: जल पाइप, जहाज की पतवार (बायोफाउलिंग), हीट एक्सचेंजर और खाद्य प्रसंस्करण उपकरण को दूषित करते हैं; आर्थिक नुकसान और दक्षता में कमी का कारण बनते हैं।
- खाद्य सुरक्षा: खाद्य उद्योग में बायोफिल्म लिस्टीरिया, साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे रोगजनकों को आश्रय देती हैं; मानक स्वच्छता प्रक्रियाओं के प्रति प्रतिरोधी हैं।
- नियंत्रण रणनीतियां: यांत्रिक हटाने, EPS के एंजाइमेटिक व्यवधान, क्वोरम सेंसिंग अवरोधक और संयोजन रोगाणुरोधी चिकित्सा शामिल हैं।
प्रोबायोटिक्स के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
प्रोबायोटिक्स बैक्टीरिया और यीस्ट दोनों से बने होते हैं।
प्रोबायोटिक्स में मौजूद जीव उन खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं जिन्हें हम ग्रहण करते हैं, लेकिन वे स्वाभाविक रूप से हमारे आंत में नहीं पाए जाते हैं।
प्रोबायोटिक्स दूध की शर्करा के पाचन में मदद करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 3
यह प्रश्न प्रोबायोटिक्स के बारे में ज्ञान की परीक्षा करता है, जो आंत के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी जीवित सूक्ष्मजीव हैं। कथन 1 और 3 सही हैं क्योंकि प्रोबायोटिक्स में बैक्टीरिया और यीस्ट दोनों शामिल हैं, और कुछ स्ट्रेन लैक्टोज (दूध की शर्करा) को पचाने में मदद करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: प्रोबायोटिक्स में बैक्टीरिया (जैसे लैक्टोबैसिलस, बिफीडोबैक्टीरियम) और यीस्ट (जैसे सैकेरोमाइसिस बाउलार्डी) दोनों शामिल हैं।
❌ कथन 2 – गलत: प्रोबायोटिक जीव स्वाभाविक रूप से हमारे आंत में सामान्य आंत माइक्रोबायोम के हिस्से के रूप में पाए जाते हैं; प्रोबायोटिक्स इन लाभकारी सूक्ष्मजीवों की पूर्ति करते हैं।
✅ कथन 3 – सही: कुछ प्रोबायोटिक स्ट्रेन लैक्टेज एंजाइम उत्पन्न करते हैं, जो लैक्टोज (दूध की शर्करा) को तोड़ने में मदद करता है, विशेष रूप से लैक्टोज असहिष्णु व्यक्तियों में पाचन में सहायता करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रोबायोटिक्स
- परिभाषा: जीवित सूक्ष्मजीव जो पर्याप्त मात्रा में सेवन करने पर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं, विशेष रूप से आंत के स्वास्थ्य के लिए।
- सामान्य प्रकार: बैक्टीरिया (लैक्टोबैसिलस, बिफीडोबैक्टीरियम, स्ट्रेप्टोकोकस थर्मोफिलस) और यीस्ट (सैकेरोमाइसिस बाउलार्डी)।
- प्राकृतिक स्रोत: दही, केफिर, सॉरक्रॉट, किमची, टेम्पेह, मिसो, अचार और अन्य किण्वित खाद्य पदार्थ।
- लाभ: पाचन स्वास्थ्य में सुधार, प्रतिरक्षा कार्य में वृद्धि, लैक्टोज पाचन में सहायता, विटामिन (B और K) का संश्लेषण, दस्त और कब्ज की रोकथाम।
- आंत माइक्रोबायोम: मानव आंत में स्वाभाविक रूप से खरबों सूक्ष्मजीव होते हैं; प्रोबायोटिक्स पहले से मौजूद लाभकारी स्ट्रेन की पूर्ति करते हैं।
- बनाम प्रीबायोटिक्स: प्रोबायोटिक्स जीवित जीव हैं; प्रीबायोटिक्स गैर-पाच्य खाद्य घटक हैं जो लाभकारी आंत बैक्टीरिया को पोषित करते हैं।
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- जीवाणु (Bacteria)
- कवक (Fungi)
- विषाणु (Virus)
उपर्युक्त में से किसे कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम में संवर्धित किया जा सकता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
जीवाणु और कवक को कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम में संवर्धित किया जा सकता है क्योंकि उनके पास स्वतंत्र वृद्धि और प्रजनन के लिए पूर्ण कोशिकीय तंत्र होता है। विषाणु, अनिवार्य अंतःकोशिकीय परजीवी होने के कारण, कोशिकीय तंत्र से रहित होते हैं और केवल जीवित परपोषी कोशिकाओं के अंदर ही प्रतिकृति बना सकते हैं, जिससे वे संश्लेषित माध्यम में वृद्धि करने में असमर्थ होते हैं।
✅ कथन 1 (जीवाणु) – सही: जीवाणु को विभिन्न कृत्रिम माध्यम जैसे पोषक अगार, पोषक शोरबा और अन्य विशिष्ट माध्यम में संवर्धित किया जा सकता है क्योंकि वे पूर्ण उपापचयी तंत्र वाले आत्मनिर्भर जीव हैं।
✅ कथन 2 (कवक) – सही: कवक को कृत्रिम माध्यम जैसे पोटैटो डेक्सट्रोज अगार (PDA), सैबोराउड डेक्सट्रोज अगार और ज़ैपेक डॉक्स अगार में संवर्धित किया जा सकता है, क्योंकि वे वृद्धि के लिए स्वतंत्र रूप से पोषक तत्वों का उपयोग कर सकते हैं।
❌ कथन 3 (विषाणु) – गलत: विषाणु को कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम में संवर्धित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे अकोशिकीय हैं और प्रतिकृति के लिए जीवित परपोषी कोशिकाओं (भ्रूणित अंडे, कोशिका संवर्धन, या जीवित जीव) की आवश्यकता होती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सूक्ष्मजीव संवर्धन विधियाँ
| सूक्ष्मजीव | संवर्धन विधि | माध्यम/विधियों के उदाहरण | कारण |
|---|---|---|---|
| जीवाणु | कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम | पोषक अगार, मैकॉन्की अगार, रक्त अगार, पोषक शोरबा | पूर्ण कोशिकीय तंत्र; आवश्यक अणुओं को संश्लेषित कर सकते हैं |
| कवक | कृत्रिम/संश्लेषित माध्यम | पोटैटो डेक्सट्रोज अगार (PDA), सैबोराउड डेक्सट्रोज अगार, ज़ैपेक डॉक्स अगार | पूर्ण उपापचयी मार्गों वाली यूकैरियोटिक कोशिकाएँ |
| विषाणु | केवल जीवित परपोषी कोशिकाएँ | कोशिका संवर्धन, भ्रूणित अंडे, जीवित जंतु/पादप | अनिवार्य अंतःकोशिकीय परजीवी; उपापचयी तंत्र की कमी |
- कृत्रिम माध्यम: जीवित कोशिकाओं के बिना प्रयोगशाला में तैयार रासायनिक रूप से परिभाषित या जटिल माध्यम
- जीवाणु संवर्धन: विशिष्ट तापमान और pH पर ठोस (अगार प्लेट्स) या तरल (शोरबा) माध्यम पर बढ़ सकते हैं
- कवक संवर्धन: जीवाणु की तुलना में थोड़ा अम्लीय pH और लंबी ऊष्मायन अवधि की आवश्यकता होती है
- विषाणु संवर्धन: ऊतक संवर्धन, भ्रूणित मुर्गी के अंडे, या प्रायोगिक जंतुओं की आवश्यकता होती है
- मुख्य अंतर: विषाणु अकोशिकीय हैं और प्रतिकृति के लिए पूरी तरह से परपोषी कोशिका के राइबोसोम, एंजाइम और न्यूक्लियोटाइड पर निर्भर हैं
निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? विषाणु (वायरस) को संक्रमित कर सकते हैं -
- जीवाणु (बैक्टीरिया)
- कवक (फंगाई)
- पौधे
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
✅ कथन 1 – सही: बैक्टीरियोफेज (फेज) ऐसे विषाणु हैं जो जीवाणुओं को संक्रमित करते हैं और उनकी आनुवंशिक सामग्री को जीवाणु कोशिकाओं में इंजेक्ट करते हैं।
✅ कथन 2 – सही: माइकोवायरस ऐसे विषाणु हैं जो विशेष रूप से कवक को संक्रमित करते हैं, अक्सर बिना दिखाई देने वाले लक्षणों के गुप्त संक्रमण पैदा करते हैं।
✅ कथन 3 – सही: पादप विषाणु विभिन्न पौधों की प्रजातियों को संक्रमित करते हैं और कोशिकीय तंत्र को हाईजैक करके मोज़ेक पैटर्न और रुकी हुई वृद्धि जैसी बीमारियाँ पैदा करते हैं।
पौधों के कायिक प्रवर्धन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- कायिक प्रवर्धन क्लोनल जनसंख्या उत्पन्न करता है।
- कायिक प्रवर्धन वायरस को समाप्त करने में मदद करता है।
- कायिक प्रवर्धन वर्ष के अधिकांश समय किया जा सकता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: कायिक प्रवर्धन एक अलैंगिक प्रजनन विधि है जिसमें नए पौधे कायिक भागों (जड़, तना, पत्तियां) से युग्मक संलयन के बिना विकसित होते हैं, जो आनुवंशिक रूप से समान संतति—एक क्लोनल जनसंख्या उत्पन्न करते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: कायिक प्रवर्धन वायरस को समाप्त नहीं करता; बल्कि यह उन्हें प्रसारित करता है। यदि जनक पौधा वायरस-संक्रमित है, तो रोगज़नक़ संक्रमित ऊतकों के माध्यम से संतति में संचरित होता है।
✅ कथन 3 – सही: मौसमी पुष्पन चक्रों पर निर्भर लैंगिक प्रजनन के विपरीत, कायिक प्रवर्धन वर्ष भर किया जा सकता है क्योंकि यह प्रजनन चरण की परवाह किए बिना उपलब्ध परिपक्व कायिक अंगों पर निर्भर करता है।
अनाज और तिलहन के अनुचित प्रबंधन और भंडारण के परिणामस्वरूप विषाक्त पदार्थों का उत्पादन होता है जिन्हें एफ्लाटॉक्सिन के रूप में जाना जाता है, जो सामान्य रूप से सामान्य खाना पकाने की प्रक्रिया द्वारा नष्ट नहीं होते हैं। एफ्लाटॉक्सिन किसके द्वारा उत्पादित होते हैं?
Detailed Explanation:
एफ्लाटॉक्सिन विषैले कैंसरकारी पदार्थ हैं जो कुछ विशेष फफूंद, विशेष रूप से एस्परजिलस फ्लेवस और एस्परजिलस पैरासिटिकस द्वारा उत्पादित होते हैं।
ये फफूंद मिट्टी, सड़ती वनस्पति, घास और अनुचित रूप से भंडारित अनाज में बढ़ते हैं और सामान्य खाना पकाने के तापमान से नष्ट नहीं होते।
निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- विषाणुओं में ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए आवश्यक एंजाइमों का अभाव होता है।
- विषाणुओं को किसी भी कृत्रिम माध्यम में संवर्धित किया जा सकता है।
- विषाणु केवल जैविक वाहकों द्वारा ही एक जीव से दूसरे जीव में संचरित होते हैं।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: विषाणुओं में उपापचयी तंत्र और ATP उत्पादन के लिए एंजाइमों का अभाव होता है; वे ऊर्जा उत्पादन के लिए पूर्णतः परपोषी कोशिकाओं पर निर्भर रहते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: विषाणुओं को कृत्रिम या संश्लेषित माध्यम में संवर्धित नहीं किया जा सकता; उन्हें प्रतिकृति के लिए जीवित परपोषी कोशिकाओं (जीवाणु, पौधे, जानवर, या कोशिका संवर्धन) की आवश्यकता होती है।
❌ कथन 3 – गलत: विषाणु संचरण अनेक मार्गों से होता है – प्रत्यक्ष संपर्क, श्वसन बूंदें, दूषित जल/भोजन, वायुजनित कण, निर्जीव वस्तुएं, और जैविक वाहक (मच्छर, टिक); वाहक ही एकमात्र माध्यम नहीं हैं।
Related Topics in विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
आनुवंशिक अभियांत्रिकी
जीन थेरेपी एवं CRISPR
जैव प्रौद्योगिकी की मूल अवधारणाएँ
जीएम फसलें एवं जैव सुरक्षा
बायोमटीरियल्स और बायोमेडिकल एप्लीकेशन
डीएनए, आरएनए एवं आनुवंशिकी
रिकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक
जैव सुरक्षा और आनुवंशिक इंजीनियरिंग विनियम
Frequently Asked Questions
Common questions about कीटाणु-विज्ञान in UPSC CSE PRELIMS