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टीके एवं प्रतिरक्षण Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for टीके एवं प्रतिरक्षण with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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अक्सर समाचारों में उल्लिखित मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. वे मानव निर्मित प्रोटीन हैं।
II. वे विशिष्ट एंटीजन से जुड़ने की अपनी क्षमता के कारण प्रतिरक्षाविज्ञानी कार्य को उत्तेजित करते हैं।
III. इनका उपयोग निपाह वायरस जैसे वायरल संक्रमण के इलाज में किया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) प्रयोगशाला में बनाए गए विशेष प्रोटीन होते हैं जो किसी एक विशेष एंटीजन को पहचानकर उससे जुड़ते हैं।
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कथन I सही है: ये मानव-निर्मित (Lab-made) प्रोटीन होते हैं।
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कथन II सही है: ये विशिष्ट एंटीजन से जुड़कर प्रतिरक्षा तंत्र को रोगजनकों से लड़ने में मदद करते हैं।
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कथन III सही है: इनका उपयोग निपाह वायरस जैसी वायरल बीमारियों के उपचार में भी किया जाता है।
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अतः तीनों कथन सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. मानव-निर्मित प्रोटीन हैं | ✅ सही | प्रयोगशाला में क्लोन की गई कोशिकाओं से बनाए जाते हैं। |
| II. विशिष्ट एंटीजन से जुड़ते हैं | ✅ सही | रोगजनकों या कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाते हैं। |
| III. निपाह वायरस में उपयोग | ✅ सही | निपाह संक्रमण के उपचार हेतु विकसित किए गए हैं। |
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी
क्या हैं Monoclonal Antibodies?
ये प्रयोगशाला में तैयार की गई एक जैसी (Identical) एंटीबॉडी होती हैं जो किसी एक विशेष एंटीजन को लक्ष्य बनाती हैं।
कैसे काम करती हैं?
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एंटीजन से जुड़ती हैं।
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वायरस या अन्य रोगजनकों को निष्क्रिय करती हैं।
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प्रतिरक्षा तंत्र को संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती हैं।
मुख्य उपयोग
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कैंसर उपचार
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ऑटोइम्यून रोग
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वायरल संक्रमण (COVID-19, Ebola, Nipah)
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डायग्नोस्टिक परीक्षण
महत्वपूर्ण तथ्य
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एक ही प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिका के क्लोन से बनाई जाती हैं।
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अत्यधिक विशिष्ट (Highly Specific) होती हैं।
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आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी और चिकित्सा में व्यापक उपयोग।
COVID-19 महामारी को रोकने के लिए निर्मित टीकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने mRNA प्लेटफॉर्म का उपयोग करके कोविशील्ड नामक COVID-19 वैक्सीन का उत्पादन किया।
- स्पुतनिक V वैक्सीन वेक्टर-आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करके निर्मित की जाती है।
- कोवैक्सिन एक निष्क्रिय रोगजनक-आधारित वैक्सीन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
यह प्रश्न भारत में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न COVID-19 वैक्सीन प्लेटफॉर्म के बारे में ज्ञान की परीक्षा करता है। कथन 1 गलत है क्योंकि कोविशील्ड एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है (चिंपैंजी एडेनोवायरस का उपयोग करते हुए), mRNA वैक्सीन नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि वे क्रमशः स्पुतनिक V और कोवैक्सिन के लिए उपयोग किए गए प्लेटफॉर्म का सटीक वर्णन करते हैं।
❌ कथन 1 – गलत: कोविशील्ड चिंपैंजी एडेनोवायरस (ChAdOx1) का उपयोग करने वाली एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है, mRNA प्लेटफॉर्म वैक्सीन नहीं।
✅ कथन 2 – सही: स्पुतनिक V दो अलग-अलग मानव एडेनोवायरस वेक्टर (rAd26 और rAd5) के साथ वेक्टर-आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग दो-खुराक योजना में करती है।
✅ कथन 3 – सही: कोवैक्सिन, भारत बायोटेक द्वारा विकसित, एक निष्क्रिय रोगजनक-आधारित वैक्सीन है जो संपूर्ण-विरियन निष्क्रिय वेरो सेल प्लेटफॉर्म का उपयोग करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: COVID-19 वैक्सीन प्लेटफॉर्म
| वैक्सीन का नाम | निर्माता | प्लेटफॉर्म प्रकार | मुख्य विशेषताएं |
|---|---|---|---|
| कोविशील्ड | सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) | वायरल वेक्टर | स्पाइक प्रोटीन जीन को वितरित करने के लिए चिंपैंजी एडेनोवायरस (ChAdOx1) का उपयोग करता है |
| स्पुतनिक V | गामालेया इंस्टीट्यूट (रूस) | वायरल वेक्टर | दो अलग-अलग मानव एडेनोवायरस वेक्टर (rAd26 और rAd5) का उपयोग करता है |
| कोवैक्सिन | भारत बायोटेक | निष्क्रिय रोगजनक | सहायक (Algel-IMDG) के साथ संपूर्ण-विरियन निष्क्रिय वैक्सीन |
| कॉर्बेवैक्स | बायोलॉजिकल ई | प्रोटीन सबयूनिट | रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन (RBD) प्रोटीन का उपयोग करता है |
| फाइजर-बायोएनटेक | फाइजर | mRNA | कोशिकाओं में स्पाइक प्रोटीन उत्पन्न करने के लिए mRNA का उपयोग करता है |
| मॉडर्ना | मॉडर्ना | mRNA | फाइजर के समान mRNA-आधारित प्लेटफॉर्म |
'रीकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन' के संबंध में हाल के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इन टीकों के विकास में आनुवंशिक अभियांत्रिकी (जेनेटिक इंजीनियरिंग) लागू की जाती है।
- जीवाणु और विषाणु को वाहक (वेक्टर) के रूप में उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
रीकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन आनुवंशिक अभियांत्रिकी का उपयोग करके रोगजनक जीन को हानिरहित वाहक जीवों (वेक्टर) में डालते हैं, जो फिर इन जीनों को मानव कोशिकाओं में पहुँचाते हैं ताकि प्रतिजन (एंटीजन) उत्पन्न हो और प्रतिरक्षा उत्पन्न हो। विषाणु (जैसे कोविशील्ड में एडेनोवायरस) और जीवाणु (जैसे क्षीण साल्मोनेला या BCG) दोनों इन टीकों में वेक्टर के रूप में काम कर सकते हैं।
✅ कथन 1 – सही: आनुवंशिक अभियांत्रिकी रीकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन के विकास के लिए आवश्यक है, जिसमें रोगजनक प्रतिजन जीन को वेक्टर की आनुवंशिक सामग्री में डाला जाता है।
✅ कथन 2 – सही: प्रतिजन पहुँचाने के लिए जीवाणु (जैसे साल्मोनेला, BCG) और विषाणु (जैसे एडेनोवायरस, VSV) दोनों को वेक्टर के रूप में उपयोग किया जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: रीकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन
- प्रौद्योगिकी: रोगजनक प्रतिजन को कूटबद्ध करने वाले जीनों को हानिरहित विषाणु या जीवाणु वेक्टर में डालने के लिए आनुवंशिक अभियांत्रिकी का उपयोग करती है
- क्रियाविधि: वेक्टर आनुवंशिक सामग्री को मेजबान कोशिकाओं में पहुँचाते हैं, जो फिर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने वाले प्रतिजन उत्पन्न करते हैं
- विषाणु वेक्टर: एडेनोवायरस (कोविशील्ड/स्पुतनिक V), वेसिकुलर स्टोमैटाइटिस वायरस (इबोला वैक्सीन - एर्वेबो), संशोधित वैक्सीनिया एन्कारा (MVA)
- जीवाणु वेक्टर: क्षीण साल्मोनेला टाइफीम्यूरियम, माइकोबैक्टीरियम बोविस (BCG), लिस्टेरिया मोनोसाइटोजेन्स उपभेद
- लाभ: मजबूत कोशिकीय और ह्यूमरल प्रतिरक्षा, कोई जीवित रोगजनक उपयोग नहीं, स्केलेबल उत्पादन
- उदाहरण: COVID-19 वैक्सीन (एस्ट्राजेनेका/कोविशील्ड, J&J, स्पुतनिक V), इबोला वैक्सीन (एर्वेबो), प्रायोगिक TB और मलेरिया वैक्सीन
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'ACE2' शब्द किस संदर्भ में चर्चा में है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — विषाणुजनित रोगों का प्रसार
ACE2 (एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम 2) मानव कोशिका सतहों पर पाया जाने वाला एक प्रोटीन रिसेप्टर है जो COVID-19 महामारी के दौरान व्यापक रूप से चर्चा में आया। SARS-CoV-2 वायरस मानव कोशिकाओं में प्रवेश के लिए ACE2 का उपयोग अपने प्राथमिक प्रवेश बिंदु के रूप में करता है, अपने स्पाइक प्रोटीन के माध्यम से इस रिसेप्टर से जुड़कर फेफड़ों, हृदय, गुर्दे और अन्य अंगों में कोशिकाओं को संक्रमित करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ACE2 रिसेप्टर
- पूर्ण रूप: एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम 2
- सामान्य कार्य: ACE2 एक एंजाइम है जो एंजियोटेंसिन II को एंजियोटेंसिन (1-7) में परिवर्तित करके रक्तचाप और हृदय संवहनी कार्य को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
- स्थान: फेफड़ों (एल्वियोलर कोशिकाओं), हृदय, गुर्दे, आंतों और रक्त वाहिकाओं सहित कई अंगों में कोशिका सतहों पर पाया जाता है
- COVID-19 में भूमिका: कोशिकीय रिसेप्टर के रूप में कार्य करता है जिससे SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन कोशिकाओं में वायरल प्रवेश के लिए जुड़ता है
- अनुसंधान महत्व: वायरल प्रवेश को रोकने के लिए घुलनशील ACE2, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और लघु अणु अवरोधकों सहित चिकित्सीय हस्तक्षेपों का लक्ष्य
- पूर्व कनेक्शन: मूल SARS-CoV वायरस (2003) ने भी अपने रिसेप्टर के रूप में ACE2 का उपयोग किया था, जो इसे कोरोनावायरस संक्रमणों में एक ज्ञात कमजोरी बनाता है
भारत में न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन के उपयोग का क्या महत्व है?
- ये टीके निमोनिया के साथ-साथ मेनिनजाइटिस और सेप्सिस के विरुद्ध भी प्रभावी हैं।
- ड्रग-प्रतिरोधी जीवाणुओं के विरुद्ध प्रभावी न होने वाले प्रतिजैविकों पर निर्भरता को कम किया जा सकता है।
- इन टीकों का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और ये कोई एलर्जी प्रतिक्रिया उत्पन्न नहीं करते।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1 और 2
न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCVs) भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए द्वारा उत्पन्न कई गंभीर रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं और प्रतिजैविक प्रतिरोध से निपटने में सहायता करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि कोई भी टीका पूर्णतः दुष्प्रभावों या एलर्जी प्रतिक्रियाओं से मुक्त नहीं होता।
✅ कथन 1 – सही: PCVs स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न निमोनिया, मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की झिल्लियों की सूजन), और सेप्सिस (रक्त संक्रमण) के विरुद्ध अत्यधिक प्रभावी हैं।
✅ कथन 2 – सही: PCVs न्यूमोकोकल संक्रमणों को रोककर प्रतिजैविकों पर निर्भरता कम करते हैं, जिससे प्रतिजैविक-प्रतिरोधी जीवाणु उपभेदों की बढ़ती समस्या का समाधान होता है।
❌ कथन 3 – गलत: सभी टीकों की तरह, PCVs हल्के दुष्प्रभाव (इंजेक्शन स्थल पर लालिमा, सूजन, दर्द) और दुर्लभ एलर्जी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकते हैं; कोई भी टीका पूर्णतः दुष्प्रभाव-मुक्त नहीं होता।
📝 संक्षिप्त नोट्स: न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCVs)
- कारक जीव: स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए (न्यूमोकोकस) — 90 से अधिक सीरोटाइप्स वाला एक जीवाणु।
- रोकी जाने वाली बीमारियाँ: निमोनिया, मेनिनजाइटिस, सेप्सिस, ओटाइटिस मीडिया (कान का संक्रमण), और बैक्टेरीमिया।
- टीकों के प्रकार: PCV10 (10 सीरोटाइप्स से सुरक्षा) और PCV13 (13 सीरोटाइप्स से सुरक्षा)।
- भारत का टीकाकरण कार्यक्रम: PCV को 2017 में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में शामिल किया गया; 6, 10, और 14 सप्ताह की आयु में दिया जाता है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव: बाल मृत्यु दर में कमी, न्यूमोकोकल रोगों (5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण) की रोकथाम, और प्रतिजैविक उपयोग में कमी।
- प्रतिजैविक प्रतिरोध: PCVs संक्रमणों को रोककर और प्रतिजैविकों की आवश्यकता घटाकर ड्रग-प्रतिरोधी न्यूमोकोकल उपभेदों से निपटने में सहायता करते हैं।
- सामान्य दुष्प्रभाव: हल्की प्रतिक्रियाएं जैसे बुखार, चिड़चिड़ापन, इंजेक्शन स्थल पर प्रतिक्रियाएं; गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं दुर्लभ हैं लेकिन संभव हैं।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी के विपरीत, इसका कोई टीका नहीं है।
यह कथन गलत है क्योंकि हेपेटाइटिस बी के लिए 1982 से एक अत्यधिक प्रभावी टीका उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका मौजूद नहीं है। प्रश्न में पूछा गया है कि कौन सा कथन सही नहीं है।
✅ कथन 1 – सही: हेपेटाइटिस बी वायरस एचआईवी के समान मार्गों (रक्त संपर्क, यौन संपर्क, माँ से बच्चे में संचरण) से संचरित होता है।
❌ कथन 2 – गलत: हेपेटाइटिस बी का टीका है; हेपेटाइटिस सी का कोई टीका नहीं है।
✅ कथन 3 – सही: विश्व स्तर पर, हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण संयुक्त रूप से एचआईवी संक्रमणों से कहीं अधिक हैं (लगभग 325 मिलियन बनाम 38 मिलियन)।
✅ कथन 4 – सही: क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण यकृत को नुकसान पहुंचाने से पहले कई वर्षों तक स्पर्शोन्मुख रह सकते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: हेपेटाइटिस बी और सी
| विशेषता | हेपेटाइटिस बी | हेपेटाइटिस सी |
|---|---|---|
| टीका उपलब्ध | हाँ (1982 से) | नहीं |
| संचरण | रक्त, यौन संपर्क, माँ से बच्चे में | मुख्य रूप से रक्त-से-रक्त संपर्क |
| वैश्विक प्रसार | ~296 मिलियन क्रोनिक मामले | ~58 मिलियन क्रोनिक मामले |
| क्रोनिक संक्रमण दर | वयस्कों में 5-10% | 75-85% क्रोनिक संक्रमण विकसित करते हैं |
| लक्षण | अक्सर वर्षों तक स्पर्शोन्मुख | अक्सर वर्षों तक स्पर्शोन्मुख |
| उपचार | एंटीवायरल दवाएं (वायरस को दबाती हैं) | प्रत्यक्ष-अभिनय एंटीवायरल (ठीक कर सकते हैं) |
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Frequently Asked Questions
Common questions about टीके एवं प्रतिरक्षण in UPSC CSE PRELIMS