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मानव स्वास्थ्य एवं रोग Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: मानव स्वास्थ्य एवं रोग
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अक्सर समाचारों में उल्लिखित मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. वे मानव निर्मित प्रोटीन हैं।
II. वे विशिष्ट एंटीजन से जुड़ने की अपनी क्षमता के कारण प्रतिरक्षाविज्ञानी कार्य को उत्तेजित करते हैं।
III. इनका उपयोग निपाह वायरस जैसे वायरल संक्रमण के इलाज में किया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) प्रयोगशाला में बनाए गए विशेष प्रोटीन होते हैं जो किसी एक विशेष एंटीजन को पहचानकर उससे जुड़ते हैं।
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कथन I सही है: ये मानव-निर्मित (Lab-made) प्रोटीन होते हैं।
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कथन II सही है: ये विशिष्ट एंटीजन से जुड़कर प्रतिरक्षा तंत्र को रोगजनकों से लड़ने में मदद करते हैं।
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कथन III सही है: इनका उपयोग निपाह वायरस जैसी वायरल बीमारियों के उपचार में भी किया जाता है।
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अतः तीनों कथन सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. मानव-निर्मित प्रोटीन हैं | ✅ सही | प्रयोगशाला में क्लोन की गई कोशिकाओं से बनाए जाते हैं। |
| II. विशिष्ट एंटीजन से जुड़ते हैं | ✅ सही | रोगजनकों या कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाते हैं। |
| III. निपाह वायरस में उपयोग | ✅ सही | निपाह संक्रमण के उपचार हेतु विकसित किए गए हैं। |
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी
क्या हैं Monoclonal Antibodies?
ये प्रयोगशाला में तैयार की गई एक जैसी (Identical) एंटीबॉडी होती हैं जो किसी एक विशेष एंटीजन को लक्ष्य बनाती हैं।
कैसे काम करती हैं?
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एंटीजन से जुड़ती हैं।
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वायरस या अन्य रोगजनकों को निष्क्रिय करती हैं।
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प्रतिरक्षा तंत्र को संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती हैं।
मुख्य उपयोग
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कैंसर उपचार
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ऑटोइम्यून रोग
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वायरल संक्रमण (COVID-19, Ebola, Nipah)
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डायग्नोस्टिक परीक्षण
महत्वपूर्ण तथ्य
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एक ही प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिका के क्लोन से बनाई जाती हैं।
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अत्यधिक विशिष्ट (Highly Specific) होती हैं।
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आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी और चिकित्सा में व्यापक उपयोग।
निम्नलिखित में से कौन सा मानव शरीर में संश्लेषित होता है जो रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है और रक्त प्रवाह को बढ़ाता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (Nitric Oxide)
Nitric Oxide (NO) मानव शरीर में बनने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक अणु (signaling molecule) है। यह रक्त वाहिकाओं की चिकनी मांसपेशियों को शिथिल करता है, जिससे रक्त वाहिकाएँ फैलती हैं और रक्त प्रवाह बढ़ता है।
✅ Nitric Oxide – सही: यह रक्त वाहिकाओं का प्रसार (vasodilation) करता है और रक्त प्रवाह बढ़ाता है।
❌ Nitrous Oxide (N₂O) – गलत: इसे "Laughing Gas" कहा जाता है और यह मुख्यतः एनेस्थीसिया में उपयोग होती है।
❌ Nitrogen Dioxide (NO₂) – गलत: यह एक हानिकारक वायु प्रदूषक है।
❌ Nitrogen Pentoxide (N₂O₅) – गलत: यह एक रासायनिक यौगिक है जिसका रक्त वाहिकाओं के प्रसार से कोई संबंध नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: Nitric Oxide (NO)
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इसके जैविक महत्व की खोज पर 1998 का नोबेल पुरस्कार दिया गया।
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यह L-arginine से Nitric Oxide Synthase (NOS) एंजाइम द्वारा बनता है।
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रक्त वाहिकाओं को फैलाकर रक्तचाप कम करता है।
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हृदय एवं रक्तवाहिका स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
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तंत्रिका तंत्र और प्रतिरक्षा प्रणाली में भी भूमिका निभाता है।
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Nitroglycerin जैसी दवाएँ NO छोड़कर कार्य करती हैं।
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इसकी कमी उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों से जुड़ी हो सकती है।
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यह एक अल्पकालिक गैसीय संदेशवाहक (gaseous messenger) है।
'वोलबाकिया विधि' कभी-कभी निम्नलिखित में से किसके संदर्भ में चर्चा में आती है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — मच्छरों द्वारा फैलाई जाने वाली वायरल बीमारियों को नियंत्रित करना
वोलबाकिया विधि एक जैविक हस्तक्षेप है जो मच्छर जनित वायरल रोगों, विशेष रूप से डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और पीत ज्वर को नियंत्रित करने के लिए वोलबाकिया बैक्टीरिया का उपयोग करती है। जब वोलबाकिया को एडीज एजिप्टी मच्छरों में प्रवेश कराया जाता है (जो स्वाभाविक रूप से इसे नहीं रखते), तो यह मच्छर की इन वायरस को मनुष्यों में संचारित करने की क्षमता को कम कर देता है। इसके अतिरिक्त, वोलबाकिया मातृ संचरण के माध्यम से मच्छर आबादी में फैलता है, जिससे यह एक आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल रोग नियंत्रण दृष्टिकोण बन जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वेक्टर नियंत्रण के लिए वोलबाकिया विधि
- वोलबाकिया क्या है: एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला जीवाणु जो लगभग 60% कीट प्रजातियों में पाया जाता है, लेकिन एडीज एजिप्टी या एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों में नहीं।
- तंत्र: जब एडीज मच्छरों में प्रवेश कराया जाता है, तो वोलबाकिया वायरस प्रतिकृति में हस्तक्षेप करता है, डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और पीत ज्वर वायरस के लिए वेक्टर क्षमता को कम करता है।
- आत्मनिर्भर: वोलबाकिया मातृ रूप से विरासत में मिलता है; संक्रमित मादाएं अपनी संतानों को बैक्टीरिया पारित करती हैं, जिससे मच्छर आबादी में इसकी निरंतरता सुनिश्चित होती है।
- साइटोप्लाज्मिक असंगति: असंक्रमित मादाओं द्वारा वोलबाकिया-संक्रमित नरों के साथ संभोग से उत्पादित अंडे नहीं फूटते, जिससे वोलबाकिया-वाहक मच्छरों को प्रजनन लाभ मिलता है।
- कार्यान्वयन: ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, ब्राजील, कोलंबिया और भारत (पुणे और दिल्ली में पायलट परियोजनाएं) जैसे देशों में विश्व मच्छर कार्यक्रम द्वारा सफलतापूर्वक तैनात किया गया।
- लाभ: मनुष्यों और पर्यावरण के लिए सुरक्षित, लंबी अवधि में लागत प्रभावी, आनुवंशिक संशोधन शामिल नहीं, और एक साथ कई बीमारियों को लक्षित करता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन मानव शरीर में B कोशिकाओं और T कोशिकाओं की भूमिका का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — वे शरीर को रोगजनकों द्वारा होने वाली बीमारियों से बचाते हैं।
B कोशिकाएँ और T कोशिकाएँ दोनों लिम्फोसाइट हैं और अनुकूली प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रमुख घटक हैं जो विशेष रूप से शरीर को वायरस, बैक्टीरिया, कवक और परजीवी जैसे रोगजनकों से बचाते हैं। B कोशिकाएँ एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं जो रोगजनकों पर विशिष्ट एंटीजन को पहचानती और निष्क्रिय करती हैं, जबकि T कोशिकाएँ या तो संक्रमित कोशिकाओं को सीधे मारती हैं (साइटोटॉक्सिक T कोशिकाएँ) या प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का समन्वय करने में मदद करती हैं (सहायक T कोशिकाएँ)।
❌ विकल्प 1 – गलत: हालांकि प्रतिरक्षा कोशिकाएँ एलर्जेन के प्रति प्रतिक्रिया कर सकती हैं, B और T कोशिकाओं की प्राथमिक भूमिका एलर्जेन सुरक्षा नहीं बल्कि रोगजनक रक्षा है।
❌ विकल्प 2 – गलत: दर्द और सूजन को कम करना B और T कोशिकाओं का प्राथमिक कार्य नहीं है; वे प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में शामिल होते हैं।
❌ विकल्प 3 – गलत: B और T कोशिकाएँ प्रतिरक्षासक्रिय हैं, प्रतिरक्षादमनकारी नहीं; वे प्रतिरक्षा कार्य को दबाने के बजाय बढ़ाते हैं।
✅ विकल्प 4 – सही: यह रोगजनक रोगों के विरुद्ध अनुकूली प्रतिरक्षा में B और T कोशिकाओं की प्राथमिक भूमिका का सटीक वर्णन करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: B कोशिकाएँ और T कोशिकाएँ
| विशेषता | B कोशिकाएँ (B लिम्फोसाइट) | T कोशिकाएँ (T लिम्फोसाइट) |
|---|---|---|
| परिपक्वता स्थल | अस्थि मज्जा | थाइमस ग्रंथि |
| प्राथमिक कार्य | एंटीबॉडी का उत्पादन (ह्यूमरल प्रतिरक्षा) | कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा |
| प्रकार | प्लाज़्मा कोशिकाएँ, स्मृति B कोशिकाएँ | सहायक T कोशिकाएँ (CD4+), साइटोटॉक्सिक T कोशिकाएँ (CD8+), नियामक T कोशिकाएँ, स्मृति T कोशिकाएँ |
| तंत्र | एंटीजन को पहचानना और विशिष्ट एंटीबॉडी स्रावित करना | संक्रमित कोशिकाओं को सीधे मारना या प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करना |
| प्रतिक्रिया प्रकार | ह्यूमरल/एंटीबॉडी-मध्यस्थ प्रतिरक्षा | कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा |
| स्मृति | स्मृति B कोशिकाएँ दीर्घकालिक प्रतिरक्षा प्रदान करती हैं | स्मृति T कोशिकाएँ पुनः संपर्क पर तेज़ प्रतिक्रिया सक्षम करती हैं |
COVID-19 महामारी को रोकने के लिए निर्मित टीकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने mRNA प्लेटफॉर्म का उपयोग करके कोविशील्ड नामक COVID-19 वैक्सीन का उत्पादन किया।
- स्पुतनिक V वैक्सीन वेक्टर-आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करके निर्मित की जाती है।
- कोवैक्सिन एक निष्क्रिय रोगजनक-आधारित वैक्सीन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
यह प्रश्न भारत में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न COVID-19 वैक्सीन प्लेटफॉर्म के बारे में ज्ञान की परीक्षा करता है। कथन 1 गलत है क्योंकि कोविशील्ड एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है (चिंपैंजी एडेनोवायरस का उपयोग करते हुए), mRNA वैक्सीन नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि वे क्रमशः स्पुतनिक V और कोवैक्सिन के लिए उपयोग किए गए प्लेटफॉर्म का सटीक वर्णन करते हैं।
❌ कथन 1 – गलत: कोविशील्ड चिंपैंजी एडेनोवायरस (ChAdOx1) का उपयोग करने वाली एक वायरल वेक्टर वैक्सीन है, mRNA प्लेटफॉर्म वैक्सीन नहीं।
✅ कथन 2 – सही: स्पुतनिक V दो अलग-अलग मानव एडेनोवायरस वेक्टर (rAd26 और rAd5) के साथ वेक्टर-आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग दो-खुराक योजना में करती है।
✅ कथन 3 – सही: कोवैक्सिन, भारत बायोटेक द्वारा विकसित, एक निष्क्रिय रोगजनक-आधारित वैक्सीन है जो संपूर्ण-विरियन निष्क्रिय वेरो सेल प्लेटफॉर्म का उपयोग करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: COVID-19 वैक्सीन प्लेटफॉर्म
| वैक्सीन का नाम | निर्माता | प्लेटफॉर्म प्रकार | मुख्य विशेषताएं |
|---|---|---|---|
| कोविशील्ड | सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) | वायरल वेक्टर | स्पाइक प्रोटीन जीन को वितरित करने के लिए चिंपैंजी एडेनोवायरस (ChAdOx1) का उपयोग करता है |
| स्पुतनिक V | गामालेया इंस्टीट्यूट (रूस) | वायरल वेक्टर | दो अलग-अलग मानव एडेनोवायरस वेक्टर (rAd26 और rAd5) का उपयोग करता है |
| कोवैक्सिन | भारत बायोटेक | निष्क्रिय रोगजनक | सहायक (Algel-IMDG) के साथ संपूर्ण-विरियन निष्क्रिय वैक्सीन |
| कॉर्बेवैक्स | बायोलॉजिकल ई | प्रोटीन सबयूनिट | रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन (RBD) प्रोटीन का उपयोग करता है |
| फाइजर-बायोएनटेक | फाइजर | mRNA | कोशिकाओं में स्पाइक प्रोटीन उत्पन्न करने के लिए mRNA का उपयोग करता है |
| मॉडर्ना | मॉडर्ना | mRNA | फाइजर के समान mRNA-आधारित प्लेटफॉर्म |
'रीकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन' के संबंध में हाल के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इन टीकों के विकास में आनुवंशिक अभियांत्रिकी (जेनेटिक इंजीनियरिंग) लागू की जाती है।
- जीवाणु और विषाणु को वाहक (वेक्टर) के रूप में उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
रीकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन आनुवंशिक अभियांत्रिकी का उपयोग करके रोगजनक जीन को हानिरहित वाहक जीवों (वेक्टर) में डालते हैं, जो फिर इन जीनों को मानव कोशिकाओं में पहुँचाते हैं ताकि प्रतिजन (एंटीजन) उत्पन्न हो और प्रतिरक्षा उत्पन्न हो। विषाणु (जैसे कोविशील्ड में एडेनोवायरस) और जीवाणु (जैसे क्षीण साल्मोनेला या BCG) दोनों इन टीकों में वेक्टर के रूप में काम कर सकते हैं।
✅ कथन 1 – सही: आनुवंशिक अभियांत्रिकी रीकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन के विकास के लिए आवश्यक है, जिसमें रोगजनक प्रतिजन जीन को वेक्टर की आनुवंशिक सामग्री में डाला जाता है।
✅ कथन 2 – सही: प्रतिजन पहुँचाने के लिए जीवाणु (जैसे साल्मोनेला, BCG) और विषाणु (जैसे एडेनोवायरस, VSV) दोनों को वेक्टर के रूप में उपयोग किया जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: रीकॉम्बिनेंट वेक्टर वैक्सीन
- प्रौद्योगिकी: रोगजनक प्रतिजन को कूटबद्ध करने वाले जीनों को हानिरहित विषाणु या जीवाणु वेक्टर में डालने के लिए आनुवंशिक अभियांत्रिकी का उपयोग करती है
- क्रियाविधि: वेक्टर आनुवंशिक सामग्री को मेजबान कोशिकाओं में पहुँचाते हैं, जो फिर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने वाले प्रतिजन उत्पन्न करते हैं
- विषाणु वेक्टर: एडेनोवायरस (कोविशील्ड/स्पुतनिक V), वेसिकुलर स्टोमैटाइटिस वायरस (इबोला वैक्सीन - एर्वेबो), संशोधित वैक्सीनिया एन्कारा (MVA)
- जीवाणु वेक्टर: क्षीण साल्मोनेला टाइफीम्यूरियम, माइकोबैक्टीरियम बोविस (BCG), लिस्टेरिया मोनोसाइटोजेन्स उपभेद
- लाभ: मजबूत कोशिकीय और ह्यूमरल प्रतिरक्षा, कोई जीवित रोगजनक उपयोग नहीं, स्केलेबल उत्पादन
- उदाहरण: COVID-19 वैक्सीन (एस्ट्राजेनेका/कोविशील्ड, J&J, स्पुतनिक V), इबोला वैक्सीन (एर्वेबो), प्रायोगिक TB और मलेरिया वैक्सीन
'ACE2' शब्द किस संदर्भ में चर्चा में है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — विषाणुजनित रोगों का प्रसार
ACE2 (एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम 2) मानव कोशिका सतहों पर पाया जाने वाला एक प्रोटीन रिसेप्टर है जो COVID-19 महामारी के दौरान व्यापक रूप से चर्चा में आया। SARS-CoV-2 वायरस मानव कोशिकाओं में प्रवेश के लिए ACE2 का उपयोग अपने प्राथमिक प्रवेश बिंदु के रूप में करता है, अपने स्पाइक प्रोटीन के माध्यम से इस रिसेप्टर से जुड़कर फेफड़ों, हृदय, गुर्दे और अन्य अंगों में कोशिकाओं को संक्रमित करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ACE2 रिसेप्टर
- पूर्ण रूप: एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम 2
- सामान्य कार्य: ACE2 एक एंजाइम है जो एंजियोटेंसिन II को एंजियोटेंसिन (1-7) में परिवर्तित करके रक्तचाप और हृदय संवहनी कार्य को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है
- स्थान: फेफड़ों (एल्वियोलर कोशिकाओं), हृदय, गुर्दे, आंतों और रक्त वाहिकाओं सहित कई अंगों में कोशिका सतहों पर पाया जाता है
- COVID-19 में भूमिका: कोशिकीय रिसेप्टर के रूप में कार्य करता है जिससे SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन कोशिकाओं में वायरल प्रवेश के लिए जुड़ता है
- अनुसंधान महत्व: वायरल प्रवेश को रोकने के लिए घुलनशील ACE2, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और लघु अणु अवरोधकों सहित चिकित्सीय हस्तक्षेपों का लक्ष्य
- पूर्व कनेक्शन: मूल SARS-CoV वायरस (2003) ने भी अपने रिसेप्टर के रूप में ACE2 का उपयोग किया था, जो इसे कोरोनावायरस संक्रमणों में एक ज्ञात कमजोरी बनाता है
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- एडेनोवायरस में एकल-रज्जुक DNA जीनोम होता है जबकि रेट्रोवायरस में द्विरज्जुक DNA जीनोम होता है।
- सामान्य जुकाम कभी-कभी एडेनोवायरस के कारण होता है जबकि AIDS एक रेट्रोवायरस के कारण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
कथन 1 गलत है क्योंकि एडेनोवायरस में द्विरज्जुक DNA जीनोम होता है, न कि एकल-रज्जुक DNA। रेट्रोवायरस में एकल-रज्जुक RNA जीनोम होता है (द्विरज्जुक DNA नहीं), जिसे वे रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज का उपयोग करके DNA में परिवर्तित करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि एडेनोवायरस सामान्य जुकाम का एक आम कारण है, और AIDS वास्तव में HIV के कारण होता है, जो एक रेट्रोवायरस है।
❌ कथन 1 – गलत: एडेनोवायरस में द्विरज्जुक DNA जीनोम होता है; रेट्रोवायरस में एकल-रज्जुक RNA जीनोम होता है, न कि द्विरज्जुक DNA।
✅ कथन 2 – सही: सामान्य जुकाम एडेनोवायरस के कारण हो सकता है, और AIDS, HIV के कारण होता है, जो एक रेट्रोवायरस है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वायरल जीनोम के प्रकार
| वायरस प्रकार | जीनोम संरचना | उदाहरण | मुख्य विशेषताएं |
|---|---|---|---|
| एडेनोवायरस | द्विरज्जुक DNA (dsDNA) | सामान्य जुकाम, नेत्रश्लेष्मला शोथ | आवरणहीन, बीस फलकी संरचना |
| रेट्रोवायरस | एकल-रज्जुक RNA (ssRNA) | HIV (AIDS), HTLV | RNA को DNA में बदलने के लिए रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज का उपयोग करते हैं |
| ऑर्थोमिक्सोवायरस | एकल-रज्जुक RNA (ssRNA) | इन्फ्लूएंजा वायरस | आवरणयुक्त, खंडित जीनोम |
| हर्पीसवायरस | द्विरज्जुक DNA (dsDNA) | हर्पीज सिम्प्लेक्स, वैरीसेला-जोस्टर | आवरणयुक्त, बड़ा जीनोम, सुप्तावस्था |
- DNA वायरस: आमतौर पर केन्द्रक में मेजबान कोशिका की मशीनरी का उपयोग करके प्रतिकृति बनाते हैं (अपवाद: पॉक्सवायरस कोशिकाद्रव्य में प्रतिकृति बनाते हैं)
- RNA वायरस: अधिकांश कोशिकाद्रव्य में प्रतिकृति बनाते हैं; अपना स्वयं का RNA पॉलीमरेज रखते हैं
- रेट्रोवायरस: रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइम रखने में अद्वितीय जो RNA टेम्पलेट से DNA संश्लेषित करता है
- सामान्य जुकाम के कारण: राइनोवायरस (सबसे आम), कोरोनावायरस, एडेनोवायरस, और अन्य
- HIV वर्गीकरण: रेट्रोविरिडे परिवार का लेंटीवायरस जीनस; CD4+ T कोशिकाओं को लक्षित करता है
भारत में न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन के उपयोग का क्या महत्व है?
- ये टीके निमोनिया के साथ-साथ मेनिनजाइटिस और सेप्सिस के विरुद्ध भी प्रभावी हैं।
- ड्रग-प्रतिरोधी जीवाणुओं के विरुद्ध प्रभावी न होने वाले प्रतिजैविकों पर निर्भरता को कम किया जा सकता है।
- इन टीकों का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और ये कोई एलर्जी प्रतिक्रिया उत्पन्न नहीं करते।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1 और 2
न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCVs) भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए द्वारा उत्पन्न कई गंभीर रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं और प्रतिजैविक प्रतिरोध से निपटने में सहायता करते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि कोई भी टीका पूर्णतः दुष्प्रभावों या एलर्जी प्रतिक्रियाओं से मुक्त नहीं होता।
✅ कथन 1 – सही: PCVs स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न निमोनिया, मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की झिल्लियों की सूजन), और सेप्सिस (रक्त संक्रमण) के विरुद्ध अत्यधिक प्रभावी हैं।
✅ कथन 2 – सही: PCVs न्यूमोकोकल संक्रमणों को रोककर प्रतिजैविकों पर निर्भरता कम करते हैं, जिससे प्रतिजैविक-प्रतिरोधी जीवाणु उपभेदों की बढ़ती समस्या का समाधान होता है।
❌ कथन 3 – गलत: सभी टीकों की तरह, PCVs हल्के दुष्प्रभाव (इंजेक्शन स्थल पर लालिमा, सूजन, दर्द) और दुर्लभ एलर्जी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकते हैं; कोई भी टीका पूर्णतः दुष्प्रभाव-मुक्त नहीं होता।
📝 संक्षिप्त नोट्स: न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (PCVs)
- कारक जीव: स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिए (न्यूमोकोकस) — 90 से अधिक सीरोटाइप्स वाला एक जीवाणु।
- रोकी जाने वाली बीमारियाँ: निमोनिया, मेनिनजाइटिस, सेप्सिस, ओटाइटिस मीडिया (कान का संक्रमण), और बैक्टेरीमिया।
- टीकों के प्रकार: PCV10 (10 सीरोटाइप्स से सुरक्षा) और PCV13 (13 सीरोटाइप्स से सुरक्षा)।
- भारत का टीकाकरण कार्यक्रम: PCV को 2017 में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में शामिल किया गया; 6, 10, और 14 सप्ताह की आयु में दिया जाता है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव: बाल मृत्यु दर में कमी, न्यूमोकोकल रोगों (5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण) की रोकथाम, और प्रतिजैविक उपयोग में कमी।
- प्रतिजैविक प्रतिरोध: PCVs संक्रमणों को रोककर और प्रतिजैविकों की आवश्यकता घटाकर ड्रग-प्रतिरोधी न्यूमोकोकल उपभेदों से निपटने में सहायता करते हैं।
- सामान्य दुष्प्रभाव: हल्की प्रतिक्रियाएं जैसे बुखार, चिड़चिड़ापन, इंजेक्शन स्थल पर प्रतिक्रियाएं; गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं दुर्लभ हैं लेकिन संभव हैं।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी के विपरीत, इसका कोई टीका नहीं है।
यह कथन गलत है क्योंकि हेपेटाइटिस बी के लिए 1982 से एक अत्यधिक प्रभावी टीका उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका मौजूद नहीं है। प्रश्न में पूछा गया है कि कौन सा कथन सही नहीं है।
✅ कथन 1 – सही: हेपेटाइटिस बी वायरस एचआईवी के समान मार्गों (रक्त संपर्क, यौन संपर्क, माँ से बच्चे में संचरण) से संचरित होता है।
❌ कथन 2 – गलत: हेपेटाइटिस बी का टीका है; हेपेटाइटिस सी का कोई टीका नहीं है।
✅ कथन 3 – सही: विश्व स्तर पर, हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण संयुक्त रूप से एचआईवी संक्रमणों से कहीं अधिक हैं (लगभग 325 मिलियन बनाम 38 मिलियन)।
✅ कथन 4 – सही: क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण यकृत को नुकसान पहुंचाने से पहले कई वर्षों तक स्पर्शोन्मुख रह सकते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: हेपेटाइटिस बी और सी
| विशेषता | हेपेटाइटिस बी | हेपेटाइटिस सी |
|---|---|---|
| टीका उपलब्ध | हाँ (1982 से) | नहीं |
| संचरण | रक्त, यौन संपर्क, माँ से बच्चे में | मुख्य रूप से रक्त-से-रक्त संपर्क |
| वैश्विक प्रसार | ~296 मिलियन क्रोनिक मामले | ~58 मिलियन क्रोनिक मामले |
| क्रोनिक संक्रमण दर | वयस्कों में 5-10% | 75-85% क्रोनिक संक्रमण विकसित करते हैं |
| लक्षण | अक्सर वर्षों तक स्पर्शोन्मुख | अक्सर वर्षों तक स्पर्शोन्मुख |
| उपचार | एंटीवायरल दवाएं (वायरस को दबाती हैं) | प्रत्यक्ष-अभिनय एंटीवायरल (ठीक कर सकते हैं) |
भारत में सूक्ष्मजीवी रोगजनकों में बहु-औषधि प्रतिरोध की घटना के निम्नलिखित में से कौन से कारण हैं?
- कुछ लोगों की आनुवंशिक प्रवृत्ति
- रोगों को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक्स की गलत खुराक लेना
- पशुधन खेती में एंटीबायोटिक्स का उपयोग
- कुछ लोगों में एकाधिक जीर्ण रोग
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
सूक्ष्मजीवी रोगजनकों में बहु-औषधि प्रतिरोध (MDR) मुख्य रूप से एंटीबायोटिक के अनुचित उपयोग और एंटीबायोटिक्स के पर्यावरणीय जोखिम से उत्पन्न होता है। गलत खुराक और अपूर्ण उपचार प्रतिरोधी उपभेदों को जीवित रहने और गुणा करने की अनुमति देते हैं, जबकि पशुधन खेती में एंटीबायोटिक्स का व्यापक उपयोग प्रतिरोधी बैक्टीरिया के लिए चयन दबाव उत्पन्न करता है जो खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मनुष्यों तक फैल सकते हैं।
❌ कथन 1 – गलत: आनुवंशिक प्रवृत्ति संक्रमण के प्रति व्यक्तिगत संवेदनशीलता को प्रभावित करती है लेकिन रोगजनकों में बहु-औषधि प्रतिरोध का कारण नहीं बनती; प्रतिरोध सूक्ष्मजीवों में विकसित होता है, मनुष्यों में नहीं।
✅ कथन 2 – सही: गलत खुराक लेना, खुराक छोड़ना, या एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा न करना आंशिक रूप से प्रतिरोधी बैक्टीरिया को जीवित रहने और प्राकृतिक चयन के माध्यम से पूर्ण प्रतिरोध विकसित करने की अनुमति देता है।
✅ कथन 3 – सही: पशुओं में वृद्धि संवर्धन और रोग निवारण के लिए एंटीबायोटिक्स का नियमित उपयोग प्रतिरोधी बैक्टीरिया उत्पन्न करता है जो भोजन, प्रत्यक्ष संपर्क, या पर्यावरणीय संदूषण के माध्यम से मनुष्यों तक स्थानांतरित हो सकते हैं।
❌ कथन 4 – गलत: यद्यपि जीर्ण रोग संक्रमण की आवृत्ति बढ़ा सकते हैं, वे सीधे सूक्ष्मजीवी रोगजनकों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध का कारण नहीं बनते; प्रतिरोध एक सूक्ष्मजीवीय अनुकूलन है, रोगी की विशेषता नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR)
- परिभाषा: AMR तब होता है जब सूक्ष्मजीव उन रोगाणुरोधी दवाओं के संपर्क में जीवित रहने के लिए तंत्र विकसित करते हैं जो सामान्य रूप से उन्हें मार देंगे या उनकी वृद्धि को रोक देंगे।
- भारत में मुख्य कारण: एंटीबायोटिक्स का अतार्किक उपयोग (स्व-दवा, अपूर्ण कोर्स), बिना नुस्खे के काउंटर पर उपलब्धता, कृषि और जलीय कृषि में उपयोग, स्वास्थ्य सेवा सेटिंग्स में खराब संक्रमण नियंत्रण।
- प्रतिरोध के तंत्र: दवाओं का एंजाइमी विघटन (जैसे, बीटा-लैक्टामेज), दवा लक्ष्यों का परिवर्तन, दवा पारगम्यता में कमी, एफ्लक्स पंप जो एंटीबायोटिक्स को बाहर निकालते हैं।
- कृषि संबंध: पशुधन में वृद्धि संवर्धक के रूप में उपयोग किए जाने वाले एंटीबायोटिक्स प्रतिरोधी बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं; ये क्षैतिज जीन स्थानांतरण के माध्यम से मानव रोगजनकों को प्रतिरोध जीन स्थानांतरित कर सकते हैं।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव: सामान्य संक्रमणों का इलाज कठिन बनाता है, स्वास्थ्य सेवा लागत बढ़ाता है, अस्पताल में रहने की अवधि बढ़ाता है, मृत्यु दर बढ़ाता है।
- सरकारी पहल: AMR पर राष्ट्रीय कार्य योजना (2017), जिम्मेदार एंटीबायोटिक उपयोग के लिए रेड लाइन अभियान, एंटीबायोटिक बिक्री पर नियम, AMR निगरानी नेटवर्क।
- WHO प्राथमिकता: शीर्ष 10 वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में से एक के रूप में सूचीबद्ध; मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरणीय क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है (वन हेल्थ दृष्टिकोण)।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में, जीका वायरस रोग उसी मच्छर द्वारा संचरित होता है जो डेंगू संचरित करता है।
- जीका वायरस रोग का यौन संचरण संभव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
✅ कथन 1 – सही: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जीका वायरस मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी मच्छर द्वारा संचरित होता है। यह वही मच्छर प्रजाति है जो डेंगू, चिकनगुनिया और पीत ज्वर संचरित करती है। जब यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है तो संक्रमित हो जाता है और फिर बाद में काटने के माध्यम से अन्य लोगों को वायरस संचरित कर सकता है।
✅ कथन 2 – सही: जीका वायरस का यौन संचरण अच्छी तरह से प्रलेखित है और संभव है। यह वायरस योनि, गुदा और मुख मैथुन के माध्यम से संचरित हो सकता है। यह वीर्य में कई महीनों तक बना रह सकता है, जिससे मच्छर संचरण के बिना भी यौन संचरण संक्रमण का एक महत्वपूर्ण मार्ग बन जाता है। गर्भवती महिलाएं विशेष रूप से जोखिम में हैं क्योंकि जीका गंभीर जन्म दोष पैदा कर सकता है।
इसलिए, दोनों कथन सही हैं।
निम्नलिखित में से किसका हाल ही में इबोला वायरस के प्रकोप के लिए अक्सर समाचारों में उल्लेख किया गया था?
Detailed Explanation:
2014–2016 इबोला प्रकोप इतिहास में इबोला वायरस रोग (EVD) की सबसे व्यापक महामारी थी, जो मुख्य रूप से पश्चिम अफ्रीकी देशों को प्रभावित करती थी।
यह प्रकोप दिसंबर 2013 में गिनी में शुरू हुआ और तेजी से पड़ोसी देशों लाइबेरिया और सिएरा लियोन में फैल गया, जिससे 11,000 से अधिक मौतें हुईं और बड़े पैमाने पर सामाजिक-आर्थिक व्यवधान उत्पन्न हुआ। ये तीनों देश अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार थे और वैश्विक समाचार कवरेज में अक्सर उल्लेखित थे।
H1N1 वायरस कभी-कभी समाचारों में निम्नलिखित में से किस एक बीमारी के संदर्भ में उल्लिखित होता है?
Detailed Explanation:
H1N1 वायरस, इन्फ्लूएंजा A वायरस का एक उपप्रकार है जो स्वाइन फ्लू का कारण बनता है, जिसे WHO ने जून 2009 में महामारी घोषित किया था।
इस वायरस में हीमाग्लूटिनिन (H) और न्यूरामिनिडेज (N) नामक ग्लाइकोप्रोटीन होते हैं, इसलिए इसे H1N1 नाम दिया गया है, और यह 1918 के स्पेनिश फ्लू प्रकोप के लिए भी जिम्मेदार था।
निम्नलिखित बीमारियों पर विचार कीजिये
- डिप्थीरिया
- चिकनपॉक्स
- चेचक
उपर्युक्त में से कौन सी बीमारी/बीमारियाँ भारत में उन्मूलित हो चुकी है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: डिप्थीरिया का उन्मूलन नहीं हुआ है; भारत अभी भी पेंटावेलेंट वैक्सीन (2011–12 में शुरू) देता है जिसमें DPT (डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टिटनेस) घटक शामिल है, जो बीमारी के प्रचलन को दर्शाता है।
❌ कथन 2 – गलत: चिकनपॉक्स (वैरिसेला) भारत में स्थानिक है; वैरिसेला वैक्सीन उपलब्ध है लेकिन सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) का हिस्सा नहीं है, और देश भर में नियमित रूप से मामले होते हैं।
✅ कथन 3 – सही: चेचक को भारत में 1975 में उन्मूलित घोषित किया गया (आखिरी मामला 1975 में), और WHO ने 1980 में वैश्विक उन्मूलन प्रमाणित किया; भारत ने विश्वव्यापी उन्मूलन अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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