UPSC CSE Prelims
भारतीय राजव्यवस्था Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for भारतीय राजव्यवस्था in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: 7वें संविधान संशोधन (1956) द्वारा एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिए एक साथ राज्यपाल नियुक्त करने की अनुमति दी गई है।
❌ कथन 2 – गलत: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा (भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद) की जाती है, राज्यपाल द्वारा नहीं।
✅ कथन 3 – सही: संविधान में राज्यपाल को हटाने की कोई विशिष्ट प्रक्रिया निर्धारित नहीं है; अनुच्छेद 156 में कहा गया है कि राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
❌ कथन 4 – गलत: विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, पुदुचेरी) में मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, उपराज्यपाल द्वारा नहीं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
- भारत के संविधान में संशोधन केवल लोक सभा में एक विधेयक की शुरुआत करके किया जा सकता है।
- यदि ऐसा संशोधन संविधान के संघीय चरित्र में परिवर्तन करना चाहता है, तो संशोधन को भारत के सभी राज्यों के विधानमंडल द्वारा भी अनुसमर्थित किए जाने की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: संवैधानिक संशोधन विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोक सभा या राज्य सभा) में शुरू किया जा सकता है, केवल लोक सभा में नहीं।
❌ कथन 2 – गलत: संघीय चरित्र को प्रभावित करने वाले संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थन आवश्यक है, सभी राज्यों द्वारा नहीं।
यदि राज्यसभा द्वारा धन विधेयक में पर्याप्त संशोधन किए जाएं तो क्या होगा?
Detailed Explanation:
संविधान के अनुच्छेद 109 में संसद में धन विधेयक की प्रक्रिया का प्रावधान है।
जब राज्यसभा को धन विधेयक प्राप्त होता है, तो वह केवल 14 दिनों के भीतर संशोधन की सिफारिश कर सकती है लेकिन इसे अस्वीकार या पर्याप्त रूप से संशोधित करने की शक्ति नहीं रखती।
लोकसभा को राज्यसभा द्वारा की गई किसी भी सिफारिश को स्वीकार या अस्वीकार करने का पूर्ण विवेकाधिकार है।
यदि लोकसभा सिफारिशों को अस्वीकार करती है, तो विधेयक अपने मूल रूप में दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।
धन विधेयकों के मामले में संयुक्त बैठक या विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेजने का कोई प्रावधान नहीं है।
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निम्नलिखित में से कौन सी संस्था/संस्थाएं संविधान में उल्लिखित नहीं है/हैं?
- राष्ट्रीय विकास परिषद
- योजना आयोग
- क्षेत्रीय परिषदें
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) की स्थापना अगस्त 1952 में एक कार्यकारी संकल्प द्वारा की गई थी और यह संविधान में उल्लिखित नहीं है।
✅ कथन 2 – सही: योजना आयोग की स्थापना मार्च 1950 में कार्यकारी संकल्प द्वारा की गई थी; यह एक गैर-संवैधानिक, गैर-सांविधिक निकाय था (2015 में नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित)।
✅ कथन 3 – सही: क्षेत्रीय परिषदें राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत बनाई गई सांविधिक संस्थाएं हैं और संविधान में उल्लिखित नहीं हैं।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसका उद्देश्य समान अवसर के आधार पर समाज के कमजोर वर्गों को निःशुल्क और सक्षम विधिक सेवाएं प्रदान करना है।
- यह देश भर में विधिक कार्यक्रमों और योजनाओं को लागू करने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के लिए दिशानिर्देश जारी करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: NALSA का प्राथमिक उद्देश्य महिलाओं, बच्चों, SC/ST और दिव्यांगजनों सहित कमजोर वर्गों को संविधान के अनुच्छेद 39A द्वारा अनिवार्य समान अवसर के आधार पर निःशुल्क और सक्षम विधिक सेवाएं प्रदान करना है।
✅ कथन 2 – सही: NALSA एक शीर्ष निकाय है जो विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत देश भर में विधिक सहायता कार्यक्रमों और योजनाओं को समान रूप से लागू करने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों (SLSAs) के लिए दिशानिर्देश, सिद्धांत और नीतियां जारी करता है।
लोक सभा अध्यक्ष के कार्यालय के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता/करती है।
- उसे अपने निर्वाचन के समय सदन का सदस्य होना आवश्यक नहीं है, लेकिन उसे अपने निर्वाचन की तिथि से छह महीने के भीतर सदन का सदस्य बनना होता है।
- यदि वह त्यागपत्र देना चाहता/चाहती है, तो उसके त्यागपत्र का पत्र उपाध्यक्ष को संबोधित होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: अध्यक्ष का पद राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत नहीं होता। वह लोक सभा द्वारा निर्वाचित होता/होती है और केवल सदन के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा हटाया जा सकता है। अध्यक्ष लोक सभा के विघटन के बाद भी नई लोक सभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक पद पर बना/बनी रहता है।
❌ कथन 2 – गलत: अनुच्छेद 93 के अनुसार, अध्यक्ष को निर्वाचन के समय लोक सभा का सदस्य होना आवश्यक है। छह महीने की सदस्यता का नियम मंत्रियों (अनुच्छेद 75) पर लागू होता है, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पर नहीं।
✅ कथन 3 – सही: अनुच्छेद 94(ख) के अनुसार, अध्यक्ष अपने हस्ताक्षर से उपाध्यक्ष को संबोधित पत्र लिखकर त्यागपत्र देता/देती है। इसी प्रकार, उपाध्यक्ष का त्यागपत्र अध्यक्ष को संबोधित होता है।
निम्नलिखित में से कौन से उच्चतम न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र में शामिल हैं?
- भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद
- संसद के किसी भी सदन या राज्य विधानमंडल के चुनाव से संबंधित विवाद
- भारत सरकार और एक केंद्र शासित प्रदेश के बीच विवाद
- दो या अधिक राज्यों के बीच विवाद
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 131 उच्चतम न्यायालय को भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच विवादों पर मूल अधिकार क्षेत्र प्रदान करता है।
❌ कथन 2 – गलत: संसद या राज्य विधानमंडल के चुनाव विवाद उच्च न्यायालयों और चुनाव न्यायाधिकरणों द्वारा निपटाए जाते हैं, उच्चतम न्यायालय के मूल अधिकार क्षेत्र में नहीं।
❌ कथन 3 – गलत: केंद्र शासित प्रदेश अनुच्छेद 131 में शामिल नहीं हैं; मूल अधिकार क्षेत्र केवल राज्यों से संबंधित विवादों को कवर करता है।
✅ कथन 4 – सही: अनुच्छेद 131 दो या अधिक राज्यों के बीच विवादों के लिए मूल अधिकार क्षेत्र प्रदान करता है।
भारत के संविधान द्वारा राज्यसभा को निम्नलिखित में से कौन-सी विशेष शक्तियाँ प्रदान की गई हैं?
Detailed Explanation:
✅ विकल्प 2 – सही: अनुच्छेद 249 राज्यसभा को (उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से) प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रीय हित में राज्य सूची के विषयों पर संसद को कानून बनाने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 312 राज्यसभा को (2/3 बहुमत से) प्रस्ताव पारित कर संसद को अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन का अधिकार देता है।
❌ विकल्प 1 – गलत: अनुच्छेद 3 राज्यों की सीमाओं/नामों में परिवर्तन की शक्ति संसद (दोनों सदनों) को देता है, राज्यसभा की विशेष शक्ति नहीं।
❌ विकल्प 3 – गलत: राष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया में संशोधन के लिए दोनों सदनों द्वारा संवैधानिक संशोधन (अनुच्छेद 368) आवश्यक है; राष्ट्रपति की पेंशन अनुच्छेद 59(3) के तहत संसद (दोनों सदनों) द्वारा निर्धारित की जाती है।
❌ विकल्प 4 – गलत: अनुच्छेद 324(2) के तहत चुनाव आयुक्तों की संख्या निर्धारित करने की शक्ति राष्ट्रपति को है (राज्यसभा को नहीं); उनकी सेवा शर्तें संसद (दोनों सदनों) द्वारा विनियमित की जाती हैं।
भारत के संविधान में निहित राज्य की नीति के निदेशक तत्वों के अंतर्गत निम्नलिखित प्रावधानों पर विचार कीजिए :
- भारत के नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करना
- ग्राम पंचायतों का संगठन करना
- ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना
- सभी श्रमिकों के लिए उचित अवकाश और सांस्कृतिक अवसर सुनिश्चित करना
उपर्युक्त में से कौन से गांधीवादी सिद्धांत हैं जो राज्य की नीति के निदेशक तत्वों में प्रतिबिंबित होते हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता) एक उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांत है, गांधीवादी सिद्धांत नहीं।
✅ कथन 2 – सही: अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का संगठन) एक गांधीवादी सिद्धांत है जो गांधी जी के ग्राम स्तर पर स्वशासन के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
✅ कथन 3 – सही: अनुच्छेद 43 (ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना) एक गांधीवादी सिद्धांत है जो ग्रामीण आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर देता है।
❌ कथन 4 – गलत: अनुच्छेद 43 (श्रमिकों के लिए अवकाश और सांस्कृतिक अवसर सुनिश्चित करना) एक समाजवादी सिद्धांत है, गांधीवादी सिद्धांत नहीं।
भारत के प्रधानमंत्री को, उनकी नियुक्ति के समय:
Detailed Explanation:
अनुच्छेद 75(5) के अनुसार, यदि कोई मंत्री लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह मंत्री नहीं रहेगा।
चूँकि प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख है, यह प्रावधान लागू होता है—इसका अर्थ है कि PM को नियुक्ति के समय सदस्य होना आवश्यक नहीं है, लेकिन छह महीने के भीतर लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनना आवश्यक है, अन्यथा वह पद से हट जाएगा।
भारतीय संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का वितरण निम्नलिखित में प्रदान की गई योजना पर आधारित है -
Detailed Explanation:
भारत सरकार अधिनियम, 1935 ने शक्तियों का त्रि-स्तरीय विभाजन - संघीय सूची, प्रांतीय सूची और समवर्ती सूची में किया, जिसने भारतीय संविधान (सातवीं अनुसूची) में वर्तमान संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची को प्रेरित किया।
केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के वितरण के साथ यह संघीय ढांचा 1935 अधिनियम से उधार ली गई एक नवीन विशेषता थी, जिसने इसे भारत के संघीय शासन ढांचे का खाका बनाया।
परिसीमन आयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी विधि न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
- जब परिसीमन आयोग के आदेश लोक सभा या राज्य विधान सभा के समक्ष रखे जाते हैं, तो वे आदेशों में कोई संशोधन प्रभावित नहीं कर सकते।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: संविधान के अनुच्छेद 329(a) और परिसीमन आयोग अधिनियम के तहत, परिसीमन आयोग के आदेशों को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। इनमें विधि का बल होता है और ये अंतिम होते हैं ताकि चुनावी प्रक्रिया में न्यायिक विलंब न हो।
✅ कथन 2 – सही: जब आदेश लोक सभा या राज्य विधान सभा के समक्ष रखे जाते हैं, तो ये निकाय उनमें संशोधन नहीं कर सकते। आदेश केवल सूचना के लिए रखे जाते हैं, जो परिसीमन प्रक्रिया की स्वतंत्रता और अंतिमता सुनिश्चित करते हैं, राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त।
भारत के उच्चतम न्यायालय की स्वायत्तता की रक्षा के लिए क्या प्रावधान है?
- उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय, भारत के राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करना होता है।
- उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा ही हटाया जा सकता है।
- न्यायाधीशों का वेतन भारत की संचित निधि पर भारित होता है जिस पर विधायिका को मतदान नहीं करना होता है।
- भारत के उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की सभी नियुक्तियाँ सरकार द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद ही की जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 124(2) यह अनिवार्य करता है कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय राष्ट्रपति को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श करना होगा, जिससे नियुक्तियों में न्यायपालिका की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
❌ कथन 2 – गलत: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को केवल राष्ट्रपति द्वारा महाभियोग के माध्यम से हटाया जा सकता है, संसद के विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई) के बाद, मुख्य न्यायाधीश द्वारा नहीं।
✅ कथन 3 – सही: अनुच्छेद 146(3) यह प्रावधान करता है कि न्यायाधीशों का वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं, जिसके लिए विधायी मतदान की आवश्यकता नहीं होती, जिससे संसद से वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
❌ कथन 4 – गलत: अनुच्छेद 146(2) कहता है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियाँ मुख्य न्यायाधीश या मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त अधिकारियों द्वारा की जाती हैं, सरकार द्वारा नहीं।
भारतीय संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्यों में निम्नलिखित में से कौन सा/से शामिल है/हैं?
- हमारी समग्र संस्कृति की समृद्ध विरासत को संरक्षित करना
- कमजोर वर्गों को सामाजिक अन्याय से बचाना
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा की भावना विकसित करना
- व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की ओर प्रयास करना
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 51A(f) में समग्र संस्कृति की समृद्ध विरासत को संरक्षित करना मूल कर्तव्य के रूप में अनिवार्य है।
❌ कथन 2 – गलत: कमजोर वर्गों को सामाजिक अन्याय से बचाना अनुच्छेद 46 के तहत राज्य के नीति निदेशक तत्व है, मूल कर्तव्य नहीं।
✅ कथन 3 – सही: अनुच्छेद 51A(h) में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और जिज्ञासा तथा सुधार की भावना विकसित करना आवश्यक है।
✅ कथन 4 – सही: अनुच्छेद 51A(j) व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधि के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की ओर प्रयास करना अनिवार्य करता है।
भारत के संविधान के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति का यह कर्तव्य है कि वह संसद के समक्ष निम्नलिखित में से किसे प्रस्तुत कराए?
- संघ वित्त आयोग की सिफारिशें
- लोक लेखा समिति की रिपोर्ट
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट
- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की रिपोर्ट
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 281 राष्ट्रपति को वित्त आयोग की सिफारिशों को संसद के समक्ष व्याख्यात्मक ज्ञापन के साथ रखने का आदेश देता है।
❌ कथन 2 – गलत: लोक लेखा समिति (PAC) एक संसदीय समिति है जो CAG रिपोर्ट की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट संसद को प्रस्तुत करती है; राष्ट्रपति PAC रिपोर्ट नहीं रखते।
✅ कथन 3 – सही: अनुच्छेद 151 राष्ट्रपति से संघ के लेखाओं से संबंधित CAG की रिपोर्टों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाने की अपेक्षा करता है।
✅ कथन 4 – सही: अनुच्छेद 338(5) राष्ट्रपति से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की वार्षिक रिपोर्ट को कार्रवाई ज्ञापन के साथ संसद के समक्ष रखने की अपेक्षा करता है।