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राज्यपाल Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारत के संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कुछ क्षेत्रों में राज्य का राज्यपाल अपने विवेक से कार्य करता है।
II. भारत के राष्ट्रपति किसी राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा अग्रेषित किए बिना अपने विचार के लिए आरक्षित कर सकते हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन I सही है
-
संविधान में कुछ ऐसे मामले बताए गए हैं जहाँ राज्यपाल अपने विवेक (Discretion) से कार्य कर सकता है।
-
अनुच्छेद 163(2) के अनुसार विवेकाधीन मामलों में राज्यपाल का निर्णय अंतिम माना जाता है।
-
उदाहरण: कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार हेतु सुरक्षित रखना, त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति आदि।
❌ कथन II गलत है
-
राष्ट्रपति किसी राज्य विधेयक को स्वयं (suo motu) अपने विचार के लिए सुरक्षित नहीं रख सकते।
-
अनुच्छेद 200 के तहत केवल राज्यपाल ही किसी विधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित कर सकता है।
-
इसलिए राष्ट्रपति की भूमिका तभी शुरू होती है जब राज्यपाल विधेयक भेजे।
अतः केवल कथन I सही है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ
| प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| अनुच्छेद 163 | विवेकाधीन शक्तियाँ |
| अनुच्छेद 200 | राष्ट्रपति के लिए विधेयक आरक्षित करना |
| त्रिशंकु विधानसभा | मुख्यमंत्री नियुक्ति में विवेक |
| राष्ट्रपति की भूमिका | राज्यपाल द्वारा भेजे गए विधेयक पर विचार |
त्वरित तथ्य:
राज्यपाल की कुछ शक्तियाँ विवेकाधीन (Discretionary) होती हैं, जबकि अधिकांश मामलों में वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है।
भारतीय राजनीति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. किसी राज्य का राज्यपाल अपने कार्यालय की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग और प्रदर्शन के लिए किसी भी अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं है।
II. राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी या जारी नहीं रखी जाएगी।
III. राज्य विधानमंडल के सदस्य सदन के भीतर कही गई किसी भी बात के संबंध में किसी भी अदालत में किसी भी कार्यवाही के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
✅ कथन I सही है: अनुच्छेद 361(1) के अनुसार राज्यपाल अपने पद के अधिकारों और कर्तव्यों के निर्वहन के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होता।
✅ कथन II सही है: अनुच्छेद 361(2) के अनुसार राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उसके विरुद्ध कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू या जारी नहीं की जा सकती।
✅ कथन III सही है: अनुच्छेद 194(2) राज्य विधानमंडल के सदस्यों को सदन के भीतर कही गई बातों या दिए गए मत के संबंध में न्यायालयी कार्यवाही से संरक्षण देता है।
अतः तीनों कथन सही हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संवैधानिक प्रतिरक्षा एवं विशेषाधिकार
| प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| अनुच्छेद 361(1) | राष्ट्रपति/राज्यपाल आधिकारिक कार्यों के लिए न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं |
| अनुच्छेद 361(2) | कार्यकाल में आपराधिक कार्यवाही नहीं |
| अनुच्छेद 361(3) | कार्यकाल में गिरफ्तारी या कारावास नहीं |
| अनुच्छेद 194(2) | राज्य विधायकों को भाषण एवं मतदान पर विशेषाधिकार |
| अनुच्छेद 105(2) | सांसदों के लिए समान विशेषाधिकार |
त्वरित तथ्य:
अनुच्छेद 361 के तहत मिलने वाली सुरक्षा स्थायी नहीं होती। पद छोड़ने के बाद आपराधिक कार्यवाही की जा सकती है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- किसी राज्य के राज्यपाल के विरुद्ध उसके पदावधि के दौरान किसी न्यायालय में कोई आपराधिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी।
- किसी राज्य के राज्यपाल की उपलब्धियाँ और भत्ते उसके पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
राज्य के राज्यपाल के लिए संवैधानिक प्रावधानों से संबंधित दोनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 361 राज्यपाल को उनके पदावधि के दौरान आपराधिक कार्यवाही से उन्मुक्ति प्रदान करता है, जबकि अनुच्छेद 158 यह सुनिश्चित करता है कि उनकी उपलब्धियाँ और भत्ते उनके पदावधि के दौरान कम नहीं किए जा सकते।
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 361 राज्यपाल को उनके पदावधि के दौरान किसी भी न्यायालय में आपराधिक कार्यवाही से उन्मुक्ति प्रदान करता है, हालांकि दो महीने के पूर्व नोटिस के साथ नागरिक कार्यवाही संस्थित की जा सकती है।
✅ कथन 2 – सही: अनुच्छेद 158 यह अनिवार्य करता है कि राज्यपाल की उपलब्धियाँ और भत्ते उनके पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएंगे, जिससे वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राज्यपाल के लिए संवैधानिक प्रावधान
| अनुच्छेद | प्रावधान | विवरण |
|---|---|---|
| अनुच्छेद 153 | राज्यों के राज्यपाल | प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। एक व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। |
| अनुच्छेद 154 | कार्यपालिका शक्ति | राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित है और इसका प्रयोग वह प्रत्यक्ष रूप से या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है। |
| अनुच्छेद 158 | पद की शर्तें | राज्यपाल संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं होगा। उपलब्धियाँ और भत्ते पदावधि के दौरान कम नहीं किए जा सकते। |
| अनुच्छेद 361 | उन्मुक्ति | राज्यपाल अपनी शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं है। पदावधि के दौरान आपराधिक कार्यवाही से उन्मुक्ति। 2 महीने के नोटिस के साथ नागरिक कार्यवाही की अनुमति। |
| अनुच्छेद 155 | नियुक्ति | राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुहर के तहत वारंट द्वारा की जाती है। |
| अनुच्छेद 156 | पदावधि | राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत 5 वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करता है, लेकिन उत्तराधिकारी के पदभार ग्रहण करने तक जारी रह सकता है। |
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राज्य के राज्यपाल को निम्नलिखित में से कौन सी विवेकाधीन शक्तियां दी गई हैं?
- राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए भारत के राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजना
- मंत्रियों की नियुक्ति करना
- राज्य विधानमंडल द्वारा पारित कुछ विधेयकों को भारत के राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखना
- राज्य सरकार का कार्य संचालन करने के लिए नियम बनाना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 356 के तहत, राज्यपाल को राष्ट्रपति को राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने की विवेकाधीन शक्ति है यदि राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो गया हो।
❌ कथन 2 – गलत: राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर मंत्रियों की नियुक्ति करता है (अनुच्छेद 164); यह विवेकाधीन शक्ति नहीं बल्कि संवैधानिक बाध्यता है।
✅ कथन 3 – सही: अनुच्छेद 200 के तहत, राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखने की विवेकाधीन शक्ति है, विशेषकर उच्च न्यायालय की शक्तियों या केंद्रीय कानूनों से विरोधाभासी विधेयक।
❌ कथन 4 – गलत: अनुच्छेद 166 के तहत, राज्य सरकार के कार्य संचालन के नियम राज्यपाल द्वारा मंत्रिपरिषद की सलाह पर बनाए जाते हैं, विवेकाधीन रूप से नहीं।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: 7वें संविधान संशोधन (1956) द्वारा एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिए एक साथ राज्यपाल नियुक्त करने की अनुमति दी गई है।
❌ कथन 2 – गलत: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा (भारत के मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद) की जाती है, राज्यपाल द्वारा नहीं।
✅ कथन 3 – सही: संविधान में राज्यपाल को हटाने की कोई विशिष्ट प्रक्रिया निर्धारित नहीं है; अनुच्छेद 156 में कहा गया है कि राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
❌ कथन 4 – गलत: विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, पुदुचेरी) में मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, उपराज्यपाल द्वारा नहीं।
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