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विधानसभा एवं विधान परिषद Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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भारत में किसी राज्य की विधान सभा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- राज्यपाल वर्ष के प्रथम सत्र के प्रारंभ में सदन के सदस्यों को परंपरागत अभिभाषण देता है।
- जब किसी राज्य विधानमंडल के पास किसी विशेष मामले पर नियम नहीं होता है, तो वह उस मामले पर लोक सभा के नियम का पालन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
भारत में राज्य की विधान सभा के संबंध में दोनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 176(1) प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र के प्रारंभ और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र के प्रारंभ में राज्यपाल के परंपरागत अभिभाषण को अनिवार्य करता है, जिसमें सरकार की नीतियों और विधायी एजेंडा की रूपरेखा प्रस्तुत की जाती है। इसके अतिरिक्त, राज्य विधानमंडल एक दीर्घकालिक परंपरा का पालन करते हैं जो औपनिवेशिक काल से चली आ रही है, जिसके अनुसार वे उन मामलों के लिए लोक सभा के नियमों को अपनाते हैं जिन पर उनके अपने विशिष्ट नियम नहीं हैं।
✅ कथन 1 – सही: संविधान के अनुच्छेद 176(1) में अनिवार्य है कि राज्यपाल प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र के प्रारंभ में और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र के प्रारंभ में राज्य विधानमंडल को संबोधित करेगा।
✅ कथन 2 – सही: जब किसी राज्य विधानमंडल के पास किसी विशेष मामले पर विशिष्ट नियम नहीं होता है, तो वह उस मामले पर लोक सभा के नियम का पालन करता है, जैसा कि औपनिवेशिक काल से स्थापित परंपरा के अनुसार है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राज्य विधानमंडल में राज्यपाल की भूमिका
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 176 राज्य विधानमंडल में राज्यपाल के अभिभाषण से संबंधित है, जो अनुच्छेद 87 के तहत राष्ट्रपति के अभिभाषण के समान है।
- अभिभाषण का समय: राज्यपाल प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र के प्रारंभ और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र के प्रारंभ में अभिभाषण देता है।
- सामग्री: अभिभाषण में सरकार की नीतियों, विधायी एजेंडा और वर्ष के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की जाती है।
- प्रक्रियात्मक नियम: राज्य विधानमंडल अनुच्छेद 208 के तहत अपनी प्रक्रिया के नियम बना सकते हैं, लेकिन विशिष्ट नियमों के अभाव में, वे लोक सभा की प्रक्रिया का पालन करते हैं।
- ऐतिहासिक परंपरा: लोक सभा के नियमों का पालन करने की प्रथा औपनिवेशिक काल से चली आ रही है जब प्रांतीय विधानमंडल इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल की प्रक्रियाओं का पालन करते थे।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत में किसी राज्य की विधान परिषद, उस विशेष राज्य की विधान सभा के आधे से अधिक आकार की हो सकती है।
- राज्य का राज्यपाल उस विशेष राज्य की विधान परिषद के सभापति को मनोनीत करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: अनुच्छेद 171(1) के अनुसार, विधान परिषद की संख्या विधान सभा की कुल सदस्यता के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती। न्यूनतम संख्या 40 सदस्य है।
❌ कथन 2 – गलत: विधान परिषद के सभापति और उप-सभापति का चुनाव परिषद के सदस्यों द्वारा स्वयं किया जाता है, राज्यपाल द्वारा मनोनीत नहीं किए जाते, जिससे विधायी स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
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