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मंत्रिपरिषद Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for मंत्रिपरिषद with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत का संविधान मंत्रियों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत करता है अर्थात् कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री, राज्य मंत्री और उप मंत्री।
- प्रधानमंत्री सहित केंद्र सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या लोक सभा में सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
यह प्रश्न मंत्रियों के वर्गीकरण और मंत्रिपरिषद के आकार पर संवैधानिक सीमाओं के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है।
❌ कथन 1 – गलत: भारत का संविधान मंत्रियों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत नहीं करता है। कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री, राज्य मंत्री और उप मंत्री में वर्गीकरण संसदीय परंपरा और व्यवहार पर आधारित है, संवैधानिक प्रावधानों पर नहीं। संविधान केवल 'मंत्रियों' और 'प्रधानमंत्री' का उल्लेख करता है, विशिष्ट श्रेणियों का निर्धारण नहीं करता।
✅ कथन 2 – सही: 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने अनुच्छेद 75(1A) सम्मिलित किया जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या लोक सभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मंत्रिपरिषद
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 74 और 75 मंत्रिपरिषद से संबंधित हैं |
| वर्गीकरण (परंपरा) | कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री, राज्य मंत्री, उप मंत्री (संवैधानिक नहीं) |
| आकार सीमा | लोक सभा की सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं (91वां संशोधन, 2003) |
| सामूहिक उत्तरदायित्व | मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति उत्तरदायी (अनुच्छेद 75(3)) |
| नियुक्ति | मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर (अनुच्छेद 75(1)) |
| अयोग्यता | एक अयोग्य सांसद को मंत्री नियुक्त नहीं किया जा सकता (91वां संशोधन) |
केंद्र सरकार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- N. गोपालस्वामी अय्यंगार समिति ने सुझाव दिया कि प्रशासनिक सुधार के विषय को आगे बढ़ाने और इसे बढ़ावा देने के लिए एक मंत्री और एक सचिव को विशेष रूप से नामित किया जाए।
- 1970 में, प्रशासनिक सुधार आयोग, 1966 की सिफारिश पर कार्मिक विभाग का गठन किया गया था, और इसे प्रधानमंत्री के प्रभार में रखा गया था।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
यह प्रश्न प्रशासनिक सुधार सिफारिशों और कार्मिक विभाग की स्थापना के बारे में ज्ञान की परीक्षा करता है। कथन 1 गलत तरीके से एक सिफारिश को N. गोपालस्वामी अय्यंगार समिति के साथ जोड़ता है जो वास्तव में प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग द्वारा की गई थी, जबकि कथन 2 सही ढंग से 1970 में प्रधानमंत्री के प्रभार में कार्मिक विभाग की स्थापना का वर्णन करता है।
❌ कथन 1 – गलत: प्रशासनिक सुधार के लिए विशेष रूप से एक मंत्री और सचिव को नामित करने की सिफारिश प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966) द्वारा की गई थी, न कि N. गोपालस्वामी अय्यंगार समिति (1949) द्वारा, जो केंद्र सरकार की मशीनरी के पुनर्गठन और O&M प्रभाग की स्थापना पर केंद्रित थी।
✅ कथन 2 – सही: कार्मिक विभाग की स्थापना वास्तव में 1970 में प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966) की सिफारिशों के आधार पर की गई थी और इसे मंत्रिमंडल सचिवालय के अधीन रखा गया था, जो प्रधानमंत्री के सीधे प्रभार में कार्य करता है; इसे बाद में 1985 में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में पुनर्गठित किया गया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रशासनिक सुधार और कार्मिक विभाग
| समिति/आयोग | वर्ष | मुख्य सिफारिशें/फोकस |
|---|---|---|
| N. गोपालस्वामी अय्यंगार समिति | 1949 | केंद्र सरकार की मशीनरी का पुनर्गठन; मंत्रालयों का समूहीकरण; संगठन और विधियां (O&M) प्रभाग की स्थापना |
| प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) | 1966 | प्रशासनिक सुधारों के लिए मंत्री और सचिव का पदनाम; कार्मिक विभाग की स्थापना (1970 में कार्यान्वित) |
| कार्मिक विभाग | 1970 | मंत्रिमंडल सचिवालय के अधीन स्थापित; प्रधानमंत्री के प्रभार में |
| कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय | 1985 | कार्मिक विभाग से पुनर्गठित; प्रधानमंत्री के प्रभार में जारी |
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- केंद्र में मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से संसद के प्रति उत्तरदायी होगी।
- केंद्रीय मंत्री भारत के राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेंगे।
- प्रधानमंत्री विधान के प्रस्तावों के बारे में राष्ट्रपति को सूचित करेंगे।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से केवल लोक सभा के प्रति उत्तरदायी है, संपूर्ण संसद (जिसमें राज्य सभा शामिल है) के प्रति नहीं।
✅ कथन 2 – सही: अनुच्छेद 75(2) यह प्रावधान करता है कि केंद्रीय मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, यद्यपि वे सामूहिक रूप से लोक सभा के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
✅ कथन 3 – सही: अनुच्छेद 78(क) यह अनिवार्य करता है कि प्रधानमंत्री प्रशासन और विधान के प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों को राष्ट्रपति को सूचित करेंगे।
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भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से सिद्धांत संसदीय सरकार में संस्थागत रूप से निहित है/हैं?
- मंत्रिमंडल के सदस्य संसद के सदस्य होते हैं।
- मंत्री तब तक पद धारण करते हैं जब तक उन्हें संसद में विश्वास प्राप्त रहता है।
- मंत्रिमंडल का प्रमुख राज्य का प्रमुख होता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 75(5) यह अनिवार्य करता है कि एक मंत्री को नियुक्ति के 6 महीने के भीतर संसद का सदस्य होना चाहिए, जो संसदीय सरकार में विधायिका और कार्यपालिका के बीच संस्थागत संबंध स्थापित करता है।
✅ कथन 2 – सही: अनुच्छेद 75(3) के तहत सामूहिक उत्तरदायित्व यह सुनिश्चित करता है कि मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है; मंत्री केवल तभी तक पद धारण करते हैं जब तक उन्हें संसद का विश्वास प्राप्त है, अविश्वास प्रस्ताव पर त्यागपत्र देना पड़ता है।
❌ कथन 3 – गलत: मंत्रिमंडल का प्रमुख प्रधानमंत्री (सरकार का प्रमुख) होता है, न कि राष्ट्रपति (राज्य का प्रमुख); राष्ट्रपति अनुच्छेद 74 के तहत मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर शक्तियों का प्रयोग करता है।
भारत के प्रधानमंत्री को, उनकी नियुक्ति के समय:
Detailed Explanation:
अनुच्छेद 75(5) के अनुसार, यदि कोई मंत्री लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह मंत्री नहीं रहेगा।
चूँकि प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख है, यह प्रावधान लागू होता है—इसका अर्थ है कि PM को नियुक्ति के समय सदस्य होना आवश्यक नहीं है, लेकिन छह महीने के भीतर लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनना आवश्यक है, अन्यथा वह पद से हट जाएगा।
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