UPSC CSE Prelims
राष्ट्रपति Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for राष्ट्रपति with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
Filter & practice questions topic-wise
भारतीय राजनीति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
मैं. एक अध्यादेश किसी भी केंद्रीय अधिनियम में संशोधन कर सकता है।
द्वितीय. एक अध्यादेश मौलिक अधिकार को कम कर सकता है।
III. कोई अध्यादेश पिछली तारीख से लागू हो सकता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
✅ कथन I सही है: अध्यादेश (Ordinance) को संसद के कानून के समान शक्ति प्राप्त होती है। इसलिए यह किसी भी केंद्रीय अधिनियम में संशोधन कर सकता है।
❌ कथन II गलत है: अध्यादेश मौलिक अधिकारों को कम या समाप्त नहीं कर सकता। अनुच्छेद 13(2) इसके विरुद्ध है।
✅ कथन III सही है: अध्यादेश को पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) दिया जा सकता है, अर्थात यह पिछली तिथि से लागू किया जा सकता है।
इसलिए केवल कथन I और III सही हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अध्यादेश (Ordinance)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक प्रावधान | अनुच्छेद 123 (राष्ट्रपति), अनुच्छेद 213 (राज्यपाल) |
| कब जारी होता है | जब विधायिका सत्र में न हो |
| शक्ति | संसद/विधानमंडल के कानून के समान |
| स्वीकृति | सदन के पुनः मिलने के 6 सप्ताह के भीतर |
| सीमा | मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता |
| पूर्व प्रभाव | संभव है |
त्वरित तथ्य:
अध्यादेश बनाने की शक्ति विधायी शक्ति है, लेकिन यह न्यायिक समीक्षा के अधीन रहती है।
भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. राष्ट्रपति द्वारा इस शक्ति का प्रयोग सीमित न्यायिक समीक्षा के अधीन किया जा सकता है।
II. राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी कर सकता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) पूर्णतः असीमित नहीं है। यदि निर्णय मनमाना हो, दुर्भावना से लिया गया हो या अप्रासंगिक तथ्यों पर आधारित हो, तो न्यायालय सीमित न्यायिक समीक्षा कर सकता है।
लेकिन राष्ट्रपति यह शक्ति स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं कर सकते। उन्हें मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करना होता है।
कथन सही/गलत क्यों हैं:
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I | ✅ सही | क्षमादान शक्ति पर सीमित न्यायिक समीक्षा संभव है। |
| II | ❌ गलत | राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक प्रावधान | अनुच्छेद 72 |
| शक्ति किसके पास | भारत के राष्ट्रपति |
| किसकी सलाह पर | मंत्रिपरिषद |
| न्यायिक समीक्षा | सीमित रूप से संभव |
| क्षमादान के प्रकार | Pardon, Reprieve, Respite, Remission, Commutation |
त्वरित तथ्य:
राष्ट्रपति कोर्ट-मार्शल, केंद्रीय कानूनों तथा मृत्युदंड से जुड़े मामलों में क्षमादान दे सकते हैं।
भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- संसद के किसी भी सदन या राज्यों की विधानसभाओं में नामांकित सदस्य भी निर्वाचक मंडल में शामिल होने के पात्र हैं।
- निर्वाचित विधानसभा सीटों की संख्या जितनी अधिक होगी, उस राज्य के प्रत्येक विधायक के मत का मूल्य उतना ही अधिक होगा।
- मध्य प्रदेश के प्रत्येक विधायक के मत का मूल्य केरल की तुलना में अधिक है।
- पुडुचेरी के प्रत्येक विधायक के मत का मूल्य अरुणाचल प्रदेश की तुलना में अधिक है क्योंकि पुडुचेरी में कुल जनसंख्या और कुल निर्वाचित सीटों की संख्या का अनुपात अरुणाचल प्रदेश की तुलना में अधिक है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल एक
भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित चार कथनों में से केवल कथन 4 सही है। कथन 1 गलत है क्योंकि नामांकित सदस्य निर्वाचक मंडल का हिस्सा नहीं होते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि विधानसभा सीटों की अधिक संख्या वास्तव में प्रत्येक विधायक के मत के मूल्य को कम करती है (क्योंकि यह हर में है)। कथन 3 गलत है क्योंकि केरल के विधायकों का मत मूल्य (152) मध्य प्रदेश के विधायकों (131) से अधिक है।
❌ कथन 1 – गलत: राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचक मंडल में केवल संसद और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं; नामांकित सदस्य मतदान के पात्र नहीं हैं।
❌ कथन 2 – गलत: विधायक के मत का मूल्य = (राज्य की जनसंख्या ÷ निर्वाचित विधायकों की संख्या) ÷ 1000। हर में निर्वाचित सीटों की अधिक संख्या वास्तव में मत मूल्य को बढ़ाती नहीं, बल्कि घटाती है।
❌ कथन 3 – गलत: 1971 की जनगणना के आधार पर, मध्य प्रदेश के प्रत्येक विधायक का मत मूल्य 131 है, जबकि केरल का 152 है। इसलिए, केरल के विधायकों का मत मूल्य मध्य प्रदेश के विधायकों से अधिक है।
✅ कथन 4 – सही: पुडुचेरी के प्रत्येक विधायक का मत मूल्य (16) वास्तव में अरुणाचल प्रदेश (8) से अधिक है क्योंकि पुडुचेरी में जनसंख्या और निर्वाचित सीटों का अनुपात अधिक है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राष्ट्रपति निर्वाचन - निर्वाचक मंडल
- निर्वाचक मंडल की संरचना (अनुच्छेद 54): लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं (दिल्ली NCT और पुडुचेरी सहित) के निर्वाचित सदस्य। नामांकित सदस्यों और विधान परिषदों के सदस्यों को बाहर रखा गया है।
- विधायक के मत का मूल्य: सूत्र = (1971 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल जनसंख्या ÷ निर्वाचित विधायकों की कुल संख्या) ÷ 1000
- सांसद के मत का मूल्य: सूत्र = (सभी राज्यों के सभी विधायकों के मतों का कुल मूल्य ÷ दोनों सदनों में निर्वाचित सांसदों की कुल संख्या)
- निर्वाचन की प्रकृति: एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से अप्रत्यक्ष निर्वाचन
- मुख्य बहिष्करण: नामांकित सांसद और विधायक, विधान पार्षद, और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | प्रति विधायक मत मूल्य (उदाहरण) |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 208 (सर्वाधिक) |
| केरल | 152 |
| मध्य प्रदेश | 131 |
| पुडुचेरी | 16 |
| अरुणाचल प्रदेश | 8 |
| सिक्किम | 7 (न्यूनतम) |
🧐 Not Sure What to Study Next?
Get a personalised study plan based on your goals, time and revision needs.
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यदि भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचन को भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा शून्य घोषित कर दिया जाता है, तो निर्णय की तिथि से पूर्व राष्ट्रपति के पद के कर्तव्यों के निर्वहन में उसके/उसकी द्वारा किए गए सभी कार्य अवैध हो जाते हैं।
- भारत के राष्ट्रपति के पद के लिए निर्वाचन इस आधार पर स्थगित किया जा सकता है कि कुछ विधान सभाएँ भंग हो गई हैं और निर्वाचन होने शेष हैं।
- जब राष्ट्रपति के समक्ष कोई विधेयक प्रस्तुत किया जाता है, तो संविधान उस समय सीमा को निर्धारित करता है जिसके भीतर उसे/उसकी अपनी सहमति घोषित करनी होती है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कोई नहीं
तीनों कथन गलत हैं। कथन 1 गलत तरीके से सुझाव देता है कि राष्ट्रपति द्वारा किए गए कार्य जिनका निर्वाचन शून्य घोषित किया गया है, अवैध हो जाते हैं—वे वैध रहते हैं। कथन 2 गलत तरीके से दावा करता है कि विधान सभाओं के विघटन से राष्ट्रपति चुनाव स्थगित हो सकते हैं—उच्चतम न्यायालय ने अन्यथा निर्णय दिया है। कथन 3 झूठा दावा करता है कि संविधान राष्ट्रपति की सहमति के लिए समय सीमा निर्धारित करता है—ऐसी कोई समय सीमा मौजूद नहीं है।
❌ कथन 1 – गलत: अनुच्छेद 71(2) विशेष रूप से प्रावधान करता है कि यदि किसी व्यक्ति के राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन को उच्चतम न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जाता है, तो ऐसी घोषणा की तिथि से पहले उसके/उसकी द्वारा किए गए कार्य अमान्य नहीं होते हैं और प्रभावी रहते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: उच्चतम न्यायालय ने 1974 में निर्णय दिया कि राज्य विधान सभा का विघटन राष्ट्रपति के कार्यकाल की समाप्ति पर राष्ट्रपति चुनाव को रोकने का आधार नहीं होगा, न ही यह राज्य विधानसभा चुनाव होने तक स्थगन का आधार हो सकता है।
❌ कथन 3 – गलत: भारत का संविधान कोई समय सीमा निर्धारित नहीं करता है जिसके भीतर राष्ट्रपति को उसकी/उसकी सहमति के लिए प्रस्तुत विधेयक के संबंध में निर्णय लेना होता है। राष्ट्रपति विधेयकों को अनिश्चित काल के लिए लंबित रख सकते हैं (पॉकेट वीटो)।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राष्ट्रपति की शक्तियाँ और निर्वाचन
| पहलू | संवैधानिक प्रावधान |
|---|---|
| राष्ट्रपति के कार्यों की वैधता | अनुच्छेद 71(2) - निर्वाचन शून्य घोषित होने से पहले किए गए कार्य वैध रहते हैं |
| राष्ट्रपति चुनाव समयरेखा | राज्य विधानसभाओं के विघटन के कारण स्थगित नहीं किया जा सकता (SC 1974 निर्णय) |
| राष्ट्रपति की सहमति | कोई समय सीमा निर्धारित नहीं; राष्ट्रपति पॉकेट वीटो का प्रयोग कर सकते हैं |
| राष्ट्रपति की सहमति के विकल्प | 1. विधेयक को सहमति देना 2. विधेयक से सहमति रोकना 3. विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाना (धन विधेयक को छोड़कर) 4. अनिश्चित काल के लिए लंबित रखना (पॉकेट वीटो) |
| अपवाद | जब विधेयक लौटाया जाता है और संसद द्वारा फिर से पारित किया जाता है, तो राष्ट्रपति को सहमति देनी होगी |
भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- प्रत्येक विधायक के मत का मूल्य राज्य-दर-राज्य भिन्न होता है।
- लोकसभा के सांसदों के मत का मूल्य राज्यसभा के सांसदों के मत के मूल्य से अधिक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1
प्रत्येक विधायक के मत का मूल्य राज्य-दर-राज्य भिन्न होता है क्योंकि इसकी गणना राज्य की जनसंख्या को उस राज्य में निर्वाचित विधायकों की संख्या से विभाजित करके की जाती है। हालांकि, राष्ट्रपति चुनाव में सभी सांसदों (लोकसभा और राज्यसभा दोनों) का मतदान मूल्य समान होता है, जिससे कथन 2 गलत हो जाता है।
✅ कथन 1 – सही: विधायक के मत का मूल्य (राज्य की जनसंख्या ÷ विधायकों की संख्या ÷ 1000) के रूप में गणना की जाती है, जो जनसंख्या और विधानसभा की संख्या के आधार पर राज्यों में भिन्न होता है।
❌ कथन 2 – गलत: राष्ट्रपति चुनाव में सभी सांसदों का मतदान मूल्य समान है; लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदस्यों के लिए मूल्य समान है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत के राष्ट्रपति का चुनाव
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| चुनाव की विधि | संसद और राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल के माध्यम से अप्रत्यक्ष चुनाव (अनुच्छेद 54) |
| विधायक के मत का मूल्य | सूत्र: (राज्य की जनसंख्या ÷ निर्वाचित विधायकों की कुल संख्या ÷ 1000) जनसंख्या और विधानसभा की संख्या के आधार पर राज्य-दर-राज्य भिन्न होता है |
| सांसद के मत का मूल्य | सूत्र: (सभी विधायकों के मतों का कुल मूल्य ÷ निर्वाचित सांसदों की कुल संख्या) लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदस्यों के लिए समान |
| मतदान की प्रणाली | आनुपातिक प्रतिनिधित्व के साथ एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (अनुच्छेद 55) |
| निर्वाचक मंडल | केवल निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं; संसद और राज्य विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य मतदान नहीं कर सकते |
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत संघ की कार्यपालिका शक्ति प्रधानमंत्री में निहित है।
- प्रधानमंत्री सिविल सेवा बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: भारत संघ की कार्यपालिका शक्ति अनुच्छेद 53 के तहत भारत के राष्ट्रपति में निहित है, प्रधानमंत्री में नहीं। राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: संघीय स्तर पर सिविल सेवा बोर्ड नामक कोई संवैधानिक पद नहीं है, और प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष नहीं हैं। कैबिनेट सचिव सिविल सेवाओं के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- राष्ट्रपति भारत सरकार के कार्य के अधिक सुविधाजनक लेन-देन के लिए और मंत्रियों के बीच उक्त कार्य के आवंटन के लिए नियम बनाएगा।
- भारत सरकार की सभी कार्यकारी कार्रवाइयाँ प्रधानमंत्री के नाम पर की गई मानी जाएंगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 77(3) राष्ट्रपति को सरकारी कार्य के लेन-देन के लिए नियम बनाने और मंत्रियों के बीच आवंटन करने का अधिकार देता है। इन्हें भारत सरकार (कार्य संचालन) नियम, 1961 के रूप में जाना जाता है।
❌ कथन 2 – गलत: अनुच्छेद 77(1) के अनुसार भारत सरकार की सभी कार्यकारी कार्रवाइयाँ राष्ट्रपति के नाम पर की गई मानी जाएंगी, प्रधानमंत्री के नाम पर नहीं। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख होता है लेकिन कार्यकारी शक्ति औपचारिक रूप से राष्ट्रपति में निहित है।
भारत के संविधान के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति का यह कर्तव्य है कि वह संसद के समक्ष निम्नलिखित में से किसे प्रस्तुत कराए?
- संघ वित्त आयोग की सिफारिशें
- लोक लेखा समिति की रिपोर्ट
- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट
- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की रिपोर्ट
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अनुच्छेद 281 राष्ट्रपति को वित्त आयोग की सिफारिशों को संसद के समक्ष व्याख्यात्मक ज्ञापन के साथ रखने का आदेश देता है।
❌ कथन 2 – गलत: लोक लेखा समिति (PAC) एक संसदीय समिति है जो CAG रिपोर्ट की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट संसद को प्रस्तुत करती है; राष्ट्रपति PAC रिपोर्ट नहीं रखते।
✅ कथन 3 – सही: अनुच्छेद 151 राष्ट्रपति से संघ के लेखाओं से संबंधित CAG की रिपोर्टों को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाने की अपेक्षा करता है।
✅ कथन 4 – सही: अनुच्छेद 338(5) राष्ट्रपति से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की वार्षिक रिपोर्ट को कार्रवाई ज्ञापन के साथ संसद के समक्ष रखने की अपेक्षा करता है।
Related Topics in भारतीय राजव्यवस्था
Frequently Asked Questions
Common questions about राष्ट्रपति in UPSC CSE PRELIMS