UPSC Prelims 2025
भारतीय राजव्यवस्था Previous Year Questions (PYQs)
Explore 18 solved UPSC Prelims 2025 भारतीय राजव्यवस्था questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
भारत सरकार के संदर्भ में निम्नलिखित जानकारी पर विचार करें:
With reference to the Government of India, consider the following information:
| संगठन | इसके कुछ कार्य | अंतर्गत काम करता है |
|---|---|---|
| Directorate of Enforcement | Enforcement of the Fugitive Economic Offenders Act, 2018 | Internal Security Division-I, Ministry of Home Affairs |
| Directorate of Revenue Intelligence | Enforces the provisions of the Customs Act, 1962 | Department of Revenue, Ministry of Finance |
| Directorate General of Systems and Data Management | Carrying out big data analytics to assist tax officers for better policy and nabbing tax evaders | Department of Revenue, Ministry of Finance |
In how many of the above rows is the information correctly matched?
उपरोक्त पंक्तियों में से कितनी पंक्तियों में जानकारी सही ढंग से मेल खाती है?
Detailed Explanation:
❌ पंक्ति 1 गलत है: प्रवर्तन निदेशालय (ED) Fugitive Economic Offenders Act, 2018 को लागू करता है, लेकिन यह गृह मंत्रालय के नहीं बल्कि वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
✅ पंक्ति 2 सही है: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) Customs Act, 1962 के प्रावधानों को लागू करता है और वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।
❌ पंक्ति 3 गलत है: DGSDM का मुख्य कार्य CBIC की IT प्रणालियों का संचालन और रखरखाव है। कर चोरी पकड़ने के लिए Big Data Analytics का कार्य DGARM करता है।
अतः केवल एक पंक्ति सही मिलान है।
अन्य पंक्तियाँ गलत क्यों हैं:
| पंक्ति | कारण |
|---|---|
| पंक्ति 1 | ED गृह मंत्रालय नहीं, बल्कि वित्त मंत्रालय के अधीन है |
| पंक्ति 3 | बिग डेटा एनालिटिक्स DGARM का कार्य है, DGSDM का नहीं |
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. लोक सभा के विघटन पर, अध्यक्ष विघटन के बाद लोक सभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक अपना कार्यालय खाली नहीं करेगा।
II. भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुसार, लोक सभा के एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में चुने जाने पर तुरंत अपने राजनीतिक दल से इस्तीफा देना होगा।
III. लोक सभा के अध्यक्ष को लोक सभा के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित एक प्रस्ताव द्वारा उसके कार्यालय से हटाया जा सकता है, बशर्ते कि कोई भी प्रस्ताव तब तक पेश नहीं किया जाएगा जब तक कि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के इरादे से कम से कम चौदह दिन का नोटिस न दिया गया हो।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
लोकसभा भंग होने के बाद भी स्पीकर अपने पद पर बने रहते हैं और नई लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले पद छोड़ते हैं। साथ ही, स्पीकर को हटाने के लिए लोकसभा में 14 दिन की पूर्व सूचना के साथ बहुमत से प्रस्ताव पारित करना होता है।
लेकिन संविधान में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि स्पीकर बनने पर सदस्य को अपनी राजनीतिक पार्टी से इस्तीफा देना होगा। यह केवल निष्पक्षता की एक परंपरा है।
अन्य कथन क्यों गलत हैं:
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I | ✅ सही | लोकसभा भंग होने के बाद भी स्पीकर पद पर बने रहते हैं। |
| II | ❌ गलत | पार्टी से इस्तीफा देना संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है। |
| III | ✅ सही | 14 दिन की सूचना और सदन के बहुमत से हटाया जा सकता है। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: लोकसभा अध्यक्ष (Speaker)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संबंधित अनुच्छेद | अनुच्छेद 93 एवं 94 |
| चुनाव | लोकसभा के सदस्य करते हैं |
| कार्यकाल | नई लोकसभा की पहली बैठक तक जारी रहता है |
| हटाने की प्रक्रिया | सदन के बहुमत से |
| पूर्व सूचना | 14 दिन |
| पार्टी छोड़ना | संविधान में अनिवार्य नहीं |
त्वरित तथ्य:
लोकसभा अध्यक्ष से निष्पक्ष रहने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन भारतीय संविधान उन्हें पार्टी सदस्यता छोड़ने के लिए बाध्य नहीं करता।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: भारत में, राज्य सरकारों के पास लघु खनिजों के निष्कर्षण के संबंध में रियायतें देने के लिए नियम बनाने की कोई शक्ति नहीं है, भले ही ऐसे खनिज उनके क्षेत्रों में स्थित हों।
कथन II: भारत में, केंद्र सरकार के पास संबंधित कानून के तहत लघु खनिजों को अधिसूचित करने की शक्ति है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
खनिज और खदान (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत राज्य सरकारों को लघु खनिजों (Minor Minerals) के लिए पट्टे और अन्य रियायतों से संबंधित नियम बनाने का अधिकार है।
वहीं केंद्र सरकार यह निर्धारित करती है कि कौन-से खनिज लघु खनिज (Minor Minerals) की श्रेणी में आएंगे।
कथन सही/गलत क्यों हैं:
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I | ❌ गलत | राज्य सरकारों को लघु खनिजों के लिए रियायत संबंधी नियम बनाने का अधिकार है। |
| II | ✅ सही | केंद्र सरकार लघु खनिजों की अधिसूचना जारी करती है। |
याद रखने की ट्रिक:
"वर्गीकरण केंद्र का, नियमन राज्य का।" → केंद्र खनिज को Minor Mineral घोषित करता है, राज्य उसके उपयोग और खनन को नियंत्रित करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लघु खनिज (Minor Minerals)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संबंधित कानून | MMDR Act, 1957 |
| वर्गीकरण का अधिकार | केंद्र सरकार |
| रियायत/पट्टा नियम | राज्य सरकार |
| उदाहरण | रेत, बजरी, मिट्टी, साधारण पत्थर |
| उपयोग | निर्माण कार्य और स्थानीय खनन |
त्वरित तथ्य:
लघु खनिजों का प्रशासन मुख्य रूप से राज्य सरकारें करती हैं, लेकिन उन्हें "लघु खनिज" घोषित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है।
🧐 Not Sure What to Study Next?
Get a personalised study plan based on your goals, time and revision needs.
लोकपाल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. लोकपाल की शक्तियाँ भारत के लोक सेवकों पर लागू होती हैं, लेकिन भारत के बाहर तैनात भारतीय लोक सेवकों पर नहीं।
II. अध्यक्ष या सदस्य संसद का सदस्य या किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विधानमंडल का सदस्य नहीं होगा, और केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश, चाहे मौजूदा या सेवानिवृत्त हों, को इसका अध्यक्ष होना चाहिए।
III. जैसा भी मामला हो, अध्यक्ष या सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण करने की तिथि पर अध्यक्ष या सदस्य पैंतालीस वर्ष से कम आयु का व्यक्ति नहीं होगा।
IV. लोकपाल भारत के मौजूदा प्रधान मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच नहीं कर सकता।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत लोकपाल एक राष्ट्रीय भ्रष्टाचार-निरोधक संस्था है। यह सार्वजनिक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकता है, और कुछ शर्तों के साथ प्रधानमंत्री भी इसके दायरे में आते हैं।
केवल कथन III सही है क्योंकि लोकपाल का अध्यक्ष या सदस्य बनने के लिए व्यक्ति की आयु कम से कम 45 वर्ष होनी चाहिए।
अन्य कथन गलत क्यों हैं:
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I | ❌ गलत | लोकपाल का अधिकार क्षेत्र विदेश में तैनात भारतीय लोक सेवकों पर भी लागू होता है। |
| II | ❌ गलत | केवल CJI ही अध्यक्ष नहीं बन सकते; पूर्व न्यायाधीश या प्रतिष्ठित व्यक्ति भी नियुक्त हो सकते हैं। |
| III | ✅ सही | अध्यक्ष या सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु 45 वर्ष है। |
| IV | ❌ गलत | लोकपाल कुछ शर्तों और सुरक्षा प्रावधानों के साथ वर्तमान प्रधानमंत्री की भी जांच कर सकता है। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: लोकपाल
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थापना | लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 |
| उद्देश्य | भ्रष्टाचार की जांच |
| न्यूनतम आयु | 45 वर्ष |
| अधिकार क्षेत्र | सार्वजनिक सेवक एवं कुछ मामलों में प्रधानमंत्री |
| अध्यक्ष | पूर्व CJI, सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश या प्रतिष्ठित व्यक्ति |
| सदस्य | न्यायिक एवं गैर-न्यायिक सदस्य |
त्वरित तथ्य:
लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य हो सकते हैं, जिनमें कम से कम 50% सदस्य SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक या महिलाओं में से होते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या लोक सभा का कोई सदस्य दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का विषय बन गया है, तो केंद्रीय मंत्रिपरिषद की राय के अनुसार राष्ट्रपति का निर्णय अंतिम होगा।
II. भारत के संविधान में 'राजनीतिक दल' शब्द का कोई उल्लेख नहीं है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
दोनों कथन सही नहीं हैं। दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत सांसद की अयोग्यता का निर्णय लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) या राज्यसभा सभापति (Chairman) करते हैं, राष्ट्रपति नहीं।
इसके अलावा, "Political Party" शब्द संविधान की दसवीं अनुसूची में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है।
कथन गलत क्यों हैं:
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I | ❌ गलत | अयोग्यता का निर्णय स्पीकर/चेयरमैन लेते हैं, राष्ट्रपति नहीं। |
| II | ❌ गलत | "Political Party" शब्द दसवीं अनुसूची में मौजूद है। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: दल-बदल विरोधी कानून
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| जोड़ा गया | 52वाँ संविधान संशोधन, 1985 |
| संबंधित प्रावधान | दसवीं अनुसूची |
| निर्णय लेने वाला | लोकसभा अध्यक्ष / राज्यसभा सभापति |
| उद्देश्य | राजनीतिक दल-बदल को रोकना |
| अयोग्यता का आधार | पार्टी छोड़ना या व्हिप का उल्लंघन |
त्वरित तथ्य:
दल-बदल विरोधी कानून का उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा बार-बार पार्टी बदलने से उत्पन्न राजनीतिक अस्थिरता को रोकना है।
भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. राष्ट्रपति द्वारा इस शक्ति का प्रयोग सीमित न्यायिक समीक्षा के अधीन किया जा सकता है।
II. राष्ट्रपति इस शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना भी कर सकता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) पूर्णतः असीमित नहीं है। यदि निर्णय मनमाना हो, दुर्भावना से लिया गया हो या अप्रासंगिक तथ्यों पर आधारित हो, तो न्यायालय सीमित न्यायिक समीक्षा कर सकता है।
लेकिन राष्ट्रपति यह शक्ति स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं कर सकते। उन्हें मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करना होता है।
कथन सही/गलत क्यों हैं:
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I | ✅ सही | क्षमादान शक्ति पर सीमित न्यायिक समीक्षा संभव है। |
| II | ❌ गलत | राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक प्रावधान | अनुच्छेद 72 |
| शक्ति किसके पास | भारत के राष्ट्रपति |
| किसकी सलाह पर | मंत्रिपरिषद |
| न्यायिक समीक्षा | सीमित रूप से संभव |
| क्षमादान के प्रकार | Pardon, Reprieve, Respite, Remission, Commutation |
त्वरित तथ्य:
राष्ट्रपति कोर्ट-मार्शल, केंद्रीय कानूनों तथा मृत्युदंड से जुड़े मामलों में क्षमादान दे सकते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. मध्यवर्ती स्तर पर पंचायतें सभी राज्यों में मौजूद हैं।
II. मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का सदस्य बनने के लिए पात्र होने के लिए, व्यक्ति को तीस वर्ष की आयु प्राप्त करनी चाहिए।
III. राज्य के मुख्यमंत्री मध्यवर्ती स्तर पर पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने और राज्य द्वारा लगाए जाने वाले करों और कर्तव्यों की शुद्ध आय के वितरण के संबंध में राज्य और मध्यवर्ती स्तर पर पंचायतों के बीच सिफारिशें करने के लिए एक आयोग का गठन करते हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही नहीं है?
Detailed Explanation:
तीनों कथन गलत हैं।
-
20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में मध्यवर्ती स्तर (Intermediate Panchayat) अनिवार्य नहीं है।
-
पंचायत सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है, 30 वर्ष नहीं।
-
राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) का गठन मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि राज्यपाल करते हैं।
73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया। इसमें त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था, नियमित चुनाव, आरक्षण तथा राज्य वित्त आयोग की व्यवस्था की गई है।
निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
भारत के संविधान में प्रावधान - के अंतर्गत बताया गया है
I. राज्य की सार्वजनिक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना: राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत
II. हमारी समग्र संस्कृति की समृद्ध विरासत को महत्व देना और उसका संरक्षण करना: मौलिक कर्तव्य
III. कारखानों में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध: मौलिक अधिकार
उपरोक्त जोड़े में से कितने जोड़े सही ढंग से सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
तीनों जोड़े सही मिलाए गए हैं।
-
अनुच्छेद 50 (DPSP) न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने की बात करता है।
-
अनुच्छेद 51A(f) (मौलिक कर्तव्य) नागरिकों को भारत की मिश्रित सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का दायित्व देता है।
-
अनुच्छेद 24 (मौलिक अधिकार) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों और खतरनाक कार्यों में रोजगार देने पर रोक लगाता है।
भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित पर विचार करें:
I. अंतरराज्यीय परिषद
II. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद
III. आंचलिक परिषदें
उपरोक्त में से कितने भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुसार स्थापित किए गए थे?
Detailed Explanation:
दिए गए तीन निकायों में से केवल अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) का उल्लेख संविधान में किया गया है।
✅ कथन I: अंतर-राज्य परिषद — सही
-
इसका प्रावधान अनुच्छेद 263 में है।
-
यह केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने का कार्य करती है।
❌ कथन II: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद — गलत
-
इसकी स्थापना 1998 में कार्यपालिका के आदेश (Executive Order) से हुई थी।
-
इसका उल्लेख संविधान में नहीं है।
❌ कथन III: क्षेत्रीय परिषदें (Zonal Councils) — गलत
-
इनकी स्थापना States Reorganisation Act, 1956 के तहत हुई।
-
ये वैधानिक (Statutory) निकाय हैं, संवैधानिक नहीं।
अतः केवल एक निकाय संविधान के प्रावधानों के अनुसार स्थापित किया गया है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारत के संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कुछ क्षेत्रों में राज्य का राज्यपाल अपने विवेक से कार्य करता है।
II. भारत के राष्ट्रपति किसी राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा अग्रेषित किए बिना अपने विचार के लिए आरक्षित कर सकते हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन I सही है
-
संविधान में कुछ ऐसे मामले बताए गए हैं जहाँ राज्यपाल अपने विवेक (Discretion) से कार्य कर सकता है।
-
अनुच्छेद 163(2) के अनुसार विवेकाधीन मामलों में राज्यपाल का निर्णय अंतिम माना जाता है।
-
उदाहरण: कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचार हेतु सुरक्षित रखना, त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति आदि।
❌ कथन II गलत है
-
राष्ट्रपति किसी राज्य विधेयक को स्वयं (suo motu) अपने विचार के लिए सुरक्षित नहीं रख सकते।
-
अनुच्छेद 200 के तहत केवल राज्यपाल ही किसी विधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित कर सकता है।
-
इसलिए राष्ट्रपति की भूमिका तभी शुरू होती है जब राज्यपाल विधेयक भेजे।
अतः केवल कथन I सही है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ
| प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| अनुच्छेद 163 | विवेकाधीन शक्तियाँ |
| अनुच्छेद 200 | राष्ट्रपति के लिए विधेयक आरक्षित करना |
| त्रिशंकु विधानसभा | मुख्यमंत्री नियुक्ति में विवेक |
| राष्ट्रपति की भूमिका | राज्यपाल द्वारा भेजे गए विधेयक पर विचार |
त्वरित तथ्य:
राज्यपाल की कुछ शक्तियाँ विवेकाधीन (Discretionary) होती हैं, जबकि अधिकांश मामलों में वह मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है।
भारतीय राजनीति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
मैं. एक अध्यादेश किसी भी केंद्रीय अधिनियम में संशोधन कर सकता है।
द्वितीय. एक अध्यादेश मौलिक अधिकार को कम कर सकता है।
III. कोई अध्यादेश पिछली तारीख से लागू हो सकता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
✅ कथन I सही है: अध्यादेश (Ordinance) को संसद के कानून के समान शक्ति प्राप्त होती है। इसलिए यह किसी भी केंद्रीय अधिनियम में संशोधन कर सकता है।
❌ कथन II गलत है: अध्यादेश मौलिक अधिकारों को कम या समाप्त नहीं कर सकता। अनुच्छेद 13(2) इसके विरुद्ध है।
✅ कथन III सही है: अध्यादेश को पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) दिया जा सकता है, अर्थात यह पिछली तिथि से लागू किया जा सकता है।
इसलिए केवल कथन I और III सही हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अध्यादेश (Ordinance)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक प्रावधान | अनुच्छेद 123 (राष्ट्रपति), अनुच्छेद 213 (राज्यपाल) |
| कब जारी होता है | जब विधायिका सत्र में न हो |
| शक्ति | संसद/विधानमंडल के कानून के समान |
| स्वीकृति | सदन के पुनः मिलने के 6 सप्ताह के भीतर |
| सीमा | मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता |
| पूर्व प्रभाव | संभव है |
त्वरित तथ्य:
अध्यादेश बनाने की शक्ति विधायी शक्ति है, लेकिन यह न्यायिक समीक्षा के अधीन रहती है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
भारत के संविधान के संदर्भ में, यदि किसी राज्य में किसी क्षेत्र को पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया गया है,
I. राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में अपनी कार्यकारी शक्ति खो देती है और एक स्थानीय निकाय संपूर्ण प्रशासन अपने हाथ में ले लेता है।
II. केंद्र सरकार राज्यपाल की सिफ़ारिशों पर कुछ परिस्थितियों में ऐसे क्षेत्रों का संपूर्ण प्रशासन अपने हाथ में ले सकती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन I गलत है: किसी क्षेत्र को पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने से राज्य सरकार की कार्यपालिका शक्ति समाप्त नहीं होती। प्रशासन राज्य सरकार के पास ही रहता है।
❌ कथन II गलत है: पाँचवीं अनुसूची में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि केंद्र सरकार राज्यपाल की सिफारिश पर अनुसूचित क्षेत्र का पूरा प्रशासन अपने हाथ में ले ले। केंद्र केवल राज्य को आवश्यक निर्देश दे सकता है।
इसलिए दोनों कथन गलत हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पाँचवीं अनुसूची
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| लागू क्षेत्र | अनुसूचित क्षेत्र (पूर्वोत्तर की छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को छोड़कर) |
| उद्देश्य | जनजातीय हितों की सुरक्षा |
| राज्यपाल की भूमिका | शांति एवं सुशासन हेतु नियम बना सकते हैं |
| जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) | जनजातीय कल्याण पर सलाह देती है |
| केंद्र की भूमिका | राज्यों को निर्देश दे सकता है |
| प्रशासन | राज्य सरकार के अधीन रहता है |
त्वरित तथ्य:
पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित है, जबकि छठी अनुसूची पूर्वोत्तर भारत के कुछ जनजातीय क्षेत्रों को स्वायत्त परिषदों की व्यवस्था देती है।
भारत के संविधान के अंतर्गत निम्नलिखित विषयों पर विचार करें:
I. सूची I-संघ सूची, सातवीं अनुसूची में
II. किसी राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार
III. राज्यपाल कार्यालय की स्थितियाँ
उपरोक्त में से किससे संबंधित संवैधानिक संशोधन के लिए, विधेयक को भारत के राष्ट्रपति की सहमति के लिए प्रस्तुत करने से पहले कम से कम आधे राज्यों की विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थन की आवश्यकता होती है?
Detailed Explanation:
✅ कथन I सही है: सातवीं अनुसूची की संघ सूची (Union List) में बदलाव केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों के बंटवारे को प्रभावित करता है। इसलिए ऐसे संशोधन के लिए कम-से-कम आधे राज्यों की स्वीकृति आवश्यक होती है।
✅ कथन II सही है: राज्य की कार्यपालिका शक्ति की सीमा में परिवर्तन भी संघीय ढांचे को प्रभावित करता है, इसलिए इसके लिए भी राज्यों की पुष्टि आवश्यक होती है।
❌ कथन III गलत है: राज्यपाल के पद की शर्तों में संशोधन के लिए राज्यों की पुष्टि आवश्यक नहीं होती। संसद विशेष बहुमत से इसे संशोधित कर सकती है।
इसलिए केवल I और II सही हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राज्य अनुमोदन वाले संवैधानिक संशोधन
| प्रावधान | राज्य अनुमोदन |
|---|---|
| राष्ट्रपति का निर्वाचन | ✅ आवश्यक |
| संघ और राज्यों की कार्यपालिका शक्ति | ✅ आवश्यक |
| सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय | ✅ आवश्यक |
| सातवीं अनुसूची | ✅ आवश्यक |
| संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व | ✅ आवश्यक |
| अनुच्छेद 368 | ✅ आवश्यक |
| राज्यपाल के पद की शर्तें | ❌ आवश्यक नहीं |
त्वरित तथ्य:
अनुच्छेद 368 के अनुसार संघीय ढांचे से जुड़े संशोधनों के लिए कम-से-कम आधे राज्यों की स्वीकृति आवश्यक होती है।
भारतीय राजनीति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. किसी राज्य का राज्यपाल अपने कार्यालय की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग और प्रदर्शन के लिए किसी भी अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं है।
II. राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जाएगी या जारी नहीं रखी जाएगी।
III. राज्य विधानमंडल के सदस्य सदन के भीतर कही गई किसी भी बात के संबंध में किसी भी अदालत में किसी भी कार्यवाही के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
✅ कथन I सही है: अनुच्छेद 361(1) के अनुसार राज्यपाल अपने पद के अधिकारों और कर्तव्यों के निर्वहन के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होता।
✅ कथन II सही है: अनुच्छेद 361(2) के अनुसार राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उसके विरुद्ध कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू या जारी नहीं की जा सकती।
✅ कथन III सही है: अनुच्छेद 194(2) राज्य विधानमंडल के सदस्यों को सदन के भीतर कही गई बातों या दिए गए मत के संबंध में न्यायालयी कार्यवाही से संरक्षण देता है।
अतः तीनों कथन सही हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संवैधानिक प्रतिरक्षा एवं विशेषाधिकार
| प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| अनुच्छेद 361(1) | राष्ट्रपति/राज्यपाल आधिकारिक कार्यों के लिए न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं |
| अनुच्छेद 361(2) | कार्यकाल में आपराधिक कार्यवाही नहीं |
| अनुच्छेद 361(3) | कार्यकाल में गिरफ्तारी या कारावास नहीं |
| अनुच्छेद 194(2) | राज्य विधायकों को भाषण एवं मतदान पर विशेषाधिकार |
| अनुच्छेद 105(2) | सांसदों के लिए समान विशेषाधिकार |
त्वरित तथ्य:
अनुच्छेद 361 के तहत मिलने वाली सुरक्षा स्थायी नहीं होती। पद छोड़ने के बाद आपराधिक कार्यवाही की जा सकती है।
निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
राज्य - विवरण
I. अरुणाचल प्रदेश: राजधानी का नाम एक किले के नाम पर रखा गया है, और राज्य में दो राष्ट्रीय उद्यान हैं।
II. नागालैंड: राज्य एक संवैधानिक संशोधन अधिनियम के आधार पर अस्तित्व में आया।
III. त्रिपुरा: प्रारंभ में एक भाग 'सी' राज्य, यह 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के साथ एक केंद्र प्रशासित क्षेत्र बन गया और बाद में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।
उपरोक्त जोड़े में से कितने जोड़े सही ढंग से सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (तीनों)
तीनों युग्म सही रूप से मेल खाते हैं। यह प्रश्न पूर्वोत्तर राज्यों के राजधानी, राष्ट्रीय उद्यान और राज्य गठन के इतिहास से संबंधित तथ्यों की जाँच करता है।
✅ युग्म I सही है: अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर का नाम ऐतिहासिक ईटा किले (Ita Fort) पर रखा गया है। राज्य में दो राष्ट्रीय उद्यान—नामदाफा और मौलिंग—स्थित हैं।
✅ युग्म II सही है: नागालैंड 1 दिसंबर 1963 को राज्य बना। इसका गठन State of Nagaland Act, 1962 के माध्यम से हुआ।
✅ युग्म III सही है: त्रिपुरा पहले Part 'C' State था, 1956 में केंद्र शासित प्रदेश बना और 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त किया।
संक्षिप्त नोट्स: पूर्वोत्तर राज्य – गठन एवं विशेषताएँ
-
अरुणाचल प्रदेश को 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
-
ईटा किला ईटानगर नाम का आधार है।
-
नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे बड़े संरक्षित क्षेत्रों में से एक है।
-
नागालैंड 1963 में भारत का 16वाँ राज्य बना।
-
त्रिपुरा एक रियासत थी जिसने 1949 में भारत में विलय किया।
-
त्रिपुरा और मणिपुर को 1972 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
-
पूर्वोत्तर क्षेत्र को "सेवन सिस्टर्स" के नाम से जाना जाता है।
भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
| Organization | Union Ministry |
|---|---|
| I. The National Automotive Board | Ministry of Commerce and Industry |
| II. The Coir Board | Ministry of Heavy Industries |
| III. The National Centre for Trade Information | Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises |
उपरोक्त जोड़े में से कितने जोड़े सही ढंग से सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
यह प्रश्न विभिन्न संगठनों और उनके संबंधित मंत्रालयों के बारे में है। तीनों जोड़े गलत मिलान किए गए हैं।
❌ युग्म I गलत है: National Automotive Board भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) के अंतर्गत कार्य करता है, न कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत।
❌ युग्म II गलत है: Coir Board सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME Ministry) के अंतर्गत कार्य करता है, न कि भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत।
❌ युग्म III गलत है: National Centre for Trade Information वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से संबद्ध है, न कि MSME मंत्रालय से।
संक्षिप्त नोट्स: महत्वपूर्ण बोर्ड एवं संगठन
-
National Automotive Board (NAB), भारी उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
-
NAB भारत की ऑटोमोबाइल नीतियों के क्रियान्वयन में सहायता करता है।
-
Coir Board की स्थापना 1953 के Coir Industry Act के तहत हुई थी।
-
Coir Board, MSME मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
-
National Centre for Trade Information (NCTI), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से संबद्ध है।
-
NCTI व्यापार एवं निर्यात संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में सहायता करता है।
भारत के 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
I. इसने शैक्षिक परिणामों को बढ़ाने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 2022-23 से वर्ष 2025-26 तक ₹4,800 करोड़ के अनुदान की सिफारिश की है।
II. केंद्रीय करों की शुद्ध आय का 45% राज्यों के साथ साझा किया जाना है।
III. कृषि सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए सभी राज्यों के लिए प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन के रूप में ₹45,000 करोड़ रखे जाने हैं।
IV. इसने राजकोषीय प्रदर्शन को पुरस्कृत करने के लिए कर प्रयास मानदंड को फिर से प्रस्तुत किया।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
Correct Answer: ✅ Option 3 (I, III and IV)
The Fifteenth Finance Commission recommended several performance-based grants and incentives to improve governance, education, agriculture, and fiscal discipline among States.
✅ Statement I is Correct: The Commission recommended ₹4,800 crore during 2022–23 to 2025–26 to incentivize States for improving educational outcomes.
❌ Statement II is Incorrect: The Commission recommended that 41% of the net proceeds of Union taxes be devolved to States, not 45%.
✅ Statement III is Correct: A ₹45,000 crore performance-based incentive fund was proposed to encourage States to undertake agricultural reforms.
✅ Statement IV is Correct: The Commission reintroduced the Tax Effort Criterion to reward States that mobilize their own tax revenues more effectively relative to their economic capacity.
Short Notes: Fifteenth Finance Commission
-
The 15th Finance Commission was chaired by N. K. Singh.
-
Its recommendations covered the period 2021–26.
-
It recommended 41% tax devolution to States.
-
Introduced performance-based incentives in sectors like education, agriculture, and power reforms.
-
Recommended ₹45,000 crore for agricultural reform-linked incentives.
-
Reintroduced the Tax Effort criterion in the devolution formula.
-
Finance Commissions are constituted under Article 280 of the Indian Constitution.
निम्नलिखित गतिविधियों पर विचार करें:
I. कच्चे तेल का उत्पादन
II. पेट्रोलियम उत्पादों का शोधन, भंडारण और वितरण
III. पेट्रोलियम उत्पादों का विपणन और बिक्री
IV. प्राकृतिक गैस का उत्पादन
उपरोक्त में से कितनी गतिविधियाँ हमारे देश में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड द्वारा विनियमित हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2 (केवल दो)
Petroleum and Natural Gas Regulatory Board (PNGRB) मुख्य रूप से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस क्षेत्र की डाउनस्ट्रीम गतिविधियों को नियंत्रित करता है। यह कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन जैसी अपस्ट्रीम गतिविधियों को नियंत्रित नहीं करता।
❌ गतिविधि I: कच्चे तेल का उत्पादन – PNGRB द्वारा विनियमित नहीं
यह एक अपस्ट्रीम गतिविधि है, जिसका नियमन मंत्रालय और Directorate General of Hydrocarbons द्वारा किया जाता है।
✅ गतिविधि II: पेट्रोलियम उत्पादों का परिशोधन, भंडारण और वितरण – विनियमित
PNGRB भंडारण, परिवहन और वितरण से संबंधित गतिविधियों का नियमन करता है।
✅ गतिविधि III: पेट्रोलियम उत्पादों का विपणन और बिक्री – विनियमित
PNGRB विपणन के लिए संस्थाओं को अनुमति देता है और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है।
❌ गतिविधि IV: प्राकृतिक गैस का उत्पादन – PNGRB द्वारा विनियमित नहीं
यह भी एक अपस्ट्रीम गतिविधि है और PNGRB के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
अतः केवल II और III गतिविधियां PNGRB द्वारा विनियमित होती हैं।
संक्षिप्त नोट्स: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (PNGRB)
-
PNGRB की स्थापना PNGRB Act, 2006 के तहत हुई।
-
यह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र का नियमन करता है।
-
इसका उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।
-
यह पाइपलाइन, सिटी गैस वितरण, भंडारण और परिवहन को नियंत्रित करता है।
-
यह अन्वेषण (Exploration) और उत्पादन (Production) को नियंत्रित नहीं करता।
-
अपस्ट्रीम गतिविधियों की देखरेख DGH और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय करते हैं।
-
यह उपभोक्ता हितों की रक्षा और ऊर्जा अवसंरचना में निवेश को बढ़ावा देता है।
UPSC Prelims 2025 - भारतीय राजव्यवस्था Chapter-wise Distribution
गैर-संवैधानिक निकाय
4 Qs (22.2%)राज्य सरकार
2 Qs (11.1%)संघीय कार्यपालिका
2 Qs (11.1%)केंद्र-राज्य संबंध
2 Qs (11.1%)स्थानीय स्वशासन
1 Qs (5.6%)निर्वाचन एवं चुनाव प्रणाली
1 Qs (5.6%)संसद
1 Qs (5.6%)संवैधानिक निकाय
1 Qs (5.6%)संघ एवं उसका राज्य क्षेत्र
1 Qs (5.6%)संविधान संशोधन
1 Qs (5.6%)विशेष संवैधानिक प्रावधान
1 Qs (5.6%)मौलिक कर्तव्य
1 Qs (5.6%)UPSC Prelims 2025 - भारतीय राजव्यवस्था Questions FAQs
Q1 How many भारतीय राजव्यवस्था questions were asked in UPSC Prelims 2025?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for भारतीय राजव्यवस्था in UPSC Prelims 2025?
- गैर-संवैधानिक निकाय: 4 questions (22.2%)
- राज्य सरकार: 2 questions (11.1%)
- संघीय कार्यपालिका: 2 questions (11.1%)
- केंद्र-राज्य संबंध: 2 questions (11.1%)
- स्थानीय स्वशासन: 1 questions (5.6%)
- निर्वाचन एवं चुनाव प्रणाली: 1 questions (5.6%)
- संसद: 1 questions (5.6%)
- संवैधानिक निकाय: 1 questions (5.6%)
- संघ एवं उसका राज्य क्षेत्र: 1 questions (5.6%)
- संविधान संशोधन: 1 questions (5.6%)
- विशेष संवैधानिक प्रावधान: 1 questions (5.6%)
- मौलिक कर्तव्य: 1 questions (5.6%)