UPSC Prelims 2025
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी Previous Year Questions (PYQs)
Explore 13 solved UPSC Prelims 2025 पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: सक्रिय कार्बन अपशिष्ट जल धाराओं से प्रदूषकों को हटाने और विभिन्न उद्योगों से दूषित पदार्थों को दूर करने के लिए एक अच्छा और आकर्षक उपकरण है।
कथन II: सक्रिय कार्बन एक बड़े सतह क्षेत्र और भारी धातुओं को सोखने की एक मजबूत क्षमता प्रदर्शित करता है।
कथन III: सक्रिय कार्बन को उच्च कार्बन सामग्री वाले पर्यावरणीय कचरे से आसानी से संश्लेषित किया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1
सक्रिय कार्बन (Activated Carbon) जल और अपशिष्ट जल शोधन में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले अधिशोषकों (Adsorbents) में से एक है। इसकी अत्यधिक छिद्रयुक्त संरचना और विशाल सतह क्षेत्र इसे प्रदूषकों को हटाने में प्रभावी बनाते हैं। साथ ही इसे कार्बन-समृद्ध अपशिष्ट पदार्थों से कम लागत पर बनाया जा सकता है।
✅ कथन I सही है: सक्रिय कार्बन का उपयोग औद्योगिक अपशिष्ट जल और प्रदूषित जल से प्रदूषकों को हटाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
✅ कथन II सही है: इसकी सतह क्षेत्र बहुत बड़ा होता है और इसमें भारी धातुओं तथा अन्य प्रदूषकों को अधिशोषित करने की उच्च क्षमता होती है।
✅ कथन III सही है: सक्रिय कार्बन को नारियल के छिलके, धान की भूसी, बुरादा और अन्य कार्बन-समृद्ध अपशिष्टों से आसानी से बनाया जा सकता है।
✅ कथन II, कथन I की व्याख्या करता है: इसकी विशाल सतह और उच्च अधिशोषण क्षमता इसे प्रदूषक हटाने में प्रभावी बनाती है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: कम लागत और अपशिष्ट से निर्माण की सुविधा इसे एक आकर्षक तथा टिकाऊ विकल्प बनाती है।
संक्षिप्त नोट्स: Activated Carbon
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सक्रिय कार्बन एक अत्यधिक छिद्रयुक्त कार्बन पदार्थ है।
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इसका सतह क्षेत्र 1,000 m²/g से भी अधिक हो सकता है।
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इसका उपयोग जल शोधन, वायु शोधन और अपशिष्ट जल उपचार में किया जाता है।
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यह भारी धातुओं, रंगों, कीटनाशकों और कार्बनिक प्रदूषकों को हटाने में प्रभावी है।
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इसे नारियल के छिलके, लकड़ी, कोयला और कृषि अपशिष्टों से बनाया जा सकता है।
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यह मुख्यतः Adsorption (अधिशोषण) की प्रक्रिया से कार्य करता है।
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पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में इसका व्यापक उपयोग होता है।
निम्नलिखित में से किसने 'एशिया और प्रशांत के लिए नेचर सॉल्यूशंस फाइनेंस हब' लॉन्च किया?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 — एशियाई विकास बैंक (ADB)
Asian Development Bank ने Nature Solutions Finance Hub for Asia and the Pacific की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य प्रकृति-आधारित समाधानों (Nature-based Solutions) के लिए वित्त उपलब्ध कराना है ताकि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और पर्यावरणीय क्षरण जैसी चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
✅ विकल्प 1 सही है: ADB ने Nature Solutions Finance Hub for Asia and the Pacific लॉन्च किया।
❌ विकल्प 2 गलत है: Asian Infrastructure Investment Bank ने यह पहल शुरू नहीं की।
❌ विकल्प 3 गलत है: New Development Bank इस हब से संबंधित नहीं है।
❌ विकल्प 4 गलत है: International Bank for Reconstruction and Development ने इस हब की शुरुआत नहीं की।
संक्षिप्त नोट्स: Nature-Based Solutions (NbS)
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Nature-Based Solutions में प्राकृतिक तंत्रों का उपयोग पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु किया जाता है।
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उदाहरण: मैंग्रोव पुनर्स्थापन, वनीकरण, आर्द्रभूमि संरक्षण और जलग्रहण प्रबंधन।
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यह जलवायु शमन, जलवायु अनुकूलन और जैव विविधता संरक्षण में सहायक है।
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ADB Nature Solutions Finance Hub एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित है।
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इसका उद्देश्य पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक एवं निजी निवेश जुटाना है।
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स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र कार्बन अवशोषण, बाढ़ नियंत्रण और जल शुद्धिकरण जैसी सेवाएँ प्रदान करते हैं।
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NbS को कम लागत वाले और टिकाऊ जलवायु समाधान के रूप में माना जा रहा है।
निम्नलिखित पर विचार करें:
I. सिगरेट के टुकड़े
II. चश्मे के लेंस
III. कार के टायर
उनमें से कितने में प्लास्टिक है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (तीनों)
हमारे दैनिक जीवन की कई वस्तुओं में प्लास्टिक होता है, भले ही वे देखने में प्लास्टिक जैसी न लगें। सिगरेट के फिल्टर, आधुनिक चश्मे के लेंस और कार के टायर सभी में प्लास्टिक या प्लास्टिक-आधारित पॉलिमर सामग्री होती है।
✅ I. सिगरेट बट्स – सही: सिगरेट के फिल्टर मुख्य रूप से सेल्यूलोज एसीटेट नामक प्लास्टिक पॉलिमर से बने होते हैं।
✅ II. चश्मे के लेंस – सही: अधिकांश आधुनिक लेंस पॉलीकार्बोनेट या CR-39 प्लास्टिक से बनाए जाते हैं।
✅ III. कार टायर – सही: टायरों में सिंथेटिक रबर और अन्य पॉलिमर आधारित पदार्थ होते हैं, जो पेट्रोकेमिकल स्रोतों से प्राप्त होते हैं।
संक्षिप्त नोट्स: दैनिक जीवन में प्लास्टिक
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सिगरेट फिल्टर में प्रयुक्त सेल्यूलोज एसीटेट एक प्रकार का प्लास्टिक है।
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आधुनिक चश्मे के अधिकांश लेंस पॉलीकार्बोनेट से बनाए जाते हैं।
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कार टायर प्राकृतिक रबर और सिंथेटिक पॉलिमर दोनों से बने होते हैं।
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सिंथेटिक रबर का निर्माण पेट्रोलियम-आधारित रसायनों से होता है।
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प्लास्टिक अपशिष्ट पर्यावरण में सैकड़ों वर्षों तक बना रह सकता है।
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सिगरेट बट्स विश्व में सबसे सामान्य प्लास्टिक कचरे में से एक हैं।
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वाहन टायरों के घिसने से माइक्रोप्लास्टिक्स उत्पन्न होते हैं।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: अध्ययनों से संकेत मिलता है कि सीमेंट उद्योग से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन का 5% से अधिक है।
कथन II: सीमेंट बनाते समय सिलिका युक्त मिट्टी को चूना पत्थर के साथ मिलाया जाता है।
कथन III: सीमेंट निर्माण के लिए क्लिंकर उत्पादन के दौरान चूना पत्थर को चूने में परिवर्तित किया जाता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2
सीमेंट उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और कुल उत्सर्जन का लगभग 5–8% योगदान देता है। सीमेंट निर्माण में चूना पत्थर (Limestone) और मिट्टी (Clay) दोनों का उपयोग होता है, लेकिन सबसे अधिक CO₂ चूना पत्थर के कैल्सिनेशन (Calcination) से निकलती है।
✅ कथन I सही है: सीमेंट उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का 5% से अधिक योगदान देता है।
✅ कथन II सही है: सीमेंट निर्माण में चूना पत्थर के साथ सिलिका युक्त मिट्टी मिलाई जाती है, जो आवश्यक खनिज प्रदान करती है।
✅ कथन III सही है: क्लिंकर निर्माण के दौरान चूना पत्थर (CaCO₃) को गर्म करके चूना (CaO) में बदला जाता है, जिससे CO₂ निकलती है।
❌ कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता: मिट्टी को मिलाना केवल कच्चे माल की आवश्यकता है, यह सीधे CO₂ उत्सर्जन का कारण नहीं है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: चूना पत्थर के कैल्सिनेशन से बड़ी मात्रा में CO₂ निकलती है, जो सीमेंट उद्योग के उच्च उत्सर्जन का मुख्य कारण है।
संक्षिप्त नोट्स: सीमेंट उद्योग और कार्बन उत्सर्जन
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सीमेंट उद्योग वैश्विक CO₂ उत्सर्जन का लगभग 5–8% योगदान देता है।
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मुख्य कच्चे पदार्थ चूना पत्थर और मिट्टी हैं।
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क्लिंकर सीमेंट निर्माण का मध्यवर्ती उत्पाद है।
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कैल्सिनेशन अभिक्रिया: CaCO₃ → CaO + CO₂।
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लगभग 60% उत्सर्जन कैल्सिनेशन प्रक्रिया से आता है।
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शेष उत्सर्जन मुख्यतः भट्टियों (Kilns) में ईंधन जलाने से होता है।
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उत्सर्जन कम करने के लिए लो-कार्बन सीमेंट और कार्बन कैप्चर तकनीकों पर कार्य हो रहा है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 पर सतत विकास और जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक चर्चाओं में अक्सर चर्चा की जाती है।
कथन II: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6 कार्बन बाजारों के सिद्धांतों को निर्धारित करता है।
कथन III: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 का उद्देश्य अपने जलवायु लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए अंतर-देशीय गैर-बाजार रणनीतियों को बढ़ावा देना है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1
पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6 (Article 6) देशों को जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सहयोग का ढांचा प्रदान करता है। इसमें कार्बन बाजार (Market Mechanisms) तथा गैर-बाजार (Non-Market) उपाय दोनों शामिल हैं, इसलिए यह जलवायु वार्ताओं में सबसे अधिक चर्चा वाले प्रावधानों में से एक है।
✅ कथन I सही है: अनुच्छेद 6 देशों को अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सहयोग करने की व्यवस्था देता है, इसलिए इसकी व्यापक चर्चा होती है।
✅ कथन II सही है: अनुच्छेद 6 अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजारों और कार्बन क्रेडिट व्यापार के सिद्धांतों एवं नियमों का आधार प्रदान करता है।
✅ कथन III सही है: यह गैर-बाजार उपायों जैसे तकनीकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और नीति सहयोग को भी बढ़ावा देता है।
✅ कथन II, कथन I की व्याख्या करता है: कार्बन बाजार अनुच्छेद 6 के सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित पहलुओं में से एक हैं।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: गैर-बाजार सहयोग तंत्र भी वैश्विक जलवायु और सतत विकास चर्चाओं का प्रमुख विषय हैं।
संक्षिप्त नोट्स: पेरिस समझौते का अनुच्छेद 6
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अनुच्छेद 6 अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित है।
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यह देशों को कार्बन क्रेडिट व्यापार की अनुमति देता है।
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Article 6.2 द्विपक्षीय और बहुपक्षीय कार्बन व्यापार से संबंधित है।
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Article 6.4 संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षित वैश्विक कार्बन बाजार तंत्र स्थापित करता है।
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Article 6.8 गैर-बाजार उपायों को बढ़ावा देता है।
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इसका उद्देश्य NDCs (Nationally Determined Contributions) को कम लागत पर प्राप्त करना है।
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यह उत्सर्जन कटौती की Double Counting समस्या को रोकने में मदद करता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: 28वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP28) में, भारत ने "जलवायु और स्वास्थ्य पर घोषणा" पर हस्ताक्षर करने से परहेज किया।
कथन II: जलवायु और स्वास्थ्य पर COP28 घोषणा एक बाध्यकारी घोषणा है; और यदि हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो स्वास्थ्य क्षेत्र को डीकार्बोनाइज करना अनिवार्य हो जाता है।
कथन III: यदि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को कार्बन मुक्त किया जाता है, तो इसकी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की लचीलापन से समझौता किया जा सकता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3
COP28 में भारत ने Declaration on Climate and Health पर हस्ताक्षर नहीं किए। भारत की चिंता जलवायु-अनुकूल स्वास्थ्य व्यवस्था के लक्ष्य से नहीं थी, बल्कि इस बात से थी कि तेज़ी से डीकार्बोनाइजेशन करने पर विकासशील देश में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
✅ कथन I सही है: भारत ने COP28 के Climate and Health Declaration पर हस्ताक्षर नहीं किए।
❌ कथन II गलत है: यह घोषणा स्वैच्छिक (Voluntary) और गैर-बाध्यकारी (Non-Binding) है। इस पर हस्ताक्षर करने से कोई कानूनी बाध्यता नहीं बनती।
✅ कथन III सही है: भारत को चिंता थी कि स्वास्थ्य क्षेत्र के तेज़ डीकार्बोनाइजेशन से स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और पहुंच प्रभावित हो सकती है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: स्वास्थ्य क्षेत्र की लचीलापन (Resilience) और विकास संबंधी प्राथमिकताओं की चिंता भारत के निर्णय का प्रमुख कारण थी।
❌ कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता: क्योंकि यह घोषणा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, इसलिए कथन II तथ्यात्मक रूप से गलत है।
संक्षिप्त नोट्स: COP28 Declaration on Climate and Health
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यह घोषणा COP28 (दुबई, 2023) में शुरू की गई थी।
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इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य के संबंध को उजागर करना है।
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यह एक स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी घोषणा है।
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यह देशों को जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणालियाँ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
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120 से अधिक देशों ने इसका समर्थन किया।
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भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और विकास संबंधी चिंताओं के कारण इस पर हस्ताक्षर नहीं किए।
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जलवायु परिवर्तन से हीटवेव, बीमारियाँ, बाढ़ और चरम मौसम घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
पीकॉक टारेंटयुला (गूटी टारेंटयुला) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. यह एक सर्वाहारी क्रस्टेशियन है।
II. भारत में इसका प्राकृतिक आवास केवल कुछ वन क्षेत्रों तक ही सीमित है।
III. अपने प्राकृतिक आवास में, यह एक वृक्षीय प्रजाति है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 4 — II और III
सरल व्याख्या:
कथन I — गलत। यह क्रस्टेशियन नहीं है — यह एक मकड़ी (Arachnid) है, विशेष रूप से एक टारेंटुला। क्रस्टेशियन (केकड़े/झींगा) पूरी तरह अलग समूह हैं।
कथन II — सही। इसका आवास भारत में पूर्वी घाट के कुछ सीमित वन क्षेत्रों तक सीमित है।
कथन III — सही। यह वृक्षवासी (Arboreal) है — यानी यह पेड़ों और उनकी दरारों में रहती है, ज़मीन पर नहीं।
याद रखने की तरकीब: "पीकॉक टारेंटुला = मकड़ी, वृक्षवासी, सीमित आवास" — क्रस्टेशियन नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पीकॉक टारेंटुला / गूटी टारेंटुला
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| वैज्ञानिक नाम | Poecilotheria metallica |
| प्रकार | मकड़ी (Arachnid) — क्रस्टेशियन नहीं |
| आवास | पूर्वी घाट, सीमित वन क्षेत्र (आंध्र प्रदेश क्षेत्र) |
| जीवनशैली | वृक्षवासी — पेड़ों/पेड़ की दरारों में रहती है |
| रंग | मेटैलिक नीला, मोर जैसे पैटर्न |
| संरक्षण स्थिति | गंभीर रूप से संकटग्रस्त (IUCN) |
| महत्व | विदेशी पालतू व्यापार में सबसे दुर्लभ टारेंटुला में से एक — अवैध शिकार का खतरा |
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारत में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन 0.5 टन CO₂/व्यक्ति से कम है।
II. ईंधन दहन से CO₂ उत्सर्जन के मामले में, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में दूसरे स्थान पर है।
III. बिजली और ताप उत्पादक भारत में CO₂ उत्सर्जन के सबसे बड़े स्रोत हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन I — गलत। भारत का प्रति व्यक्ति CO₂ उत्सर्जन लगभग 1.9-2.0 टन है, 0.5 टन से कम नहीं। दिया गया आंकड़ा बहुत कम और गलत है।
कथन II — सही। भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ईंधन दहन से CO₂ उत्सर्जन में दूसरे स्थान पर है — चीन के बाद (जो पहले स्थान पर है)।
कथन III — सही। बिजली और ऊष्मा उत्पादन (मुख्यतः कोयला-आधारित) भारत में CO₂ उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत है।
पृथ्वी ग्रह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. वर्षा वन महासागरों द्वारा उत्पादित ऑक्सीजन की तुलना में अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।
II. समुद्री फाइटोप्लांकटन और प्रकाश संश्लेषक बैक्टीरिया दुनिया की लगभग 50% ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
III. अच्छी तरह से ऑक्सीजन युक्त सतही पानी में वायुमंडलीय हवा की तुलना में कई गुना अधिक ऑक्सीजन होती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2 (केवल II)
अक्सर लोग मानते हैं कि ऑक्सीजन का मुख्य स्रोत वर्षावन हैं, लेकिन वास्तव में महासागर पृथ्वी के सबसे बड़े ऑक्सीजन उत्पादक हैं। समुद्री फाइटोप्लैंकटन, शैवाल और प्रकाश-संश्लेषी बैक्टीरिया मिलकर वैश्विक ऑक्सीजन का लगभग आधा उत्पादन करते हैं। साथ ही, वायुमंडलीय वायु में जल की तुलना में कहीं अधिक ऑक्सीजन होती है।
❌ कथन I गलत है: वर्षावनों की तुलना में महासागर अधिक ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं। समुद्री फाइटोप्लैंकटन इसका प्रमुख स्रोत हैं।
✅ कथन II सही है: समुद्री फाइटोप्लैंकटन और प्रकाश-संश्लेषी बैक्टीरिया विश्व की लगभग 50% ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
❌ कथन III गलत है: वायुमंडलीय वायु में लगभग 21% ऑक्सीजन होती है, जबकि जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है। जल में वायु से कई गुना अधिक ऑक्सीजन नहीं होती।
संक्षिप्त नोट्स: ऑक्सीजन चक्र और समुद्री फाइटोप्लैंकटन
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समुद्री फाइटोप्लैंकटन पृथ्वी की लगभग 50% ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।
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फाइटोप्लैंकटन महासागरों में पाए जाने वाले सूक्ष्म प्रकाश-संश्लेषी जीव हैं।
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महासागर वैश्विक ऑक्सीजन उत्पादन का सबसे बड़ा स्रोत हैं।
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वायुमंडलीय वायु में लगभग 21% ऑक्सीजन होती है।
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जल में घुलित ऑक्सीजन सामान्यतः mg/L में मापी जाती है और इसकी मात्रा बहुत कम होती है।
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प्रकाश संश्लेषण में CO₂ + जल → ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन बनती है।
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पृथ्वी के ऑक्सीजन संतुलन और जलवायु के लिए स्वस्थ महासागर अत्यंत आवश्यक हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: चक्रीय अर्थव्यवस्था ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करती है।
कथन II: चक्रीय अर्थव्यवस्था इनपुट के रूप में कच्चे माल के उपयोग को कम करती है।
कथन III: चक्रीय अर्थव्यवस्था उत्पादन प्रक्रिया में बर्बादी को कम करती है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1
सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) का उद्देश्य उत्पादों, संसाधनों और सामग्रियों का अधिकतम समय तक उपयोग करना है। इसमें पुनः उपयोग, मरम्मत, पुनर्निर्माण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जाता है। इससे कच्चे संसाधनों की मांग, अपशिष्ट और ऊर्जा खपत कम होती है, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भी घटता है।
✅ कथन I सही है: सर्कुलर इकोनॉमी अपशिष्ट और संसाधन दोहन को कम करके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाती है।
✅ कथन II सही है: यह पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण के माध्यम से कच्चे माल की आवश्यकता को कम करती है।
✅ कथन III सही है: यह बेहतर डिज़ाइन और संसाधन दक्षता के माध्यम से उत्पादन प्रक्रिया में अपशिष्ट को कम करती है।
✅ कथन II, कथन I की व्याख्या करता है: कच्चे माल के कम उपयोग से ऊर्जा खपत और उससे होने वाला उत्सर्जन घटता है।
✅ कथन III, कथन I की व्याख्या करता है: कम अपशिष्ट का अर्थ है कम उत्पादन एवं निपटान संबंधी उत्सर्जन।
संक्षिप्त नोट्स: Circular Economy
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यह Reduce, Reuse, Repair, Refurbish और Recycle के सिद्धांतों पर आधारित है।
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संसाधनों का उपयोग अधिकतम अवधि तक करने का प्रयास करती है।
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नए (Virgin) कच्चे माल पर निर्भरता कम करती है।
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ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और पर्यावरणीय क्षति को घटाती है।
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लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम करती है।
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संसाधन दक्षता (Resource Efficiency) को बढ़ावा देती है।
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यह पारंपरिक Linear Economy (Take–Make–Dispose) का विकल्प है।
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए वर्षा कराने का कृत्रिम तरीका उपयोग में लाया जाता है
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (Silver iodide और Potassium iodide)
कृत्रिम वर्षा (Artificial Rainfall) या Cloud Seeding एक तकनीक है जिसके माध्यम से बादलों में विशेष रसायन डालकर वर्षा को बढ़ावा दिया जाता है। वायु प्रदूषण कम करने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है क्योंकि वर्षा प्रदूषकों को वातावरण से नीचे ले आती है।
✅ विकल्प A सही है: Silver iodide (AgI) और Potassium iodide (KI) क्लाउड सीडिंग में उपयोग किए जाते हैं। इनकी क्रिस्टलीय संरचना बर्फ जैसी होती है, जिससे वर्षा बनने में मदद मिलती है।
❌ विकल्प B गलत है: Silver nitrate का उपयोग सामान्यतः क्लाउड सीडिंग में नहीं किया जाता।
❌ विकल्प C गलत है: Potassium nitrate वर्षा कराने के लिए प्रयुक्त नहीं होता।
❌ विकल्प D गलत है: Silver nitrate और Potassium chloride क्लाउड सीडिंग के मानक रसायन नहीं हैं।
संक्षिप्त नोट्स: Cloud Seeding
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क्लाउड सीडिंग वर्षा बढ़ाने की कृत्रिम तकनीक है।
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प्रमुख रसायन: Silver Iodide (AgI), Potassium Iodide (KI) और Dry Ice (CO₂)।
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ये पदार्थ संघनन या बर्फ नाभिक (Ice Nuclei) का कार्य करते हैं।
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इसका उपयोग वायु प्रदूषण कम करने, जल उपलब्धता बढ़ाने और सूखे से निपटने के लिए किया जाता है।
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यह तभी काम करता है जब उपयुक्त बादल पहले से मौजूद हों।
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यह साफ आकाश में नए बादल नहीं बना सकता।
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भारत, चीन, UAE और अमेरिका सहित कई देशों ने इसका प्रयोग किया है।
विश्व बैंक ने चेतावनी दी कि भारत उन पहले स्थानों में से एक बन सकता है जहां वेट-बल्ब तापमान नियमित रूप से 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन उपर्युक्त रिपोर्ट के निहितार्थ को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?
I. प्रायद्वीपीय भारत सबसे अधिक बाढ़, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों और सूखे से पीड़ित होगा।
II. मनुष्यों सहित जानवरों का अस्तित्व प्रभावित होगा क्योंकि पसीने के माध्यम से उनके शरीर की गर्मी को बाहर निकालना मुश्किल हो जाएगा।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (I और II दोनों)
Wet-bulb temperature तापमान और आर्द्रता (Humidity) दोनों को मिलाकर मापा जाता है। 35°C Wet-Bulb Temperature को अत्यंत खतरनाक माना जाता है क्योंकि इस स्तर पर मानव शरीर पसीने के माध्यम से स्वयं को ठंडा नहीं रख पाता। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि भारत के कुछ क्षेत्रों में ऐसी स्थितियाँ अधिक सामान्य हो सकती हैं।
✅ कथन I सही है: बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, उष्णकटिबंधीय चक्रवात और सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ सकती है, विशेषकर प्रायद्वीपीय भारत में।
✅ कथन II सही है: 35°C Wet-Bulb Temperature पर पसीना प्रभावी रूप से वाष्पित नहीं हो पाता, जिससे मनुष्य और पशु अपने शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकाल पाते और जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है।
संक्षिप्त नोट्स: Wet-Bulb Temperature
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Wet-Bulb Temperature में तापमान और आर्द्रता दोनों शामिल होते हैं।
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35°C Wet-Bulb Temperature को मानव सहनशीलता की ऊपरी सीमा माना जाता है।
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अधिक आर्द्रता होने पर पसीने का वाष्पीकरण कम हो जाता है।
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जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक गर्मी की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
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भारत हीट स्ट्रेस (Heat Stress) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील देशों में से एक है।
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हीटवेव के दौरान स्वास्थ्य जोखिम मापने में Wet-Bulb Temperature का उपयोग किया जाता है।
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इसका प्रभाव मानव स्वास्थ्य, कृषि, पशुधन और श्रम उत्पादकता पर पड़ता है।
जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता हानि से निपटने के लिए किस संगठन ने प्रकृति बहाली कानून (एनआरएल) लागू किया है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 — यूरोपीय संघ (European Union)
European Union ने Nature Restoration Law (NRL) लागू किया है। इसका उद्देश्य क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्रों का पुनर्स्थापन, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता बढ़ाना है।
✅ विकल्प A सही है: यूरोपीय संघ ने 2024 में Nature Restoration Law अपनाया, जिसमें पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
❌ विकल्प B गलत है: World Bank एक वित्तीय संस्था है, यह ऐसे कानून नहीं बनाती।
❌ विकल्प C गलत है: Organisation for Economic Co-operation and Development नीतिगत सुझाव देता है, लेकिन बाध्यकारी पर्यावरणीय कानून नहीं बनाता।
❌ विकल्प D गलत है: Food and Agriculture Organization खाद्य एवं कृषि क्षेत्र में कार्य करता है, लेकिन इस प्रकार के क्षेत्रीय कानून लागू नहीं करता।
संक्षिप्त नोट्स: Nature Restoration Law (NRL)
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Nature Restoration Law को यूरोपीय संघ ने 2024 में अपनाया।
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इसका उद्देश्य क्षतिग्रस्त स्थलीय, मीठे जल, तटीय और समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की बहाली है।
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यह EU की Biodiversity Strategy 2030 का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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इसमें सदस्य देशों के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित हैं।
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आर्द्रभूमि, वन, घासभूमि, नदियाँ और परागणकर्ता आवास इसके प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं।
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स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र कार्बन अवशोषण और जलवायु अनुकूलन में मदद करते हैं।
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यह कानून जैव विविधता ह्रास और जलवायु परिवर्तन दोनों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
UPSC Prelims 2025 - पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी Chapter-wise Distribution
पर्यावरण प्रदूषण
4 Qs (30.8%)जलवायु परिवर्तन
4 Qs (30.8%)पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी समसामयिकी
2 Qs (15.4%)पारिस्थितिकी की मूलभूत अवधारणाएँ
1 Qs (7.7%)जैव विविधता और संरक्षण
1 Qs (7.7%)अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय सम्मेलन एवं संगठन
1 Qs (7.7%)UPSC Prelims 2025 - पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी Questions FAQs
Q1 How many पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी questions were asked in UPSC Prelims 2025?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी in UPSC Prelims 2025?
- पर्यावरण प्रदूषण: 4 questions (30.8%)
- जलवायु परिवर्तन: 4 questions (30.8%)
- पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी समसामयिकी: 2 questions (15.4%)
- पारिस्थितिकी की मूलभूत अवधारणाएँ: 1 questions (7.7%)
- जैव विविधता और संरक्षण: 1 questions (7.7%)
- अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय सम्मेलन एवं संगठन: 1 questions (7.7%)