निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: भारत में, राज्य सरकारों के पास लघु खनिजों के निष्कर्षण के संबंध में रियायतें देने के लिए नियम बनाने की कोई शक्ति नहीं है, भले ही ऐसे खनिज उनके क्षेत्रों में स्थित हों।
कथन II: भारत में, केंद्र सरकार के पास संबंधित कानून के तहत लघु खनिजों को अधिसूचित करने की शक्ति है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
खनिज और खदान (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत राज्य सरकारों को लघु खनिजों (Minor Minerals) के लिए पट्टे और अन्य रियायतों से संबंधित नियम बनाने का अधिकार है।
वहीं केंद्र सरकार यह निर्धारित करती है कि कौन-से खनिज लघु खनिज (Minor Minerals) की श्रेणी में आएंगे।
कथन सही/गलत क्यों हैं:
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I | ❌ गलत | राज्य सरकारों को लघु खनिजों के लिए रियायत संबंधी नियम बनाने का अधिकार है। |
| II | ✅ सही | केंद्र सरकार लघु खनिजों की अधिसूचना जारी करती है। |
याद रखने की ट्रिक:
"वर्गीकरण केंद्र का, नियमन राज्य का।" → केंद्र खनिज को Minor Mineral घोषित करता है, राज्य उसके उपयोग और खनन को नियंत्रित करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लघु खनिज (Minor Minerals)
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संबंधित कानून | MMDR Act, 1957 |
| वर्गीकरण का अधिकार | केंद्र सरकार |
| रियायत/पट्टा नियम | राज्य सरकार |
| उदाहरण | रेत, बजरी, मिट्टी, साधारण पत्थर |
| उपयोग | निर्माण कार्य और स्थानीय खनन |
त्वरित तथ्य:
लघु खनिजों का प्रशासन मुख्य रूप से राज्य सरकारें करती हैं, लेकिन उन्हें "लघु खनिज" घोषित करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है।
Question 1 of 5 विधायी संबंध
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