निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
भारत के संविधान के संदर्भ में, यदि किसी राज्य में किसी क्षेत्र को पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया गया है,
I. राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में अपनी कार्यकारी शक्ति खो देती है और एक स्थानीय निकाय संपूर्ण प्रशासन अपने हाथ में ले लेता है।
II. केंद्र सरकार राज्यपाल की सिफ़ारिशों पर कुछ परिस्थितियों में ऐसे क्षेत्रों का संपूर्ण प्रशासन अपने हाथ में ले सकती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन I गलत है: किसी क्षेत्र को पाँचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने से राज्य सरकार की कार्यपालिका शक्ति समाप्त नहीं होती। प्रशासन राज्य सरकार के पास ही रहता है।
❌ कथन II गलत है: पाँचवीं अनुसूची में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि केंद्र सरकार राज्यपाल की सिफारिश पर अनुसूचित क्षेत्र का पूरा प्रशासन अपने हाथ में ले ले। केंद्र केवल राज्य को आवश्यक निर्देश दे सकता है।
इसलिए दोनों कथन गलत हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पाँचवीं अनुसूची
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| लागू क्षेत्र | अनुसूचित क्षेत्र (पूर्वोत्तर की छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को छोड़कर) |
| उद्देश्य | जनजातीय हितों की सुरक्षा |
| राज्यपाल की भूमिका | शांति एवं सुशासन हेतु नियम बना सकते हैं |
| जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) | जनजातीय कल्याण पर सलाह देती है |
| केंद्र की भूमिका | राज्यों को निर्देश दे सकता है |
| प्रशासन | राज्य सरकार के अधीन रहता है |
त्वरित तथ्य:
पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित है, जबकि छठी अनुसूची पूर्वोत्तर भारत के कुछ जनजातीय क्षेत्रों को स्वायत्त परिषदों की व्यवस्था देती है।
Question 2 of 6 पाँचवीं अनुसूची
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