निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह राज्य का राज्यपाल है जो उस राज्य के किसी भी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता देता है और घोषित करता है।
- किसी समुदाय को किसी राज्य में अनुसूचित जनजाति के रूप में घोषित करने की आवश्यकता नहीं है कि दूसरे राज्य में भी ऐसा हो।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 2 (केवल 2)
संविधान में अनुसूचित जनजातियों (STs) की पहचान के लिए विशेष प्रक्रिया दी गई है। किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति घोषित करने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति के पास होता है और यह मान्यता अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकती है।
❌ कथन 1 गलत है: किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति घोषित करने का अधिकार राज्यपाल को नहीं बल्कि भारत के राष्ट्रपति को अनुच्छेद 342 के तहत प्राप्त है।
✅ कथन 2 सही है: कोई समुदाय एक राज्य में अनुसूचित जनजाति हो सकता है, लेकिन दूसरे राज्य में नहीं, क्योंकि सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियाँ अलग-अलग होती हैं।
संक्षिप्त नोट्स: अनुसूचित जनजातियाँ (STs)
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अनुच्छेद 342 अनुसूचित जनजातियों से संबंधित है।
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अनुसूचित जनजातियों की सूची राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित की जाती है।
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इस सूची में परिवर्तन केवल संसद कानून बनाकर कर सकती है।
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ST का दर्जा राज्य-विशिष्ट होता है।
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संविधान शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में STs को विशेष संरक्षण देता है।
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लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों में STs के लिए आरक्षण है।
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पाँचवीं अनुसूची अधिकांश राज्यों के अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित है।
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छठी अनुसूची पूर्वोत्तर भारत के कुछ जनजातीय क्षेत्रों में स्वायत्त परिषदों का प्रावधान करती है।
Question 3 of 6 पाँचवीं अनुसूची
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