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नए राज्यों का गठन Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
राज्य - विवरण
I. अरुणाचल प्रदेश: राजधानी का नाम एक किले के नाम पर रखा गया है, और राज्य में दो राष्ट्रीय उद्यान हैं।
II. नागालैंड: राज्य एक संवैधानिक संशोधन अधिनियम के आधार पर अस्तित्व में आया।
III. त्रिपुरा: प्रारंभ में एक भाग 'सी' राज्य, यह 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के साथ एक केंद्र प्रशासित क्षेत्र बन गया और बाद में इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।
उपरोक्त जोड़े में से कितने जोड़े सही ढंग से सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (तीनों)
तीनों युग्म सही रूप से मेल खाते हैं। यह प्रश्न पूर्वोत्तर राज्यों के राजधानी, राष्ट्रीय उद्यान और राज्य गठन के इतिहास से संबंधित तथ्यों की जाँच करता है।
✅ युग्म I सही है: अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर का नाम ऐतिहासिक ईटा किले (Ita Fort) पर रखा गया है। राज्य में दो राष्ट्रीय उद्यान—नामदाफा और मौलिंग—स्थित हैं।
✅ युग्म II सही है: नागालैंड 1 दिसंबर 1963 को राज्य बना। इसका गठन State of Nagaland Act, 1962 के माध्यम से हुआ।
✅ युग्म III सही है: त्रिपुरा पहले Part 'C' State था, 1956 में केंद्र शासित प्रदेश बना और 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त किया।
संक्षिप्त नोट्स: पूर्वोत्तर राज्य – गठन एवं विशेषताएँ
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अरुणाचल प्रदेश को 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
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ईटा किला ईटानगर नाम का आधार है।
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नामदाफा राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे बड़े संरक्षित क्षेत्रों में से एक है।
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नागालैंड 1963 में भारत का 16वाँ राज्य बना।
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त्रिपुरा एक रियासत थी जिसने 1949 में भारत में विलय किया।
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त्रिपुरा और मणिपुर को 1972 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
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पूर्वोत्तर क्षेत्र को "सेवन सिस्टर्स" के नाम से जाना जाता है।
निम्नलिखित में से कौन सा 'राज्य' शब्द को सर्वोत्तम रूप से परिभाषित करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — व्यक्तियों का एक समुदाय जो स्थायी रूप से एक निश्चित क्षेत्र में निवास कर रहा है, बाहरी नियंत्रण से स्वतंत्र है और एक संगठित सरकार रखता है।
यह विकल्प राजनीति विज्ञान में मान्यता प्राप्त राज्य के चार आवश्यक तत्वों को समाहित करता है: (1) जनसंख्या (व्यक्तियों का समुदाय), (2) क्षेत्र (निश्चित भौगोलिक क्षेत्र), (3) सरकार (संगठित शासन प्रणाली), और (4) संप्रभुता (बाहरी नियंत्रण से स्वतंत्रता)। ये शास्त्रीय तत्व हैं जो राज्य को अन्य राजनीतिक इकाइयों से अलग करते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
• विकल्प 2 कानून और व्यवस्था बनाए रखने और प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा जैसे कार्यों पर केंद्रित है, जो राज्य के उद्देश्य हैं लेकिन इसकी मूल परिभाषा का हिस्सा नहीं हैं।
• विकल्प 3 संस्कृति और परंपरा पर जोर देता है, जो राजनीतिक सिद्धांत में राज्य की आवश्यक परिभाषात्मक विशेषताएं नहीं हैं।
• विकल्प 4 विशिष्ट संस्थागत विशेषताओं (केंद्रीय प्राधिकरण के प्रति जवाबदेह कार्यपालिका, स्वतंत्र न्यायपालिका) का उल्लेख करता है जो विशेष प्रकार की सरकारों की विशेषताएं हैं, सभी राज्यों के सार्वभौमिक तत्व नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राज्य के चार आवश्यक तत्व
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| 1. जनसंख्या | व्यक्तियों का समुदाय; कोई न्यूनतम या अधिकतम संख्या निर्दिष्ट नहीं; राज्य के अस्तित्व के लिए आवश्यक |
| 2. क्षेत्र | मान्यता प्राप्त सीमाओं के साथ निश्चित भौगोलिक क्षेत्र; भूमि, जल और वायु क्षेत्र शामिल |
| 3. सरकार | संगठित राजनीतिक प्राधिकरण जो कानून बनाता और लागू करता है; व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक |
| 4. संप्रभुता | क्षेत्र के भीतर सर्वोच्च अधिकार; बाहरी नियंत्रण से स्वतंत्रता (आंतरिक और बाहरी संप्रभुता) |
- आंतरिक संप्रभुता: अपने क्षेत्र के भीतर सभी व्यक्तियों और संघों पर राज्य का सर्वोच्च अधिकार
- बाहरी संप्रभुता: अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में अन्य राज्यों द्वारा नियंत्रण से स्वतंत्रता
- इन चार तत्वों को मोंटेवीडियो सम्मेलन (1933) में राज्यों के अधिकारों और कर्तव्यों पर औपचारिक रूप दिया गया
- राज्य को अन्य राज्यों से मान्यता मिल सकती है, लेकिन मान्यता राज्य का आवश्यक तत्व नहीं है
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