UPSC CSE Prelims
संसदीय प्रक्रियाएँ Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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भारत की संसद में सदस्यों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- अतारांकित प्रश्न वे होते हैं जिनका सदस्य सदन में मौखिक उत्तर चाहता है।
- तारांकित प्रश्न वे होते हैं जिनका सदस्य लिखित उत्तर चाहता है।
- अतारांकित प्रश्न पर कोई पूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता.
उपरोक्त कथनों के आधार पर निम्नलिखित में से कौन सा निष्कर्ष सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 3 — केवल एक सही कथन (कथन 3)
कथन 1 — गलत। अतारांकित प्रश्नों का उत्तर लिखित रूप में दिया जाता है — मौखिक नहीं। संबंधित मंत्री द्वारा लिखित उत्तर सदन की मेज पर रखा हुआ माना जाता है।
कथन 2 — गलत। तारांकित प्रश्नों (* से चिह्नित) का उत्तर सदन में मौखिक रूप से दिया जाता है — लिखित नहीं।
कथन 3 — सही। चूँकि अतारांकित प्रश्नों का उत्तर लिखित रूप में दिया जाता है, इसलिए उन पर कोई अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता। अनुपूरक प्रश्न केवल निम्न के मौखिक उत्तर के बाद पूछे जा सकते हैं:
- तारांकित प्रश्न
- अल्प सूचना प्रश्न
मुख्य ट्रिक: कथन 1 और 2 एक-दूसरे के बिल्कुल उलटे हैं
भारतीय संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- लोक सभा में लंबित विधेयक उसके विघटन पर व्यपगत हो जाता है।
- लोक सभा द्वारा पारित और राज्य सभा में लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है।
- एक विधेयक जिसके संबंध में भारत के राष्ट्रपति ने सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के अपने इरादे की सूचना दी है, लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — 1 और 2
जब लोक सभा का विघटन होता है, तो लोक सभा में लंबित विधेयक और लोक सभा द्वारा पारित लेकिन राज्य सभा में लंबित विधेयक स्वतः व्यपगत हो जाते हैं। हालांकि, जिस विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति ने संयुक्त बैठक बुलाने के अपने इरादे की सूचना दी है, वह लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है, क्योंकि संयुक्त बैठक की प्रक्रिया मान्य रहती है।
✅ कथन 1 (लोक सभा में लंबित विधेयक) – सही: लोक सभा में लंबित विधेयक उसके विघटन पर स्वतः व्यपगत हो जाता है क्योंकि विघटन उस सदन में सभी लंबित विधायी कार्यों को समाप्त कर देता है।
✅ कथन 2 (लोक सभा द्वारा पारित, राज्य सभा में लंबित विधेयक) – सही: लोक सभा द्वारा पारित लेकिन राज्य सभा में लंबित विधेयक भी लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है, क्योंकि इसे लोक सभा से उत्पन्न विधेयक माना जाता है।
❌ कथन 3 (संयुक्त बैठक के लिए सूचित विधेयक) – गलत: जिस विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति ने सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के अपने इरादे की सूचना दी है, वह लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है और नई लोक सभा के गठन के बाद संयुक्त बैठक में लिया जा सकता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संसद में विधेयकों का व्यपगत होना
- लोक सभा में लंबित विधेयक: लोक सभा में लंबित सभी विधेयक उसके विघटन पर व्यपगत हो जाते हैं, सिवाय उन विधेयकों के जो पहले से पारित होकर राज्य सभा को भेजे गए हों या राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए लंबित हों।
- लोक सभा द्वारा पारित विधेयक: लोक सभा द्वारा पारित लेकिन राज्य सभा में लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाते हैं।
- केवल राज्य सभा में लंबित विधेयक: केवल राज्य सभा में उत्पन्न और लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होते हैं, क्योंकि राज्य सभा एक स्थायी सदन है।
- संयुक्त बैठक के लिए सूचित विधेयक: जिन विधेयकों के संबंध में राष्ट्रपति ने संयुक्त बैठक बुलाने के अपने इरादे की सूचना दी है, वे व्यपगत नहीं होते हैं और लोक सभा के पुनर्गठन के बाद संयुक्त बैठक में लिए जा सकते हैं।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए लंबित विधेयक: दोनों सदनों द्वारा पारित और राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होते हैं।
- संवैधानिक विधेयक: किसी भी चरण में लंबित विधेयक, जिसमें संविधान संशोधन विधेयक भी शामिल हैं, सामान्य विधेयकों के समान व्यपगत होने के नियमों का पालन करते हैं।
- राज्य सभा स्थायी सदन के रूप में: राज्य सभा एक स्थायी निकाय है और कभी विघटित नहीं होती है, अतः केवल इसमें उत्पन्न और रहने वाले विधेयक लोक सभा के विघटन के कारण व्यपगत नहीं होते हैं।
| विधेयक का प्रकार | चरण | लोक सभा के विघटन का प्रभाव |
|---|---|---|
| लोक सभा में लंबित विधेयक | लोक सभा में कोई भी चरण | व्यपगत हो जाता है |
| लोक सभा द्वारा पारित विधेयक | राज्य सभा में लंबित | व्यपगत हो जाता है |
| राज्य सभा में उत्पन्न विधेयक | केवल राज्य सभा में लंबित | व्यपगत नहीं होता है |
| दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक | राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए लंबित | व्यपगत नहीं होता है |
| संयुक्त बैठक के लिए सूचित विधेयक | राष्ट्रपति की सूचना के बाद | व्यपगत नहीं होता है |
| राष्ट्रपति द्वारा लौटाया गया विधेयक | लोक सभा में पुनर्विचार के लिए लंबित | व्यपगत हो जाता है |
भारत की संसद मंत्रिपरिषद के कार्यों पर निम्नलिखित के माध्यम से नियंत्रण रखती है -
- स्थगन प्रस्ताव
- प्रश्नकाल
- अनुपूरक प्रश्न
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
भारत की संसद कार्यकारिणी की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न तंत्रों के माध्यम से मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण रखती है। उल्लिखित सभी तीन साधन—स्थगन प्रस्ताव, प्रश्नकाल और अनुपूरक प्रश्न—कार्यपालिका की जांच और नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण संसदीय उपकरण हैं।
✅ कथन 1 – सही: स्थगन प्रस्ताव सार्वजनिक महत्व के तत्काल मामलों पर चर्चा की अनुमति देता है और सरकार की निंदा के लिए उपयोग किया जा सकता है, जिससे मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण रखा जा सकता है।
✅ कथन 2 – सही: प्रश्नकाल एक दैनिक तंत्र है जिसके दौरान सांसद नीतियों और प्रशासनिक कार्यों पर मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं, जिससे शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
✅ कथन 3 – सही: अनुपूरक प्रश्न प्रश्नकाल के दौरान प्रारंभिक उत्तर के बाद पूछे जाते हैं, जो सांसदों को गहराई से जांच करने और स्पष्टीकरण मांगने की अनुमति देते हैं, जिससे मंत्रिस्तरीय कार्यों पर संसदीय नियंत्रण बढ़ता है।
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निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- लोक सभा के सत्रावसान पर लोक सभा में लंबित विधेयक समाप्त हो जाता है।
- राज्य सभा में लंबित विधेयक, जो लोक सभा द्वारा पारित नहीं किया गया है, लोक सभा के विघटन पर समाप्त नहीं होगा।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
❌ कथन 1 – गलत: लोक सभा में लंबित विधेयक सत्रावसान पर समाप्त नहीं होता है। सत्रावसान केवल संसदीय सत्र की समाप्ति है, सदन का विघटन नहीं। सभी लंबित विधेयक, प्रस्ताव और अन्य कार्य बरकरार रहते हैं और अगले सत्र में जहां से छोड़े गए थे वहीं से जारी रहते हैं।
✅ कथन 2 – सही: राज्य सभा में लंबित विधेयक जो लोक सभा द्वारा पारित नहीं किया गया है, लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है। राज्य सभा एक स्थायी सदन है (कभी विघटित नहीं होता), इसलिए वहां से उत्पन्न या लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन के बावजूद जारी रहते हैं। केवल लोक सभा में ही लंबित विधेयक उसके विघटन पर व्यपगत होते हैं।
भारत में अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत के संविधान में अविश्वास प्रस्ताव का कोई उल्लेख नहीं है।
- अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: भारत का संविधान स्पष्ट रूप से अविश्वास प्रस्ताव का उल्लेख नहीं करता; यह लोकसभा में कार्य संचालन तथा प्रक्रिया के नियम के नियम 198 के तहत प्रदान किया गया है।
✅ कथन 2 – सही: अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है (राज्यसभा में नहीं) क्योंकि अनुच्छेद 75(3) के तहत मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। इसे स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।
भारत की संसद में, स्थगन प्रस्ताव का उद्देश्य है:
Detailed Explanation:
स्थगन प्रस्ताव एक असाधारण संसदीय उपकरण है जो केवल लोकसभा में (राज्यसभा में नहीं) अत्यावश्यक लोक महत्व के निश्चित मामले पर चर्चा के लिए प्रयोग किया जाता है। यह सदन के सामान्य कार्य को बाधित करता है और सरकार के विरुद्ध निंदा का साधन माना जाता है, जिसके लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।
❌ विकल्प 2 – गलत: प्रश्नकाल और अन्य उपकरणों का उपयोग मंत्रियों से जानकारी एकत्र करने के लिए किया जाता है, स्थगन प्रस्ताव का नहीं।
❌ विकल्प 3 – गलत: यह कटौती प्रस्ताव का वर्णन करता है, जो बजट चर्चा के दौरान अनुदान की मांगों में विशिष्ट राशि कम करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
❌ विकल्प 4 – गलत: यह सदन का स्थगन का वर्णन है, जो पीठासीन अधिकारी द्वारा अव्यवस्था या गणपूर्ति की कमी के कारण सत्र को निलंबित करने की शक्ति है, सदस्यों द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव नहीं।
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