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संसदीय समितियाँ Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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भारत की संसद की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- हालांकि इस समिति के सदस्य संसद के दोनों सदनों से चुने जाते हैं, लेकिन इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यसभा के सभापति द्वारा की जाती है।
- बीस सदस्य राज्य सभा द्वारा और दस सदस्य लोकसभा द्वारा चुने जाते हैं।
- केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री को छोड़कर कोई भी मंत्री इस समिति का सदस्य बनने के लिए पात्र नहीं है।
- सदस्यों को उनके कार्यालय में प्रवेश करने की तारीख से दो साल की निश्चित अवधि के लिए चुना जाता है।
उपरोक्त कथनों के आधार पर निम्नलिखित में से कौन सा निष्कर्ष सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 4 — कोई सही कथन नहीं
कथन 1 — गलत। अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है — राज्यसभा सभापति द्वारा नहीं।
कथन 2 — गलत। संरचना उल्टी है:
- 20 सदस्य → लोकसभा द्वारा निर्वाचित
- 10 सदस्य → राज्यसभा द्वारा निर्वाचित
कथन 3 — गलत। कोई भी मंत्री सदस्य बनने के लिए पात्र नहीं है — कोई अपवाद नहीं, यहाँ तक कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री के लिए भी नहीं। यदि निर्वाचन के बाद कोई सदस्य मंत्री बनता है, तो वह तत्काल सदस्यता खो देता है।
कथन 4 — गलत। कार्यकाल एक वर्ष से अधिक नहीं होता — दो वर्ष नहीं। इसे PAC, प्राक्कलन समिति की तरह वार्षिक रूप से पुनर्गठित किया जाता है।
लोकसभा में आचार समिति के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- प्रारंभ में यह एक तदर्थ समिति थी।
- केवल लोकसभा का सदस्य ही लोकसभा के किसी सदस्य के अनैतिक आचरण से संबंधित शिकायत कर सकता है।
- यह समिति किसी भी ऐसे मामले पर विचार नहीं कर सकती जो न्यायाधीन हो।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 — केवल कथन 1 और 3 सही हैं
लोकसभा की एथिक्स कमेटी (Ethics Committee) सांसदों के अनैतिक आचरण से संबंधित मामलों की जांच करती है और आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश करती है। यह पहले एक अस्थायी समिति थी, बाद में स्थायी समिति बनी।
✅ कथन 1 सही है: लोकसभा की एथिक्स कमेटी का गठन 2000 में एक एड-हॉक (अस्थायी) समिति के रूप में हुआ था। इसे 2015 में स्थायी समिति बनाया गया।
❌ कथन 2 गलत है: केवल लोकसभा सदस्य ही शिकायत नहीं कर सकते। कोई भी व्यक्ति शिकायत कर सकता है, लेकिन बाहरी व्यक्ति की शिकायत को किसी लोकसभा सदस्य द्वारा अग्रेषित किया जाना आवश्यक है।
✅ कथन 3 सही है: समिति न्यायालय में विचाराधीन (Sub-Judice) मामलों पर विचार नहीं कर सकती।
संक्षिप्त नोट्स: लोकसभा एथिक्स कमेटी
-
2000 में एड-हॉक समिति के रूप में गठित।
-
2015 में स्थायी समिति बनी।
-
सांसदों के अनैतिक आचरण की जांच करती है।
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संसदीय नैतिकता और आचरण के मानकों को बनाए रखती है।
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दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।
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आम नागरिक भी शिकायत कर सकते हैं।
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Sub-Judice मामलों की जांच नहीं करती।
-
संसद की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत में, निम्नलिखित में से कौन दूरसंचार, बीमा, बिजली आदि जैसे क्षेत्रों में स्वतंत्र नियामकों की समीक्षा करता है?
- संसद द्वारा गठित तदर्थ समितियाँ
- संसदीय विभाग संबंधित स्थायी समितियाँ
- वित्त आयोग
- वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग
- नीति आयोग
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — 1 और 2
भारत में, दूरसंचार, बीमा और बिजली जैसे क्षेत्रों में स्वतंत्र नियामकों की समीक्षा मुख्य रूप से संसदीय तंत्र द्वारा की जाती है। तदर्थ समितियाँ (संयुक्त संसदीय समितियों सहित) नियामक निकायों की विशिष्ट जांच या समीक्षा के लिए गठित की जाती हैं, जबकि विभाग संबंधित स्थायी समितियाँ (DRSCs) अपने संबंधित मंत्रालयों के अधीन आने वाले नियामकों की वार्षिक रिपोर्ट, बजट और प्रदर्शन की नियमित रूप से जांच करती हैं, जिससे कार्यकारी जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
✅ कथन 1 – सही: तदर्थ समितियाँ, जिनमें संयुक्त संसदीय समितियाँ (JPCs) शामिल हैं, विशिष्ट नियामक निकायों की समीक्षा या उनके कामकाज में अनियमितताओं की जांच के लिए संसद द्वारा स्थापित की जाती हैं।
✅ कथन 2 – सही: संसदीय विभाग संबंधित स्थायी समितियाँ (DRSCs) अपने संबंधित मंत्रालयों के अधीन आने वाले स्वतंत्र नियामकों के प्रदर्शन, वार्षिक रिपोर्ट और बजट आवंटन की व्यवस्थित रूप से समीक्षा करती हैं।
❌ कथन 3 – गलत: वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) मुख्य रूप से संघ और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण से संबंधित है, न कि क्षेत्रीय नियामकों की समीक्षा से।
❌ कथन 4 – गलत: वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (FSLRC) वित्तीय क्षेत्र में कानूनी सुधारों की सिफारिश करने के लिए बनाया गया एक अस्थायी निकाय था; यह नियामकों की निरंतर समीक्षा नहीं करता है।
❌ कथन 5 – गलत: नीति आयोग एक नीति थिंक टैंक है जो रणनीतिक सलाह प्रदान करता है लेकिन स्वतंत्र नियामकों की औपचारिक रूप से समीक्षा या निगरानी करने का वैधानिक अधिकार नहीं रखता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: नियामकों की संसदीय निगरानी
- तदर्थ समितियाँ: विशिष्ट उद्देश्यों के लिए स्थापित अस्थायी संसदीय समितियाँ, जैसे कि विशेष संस्थानों या नियामकों की कार्यप्रणाली की जांच या अनियमितताओं की जांच (उदा. JPCs)।
- विभाग संबंधित स्थायी समितियाँ (DRSCs): 24 स्थायी समितियाँ (लोकसभा के लिए 16, राज्यसभा के लिए 8) जो मंत्रालयों और उनके संबद्ध नियामकों के विधेयकों, बजट और वार्षिक रिपोर्टों की जांच करती हैं।
- संसदीय जवाबदेही: स्वतंत्र नियामक, स्वायत्तता के बावजूद, समिति जांच, प्रश्नों और बहसों के माध्यम से संसद के प्रति जवाबदेह रहते हैं।
- नियामकों के उदाहरण: TRAI (दूरसंचार), IRDAI (बीमा), SEBI (प्रतिभूति), CERC (बिजली), आदि।
- वित्त आयोग: संवैधानिक निकाय (अनुच्छेद 280) जो राजकोषीय संघवाद पर केंद्रित है—केंद्र और राज्यों के बीच करों और अनुदानों का वितरण।
- नीति आयोग: योजना आयोग की जगह लेने वाला नीति आयोग; रणनीतिक इनपुट प्रदान करता है लेकिन नियामक निरीक्षण का कोई जनादेश नहीं है।
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भारत की संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सी संसदीय समिति इस बात की जांच करती है और सदन को रिपोर्ट करती है कि क्या संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रत्यायोजित विनियम, नियम, उप-नियम, उप-विधियां आदि बनाने की शक्तियों का कार्यपालिका द्वारा ऐसे प्रत्यायोजन के दायरे में उचित रूप से प्रयोग किया जा रहा है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — अधीनस्थ विधान समिति
अधीनस्थ विधान समिति (CSL) को विशेष रूप से यह जांच करने और संसद को रिपोर्ट करने का अधिदेश प्राप्त है कि क्या विनियम, नियम, उप-नियम, उप-विधियां आदि बनाने की शक्तियां, जो संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रत्यायोजित हैं, कार्यपालिका द्वारा ऐसे प्रत्यायोजन के दायरे में उचित रूप से प्रयोग की जा रही हैं। यह समिति सुनिश्चित करती है कि कार्यपालिका अपने प्रत्यायोजित अधिकार से अधिक न जाए और सभी अधीनस्थ विधान मूल अधिनियम और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हों।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
❌ विकल्प 1 – सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति: यह समिति संसद में मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों, वादों और प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन को ट्रैक करती है, न कि अधीनस्थ विधान को।
❌ विकल्प 3 – नियम समिति: यह समिति सदन में प्रक्रिया और कार्य संचालन को विनियमित करने के लिए नियमों को बनाने और संशोधित करने से संबंधित है।
❌ विकल्प 4 – कार्य मंत्रणा समिति: यह समिति सदन में सरकारी और अन्य कार्यों की चर्चा के लिए समय आवंटित करती है और प्रत्यायोजित विधान की जांच नहीं करती।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संसदीय समितियां
| समिति | प्राथमिक कार्य |
|---|---|
| अधीनस्थ विधान समिति | यह जांच करती है कि क्या प्रत्यायोजित शक्तियां (नियम, विनियम, उप-विधियां बनाने के लिए) संवैधानिक और वैधानिक सीमाओं के भीतर कार्यपालिका द्वारा उचित रूप से प्रयोग की जा रही हैं |
| सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति | संसद में मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों, वादों और प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन की निगरानी करती है |
| नियम समिति | सदन में प्रक्रिया और कार्य संचालन को विनियमित करने वाले नियमों को बनाती और संशोधित करती है |
| कार्य मंत्रणा समिति | सदन में विधायी और अन्य कार्यों की चर्चा के लिए समय आवंटित करती है |
| याचिका समिति | सामान्य जनहित के मामलों पर नागरिकों की याचिकाओं और अभ्यावेदन की जांच करती है |
निम्नलिखित में से कौन सी संसद की सबसे बड़ी समिति है?
Detailed Explanation:
प्राक्कलन समिति सबसे बड़ी संसदीय समिति है जिसमें 30 सदस्य हैं, जो प्रतिवर्ष केवल लोकसभा से चुने जाते हैं।
लोक लेखा समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति में प्रत्येक में 22 सदस्य हैं (15 लोकसभा से + 7 राज्यसभा से), जबकि याचिका समिति में लोकसभा में 15 सदस्य हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: लोक लेखा संबंधी संसदीय समिति:
- लोक सभा के 25 से अधिक सदस्यों से मिलकर नहीं बनती है
- सरकार के विनियोग और वित्त लेखाओं की जांच करती है
- भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट की जांच करती है
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: लोक लेखा समिति (PAC) में 22 सदस्य होते हैं (15 लोक सभा से, 7 राज्य सभा से), 25 नहीं। सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व द्वारा एकल संक्रमणीय मत से प्रतिवर्ष होता है।
✅ कथन 2 – सही: PAC सरकार के विनियोग लेखाओं और वित्त लेखाओं की जांच करती है ताकि सार्वजनिक धन कानूनी तरीके से और निर्धारित उद्देश्यों के लिए खर्च हो।
✅ कथन 3 – सही: PAC नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की लेखा परीक्षा रिपोर्टों की जांच करती है, जो PAC के विचार-विमर्श में 'मार्गदर्शक, दार्शनिक और मित्र' की भूमिका निभाते हैं।
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