लोकसभा में आचार समिति के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- प्रारंभ में यह एक तदर्थ समिति थी।
- केवल लोकसभा का सदस्य ही लोकसभा के किसी सदस्य के अनैतिक आचरण से संबंधित शिकायत कर सकता है।
- यह समिति किसी भी ऐसे मामले पर विचार नहीं कर सकती जो न्यायाधीन हो।
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Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 — केवल कथन 1 और 3 सही हैं
लोकसभा की एथिक्स कमेटी (Ethics Committee) सांसदों के अनैतिक आचरण से संबंधित मामलों की जांच करती है और आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश करती है। यह पहले एक अस्थायी समिति थी, बाद में स्थायी समिति बनी।
✅ कथन 1 सही है: लोकसभा की एथिक्स कमेटी का गठन 2000 में एक एड-हॉक (अस्थायी) समिति के रूप में हुआ था। इसे 2015 में स्थायी समिति बनाया गया।
❌ कथन 2 गलत है: केवल लोकसभा सदस्य ही शिकायत नहीं कर सकते। कोई भी व्यक्ति शिकायत कर सकता है, लेकिन बाहरी व्यक्ति की शिकायत को किसी लोकसभा सदस्य द्वारा अग्रेषित किया जाना आवश्यक है।
✅ कथन 3 सही है: समिति न्यायालय में विचाराधीन (Sub-Judice) मामलों पर विचार नहीं कर सकती।
संक्षिप्त नोट्स: लोकसभा एथिक्स कमेटी
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2000 में एड-हॉक समिति के रूप में गठित।
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2015 में स्थायी समिति बनी।
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सांसदों के अनैतिक आचरण की जांच करती है।
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संसदीय नैतिकता और आचरण के मानकों को बनाए रखती है।
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दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है।
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आम नागरिक भी शिकायत कर सकते हैं।
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Sub-Judice मामलों की जांच नहीं करती।
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संसद की गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Question 2 of 6 संसदीय समितियाँ
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