UPSC Prelims 2024 Question Paper
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संविधान (71वां संशोधन) अधिनियम, 1992 ने संविधान की आठवीं अनुसूची में निम्नलिखित में से कौन सी भाषाओं को शामिल करने के लिए संशोधन किया?
- कोंकणी
- मणिपुरी
- नेपाली
- मैथिली
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — 1, 2 और 3
71वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में तीन भाषाओं को जोड़ा: कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली। इससे अनुसूचित भाषाओं की कुल संख्या 15 से बढ़कर 18 हो गई। मैथिली इस संशोधन का हिस्सा नहीं थी; इसे बाद में 92वें संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से बोडो, डोगरी और संथाली के साथ जोड़ा गया था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: आठवीं अनुसूची और भाषाओं का संशोधन
- आठवीं अनुसूची का अवलोकन: संविधान की आठवीं अनुसूची में भारत द्वारा मान्यता प्राप्त आधिकारिक भाषाओं की सूची है। मूल रूप से, 1950 में जब संविधान लागू हुआ तो इसमें 14 भाषाएं शामिल थीं। इन भाषाओं को संवैधानिक मान्यता, विकास के लिए सरकारी सहायता प्राप्त है और इनका उपयोग संसदीय कार्यवाही और प्रतियोगी परीक्षाओं में किया जा सकता है।
- 21वां संशोधन अधिनियम, 1967: यह आठवीं अनुसूची में पहला संशोधन था, जिसमें विभाजन के दौरान विस्थापित सिंधी भाषी समुदाय की भाषाई पहचान को मान्यता देने के लिए सिंधी को 15वीं भाषा के रूप में जोड़ा गया।
- 71वां संशोधन अधिनियम, 1992: तीन भाषाएं जोड़ी गईं - कोंकणी (गोवा और पड़ोसी राज्यों में बोली जाने वाली), मणिपुरी या मैतेई (मणिपुर की आधिकारिक भाषा), और नेपाली (सिक्किम, दार्जिलिंग और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बोली जाने वाली) - जिससे कुल संख्या 18 भाषाओं तक पहुंच गई।
- 92वां संशोधन अधिनियम, 2003: चार भाषाएं जोड़ी गईं - बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली - जिससे वर्तमान में कुल 22 अनुसूचित भाषाएं हो गईं, जो भारत की विशाल भाषाई विविधता को मान्यता देती हैं।
- अनुसूचित भाषाओं का महत्व: आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को आधिकारिक भाषा आयोगों में प्रतिनिधित्व का अधिकार है, इनका उपयोग यूपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में किया जा सकता है, और इन्हें उनके विकास और प्रचार के लिए सरकारी सहायता प्राप्त होती है।
- शास्त्रीय भाषाएं: छह भाषाओं को अलग से 'शास्त्रीय भाषा' का दर्जा दिया गया है - तमिल (2004), संस्कृत (2005), कन्नड़ (2008), तेलुगु (2008), मलयालम (2013), और ओडिया (2014)। यह दर्जा अनुसूचित भाषा के दर्जे से अलग है और प्राचीन साहित्यिक विरासत को मान्यता देता है।
- समावेशन के मानदंड: हालांकि कोई निश्चित संवैधानिक मानदंड मौजूद नहीं है, लेकिन आम तौर पर महत्वपूर्ण संख्या में बोलने वाले, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक महत्व वाली भाषाओं पर विचार किया जाता है। तुलु, भोजपुरी और राजस्थानी सहित कई भाषाओं की समावेशन की मांग जारी है।
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 344 आधिकारिक भाषाओं पर एक आयोग और संसद की एक समिति के गठन का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 351 संघ को हिंदी को बढ़ावा देने और इसके संवर्धन के लिए संस्कृत और अन्य आठवीं अनुसूची की भाषाओं से शब्द लेने का निर्देश देता है।
| संशोधन अधिनियम | वर्ष | जोड़ी गई भाषाएं | कुल भाषाएं |
|---|---|---|---|
| मूल संविधान | 1950 | असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू | 14 |
| 21वां संशोधन | 1967 | सिंधी | 15 |
| 71वां संशोधन | 1992 | कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली | 18 |
| 92वां संशोधन | 2003 | बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली | 22 |
भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार, संसद निम्नलिखित तरीकों से संविधान के किसी भी प्रावधान में संशोधन कर सकती है:
- परिवर्धन (Addition)
- परिवर्तन (Variation)
- निरसन (Repeal)
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 368 संसद को तीन विशिष्ट तरीकों से संविधान में संशोधन करने की व्यापक शक्तियाँ प्रदान करता है: परिवर्धन (नए प्रावधानों को जोड़ना), परिवर्तन (मौजूदा प्रावधानों को संशोधित करना), और निरसन (प्रावधानों को हटाना)। यह लचीलापन सुनिश्चित करता है कि संविधान एक जीवंत दस्तावेज़ बना रहे जो संवैधानिक निरंतरता बनाए रखते हुए बदलती सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक आवश्यकताओं के अनुकूल हो सके।
✅ कथन 1 (परिवर्धन) – सही: संसद संविधान में नए प्रावधान जोड़ सकती है, जैसे 93वें संशोधन अधिनियम, 2005 के माध्यम से अनुच्छेद 15(5) का समावेश, जो शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण की अनुमति देता है।
✅ कथन 2 (परिवर्तन) – सही: संसद मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों को संशोधित कर सकती है, जैसा कि 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रदर्शित किया गया, जिसने प्रस्तावना और विभिन्न अन्य अनुच्छेदों में परिवर्तन किए।
✅ कथन 3 (निरसन) – सही: संसद संवैधानिक प्रावधानों को पूरी तरह से हटा सकती है, जैसा कि 26वें संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा उदाहरित है, जिसने रियासतों के पूर्व शासकों के लिए प्रिवी पर्स को समाप्त कर दिया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधन शक्तियाँ
- अनुच्छेद 368: संसद को संविधान के किसी भी प्रावधान में संशोधन करने की प्रक्रिया और शक्ति प्रदान करता है, जिससे यह न तो अत्यधिक कठोर और न ही अत्यधिक लचीला बनता है।
- संशोधन की तीन विधियाँ: परिवर्धन (नए अनुच्छेद/खंड जोड़ना), परिवर्तन (मौजूदा प्रावधानों को संशोधित करना), और निरसन (प्रावधानों को पूरी तरह हटाना)।
- संशोधन प्रक्रिया: संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3) की आवश्यकता होती है; कुछ संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्य विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थन भी आवश्यक है।
- मूल संरचना सिद्धांत: केशवानंद भारती मामले (1973) में स्थापित, संसद की संशोधन शक्ति को सीमित करता है—कुछ मौलिक विशेषताओं को बदला या नष्ट नहीं किया जा सकता।
- संशोधनों के प्रकार: साधारण बहुमत संशोधन (जैसे राज्यों का निर्माण/समाप्ति), विशेष बहुमत संशोधन (अधिकांश प्रावधान), और विशेष बहुमत प्लस राज्य अनुसमर्थन (संघीय प्रावधान, प्रतिनिधित्व, आदि)।
- उल्लेखनीय संशोधन: 42वाँ संशोधन (लघु संविधान), 44वाँ संशोधन (आपातकाल के दौरान सीमित किए गए कुछ अधिकार बहाल किए), 73वें और 74वें संशोधन (स्थानीय स्वशासन), 101वाँ संशोधन (जीएसटी)।
| संशोधन का प्रकार | आवश्यक बहुमत | राज्य अनुसमर्थन | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| साधारण बहुमत | उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत | आवश्यक नहीं | नए राज्यों का निर्माण, नागरिकता प्रावधान |
| विशेष बहुमत | कुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित और मतदान करने वाले 2/3 | आवश्यक नहीं | मौलिक अधिकार, निदेशक तत्व |
| विशेष बहुमत + राज्य अनुसमर्थन | संसद में विशेष बहुमत | कम से कम आधे राज्यों द्वारा अनुसमर्थन आवश्यक | राष्ट्रपति का निर्वाचन, संघ-राज्य शक्ति वितरण, संसद में प्रतिनिधित्व |
प्रतिषेध रिट (Writ of Prohibition) सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालयों द्वारा जारी किया जाने वाला एक आदेश है:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — निचली अदालत को किसी मामले में कार्यवाही जारी रखने से प्रतिषेधित करता है।
प्रतिषेध रिट सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालयों द्वारा निचली अदालतों या न्यायाधिकरणों को उन मामलों में कार्यवाही जारी रखने से रोकने के लिए जारी की जाती है जहां उनके पास अधिकार क्षेत्र नहीं है या वे कानून के विपरीत कार्य कर रहे हैं। यह एक निवारक उपाय है, जो अंतिम निर्णय लेने से पहले निचली अदालत को अपने अधिकार से अधिक कार्य करने से रोकता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रतिषेध रिट
- परिभाषा: उच्च न्यायालयों (सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय) द्वारा निचली अदालतों या न्यायाधिकरणों को उन मामलों में कार्यवाही रोकने के लिए जारी किया गया न्यायिक आदेश जहां निचली अदालत अपने अधिकार क्षेत्र से अधिक कार्य कर रही है।
- प्रकृति: यह एक निवारक रिट है, अर्थात यह निचली अदालत द्वारा निर्णय लेने से पहले कार्यवाही को रोकती है, परमादेश (Certiorari) के विपरीत जो निर्णय के बाद जारी की जाती है।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 32 (सर्वोच्च न्यायालय) और अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय) के तहत, मौलिक अधिकारों और अन्य उद्देश्यों के लिए प्रतिषेध सहित रिट जारी की जा सकती हैं।
- दायरा: यह केवल न्यायिक और अर्ध-न्यायिक निकायों पर लागू होती है, प्रशासनिक अधिकारियों या विधायी निकायों पर नहीं।
- उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि न्यायालय और न्यायाधिकरण अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र के भीतर काम करें और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन न करें।
- अन्य रिट से तुलना: जबकि प्रतिषेध भविष्य की कार्रवाई को रोकता है, परमादेश पिछले निर्णयों को रद्द करता है। परमादेश कर्तव्य के निष्पादन को बाध्य करता है, जबकि बंदी प्रत्यक्षीकरण व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है।
- उदाहरण: यदि कोई सिविल न्यायालय किसी ऐसे मामले की सुनवाई शुरू करता है जो कानूनी रूप से आपराधिक अधिकार क्षेत्र में आता है, तो प्रतिषेध रिट कार्यवाही को रोक सकती है।
| रिट का प्रकार | उद्देश्य | कब जारी की जाती है | किसके खिलाफ |
|---|---|---|---|
| प्रतिषेध | अधिकार क्षेत्र की अधिकता को रोकना | निर्णय से पहले (निवारक) | निचली अदालतें/न्यायाधिकरण |
| परमादेश | अवैध आदेशों को रद्द करना | निर्णय के बाद (उपचारात्मक) | निचली अदालतें/न्यायाधिकरण |
| परमादेश | कर्तव्य के निष्पादन को बाध्य करना | जब कर्तव्य का पालन नहीं किया जाता | सार्वजनिक अधिकारी/निकाय |
| बंदी प्रत्यक्षीकरण | व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा | अवैध हिरासत | हिरासत में रखने वाला प्राधिकरण |
| अधिकार पृच्छा | पद के अतिक्रमण की जांच | पद का अवैध कब्ज़ा | पद धारण करने वाला व्यक्ति |
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संघ बजट के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- संघ वित्त मंत्री राष्ट्रपति की ओर से संसद के दोनों सदनों के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करते हैं।
- संघ स्तर पर, भारत के राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना किसी अनुदान की मांग नहीं की जा सकती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
संघ बजट के संबंध में दोनों कथन सही हैं। भारत का संविधान यह अनिवार्य करता है कि राष्ट्रपति वार्षिक वित्तीय विवरण को संसद के समक्ष रखवाते हैं, जो व्यवहार में संघ वित्त मंत्री द्वारा किया जाता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना संघ स्तर पर किसी अनुदान की मांग नहीं की जा सकती, जो सार्वजनिक व्यय पर कार्यकारी नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
✅ कथन 1 (बजट की प्रस्तुति) – सही: अनुच्छेद 112 के तहत, राष्ट्रपति वार्षिक वित्तीय विवरण (संघ बजट) को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं, जिसे व्यवहार में संघ वित्त मंत्री राष्ट्रपति की ओर से प्रस्तुत करते हैं।
✅ कथन 2 (अनुदान की मांग) – सही: अनुच्छेद 113(3) स्पष्ट रूप से प्रावधान करता है कि भारत के राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना किसी अनुदान की मांग नहीं की जाएगी, जो भारत की संचित निधि से व्यय प्रस्तावों पर कार्यकारी नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संघ बजट और वित्तीय प्रक्रिया
- वार्षिक वित्तीय विवरण (अनुच्छेद 112): राष्ट्रपति प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए संसद के दोनों सदनों के समक्ष वार्षिक वित्तीय विवरण (संघ बजट) रखवाते हैं, जिसमें अनुमानित प्राप्तियां और व्यय दिखाया जाता है।
- बजट की विषय-वस्तु: बजट व्यय को (क) भारत की संचित निधि पर भारित (गैर-मतदेय), और (ख) भारत की संचित निधि से किया गया (संसद द्वारा मतदेय) के रूप में अलग करता है।
- अनुदान की मांग (अनुच्छेद 113): संचित निधि से व्यय के लिए अनुदान की मांगों के माध्यम से संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता होती है। राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना ऐसी कोई मांग नहीं की जा सकती।
- विनियोग विधेयक (अनुच्छेद 114): अनुदानों के मतदान के बाद, स्वीकृत व्यय को पूरा करने के लिए संचित निधि से धन की निकासी को प्राधिकृत करने हेतु विनियोग विधेयक पेश किया जाता है।
- वित्त विधेयक (अनुच्छेद 110): सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को प्रभावी करने के लिए कराधान और अन्य वित्तीय मामलों के प्रावधानों वाला धन विधेयक पेश किया जाता है।
- लेखानुदान (अनुच्छेद 116): मुख्य बजट मांगों के मतदान तक संसद वित्तीय वर्ष के एक भाग के लिए अग्रिम अनुदान कर सकती है।
- गिलोटिन: एक प्रक्रियात्मक साधन जिसमें चर्चा के लिए निर्धारित अंतिम दिन शेष सभी अनुदान मांगों को एक साथ मतदान के लिए रखा जाता है, जो निर्धारित समय के भीतर बजट पारित करना सुनिश्चित करता है।
| संवैधानिक प्रावधान | अनुच्छेद | उद्देश्य | आवश्यक संसदीय कार्रवाई |
|---|---|---|---|
| वार्षिक वित्तीय विवरण | अनुच्छेद 112 | बजट अनुमानों की प्रस्तुति | चर्चा (कोई मतदान नहीं) |
| अनुदान की मांग | अनुच्छेद 113 | व्यय का अनुमोदन | मतदान आवश्यक (राष्ट्रपति की सिफारिश पर) |
| विनियोग विधेयक | अनुच्छेद 114 | धन निकासी का प्राधिकरण | मतदान आवश्यक |
| वित्त विधेयक | अनुच्छेद 110 | कर प्रस्तावों का कार्यान्वयन | मतदान आवश्यक (धन विधेयक) |
| लेखानुदान | अनुच्छेद 116 | वर्ष के भाग के लिए अग्रिम अनुदान | मतदान आवश्यक |
| भारित व्यय | अनुच्छेद 112(3) | गैर-मतदेय वैधानिक भुगतान | केवल चर्चा (कोई मतदान नहीं) |
लोक सभा के अध्यक्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
जब लोक सभा के अध्यक्ष को हटाने के किसी प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा हो, तब
- वह पीठासीन नहीं होंगे।
- उन्हें बोलने का अधिकार नहीं होगा।
- वे पहली बार में उस प्रस्ताव पर मतदान करने के हकदार नहीं होंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 96 अध्यक्ष के हटाने के प्रस्ताव पर विचार के दौरान उनके आचरण को नियंत्रित करता है। अध्यक्ष को ऐसी कार्यवाही के दौरान सदन की अध्यक्षता करने से रोका जाता है, लेकिन वे एक सदस्य के रूप में अपने सभी अन्य अधिकार बनाए रखते हैं, जिसमें बोलने और पहली बार मतदान करने का अधिकार शामिल है।
✅ कथन 1 (पीठासीन प्रतिबंध) – सही: अनुच्छेद 96(1) के तहत, अध्यक्ष उनके हटाने के प्रस्ताव पर विचार के दौरान सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे, भले ही वे उपस्थित हों।
❌ कथन 2 (बोलने का अधिकार) – गलत: अनुच्छेद 96(2) के तहत, अध्यक्ष हटाने के प्रस्ताव पर विचार के दौरान सदन की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार बनाए रखते हैं।
❌ कथन 3 (मतदान अधिकार) – गलत: अनुच्छेद 96(2) के अनुसार, अध्यक्ष प्रस्ताव पर पहली बार में मतदान करने के हकदार हैं; वे केवल इस परिदृश्य में निर्णायक मत (बराबरी तोड़ने के लिए दूसरा मत) खो देते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लोक सभा के अध्यक्ष और हटाने की प्रक्रिया
- चुनाव: अध्यक्ष को लोक सभा के सदस्यों द्वारा अपने में से चुना जाता है, आमतौर पर बहुमत दल से, नए सदन के गठन के तुरंत बाद।
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 93-96 लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से संबंधित हैं, जिसमें उनका चुनाव, हटाना और शक्तियां शामिल हैं।
- हटाने की प्रक्रिया: हटाने के प्रस्ताव के लिए 14 दिन की सूचना आवश्यक है और इसे सदन के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाना चाहिए (न कि केवल उपस्थित और मतदान करने वाले)।
- पीठासीन प्रतिबंध (अनुच्छेद 96(1)): हटाने के प्रस्ताव पर विचार के दौरान, अध्यक्ष अध्यक्षता नहीं कर सकते लेकिन सदन में उपस्थित रह सकते हैं।
- सदस्य अधिकार (अनुच्छेद 96(2)): अध्यक्ष कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार बनाए रखते हैं, और पहली बार में मतदान कर सकते हैं लेकिन अपने स्वयं के हटाने के प्रस्ताव पर निर्णायक मत का प्रयोग नहीं कर सकते।
- निष्पक्षता की अपेक्षा: चुनाव के बाद, अध्यक्ष से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी राजनीतिक पार्टी से संबंध तोड़ें और सदन की कार्यवाही संचालित करने में निष्पक्षता बनाए रखें।
- शक्तियां और कार्य: अध्यक्ष सदन में व्यवस्था बनाए रखते हैं, विशेषाधिकार के प्रश्नों पर निर्णय लेते हैं, धन विधेयकों को प्रमाणित करते हैं, और विभिन्न प्रशासनिक और अनुशासनात्मक शक्तियों का प्रयोग करते हैं।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक प्रावधान | अनुच्छेद 93-96 |
| चुनाव विधि | लोक सभा सदस्यों द्वारा अपने में से चुने जाते हैं |
| हटाने की सूचना अवधि | 14 दिन |
| हटाने के लिए आवश्यक बहुमत | सदन के सभी तत्कालीन सदस्यों का बहुमत |
| हटाने के दौरान पीठासीन | अध्यक्षता नहीं कर सकते (अनुच्छेद 96(1)) |
| हटाने के दौरान बोलने का अधिकार | हां, बनाए रखा गया (अनुच्छेद 96(2)) |
| हटाने के दौरान मतदान अधिकार | पहली बार में मतदान कर सकते हैं, निर्णायक मत नहीं (अनुच्छेद 96(2)) |
| कार्यकाल | आमतौर पर सदन के पूर्ण कार्यकाल (5 वर्ष) तक जारी रहता है |
भारतीय संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- लोक सभा में लंबित विधेयक उसके विघटन पर व्यपगत हो जाता है।
- लोक सभा द्वारा पारित और राज्य सभा में लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है।
- एक विधेयक जिसके संबंध में भारत के राष्ट्रपति ने सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के अपने इरादे की सूचना दी है, लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — 1 और 2
जब लोक सभा का विघटन होता है, तो लोक सभा में लंबित विधेयक और लोक सभा द्वारा पारित लेकिन राज्य सभा में लंबित विधेयक स्वतः व्यपगत हो जाते हैं। हालांकि, जिस विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति ने संयुक्त बैठक बुलाने के अपने इरादे की सूचना दी है, वह लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है, क्योंकि संयुक्त बैठक की प्रक्रिया मान्य रहती है।
✅ कथन 1 (लोक सभा में लंबित विधेयक) – सही: लोक सभा में लंबित विधेयक उसके विघटन पर स्वतः व्यपगत हो जाता है क्योंकि विघटन उस सदन में सभी लंबित विधायी कार्यों को समाप्त कर देता है।
✅ कथन 2 (लोक सभा द्वारा पारित, राज्य सभा में लंबित विधेयक) – सही: लोक सभा द्वारा पारित लेकिन राज्य सभा में लंबित विधेयक भी लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाता है, क्योंकि इसे लोक सभा से उत्पन्न विधेयक माना जाता है।
❌ कथन 3 (संयुक्त बैठक के लिए सूचित विधेयक) – गलत: जिस विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति ने सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के अपने इरादे की सूचना दी है, वह लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होता है और नई लोक सभा के गठन के बाद संयुक्त बैठक में लिया जा सकता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संसद में विधेयकों का व्यपगत होना
- लोक सभा में लंबित विधेयक: लोक सभा में लंबित सभी विधेयक उसके विघटन पर व्यपगत हो जाते हैं, सिवाय उन विधेयकों के जो पहले से पारित होकर राज्य सभा को भेजे गए हों या राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए लंबित हों।
- लोक सभा द्वारा पारित विधेयक: लोक सभा द्वारा पारित लेकिन राज्य सभा में लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाते हैं।
- केवल राज्य सभा में लंबित विधेयक: केवल राज्य सभा में उत्पन्न और लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होते हैं, क्योंकि राज्य सभा एक स्थायी सदन है।
- संयुक्त बैठक के लिए सूचित विधेयक: जिन विधेयकों के संबंध में राष्ट्रपति ने संयुक्त बैठक बुलाने के अपने इरादे की सूचना दी है, वे व्यपगत नहीं होते हैं और लोक सभा के पुनर्गठन के बाद संयुक्त बैठक में लिए जा सकते हैं।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए लंबित विधेयक: दोनों सदनों द्वारा पारित और राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए लंबित विधेयक लोक सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होते हैं।
- संवैधानिक विधेयक: किसी भी चरण में लंबित विधेयक, जिसमें संविधान संशोधन विधेयक भी शामिल हैं, सामान्य विधेयकों के समान व्यपगत होने के नियमों का पालन करते हैं।
- राज्य सभा स्थायी सदन के रूप में: राज्य सभा एक स्थायी निकाय है और कभी विघटित नहीं होती है, अतः केवल इसमें उत्पन्न और रहने वाले विधेयक लोक सभा के विघटन के कारण व्यपगत नहीं होते हैं।
| विधेयक का प्रकार | चरण | लोक सभा के विघटन का प्रभाव |
|---|---|---|
| लोक सभा में लंबित विधेयक | लोक सभा में कोई भी चरण | व्यपगत हो जाता है |
| लोक सभा द्वारा पारित विधेयक | राज्य सभा में लंबित | व्यपगत हो जाता है |
| राज्य सभा में उत्पन्न विधेयक | केवल राज्य सभा में लंबित | व्यपगत नहीं होता है |
| दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक | राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए लंबित | व्यपगत नहीं होता है |
| संयुक्त बैठक के लिए सूचित विधेयक | राष्ट्रपति की सूचना के बाद | व्यपगत नहीं होता है |
| राष्ट्रपति द्वारा लौटाया गया विधेयक | लोक सभा में पुनर्विचार के लिए लंबित | व्यपगत हो जाता है |
भारत की संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत के राष्ट्रपति द्वारा सदन का सत्रावसान मंत्रिपरिषद की सलाह की आवश्यकता के बिना किया जाता है।
- सदन का सत्रावसान सामान्यतः सदन के अनिश्चितकालीन स्थगन के बाद किया जाता है लेकिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा सत्र में बैठे सदन का सत्रावसान करने पर कोई रोक नहीं है।
- लोकसभा का विघटन भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है जो असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर, मंत्रिपरिषद की सलाह पर ऐसा करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 2 और 3
सत्रावसान और विघटन भारत के राष्ट्रपति द्वारा संसद के संबंध में प्रयोग की जाने वाली दो भिन्न शक्तियाँ हैं। जबकि सत्रावसान सामान्यतः अनिश्चितकालीन स्थगन के बाद किया जाता है, राष्ट्रपति तकनीकी रूप से सत्र के दौरान भी सदन का सत्रावसान कर सकते हैं, और यह शक्ति मंत्रिपरिषद की सलाह पर प्रयोग की जाती है। लोकसभा के विघटन के लिए भी राष्ट्रपति को असाधारण राजनीतिक परिस्थितियों को छोड़कर मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करना आवश्यक है।
❌ कथन 1 – गलत: अनुच्छेद 85(2) के तहत, राष्ट्रपति सदनों का सत्रावसान केवल मंत्रिपरिषद (विशेष रूप से प्रधानमंत्री या मंत्रिमंडल) की सलाह पर करते हैं, स्वतंत्र रूप से नहीं।
✅ कथन 2 – सही: यद्यपि सत्रावसान सामान्यतः अनिश्चितकालीन स्थगन के बाद होता है, राष्ट्रपति को सत्र में बैठे सदन का सत्रावसान करने से रोकने के लिए कोई संवैधानिक रोक नहीं है।
✅ कथन 3 – सही: राष्ट्रपति लोकसभा का विघटन मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं, दुर्लभ परिस्थितियों जैसे त्रिशंकु संसद, अविश्वास प्रस्ताव, या संवैधानिक संकट को छोड़कर।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संसद का सत्रावसान और विघटन
- स्थगन: संसद की बैठक का अस्थायी निलंबन अगली बैठक तक, पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) द्वारा निर्णीत।
- अनिश्चितकालीन स्थगन: अगली बैठक की तारीख तय किए बिना अनिश्चितकालीन स्थगन; सत्र समाप्त करता है लेकिन औपचारिक रूप से नहीं।
- सत्रावसान: अनुच्छेद 85(2) के तहत राष्ट्रपति द्वारा सत्र की औपचारिक समाप्ति, मंत्रिपरिषद की सलाह पर की जाती है; समितियों के सभी लंबित कार्य समाप्त होते हैं लेकिन सदन में लंबित विधेयक नहीं।
- विघटन: केवल लोकसभा पर लागू, राज्यसभा पर नहीं; पूरे सदन को समाप्त कर देता है, नए चुनाव आवश्यक; सभी लंबित विधेयक (राज्यसभा या संयुक्त बैठक में लंबित को छोड़कर) व्यपगत हो जाते हैं।
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 85 सत्र, सत्रावसान और विघटन से संबंधित है; अनुच्छेद 352-360 आपातकालीन प्रावधानों से संबंधित हैं जो संसदीय कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।
- राष्ट्रपति की भूमिका: राष्ट्रपति संसद को आहूत, सत्रावसान और विघटन करते हैं, लेकिन अनुच्छेद 74 के अनुसार मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करते हैं।
- मंत्रिपरिषद की सलाह का अपवाद: त्रिशंकु संसदों या राजनीतिक संकटों में, राष्ट्रपति विघटन मामलों में विवेक का प्रयोग कर सकते हैं, हालांकि यह संवैधानिक रूप से विवादास्पद बना रहता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: सुमेद पाइपलाइन फारस की खाड़ी से यूरोप को तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए एक रणनीतिक मार्ग है।
कथन-II: सुमेद पाइपलाइन लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है
सुमेद पाइपलाइन वास्तव में फारस की खाड़ी से यूरोप को तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए एक रणनीतिक मार्ग है, जो बड़े जहाजों के लिए स्वेज नहर का एक महत्वपूर्ण विकल्प है। यह पाइपलाइन लाल सागर (ऐन सोखना टर्मिनल) को भूमध्य सागर (अलेक्जेंड्रिया के पास सिदी केरिर टर्मिनल) से जोड़ती है, जो यूरोप के लिए ऊर्जा आपूर्ति के रणनीतिक पारगमन मार्ग के रूप में कार्य करने की भौगोलिक विशेषता है।
✅ कथन-I (फारस की खाड़ी से यूरोप के लिए तेल का रणनीतिक मार्ग) – सही: सुमेद पाइपलाइन स्वेज नहर के एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में कार्य करती है, विशेष रूप से अल्ट्रा लार्ज क्रूड कैरियर्स (ULCCs) के लिए जो पूर्ण भार के साथ नहर से नहीं गुजर सकते, जिससे यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
✅ कथन-II (लाल सागर को भूमध्य सागर से जोड़ती है) – सही: यह पाइपलाइन स्वेज की खाड़ी (लाल सागर) पर ऐन सोखना टर्मिनल से अलेक्जेंड्रिया (भूमध्य सागर) के पास सिदी केरिर टर्मिनल तक चलती है, जो इन दोनों जल निकायों को भौतिक रूप से जोड़ती है।
कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है: लाल सागर और भूमध्य सागर के बीच भौगोलिक संबंध ही वह कारक है जो इस पाइपलाइन को फारस की खाड़ी के तेल को यूरोप तक पहुंचाने के लिए रणनीतिक रूप से मूल्यवान बनाता है, क्योंकि यह स्वेज नहर मार्ग को बायपास करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सुमेद पाइपलाइन और रणनीतिक समुद्री मार्ग
- सुमेद पाइपलाइन (स्वेज-भूमध्यसागरीय पाइपलाइन): 1977 में निर्मित, यह 320 किमी लंबी पाइपलाइन है जिसकी क्षमता लगभग 2.34 मिलियन बैरल प्रति दिन है, जो स्वेज नहर के समानांतर चलती है।
- रणनीतिक महत्व: जब स्वेज नहर भीड़भाड़ वाली हो, बंद हो, या जब जहाज नहर से गुजरने के लिए बहुत बड़े हों (गहराई प्रतिबंध) तो तेल परिवहन के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करती है।
- मार्ग विवरण: लाल सागर तट पर ऐन सोखना से भूमध्य सागर तट पर अलेक्जेंड्रिया के पास सिदी केरिर टर्मिनल तक जोड़ती है, जिसमें 42 इंच व्यास की दो समानांतर पाइपलाइनें हैं।
- संचालन: फारस की खाड़ी के टैंकरों से कच्चे तेल को लाल सागर टर्मिनल पर उतारा जाता है, पाइपलाइन के माध्यम से पंप किया जाता है, और यूरोपीय बाजारों के लिए भूमध्यसागरीय टर्मिनल पर टैंकरों में फिर से लोड किया जाता है।
- स्वामित्व: मिस्र की जनरल पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (EGPC), सऊदी अरामको, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC), और कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन द्वारा संयुक्त स्वामित्व।
- स्वेज नहर से तुलना: जबकि स्वेज नहर बड़ी मात्रा और विविध कार्गो को संभालती है, सुमेद पाइपलाइन विशेष रूप से कच्चे तेल को संभालती है और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बैकअप बुनियादी ढांचे के रूप में कार्य करती है।
- वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा: हॉर्मुज जलडमरूमध्य, मलक्का जलडमरूमध्य, और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे अन्य रणनीतिक चोकपॉइंट्स के साथ महत्वपूर्ण वैश्विक ऊर्जा बुनियादी ढांचे का हिस्सा है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- लाल सागर को किसी भी रूप में बहुत कम वर्षण प्राप्त होता है।
- लाल सागर में नदियों से कोई जल प्रवेश नहीं करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
लाल सागर एक शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित है जो अत्यधिक उच्च तापमान और कम आर्द्रता की विशेषता रखता है, जिसके परिणामस्वरूप न्यूनतम वर्षण होता है। इसके अतिरिक्त, कोई प्रमुख नदी लाल सागर में नहीं बहती है; इसका जल मुख्य रूप से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से अदन की खाड़ी से अधिक नमकीन जल के प्रवाह से आता है।
✅ कथन 1 (कम वर्षण) – सही: लाल सागर को मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण उच्च तापमान और कम आर्द्रता के कारण बहुत कम वर्षण प्राप्त होता है।
✅ कथन 2 (नदी प्रवाह नहीं) – सही: लाल सागर में कोई प्रमुख नदी नहीं बहती है; जल मुख्य रूप से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से अदन की खाड़ी से प्रवेश करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लाल सागर - समुद्र विज्ञान संबंधी विशेषताएं
- स्थान: लाल सागर हिंद महासागर का एक समुद्री जल प्रवेश द्वार है, जो अफ्रीका (मिस्र, सूडान, इरिट्रिया, जिबूती) और एशिया (सऊदी अरब, यमन) के बीच स्थित है, जो बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से अदन की खाड़ी से अरब सागर से जुड़ा हुआ है।
- जलवायु: अत्यधिक उच्च तापमान, कम आर्द्रता और न्यूनतम वर्षा (वार्षिक 100 मिमी से कम) वाली शुष्क मरुस्थलीय पेटी में स्थित है, जो इसे विश्व स्तर पर सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक बनाता है।
- नदी प्रवाह: अधिकांश सागरों के विपरीत, लाल सागर में कोई महत्वपूर्ण नदी जल निकासी नहीं है, जो इसकी उच्च लवणता में योगदान देने वाली एक अद्वितीय समुद्र विज्ञान विशेषता है।
- उच्च लवणता: लाल सागर में विश्व महासागरों में सबसे अधिक लवणता (लगभग 40-41 पीपीटी) है, जो उच्च वाष्पीकरण दर, कम वर्षण और नदियों से मीठे पानी के प्रवाह की अनुपस्थिति के कारण है।
- जल विनिमय: अदन की खाड़ी से जल प्रवेश करता है (अधिक नमकीन, सघन जल) और सतही जल के रूप में बाहर निकलता है, जो एक अद्वितीय परिसंचरण पैटर्न बनाता है जो लाल सागर की लवणता और तापमान को बनाए रखता है।
- तापमान: सतही जल का तापमान सर्दियों में 20°C से गर्मियों में 30°C से अधिक होता है, जो इसे दुनिया के सबसे गर्म सागरों में से एक बनाता है।
- रणनीतिक महत्व: लाल सागर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उत्तर में स्वेज नहर से जुड़ता है, जो यूरोप और एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग के रूप में कार्य करता है।
विश्व में किन्हीं दो देशों के बीच सबसे लंबी सीमा किनके बीच है:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका
कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच की सीमा विश्व की सबसे लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा है, जो अलास्का के साथ साझा सीमा सहित लगभग 8,891 किलोमीटर (5,525 मील) तक फैली है। यह एक शांतिपूर्ण, अधिकतर असुरक्षित सीमा है जिसमें स्थलीय और जलीय दोनों खंड शामिल हैं, जो आधुनिक इतिहास में सबसे स्थिर और सहयोगी अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का उदाहरण प्रस्तुत करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विश्व की सबसे लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ
| रैंक | देश | लंबाई (लगभग) | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| 1 | कनाडा – संयुक्त राज्य अमेरिका | 8,891 किमी (5,525 मील) | सबसे लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा; अलास्का सीमा शामिल; शांतिपूर्ण और अधिकतर असुरक्षित; स्थल और जल खंड शामिल |
| 2 | कजाकिस्तान – रूस | 7,644 किमी | दूसरी सबसे लंबी सीमा; विशाल स्टेप्स से होकर गुजरती है; व्यापार और प्राकृतिक संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण; अधिकतर समतल भूभाग |
| 3 | चिली – अर्जेंटीना | 5,308 किमी | दक्षिण अमेरिका की सबसे लंबी सीमा; एंडीज पर्वत श्रृंखला के साथ-साथ; कई उच्च-ऊंचाई वाले क्रॉसिंग शामिल |
| 4 | चीन – मंगोलिया | 4,677 किमी | चौथी सबसे लंबी; गोबी रेगिस्तान और घास के मैदानों से होकर गुजरती है |
| 5 | चीन – भारत | 3,488 किमी | अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक विवादित; दोनों देशों के बीच कभी-कभार तनाव का स्रोत |
- कनाडा-अमेरिका सीमा की विशेषताएँ: सीमा वनों, पहाड़ों, झीलों और नदियों सहित विविध भू-भाग से होकर गुजरती है; इसमें ग्रेट लेक्स शामिल हैं और यह दूरदराज के जंगली क्षेत्रों से होकर जाती है।
- शांति और सहयोग: कनाडा-अमेरिका सीमा को अक्सर विश्व की सबसे लंबी असुरक्षित सीमा के रूप में उद्धृत किया जाता है, जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है।
- ऐतिहासिक संदर्भ: पेरिस की संधि (1783) और ओरेगन संधि (1846) सहित विभिन्न संधियों के माध्यम से स्थापित।
निम्नलिखित देशों पर विचार कीजिए:
- इटली
- जापान
- नाइजीरिया
- दक्षिण कोरिया
- दक्षिण अफ्रीका
उपर्युक्त में से कौन से देश निम्न जन्म दर, वृद्ध होती जनसंख्या या घटती जनसंख्या के लिए मीडिया में अक्सर चर्चित रहते हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — 1, 2 और 4
इटली, जापान और दक्षिण कोरिया अत्यंत निम्न प्रजनन दर, तेजी से बढ़ती वृद्ध जनसंख्या और अनुमानित जनसंख्या गिरावट के लिए वैश्विक मीडिया में अक्सर चर्चित रहते हैं। ये देश महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जिनमें श्रमबल का सिकुड़ना, स्वास्थ्य सेवा लागत में वृद्धि और पेंशन स्थिरता के मुद्दे शामिल हैं।
नाइजीरिया की जनसंख्या बहुत युवा और तेजी से बढ़ रही है, जबकि दक्षिण अफ्रीका की जनसंख्या वृद्धि धीमी हुई है लेकिन अभी तक घट नहीं रही है। न तो कोई देश निम्न जन्म दर या वृद्ध जनसंख्या चिंताओं की विशेषता रखता है जो इटली, जापान और दक्षिण कोरिया के बारे में चर्चाओं पर हावी हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वैश्विक जनसांख्यिकीय रुझान और जनसंख्या की बढ़ती आयु
| देश | जनसांख्यिकीय स्थिति | मुख्य विशेषताएं |
|---|---|---|
| जापान | अति-वृद्ध समाज | विश्व की सबसे वृद्ध जनसंख्याओं में से एक; प्रजनन दर ~1.3; 28% से अधिक जनसंख्या 65 वर्ष से अधिक; 2011 से जनसंख्या घट रही है |
| इटली | तेजी से वृद्ध होती | प्रजनन दर ~1.2-1.3; औसत आयु 47 वर्ष से अधिक; यूरोप की सबसे वृद्ध जनसंख्याओं में से एक; श्रम की कमी का सामना |
| दक्षिण कोरिया | विश्व में सबसे कम प्रजनन क्षमता | प्रजनन दर ~0.7-0.8 तक गिरी (विश्व में सबसे कम); जनसंख्या 2100 तक आधी होने का अनुमान; सरकार जन्मवादी नीतियां लागू कर रही है |
| नाइजीरिया | युवा और बढ़ती | प्रजनन दर ~5.3; औसत आयु ~18 वर्ष; अफ्रीका में सबसे तेजी से बढ़ती जनसंख्या; 2050 तक तीसरी सबसे अधिक आबादी वाला होने का अनुमान |
| दक्षिण अफ्रीका | मध्यम वृद्धि | प्रजनन दर ~2.3; अपेक्षाकृत युवा जनसंख्या; वृद्धि धीमी हो रही है लेकिन घट नहीं रही; जनसांख्यिकी पर HIV/AIDS का प्रभाव |
- जनसांख्यिकीय लाभांश बनाम जनसांख्यिकीय बोझ: युवा जनसंख्या वाले देश (नाइजीरिया) संभावित रूप से जनसांख्यिकीय लाभांश से लाभान्वित होते हैं, जबकि वृद्ध समाज बढ़ी हुई निर्भरता अनुपात से आर्थिक बोझ का सामना करते हैं।
- आर्थिक निहितार्थ: निम्न जन्म दर से श्रमबल का सिकुड़ना, उपभोग में कमी, कर राजस्व में कमी और पेंशन तथा स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को बनाए रखने में चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।
- नीतिगत प्रतिक्रियाएं: जापान, इटली और दक्षिण कोरिया ने जनसांख्यिकीय चुनौतियों से निपटने के लिए बाल देखभाल सहायता, माता-पिता की छुट्टी नीतियां, आप्रवासन सुधार और स्वचालन सहित विभिन्न उपाय लागू किए हैं।
जनवरी महीने में समताप रेखा मानचित्रों से निम्नलिखित में से कौन सा/से सही निष्कर्ष है/हैं?
- समताप रेखाएं महासागर के ऊपर उत्तर की ओर और महाद्वीप के ऊपर दक्षिण की ओर विचलित होती हैं।
- शीत महासागरीय धाराओं, गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक प्रवाह की उपस्थिति उत्तरी अटलांटिक महासागर को ठंडा बनाती है और समताप रेखाएं उत्तर की ओर मुड़ती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
जनवरी में (उत्तरी गोलार्ध की सर्दी), विभेदक तापन के कारण महाद्वीप महासागरों की तुलना में तेजी से ठंडे होते हैं। इससे समताप रेखाएं गर्म महासागरों के ऊपर उत्तर की ओर और ठंडे महाद्वीपों के ऊपर दक्षिण की ओर विचलित होती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक प्रवाह गर्म महासागरीय धाराएं हैं, शीत नहीं, और वे वास्तव में उत्तरी अटलांटिक को गर्म बनाती हैं, जिससे समताप रेखाएं उत्तर की ओर मुड़ती हैं।
✅ कथन 1 (समताप रेखा विचलन) – सही: जनवरी में, उत्तरी गोलार्ध में समताप रेखाएं महासागरों (जो गर्म रहते हैं) के ऊपर उत्तर की ओर और महाद्वीपों (जो ठंडे होते हैं) के ऊपर दक्षिण की ओर विचलित होती हैं, क्योंकि स्थल और जल की तापन और शीतलन दर भिन्न होती है।
❌ कथन 2 (गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक प्रवाह) – गलत: गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक प्रवाह गर्म महासागरीय धाराएं हैं, शीत नहीं; ये उष्णकटिबंधीय गर्म जल को उत्तर की ओर ले जाती हैं, जिससे उत्तरी अटलांटिक अपेक्षाकृत गर्म होता है और समताप रेखाएं उत्तर की ओर मुड़ती हैं, न कि इसे ठंडा बनाती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: समताप रेखाएं और महासागरीय धाराएं
- समताप रेखाएं: मानचित्र पर समान तापमान वाले बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएं, जिनका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों और मौसमों में तापमान वितरण पैटर्न को समझने के लिए किया जाता है।
- जनवरी समताप रेखा पैटर्न (उत्तरी गोलार्ध): सर्दियों के दौरान, महाद्वीप महासागरों की तुलना में ठंडे होते हैं क्योंकि स्थल जल की तुलना में तेजी से ऊष्मा खोता है। समताप रेखाएं महाद्वीपों के ऊपर भूमध्य रेखा की ओर (दक्षिण की ओर) और महासागरों के ऊपर ध्रुव की ओर (उत्तर की ओर) मुड़ती हैं।
- जुलाई समताप रेखा पैटर्न (उत्तरी गोलार्ध): गर्मियों के दौरान, महाद्वीप महासागरों की तुलना में गर्म होते हैं। समताप रेखाएं महाद्वीपों के ऊपर ध्रुव की ओर (उत्तर की ओर) और महासागरों के ऊपर भूमध्य रेखा की ओर (दक्षिण की ओर) मुड़ती हैं।
- गल्फ स्ट्रीम: मेक्सिको की खाड़ी में उत्पन्न होने वाली एक शक्तिशाली गर्म महासागरीय धारा, जो उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट के साथ प्रवाहित होती है और अटलांटिक के पार यूरोप की ओर जाती है, पश्चिमी यूरोप की जलवायु को महत्वपूर्ण रूप से गर्म बनाती है।
- उत्तरी अटलांटिक प्रवाह: गल्फ स्ट्रीम का विस्तार जो उत्तरी अटलांटिक के पार पूर्व की ओर जारी रहता है, ब्रिटिश द्वीपसमूह और स्कैंडिनेविया सहित उत्तर-पश्चिमी यूरोप में गर्म जल और हल्का तापमान लाता है।
- समताप रेखाओं पर महासागरीय धाराओं का प्रभाव: गल्फ स्ट्रीम जैसी गर्म धाराएं समताप रेखाओं को ध्रुव की ओर (उत्तरी गोलार्ध में उत्तर की ओर) मोड़ती हैं, जबकि लैब्राडोर धारा जैसी शीत धाराएं समताप रेखाओं को भूमध्य रेखा की ओर (उत्तरी गोलार्ध में दक्षिण की ओर) मोड़ती हैं।
- विभेदक तापन: जल की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता स्थल से अधिक होती है, जिसका अर्थ है कि महासागर महाद्वीपों की तुलना में अधिक धीरे-धीरे गर्म और ठंडे होते हैं, जिससे मौसमी तापमान विरोधाभास उत्पन्न होते हैं जो समताप रेखा पैटर्न को प्रभावित करते हैं।
निम्नलिखित जानकारी पर विचार कीजिए:
| जलप्रपात | क्षेत्र | नदी |
|---|---|---|
| 1. धुआंधार | मालवा | नर्मदा |
| 2. हुंडरू | छोटानागपुर | स्वर्णरेखा |
| 3. गरसोप्पा | पश्चिमी घाट | नेत्रावती |
उपर्युक्त में से कितनी पंक्तियों में दी गई जानकारी सही सुमेलित है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
यह प्रश्न जलप्रपातों का उनके क्षेत्रों और नदियों के साथ सही सुमेलन की परीक्षा करता है। दिए गए तीन युग्मों में से दो सही सुमेलित हैं जबकि एक में नदी के नाम में त्रुटि है।
✅ युग्म 1 – सही: धुआंधार जलप्रपात मालवा क्षेत्र (जबलपुर, मध्य प्रदेश) में नर्मदा नदी पर स्थित है।
✅ युग्म 2 – सही: हुंडरू जलप्रपात छोटानागपुर पठार क्षेत्र (झारखंड) में स्वर्णरेखा नदी पर स्थित है।
❌ युग्म 3 – गलत: गरसोप्पा (जोग प्रपात) पश्चिमी घाट में शरावती नदी पर स्थित है, नेत्रावती नदी पर नहीं।
📝 संक्षिप्त टिप्पणी: भारत के प्रमुख जलप्रपात
| जलप्रपात | राज्य | नदी | ऊंचाई (लगभग) |
|---|---|---|---|
| जोग प्रपात (गरसोप्पा) | कर्नाटक | शरावती | 253 मी (भारत में सर्वोच्च) |
| धुआंधार प्रपात | मध्य प्रदेश | नर्मदा | 30 मी |
| हुंडरू प्रपात | झारखंड | स्वर्णरेखा | 98 मी |
| चित्रकूट प्रपात | छत्तीसगढ़ | इंद्रावती | 29 मी (भारत में सबसे चौड़ा) |
| अथिरापल्ली प्रपात | केरल | चालाकुडी | 24 मी |
| नोहकलिकाई प्रपात | मेघालय | - | 340 मी (सबसे ऊंचा प्लंज जलप्रपात) |
| दूधसागर प्रपात | गोवा | मांडवी | 310 मी |
निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- पायरोक्लास्टिक मलबा
- राख और धूल
- नाइट्रोजन यौगिक
- सल्फर यौगिक
उपर्युक्त में से कितने ज्वालामुखी विस्फोट के उत्पाद हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — सभी चार
सूचीबद्ध सभी चार मद—पायरोक्लास्टिक मलबा, राख और धूल, नाइट्रोजन यौगिक, और सल्फर यौगिक—ज्वालामुखी विस्फोट के उत्पाद हैं। ज्वालामुखी विस्फोट ठोस पदार्थ (पायरोक्लास्टिक मलबा, राख) और विभिन्न गैसें (नाइट्रोजन और सल्फर यौगिक) दोनों का उत्सर्जन करते हैं जो महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रभाव डाल सकते हैं।
✅ कथन 1 – सही: पायरोक्लास्टिक मलबे में विस्फोट के दौरान निकाले गए राख, प्यूमिस, सिंडर और ज्वालामुखी बम जैसे खंडित पदार्थ शामिल हैं।
✅ कथन 2 – सही: राख और धूल विस्फोटक ज्वालामुखी गतिविधि के दौरान उत्पन्न ज्वालामुखी चट्टान और कांच के सूक्ष्म कण हैं।
✅ कथन 3 – सही: अमोनिया (NH₃) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) जैसे नाइट्रोजन यौगिक ज्वालामुखी गैसों से निकलते हैं।
✅ कथन 4 – सही: सल्फर यौगिक, विशेष रूप से सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और हाइड्रोजन सल्फाइड (H₂S), प्रमुख ज्वालामुखी गैसें हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ज्वालामुखी विस्फोट के उत्पाद
| उत्पाद प्रकार | उदाहरण | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| पायरोक्लास्टिक पदार्थ | ज्वालामुखी बम, लैपिली, राख, प्यूमिस, स्कोरिया | विस्फोट के दौरान निकाले गए ठोस खंड; आकार सूक्ष्म राख से लेकर बड़े बम तक |
| ज्वालामुखी गैसें | जल वाष्प (H₂O), CO₂, SO₂, H₂S, HCl, HF | जल वाष्प ज्वालामुखी गैसों का 60-90% होता है; SO₂ अम्लीय वर्षा में योगदान करता है |
| नाइट्रोजन यौगिक | N₂, NH₃, नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) | छोटी मात्रा में निकलते हैं; वायुमंडल में विभिन्न यौगिक बनाने के लिए प्रतिक्रिया कर सकते हैं |
| सल्फर यौगिक | SO₂, H₂S, मौलिक सल्फर | SO₂ एक प्रमुख ज्वालामुखी गैस है जो श्वसन समस्याओं और पर्यावरणीय प्रभावों का कारण बनती है |
- पर्यावरणीय प्रभाव: ज्वालामुखी राख हवाई यात्रा को बाधित कर सकती है, फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है, और जल आपूर्ति को दूषित कर सकती है; सल्फर डाइऑक्साइड अम्लीय वर्षा में योगदान करता है और स्ट्रैटोस्फीयर में एरोसोल बनाकर वैश्विक जलवायु को प्रभावित कर सकता है।
- टेफ्रा: आकार या संरचना की परवाह किए बिना, विस्फोट के दौरान निकाले गए सभी पायरोक्लास्टिक पदार्थों के लिए सामान्य शब्द।
- ज्वालामुखी शीतकाल: महत्वपूर्ण राख और SO₂ निकालने वाले बड़े विस्फोट सूर्य के प्रकाश को अवरुद्ध कर सकते हैं, जिससे पृथ्वी की सतह अस्थायी रूप से ठंडी हो जाती है।
- स्वास्थ्य खतरे: सूक्ष्म ज्वालामुखी राख श्वसन समस्याओं का कारण बन सकती है; उच्च सांद्रता में SO₂ और H₂S जैसी गैसें विषाक्त होती हैं।
निम्नलिखित देशों पर विचार कीजिए:
- फिनलैंड
- जर्मनी
- नॉर्वे
- रूस
उपर्युक्त में से कितने देशों की सीमा उत्तरी सागर से लगती है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
सूचीबद्ध चार देशों में से केवल जर्मनी और नॉर्वे की सीमा उत्तरी सागर से लगती है। फिनलैंड की सीमा बाल्टिक सागर और बोथनिया की खाड़ी से लगती है, जबकि रूस का यूरोपीय तटरेखा बाल्टिक सागर, काला सागर और आर्कटिक महासागर को छूता है, लेकिन उत्तरी सागर को नहीं।
✅ जर्मनी – सही: जर्मनी की उत्तरी तटरेखा उत्तरी सागर के साथ है, जिसमें हैम्बर्ग और ब्रेमरहेवन जैसे प्रमुख बंदरगाह हैं।
✅ नॉर्वे – सही: नॉर्वे की दक्षिण-पश्चिमी ओर उत्तरी सागर के साथ एक विस्तृत तटरेखा है।
❌ फिनलैंड – गलत: फिनलैंड बाल्टिक सागर पर स्थित है और उत्तरी सागर तक इसकी पहुंच नहीं है।
❌ रूस – गलत: रूस की सीमा उत्तरी सागर से नहीं लगती; इस क्षेत्र में इसका निकटतम सागर बाल्टिक सागर है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: उत्तरी सागर का भूगोल
- स्थान: उत्तरी सागर अटलांटिक महासागर का एक सीमांत सागर है जो ग्रेट ब्रिटेन, स्कैंडिनेविया, जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम और फ्रांस के बीच स्थित है।
- सीमावर्ती देश: सात देशों की सीमा उत्तरी सागर से लगती है – यूनाइटेड किंगडम, नॉर्वे, डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम और फ्रांस।
- महत्वपूर्ण बंदरगाह: प्रमुख बंदरगाहों में रॉटरडैम (नीदरलैंड), हैम्बर्ग (जर्मनी), एंटवर्प (बेल्जियम) और एबरडीन (यूके) शामिल हैं।
- आर्थिक महत्व: उत्तरी सागर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस भंडार से समृद्ध है, जो इसे विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक बनाता है।
- मत्स्य पालन: ऐतिहासिक रूप से विश्व के सबसे उत्पादक मछली पकड़ने के मैदानों में से एक, हालांकि हाल के दशकों में अत्यधिक मछली पकड़ने से भंडार कम हो गए हैं।
- रणनीतिक महत्व: उत्तरी सागर पूरे यूरोपीय इतिहास में व्यापार मार्गों और नौसैनिक अभियानों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है।
- बाल्टिक सागर से संबंध: उत्तरी सागर डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन के बीच स्कैगेराक और कैटेगेट जलडमरूमध्य के माध्यम से बाल्टिक सागर से जुड़ता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: वर्षा चट्टानों के अपक्षय के कारणों में से एक है। कथन-II: वर्षा जल में कार्बन डाइऑक्साइड विलयन में होती है। कथन-III: वर्षा जल में वायुमंडलीय ऑक्सीजन होती है।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — कथन-II और कथन-III दोनों सही हैं और दोनों कथन-I की व्याख्या करते हैं
वर्षा अपक्षय का एक महत्वपूर्ण कारक है, विशेष रूप से रासायनिक अपक्षय का। वर्षा जल वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके दुर्बल कार्बोनिक अम्ल बनाता है, और वायुमंडलीय ऑक्सीजन को भी घोलता है। ये दोनों विलीन गैसें रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से चट्टान खनिजों को तोड़ने में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं।
✅ कथन I – सही: वर्षा प्रभाव और रासायनिक अभिक्रियाओं के माध्यम से भौतिक और रासायनिक दोनों प्रकार का अपक्षय करती है।
✅ कथन II – सही: वर्षा जल वायुमंडलीय CO₂ को घोलता है, जो कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃) बनाता है जो चट्टानों का रासायनिक अपक्षय करता है।
✅ कथन III – सही: वर्षा जल में विलीन वायुमंडलीय ऑक्सीजन होती है जो खनिजों का ऑक्सीकरण करती है, जो रासायनिक अपक्षय का एक रूप है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वर्षा जल द्वारा रासायनिक अपक्षय
- कार्बोनीकरण: वर्षा जल में CO₂ कार्बोनिक अम्ल (H₂CO₃) बनाती है, जो कार्बोनेट चट्टानों (चूना पत्थर, संगमरमर) और फेल्डस्पार के साथ अभिक्रिया करके उन्हें समय के साथ घोलती है।
- ऑक्सीकरण: वर्षा जल में विलीन ऑक्सीजन लौह युक्त खनिजों (जैसे ऑलिवीन, पाइरॉक्सीन) के साथ अभिक्रिया करके जंग जैसा अपघटन करती है, जो चट्टान संरचना को कमजोर करती है।
- जल-अपघटन: जल के अणु सिलिकेट खनिजों (फेल्डस्पार, अभ्रक) के साथ अभिक्रिया करके मृत्तिका खनिज बनाते हैं, जो चट्टान विखंडन में योगदान देते हैं।
- विलयन: वर्षा जल सीधे घुलनशील खनिजों जैसे हैलाइट और जिप्सम को बिना अतिरिक्त रासायनिक अभिक्रिया के घोल सकता है।
- pH कारक: प्राकृतिक वर्षा जल का pH विलीन CO₂ के कारण लगभग 5.6 होता है; अम्ल वर्षा (pH < 5.0) अपक्षय दर को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है।
- दर कारक: अपक्षय दर वर्षा की तीव्रता, तापमान, चट्टान संरचना और वनस्पति आवरण पर निर्भर करती है जो अपक्षय को बढ़ा या घटा सकते हैं।
- भौतिक प्रभाव: रासायनिक क्रिया के अलावा, भारी वर्षा वर्षा बूंदों के प्रभाव और ठंडे जलवायु में हिम विदारण के माध्यम से यांत्रिक अपक्षय करती है।
प्रयागराज से आगे गंगा में पश्चिम से पूर्व की ओर मिलने वाली हिमालयी नदियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा क्रम सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — गोमती - घाघरा – गंडक – कोसी
प्रयागराज से आगे पश्चिम से पूर्व की ओर गंगा में मिलने वाली हिमालयी नदियों का सही क्रम गोमती, घाघरा, गंडक और कोसी है। गोमती वाराणसी के निकट मिलती है (सबसे पश्चिम में), इसके बाद घाघरा छपरा में, गंडक पटना के निकट सोनपुर में, और कोसी कटिहार जिले के कुर्सेला के निकट (सबसे पूर्व में) मिलती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रयागराज से आगे गंगा की हिमालयी सहायक नदियाँ
| नदी | उद्गम | गंगा से संगम | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| गोमती | गोमत ताल (फुल्हार झील), पीलीभीत जिला, उत्तर प्रदेश | वाराणसी (गाजीपुर) के निकट, उत्तर प्रदेश | मैदानी नदी; लखनऊ से होकर बहती है; इस क्रम में सबसे पश्चिमी सहायक नदी |
| घाघरा (करनाली) | मापचाचुंगो हिमनद, मानसरोवर के निकट, तिब्बत | छपरा (सारण जिला), बिहार | गंगा की आयतन के हिसाब से सबसे बड़ी सहायक नदी; नेपाल से होकर बहती है; उत्तर प्रदेश में कौरियाला भी कहलाती है |
| गंडक (नारायणी) | नेपाल हिमालय (धौलागिरि और एवरेस्ट के बीच) | सोनपुर (पटना के निकट), बिहार | काली गंडक और त्रिशूली से मिलकर बनी संयुक्त नदी; मार्ग परिवर्तन के लिए प्रसिद्ध |
| कोसी (सप्तकोसी) | तिब्बत/नेपाल हिमालय (अरुण, सन कोसी, तमूर कोसी से मिलकर बनी) | कुर्सेला के निकट, कटिहार जिला, बिहार | बार-बार बाढ़ और मार्ग परिवर्तन के कारण 'बिहार का शोक' कहलाती है; सबसे पूर्वी सहायक नदी |
- भौगोलिक क्रम: चारों नदियाँ हिमालय से निकलती हैं (गोमती को छोड़कर जो मैदानी है) और बिहार तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंगा में मिलती हैं, पश्चिम से पूर्व की ओर क्रमिक रूप से।
- महत्व: ये नदियाँ गंगा के मैदान में सिंचाई, जलविद्युत और नौवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बार-बार बाढ़ भी लाती हैं।
- संगम स्थल: संगम स्थलों को याद रखने से मदद मिलती है: वाराणसी → छपरा → पटना (सोनपुर) → कटिहार (गंगा के मार्ग के साथ पश्चिम से पूर्व)।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: भूमध्य रेखा पर क्षोभमंडल की मोटाई ध्रुवों की तुलना में बहुत अधिक है। कथन-II: भूमध्य रेखा पर, प्रबल संवहनीय धाराओं द्वारा ऊष्मा को बड़ी ऊंचाइयों तक ले जाया जाता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की व्याख्या करता है
क्षोभमंडल वास्तव में भूमध्य रेखा पर (लगभग 16-18 किमी) ध्रुवों की तुलना में (लगभग 8-10 किमी) मोटा है, जो विभेदी तापन और तापीय प्रसार के कारण होता है। भूमध्य रेखा पर तीव्र सौर विकिरण प्रबल संवहनीय धाराएं उत्पन्न करता है जो ऊष्मा को लंबवत रूप से बड़ी ऊंचाइयों तक ले जाती हैं, जिससे वायु का प्रसार होता है और इस प्रकार क्षोभमंडल की मोटाई बढ़ जाती है। कथन-II, कथन-I में वर्णित घटना के लिए प्रत्यक्ष कारण स्पष्टीकरण प्रदान करता है।
✅ कथन-I – सही: भूमध्य रेखा पर क्षोभमंडल की मोटाई (16-18 किमी) ध्रुवों (8-10 किमी) की तुलना में अधिक तापन और वायु प्रसार के कारण काफी अधिक है।
✅ कथन-II – सही: भूमध्य रेखा पर तीव्र सौर तापन द्वारा संचालित प्रबल संवहनीय धाराएं ऊष्मा को लंबवत रूप से बड़ी ऊंचाइयों तक ले जाती हैं, जो सीधे बढ़े हुए क्षोभमंडलीय मोटाई का कारण बनती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: क्षोभमंडल और वायुमंडलीय संरचना
- क्षोभमंडल की विशेषताएं: वायुमंडल की सबसे निचली परत जहां सभी मौसम संबंधी घटनाएं होती हैं, इसमें वायुमंडल के द्रव्यमान का लगभग 75% और लगभग सभी जलवाष्प शामिल है।
- मोटाई में भिन्नता: क्षोभमंडल की मोटाई ध्रुवों पर 8-10 किमी से लेकर भूमध्य रेखा पर 16-18 किमी तक भिन्न होती है, वैश्विक औसत लगभग 13 किमी है।
- भूमध्यरेखीय तापन: भूमध्य रेखा को पूरे वर्ष अधिक प्रत्यक्ष और तीव्र सौर विकिरण प्राप्त होता है, जिससे अधिकतम सतह तापन और वायु तापमान होता है।
- संवहनीय धाराएं: भूमध्य रेखा पर गर्म वायु कम घनत्व के कारण तेजी से ऊपर उठती है, जिससे प्रबल लंबवत धाराएं बनती हैं जो ऊष्मा को उच्च ऊंचाइयों तक ले जाती हैं (हैडली सेल परिसंचरण का हिस्सा)।
- तापीय प्रसार: गर्म वायु अधिक आयतन घेरती है, जिससे भूमध्य रेखा पर वायुमंडलीय स्तंभ लंबवत रूप से फैलता है, जिससे क्षोभमंडलीय ऊंचाई बढ़ती है।
- तापमान ह्रास दर: क्षोभमंडल में तापमान ऊंचाई के साथ औसतन 6.5°C प्रति किलोमीटर की दर से घटता है जब तक कि क्षोभसीमा तक नहीं पहुंच जाता।
- क्षोभसीमा में भिन्नता: क्षोभसीमा (क्षोभमंडल और समतापमंडल के बीच की सीमा) भूमध्य रेखा पर (-80°C) ध्रुवों (-45°C) की तुलना में अधिक ऊंची और ठंडी है।
निम्नलिखित में से कौन से देश विश्व में दो सबसे बड़े कोको उत्पादकों के रूप में जाने जाते हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कोट डी'आइवर और घाना
कोट डी'आइवर (आइवरी कोस्ट) और घाना विश्व में दो सबसे बड़े कोको उत्पादक हैं, जो वैश्विक कोको उत्पादन का 60% से अधिक हिस्सा मिलकर उत्पादित करते हैं। पश्चिम अफ्रीका कोको उत्पादन में प्रभुत्व रखता है, अनुकूल जलवायु परिस्थितियों और व्यापक खेती के कारण ये दोनों देश उद्योग में अग्रणी हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वैश्विक कोको उत्पादन
- पश्चिम अफ्रीका का प्रभुत्व: पश्चिम अफ्रीका विश्व के लगभग 70% कोको का उत्पादन करता है, जिसमें कोट डी'आइवर और घाना वैश्विक स्तर पर शीर्ष दो उत्पादक हैं।
- कोट डी'आइवर: विश्व का सबसे बड़ा कोको उत्पादक, वैश्विक उत्पादन का लगभग 40-45% हिस्सा उत्पादित करता है, लगभग दस लाख कोको किसान नेस्ले, मार्स और हर्शे जैसी प्रमुख कंपनियों को आपूर्ति करते हैं।
- घाना: दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, वैश्विक कोको उत्पादन में लगभग 20% का योगदान देता है, उच्च गुणवत्ता वाले कोको बीन्स के लिए जाना जाता है।
- अन्य उत्पादक: इंडोनेशिया, इक्वाडोर, कैमरून और नाइजीरिया अन्य महत्वपूर्ण कोको उत्पादक देश हैं, लेकिन उनका संयुक्त उत्पादन पश्चिम अफ्रीका से बहुत कम है।
- जलवायु आवश्यकताएं: कोको उष्णकटिबंधीय जलवायु में उच्च तापमान (21-32°C), उच्च आर्द्रता और सुवितरित वर्षा के साथ पनपता है, सामान्यतः भूमध्य रेखा से 10-20 डिग्री के भीतर।
- पर्यावरणीय प्रभाव: बड़े पैमाने पर कोको की खेती ने पश्चिम अफ्रीका में महत्वपूर्ण वनों की कटाई की है, विशेष रूप से कोट डी'आइवर में, जहां कोको बागानों के लिए वनों को साफ किया गया है।
- आर्थिक महत्व: कोको पश्चिम अफ्रीकी देशों के लिए एक प्रमुख निर्यात वस्तु है, जो लाखों छोटे किसानों को आजीविका प्रदान करती है लेकिन मूल्य अस्थिरता और श्रम मुद्दों जैसी चुनौतियों का भी सामना करती है।
निम्नलिखित जानकारी पर विचार कीजिए:
| क्षेत्र | पर्वत श्रृंखला का नाम | पर्वत का प्रकार |
|---|---|---|
| 1. मध्य एशिया | वोसजेस | वलित पर्वत |
| 2. यूरोप | आल्प्स | ब्लॉक पर्वत |
| 3. उत्तरी अमेरिका | अप्लेशियन | वलित पर्वत |
| 4. दक्षिण अमेरिका | एंडीज | वलित पर्वत |
उपरोक्त में से कितनी पंक्तियों में दी गई जानकारी सही सुमेलित है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
यह प्रश्न पर्वत श्रृंखलाओं के क्षेत्र और प्रकार के सही मिलान का परीक्षण करता है। दी गई चार पंक्तियों में से केवल दो में क्षेत्र, नाम और पर्वत श्रृंखला के प्रकार के संबंध में पूर्णतः सटीक जानकारी है।
❌ पंक्ति 1 – गलत: वोसजेस यूरोप (पूर्वी फ्रांस) में स्थित हैं, मध्य एशिया में नहीं, और वे ब्लॉक पर्वत हैं, वलित पर्वत नहीं।
❌ पंक्ति 2 – गलत: आल्प्स यूरोप में सही स्थित हैं, लेकिन वे अफ्रीकी और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर से निर्मित वलित पर्वत हैं, ब्लॉक पर्वत नहीं।
✅ पंक्ति 3 – सही: अप्लेशियन पर्वत उत्तरी अमेरिका में स्थित हैं और पुराने वलित पर्वत हैं जो पेलियोजोइक युग में बने थे।
✅ पंक्ति 4 – सही: एंडीज दक्षिण अमेरिका में स्थित हैं और नवीन वलित पर्वत हैं जो नाज़्का प्लेट के दक्षिण अमेरिकी प्लेट के नीचे अवनमन से बने हैं।
📝 संक्षिप्त टिप्पणी: पर्वत के प्रकार और निर्माण
| पर्वत का प्रकार | निर्माण प्रक्रिया | उदाहरण | विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| वलित पर्वत | टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से चट्टान परतों के संपीड़न और वलन द्वारा निर्मित | हिमालय, आल्प्स, एंडीज, अप्लेशियन, रॉकीज | अक्सर सबसे ऊँची चोटियाँ; भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधि से संबद्ध (नवीन वलित पर्वत) |
| ब्लॉक पर्वत | भ्रंशन और भूपर्पटी खंडों के ऊर्ध्वाधर विस्थापन से निर्मित | वोसजेस, ब्लैक फॉरेस्ट, सिएरा नेवादा, विंध्य | एक ओर खड़ा (भ्रंश अपरूप) और दूसरी ओर मंद; तनाव बलों द्वारा निर्मित |
| ज्वालामुखी पर्वत | ज्वालामुखी पदार्थों के संचय से निर्मित | माउंट फ़ूजी, माउंट किलिमंजारो, माउंट वेसुवियस | शंक्वाकार आकृति; सक्रिय, सुषुप्त, या विलुप्त ज्वालामुखी |
| अवशिष्ट/अवशेष पर्वत | दीर्घकालीन अपरदन के बाद पुराने पर्वतों के अवशेष | अरावली, यूराल (आंशिक रूप से) | गोलाकार चोटियाँ; अत्यधिक अपक्षयित और अपरदित |
- नवीन वलित पर्वत: हिमालय, आल्प्स, एंडीज, रॉकीज — तृतीयक काल (66-2.6 मिलियन वर्ष पूर्व) के दौरान निर्मित; उच्च चोटियों, तीक्ष्ण कटकों और सक्रिय टेक्टोनिक गतिविधि द्वारा विशेषित।
- प्राचीन वलित पर्वत: अप्लेशियन, यूराल, अरावली — पेलियोजोइक या उससे पूर्व के युगों में निर्मित; व्यापक रूप से अपरदित, गोलाकार चोटियों और निम्न ऊँचाई वाले।
- वोसजेस और ब्लैक फॉरेस्ट: यूरोप में ब्लॉक पर्वतों के उत्कृष्ट उदाहरण, उसी भ्रंशन प्रक्रिया द्वारा निर्मित जिसने उनके बीच राइन रिफ्ट घाटी बनाई।
- प्लेट टेक्टोनिक्स और पर्वत: अधिकांश प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएँ अभिसारी प्लेट सीमाओं (वलित पर्वत) या विभाजन के साथ अपसारी सीमाओं (ब्लॉक पर्वत) से संबद्ध हैं।
UPSC Prelims 2024 Questions Paper - Subject-wise Question Distribution
भारतीय राजव्यवस्था
17 Qs (17%)भारतीय अर्थव्यवस्था
17 Qs (17%)पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
16 Qs (16%)विश्व भूगोल
16 Qs (16%)विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
9 Qs (9%)समसामयिकी
9 Qs (9%)प्राचीन इतिहास
4 Qs (4%)आधुनिक इतिहास
3 Qs (3%)भारतीय कला और संस्कृति
3 Qs (3%)अंतरराष्ट्रीय संबंध
2 Qs (2%)भारत का भूगोल
2 Qs (2%)आंतरिक सुरक्षा
1 Qs (1%)मध्यकालीन इतिहास
1 Qs (1%)UPSC Prelims 2024 Question Paper - FAQs & Analysis
Q1 How many total questions were asked in UPSC Prelims 2024?
Q2 What is the subject-wise question breakdown for UPSC Prelims 2024?
- भारतीय राजव्यवस्था: 17 questions (17%)
- भारतीय अर्थव्यवस्था: 17 questions (17%)
- पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी: 16 questions (16%)
- विश्व भूगोल: 16 questions (16%)
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: 9 questions (9%)
- समसामयिकी: 9 questions (9%)
- प्राचीन इतिहास: 4 questions (4%)
- आधुनिक इतिहास: 3 questions (3%)
- भारतीय कला और संस्कृति: 3 questions (3%)
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: 2 questions (2%)
- भारत का भूगोल: 2 questions (2%)
- आंतरिक सुरक्षा: 1 questions (1%)
- मध्यकालीन इतिहास: 1 questions (1%)