UPSC Prelims 2024
प्राचीन इतिहास Previous Year Questions (PYQs)
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संघभूति, एक भारतीय बौद्ध भिक्षु, जो चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत में चीन गए थे, किसकी टीका के लेखक थे:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सर्वास्तिवाद विनय
संघभूति एक प्रमुख भारतीय बौद्ध भिक्षु और सर्वास्तिवाद संप्रदाय के विद्वान थे, जो चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत में चीन गए थे। वे विशेष रूप से सर्वास्तिवाद विनय पर अपनी टीका के लिए प्रसिद्ध हैं, जो सर्वास्तिवाद परंपरा के मठवासी नियमों और अनुशासन से संबंधित है। उनका कार्य चीनी बौद्ध समुदायों को विनय ग्रंथों के प्रसारण और व्याख्या में महत्वपूर्ण था।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
❌ विकल्प 1 – प्रज्ञापारमिता सूत्र: ये महायान सूत्र 'शून्यता' (सुन्यता) की अवधारणा पर केंद्रित हैं और संघभूति के विद्वतापूर्ण कार्य से संबंधित नहीं हैं।
❌ विकल्प 2 – विसुद्धिमग्ग: यह 5वीं शताब्दी में बुद्धघोष द्वारा लिखा गया एक व्यापक थेरवाद बौद्ध ग्रंथ है, संघभूति द्वारा नहीं।
❌ विकल्प 4 – ललितविस्तार: यह बुद्ध के जीवन का वर्णन करने वाला एक महायान सूत्र है और संघभूति के टीकाकार कार्य से जुड़ा नहीं है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सर्वास्तिवाद संप्रदाय और विनय साहित्य
- सर्वास्तिवाद संप्रदाय: प्रारंभिक बौद्ध संप्रदायों (हीनयान परंपरा) में से एक प्रमुख संप्रदाय जो उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य एशिया में फला-फूला; अर्थ है "वह सिद्धांत कि सब कुछ अस्तित्व में है"
- विनय ग्रंथ: बौद्ध धर्म में मठवासी अनुशासन का नियामक ढांचा, बौद्ध शास्त्रों के तीन पिटकों (त्रिपिटक) में से एक
- संघभूति का योगदान: पूर्वी जिन राजवंश के दौरान लगभग 383-395 ईस्वी में चीन गए; सर्वास्तिवाद विनय ग्रंथों का अनुवाद और टीका लिखी
- ऐतिहासिक संदर्भ: पहली से पांचवीं शताब्दी ईस्वी के दौरान भारत से चीन में बौद्ध धर्म के प्रसारण के बड़े आंदोलन का हिस्सा
- तीन पिटक: विनय पिटक (मठवासी नियम), सुत्त पिटक (प्रवचन), अभिधम्म पिटक (दार्शनिक विश्लेषण)
प्राचीन भारत के संदर्भ में, गौतम बुद्ध को सामान्यतः निम्नलिखित में से किन विशेषणों से जाना जाता था?
नायपुत्त
शाक्यमुनि
तथागत
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
गौतम बुद्ध को आमतौर पर कई विशेषणों से जाना जाता था जो उनके मूल और आध्यात्मिक उपलब्धि को दर्शाते थे। शाक्यमुनि का अर्थ है 'शाक्य कुल का मुनि' (उनका जन्म कुल), और तथागत का अर्थ है 'जो इस प्रकार गया/आया' (उनके ज्ञानोदय को दर्शाता है)। हालांकि, नायपुत्त (नाय का पुत्र) जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर के लिए प्रयुक्त विशेषण था, न कि बुद्ध के लिए।
❌ कथन 1 – गलत: नायपुत्त महावीर (जैन धर्म के संस्थापक) का विशेषण था, गौतम बुद्ध का नहीं।
✅ कथन 2 – सही: शाक्यमुनि का अर्थ 'शाक्य कुल का मुनि' है और यह बुद्ध के लिए एक सामान्य विशेषण था जो शाक्य कुल से संबंधित थे।
✅ कथन 3 – सही: तथागत, जिसका अर्थ है 'जो इस प्रकार गया/आया', बुद्ध के सबसे महत्वपूर्ण विशेषणों में से एक है जो उनके ज्ञानोदय को दर्शाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: गौतम बुद्ध के विशेषण और उपाधियाँ
- शाक्यमुनि: शाक्य कुल का मुनि; शाक्य गणराज्य में उनके जन्म को संदर्भित करता है
- तथागत: 'इस प्रकार गया' या 'इस प्रकार आया'; ज्ञान प्राप्त करने वाले को दर्शाता है और बुद्ध की प्रकृति का वर्णन करता है
- बुद्ध: 'जागृत' या 'ज्ञानी'
- सिद्धार्थ गौतम: उनका जन्म नाम; सिद्धार्थ का अर्थ है 'जिसने अपने लक्ष्यों को पूरा किया'
- भगवान/भगवत: 'धन्य' या 'प्रभु'
- सुगत: 'सुगमन' या 'सुभाषित'
- जिन: 'विजेता' (इच्छाओं और अज्ञान का)
- नोट: नायपुत्त (नाय का पुत्र) और महावीर (महान वीर) जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर वर्धमान के विशेषण थे
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- उपनिषदों में कोई दृष्टांत (parables) नहीं हैं।
- उपनिषद पुराणों से पहले रचे गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
यह प्रश्न प्राचीन भारतीय साहित्यिक स्रोतों की कालक्रमिकता और विशेषताओं के ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन 1 गलत है क्योंकि उपनिषदों में दार्शनिक अवधारणाओं को व्यक्त करने के लिए दृष्टांत और रूपक शामिल हैं। कथन 2 सही है क्योंकि उपनिषद (800-500 ईसा पूर्व) वास्तव में पुराणों (तीसरी शताब्दी ईस्वी के बाद) से बहुत पहले रचे गए थे।
❌ कथन 1 – गलत: उपनिषदों में अनेक दृष्टांत और रूपक हैं, जैसे छान्दोग्य उपनिषद में सत्यकाम जाबाल की कहानी और मुण्डक उपनिषद में दो पक्षियों का दृष्टांत, जिनका उपयोग जटिल दार्शनिक विचारों को समझाने के लिए किया गया है।
✅ कथन 2 – सही: उपनिषद, जो वेदांत (वेदों का अंत) बनाते हैं, 800-500 ईसा पूर्व के बीच रचे गए थे, जबकि पुराण बाद के ग्रंथों की एक शैली हैं जो लगभग तीसरी शताब्दी ईस्वी के बाद रचे गए, जिससे उपनिषद काफी पुराने हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: उपनिषद और पुराण
| विशेषता | उपनिषद | पुराण |
|---|---|---|
| रचना काल | 800-500 ईसा पूर्व (उत्तर वैदिक काल) | तीसरी शताब्दी ईस्वी के बाद (गुप्त काल और बाद में) |
| वैदिक साहित्य का भाग | हाँ, वेदांत (वेदों का अंत) बनाते हैं | नहीं, स्मृति परंपरा से संबंधित हैं |
| साहित्यिक शैली | दार्शनिक संवाद, दृष्टांत, रूपक | कथाएँ, वंशावली, ब्रह्मांड विज्ञान, मिथक |
| मुख्य विषयवस्तु | ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष, दार्शनिक जिज्ञासा | सृष्टि, विनाश, देवताओं और ऋषियों की वंशावली, अनुष्ठान |
| संख्या | 108 उपनिषद (13 प्रमुख) | 18 महापुराण और 18 उपपुराण |
| भाषा | वैदिक संस्कृत | शास्त्रीय संस्कृत |
- उपनिषदों को वेदांत (वेद + अंत) भी कहा जाता है क्योंकि वे वैदिक विचार के चरम का प्रतिनिधित्व करते हैं और हिंदू धर्म की दार्शनिक नींव बनाते हैं।
- प्रमुख उपनिषदों में शामिल हैं: ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक।
- पुराणों ने कहानियों और मिथकों के माध्यम से आम लोगों के बीच धार्मिक विचारों को लोकप्रिय बनाया, जो भक्ति आंदोलन के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- प्रमुख पुराणों में शामिल हैं: विष्णु पुराण, भागवत पुराण, शिव पुराण, मार्कण्डेय पुराण, मत्स्य पुराण।
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निम्नलिखित जानकारी पर विचार कीजिए:
| पुरातात्विक स्थल | राज्य | विवरण |
|---|---|---|
| 1. चंद्रकेतुगढ़ | ओडिशा | व्यापारिक बंदरगाह नगर |
| 2. इनामगांव | महाराष्ट्र | ताम्रपाषाणिक स्थल |
| 3. मंगडु | केरल | महापाषाणिक स्थल |
| 4. सालिहुंडम | आंध्र प्रदेश | शैलकृत गुहा मंदिर |
उपरोक्त में से किन पंक्तियों में दी गई जानकारी सही मेल खाती है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — 2 और 3
यह प्रश्न पुरातात्विक स्थलों के उनके संबंधित राज्यों और विवरणों के मिलान का परीक्षण करता है। केवल पंक्ति 2 और 3 में इनामगांव (महाराष्ट्र-ताम्रपाषाणिक) और मंगडु (केरल-महापाषाणिक) के बारे में सही जानकारी है, जबकि पंक्ति 1 और 4 में गलत राज्य संबंध हैं।
❌ पंक्ति 1 – गलत: चंद्रकेतुगढ़ ओडिशा में नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल में स्थित है; यह वास्तव में टेराकोटा मूर्तियों और समुद्री व्यापार के लिए जाना जाने वाला एक व्यापारिक बंदरगाह नगर था।
✅ पंक्ति 2 – सही: महाराष्ट्र में इनामगांव एक प्रमुख ताम्रपाषाणिक स्थल (लगभग 1600-700 ईसा पूर्व) है जो कृषि, पालतू पशुओं और दफन प्रथाओं के साक्ष्य के लिए जाना जाता है।
✅ पंक्ति 3 – सही: केरल में मंगडु में लैटेराइट ब्लॉकों से बने महापाषाणिक स्मारक हैं, जो दक्षिण भारत की व्यापक महापाषाणिक संस्कृति का हिस्सा हैं।
❌ पंक्ति 4 – गलत: आंध्र प्रदेश में सालिहुंडम एक बौद्ध स्थल है जिसमें स्तूप और मठ अवशेष हैं, शैलकृत गुहा मंदिर नहीं; यह प्राचीन कलिंग का एक महत्वपूर्ण तीर्थ केंद्र था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल
| स्थल | राज्य | काल/प्रकार | प्रमुख विशेषताएं |
|---|---|---|---|
| चंद्रकेतुगढ़ | पश्चिम बंगाल | आरंभिक ऐतिहासिक | व्यापारिक बंदरगाह, टेराकोटा कला, समुद्री संबंध |
| इनामगांव | महाराष्ट्र | ताम्रपाषाणिक | कृषि, वृत्ताकार झोपड़ियां, दफन प्रथाएं |
| मंगडु | केरल | महापाषाणिक | लैटेराइट पत्थर के स्मारक, लौह युग संस्कृति |
| सालिहुंडम | आंध्र प्रदेश | बौद्ध (द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व-चौथी शताब्दी सीई) | स्तूप, मठ परिसर, मूर्तियां |
| आदिचनल्लूर | तमिलनाडु | महापाषाणिक | कलश दफन, लौह उपकरण |
| ब्रह्मगिरि | कर्नाटक | महापाषाणिक/अशोक कालीन | शिलालेख, दफन स्थल |
UPSC Prelims 2024 - प्राचीन इतिहास Chapter-wise Distribution
प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत
1 Qs (25%)वैदिक काल
1 Qs (25%)धार्मिक आंदोलन
1 Qs (25%)प्राचीन भारतीय साहित्य
1 Qs (25%)UPSC Prelims 2024 - प्राचीन इतिहास Questions FAQs
Q1 How many प्राचीन इतिहास questions were asked in UPSC Prelims 2024?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for प्राचीन इतिहास in UPSC Prelims 2024?
- प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत: 1 questions (25%)
- वैदिक काल: 1 questions (25%)
- धार्मिक आंदोलन: 1 questions (25%)
- प्राचीन भारतीय साहित्य: 1 questions (25%)