संघभूति, एक भारतीय बौद्ध भिक्षु, जो चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत में चीन गए थे, किसकी टीका के लेखक थे:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सर्वास्तिवाद विनय
संघभूति एक प्रमुख भारतीय बौद्ध भिक्षु और सर्वास्तिवाद संप्रदाय के विद्वान थे, जो चौथी शताब्दी ईस्वी के अंत में चीन गए थे। वे विशेष रूप से सर्वास्तिवाद विनय पर अपनी टीका के लिए प्रसिद्ध हैं, जो सर्वास्तिवाद परंपरा के मठवासी नियमों और अनुशासन से संबंधित है। उनका कार्य चीनी बौद्ध समुदायों को विनय ग्रंथों के प्रसारण और व्याख्या में महत्वपूर्ण था।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
❌ विकल्प 1 – प्रज्ञापारमिता सूत्र: ये महायान सूत्र 'शून्यता' (सुन्यता) की अवधारणा पर केंद्रित हैं और संघभूति के विद्वतापूर्ण कार्य से संबंधित नहीं हैं।
❌ विकल्प 2 – विसुद्धिमग्ग: यह 5वीं शताब्दी में बुद्धघोष द्वारा लिखा गया एक व्यापक थेरवाद बौद्ध ग्रंथ है, संघभूति द्वारा नहीं।
❌ विकल्प 4 – ललितविस्तार: यह बुद्ध के जीवन का वर्णन करने वाला एक महायान सूत्र है और संघभूति के टीकाकार कार्य से जुड़ा नहीं है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सर्वास्तिवाद संप्रदाय और विनय साहित्य
- सर्वास्तिवाद संप्रदाय: प्रारंभिक बौद्ध संप्रदायों (हीनयान परंपरा) में से एक प्रमुख संप्रदाय जो उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य एशिया में फला-फूला; अर्थ है "वह सिद्धांत कि सब कुछ अस्तित्व में है"
- विनय ग्रंथ: बौद्ध धर्म में मठवासी अनुशासन का नियामक ढांचा, बौद्ध शास्त्रों के तीन पिटकों (त्रिपिटक) में से एक
- संघभूति का योगदान: पूर्वी जिन राजवंश के दौरान लगभग 383-395 ईस्वी में चीन गए; सर्वास्तिवाद विनय ग्रंथों का अनुवाद और टीका लिखी
- ऐतिहासिक संदर्भ: पहली से पांचवीं शताब्दी ईस्वी के दौरान भारत से चीन में बौद्ध धर्म के प्रसारण के बड़े आंदोलन का हिस्सा
- तीन पिटक: विनय पिटक (मठवासी नियम), सुत्त पिटक (प्रवचन), अभिधम्म पिटक (दार्शनिक विश्लेषण)
Question 1 of 1 बौद्ध साहित्य
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