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विश्व की कृषि Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for विश्व की कृषि with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित में से कौन से देश विश्व में दो सबसे बड़े कोको उत्पादकों के रूप में जाने जाते हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कोट डी'आइवर और घाना
कोट डी'आइवर (आइवरी कोस्ट) और घाना विश्व में दो सबसे बड़े कोको उत्पादक हैं, जो वैश्विक कोको उत्पादन का 60% से अधिक हिस्सा मिलकर उत्पादित करते हैं। पश्चिम अफ्रीका कोको उत्पादन में प्रभुत्व रखता है, अनुकूल जलवायु परिस्थितियों और व्यापक खेती के कारण ये दोनों देश उद्योग में अग्रणी हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वैश्विक कोको उत्पादन
- पश्चिम अफ्रीका का प्रभुत्व: पश्चिम अफ्रीका विश्व के लगभग 70% कोको का उत्पादन करता है, जिसमें कोट डी'आइवर और घाना वैश्विक स्तर पर शीर्ष दो उत्पादक हैं।
- कोट डी'आइवर: विश्व का सबसे बड़ा कोको उत्पादक, वैश्विक उत्पादन का लगभग 40-45% हिस्सा उत्पादित करता है, लगभग दस लाख कोको किसान नेस्ले, मार्स और हर्शे जैसी प्रमुख कंपनियों को आपूर्ति करते हैं।
- घाना: दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, वैश्विक कोको उत्पादन में लगभग 20% का योगदान देता है, उच्च गुणवत्ता वाले कोको बीन्स के लिए जाना जाता है।
- अन्य उत्पादक: इंडोनेशिया, इक्वाडोर, कैमरून और नाइजीरिया अन्य महत्वपूर्ण कोको उत्पादक देश हैं, लेकिन उनका संयुक्त उत्पादन पश्चिम अफ्रीका से बहुत कम है।
- जलवायु आवश्यकताएं: कोको उष्णकटिबंधीय जलवायु में उच्च तापमान (21-32°C), उच्च आर्द्रता और सुवितरित वर्षा के साथ पनपता है, सामान्यतः भूमध्य रेखा से 10-20 डिग्री के भीतर।
- पर्यावरणीय प्रभाव: बड़े पैमाने पर कोको की खेती ने पश्चिम अफ्रीका में महत्वपूर्ण वनों की कटाई की है, विशेष रूप से कोट डी'आइवर में, जहां कोको बागानों के लिए वनों को साफ किया गया है।
- आर्थिक महत्व: कोको पश्चिम अफ्रीकी देशों के लिए एक प्रमुख निर्यात वस्तु है, जो लाखों छोटे किसानों को आजीविका प्रदान करती है लेकिन मूल्य अस्थिरता और श्रम मुद्दों जैसी चुनौतियों का भी सामना करती है।
'ताड़ के तेल' (palm oil) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- ताड़ के तेल का पेड़ दक्षिण-पूर्व एशिया का मूल निवासी है।
- ताड़ का तेल लिपस्टिक और इत्र बनाने वाले कुछ उद्योगों के लिए एक कच्चा माल है।
- ताड़ के तेल का उपयोग जैव-डीजल के उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
यह प्रश्न ताड़ के तेल की उत्पत्ति, औद्योगिक अनुप्रयोगों और जैव ईंधन के रूप में उपयोग के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन 1 गलत है क्योंकि तेल ताड़ का पेड़ पश्चिम अफ्रीका का मूल निवासी है, दक्षिण-पूर्व एशिया का नहीं, हालांकि अब प्रमुख उत्पादन इंडोनेशिया और मलेशिया में होता है। कथन 2 और 3 सौंदर्य प्रसाधनों और जैव-डीजल उत्पादन में ताड़ के तेल के उपयोग के संबंध में सही हैं।
❌ कथन 1 – गलत: तेल ताड़ का पेड़ (Elaeis guineensis) पश्चिम अफ्रीका का मूल निवासी है, दक्षिण-पूर्व एशिया का नहीं। हालाँकि, इसे 19वीं शताब्दी में दक्षिण-पूर्व एशिया में लाया गया था, और आज इंडोनेशिया और मलेशिया वैश्विक ताड़ के तेल उत्पादन का लगभग 85% हिस्सा रखते हैं।
✅ कथन 2 – सही: ताड़ का तेल और इसके व्युत्पन्न पदार्थों का व्यापक रूप से सौंदर्य प्रसाधन उद्योगों में लिपस्टिक, इत्र, साबुन और लोशन के निर्माण के लिए उपयोग किया जाता है, क्योंकि इनमें नमी प्रदान करने वाले गुण और बनावट बढ़ाने की क्षमता होती है।
✅ कथन 3 – सही: ताड़ का तेल जैव-डीजल उत्पादन के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है। इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश पाम मिथाइल एस्टर (PME) का उपयोग नवीकरणीय ईंधन विकल्प के रूप में करते हैं, और इसे पारंपरिक डीजल के साथ मिश्रित किया जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ताड़ का तेल
- वानस्पतिक उत्पत्ति: तेल ताड़ (Elaeis guineensis) पश्चिम और मध्य अफ्रीका का मूल निवासी है, विशेष रूप से अंगोला, बेनिन, कैमरून और नाइजीरिया के तटीय क्षेत्र।
- प्रमुख उत्पादक: इंडोनेशिया (वैश्विक उत्पादन का 58%) और मलेशिया (27%) विश्व के सबसे बड़े उत्पादक हैं, जो कुल वैश्विक उत्पादन का लगभग 85% योगदान करते हैं।
- औद्योगिक उपयोग: खाद्य उद्योग (खाना पकाने का तेल, मार्जरीन), सौंदर्य प्रसाधन (साबुन, लिपस्टिक, क्रीम), फार्मास्यूटिकल्स, और जैव ईंधन (जैव-डीजल)।
- जैव-डीजल उत्पादन: ताड़ के तेल में उच्च तेल उपज (4-5 टन/हेक्टेयर) होती है, जो इसे जैव-डीजल के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाता है। इसे ट्रांसएस्टरीफिकेशन के माध्यम से पाम मिथाइल एस्टर (PME) में परिवर्तित किया जाता है।
- भारत का संदर्भ: भारत ताड़ के तेल का विश्व का सबसे बड़ा आयातक है (लगभग 8-9 मिलियन टन वार्षिक), मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से, जो इसकी खाद्य तेल आवश्यकताओं का लगभग 40% पूरा करता है।
- पर्यावरणीय चिंताएँ: बड़े पैमाने पर ताड़ के तेल के बागानों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में वनों की कटाई, आवास हानि (विशेष रूप से ऑरंगुटान के लिए), और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को जन्म दिया है।
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