प्रतिषेध रिट (Writ of Prohibition) सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालयों द्वारा जारी किया जाने वाला एक आदेश है:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — निचली अदालत को किसी मामले में कार्यवाही जारी रखने से प्रतिषेधित करता है।
प्रतिषेध रिट सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालयों द्वारा निचली अदालतों या न्यायाधिकरणों को उन मामलों में कार्यवाही जारी रखने से रोकने के लिए जारी की जाती है जहां उनके पास अधिकार क्षेत्र नहीं है या वे कानून के विपरीत कार्य कर रहे हैं। यह एक निवारक उपाय है, जो अंतिम निर्णय लेने से पहले निचली अदालत को अपने अधिकार से अधिक कार्य करने से रोकता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रतिषेध रिट
- परिभाषा: उच्च न्यायालयों (सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय) द्वारा निचली अदालतों या न्यायाधिकरणों को उन मामलों में कार्यवाही रोकने के लिए जारी किया गया न्यायिक आदेश जहां निचली अदालत अपने अधिकार क्षेत्र से अधिक कार्य कर रही है।
- प्रकृति: यह एक निवारक रिट है, अर्थात यह निचली अदालत द्वारा निर्णय लेने से पहले कार्यवाही को रोकती है, परमादेश (Certiorari) के विपरीत जो निर्णय के बाद जारी की जाती है।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 32 (सर्वोच्च न्यायालय) और अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय) के तहत, मौलिक अधिकारों और अन्य उद्देश्यों के लिए प्रतिषेध सहित रिट जारी की जा सकती हैं।
- दायरा: यह केवल न्यायिक और अर्ध-न्यायिक निकायों पर लागू होती है, प्रशासनिक अधिकारियों या विधायी निकायों पर नहीं।
- उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि न्यायालय और न्यायाधिकरण अपने कानूनी अधिकार क्षेत्र के भीतर काम करें और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन न करें।
- अन्य रिट से तुलना: जबकि प्रतिषेध भविष्य की कार्रवाई को रोकता है, परमादेश पिछले निर्णयों को रद्द करता है। परमादेश कर्तव्य के निष्पादन को बाध्य करता है, जबकि बंदी प्रत्यक्षीकरण व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है।
- उदाहरण: यदि कोई सिविल न्यायालय किसी ऐसे मामले की सुनवाई शुरू करता है जो कानूनी रूप से आपराधिक अधिकार क्षेत्र में आता है, तो प्रतिषेध रिट कार्यवाही को रोक सकती है।
| रिट का प्रकार | उद्देश्य | कब जारी की जाती है | किसके खिलाफ |
|---|---|---|---|
| प्रतिषेध | अधिकार क्षेत्र की अधिकता को रोकना | निर्णय से पहले (निवारक) | निचली अदालतें/न्यायाधिकरण |
| परमादेश | अवैध आदेशों को रद्द करना | निर्णय के बाद (उपचारात्मक) | निचली अदालतें/न्यायाधिकरण |
| परमादेश | कर्तव्य के निष्पादन को बाध्य करना | जब कर्तव्य का पालन नहीं किया जाता | सार्वजनिक अधिकारी/निकाय |
| बंदी प्रत्यक्षीकरण | व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा | अवैध हिरासत | हिरासत में रखने वाला प्राधिकरण |
| अधिकार पृच्छा | पद के अतिक्रमण की जांच | पद का अवैध कब्ज़ा | पद धारण करने वाला व्यक्ति |
Question 1 of 6 अधिकार क्षेत्र एवं शक्तियाँ
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