संविधान (71वां संशोधन) अधिनियम, 1992 ने संविधान की आठवीं अनुसूची में निम्नलिखित में से कौन सी भाषाओं को शामिल करने के लिए संशोधन किया?
- कोंकणी
- मणिपुरी
- नेपाली
- मैथिली
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — 1, 2 और 3
71वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में तीन भाषाओं को जोड़ा: कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली। इससे अनुसूचित भाषाओं की कुल संख्या 15 से बढ़कर 18 हो गई। मैथिली इस संशोधन का हिस्सा नहीं थी; इसे बाद में 92वें संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से बोडो, डोगरी और संथाली के साथ जोड़ा गया था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: आठवीं अनुसूची और भाषाओं का संशोधन
- आठवीं अनुसूची का अवलोकन: संविधान की आठवीं अनुसूची में भारत द्वारा मान्यता प्राप्त आधिकारिक भाषाओं की सूची है। मूल रूप से, 1950 में जब संविधान लागू हुआ तो इसमें 14 भाषाएं शामिल थीं। इन भाषाओं को संवैधानिक मान्यता, विकास के लिए सरकारी सहायता प्राप्त है और इनका उपयोग संसदीय कार्यवाही और प्रतियोगी परीक्षाओं में किया जा सकता है।
- 21वां संशोधन अधिनियम, 1967: यह आठवीं अनुसूची में पहला संशोधन था, जिसमें विभाजन के दौरान विस्थापित सिंधी भाषी समुदाय की भाषाई पहचान को मान्यता देने के लिए सिंधी को 15वीं भाषा के रूप में जोड़ा गया।
- 71वां संशोधन अधिनियम, 1992: तीन भाषाएं जोड़ी गईं - कोंकणी (गोवा और पड़ोसी राज्यों में बोली जाने वाली), मणिपुरी या मैतेई (मणिपुर की आधिकारिक भाषा), और नेपाली (सिक्किम, दार्जिलिंग और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बोली जाने वाली) - जिससे कुल संख्या 18 भाषाओं तक पहुंच गई।
- 92वां संशोधन अधिनियम, 2003: चार भाषाएं जोड़ी गईं - बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली - जिससे वर्तमान में कुल 22 अनुसूचित भाषाएं हो गईं, जो भारत की विशाल भाषाई विविधता को मान्यता देती हैं।
- अनुसूचित भाषाओं का महत्व: आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को आधिकारिक भाषा आयोगों में प्रतिनिधित्व का अधिकार है, इनका उपयोग यूपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में किया जा सकता है, और इन्हें उनके विकास और प्रचार के लिए सरकारी सहायता प्राप्त होती है।
- शास्त्रीय भाषाएं: छह भाषाओं को अलग से 'शास्त्रीय भाषा' का दर्जा दिया गया है - तमिल (2004), संस्कृत (2005), कन्नड़ (2008), तेलुगु (2008), मलयालम (2013), और ओडिया (2014)। यह दर्जा अनुसूचित भाषा के दर्जे से अलग है और प्राचीन साहित्यिक विरासत को मान्यता देता है।
- समावेशन के मानदंड: हालांकि कोई निश्चित संवैधानिक मानदंड मौजूद नहीं है, लेकिन आम तौर पर महत्वपूर्ण संख्या में बोलने वाले, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक महत्व वाली भाषाओं पर विचार किया जाता है। तुलु, भोजपुरी और राजस्थानी सहित कई भाषाओं की समावेशन की मांग जारी है।
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 344 आधिकारिक भाषाओं पर एक आयोग और संसद की एक समिति के गठन का प्रावधान करता है। अनुच्छेद 351 संघ को हिंदी को बढ़ावा देने और इसके संवर्धन के लिए संस्कृत और अन्य आठवीं अनुसूची की भाषाओं से शब्द लेने का निर्देश देता है।
| संशोधन अधिनियम | वर्ष | जोड़ी गई भाषाएं | कुल भाषाएं |
|---|---|---|---|
| मूल संविधान | 1950 | असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू | 14 |
| 21वां संशोधन | 1967 | सिंधी | 15 |
| 71वां संशोधन | 1992 | कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली | 18 |
| 92वां संशोधन | 2003 | बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली | 22 |
Question 1 of 5 महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन
Practice PYQ questions from this topic across all years
First question in this topic
भारत में, निम्नलिखित में से कौन सा संवैधानिक संशोधन मौलिक अधिकारों की न्यायिक व्याख्य...