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महासागर विज्ञान Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: महासागर विज्ञान
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जनवरी महीने में समताप रेखा मानचित्रों से निम्नलिखित में से कौन सा/से सही निष्कर्ष है/हैं?
- समताप रेखाएं महासागर के ऊपर उत्तर की ओर और महाद्वीप के ऊपर दक्षिण की ओर विचलित होती हैं।
- शीत महासागरीय धाराओं, गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक प्रवाह की उपस्थिति उत्तरी अटलांटिक महासागर को ठंडा बनाती है और समताप रेखाएं उत्तर की ओर मुड़ती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
जनवरी में (उत्तरी गोलार्ध की सर्दी), विभेदक तापन के कारण महाद्वीप महासागरों की तुलना में तेजी से ठंडे होते हैं। इससे समताप रेखाएं गर्म महासागरों के ऊपर उत्तर की ओर और ठंडे महाद्वीपों के ऊपर दक्षिण की ओर विचलित होती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक प्रवाह गर्म महासागरीय धाराएं हैं, शीत नहीं, और वे वास्तव में उत्तरी अटलांटिक को गर्म बनाती हैं, जिससे समताप रेखाएं उत्तर की ओर मुड़ती हैं।
✅ कथन 1 (समताप रेखा विचलन) – सही: जनवरी में, उत्तरी गोलार्ध में समताप रेखाएं महासागरों (जो गर्म रहते हैं) के ऊपर उत्तर की ओर और महाद्वीपों (जो ठंडे होते हैं) के ऊपर दक्षिण की ओर विचलित होती हैं, क्योंकि स्थल और जल की तापन और शीतलन दर भिन्न होती है।
❌ कथन 2 (गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक प्रवाह) – गलत: गल्फ स्ट्रीम और उत्तरी अटलांटिक प्रवाह गर्म महासागरीय धाराएं हैं, शीत नहीं; ये उष्णकटिबंधीय गर्म जल को उत्तर की ओर ले जाती हैं, जिससे उत्तरी अटलांटिक अपेक्षाकृत गर्म होता है और समताप रेखाएं उत्तर की ओर मुड़ती हैं, न कि इसे ठंडा बनाती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: समताप रेखाएं और महासागरीय धाराएं
- समताप रेखाएं: मानचित्र पर समान तापमान वाले बिंदुओं को जोड़ने वाली रेखाएं, जिनका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों और मौसमों में तापमान वितरण पैटर्न को समझने के लिए किया जाता है।
- जनवरी समताप रेखा पैटर्न (उत्तरी गोलार्ध): सर्दियों के दौरान, महाद्वीप महासागरों की तुलना में ठंडे होते हैं क्योंकि स्थल जल की तुलना में तेजी से ऊष्मा खोता है। समताप रेखाएं महाद्वीपों के ऊपर भूमध्य रेखा की ओर (दक्षिण की ओर) और महासागरों के ऊपर ध्रुव की ओर (उत्तर की ओर) मुड़ती हैं।
- जुलाई समताप रेखा पैटर्न (उत्तरी गोलार्ध): गर्मियों के दौरान, महाद्वीप महासागरों की तुलना में गर्म होते हैं। समताप रेखाएं महाद्वीपों के ऊपर ध्रुव की ओर (उत्तर की ओर) और महासागरों के ऊपर भूमध्य रेखा की ओर (दक्षिण की ओर) मुड़ती हैं।
- गल्फ स्ट्रीम: मेक्सिको की खाड़ी में उत्पन्न होने वाली एक शक्तिशाली गर्म महासागरीय धारा, जो उत्तरी अमेरिका के पूर्वी तट के साथ प्रवाहित होती है और अटलांटिक के पार यूरोप की ओर जाती है, पश्चिमी यूरोप की जलवायु को महत्वपूर्ण रूप से गर्म बनाती है।
- उत्तरी अटलांटिक प्रवाह: गल्फ स्ट्रीम का विस्तार जो उत्तरी अटलांटिक के पार पूर्व की ओर जारी रहता है, ब्रिटिश द्वीपसमूह और स्कैंडिनेविया सहित उत्तर-पश्चिमी यूरोप में गर्म जल और हल्का तापमान लाता है।
- समताप रेखाओं पर महासागरीय धाराओं का प्रभाव: गल्फ स्ट्रीम जैसी गर्म धाराएं समताप रेखाओं को ध्रुव की ओर (उत्तरी गोलार्ध में उत्तर की ओर) मोड़ती हैं, जबकि लैब्राडोर धारा जैसी शीत धाराएं समताप रेखाओं को भूमध्य रेखा की ओर (उत्तरी गोलार्ध में दक्षिण की ओर) मोड़ती हैं।
- विभेदक तापन: जल की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता स्थल से अधिक होती है, जिसका अर्थ है कि महासागर महाद्वीपों की तुलना में अधिक धीरे-धीरे गर्म और ठंडे होते हैं, जिससे मौसमी तापमान विरोधाभास उत्पन्न होते हैं जो समताप रेखा पैटर्न को प्रभावित करते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- लाल सागर को किसी भी रूप में बहुत कम वर्षण प्राप्त होता है।
- लाल सागर में नदियों से कोई जल प्रवेश नहीं करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
लाल सागर एक शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित है जो अत्यधिक उच्च तापमान और कम आर्द्रता की विशेषता रखता है, जिसके परिणामस्वरूप न्यूनतम वर्षण होता है। इसके अतिरिक्त, कोई प्रमुख नदी लाल सागर में नहीं बहती है; इसका जल मुख्य रूप से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से अदन की खाड़ी से अधिक नमकीन जल के प्रवाह से आता है।
✅ कथन 1 (कम वर्षण) – सही: लाल सागर को मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण उच्च तापमान और कम आर्द्रता के कारण बहुत कम वर्षण प्राप्त होता है।
✅ कथन 2 (नदी प्रवाह नहीं) – सही: लाल सागर में कोई प्रमुख नदी नहीं बहती है; जल मुख्य रूप से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से अदन की खाड़ी से प्रवेश करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लाल सागर - समुद्र विज्ञान संबंधी विशेषताएं
- स्थान: लाल सागर हिंद महासागर का एक समुद्री जल प्रवेश द्वार है, जो अफ्रीका (मिस्र, सूडान, इरिट्रिया, जिबूती) और एशिया (सऊदी अरब, यमन) के बीच स्थित है, जो बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के माध्यम से अदन की खाड़ी से अरब सागर से जुड़ा हुआ है।
- जलवायु: अत्यधिक उच्च तापमान, कम आर्द्रता और न्यूनतम वर्षा (वार्षिक 100 मिमी से कम) वाली शुष्क मरुस्थलीय पेटी में स्थित है, जो इसे विश्व स्तर पर सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक बनाता है।
- नदी प्रवाह: अधिकांश सागरों के विपरीत, लाल सागर में कोई महत्वपूर्ण नदी जल निकासी नहीं है, जो इसकी उच्च लवणता में योगदान देने वाली एक अद्वितीय समुद्र विज्ञान विशेषता है।
- उच्च लवणता: लाल सागर में विश्व महासागरों में सबसे अधिक लवणता (लगभग 40-41 पीपीटी) है, जो उच्च वाष्पीकरण दर, कम वर्षण और नदियों से मीठे पानी के प्रवाह की अनुपस्थिति के कारण है।
- जल विनिमय: अदन की खाड़ी से जल प्रवेश करता है (अधिक नमकीन, सघन जल) और सतही जल के रूप में बाहर निकलता है, जो एक अद्वितीय परिसंचरण पैटर्न बनाता है जो लाल सागर की लवणता और तापमान को बनाए रखता है।
- तापमान: सतही जल का तापमान सर्दियों में 20°C से गर्मियों में 30°C से अधिक होता है, जो इसे दुनिया के सबसे गर्म सागरों में से एक बनाता है।
- रणनीतिक महत्व: लाल सागर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उत्तर में स्वेज नहर से जुड़ता है, जो यूरोप और एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग के रूप में कार्य करता है।
निम्नलिखित में से कौन सा समुद्र तल में बार-बार गिरावट का सबसे अच्छा उदाहरण है, जिससे वर्तमान में व्यापक दलदली भूमि का निर्माण हुआ है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — कच्छ का रण
कच्छ का रण समुद्र तल में बार-बार गिरावट से व्यापक दलदली भूमि के निर्माण का सबसे अच्छा उदाहरण है। भूगर्भीय साक्ष्य बताते हैं कि गुजरात में स्थित यह विशाल नमकीन दलदल कभी अरब सागर का उथला विस्तार था, लेकिन विवर्तनिक गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र तल में बार-बार गिरावट आई, जिससे नमकीन पदार्थों का जमाव हुआ और वर्तमान मौसमी दलदली भूमि का निर्माण हुआ। मानसून के दौरान, यह पानी से भर जाता है और एक उथली झील बन जाती है, और गर्मियों में, यह सूखकर विस्तृत सफेद नमक के मैदानों में बदल जाता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
विकल्प 1 – भितरकणिका मैंग्रोव: यह ओडिशा में एक डेल्टाई मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र है जो नदी की तलछट जमाव से बना है, समुद्र तल में बार-बार गिरावट से नहीं।
विकल्प 2 – मरक्कनम नमक के खेत: ये तमिलनाडु में तटीय नमक उत्पादन क्षेत्र हैं, जो नमक निष्कर्षण के लिए मानवीय हस्तक्षेप से बनाए गए हैं, प्राकृतिक समुद्र तल प्रतिगमन से नहीं।
विकल्प 3 – नौपाड़ा दलदल: यह आंध्र प्रदेश में एक मीठे पानी का आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र है, जो समुद्र तल परिवर्तन से असंबंधित है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: कच्छ के रण का निर्माण
- स्थान: उत्तर-पश्चिमी गुजरात, पाकिस्तान तक विस्तारित; थार मरुस्थल क्षेत्र का हिस्सा
- प्रकार: ग्रेट रण (बड़ा, उत्तरी) और लिटिल रण (छोटा, दक्षिणी)
- भूगर्भीय इतिहास: कभी अरब सागर का हिस्सा था; प्लीस्टोसीन युग के दौरान विवर्तनिक उत्थान और समुद्र तल के उतार-चढ़ाव ने इसे समुद्र से अलग कर दिया
- मौसमी परिवर्तन: मानसून के दौरान जलमग्न (जून-सितंबर); गर्मियों में नमक की परत वाले रेगिस्तान में सूख जाता है
- पारिस्थितिक महत्व: लिटिल रण में जंगली गधा अभयारण्य; राजहंस के लिए प्रजनन स्थल; अनूठी लवणरागी (नमक-सहिष्णु) वनस्पति
- आर्थिक महत्व: प्रमुख नमक उत्पादन क्षेत्र; अगरिया समुदाय द्वारा पारंपरिक नमक खेती
- सांस्कृतिक विरासत: रण उत्सव महोत्सव के लिए प्रसिद्ध; कच्छी समुदायों के पारंपरिक हस्तशिल्प
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निम्नलिखित में से किस एक स्थिति में "बायोरॉक प्रौद्योगिकी" के बारे में चर्चा की जाती है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — क्षतिग्रस्त प्रवाल भित्तियों की बहाली
बायोरॉक प्रौद्योगिकी (जिसे खनिज संचयन प्रौद्योगिकी के रूप में भी जाना जाता है) समुद्री जल के माध्यम से कम-वोल्टेज प्रत्यक्ष विद्युत धारा का उपयोग करती है जो घुलित खनिजों को अवक्षेपित करती है, जलमग्न धातु संरचनाओं पर चूना पत्थर जैसी संरचना बनाती है। यह प्रवाल लार्वा के स्थापित होने और बढ़ने के लिए एक आदर्श आधार बनाता है, जो प्राकृतिक वृद्धि दर की तुलना में 3-5 गुना तेजी से प्रवाल भित्ति बहाली में तेजी लाता है। यह प्रौद्योगिकी प्रवालों को समुद्री तापन और अम्लीकरण जैसे पर्यावरणीय तनावों के प्रति अधिक लचीला बनाती है, जिससे यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के लिए एक मूल्यवान उपकरण बन जाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बायोरॉक प्रौद्योगिकी
- सिद्धांत: कम-वोल्टेज DC धारा (1.2-6 वोल्ट) का उपयोग करके समुद्री जल का विद्युत अपघटन कैथोड संरचनाओं पर कैल्शियम कार्बोनेट और मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड का अवक्षेपण करता है
- संरचना: धातु के फ्रेम (आमतौर पर इस्पात) पानी के नीचे रखे जाते हैं और कम-वोल्टेज विद्युत स्रोत (सौर पैनल या ज्वारीय ऊर्जा) से जुड़े होते हैं
- प्रवाल बहाली के लिए लाभ: त्वरित प्रवाल वृद्धि (3-5 गुना तेज), प्रवाल जीवित रहने की दर में वृद्धि (50 गुना तक अधिक), विरंजन और बीमारियों के प्रति बढ़ी हुई प्रतिरोधक क्षमता
- अनुप्रयोग: प्रवाल भित्ति बहाली, कृत्रिम भित्ति निर्माण, तटरेखा संरक्षण, समुद्री कृषि समर्थन
- विकासकर्ता: 1970 के दशक में वास्तुकार वुल्फ हिल्बर्ट्ज़ और समुद्री जीवविज्ञानी थॉमस गोरो द्वारा प्रवर्तित
- वैश्विक उदाहरण: मालदीव, इंडोनेशिया, थाईलैंड, सेशेल्स और क्षतिग्रस्त प्रवाल भित्तियों वाले अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में परियोजनाएं
- भारत संदर्भ: प्रवाल बहाली के लिए मन्नार की खाड़ी, लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में संभावित अनुप्रयोग
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में, व्यापारिक पवनों के प्रभाव के कारण महासागरों के पश्चिमी भाग पूर्वी भागों की तुलना में अधिक गर्म होते हैं।
शीतोष्ण क्षेत्र में, पछुआ पवनें महासागरों के पूर्वी भागों को पश्चिमी भागों की तुलना में अधिक गर्म बनाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
दोनों कथन महासागरीय तापमान वितरण पर प्रचलित पवनों के प्रभाव का सही वर्णन करते हैं। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापारिक पवनें और शीतोष्ण क्षेत्रों में पछुआ पवनें अपनी-अपनी दिशाओं में गर्म सतही धाराओं को संचालित करती हैं, जिससे महासागरीय बेसिनों में विशिष्ट तापमान प्रतिरूप बनते हैं।
✅ कथन 1 – सही: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापारिक पवनें (पूर्व से पश्चिम की ओर) गर्म सतही जल को पश्चिम की ओर धकेलती हैं, जिससे उष्णकटिबंधीय महासागरों के पश्चिमी भाग पूर्वी भागों की तुलना में अधिक गर्म होते हैं (उदा. गर्म पश्चिमी प्रशांत बनाम ठंडा पूर्वी प्रशांत)।
✅ कथन 2 – सही: शीतोष्ण क्षेत्रों में पछुआ पवनें (पश्चिम से पूर्व की ओर) गर्म जल को पूर्व की ओर ले जाती हैं, जिससे पूर्वी भाग पश्चिमी भागों की तुलना में अधिक गर्म होते हैं (उदा. उत्तरी अटलांटिक प्रवाह पश्चिमी यूरोप को गर्म करता है)।
📝 संक्षिप्त नोट्स: महासागरीय तापमान वितरण और पवन प्रतिरूप
| क्षेत्र | प्रचलित पवन | पवन दिशा | गर्म महासागरीय भाग | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (0°-30°) | व्यापारिक पवनें | पूर्व से पश्चिम | पश्चिमी भाग अधिक गर्म | गर्म पश्चिमी प्रशांत बनाम ठंडी पेरू धारा (पूर्वी प्रशांत) |
| शीतोष्ण क्षेत्र (30°-60°) | पछुआ पवनें | पश्चिम से पूर्व | पूर्वी भाग अधिक गर्म | गल्फ स्ट्रीम/उत्तरी अटलांटिक प्रवाह पश्चिमी यूरोप को गर्म करता है |
- व्यापारिक पवनों की क्रियाविधि: गर्म भूमध्यरेखीय जल को पश्चिम की ओर धकेलती हैं, जिससे पश्चिमी महासागरीय सीमाओं पर गर्म जल का संचय होता है और पूर्वी सीमाओं पर ठंडे जल का उत्प्लवन होता है
- पछुआ पवनों की क्रियाविधि: पश्चिम से पूर्व की ओर गर्म धाराओं को संचालित करती हैं, निम्न अक्षांशों से उच्च अक्षांशों की ओर पूर्वी महासागरीय किनारों पर ऊष्मा स्थानांतरित करती हैं
- पश्चिमी सीमांत धाराएं: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में (उदा. गल्फ स्ट्रीम, कुरोशियो) गर्म, संकीर्ण और तेज प्रवाही होती हैं
- पूर्वी सीमांत धाराएं: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में (उदा. कैलिफोर्निया धारा, पेरू धारा) ठंडी, चौड़ी और धीमी प्रवाही होती हैं
- जलवायु प्रभाव: ये प्रतिरूप तटीय जलवायु को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं, जिसमें पश्चिमी उष्णकटिबंधीय तट अधिक गर्म और आर्द्र होते हैं, जबकि पूर्वी उष्णकटिबंधीय तट अधिक ठंडे और शुष्क होते हैं
महासागर औसत तापमान (OMT) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- OMT को 26°C समताप रेखा की गहराई तक मापा जाता है जो जनवरी-मार्च के दौरान दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर में 129 मीटर है।
- जनवरी-मार्च के दौरान एकत्रित OMT का उपयोग यह आकलन करने में किया जा सकता है कि मानसून में वर्षा की मात्रा किसी निश्चित दीर्घकालिक औसत से कम होगी या अधिक।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
महासागर औसत तापमान (OMT) को 26°C समताप रेखा की गहराई तक मापा जाता है और यह मानसून पूर्वानुमान के लिए ऊपरी महासागर ऊष्मा सामग्री का एक विश्वसनीय संकेतक है। कथन 1 गलत है क्योंकि जनवरी-मार्च के दौरान दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर में 26°C समताप रेखा की गहराई लगभग 59 मीटर है, 129 मीटर नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि जनवरी-मार्च के दौरान एकत्रित OMT डेटा का उपयोग वास्तव में यह आकलन करने के लिए किया जा सकता है कि भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा (ISMR) दीर्घकालिक औसत से अधिक होगी या कम।
❌ कथन 1 – गलत: दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर में जनवरी-मार्च के दौरान 26°C समताप रेखा की गहराई लगभग 59 मीटर है, 129 मीटर नहीं।
✅ कथन 2 – सही: जनवरी-मार्च के दौरान एकत्रित OMT का उपयोग यह भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है कि ISMR दीर्घकालिक औसत से अधिक होगी या कम, जो इसे एक मूल्यवान पूर्वानुमान उपकरण बनाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: महासागर औसत तापमान (OMT)
- परिभाषा: OMT सतह से लेकर 26°C समताप रेखा (D26) की गहराई तक महासागरीय जल स्तंभ का औसत तापमान है।
- महत्व: OMT अकेले समुद्र सतह तापमान (SST) की तुलना में ऊपरी महासागर ऊष्मा सामग्री का अधिक स्थिर और विश्वसनीय संकेतक है।
- मानसून पूर्वानुमान: भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के शोध से पता चलता है कि दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर में जनवरी-मार्च से OMT डेटा अधिक सटीकता के साथ भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून वर्षा की भविष्यवाणी कर सकता है।
- गहराई माप: 26°C समताप रेखा की गहराई स्थानिक और अस्थायी रूप से भिन्न होती है; जनवरी-मार्च के दौरान दक्षिण-पश्चिमी हिंद महासागर में यह लगभग 59 मीटर है।
- SST पर लाभ: SST के विपरीत जो सतही प्रक्रियाओं के कारण तेजी से उतार-चढ़ाव कर सकता है, OMT ऊपरी महासागर परत की एकीकृत ऊष्मा सामग्री का प्रतिनिधित्व करता है।
- भविष्यवाणी मूल्य: उच्च OMT मान आम तौर पर भारत में सामान्य से अधिक मानसून वर्षा के लिए अनुकूल परिस्थितियों का संकेत देते हैं।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
- विश्व की अधिकांश प्रवाल भित्तियाँ उष्णकटिबंधीय जल में पाई जाती हैं।
- विश्व की एक-तिहाई से अधिक प्रवाल भित्तियाँ ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस के क्षेत्रों में स्थित हैं।
- प्रवाल भित्तियाँ उष्णकटिबंधीय वर्षावनों की तुलना में कहीं अधिक संख्या में पशु संघों की मेजबानी करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
प्रवाल भित्तियों के बारे में तीनों कथन सही हैं। प्रवाल भित्तियाँ मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय जल में पाई जाती हैं जहाँ उनकी वृद्धि के लिए इष्टतम परिस्थितियाँ होती हैं। प्रवाल भित्तियों का वितरण अत्यधिक केंद्रित है, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस मिलकर विश्व की एक-तिहाई से अधिक प्रवाल भित्तियों की मेजबानी करते हैं। उल्लेखनीय रूप से, प्रवाल भित्तियाँ केवल प्रजातियों की संख्या के संदर्भ में ही नहीं बल्कि संघीय विविधता के संदर्भ में भी असाधारण जैव विविधता प्रदर्शित करती हैं, जो उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाए जाने वाले केवल 9 संघों की तुलना में 34 में से 32 पशु संघों की मेजबानी करती हैं।
✅ कथन 1 – सही: प्रवाल भित्तियाँ मुख्य रूप से 30°N और 30°S अक्षांशों के बीच गर्म, उथले, स्वच्छ उष्णकटिबंधीय जल में पनपती हैं, जहाँ समुद्री सतह का तापमान आमतौर पर 20°C और 30°C के बीच रहता है।
✅ कथन 2 – सही: ये तीन देश (ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस) विश्व के प्रवाल भित्ति क्षेत्र के 40% से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें इंडोनेशिया लगभग 18%, ऑस्ट्रेलिया 17% और फिलीपींस 9% है।
✅ कथन 3 – सही: जबकि वर्षावनों में प्रजातियों की संख्या अधिक है, प्रवाल भित्तियों में अधिक संघीय विविधता है, जो उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में पाए जाने वाले लगभग 9 संघों की तुलना में 34 मान्यता प्राप्त पशु संघों में से 32 की मेजबानी करती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रवाल भित्तियाँ
- परिभाषा: प्रवाल भित्तियाँ प्रवालों द्वारा स्रावित कैल्शियम कार्बोनेट से निर्मित पानी के नीचे की संरचनाएँ हैं, जो एंथोजोआ वर्ग से संबंधित समुद्री अकशेरुकी हैं।
- भौगोलिक वितरण: मुख्य रूप से 30°N और 30°S अक्षांशों के बीच उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय जल में पाई जाती हैं, महासागर तल के 0.1% से कम क्षेत्र को कवर करती हैं लेकिन 25% समुद्री प्रजातियों का समर्थन करती हैं।
- इष्टतम परिस्थितियाँ: गर्म पानी (20-30°C), उथली गहराई (सूर्य के प्रकाश के प्रवेश के लिए 50 मीटर से कम), कम गंदलापन वाला स्वच्छ पानी, सामान्य लवणता (32-42 ppt), और न्यूनतम प्रदूषण की आवश्यकता होती है।
- प्रमुख प्रवाल भित्ति क्षेत्र: ग्रेट बैरियर रीफ (ऑस्ट्रेलिया - सबसे बड़ा), कोरल ट्राएंगल (इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी), कैरेबियन सागर, लाल सागर और हिंद महासागर के द्वीप।
- जैव विविधता हॉटस्पॉट: 34 में से 32 पशु संघों (पृथ्वी पर उच्चतम संघीय विविधता) की मेजबानी करती हैं, 4,000 से अधिक मछली प्रजातियों, 800 प्रवाल प्रजातियों और अनगिनत अकशेरुकी जीवों का समर्थन करती हैं।
- पारिस्थितिक महत्व: लहरों और तूफानों से तटीय सुरक्षा प्रदान करती हैं, मत्स्य पालन का समर्थन करती हैं, पर्यटन राजस्व उत्पन्न करती हैं, और औषधीय यौगिकों के स्रोत हैं।
- खतरे: जलवायु परिवर्तन और महासागर का गर्म होना (प्रवाल विरंजन का कारण), महासागर अम्लीकरण, अत्यधिक मछली पकड़ना, प्रदूषण, विनाशकारी मछली पकड़ने की प्रथाएँ, और तटीय विकास।
भारत के एक स्थान पर यदि आप समुद्र तट पर खड़े होकर समुद्र को देखें, तो आप पाएंगे कि समुद्र का पानी तट से कुछ किलोमीटर दूर चला जाता है और दिन में दो बार वापस तट पर आता है, और जब पानी पीछे हटता है तो आप वास्तव में समुद्र तल पर चल सकते हैं। यह अनोखी घटना कहाँ देखी जाती है -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — चांदीपुर
ओडिशा के बालासोर जिले में स्थित चांदीपुर समुद्र तट अपनी अनूठी घटना के लिए प्रसिद्ध है जहाँ कम ज्वार के दौरान समुद्र 2-5 किलोमीटर तक पीछे हट जाता है, जिससे कई घंटों तक समुद्र तल उजागर हो जाता है। यह असाधारण ज्वारीय व्यवहार समुद्र तट की अत्यधिक उथली ढाल और सपाट समुद्र तल के कारण दिन में दो बार होता है, जिससे आगंतुक सचमुच समुद्र तल पर चल सकते हैं। उच्च ज्वार के दौरान पानी वापस आ जाता है, जो इसे भारत की सबसे विशिष्ट तटीय विशेषताओं में से एक बनाता है।
महासागरों और समुद्रों में ज्वार-भाटा निम्नलिखित में से किसके कारण होता है?
- सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल
- चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल
- पृथ्वी का अपकेन्द्री बल
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल ज्वार निर्माण में योगदान देता है, जो अपने अधिक द्रव्यमान के बावजूद बड़ी दूरी के कारण चंद्रमा की तुलना में लगभग 46% प्रबल ज्वारीय बल उत्पन्न करता है।
✅ कथन 2 – सही: चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव ज्वार का प्रमुख कारण है, जो पृथ्वी के चंद्रमा की ओर वाले हिस्से पर समुद्री जल पर अधिक गुरुत्वाकर्षण के कारण एक ज्वारीय उभार बनाता है।
✅ कथन 3 – सही: अपकेन्द्री बल जो पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली के घूर्णन से उनके सामान्य द्रव्यमान केंद्र (बैरीसेंटर) के चारों ओर उत्पन्न होता है, पृथ्वी के चंद्रमा के विपरीत दिशा में एक दूसरा ज्वारीय उभार बनाता है।
भूमध्यरेखीय प्रति-धारा के पूर्व दिशा में बहने की व्याख्या क्या है?
Detailed Explanation:
उत्तरी और दक्षिणी भूमध्यरेखीय धाराएं व्यापारिक पवनों के कारण पश्चिम की ओर बहती हैं, जिससे महासागर द्रोणियों के पश्चिमी किनारों पर पानी जमा हो जाता है और पश्चिम में समुद्र तल ऊंचा हो जाता है।
यह अभिसरण और पानी का संचय एक दबाव प्रवणता उत्पन्न करता है जो भूमध्यरेखीय प्रति-धारा को डोलड्रम्स क्षेत्र (जहां सतही पवनें कमज़ोर हैं) में दोनों भूमध्यरेखीय धाराओं के बीच पूर्व दिशा में बहने के लिए प्रेरित करता है, जो समुद्री संतुलन बहाल करता है।
निम्नलिखित में से किनमें प्रवाल भित्तियाँ हैं?
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
- कच्छ की खाड़ी
- मन्नार की खाड़ी
- सुंदरबन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तटों के साथ व्यापक किनारे प्रवाल भित्तियाँ हैं, जो भारत के सबसे समृद्ध समुद्री जैव विविधता क्षेत्रों में से एक हैं।
✅ कथन 2 – सही: कच्छ की खाड़ी में उत्तरी अरब सागर में प्रवाल भित्तियाँ हैं, जिसे 1982 में भारत के पहले समुद्री राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया गया।
✅ कथन 3 – सही: भारत और श्रीलंका के बीच मन्नार की खाड़ी में किनारे प्रवाल भित्तियों वाले 21 द्वीप हैं, जिन्हें समुद्री जीवमंडल रिजर्व के रूप में मान्यता प्राप्त है।
❌ कथन 4 – गलत: सुंदरबन एक मैंग्रोव डेल्टा पारिस्थितिकी तंत्र है जिसमें खारा पानी और मिट्टी का आधार है, जो प्रवाल भित्ति निर्माण के लिए अनुपयुक्त है जिसके लिए स्वच्छ खारे पानी की आवश्यकता होती है।
विश्व के सबसे महत्वपूर्ण मत्स्य क्षेत्र उन प्रदेशों में पाए जाते हैं जहाँ:
Detailed Explanation:
विश्व के सबसे उत्पादक मत्स्य क्षेत्र वहाँ स्थित हैं जहाँ गर्म और ठंडी महासागरीय धाराएँ मिलती हैं। यह मिश्रण पोषक तत्वों से भरपूर जल और फाइटोप्लैंकटन वृद्धि के लिए आदर्श परिस्थितियाँ बनाता है, जो समुद्री खाद्य श्रृंखला का आधार है।
ग्रैंड बैंक्स (न्यूफाउंडलैंड): ठंडी लैब्राडोर धारा और गर्म गल्फ स्ट्रीम का मिलन, विश्व के सबसे समृद्ध मत्स्य क्षेत्रों में से एक।
उत्तर-पश्चिम प्रशांत (जापान): ठंडी ओयाशियो धारा और गर्म कुरोशियो धारा का मिलन, अत्यधिक उत्पादक मत्स्यन का समर्थन करता है।
निम्नलिखित कारकों पर विचार कीजिए:
- पृथ्वी का घूर्णन
- वायु दाब और पवन
- महासागरीय जल का घनत्व
- पृथ्वी की परिक्रमा
उपर्युक्त में से कौन से कारक महासागरीय धाराओं को प्रभावित करते हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: पृथ्वी का घूर्णन कोरिओलिस प्रभाव उत्पन्न करता है, जो उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराओं को दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित करता है।
✅ कथन 2 – सही: वायु दाब और पवन महासागर की सतह पर घर्षण द्वारा पवन-प्रेरित धाराएँ उत्पन्न करते हैं; व्यापारिक पवनें और पछुआ पवनें जैसी प्रचलित पवनें प्रमुख सतही धाराओं को संचालित करती हैं।
✅ कथन 3 – सही: महासागरीय जल का घनत्व, जो तापमान और लवणता द्वारा निर्धारित होता है, तापलवणीय परिसंचरण (गहरी महासागरीय धाराएँ) को संचालित करता है।
❌ कथन 4 – गलत: पृथ्वी की परिक्रमा (सूर्य के चारों ओर कक्षा) मौसमी परिवर्तन लाती है लेकिन महासागरीय धाराओं को सीधे प्रभावित नहीं करती।