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महासागरीय धाराएँ Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for महासागरीय धाराएँ with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में, व्यापारिक पवनों के प्रभाव के कारण महासागरों के पश्चिमी भाग पूर्वी भागों की तुलना में अधिक गर्म होते हैं।
शीतोष्ण क्षेत्र में, पछुआ पवनें महासागरों के पूर्वी भागों को पश्चिमी भागों की तुलना में अधिक गर्म बनाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
दोनों कथन महासागरीय तापमान वितरण पर प्रचलित पवनों के प्रभाव का सही वर्णन करते हैं। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापारिक पवनें और शीतोष्ण क्षेत्रों में पछुआ पवनें अपनी-अपनी दिशाओं में गर्म सतही धाराओं को संचालित करती हैं, जिससे महासागरीय बेसिनों में विशिष्ट तापमान प्रतिरूप बनते हैं।
✅ कथन 1 – सही: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापारिक पवनें (पूर्व से पश्चिम की ओर) गर्म सतही जल को पश्चिम की ओर धकेलती हैं, जिससे उष्णकटिबंधीय महासागरों के पश्चिमी भाग पूर्वी भागों की तुलना में अधिक गर्म होते हैं (उदा. गर्म पश्चिमी प्रशांत बनाम ठंडा पूर्वी प्रशांत)।
✅ कथन 2 – सही: शीतोष्ण क्षेत्रों में पछुआ पवनें (पश्चिम से पूर्व की ओर) गर्म जल को पूर्व की ओर ले जाती हैं, जिससे पूर्वी भाग पश्चिमी भागों की तुलना में अधिक गर्म होते हैं (उदा. उत्तरी अटलांटिक प्रवाह पश्चिमी यूरोप को गर्म करता है)।
📝 संक्षिप्त नोट्स: महासागरीय तापमान वितरण और पवन प्रतिरूप
| क्षेत्र | प्रचलित पवन | पवन दिशा | गर्म महासागरीय भाग | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (0°-30°) | व्यापारिक पवनें | पूर्व से पश्चिम | पश्चिमी भाग अधिक गर्म | गर्म पश्चिमी प्रशांत बनाम ठंडी पेरू धारा (पूर्वी प्रशांत) |
| शीतोष्ण क्षेत्र (30°-60°) | पछुआ पवनें | पश्चिम से पूर्व | पूर्वी भाग अधिक गर्म | गल्फ स्ट्रीम/उत्तरी अटलांटिक प्रवाह पश्चिमी यूरोप को गर्म करता है |
- व्यापारिक पवनों की क्रियाविधि: गर्म भूमध्यरेखीय जल को पश्चिम की ओर धकेलती हैं, जिससे पश्चिमी महासागरीय सीमाओं पर गर्म जल का संचय होता है और पूर्वी सीमाओं पर ठंडे जल का उत्प्लवन होता है
- पछुआ पवनों की क्रियाविधि: पश्चिम से पूर्व की ओर गर्म धाराओं को संचालित करती हैं, निम्न अक्षांशों से उच्च अक्षांशों की ओर पूर्वी महासागरीय किनारों पर ऊष्मा स्थानांतरित करती हैं
- पश्चिमी सीमांत धाराएं: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में (उदा. गल्फ स्ट्रीम, कुरोशियो) गर्म, संकीर्ण और तेज प्रवाही होती हैं
- पूर्वी सीमांत धाराएं: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में (उदा. कैलिफोर्निया धारा, पेरू धारा) ठंडी, चौड़ी और धीमी प्रवाही होती हैं
- जलवायु प्रभाव: ये प्रतिरूप तटीय जलवायु को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं, जिसमें पश्चिमी उष्णकटिबंधीय तट अधिक गर्म और आर्द्र होते हैं, जबकि पूर्वी उष्णकटिबंधीय तट अधिक ठंडे और शुष्क होते हैं
भूमध्यरेखीय प्रति-धारा के पूर्व दिशा में बहने की व्याख्या क्या है?
Detailed Explanation:
उत्तरी और दक्षिणी भूमध्यरेखीय धाराएं व्यापारिक पवनों के कारण पश्चिम की ओर बहती हैं, जिससे महासागर द्रोणियों के पश्चिमी किनारों पर पानी जमा हो जाता है और पश्चिम में समुद्र तल ऊंचा हो जाता है।
यह अभिसरण और पानी का संचय एक दबाव प्रवणता उत्पन्न करता है जो भूमध्यरेखीय प्रति-धारा को डोलड्रम्स क्षेत्र (जहां सतही पवनें कमज़ोर हैं) में दोनों भूमध्यरेखीय धाराओं के बीच पूर्व दिशा में बहने के लिए प्रेरित करता है, जो समुद्री संतुलन बहाल करता है।
विश्व के सबसे महत्वपूर्ण मत्स्य क्षेत्र उन प्रदेशों में पाए जाते हैं जहाँ:
Detailed Explanation:
विश्व के सबसे उत्पादक मत्स्य क्षेत्र वहाँ स्थित हैं जहाँ गर्म और ठंडी महासागरीय धाराएँ मिलती हैं। यह मिश्रण पोषक तत्वों से भरपूर जल और फाइटोप्लैंकटन वृद्धि के लिए आदर्श परिस्थितियाँ बनाता है, जो समुद्री खाद्य श्रृंखला का आधार है।
ग्रैंड बैंक्स (न्यूफाउंडलैंड): ठंडी लैब्राडोर धारा और गर्म गल्फ स्ट्रीम का मिलन, विश्व के सबसे समृद्ध मत्स्य क्षेत्रों में से एक।
उत्तर-पश्चिम प्रशांत (जापान): ठंडी ओयाशियो धारा और गर्म कुरोशियो धारा का मिलन, अत्यधिक उत्पादक मत्स्यन का समर्थन करता है।
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निम्नलिखित कारकों पर विचार कीजिए:
- पृथ्वी का घूर्णन
- वायु दाब और पवन
- महासागरीय जल का घनत्व
- पृथ्वी की परिक्रमा
उपर्युक्त में से कौन से कारक महासागरीय धाराओं को प्रभावित करते हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: पृथ्वी का घूर्णन कोरिओलिस प्रभाव उत्पन्न करता है, जो उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराओं को दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित करता है।
✅ कथन 2 – सही: वायु दाब और पवन महासागर की सतह पर घर्षण द्वारा पवन-प्रेरित धाराएँ उत्पन्न करते हैं; व्यापारिक पवनें और पछुआ पवनें जैसी प्रचलित पवनें प्रमुख सतही धाराओं को संचालित करती हैं।
✅ कथन 3 – सही: महासागरीय जल का घनत्व, जो तापमान और लवणता द्वारा निर्धारित होता है, तापलवणीय परिसंचरण (गहरी महासागरीय धाराएँ) को संचालित करता है।
❌ कथन 4 – गलत: पृथ्वी की परिक्रमा (सूर्य के चारों ओर कक्षा) मौसमी परिवर्तन लाती है लेकिन महासागरीय धाराओं को सीधे प्रभावित नहीं करती।
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