UPSC Prelims 2018 Question Paper
Explore the complete solved question paper for UPSC Prelims 2018 featuring 100 solved questions with bilingual (English & Hindi) explanations, official answer key, and subject weightage breakdown.
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें
- यह श्रम और रोजगार मंत्रालय की प्रमुख योजना है।
- यह अन्य बातों के अलावा, सॉफ्ट स्किल्स, उद्यमिता, वित्तीय और डिजिटल साक्षरता में भी प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
- इसका उद्देश्य देश के अनियमित कार्यबल की दक्षताओं को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के अनुरूप बनाना है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 3 — केवल 2 और 3
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) भारत सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजना है, जिसे कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) संचालित करता है। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाना है।
❌ कथन I – गलत: PMKVY श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की नहीं, बल्कि कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की प्रमुख योजना है।
✅ कथन II – सही: इस योजना में तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स, उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल साक्षरता का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
✅ कथन III – सही: योजना का एक प्रमुख उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के कौशल को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) के अनुरूप लाना है, ताकि उन्हें मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाणपत्र मिल सके।
एनएसएसओ के 70वें दौर के "कृषि परिवारों की स्थिति आकलन सर्वेक्षण" के अनुसार, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें
- राजस्थान में ग्रामीण परिवारों में कृषि परिवारों का प्रतिशत सबसे अधिक है।
- देश के कुल कृषक परिवारों में से 60 प्रतिशत से कुछ अधिक ओबीसी से संबंधित हैं।
- केरल में, 60 प्रतिशत से कुछ अधिक कृषि परिवारों ने कृषि गतिविधियों के अलावा अन्य स्रोतों से अधिकतम आय प्राप्त करने की सूचना दी है।
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 4 — केवल 1 और 3
NSSO के 70वें दौर के "कृषि परिवार स्थिति आकलन सर्वेक्षण (2013)" में कृषि परिवारों की आय, सामाजिक संरचना और आजीविका से जुड़ी जानकारी दी गई है। इसमें कथन I और III सही हैं, जबकि कथन II गलत है।
✅ कथन I – सही: सर्वेक्षण के अनुसार राजस्थान में ग्रामीण परिवारों में कृषि परिवारों का प्रतिशत सबसे अधिक (78.4%) था।
❌ कथन II – गलत: देश के कुल कृषि परिवारों में OBC परिवार लगभग 45% थे, 60% से अधिक नहीं।
✅ कथन III – सही: केरल में 60% से अधिक कृषि परिवारों की सबसे अधिक आय गैर-कृषि गतिविधियों से प्राप्त होती थी।
निम्नलिखित में से कौन सा भारत सरकार की "डिजिटल इंडिया" योजना का लक्ष्य/लक्ष्य है/हैं?
- चीन की तरह भारत की अपनी इंटरनेट कंपनियों का गठन।
- हमारी राष्ट्रीय भौगोलिक सीमाओं के भीतर अपने बड़े डेटा केंद्र बनाने के लिए बिग डेटा एकत्र करने वाले विदेशी बहुराष्ट्रीय निगमों को प्रोत्साहित करने के लिए एक नीति ढांचा स्थापित करें।
- हमारे कई गांवों को इंटरनेट से जोड़ें और हमारे कई स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख पर्यटन केंद्रों में वाई-फाई लाएं
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 2 — केवल 3
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम, जिसकी शुरुआत 1 जुलाई 2015 को हुई, का उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनाना है। इसका मुख्य फोकस डिजिटल आधारभूत ढाँचा, डिजिटल सेवाएँ और डिजिटल साक्षरता है।
❌ कथन I – गलत: चीन की तरह भारत की अपनी इंटरनेट कंपनियाँ बनाना डिजिटल इंडिया का उद्देश्य नहीं है।
❌ कथन II – गलत: मूल डिजिटल इंडिया योजना में विदेशी कंपनियों को भारत में बिग डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए विशेष नीति बनाने का उद्देश्य शामिल नहीं था।
✅ कथन III – सही: डिजिटल इंडिया का एक प्रमुख उद्देश्य गाँवों को ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़ना तथा स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और पर्यटन स्थलों पर Wi-Fi उपलब्ध कराना है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: डिजिटल इंडिया कार्यक्रम
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| शुरुआत | 1 जुलाई 2015 |
| मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) |
| दृष्टि | भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनाना |
| तीन प्रमुख लक्ष्य | डिजिटल अवसंरचना, मांग पर डिजिटल सेवाएँ, नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण |
| मुख्य स्तंभ | ब्रॉडबैंड हाईवे, सार्वजनिक इंटरनेट, ई-गवर्नेंस, ई-क्रांति, डिजिटल साक्षरता |
| ग्रामीण कनेक्टिविटी | भारतनेट के माध्यम से ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड |
| सार्वजनिक Wi-Fi | स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों और पर्यटन स्थलों पर Wi-Fi |
| प्रमुख पहलें | DigiLocker, UMANG, BHIM, e-Hospital, CSCs, डिजिटल भुगतान |
मुख्य तथ्य:
डिजिटल इंडिया का आधार डिजिटल अवसंरचना, डिजिटल सेवाएँ और डिजिटल सशक्तिकरण है, न कि भारतीय इंटरनेट कंपनियाँ स्थापित करना।
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अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के कन्वेंशन 138 और 182 किससे संबंधित हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 1 — बाल श्रम (Child Labour)
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने बाल श्रम समाप्त करने के लिए दो महत्वपूर्ण कन्वेंशन बनाए हैं। इनका उद्देश्य बच्चों के लिए न्यूनतम कार्य आयु तय करना और बाल श्रम के सबसे खराब रूपों को समाप्त करना है।
✅ कथन – ILO कन्वेंशन 138: इसे न्यूनतम आयु कन्वेंशन (1973) कहा जाता है। इसका उद्देश्य रोजगार के लिए न्यूनतम आयु निर्धारित करना और धीरे-धीरे बाल श्रम समाप्त करना है।
✅ कथन – ILO कन्वेंशन 182: इसे बाल श्रम के सबसे खराब रूपों पर कन्वेंशन (1999) कहा जाता है। इसका उद्देश्य दासता, मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी, बाल वेश्यावृत्ति और खतरनाक कार्यों में बच्चों की भागीदारी को तुरंत समाप्त करना है।
इसलिए सही उत्तर बाल श्रम है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ILO कन्वेंशन 138 और 182
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| संगठन | अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) |
| कन्वेंशन 138 | न्यूनतम आयु कन्वेंशन, 1973 |
| उद्देश्य | रोजगार के लिए न्यूनतम आयु निर्धारित करना |
| कन्वेंशन 182 | बाल श्रम के सबसे खराब रूपों पर कन्वेंशन, 1999 |
| उद्देश्य | दासता, तस्करी, बंधुआ मजदूरी और खतरनाक बाल श्रम का उन्मूलन |
| महत्व | दोनों ILO के मौलिक कन्वेंशन हैं |
| भारत द्वारा अनुमोदन | भारत ने 2017 में दोनों कन्वेंशनों का अनुमोदन किया |
| संबंधित भारतीय कानून | बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 (संशोधन 2016) |
मुख्य तथ्य:
भारत ने 2017 में ILO के कन्वेंशन 138 और 182 का अनुमोदन कर बाल श्रम उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया।
भारत के उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- पीएसएलवी पृथ्वी संसाधनों की निगरानी के लिए उपयोगी उपग्रहों को लॉन्च करते हैं जबकि जीएसएलवी को मुख्य रूप से संचार उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- पीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित उपग्रह पृथ्वी पर किसी विशेष स्थान से देखने पर आकाश में उसी स्थिति में स्थायी रूप से स्थिर दिखाई देते हैं।
- जीएसएलवी एमके III एक चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान है जिसमें पहले और तीसरे चरण में ठोस रॉकेट मोटर्स का उपयोग किया जाता है, और दूसरे और चौथे चरण में तरल रॉकेट इंजन का उपयोग किया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
यह प्रश्न PSLV और GSLV लॉन्च व्हीकल के उपयोग और उनकी विशेषताओं पर आधारित है।
✅ कथन 1 – सही: PSLV का उपयोग मुख्यतः पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) उपग्रहों को Polar/Sun-Synchronous Orbit में भेजने के लिए किया जाता है, जबकि GSLV का उपयोग संचार उपग्रहों को Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में स्थापित करने के लिए किया जाता है।
❌ कथन 2 – गलत: PSLV द्वारा छोड़े गए उपग्रह आकाश में एक ही स्थान पर स्थिर नहीं दिखाई देते। वे Polar/Sun-Synchronous Orbit में पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। केवल Geostationary उपग्रह ही एक स्थान पर स्थिर दिखाई देते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: GSLV Mk III (LVM3) चार-चरणीय नहीं, बल्कि तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान है। इसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन, एक लिक्विड स्टेज और एक क्रायोजेनिक अपर स्टेज होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: PSLV एवं GSLV
-
PSLV का उपयोग मुख्यतः Earth Observation और Sun-Synchronous Orbit (SSO) मिशनों के लिए किया जाता है।
-
GSLV का उपयोग संचार उपग्रहों को Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में भेजने के लिए किया जाता है।
-
LVM3 (पूर्व नाम GSLV Mk III) एक तीन-चरणीय भारी प्रक्षेपण यान है जिसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा होता है।
-
क्रायोजेनिक इंजन में Liquid Hydrogen (LH₂) और Liquid Oxygen (LOX) का उपयोग होता है।
-
PSLV को ISRO का "वर्कहॉर्स लॉन्च व्हीकल" कहा जाता है क्योंकि इसकी सफलता दर बहुत अधिक है।
-
LVM3 ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और OneWeb मिशनों का सफल प्रक्षेपण किया है।
-
Geostationary उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर दिखाई देते हैं, जबकि Polar उपग्रह लगातार पृथ्वी के ऊपर घूमते रहते हैं।
निम्नलिखित घटनाओं पर विचार करें:
- प्रकाश गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होता है।
- ब्रह्मांड लगातार विस्तार कर रहा है।
- पदार्थ अपने आस-पास के स्थान-समय को विकृत करता है।
उपरोक्त में से कौन सा अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत की भविष्यवाणी/भविष्यवाणियां है/हैं, जिसकी अक्सर मीडिया में चर्चा होती है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर 1, 2 और 3 (विकल्प 3) है। आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के अनुसार गुरुत्वाकर्षण प्रकाश को मोड़ सकता है, द्रव्य (Matter) अपने आसपास के स्पेस-टाइम को वक्र बना देता है, और इसी सिद्धांत से ब्रह्मांड के फैलने की संभावना भी सामने आई, जिसे बाद में प्रमाणित किया गया।
सामान्य सापेक्षता सिद्धांत (1915) के अनुसार गुरुत्वाकर्षण कोई बल नहीं, बल्कि द्रव्य और ऊर्जा द्वारा स्पेस-टाइम में पैदा हुई वक्रता है। इसी सिद्धांत से गुरुत्वीय लेंसिंग, ब्लैक होल, गुरुत्वीय तरंगें और फैलता हुआ ब्रह्मांड जैसी घटनाओं की भविष्यवाणी हुई।
हाल ही में समाचारों में उल्लिखित 'वाना क्राई, पेट्या और इटरनल ब्लू' शब्द किससे संबंधित हैं
Detailed Explanation:
सही उत्तर साइबर हमले (विकल्प 3) है। WannaCry और Petya ऐसे रैनसमवेयर हैं जो कंप्यूटर का डेटा स्थिर करके फिर उसे पैसे के लिए पैसे मांगते हैं। EternalBlue एक साइबर एक्सप्लॉइट था, जिसका उपयोग WannaCry हमलों को फैलाने के लिए किया गया था।
रैनसमवेयर एक प्रकार का मैलवेयर है, जो कंप्यूटर के स्वामित्व को लॉक या सुरक्षा प्रदान करता है और उन्हें वापस वर्चुअलाइजेशन के रूप में मांगता है। WannaCry (2017) दुनिया के सबसे बड़े साइबर हमले में एक और दावा किया गया था कि साइबर सुरक्षा के ढांचे को उजागर किया गया था।
कभी-कभी समाचारों में देखा जाने वाला "टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD)" क्या है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर अमेरिका की एंटी-मिसाइल प्रणाली (विकल्प 3) है। THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) अमेरिका द्वारा विकसित एक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जो कम, मध्यम और मध्यम-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को उनकी अंतिम उड़ान अवस्था में नष्ट करती है।
THAAD बैलिस्टिक मिसाइलों को पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों जगह रोकने में सक्षम है। यह अमेरिका की प्रमुख मिसाइल रक्षा प्रणाली है और दक्षिण कोरिया तथा सऊदी अरब जैसे देशों में भी तैनात की गई है।
निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
| शब्द कभी-कभी समाचारों में देखे जाते हैं | संदर्भ/विषय |
|---|---|
| 1. Belle II experiment | Artificial Intelligence |
| 2. Blockchain technology | Digital/Cryptocurrency |
| 3. CRISPR — Cas9 | Particle Physics |
ऊपर दी गई जोड़ियों में से कौन सी जोड़ी सही ढंग से सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर केवल 2 (विकल्प 2) है। Belle II एक कण भौतिकी (Particle Physics) प्रयोग है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित नहीं। Blockchain डिजिटल/क्रिप्टोकरेंसी की मुख्य तकनीक है। CRISPR-Cas9 एक जीन संपादन (Gene Editing) तकनीक है, कण भौतिकी से संबंधित नहीं।
Blockchain एक विकेंद्रीकृत डिजिटल लेजर तकनीक है, जिसमें लेन-देन सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से दर्ज किए जाते हैं। इसका सबसे प्रसिद्ध उपयोग Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी में होता है, लेकिन इसका उपयोग बैंकिंग, सप्लाई चेन और डिजिटल पहचान जैसे क्षेत्रों में भी किया जाता है।
निम्नलिखित पर विचार करें:
- पक्षी
- धूल उड़ना
- बारिश
- हवा चल रही है
उपरोक्त में से कौन पौधों की बीमारियाँ फैलाता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर 1, 2, 3 और 4 (विकल्प 4) है। पक्षी, धूल, वर्षा और हवा—सभी पौधों के रोग फैलाने में मदद करते हैं। ये फफूंद, बैक्टीरिया, वायरस या अन्य रोगजनकों को संक्रमित पौधों से स्वस्थ पौधों तक पहुंचाते हैं।
📗 अवधारणा:
पौधों के रोग विभिन्न वाहकों (Vectors) या फैलाव के माध्यमों से फैलते हैं। हवा और वर्षा फफूंद के बीजाणुओं तथा बैक्टीरिया को फैलाते हैं, जबकि पक्षी अपने पंखों, पैरों या मल के माध्यम से रोगजनकों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं।
निम्नलिखित में से किन क्षेत्रों में GPS तकनीक का उपयोग किया जा सकता है?
- मोबाइल फोन संचालन
- बैंकिंग संचालन
- पावर ग्रिड को नियंत्रित करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणाली है जो सटीक भू-स्थान और समय की जानकारी प्रदान करती है, जो इसे केवल नेविगेशन से परे विविध अनुप्रयोगों में उपयोगी बनाती है।
✅ कथन 1 – सही: GPS मोबाइल फोन संचालन के लिए स्थान ट्रैकिंग, नेविगेशन ऐप्स और राइड-हेलिंग और फूड डिलीवरी जैसी स्थान-आधारित सेवाओं के लिए अभिन्न है।
✅ कथन 2 – सही: GPS बैंकिंग लेनदेन के लिए सटीक समय-मुद्रांकन प्रदान करता है, जो बैंकिंग नेटवर्क में सटीक रिकॉर्ड-कीपिंग और समन्वयन सुनिश्चित करता है, और ATM स्थान सेवाओं को सक्षम बनाता है।
✅ कथन 3 – सही: GPS माप के लिए सटीक समय मुद्रांक प्रदान करके पावर ग्रिड संचालन को समन्वयित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो ग्रिड स्थिरता और ब्लैकआउट को रोकने के लिए आवश्यक है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: GPS तकनीक के अनुप्रयोग
- GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम): अमेरिकी सरकार के स्वामित्व वाली एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणाली, जिसमें पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले 24+ उपग्रह शामिल हैं।
- प्राथमिक कार्य: पृथ्वी पर कहीं भी GPS रिसीवर को भू-स्थान (अक्षांश, देशांतर, ऊंचाई) और सटीक समय की जानकारी प्रदान करता है।
- समय अनुप्रयोग: GPS उपग्रह परमाणु घड़ियां ले जाते हैं जो नैनोसेकंड-स्तर की समय सटीकता प्रदान करती हैं, जो दूरसंचार, बैंकिंग, पावर ग्रिड और स्टॉक मार्केट के लिए महत्वपूर्ण है।
- नेविगेशन उपयोग: विमानन, समुद्री, वाहन नेविगेशन, सर्वेक्षण, मानचित्रण और सैन्य अभियान।
- स्थान-आधारित सेवाएं: मोबाइल ऐप, आपातकालीन सेवाएं (911/112), संपत्ति ट्रैकिंग, कृषि (सटीक खेती), और मौसम पूर्वानुमान।
- अन्य वैश्विक प्रणालियां: GLONASS (रूस), Galileo (यूरोपीय संघ), BeiDou (चीन), और NavIC/IRNSS (भारत की क्षेत्रीय प्रणाली)।
भारत में विकसित आनुवंशिक रूप से संशोधित सरसों (GM सरसों) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- GM सरसों में एक मृदा जीवाणु के जीन होते हैं जो पौधे को कीटों की एक विस्तृत विविधता के प्रति कीट-प्रतिरोध का गुण प्रदान करते हैं।
- GM सरसों में ऐसे जीन होते हैं जो पौधे को पर-परागण और संकरण की अनुमति देते हैं।
- GM सरसों को IARI और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
GM सरसों (DMH-11) ब्रैसिका जुन्सिया की एक आनुवंशिक रूप से संशोधित संकर किस्म है जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स द्वारा विकसित किया गया है। इसे बार्नेज-बारस्टार जीनों के साथ पर-परागण और संकरण को सक्षम बनाने के लिए इंजीनियर किया गया है ताकि उपज बढ़ाई जा सके, कीट-प्रतिरोध के लिए नहीं।
❌ कथन 1 – गलत: GM सरसों में कीट-प्रतिरोध के लिए जीन नहीं होते हैं; इसे मृदा जीवाणु के Bt जीनों के बजाय बार्नेज-बारस्टार जीन प्रणाली का उपयोग करके संकरण के लिए इंजीनियर किया गया है।
✅ कथन 2 – सही: GM सरसों में जीन (बार्नेज, बारस्टार, और बार जीन) होते हैं जो पर-परागण और संकरण को सुगम बनाते हैं, जिससे संकर बीज उत्पादन संभव होता है।
❌ कथन 3 – गलत: GM सरसों को दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स (CGMCP) द्वारा विकसित किया गया था, न कि IARI और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से।
📝 संक्षिप्त नोट्स: GM सरसों (DMH-11)
- पूरा नाम: धारा मस्टर्ड हाइब्रिड-11 (DMH-11), ब्रैसिका जुन्सिया की एक आनुवंशिक रूप से संशोधित किस्म।
- विकासकर्ता: सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स (CGMCP), दिल्ली विश्वविद्यालय, प्रो. दीपक पेंटल के नेतृत्व में।
- आनुवंशिक संशोधन: नर बंध्यता और प्रजनन क्षमता बहाली के लिए मृदा जीवाणु Bacillus amyloliquefaciens से लिए गए बार्नेज-बारस्टार जीन प्रणाली का उपयोग करता है।
- उद्देश्य: स्वाभाविक रूप से स्व-परागित सरसों में पर-परागण को सक्षम बनाकर उच्च उपज देने वाले संकर उत्पन्न करना; उपज में 25-30% की वृद्धि।
- प्रमुख जीन: बार जीन (शाकनाशी सहिष्णुता), बार्नेज जीन (नर बंध्यता), बारस्टार जीन (प्रजनन क्षमता बहाली)।
- Bt फसल नहीं: Bt कपास/बैंगन के विपरीत, GM सरसों में कीट-प्रतिरोध गुण नहीं हैं; यह विशुद्ध रूप से संकर विकास के लिए है।
- नियामक स्थिति: 2017 में GEAC (आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति) द्वारा अनुमोदित लेकिन सार्वजनिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
"3D प्रिंटिंग" का निम्नलिखित में से किसमें अनुप्रयोग है?
- मिठाई की वस्तुओं की तैयारी
- बायोनिक कानों का निर्माण
- ऑटोमोटिव उद्योग
- पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा
- डेटा प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियाँ
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2, 3, 4 और 5
3D प्रिंटिंग (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) ने डिजिटल फाइलों से जटिल त्रि-आयामी वस्तुओं के निर्माण को सक्षम बनाकर कई उद्योगों में क्रांति ला दी है। उल्लिखित सभी पाँच अनुप्रयोग—मिठाई की वस्तुएँ, बायोनिक कान, ऑटोमोटिव पार्ट्स, पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा प्रत्यारोपण, और डेटा प्रसंस्करण हार्डवेयर के लिए विशेष घटक—3D प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी के सुप्रलेखित उपयोग हैं।
✅ कथन 1 – सही: 3D प्रिंटिंग का उपयोग खाद्य उद्योग में सटीक डिज़ाइन के साथ चॉकलेट और कैंडी जैसी जटिल और अनुकूलित मिठाई की वस्तुओं को बनाने के लिए किया जाता है।
✅ कथन 2 – सही: शोधकर्ताओं ने श्रवण दोष वाले लोगों के लिए एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ बायोनिक कान बनाने के लिए 3D प्रिंटिंग का सफलतापूर्वक उपयोग किया है।
✅ कथन 3 – सही: ऑटोमोटिव उद्योग तीव्र प्रोटोटाइपिंग, कस्टम पार्ट्स निर्माण और वाहन घटकों के उत्पादन के लिए व्यापक रूप से 3D प्रिंटिंग का उपयोग करता है।
✅ कथन 4 – सही: 3D प्रिंटिंग का व्यापक रूप से पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा में रोगी-विशिष्ट प्रत्यारोपण, कृत्रिम अंग और व्यक्तिगत शरीर रचना के अनुरूप शल्य चिकित्सा मार्गदर्शिकाएँ बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
✅ कथन 5 – सही: 3D प्रिंटिंग का उपयोग डेटा प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों और कंप्यूटर सिस्टम के लिए विशेष घटकों और हार्डवेयर पार्ट्स के निर्माण के लिए किया जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: 3D प्रिंटिंग (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग)
- परिभाषा: 3D प्रिंटिंग डिजिटल फाइल से परत-दर-परत सामग्री जोड़कर त्रि-आयामी ठोस वस्तुओं को बनाने की प्रक्रिया है, इसलिए इसे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग कहा जाता है।
- बुनियादी प्रक्रिया: इसमें डिजिटल मॉडल बनाने के लिए कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन (CAD) सॉफ्टवेयर शामिल है, जिसे फिर पतली परतों में काटा जाता है और प्लास्टिक, धातु, सिरेमिक या यहां तक कि जैविक सामग्री जैसी विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करके प्रिंट किया जाता है।
- चिकित्सा अनुप्रयोग: कस्टम कृत्रिम अंग, दंत प्रत्यारोपण, शल्य चिकित्सा उपकरण, शल्य चिकित्सा योजना के लिए शारीरिक मॉडल, बायो-प्रिंटेड ऊतक और अंग (प्रायोगिक चरण), और रोगी-विशिष्ट प्रत्यारोपण।
- औद्योगिक अनुप्रयोग: ऑटोमोटिव और एयरोस्पेस उद्योगों में तीव्र प्रोटोटाइपिंग, जटिल पार्ट्स का निर्माण, टूलिंग, और अंतिम-उपयोग घटकों का उत्पादन।
- उपभोक्ता अनुप्रयोग: अनुकूलित आभूषण, खिलौने, घरेलू वस्तुएँ, फैशन एक्सेसरीज़, और व्यक्तिगत उत्पाद।
- उभरते अनुप्रयोग: खाद्य प्रिंटिंग (चॉकलेट, पास्ता, पिज्जा), निर्माण (3D प्रिंटेड घर), बायोप्रिंटिंग (अंग और ऊतक), और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण।
- लाभ: डिज़ाइन लचीलापन, अपशिष्ट में कमी, अनुकूलन, तीव्र प्रोटोटाइपिंग, और पारंपरिक निर्माण से असंभव जटिल ज्यामिति बनाने की क्षमता।
भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- IRNSS के तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षा में और चार उपग्रह भूतुल्यकाली कक्षा में हैं।
- IRNSS संपूर्ण भारत और इसकी सीमाओं से लगभग 5500 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र को कवर करता है।
- भारत की 2019 के मध्य तक पूर्ण वैश्विक कवरेज के साथ अपनी स्वयं की उपग्रह नौवहन प्रणाली होगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
IRNSS (भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली), जिसे NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) के नाम से भी जाना जाता है, भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है। तीन कथनों में से केवल पहला कथन IRNSS के उपग्रह विन्यास का सही वर्णन करता है।
✅ कथन 1 – सही: IRNSS के तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षाओं में (भूमध्य रेखा के ऊपर निश्चित बिंदुओं पर स्थित) और चार उपग्रह भूतुल्यकाली कक्षाओं में (लगभग 29° झुकाव पर आनत भूतुल्यकाली कक्षाएँ) हैं।
❌ कथन 2 – गलत: IRNSS संपूर्ण भारत को कवर करता है और इसकी सीमाओं से लगभग 1500 किमी तक विस्तृत है (प्राथमिक सेवा क्षेत्र), न कि 5500 वर्ग किमी। विस्तारित सेवा क्षेत्र 30°दक्षिण से 50°उत्तर अक्षांश और 30°पूर्व से 130°पूर्व देशांतर तक एक बहुत बड़े क्षेत्र को कवर करता है।
❌ कथन 3 – गलत: IRNSS/NavIC एक क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली है, वैश्विक नौवहन प्रणाली नहीं। यह केवल भारत और आसपास के क्षेत्रों पर कवरेज प्रदान करता है। भारत के पास 2019 तक या वर्तमान में पूर्ण वैश्विक कवरेज के साथ कोई उपग्रह नौवहन प्रणाली नहीं है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: IRNSS/NavIC
- पूर्ण नाम: भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS), परिचालन नाम NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन)
- नक्षत्रमंडल: कुल 7 उपग्रह - 3 भूस्थिर कक्षा (GEO) में और 4 भूतुल्यकाली कक्षा (GSO) में
- प्राथमिक सेवा क्षेत्र: भारत और इसकी सीमा से 1500 किमी तक विस्तृत क्षेत्र
- विस्तारित सेवा क्षेत्र: 30°दक्षिण से 50°उत्तर अक्षांश और 30°पूर्व से 130°पूर्व देशांतर के बीच का क्षेत्र
- परिचालन शुरू: 2018 (सभी 7 उपग्रह परिचालनात्मक हो गए)
- अनुप्रयोग: स्थलीय, हवाई और समुद्री नौवहन, आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग, बेड़ा प्रबंधन, मोबाइल फोन के साथ एकीकरण, सटीक समय, मानचित्रण और भूगणितीय डेटा संग्रहण
- प्रशासित द्वारा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- भूमि खंड: हासन और भोपाल में IRNSS अंतरिक्ष यान नियंत्रण सुविधा (IRSCF), कई स्थानों पर IRNSS रेंज और अखंडता निगरानी स्टेशन (IRIMS), और नौवहन नियंत्रण केंद्र
जब सुबह आपके स्मार्टफोन का अलार्म बजता है, तो आप जाग जाते हैं और इसे बंद करने के लिए टैप करते हैं जिससे आपका गीजर स्वचालित रूप से चालू हो जाता है। आपके बाथरूम में स्मार्ट मिरर दिन के मौसम को दिखाता है और आपके ओवरहेड टैंक में पानी के स्तर को भी इंगित करता है। जब आप नाश्ता बनाने के लिए अपने रेफ्रिजरेटर से कुछ किराने का सामान लेते हैं, तो यह इसमें स्टॉक की कमी को पहचानता है और ताजा किराने की वस्तुओं की आपूर्ति के लिए ऑर्डर देता है। जब आप अपने घर से बाहर निकलते हैं और दरवाजा बंद करते हैं, तो सभी लाइट, पंखे, गीजर और एसी मशीनें स्वचालित रूप से बंद हो जाती हैं। कार्यालय के रास्ते में, आपकी कार आपको आगे यातायात की भीड़ के बारे में चेतावनी देती है और एक वैकल्पिक मार्ग सुझाती है, और यदि आप किसी बैठक के लिए देर से हैं, तो यह आपके कार्यालय को तदनुसार संदेश भेजती है। उभरती संचार प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा शब्द उपरोक्त परिदृश्य पर सबसे अच्छा लागू होता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — इंटरनेट ऑफ थिंग्स
यह परिदृश्य एक परस्पर जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र का वर्णन करता है जहां रोजमर्रा के उपकरण (स्मार्टफोन, गीजर, स्मार्ट मिरर, रेफ्रिजरेटर, कार, आदि) स्वायत्त रूप से एक-दूसरे के साथ संचार करते हैं, नेटवर्क पर डेटा का आदान-प्रदान करते हैं, और प्रत्यक्ष मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना ट्रिगर्स के आधार पर स्वचालित कार्य करते हैं। यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) की परिभाषित विशेषता है, जो सेंसर, सॉफ्टवेयर और नेटवर्क कनेक्टिविटी से युक्त भौतिक वस्तुओं को डेटा एकत्र करने और आदान-प्रदान करने के लिए जोड़ती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
❌ विकल्प 1 – बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल: BGP एक राउटिंग प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग इंटरनेट पर स्वायत्त प्रणालियों के बीच राउटिंग जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए किया जाता है; यह उपकरण अंतर-संचार से संबंधित नहीं है।
❌ विकल्प 3 – इंटरनेट प्रोटोकॉल: IP नेटवर्क पर पैकेट को संबोधित करने और रूट करने के लिए एक मूलभूत प्रोटोकॉल है, लेकिन वर्णित बुद्धिमान उपकरण-से-उपकरण संचार को शामिल नहीं करता है।
❌ विकल्प 4 – वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क: VPN सार्वजनिक नेटवर्क पर सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाने के लिए एक तकनीक है, न कि स्मार्ट उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करने के लिए।
📝 संक्षिप्त नोट्स: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
- परिभाषा: IoT सेंसर, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी से युक्त भौतिक वस्तुओं का एक नेटवर्क है जो उन्हें स्वायत्त रूप से डेटा एकत्र करने, आदान-प्रदान करने और कार्य करने में सक्षम बनाता है।
- प्रमुख घटक: सेंसर/उपकरण, कनेक्टिविटी (वाई-फाई, ब्लूटूथ, सेल्युलर), डेटा प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म, और उपयोगकर्ता इंटरफेस।
- अनुप्रयोग: स्मार्ट होम (स्वचालित प्रकाश व्यवस्था, थर्मोस्टैट्स), स्मार्ट सिटी (यातायात प्रबंधन, कचरा प्रबंधन), स्वास्थ्य सेवा (पहनने योग्य स्वास्थ्य मॉनिटर), कृषि (सटीक खेती), और औद्योगिक स्वचालन।
- लाभ: बढ़ी हुई दक्षता, रीयल-टाइम निगरानी, भविष्य कहनेवाला रखरखाव, ऊर्जा संरक्षण, और उन्नत उपयोगकर्ता सुविधा।
- चुनौतियां: सुरक्षा कमजोरियां, गोपनीयता संबंधी चिंताएं, विभिन्न उपकरणों/मानकों के बीच अंतर-संचालनीयता मुद्दे, और डेटा प्रबंधन जटिलता।
- भारत में उदाहरण: स्मार्ट सिटी मिशन, सटीक कृषि पहल, कनेक्टेड वाहन, और बिजली वितरण के लिए स्मार्ट ग्रिड परियोजनाएं।
पहचान मंच 'आधार' खुले "एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs)" प्रदान करता है। इसका क्या अर्थ है?
- इसे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में एकीकृत किया जा सकता है।
- आईरिस का उपयोग करके ऑनलाइन प्रमाणीकरण संभव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
आधार के लिए खुले एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs) की उपलब्धता डेवलपर्स और संगठनों को विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अनुप्रयोगों में आधार-आधारित प्रमाणीकरण और सत्यापन सेवाओं को एकीकृत करने में सक्षम बनाती है। यह वास्तुकला डिजाइन प्लेटफार्मों में निर्बाध एकीकरण की अनुमति देता है और बायोमेट्रिक सत्यापन सहित कई प्रमाणीकरण विधियों का समर्थन करता है।
✅ कथन 1 – सही: खुले APIs आधार को किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे स्मार्टफोन, टैबलेट, प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) टर्मिनलों और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों में एकीकृत करने की अनुमति देते हैं, जिससे डेवलपर्स आधार-सक्षम अनुप्रयोग बना सकते हैं।
✅ कथन 2 – सही: आधार की बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली आईरिस स्कैन (फिंगरप्रिंट्स और चेहरे की पहचान के साथ) का उपयोग करके ऑनलाइन प्रमाणीकरण का समर्थन करती है, जो उपलब्ध APIs के माध्यम से सुरक्षित पहचान सत्यापन को संभव बनाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: आधार और APIs
- आधार: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा के आधार पर सभी भारतीय निवासियों को जारी किया गया 12 अंकों का अद्वितीय पहचान नंबर।
- खुले APIs: एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस जो तीसरे पक्ष के डेवलपर्स को स्वामित्व की आवश्यकता के बिना अपने अनुप्रयोगों और उपकरणों में आधार सेवाओं को एकीकृत करने की अनुमति देते हैं।
- प्रमाणीकरण विधियाँ: आधार जनसांख्यिकीय (नाम, आयु, पता), वन-टाइम पासवर्ड (OTP), और बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट, आईरिस, चेहरे की पहचान) सहित कई प्रमाणीकरण मोड का समर्थन करता है।
- e-KYC सेवाएँ: आधार APIs बैंकिंग, टेलीकॉम और अन्य क्षेत्रों में तत्काल सत्यापन के लिए इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (e-KYC) सेवाओं को सक्षम बनाते हैं।
- एकीकरण क्षमताएँ: APIs मोबाइल ऐप्स, वेब पोर्टल्स, ATMs, PoS उपकरणों और IoT-सक्षम उपकरणों सहित विविध प्लेटफार्मों में एकीकरण की सुविधा प्रदान करते हैं।
- सुरक्षा विशेषताएँ: सभी API लेनदेन एन्क्रिप्टेड हैं और उपयोगकर्ता गोपनीयता की रक्षा और अनधिकृत पहुँच को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हैं।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन लॉर्ड वेलेजली द्वारा प्रस्तुत सहायक संधि (Subsidiary Alliance) की प्रणाली पर लागू नहीं होता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — कंपनी के लिए एक निश्चित आय सुरक्षित करना
सहायक संधि एक सैन्य-राजनीतिक प्रणाली थी जिसे लॉर्ड वेलेजली (1798–1805) ने प्रत्यक्ष भू-राजस्व प्रशासन के बजाय रणनीतिक गठबंधनों के माध्यम से भारतीय रियासतों पर ब्रिटिश नियंत्रण विस्तारित करने के लिए प्रस्तुत किया था। कंपनी के लिए एक निश्चित आय सुरक्षित करना लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा प्रस्तुत स्थायी बंदोबस्त (1793) जैसी भू-राजस्व प्रणालियों का प्राथमिक उद्देश्य था, न कि सहायक संधि का।
✅ विकल्प 1 – लागू होता है: भारतीय शासकों को अपने क्षेत्र में ब्रिटिश सेना बनाए रखनी होती थी और इसके लिए सब्सिडी देनी होती थी, जिससे कंपनी भारतीय राज्यों के खर्च पर एक बड़ी स्थायी सेना बनाए रख सकती थी।
❌ विकल्प 2 – लागू नहीं होता है: सहायक संधि सैन्य और राजनयिक नियंत्रण पर केंद्रित थी, न कि कंपनी के लिए निश्चित भू-राजस्व आय सुरक्षित करने पर।
✅ विकल्प 3 – लागू होता है: इस प्रणाली के तहत भारतीय शासकों को अपने क्षेत्रों से सभी फ्रांसीसी अधिकारियों और सैनिकों को निष्कासित करना होता था, जिससे यूरोपीय युद्धों के दौरान भारत को नेपोलियन के फ्रांसीसी प्रभाव से बचाया जा सके।
✅ विकल्प 4 – लागू होता है: बाहरी संबंधों, रक्षा को नियंत्रित करके और शाही दरबारों में ब्रिटिश रेजिडेंट तैनात करके, कंपनी ने भारतीय रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता स्थापित की।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सहायक संधि प्रणाली
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| प्रस्तुतकर्ता | लॉर्ड वेलेजली (गवर्नर-जनरल, 1798–1805) |
| प्राथमिक उद्देश्य | अप्रत्यक्ष सैन्य और राजनयिक साधनों के माध्यम से ब्रिटिश नियंत्रण का विस्तार |
| प्रमुख विशेषताएं | • भारतीय शासक को ब्रिटिश सैनिकों को रखना और सब्सिडी देनी होती थी • दरबार में ब्रिटिश रेजिडेंट तैनात किया जाता था • शासक गैर-ब्रिटिश यूरोपीय लोगों को नियुक्त नहीं कर सकता था • शासक ब्रिटिश अनुमोदन के बिना विदेशी संबंधों में संलग्न नहीं हो सकता था • ब्रिटिश बाहरी खतरों से सुरक्षा प्रदान करते थे |
| स्वीकार करने वाली पहली रियासत | हैदराबाद (1798) |
| गठबंधन के तहत प्रमुख रियासतें | हैदराबाद, मैसूर (1799 के बाद), अवध, पेशवा, भोंसले, सिंधिया, जोधपुर, जयपुर, माछेरी, बरार |
| प्रतिरोध करने वाली रियासतें | त्रावणकोर ने शुरू में प्रतिरोध किया लेकिन बाद में स्वीकार कर लिया |
| स्थायी बंदोबस्त से अंतर | सहायक संधि: सैन्य-राजनयिक नियंत्रण स्थायी बंदोबस्त: निश्चित आय के लिए भू-राजस्व प्रणाली |
आर्थिक रूप से, 19वीं शताब्दी में भारत में ब्रिटिश शासन के परिणामों में से एक था -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — भारतीय कृषि का व्यावसायीकरण
19वीं शताब्दी में भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक नीति ने जानबूझकर पारंपरिक निर्वाह कृषि को वाणिज्यिक कृषि में परिवर्तित कर दिया, जो नील, कपास, चाय और अफीम जैसी नकदी फसलों पर केंद्रित थी, ताकि ब्रिटिश उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में सेवा की जा सके। इस व्यावसायीकरण ने भारतीय कृषि को वैश्विक पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में एकीकृत करके ब्रिटिश साम्राज्य के आर्थिक हितों की सेवा की, जबकि साथ ही पारंपरिक हस्तशिल्प को नष्ट किया और भारत में औद्योगिक विकास को रोका।
❌ विकल्प 1 – गलत: ब्रिटिश नीतियों के कारण भारतीय हस्तशिल्प में भारी गिरावट आई जो मशीन-निर्मित वस्तुओं का पक्ष लेती थी, जिससे निर्यात में कमी आई।
❌ विकल्प 2 – गलत: 19वीं शताब्दी में भारतीय स्वामित्व वाले कारखानों में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई; ब्रिटिश नीतियों ने भारतीय औद्योगीकरण को सक्रिय रूप से हतोत्साहित किया।
✅ विकल्प 3 – सही: कृषि का व्यावसायीकरण कच्चे माल निकालने के लिए ब्रिटिश औपनिवेशिक शोषण का प्रत्यक्ष परिणाम था।
❌ विकल्प 4 – गलत: 19वीं शताब्दी में भारत में तेजी से शहरी विकास के बजाय विऔद्योगीकरण और ग्रामीणीकरण देखा गया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन का आर्थिक प्रभाव
| पहलू | प्रभाव |
|---|---|
| कृषि का व्यावसायीकरण | खाद्य फसलों से नकदी फसलों (नील, कपास, चाय, अफीम) में बदलाव; किसानों को वाणिज्यिक फसलें उगाने के लिए मजबूर किया गया; भूमि राजस्व की मांग में वृद्धि; अकालों के प्रति संवेदनशीलता पैदा की |
| विऔद्योगीकरण | पारंपरिक हस्तशिल्प और कारीगर उद्योगों का विनाश; भारतीय वस्त्रों को ब्रिटिश मशीन-निर्मित वस्तुओं द्वारा प्रतिस्थापित किया गया; कारीगरों ने अपनी आजीविका खो दी |
| धन का निष्कासन | भारत से ब्रिटेन में संसाधनों का व्यवस्थित स्थानांतरण; संबंधित आयात के बिना निर्यात अधिशेष; गृह शुल्क और श्रद्धांजलि भुगतान |
| भूमि राजस्व प्रणालियाँ | स्थायी बंदोबस्त (1793), रैयतवाड़ी, महलवाड़ी प्रणालियाँ; उच्च राजस्व मांगों के कारण किसानों का कर्ज बढ़ा; साहूकारों और अनुपस्थित जमींदारी का विकास |
| बुनियादी ढांचे का विकास | रेलवे मुख्य रूप से कच्चे माल निष्कर्षण और सैनिकों की आवाजाही के लिए बनाई गई; सीमित औद्योगिक विकास; निर्यात व्यापार के लिए बंदरगाहों का विकास |
निम्नलिखित में से किसने भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत की?
- 1813 का चार्टर अधिनियम
- लोक शिक्षा की सामान्य समिति, 1823
- प्राच्यवादी और आंग्लवादी विवाद
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — 1, 2 और 3
तीनों कारकों ने भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1813 के चार्टर अधिनियम ने वित्तीय आधार प्रदान किया, लोक शिक्षा की सामान्य समिति (1823) शैक्षिक नीति को लागू करने के लिए स्थापित की गई, और प्राच्यवादी-आंग्लवादी विवाद अंततः मैकाले के विवरण (1835) के माध्यम से अंग्रेजी शिक्षा के पक्ष में हल हुआ।
✅ कथन 1 – सही: 1813 का चार्टर अधिनियम भारत में शिक्षा और आधुनिक विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपये स्वीकृत करने वाला पहला आधिकारिक उपाय था, जिसने ब्रिटिश शैक्षिक हस्तक्षेप की वित्तीय नींव रखी।
✅ कथन 2 – सही: लोक शिक्षा की सामान्य समिति 1823 में 1813 के शैक्षिक अनुदान को लागू करने और भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की शैक्षिक नीति का मार्गदर्शन करने के लिए स्थापित की गई थी।
✅ कथन 3 – सही: पारंपरिक भारतीय शिक्षा और पश्चिमी शिक्षा के समर्थकों के बीच प्राच्यवादी-आंग्लवादी विवाद लॉर्ड मैकाले के विवरण (1835) में समाप्त हुआ, जिसने अंग्रेजी को शिक्षा के माध्यम के रूप में स्थापित किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत
| वर्ष/घटना | महत्व |
|---|---|
| 1813 का चार्टर अधिनियम | भारत में शिक्षा और आधुनिक विज्ञान के लिए प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये की पहली आधिकारिक स्वीकृति; भारतीय शिक्षा में राज्य की भागीदारी की शुरुआत |
| लोक शिक्षा की सामान्य समिति (1823) | 1813 के अनुदान को लागू करने के लिए स्थापित; शैक्षिक नीति पर प्राच्यवादी-आंग्लवादी बहस का मंच बना |
| प्राच्यवादी-आंग्लवादी विवाद | प्राच्यवादी (एच.एच. विल्सन, एच.टी. प्रिन्सेप) संस्कृत/अरबी शिक्षा के पक्षधर थे; आंग्लवादी (मैकाले, बेंटिक) अंग्रेजी में पश्चिमी शिक्षा के पक्षधर थे |
| मैकाले का विवरण (1835) | अंग्रेजी शिक्षा के पक्ष में विवाद का समाधान; "रक्त और रंग में भारतीय, लेकिन रुचि, विचार और बुद्धि में अंग्रेज" वर्ग बनाने की वकालत की |
| लॉर्ड बेंटिक का संकल्प (1835) | आधिकारिक रूप से अंग्रेजी को शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाया और इसे प्रशासन की भाषा बनाया |
निम्नलिखित में से कौन 1948 में स्थापित "हिन्द मजदूर सभा" के संस्थापक थे?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — अशोक मेहता, टी.एस. रामानुजम और जी.जी. मेहता
हिन्द मजदूर सभा (HMS) की स्थापना 1948 में समाजवादियों, फॉरवर्ड ब्लॉक अनुयायियों और स्वतंत्र ट्रेड यूनियनवादियों के एक समूह द्वारा की गई थी। प्रमुख संस्थापकों में अशोक मेहता (जो पहले महासचिव बने), टी.एस. रामानुजम और जी.जी. मेहता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे विकल्प 4 सही उत्तर है। आर.एस. रुइकर को HMS के पहले अध्यक्ष के रूप में चुना गया था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: हिन्द मजदूर सभा (HMS)
- स्थापना वर्ष: 1948
- संस्थापक: समाजवादियों, फॉरवर्ड ब्लॉक अनुयायियों और स्वतंत्र यूनियनवादियों का समूह जिसमें बसावन सिंह (सिन्हा), अशोक मेहता, आर.एस. रुइकर, मणिबेन कारा, शिबनाथ बनर्जी, आर.ए. खेड़गीकर, टी.एस. रामानुजम, वी.एस. माथुर और जी.जी. मेहता शामिल थे
- प्रथम अध्यक्ष: आर.एस. रुइकर
- प्रथम महासचिव: अशोक मेहता
- विचारधारा: लोकतांत्रिक समाजवाद और गैर-साम्यवादी ट्रेड यूनियनवाद
- संबद्धता: प्रारंभ में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) से जुड़ी, बाद में स्वतंत्रता बनाए रखी
- महत्व: भारत में प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों में से एक, जो श्रमिकों के अधिकारों और कल्याण का प्रतिनिधित्व करता है
UPSC Prelims 2018 Questions Paper - Subject-wise Question Distribution
भारतीय अर्थव्यवस्था
18 Qs (18%)भारतीय राजव्यवस्था
15 Qs (15%)पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
14 Qs (14%)आधुनिक इतिहास
13 Qs (13%)विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
12 Qs (12%)अंतरराष्ट्रीय संबंध
8 Qs (8%)भारतीय कला और संस्कृति
7 Qs (7%)भारत का भूगोल
4 Qs (4%)विश्व भूगोल
4 Qs (4%)समसामयिकी
4 Qs (4%)मध्यकालीन इतिहास
1 Qs (1%)UPSC Prelims 2018 Question Paper - FAQs & Analysis
Q1 How many total questions were asked in UPSC Prelims 2018?
Q2 What is the subject-wise question breakdown for UPSC Prelims 2018?
- भारतीय अर्थव्यवस्था: 18 questions (18%)
- भारतीय राजव्यवस्था: 15 questions (15%)
- पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी: 14 questions (14%)
- आधुनिक इतिहास: 13 questions (13%)
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: 12 questions (12%)
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: 8 questions (8%)
- भारतीय कला और संस्कृति: 7 questions (7%)
- भारत का भूगोल: 4 questions (4%)
- विश्व भूगोल: 4 questions (4%)
- समसामयिकी: 4 questions (4%)
- मध्यकालीन इतिहास: 1 questions (1%)